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रक्षा मंत्री ने की बीआरओ के कामकाज की समीक्षा, बॉर्डर इलाकों में तेजी से बढ़ रहा है इंफ्रास्ट्रक्चर

रक्षा मंत्री ने कहा कि इस नेटवर्क के जरिए अब ऐसे इलाकों में भी ऑल वेदर कनेक्टिविटी दी जा रही है, जहां पहले पहुंचना बहुत मुश्किल था। इससे सेना की तैयारी और मजबूत हुई है...

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📍नई दिल्ली | 25 Mar, 2026, 8:49 PM

BRO Projects: सीमा क्षेत्रों में सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक अहम बैठक हुई, जिसमें बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन यानी बीआरओ के कामकाज और योजनाओं की समीक्षा की गई। इस बैठक में रक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।

BRO Projects: संसद की कमेटी के साथ हुई चर्चा

यह बैठक रक्षा मंत्रालय की पार्लियामेंट्री कंसल्टेटिव कमेटी के साथ नई दिल्ली में आयोजित की गई। इसमें सरकार और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान बीआरओ द्वारा किए जा रहे काम, नई परियोजनाओं और सीमा क्षेत्रों में विकास की स्थिति पर विस्तार से जानकारी दी गई।

रक्षा मंत्री ने इस दौरान कहा कि बीआरओ सिर्फ सड़कें ही नहीं बना रहा, बल्कि सीमावर्ती इलाकों में एक ऐसा सिस्टम तैयार कर रहा है जिसमें सुरक्षा, विकास और कनेक्टिविटी तीनों को साथ लेकर काम किया जा रहा है।

सीमावर्ती इलाकों में बदल रही तस्वीर

रक्षा मंत्री ने बताया कि बीआरओ ने खासतौर पर नॉर्थ-ईस्ट और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित इलाकों में कनेक्टिविटी बेहतर करने का काम किया है। इससे न सिर्फ सेना की आवाजाही आसान हुई है, बल्कि वहां रहने वाले लोगों के जीवन में भी बदलाव आया है।

उन्होंने कहा कि अब सेना की मूवमेंट पहले से ज्यादा तेज और आसान हो गई है, जिससे ऑपरेशनल तैयारी मजबूत हुई है। साथ ही दूर-दराज के गांव भी अब बेहतर तरीके से जुड़ रहे हैं।

बीआरओ भारत के अलावा दूसरे देशों में भी काम कर रहा है। अफगानिस्तान, भूटान, म्यांमार और ताजिकिस्तान जैसे देशों में भी इस संगठन ने सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट पूरे किए हैं। बैठक में यह भी बताया गया कि बीआरओ को भारत-म्यांमार सीमा पर करीब 1600 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।

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बॉर्डर रोड्स डेवलपमेंट प्रोग्राम 2023-28 पर चर्चा

बैठक के दौरान बॉर्डर रोड्स डेवलपमेंट प्रोग्राम 2023-28 की प्रगति पर भी चर्चा हुई। इस प्रोग्राम के तहत देशभर में 1000 से ज्यादा सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है।

इनमें नई सड़कें बनाना, पुरानी सड़कों को अपग्रेड करना और उनकी मेंटेनेंस शामिल है। सरकार का लक्ष्य है कि दूर-दराज और ऊंचाई वाले इलाकों में भी हर मौसम में कनेक्टिविटी बनी रहे।

रक्षा मंत्री ने कहा कि इस नेटवर्क के जरिए अब ऐसे इलाकों में भी ऑल वेदर कनेक्टिविटी दी जा रही है, जहां पहले पहुंचना बहुत मुश्किल था। इससे सेना की तैयारी और मजबूत हुई है।

आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा

बैठक में तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया। रक्षा मंत्री ने कहा कि बीआरओ अब हाई एल्टीट्यूड इक्विपमेंट, मॉड्यूलर ब्रिज और प्रीकास्ट टेक्नोलॉजी जैसी आधुनिक तकनीकों का तेजी से इस्तेमाल कर रहा है।

इससे काम की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है और प्रोजेक्ट जल्दी पूरे हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की तकनीक से भविष्य के लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है।

बैठक में डायरेक्टर जनरल बॉर्डर रोड्स लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने बीआरओ के काम की पूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बीआरओ की स्थापना 1960 में हुई थी और तब से अब तक इस संगठन ने 64,000 किलोमीटर से ज्यादा सड़कें बनाई हैं। इसके अलावा 1179 पुल, 22 एयरफील्ड और 7 सुरंगों का निर्माण भी किया गया है। इन परियोजनाओं ने सीमा क्षेत्रों में सेना की तैयारी को मजबूत करने के साथ-साथ वहां के लोगों के विकास में भी मदद की है। इन परियोजनाओं से सीमा क्षेत्रों में सेना की ऑपरेशनल तैयारी मजबूत हुई है और वहां के लोगों के जीवन में भी सुधार आया है।

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कमेटी को यह भी बताया गया कि सीमा क्षेत्रों में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर बनने से सेना की तैयारी मजबूत हुई है और इन इलाकों में सामाजिक और आर्थिक विकास को भी रफ्तार मिली है, जो विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जुड़ा हुआ है।

कठिन हालात में काम करने की चुनौती

बीआरओ को काम करते समय कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसमें ऊंचे पहाड़ी इलाके, बेहद ठंडा मौसम और सीमित समय में काम पूरा करना शामिल है।

इसके अलावा जमीन अधिग्रहण और पर्यावरण से जुड़ी मंजूरी भी कई बार काम को प्रभावित करती हैं। इसके बावजूद बीआरओ लगातार अपनी क्षमता बढ़ा रहा है और नई तकनीक अपनाकर तेजी से काम कर रहा है।

इसके अलावा बीआरओ सिर्फ सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि आपदा के समय भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बर्फबारी, भूस्खलन या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बीआरओ की टीमें तुरंत राहत और रास्ता खोलने का काम करती हैं।

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