📍नई दिल्ली | 13 Dec, 2025, 10:42 PM
HELINA missile production: दुश्मन के टैंकों और बख्तरबंद वाहनों के खिलाफ भारतीय सेना की मारक क्षमता को और मजबूत बनाने के लिए डीआरडीओ ने हेलिना एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल के उत्पादन को तेजी से बढ़ाने के लिए निजी कंपनियों को आगे आने का आमंत्रण दिया है। डीआरडीओ के मिसाइल और सामरिक सिस्टम क्लस्टर ने इसके लिए एक नया एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जारी किया है, जिसके तहत निजी क्षेत्र की कंपनियों को पूरी हेलिना हथियार प्रणाली के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की पेशकश की गई है।
हेलिना का पूरा नाम हेलिकॉप्टर लॉन्च्ड नाग एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल है। यह मिसाइल विशेष रूप से हेलीकॉप्टरों से दागे जाने के लिए बनाई गई है और दुश्मन के आधुनिक टैंकों को नष्ट कर सकती है। डीआरडीओ के इस कदम से साफ है कि सेना की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए अब सिर्फ भारत डायनामिक्स लिमिटेड पर निर्भर नहीं रहा जाएगा, बल्कि अतिरिक्त प्रोडक्शन पार्टनर भी जोड़े जाएंगे। (HELINA missile production)
HELINA missile production: क्यों जरूरी हुआ यह फैसला
भारतीय सेना की चीन और पाकिस्तान के साथ लगी सीमाओं पर तैनाती लगातार बढ़ रही है। ऐसे में एंटी-टैंक मिसाइलों की मांग भी तेजी से बढ़ी है। इन्हीं जरूरतों को देखते हुए हेलिना और इसके वायुसेना संस्करण ध्रुवास्त्र के उत्पादन को प्राथमिकता दी जा रही है। मार्च 2025 में भारत डायनामिक्स लिमिटेड ने डीआरडीओ के साथ हेलिना और ध्रुवास्त्र के सीरियल प्रोडक्शन के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से जुड़ा पहला लाइसेंसिंग समझौता किया था। (HELINA missile production)
सेना का आकलन है कि अगले सात से आठ वर्षों में उसे 5,000 से अधिक हेलिना और ध्रुवास्त्र मिसाइलों की जरूरत होगी। इसके साथ ही 400 से ज्यादा ड्यूल-ट्यूब लॉन्चरों की भी मांग की गई है। इन मिसाइलों को रुद्र और प्रचंड जैसे आधुनिक लड़ाकू हेलीकॉप्टरों में तैनात किया जाना है। इतनी बड़ी संख्या में उत्पादन के लिए मौजूदा उत्पादन क्षमता पर्याप्त नहीं मानी जा रही, इसी वजह से निजी कंपनियों को भी इस कार्यक्रम में शामिल किया जा रहा है। (HELINA missile production)
HELINA missile production: हर साल सैकड़ों मिसाइलें बनाने का लक्ष्य
डीआरडीओ द्वारा जारी किए गए नए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट के अनुसार, चयनित निजी कंपनियों को हर साल 500 से 800 हेलिना मिसाइलें बनाने में सक्षम स्वतंत्र उत्पादन लाइनें बनानी होंगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्थिति में गोला-बारूद की सप्लाई में कमी न आए। वर्ष 2020 में गलवान झड़प के बाद सेना ने यह नीति अपनाई है कि हर अहम हथियार प्रणाली के लिए कम से कम दो स्वतंत्र उत्पादन लाइनें मौजूद हों। (HELINA missile production)
इसी के तहत हेलिना मिसाइल को अब ब्रह्मोस और अस्त्र जैसी प्रमुख स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों की श्रेणी में रखा गया है।
HELINA missile production: हेलीकॉप्टर बेड़े को मिलेगी नई ताकत
हेलिना और ध्रुवास्त्र मिसाइलें भारतीय सेना के अटैक हेलीकॉप्टर बेड़े की मुख्य ताकत बनने वाली हैं। इन्हें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा बनाए गए रुद्र और प्रचंड हेलीकॉप्टरों में लगाया जाएगा। इसके अलावा भविष्य में आने वाले अन्य हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टरों में भी इन मिसाइलों के इस्तेमाल की योजना है। (HELINA missile production)
ये मिसाइलें फायर एंड फॉरगेट तकनीक पर आधारित हैं, यानी लॉन्च के बाद इन्हें दुश्मन के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए किसी अतिरिक्त गाइडेंस की जरूरत नहीं होती। जिससे युद्ध के दौरान हेलीकॉप्टर और पायलट दोनों सुरक्षित रहते हैं।
टैंकों के लिए बड़ा खतरा
हेलिना मिसाइलें आधुनिक सेंसर और गाइडेंस सिस्टम से लैस हैं, और ये दुश्मन के टैंकों और बख्तरबंद वाहनों पर सटीक हमला कर सकती हैं। बड़े पैमाने पर इन मिसाइलों का उत्पादन भारतीय सेना को सीमाओं पर तेजी से बदलते हालात का जवाब देने में मदद करेगा और स्वदेशी रक्षा उत्पादन भी मजबूत होगा। (HELINA missile production)

