📍नई दिल्ली | 2 Apr, 2026, 11:37 AM
India defence exports 2026: वित्तीय वर्ष 2025-26 भारतीय डिफेंस सेक्टर के लिए शानदार साबित हुआ है। एक तरफ जहां देश का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, वहीं दूसरी तरफ रक्षा मंत्रालय ने अपने पूंजीगत बजट का लगभग पूरा इस्तेमाल भी कर लिया है।
India defence exports 2026: रक्षा निर्यात ने बनाया नया रिकॉर्ड
वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। पिछले साल यह आंकड़ा 23,622 करोड़ रुपये था। यानी एक ही साल में करीब 62.66 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रकम के हिसाब से देखें तो लगभग 14,800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निर्यात हुआ है।
इस बढ़ोतरी में सरकारी और निजी दोनों सेक्टर की अहम भूमिका रही है। रक्षा सार्वजनिक उपक्रम यानी डीपीएसयू ने कुल निर्यात में करीब 54.84 प्रतिशत योगदान दिया, जबकि निजी कंपनियों की हिस्सेदारी 45.16 प्रतिशत रही।
सरकारी कंपनियों का निर्यात खास तौर पर तेजी से बढ़ा है। डीपीएसयू का निर्यात पिछले साल के मुकाबले 151 प्रतिशत बढ़ गया, जबकि निजी कंपनियों ने भी करीब 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।
अगर रकम की बात करें तो निजी कंपनियों ने करीब 17,353 करोड़ रुपये का निर्यात किया, जबकि डीपीएसयू का योगदान 21,071 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल यह आंकड़ा काफी कम था, जिससे साफ है कि इस बार बड़ी छलांग लगी है। (India defence exports 2026)
80 से ज्यादा देशों को हुआ निर्यात
भारत अब सिर्फ अपने लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों के लिए भी रक्षा उपकरण बना रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत अब 80 से ज्यादा देशों को रक्षा सामान निर्यात कर रहा है।
इनमें अलग-अलग तरह के सिस्टम, सब-सिस्टम, पार्ट्स और उपकरण शामिल हैं। सिर्फ निर्यात ही नहीं, बल्कि निर्यात करने वाली कंपनियों की संख्या भी बढ़ी है। पिछले साल जहां 128 एक्सपोर्टर थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 145 हो गई है। यानी करीब 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। (India defence exports 2026)
पांच साल में तीन गुना बढ़ा निर्यात
अगर पिछले पांच साल का आंकड़ा देखें तो भारत का रक्षा निर्यात करीब तीन गुना तक बढ़ चुका है। यह बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई, बल्कि लगातार किए गए प्रयासों का नतीजा है। सरकार ने रक्षा निर्यात से जुड़े नियमों को आसान बनाया है, ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू की है और कंपनियों को ज्यादा मौके दिए हैं। इसके चलते अब भारतीय रक्षा उद्योग अब ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा बनता जा रहा है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि भारत अब धीरे-धीरे एक ग्लोबल डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह सफलता देश की नीतियों और उद्योगों के संयुक्त प्रयास का परिणाम है। (India defence exports 2026)
Under the inspiring leadership of PM Shri @narendramodi, India is scripting an impressive defence exports success story!
India defence exports have touched a new all time high with a record ₹38,424 crore in FY 2025-26. It marks a robust 62.66% growth over the previous fiscal.… pic.twitter.com/eAAh1PYX7e
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) April 2, 2026
रक्षा मंत्रालय ने पूरा किया पूंजीगत बजट
डिफेंस एक्सपोर्ट बढ़ने के साथ रक्षा मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में अपने पूंजीगत बजट का पूरा इस्तेमाल कर लिया है। इस साल डिफेंस सर्विसेज के लिए करीब 1.86 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत बजट रखा गया था, जिसे पूरी तरह खर्च कर दिया गया।
यह लगातार दूसरा साल है जब मंत्रालय ने पूरा बजट उपयोग किया है। कुल मिलाकर रक्षा मंत्रालय का कुल बजट उपयोग करीब 99.62 प्रतिशत रहा। (India defence exports 2026)
किन चीजों पर हुआ सबसे ज्यादा खर्च
इस बजट का बड़ा हिस्सा सेना के आधुनिकीकरण पर खर्च किया गया। इसमें खास तौर पर शामिल हैं: हवाई प्लेटफॉर्म जैसे एयरक्राफ्ट और एयरो इंजन पर सबसे ज्यादा खर्च हुआ। इसके बाद जमीन से जुड़े सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर उपकरण, हथियार, जहाज निर्माण और एविएशन स्टोर्स पर भी बड़ा निवेश किया गया।
इन खर्चों का मकसद सेना की ऑपरेशनल क्षमता को बेहतर बनाना और आधुनिक तकनीक को शामिल करना रहा। (India defence exports 2026)
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी जरूरत
बजट में बढ़ोतरी का एक कारण हाल के ऑपरेशन भी रहे हैं। खास तौर पर ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त फंड दिया गया। पहले पूंजीगत खर्च के लिए 1.80 लाख करोड़ रुपये तय किए गए थे, जिसे बाद में बढ़ाकर 1.86 लाख करोड़ रुपये किया गया।
बड़े स्तर पर हुई रक्षा खरीद
इस साल रक्षा मंत्रालय ने बड़ी संख्या में नई परियोजनाओं को मंजूरी दी। कुल 109 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनकी कुल कीमत करीब 6.81 लाख करोड़ रुपये है। इसके अलावा 503 डिफेंस प्रोक्योरमेंट कॉन्ट्रैक्ट साइन किए गए, जिनकी कुल कीमत 2.28 लाख करोड़ रुपये रही। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में काफी ज्यादा है। (India defence exports 2026)
सीमा क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी असर
रक्षा बजट का असर सिर्फ हथियारों तक सीमित नहीं है। इसका एक हिस्सा सीमा क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार पर भी खर्च किया गया। इससे सड़कों, बेस और अन्य सुविधाओं का विकास हुआ, जिससे सेना की तैनाती और संचालन आसान हो सके।
वहीं, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा मंत्रालय को पूंजीगत मद में करीब 2.19 लाख करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। यह पिछले साल के मुकाबले करीब 22 प्रतिशत ज्यादा है। (India defence exports 2026)

