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मलक्का के पास भारत की बड़ी तैयारी! तट और द्वीपों की सुरक्षा को लेकर तीनों सेनाओं ने की ऑपरेशनल एक्सरसाइज

भारत के पास 7,500 किलोमीटर लंबी तटरेखा और 1,300 से ज्यादा द्वीप समूहों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है। खासकर अंडमान और निकोबार जैसे द्वीप सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं...

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📍नई दिल्ली | 30 Mar, 2026, 2:00 PM

Exercise Dweep Shakti 2026: पश्चिम एशिया में चल रहे ईरान-अमेरिका युद्ध में जिस तरह से अमेरिका मरीन कमांडोज के जरिए ईरान के खार्ग द्वीप पर कब्जे की रणनीति बना रहा है, उस पर पूरी दुनिया की नजरें हैं। यह द्वीप ईरान की आर्थिक जीवनरेखा है, जहां से देश के लगभग 90% क्रूड ऑयल एक्सपोर्ट होता है।

वहीं, भारतीय सेनाओं ने हाल ही में भारत की तटीय और द्वपीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा संयुक्त अभ्यास किया। 24 से 28 मार्च तक चली एक्सरसाइज “द्वीप शक्ति” (DWEEP SHAKTI) में भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना ने मिलकर कई ऑपरेशंस को अंजाम दिया। इस अभ्यास का मकसद था कि समुद्र और द्वीपों से जुड़े किसी भी खतरे की स्थिति में तीनों सेनाएं कितनी तेजी और तालमेल के साथ कार्रवाई कर सकती हैं।

Exercise Dweep Shakti 2026

इस एक्सरसाइज में आधुनिक उपकरणों, ड्रोन और नई तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। पांच दिनों तक चले इस अभियान में अलग-अलग परिस्थितियों में ऑपरेशन करके यह देखा गया कि सेना की तैयारी कितनी मजबूत है।

Exercise Dweep Shakti 2026: तटीय और द्वीपीय सुरक्षा पर फोकस

भारत के पास 7,500 किलोमीटर लंबी तटरेखा और 1,300 से ज्यादा द्वीप समूहों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है। खासकर अंडमान और निकोबार जैसे द्वीप सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसी वजह से इस अभ्यास में तटीय इलाकों और द्वीपों पर फोकस रखा गया।

अंडमान और निकोबार कमांड (ANC) के नेतृत्व में चले इस अभ्यास के दौरान ऐसी परिस्थितियां तैयार की गईं, जिनमें दुश्मन समुद्र के रास्ते हमला करने की कोशिश करता है या किसी द्वीप पर कब्जा करने की कोशिश करता है। इन परिस्थितियों में सेना को तेजी से प्रतिक्रिया देनी होती है। इसी तरह की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सैनिकों ने अभ्यास किया।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित हैं, जो वैश्विक समुद्री व्यापार का महत्वपूर्ण चोक पॉइंट है। चीन की बढ़ती समुद्री गतिविधियां और क्षेत्रीय तनावों को देखते हुए ऐसी संयुक्त तैयारियां अत्यंत आवश्यक हैं।

तीनों सेनाओं का देखने को मिला तालमेल

इस अभ्यास की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें तीनों सेनाओं ने एक साथ मिलकर काम किया। थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर समन्वय बनाने पर जोर दिया गया।

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नौसेना ने समुद्र में ऑपरेशन संभाला, थलसेना के जवानों ने जमीन पर कार्रवाई की और वायुसेना ने हवाई सपोर्ट दिया। तीनों सेनाओं के बीच रियल टाइम में जानकारी साझा की गई, जिससे ऑपरेशन और ज्यादा प्रभावी बन सके।

इस तरह का तालमेल किसी भी आधुनिक युद्ध में बेहद जरूरी होता है, जहां अलग-अलग क्षेत्रों में एक साथ कार्रवाई करनी होती है। (Exercise Dweep Shakti 2026)

Exercise Dweep Shakti 2026

स्पेशल फोर्सेस भी हुईं शामिल

अभ्यास में स्पेशल फोर्सेस ने भी हिस्सा लिया। इन यूनिट्स ने तेज और सटीक ऑपरेशन का प्रदर्शन किया। कठिन परिस्थितियों में काम करने की उनकी क्षमता को परखा गया। इन सैनिकों ने सर्च ऑपरेशन और हाई रिस्क मिशन जैसे कार्यों का अभ्यास किया। (Exercise Dweep Shakti 2026)

समुद्र से हमला और बीच लैंडिंग का अभ्यास

अभ्यास के दौरान एंफीबियस ऑपरेशन यानी समुद्र से जमीन पर हमला करने की ड्रिल की गई। इसमें सैनिकों को जहाजों और लैंडिंग क्राफ्ट की मदद से समुद्र से तट पर उतारा गया।

बीच लैंडिंग ड्रिल के दौरान सैनिकों ने तेजी से किनारे पर उतरकर आगे बढ़ने का अभ्यास किया। इस दौरान यह भी देखा गया कि अगर सामने दुश्मन की मौजूदगी हो, तो सैनिक किस तरह से सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ते हैं।

इस तरह के ऑपरेशन काफी जटिल होते हैं, क्योंकि इसमें समुद्र, जमीन और हवा तीनों का कॉर्डिनेशन जरूरी होता है।

समुद्र पर नियंत्रण बनाए रखने की तैयारी

नौसेना ने इस अभ्यास में समुद्री क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए रखने के तरीके पर काम किया। इसमें समुद्र में निगरानी, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर और समुद्री मार्गों की सुरक्षा शामिल रही।

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जहाजों और अन्य समुद्री प्लेटफॉर्म्स के जरिए यह सुनिश्चित किया गया कि किसी भी दुश्मन गतिविधि को समय रहते रोका जा सके। समुद्र पर कंट्रोल बनाए रखना किसी भी देश की सुरक्षा के लिए जरूरी होता है, खासकर जब बात व्यापारिक मार्गों की हो। (Exercise Dweep Shakti 2026)

Exercise Dweep Shakti 2026

वायुसेना ने दिया हवाई सपोर्ट

अभ्यास के दौरान वायुसेना ने अहम भूमिका निभाई। फाइटर जेट्स, हेलीकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल किया गया। इनकी मदद से सैनिकों को सपोर्ट दिया गया और जरूरत पड़ने पर तेजी से मूवमेंट भी किया गया।

हवाई निगरानी के जरिए जमीन और समुद्र दोनों जगह की गतिविधियों पर नजर रखी गई। इससे ऑपरेशन को बेहतर तरीके से प्लान करने में मदद मिली। (Exercise Dweep Shakti 2026)

ड्रोन और नई तकनीक का इस्तेमाल

इस अभ्यास में ड्रोन और नेक्स्ट जनरेशन उपकरणों का खास इस्तेमाल देखने को मिला। सर्विलांस ड्रोन के जरिए रियल टाइम जानकारी जुटाई गई। इससे यह पता चलता रहा कि टारगेट कहां है और वहां की स्थिति क्या है।

ड्रोन की मदद से ऑपरेशन ज्यादा सटीक और तेज हो गया। इसके अलावा नेटवर्क आधारित सिस्टम का भी इस्तेमाल किया गया, जिससे अलग-अलग यूनिट्स के बीच तुरंत जानकारी साझा हो सके।

अभ्यास के दौरान अलग-अलग तरह के हालात तैयार किए गए, ताकि सैनिक हर स्थिति के लिए तैयार रह सकें। कभी दुश्मन की घुसपैठ की स्थिति बनाई गई, तो कभी अचानक हमला होने का सीन तैयार किया गया।

इन हालात में सैनिकों ने तेजी से निर्णय लेने और तुरंत कार्रवाई करने का अभ्यास किया। इससे उनकी प्रतिक्रिया क्षमता को परखा गया। (Exercise Dweep Shakti 2026)

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टैक्टिक्स, टेक्नीक और प्रोसीजर

इस अभ्यास का एक बड़ा उद्देश्य यह भी था कि ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल होने वाली रणनीतियों और प्रक्रियाओं को और बेहतर बनाया जाए। इसे टैक्टिक्स, टेक्नीक और प्रोसीजर यानी टीटीपी कहा जाता है।

अभ्यास के दौरान यह देखा गया कि किस तरह से ऑपरेशन को और ज्यादा प्रभावी बनाया जा सकता है। अलग-अलग यूनिट्स के बीच तालमेल को भी मजबूत किया गया।

वहीं इस एक्सरसाइज में सिर्फ लड़ाकू क्षमता ही नहीं, बल्कि सपोर्ट सिस्टम का भी अभ्यास किया गया। इसमें यह देखा गया कि सैनिकों तक जरूरी सामान, ईंधन और उपकरण कितनी तेजी से पहुंचाए जा सकते हैं।

दूरदराज के इलाकों में ऑपरेशन चलाने के लिए मजबूत लॉजिस्टिक्स बहुत जरूरी होते हैं। इस अभ्यास में इसी पहलू पर भी ध्यान दिया गया। (Exercise Dweep Shakti 2026)

मल्टी-डोमेन ऑपरेशन की तैयारी

यह अभ्यास सिर्फ जमीन, समुद्र या हवा तक सीमित नहीं था। इसमें मल्टी-डोमेन ऑपरेशन की तैयारी भी दिखाई दी। यानी एक साथ कई क्षेत्रों में कार्रवाई करने की क्षमता पर काम किया गया।

इसमें सूचना, निगरानी और तकनीक का इस्तेमाल अहम रहा। आधुनिक युद्ध में यह जरूरी हो गया है कि सभी क्षेत्रों में एक साथ काम किया जाए। (Exercise Dweep Shakti 2026)

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  • News Desk

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