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India-Pak tension: Pahalgam हमले के बाद पाकिस्तान को भारतीय सेनाओं का खौफ, जंग हुई तो उतारेगा ‘प्राइवेट आर्मी’!

India-Pak Tension: Pak Plans to Deploy Private Army Amid Pahalgam Fallout
Image Source: @forwardobservations2.0

India-Pak tension: पहलगाम आतंकी हमले में पाकिस्तान का हाथ होने के सबूतों के बाद अंतरराष्ट्रीय सीमा यानी आईबी और एलओसी पर तनाव चरम पर है। पिछले चार दिनों से लगातार पाकिस्तान की तरफ से सीज फायर तोड़ा जा रहा है और भारतीय ठिकानों पर जमकर गोलाबारी की जा रही है। हालांकि इन हमलों का भारतीय सेना मुंहतोड़ जवाब भी दे रही है। पाकिस्तान को इस बात की दहशत है कि भारत कभी भी हमला कर सकता है, इसके लिए उसने विदेशी निजी सैन्य कंपनी को भी हायर किया है। सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तानी सेना ने प्राइवेट मिलिट्री कंपनी (PMC) के करार किया है। कहा जा रहा है कि अगर भारत-पाक के बीच युद्ध के हालात बनते हैं, तो यह कंपनी पाकिस्तान सेना की मदद करेगी।

India-Pak Tension: Pak Plans to Deploy Private Army Amid Pahalgam Fallout
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India-Pak tension: क्या होती हैं पीएमसी?

निजी सैन्य कंपनियां (पीएमसी) ऐसी निजी फर्में हैं जो सैन्य और सुरक्षा सेवाएं देती हैं। ये सरकारी (India-Pak tension) सेनाओं, निजी कंपनियों, या गैर-राज्य संगठनों के लिए काम करती हैं। वैगनर ग्रुप (रूस), वेस्टर्न पीएमसी, मोजार्ट ग्रुप और ब्लैकवाटर (अमेरिका) जैसी पीएमसी ने यूक्रेन, सीरिया, और इराक जैसे संघर्षों में हिस्सा लिया है। पीएमसी में अक्सर पूर्व सैनिक, खासकर विशेष बलों के, शामिल होते हैं, क्योंकि उनकी ट्रेनिंग और अनुभव उच्च स्तर का होता है। डेल्टा पीएमसी में ब्रिटिश सेना के पूर्व स्पेशल फोर्सेस (एसएएस) के जवान शामिल हैं। हालांकि पीएमसी बेहद महंगी होती हैं। वैगनर के सैनिकों को प्रति माह 2500-3000 डॉलर मिलते हैं। इसके अलावा 1989 के यूएन मर्सिनरी कन्वेंशन में भाड़े के सैनिकों की भर्ती और इस्तेमाल पर रोक है। लेकिन पाकिस्तान ने इस पर दस्तखत नहीं किए हैं।

India-Pakistan tension: पाकिस्तानी सेना की काबिलियत पर भरोसा नहीं

सूत्रों ने दावा किया है कि पाकिस्तानी हुक्मरानों (India-Pak tension) में इस कदर दहशत है कि उन्हें पाकिस्तानी सेना की काबिलियत पर भरोसा नहीं हो रहा है। जिस तरह से बलुचिस्तान में वहां की बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने 11 मार्च 2025 को जाफर एक्सप्रेस ट्रेन का अपहरण किया था, जिसमें 100 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों को बंधक बना लिया गया था। इस घटना के बाद बंधकों को छुड़ाने में पाकिस्तानी सेना के हाथ पैर फूल गए थे। इस घटना के बाद पाकिस्तानी हुक्मरानों का भरोसा अपनी ही सेना से डगमगा गया था। जिसके बाद माना जा रहा है कि उन्होंने प्राइवेट मिलिट्री कंपनी की सेवाएं लेने का फैसला किया हो। हालांकि सूत्रों का यह भी कहना है कि ये भाड़े के सैनिक शायद ही सीधे एलओसी पर तैनात हों। लेकिन हो सकता है कि वे पाकिस्तानी सेना को लॉजिस्टिक्स या ट्रेनिंग में मदद करें। इस बात के भी कयास हैं कि युद्ध के हालात में जब पाकिस्तानी सेना बॉर्डर पर तैनात हो, तो ये पाकिस्तान के अहम मिलिट्री प्रतिष्ठानों और महत्वपूर्ण लोगों की सुरक्षा में तैनात हों।

India-Pakistan tension: तुर्किए से भी मांगी मदद

हालांकि पाकिस्तान सेना में 6.5 लाख सक्रिय सैनिक और स्पेशल सर्विस ग्रुप हैं। लेकिन फिर भी पाकिस्तानी सरकार (India-Pak tension) को उन पर भरोसा नहीं है। पाकिस्तानी पहले ही तुर्किए से सैन्य मदद मांगी, जिसके बाद तुर्किए ने पहलगाम हमले के बाद कई सैन्य कार्गो विमान पाकिस्तान भेजे, जिनमें युद्ध उपकरण और हथियार शामिल थे। एक तुर्की वायुसेना का C-130 हरक्यूलिस कार्गो विमान कराची में उतरा, जिसमें अज्ञात युद्ध उपकरण थे। इसके अलावा, छह अन्य C-130 विमान इस्लामाबाद के एक सैन्य अड्डे पर उतरे। इन विमानों में ड्रोन, केमानकेस क्रूज मिसाइलें, और अन्य एडवांस वीपेंस शामिल थे।

CPEC की सुरक्षा करती हैं प्राइवेट सिक्योरिटी फर्म्स

हालांकि यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान (India-Pak tension) ने प्राइवेट सिक्योरिटी फर्म्स की मदद ली हो। इससे पहले 2024 में, ग्वादर पोर्ट की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान ने निजी सुरक्षा कंपनियों (प्राइवेट सिक्योरिटी फर्म्स) को शामिल किया था। जिन्हें खौस तौर पर चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) से जुड़े प्रोजेक्ट्स और चीनी नागरिकों की सुरक्षा के लिए तैनात किया था। ग्वादर पोर्ट CPEC का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और बलूचिस्तान के पास है, जो रणनीतिक रूप से बेहद अहम है।

दरअसल ग्वादर पोर्ट (India-Pak tension) और CPEC प्रोजेक्ट्स पर बार-बार आतंकी हमले हुए हैं। इसे बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) और अन्य आतंकी समूहों से लगातार खतरा रहता है। मई 2019 में ग्वादर के पर्ल कॉन्टिनेंटल होटल पर BLA ने हमला किया था, और अक्टूबर 2024 में बलूचिस्तान में दो चीनी नागरिकों को निशाना बनाया गया। पाकिस्तान ने CPEC की सुरक्षा के लिए 2016 में एक विशेष सुरक्षा डिवीजन (SSD) बनाई, जिसमें 15,000 सैनिक और पुलिसकर्मी शामिल हैं। इसके बावजूद, आतंकी हमले नहीं रुके।

जिसके बाद पाकिस्तान (India-Pak tension) ने ग्वादर पोर्ट और CPEC प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा के लिए तीन चीनी निजी सुरक्षा कंपनियों को तैनात करने का फैसला किया था। इनमें ड्यूई सिक्योरिटी फ्रंटियर सर्विस ग्रुप, चाइना ओवरसीज सिक्योरिटी ग्रुप, और हुआक्सिन झोंगशान सिक्योरिटी सर्विस शामिल हैं। ये कंपनियां चीनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के रिटायर्ड अधिकारियों से जुड़ी हैं और इनका मुख्य काम चीनी नागरिकों, बुनियादी ढांचे, और ग्वादर पोर्ट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा करना है। इनमें हुआक्सिन झोंगशान सिक्योरिटी सर्विस विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा में माहिर है और ग्वादर पोर्ट की सुरक्षा में अहम भूमिका है।

Pahalgam NIA Probe: एक चेहरा, तीन हमले! NIA जांच में कई खुलासे, हमले में कई आतंकी समूह शामिल!

इसके अलावा पाकिस्तान (India-Pak tension) की अपनी निजी सुरक्षा कंपनियां, जैसे अस्करी गार्ड्स लिमिटेड (AGL) और ज़िम्स सिक्योरिटी, भी ग्वादर और CPEC प्रोजेक्ट्स में सुरक्षा सेवाएं देती हैं। AGL, जो पाकिस्तान सेना के आर्मी वेलफेयर ट्रस्ट की सहायक कंपनी है, देश की सबसे बड़ी निजी सुरक्षा फर्मों में से एक है। इसके 20,000 से अधिक प्रशिक्षित कर्मचारी हैं, जो ग्वादर जैसे रणनीतिक स्थानों पर संपत्ति सुरक्षा, नकद परिवहन, और अन्य सुरक्षा सेवाएं प्रदान करते हैं।

Pahalgam NIA Probe: एक चेहरा, तीन हमले! NIA जांच में कई खुलासे, हमले में कई आतंकी समूह शामिल!

Pahalgam NIA Probe: Common Link Found in Pahalgam, Gulmarg and Gagangeer Attacks

Pahalgam NIA Probe: पिछले कुछ महीनों में जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमलों ने देश को झकझोर कर रख दिया है। अक्टूबर 2024 में गगनगीर गांदरबल) में एक निर्माण स्थल पर सात मजदूरों की हत्या, गुलमर्ग (बारामुला) के पास बोता पठरी में सेना के वाहन पर हमला और अब पहलगाम (अनंतनाग) में पर्यटकों पर हमला, ये सभी घटनाएं आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में नई चुनौतियां पेश कर रही हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) (Pahalgam NIA Probe) इन हमलों के बीच संबंधों की जांच कर रही है और यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या इनके पीछे कोई साझा साजिश है।

Pahalgam NIA Probe: Common Link Found in Pahalgam, Gulmarg and Gagangeer Attacks

जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि इन हमलों में पाकिस्तानी आतंकी हाशिम मूसा उर्फ सुलेमान का नाम बार-बार सामने आ रहा है। इसके साथ ही, खुफिया जानकारी की कमी और घुसपैठ पर नजर रखने में चूक भी जांच के केंद्र में है।

Pahalgam NIA Probe: तीन हमलों का एक सूत्र: हाशिम मूसा

एनआईए की जांच (Pahalgam NIA Probe) में पता चला है कि गगनगीर, गुलमर्ग और पहलगाम हमलों में एक साझा कड़ी है पाकिस्तानी आतंकी हाशिम मूसा उर्फ सुलेमान। तकनीकी साक्ष्यों, जैसे कॉल रिकॉर्ड्स और डिजिटल फुटप्रिंट्स से पता चला है कि मूसा ने इन तीनों हमलों के मॉड्यूल्स को निर्देश दिए। वह लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) से जुड़ा है, लेकिन जांचकर्ता इस बात से इंकार नहीं कर रहे कि उसका संबंध घाटी में सक्रिय अन्य पाकिस्तान समर्थित आतंकी समूहों से भी हो सकता है।

सूत्रों के मुताबिक, आतंकी संगठन अब ‘क्रॉस-पोलिनेशन’ की रणनीति अपना रहे हैं, यानी अलग-अलग संगठनों के आतंकी एक-दूसरे के साथ मिलकर हमले कर रहे हैं। इसका मकसद जम्मू-कश्मीर को अशांत बनाए रखना है। मूसा जैसे आतंकी इस रणनीति के केंद्र में हैं, जो विभिन्न मॉड्यूल्स को जोड़कर हमलों को अंजाम दे रहे हैं।

हमलों का तरीका: सुरक्षित इलाकों को निशाना बनाना

जांच (Pahalgam NIA Probe) में पता चला है कि इन तीनों हमलों में आतंकियों के हमले का पैटर्न एक जैसा ही रहा है। गगनगीर में मजदूरों को, गुलमर्ग में सेना के जवानों और कुलियों को, और पहलगाम में पर्यटकों को निशाना बनाया गया। ये सभी इलाके पहले सुरक्षित माने जाते थे, जहां आतंकी गतिविधियां कम थीं। एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी के अनुसार, “आतंकियों का मकसद सरकार की उपलब्धियों जैसे अनुच्छेद 370 हटाने के बाद हुए विकास और पर्यटन को कमजोर करना है।”

हमलों में इस्तेमाल हुए हथियार और तकनीक भी पहले से ज्यादा एडवांस थे। आतंकियों के पास नाइट विजन डिवाइस, एमपी3 मशीन गन, एके-47 और अन्य आधुनिक हथियार थे। उनकी ट्रेनिंग और हमले की योजना और तैयारियों से पता चलता है कि ये हमले सोच-समझकर किए गए थे। ये हमले राज्य में अलग-अलग जगहों पर हुए थे, लेकिन इनसे सुरक्षा बल भ्रमित हो गए।

खुफिया नाकामी: घुसपैठ पर क्यों नहीं रही नजर?

एनआईए की जांच (Pahalgam NIA Probe) में खुलासा हुआ है कि ये आतंकी भारत में कहां से आए, कब घुसे, इसकी कोई ठोस जानकारी सुरक्षा एजेंसियों के पास नहीं थी। सूत्रों के मुताबिक, आतंकी कम समय में घुसपैठ करने में कामयाब रहे और लंबे समय तक छिपे रहे। उन्होंने घटनास्थल की पहले से रेकी (recce) की थी और हमले के बाद तुरंत गायब हो गए। यह सुरक्षा बलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। वहीं हमले के दौरान फायर डिसिप्लिन और कोऑर्डिनेशन ऐसा था कि सुरक्षा बलों को अंदेशा तक नहीं हुआ। इसके अलावा पहलगाम जैसे पर्यटक स्थल, जो पहले आतंकी हमलों से बचे रहे थे, अब निशाने पर हैं। आतंकी अब उन इलाकों को टारगेट कर रहे हैं, जहां सुरक्षा व्यवस्था लचर है। सूत्रों ने बताया कि ऐसा माना जा रहा है कि ये आतंकी कम एक्टिविटीज वाले इलाकों में आए और महीनों तक डॉर्मेंट सेल्स की तरह छिपे रहे। यही वजह है कि वे लंबे समय तक नजरों से बचे रहे और एक के बाद एक हमला कर पाए।

लोकल नेटवर्क पर कार्रवाई

हमलों के पीछे के नेटवर्क को तोड़ने के लिए सुरक्षा बल (Pahalgam NIA Probe) स्थानीय स्तर पर सक्रिय सहायकों (ओवरग्राउंड वर्कर्स) पर शिकंजा कस रहे हैं। कश्मीर में चार आतंकियों के घरों को ध्वस्त किया गया है और 63 ठिकानों पर छापेमारी की गई है। ये लोग आतंकियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट, जैसे हथियार और ठिकाने, उपलब्ध कराते हैं। इनके नेटवर्क को तोड़ना जांच के लिए अहम है, क्योंकि इससे आतंकियों के मूवमेंट और योजनाओं का पता चल सकता है। अब NIA और J&K पुलिस की स्पेशल यूनिट्स का ध्यान इस बात पर है कि इन आतंकियों को स्थानीय स्तर पर किसने सहयोग दिया। OGWs (Over Ground Workers) की पहचान की जा रही है। उनके फोन रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन्स और मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है।

Pahalgam terror attack: क्या भारत फिर करेगा सर्जिकल स्ट्राइक या एयरस्ट्राइक? इन चार रणनीतियों से आतंक के समूल नाश की तैयारी

इसके साथ ही, जम्मू-कश्मीर पुलिस और भारतीय सेना के आतंकवाद-रोधी कमांडो पाकिस्तानी आतंकियों की तलाश में जुटे हैं। मूसा जैसे वांछित आतंकियों को पकड़ना या खत्म करना इस समय सबसे बड़ा लक्ष्य है।

मल्टी-ग्रुप कोऑर्डिनेशन की रणनीति

सूत्रों (Pahalgam NIA Probe) का कहना है कि हाशिम मूसा की गतिविधियों से यह स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तान स्थित आतंकी गुट केवल लश्कर-ए-तैयबा तक सीमित नहीं हैं। मूसा जैसे आतंकी मल्टी-ग्रुप कोऑर्डिनेशन कर रहे हैं। यानी जैश-ए-मोहम्मद, हिज्बुल मुजाहिदीन और लश्कर सभी उसे सपोर्ट उपलब्ध का रहे हैं। इन गुटों की रणनीति है कि अलग-अलग नामों से छोटे हमले करें, जिससे एजेंसियां भ्रम में रहें और कोई बड़ा लिंक न बना सकें।

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Pahalgam Terror Attack: Will India Opt for Surgical Strike or Airstrike Again?

Pahalgam terror attack: पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में केंद्र सरकार ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ढांचे को नेस्तनाबूद करने के लिए एक चार-स्तरीय रणनीति तैयार की है। इस रणनीति के तहत न केवल आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, बल्कि स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकजुटता को भी बढ़ावा मिलेगा। केंद्र सरकार की इस नई रणनीति का मकसद पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठनों का समूल नाश करना है।

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Pahalgam terror attack: पहला कदम: स्थानीय मददगारों पर नकेल

सरकार ने सबसे पहले कश्मीर घाटी में मौजूद उन स्थानीय नेटवर्कों को तोड़ने पर फोकस किया है, जो आतंकवादियों को मदद दे रहे हैं। सुरक्षा बल आतंकियों के लोकल ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) का पता लगा रहे हैं। जैसे ही सुरक्षा बलों को किसी कई ओवरग्राउंड वर्कर्स के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो उनके घरों को ध्वस्त किया जा रहा है। वहीं, इस कार्रवाई में स्थानीय जनता भी सहयोग कर रही है। क्योंकि पहलगाम हमले (Pahalgam terror attack) के बाद से घाटी के लोग भी आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हुए हैं। हालांकि, यह कार्रवाई बहुत सावधानी से की जा रही है ताकि स्थानीय लोगों की भावनाओं को ठेस न पहुंचे। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि जब आतंकी नेटवर्क के जमीनी मददगार खत्म होंगे, तो आतंकियों का लॉजिस्टिक सपोर्ट और सुरक्षित पनाहगाहें भी खत्म हो जाएंगी।

सूत्रों का कहना है कि सरकार घाटी के अंदर और बाहर आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता का माहौल बना रही है। स्थानीय लोगों को आतंकवाद के खिलाफ जागरूक किया जा रहा है और उन्हें यह समझाया जा रहा है कि आतंकवाद न केवल कश्मीर, बल्कि पूरे देश के लिए खतरा है। क्योंकि आतंकवाद के खिलाफ किसी भी रणनीति की सफलता तभी संभव है, जब स्थानीय लोग इसमें सक्रिय रूप से शामिल हों।

Pahalgam terror attack: दूसरा कदम: सीमा पर संभाला मोर्चा

पाकिस्तान के साथ लगी नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर तनाव बढ़ रहा है। पाकिस्तानी सेना ने (Pahalgam terror attack) लगातार चौथी रात को कुपवाड़ा, पुंछ और अखनूर सेक्टरों में बिना उकसावे के गोलीबारी की। हालांकि इसमें छोटे हथियारों का इस्तेमाल किया गया। भारतीय सेना ने हर बार इन हमलों का मजबूती से जवाब दिया। यह रणनीति इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे भारतीय सेना न केवल पाकिस्तानी सेना को इंगेज रख रही है, बल्कि किसी भी बड़े हमले के लिए पूरी तरह तैयार है। भारत एलओसी पर मौजूदा तनाव का फायदा उठाना चाहता है, ताकि भारतीय खुफिया और आतंकवाद-रोधी एजेंसियां आतंकियों के खिलाफ गुप्त योजनाएं बना सकें।

Pahalgam terror attack: तीसरा कदम: आतंकवाद के खिलाफ पूरे राष्ट्र को एकजुट करना

पहली बार सरकार ने सिर्फ सैन्य प्रतिक्रिया तक सीमित न रहकर सिविल सोसायटी और आम जनता (Pahalgam terror attack) को भी आतंकवाद के खिलाफ एकजुट करने की रणनीति अपनाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में पहलगाम हमले की कड़ी निंदा की और पूरे देश से आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की अपील की। कई राज्यों में छोटे-छोटे कैंडल मार्च और शांति यात्राएं आयोजित की जा रही हैं, ताकि पूरे भारत में आतंकवाद विरोधी भावना को मजबूती मिले। सरकार का उद्देश्य है कि कश्मीर का सामान्य नागरिक भी आतंकवाद के खिलाफ खड़ा हो और अलगाववादी सोच पूरी तरह हाशिये पर चली जाए।

सरकार के इन प्रयासों का मकसद जम्मू-कश्मीर को देश के साथ पूरी तरह जोड़ना और आतंकवाद को हराने के लिए एक राष्ट्रीय संकल्प (Pahalgam terror attack) को मजबूत करना है। सरकार का मानना है कि जब पूरा देश एक साथ खड़ा होगा, तभी आतंकवादियों का मनोबल पूरी तरह टूटेगा। यह कदम न केवल घाटी में शांति स्थापित करने में मदद करेगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि आतंकवाद को लोगों का समर्थन न मिले।

Pahalgam terror attack: चौथा कदम: अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को बेनकाब करना

पहलगाम हमले के बाद भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की भूमिका को दुनिया के सामने लाने के लिए कूटनीतिक पहल शुरू की है। अमेरिका, यूरोपीय संघ, रूस, सऊदी अरब समेत कई देशों को पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क की जानकारी दी जा रही है। भारत ने यह साफ कर दिया है कि पहलगाम हमला (Pahalgam terror attack) पाकिस्तान की जमीं में पल रहे आतंकी संगठनों की साजिश नतीजा है। वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान की छवि को चोट पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। भारत ने दुनिया को बताया है कि कैसे पाकिस्तान आतंकी संगठनों को पनाह देकर उन्हें भारत के खिलाफ प्रॉक्सी युद्ध लड़ने के लिए भड़का रहा है।

विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं ताकि वैश्विक समुदाय (Pahalgam terror attack) पाकिस्तान पर दबाव बनाए। सूत्रों का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ लंबे समय तक सफलता तभी मिलेगी, जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होगा। भारत ने पहले भी बालाकोट हवाई हमले जैसे कदमों के जरिए यह दिखाया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने में सक्षम है। इस बार भी भारत का लक्ष्य आतंकी ठिकानों को नष्ट कर उनके आकाओं को बेनकाब करना है।

Pahalgam terror attack: बालाकोट का एक्सपीरियंस आएगा काम

सूत्रों के मुताबिक, भारत के पास पहले से ही बालाकोट (Pahalgam terror attack) जैसी कार्रवाई के अनुभव हैं, जब 2019 में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शिविरों को निशाना बनाकर ध्वस्त किया गया था। उस समय भारतीय खुफिया एजेंसियों ने एक डोजियर तैयार किया था, जिसमें यह साबित हुआ था कि पाकिस्तानी अधिकारी बालाकोट में चल रहे आतंकी प्रशिक्षण शिविरों से वाकिफ थे। इस शिविर में जैश-ए-मोहम्मद के 42 बड़े आतंकियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा था। टेक्निकल एविडेंसेज में मसूद अजहर और अन्य आतंकी नेताओं के भड़काऊ भाषणों के सबूत भी शामिल थे।

इस बार भी भारत लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों के आतंकियों और उनके आकाओं पर नजर रख रहा है। खुफिया एजेंसियां तकनीकी और मानवीय खुफिया जानकारी जुटा रही हैं, ताकि आतंकी ठिकानों (Pahalgam terror attack) को सटीक निशाना बनाया जा सके। सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई छोटे आतंकियों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि आतंकवाद के मूल स्रोत को खत्म करने पर ध्यान दिया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि ड्रोन सर्विलांस, सैटेलाइट इमेजरी, और कम्युनिकेशन इंटरसेप्ट के जरिए पुख्ता सबूत जुटाए जा रहे हैं।

क्या भारत फिर करेगा सर्जिकल स्ट्राइक या एयरस्ट्राइक?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत फिर से सर्जिकल स्ट्राइक या एयरस्ट्राइक जैसे कदम उठाएगा? भारतीय सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों ने सभी विकल्प खुले रखे हैं। तीन तरह की संभावित कार्रवाइयों (Pahalgam terror attack) पर विचार किया जा रहा है। इनमें छोटे हमले (Targeted Strikes) शामिल हैं। जिनमें भारत आतंकी संगठनों के प्रमुख नेताओं या छोटे ठिकानों को निशाना बना सकता है। यह कार्रवाई सटीक और सीमित होगी, जिससे बड़े पैमाने पर तनाव बढ़ने की आशंका कम रहे।

इसके अलावा बड़े आतंकी शिविरों पर भी एयरस्ट्राइक की जा सकती है, जैसे 2019 के बालाकोट में की गई थी। इसमें भारत पाकिस्तान में मौजूद बड़े आतंकी प्रशिक्षण शिविरों को नष्ट करने के लिए हवाई हमले कर सकता है। इसके लिए खुफिया एजेंसियां पहले से ही तकनीकी और मानवीय जानकारी जुटा रही हैं। इसके अलावा एक अन्य विकल्प आतंकवादी संगठनों के आकाओं जैसे मसूद अजहर या हाफिज सईद जैसे लोगों को निशाना बनाया जा सकता है।

Pahalgam Terror Attack: भारत ने दुनिया को दिखाए पाकिस्तान के हाथ होने के सबूत, TRF के इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर दो जगहों पर किए ट्रेस

इनमें से कौन सा विकल्प चुना जाएगा, इसे लेकर सरकार में मथंन जारी है। 30 अप्रैल को होने वाली सीसीएस की बैठक में इन विकल्पों पर चर्चा की जा सकती है। क्योंकि इस बार भारत का मकसद केवल जवाब देना नहीं है, बल्कि आतंकवाद के पूरे नेटवर्क को पूरी तरह उखाड़ फेंकना है।

India-China LAC: पाकिस्तान से विवाद के बीच चीन को साधने में जुटा भारत, भविष्य में न हो गलवान, इसके लिए उठाए ये बड़े कदम

India-China LAC: India boosts patrols, tech to prevent Galwan-like clashes
File Photo: Indian Army

India-China LAC: कैलाश मानसरोवर यात्रा की शुरूआत भारत-चीन संबंधों में बड़ा बदलाव लाने वाली है। 2020 में गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद बंद हुई यह यात्रा दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली का एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही, भारत ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर पूर्वी लद्दाख में पेट्रोलिंग पॉइंट्स और महत्वपूर्ण जगहों की जियोटैगिंग शुरू की है, ताकि सीमा की स्पष्ट पहचान हो और भारतीय सैनिकों को पेट्रोलिंग में आसानी हो। इसके अलावा दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के बीच लगातार बातचीत जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं।

India-China LAC: India boosts patrols, tech to prevent Galwan-like clashes
File Photo: Indian Army

India-China LAC: पिछले साल अक्टूबर में शुरू हुई थी डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया

2020 में गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के बीच LAC पर तनाव चरम पर पहुंच गया था। इस दौरान दोनों देशों की सेनाओं ने भारी तैनाती की और कई क्षेत्रों में पेट्रोलिंग बंद हो गई थी। लेकिन पिछले साल 21 अक्टूबर को दोनों देशों के बीच LAC पर पेट्रोलिंग की व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता (India-China LAC) हुआ। इस समझौते के तहत 2020 में शुरू हुए तनाव को कम करने और सैनिकों को पीछे हटाने (डिसइंगेजमेंट) की प्रक्रिया को शुरू किया गया।

इसके बाद, रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद शांति बहाली की प्रक्रिया को और मजबूती दी। अक्टूबर 2024 के अंत तक, दोनों पक्षों ने डिसइंगेजमेंट (India-China LAC) की प्रक्रिया पूरी कर ली थी। इस दौरान दीपावली पर दोनों देशों के सैनिकों ने एक-दूसरे को मिठाइयां भी बांटीं। इसके बाद, भारतीय सेना ने बताया था कि उसने पूर्वी लद्दाख के देपसांग क्षेत्र में पांच पेट्रोलिंग पॉइंट्स में से एक पर पहली बार 2020 के बाद गश्त की।

India-China LAC: जियोटैगिंग से क्या फायदा होगा?

LAC पर भारत और चीन के बीच सीमा को लेकर हमेशा से विवाद रहा है। भविष्य में इस तरह के विवादों को खत्म करने के लिए जियोटैगिंग की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। सूत्रों ने बताया कि कुछ पहाड़ियां तो आसानी से पहचानी जा सकती है, लेकिन कई जगहों को लेकर पर दोनों देशों की धारणाएं अलग-अलग हैं। इन मतभेदों को कम करने के लिए भारत ने LAC पर पेट्रोलिंग पॉइंट्स, महत्वपूर्ण स्थानों, और अन्य पहचान चिह्नों की जियोटैगिंग शुरू की है।

जियोटैगिंग का मतलब है इन स्थानों की भौगोलिक स्थिति को डिजिटल रूप से रिकॉर्ड करना, ताकि उनकी सटीक लोकेशन और सीमाएं स्पष्ट हो सकें। इससे न केवल भारतीय सैनिकों को गश्त में आसानी होगी, बल्कि चीनी सैनिकों के साथ टकराव की आशंका भी कम होगी। सूत्रों के अनुसार, यह कदम भविष्य में सीमा विवाद (India-China LAC) के समाधान के लिए होने वाली बातचीत में भी मददगार साबित होगा।

India-China LAC: निगरानी तंत्र को किया मजबूत

पिछले छह महीनों में भारत ने LAC पर निगरानी को और मजबूत किया है। सेना ने कई तरह के नए ड्रोन खरीदे हैं, जो सीमा पर संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी में मदद कर रहे हैं। ये ड्रोन न केवल सैनिकों की पैदल गश्त में मदद कर रहे हैं, बल्कि लगातार निगरानी भी आसान हो रही है।

इसके अलावा, LAC के साथ कई जगहों पर हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरे लगाए गए हैं। क्षेत्र में हेलीकॉप्टर सॉर्टीज़ (उड़ानें) भी नियमित रूप से की जा रही हैं। सूत्रों ने बताया कि सेना ने सैनिकों की तैनाती के रास्तों पर बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत किया है, ताकि सैन्य आवाजाही में कोई बाधा न आए।

पेट्रोलिंग को लेकर बनाए नए नियम

भारत और चीन ने LAC पर गश्त (India-China LAC) को लेकर नए नियम बनाए हैं, ताकि टकराव की स्थिति से बचा जा सके। दोनों पक्षों ने सहमति जताई है कि प्रत्येक पेट्रोलिंग पॉइंट पर महीने में केवल दो बार गश्त होगी। पेट्रोलिंग की योजना पहले से एक-दूसरे के साथ साझा की जाएगी, ताकि दोनों देशों के सैनिक एक ही समय पर एक ही स्थान पर न पहुंचें।

सूत्रों ने बताया कि सैनिकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे चीनी सैनिकों के साथ फिजिकल कॉन्टैक्ट से बचें। अगर कोई टकराव की स्थिति बनती है, तो सैनिकों को 200 मीटर की दूरी बनाए रखनी है, तस्वीरें लेनी हैं, और अपनी यूनिट को वापस लौटकर स्थिति की जानकारी देनी है। ताकि छोटी-मोटी घटनाएं बड़े विवाद में न बदलें।

कमांडरों के बीच नियमित संवाद

LAC पर तनाव (India-China LAC) कम करने के लिए दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के बीच नियमित संवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, यूनिट कमांडिंग ऑफिसर (CO) महीने में एक या दो बार अपने चीनी समकक्षों से मिलेंगे। वहीं, ब्रिगेड कमांडर हर 3 महीने में मुलाकात करेंगे। जबकि मेजर जनरल और उससे ऊपर के अधिकारी आवश्यकतानुसार अपने चीनी समकक्षों से बातचीत करेंगे। इसके पीछे रणनीति यह है कि इससे न केवल विश्वास की बहाली हो, बल्कि गलतफहमियों को तुरंत सुलझाने में भी मदद मिले।

विश्वास बहाली को लेकर उठाए ये कदम

डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया के हिस्से के रूप में, भारत और चीन कई विश्वास बहाली के उपाय (Confidence Building Measures) लागू कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, इस साल जून में कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने का फैसला लिया गया, जो 2020 के बाद से बंद थी। यह दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सूत्रों ने यह भी बताया कि LAC पर मिलिट्री एक्सरसाइज की संख्या कम की जा सकती है, ताकि तनाव की आशंका न बढ़े। हालांकि, सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और सैन्य तैयारियां बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगी।

हालांकि ये कदम भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक बदलाव का संकेत हैं, लेकिन चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। LAC पर दोनों देशों की अलग-अलग धारणाएं और सीमा के कुछ हिस्सों पर असहमति भविष्य में विवाद की वजह बन सकती हैं। इसके अलावा, जियोटैगिंग और निगरानी के बावजूद, दोनों देशों को लगातार संवाद और कूटनीतिक प्रयासों की जरूरत होगी।

China helping Houthis: अमेरिका का आरोप- चीन की मदद से हूती विद्रोही साध रहे हैं अमेरिकी युद्धपोतों पर निशाना!

भारत ने यह भी सुनिश्चित किया है कि उसकी सैन्य तैनाती और तैयारियां किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त हैं। LAC पर ड्रोन, कैमरे, और हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल से न केवल निगरानी मजबूत होगी, बल्कि सैनिकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

Haji Pir Pass: भारतीय सेना ने दो बार जीता हाजी पीर दर्रा, लेकिन फिर लौटाया, आतंकी यहां से करते हैं घुसपैठ

Haji Pir Pass: Won Twice by India, Returned, Still a Key Route for Terror Infiltration

Haji Pir Pass: 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले से पूरा देश सदमे में है। बैसरन घाटी में हुए इस हमले में 26 लोग मारे गए थे। पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की शाखा द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने इस हमले को अंजाम दिया। इस हमले की साजिश पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) के रावलाकोट में रची गई। संभावना जताई जा रही है कि आतंकियों ने हाजी पीर दर्रे के रास्ते घुसपैठ कर पहलगाम तक पहुंचे। यह दर्रा, जिसे भारत ने 1965 में जीता था लेकिन ताशकंद समझौते में पाकिस्तान को लौटा दिया, आज भी आतंकी घुसपैठ का मुख्य रास्ता बना हुआ है। पहलगाम आतंकी हमले ने 51 साल पुरानी उस रणनीतिक भूल पर फिर से बहस छेड़ दी है, जिसके परिणाम भारत आज भी भुगत रहा है।

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Haji Pir Pass: हाजी पीर और पहलगाम हमले का कनेक्शन

संभावना जताई जा रही है कि पहलगाम आतंकी हमले में भी हाजी पीर दर्रे का इस्तेमाल हुआ था। आतंकी इसी दर्रे के रास्ते किश्तवाड़ से कोकेरनाग होते हुए बैसरन पहुंचे। पाक अधिकृत कश्मीर के रावलाकोट के निवासी और मानवाधिकार कार्यकर्ता औऱ कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी के नेता सरदार नासिर अजीज खान ने खुलासा किया कि हाजी पीर के आसपास कई आतंकी प्रशिक्षण शिविर चल रहे हैं। यदि हाजी पीर आज भारत के नियंत्रण में होता, तो आतंकी घुसपैठ को रोका जा सकता था। 1965 के पश्चिमी सेना कमांडर रहे लेफ्टिनेंट जनरल हरबख्श सिंह ने इसे “रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक” बताया था, लेकिन ताशकंद ने इसे बेकार कर दिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जनवरी 2025 में कहा, “1948 और 1965 में हाजी पीर लौटाना भूल थी। यह आतंकवाद का रास्ता बंद कर सकता था।”

 2,637 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है Haji Pir Pass:

यह दर्रा पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित है। हाजी पीर दर्रा पीर पंजाल रेंज पर 2,637 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और पुंछ-उरी-राजौरी मार्ग पर एक महत्वपूर्ण सड़क को जोड़ता है। यह जम्मू-कश्मीर के लिए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है। क्योंकि यदि भारत इस दर्रे को अपने नियंत्रण में रखता तो यह घुसपैठ के रास्ते बंद कर सकता है और पुंछ-उरी के बीच की दूरी को 282 किमी से 56 किमी तक कम कर सकता है। 1948 और 1965 के भारत-पाक युद्ध में इस दर्रे को जीतना भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि थी।

Haji Pir Pass: 1948: पहला कब्जा और वापसी

1947-48 के प्रथम भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान ने हाजी पीर दर्रा सहित 78,114 वर्ग किमी जम्मू-कश्मीर क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। 22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तान ने कबाइली हमलावरों (पठान जनजातियों) और पाकिस्तानी सेना के समर्थन से कश्मीर पर हमला शुरू किया। इस ऑपरेशन गुलमर्ग का मकसद कश्मीर को बलपूर्वक हथियाना था। 26 अक्टूबर को महाराजा हरी सिंह ने भारत के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए, और भारत ने सैन्य सहायता भेजी। हाजी पीर दर्रा, जो पुंछ-उरी-श्रीनगर मार्ग को जोड़ता है, इस युद्ध में एक महत्वपूर्ण लक्ष्य था। पाकिस्तानी घुसपैठिए और सेना ने इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था, क्योंकि यह कश्मीर घाटी में प्रवेश का एक प्रमुख रास्ता था। कबाइलियों और पाक सेना ने अक्टूबर 1947 में मुजफ्फराबाद, बारामूला, और उरी पर कब्जा कर लिया। हाजी पीर दर्रा भी उनके नियंत्रण में आ गया, क्योंकि यह रावलाकोट से कश्मीर घाटी तक का सबसे छोटा रास्ता था। दर्रे का नियंत्रण पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण था, क्योंकि यह घुसपैठियों और हथियारों की आपूर्ति के लिए लॉजिस्टिक केंद्र था।

भारतीय सेना ने इसके जवाब में नवंबर 1947 से श्रीनगर और उरी को सुरक्षित करने के लिए सैन्य अभियान शुरू किया। 1 सिख रेजिमेंट और 4 कुमाऊं रेजिमेंट ने बारामूला और उरी को कबाइलियों के कब्जे से मुक्त कराया। जबकि पुंछ 1947 के अंत तक पाकिस्तानी घेराबंदी में था। इसके बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन ईजी (1948) शुरू किया, जिसका मकसद पुंछ को मुक्त कराना और हाजी पीर क्षेत्र पर नियंत्रण हासिल करना था। मई-जून 1948 में भारतीय सेना ने पुंछ के आसपास कई चोटियों पर कब्जा किया और हाजी पीर दर्रे तक पहुंची। 19 इन्फैंट्री ब्रिगेड और 161 इन्फैंट्री ब्रिगेड ने इस अभियान में हिस्सा लिया। जून 1948 तक भारतीय सेना ने हाजी पीर दर्रे पर कब्जा कर लिया। इलाका बेहद ऊबड़-खाबड़ था, और पाकिस्तानी सेना ने दर्रे पर भारी हथियार तैनात कर रखे थे। भारतीय सैनिकों ने सांक, लेदीवाली गली, और बेदोरी जैसी चोटियों को जीतकर दर्रे तक पहुंच बनाई। इस जीत ने पुंछ-उरी मार्ग को आंशिक रूप से बहाल किया और घुसपैठ को कम किया।

पाकिस्तानी सेना ने जुलाई-अगस्त 1948 में दर्रे को वापस लेने के लिए कई जवाबी हमले किए। इन हमलों में कबाइली लड़ाकों और पाकिस्तान के रेगुलर सैनिकों ने हिस्सा लिया। भारतीय सेना ने इन हमलों को विफल किया, लेकिन भारी नुकसान भी उठाया। पुंछ घेराबंदी नवंबर 1948 तक जारी रही, जब भारतीय सेना ने ऑपरेशन लिंक-अप के तहत पुंछ को पूरी तरह मुक्त कराया। ब्रिगेडियर प्रीतम सिंह और लेफ्टिनेंट कर्नल हरि सिंह जैसे अधिकारियों ने पुंछ और हाजी पीर अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

Haji Pir Pass: संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में युद्धविराम

1 जनवरी 1949 को संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में युद्धविराम लागू हुआ। नियंत्रण रेखा (LoC) स्थापित की गई, और हाजी पीर दर्रा पाकिस्तान के नियंत्रण में चला गया। भारत ने युद्ध में दर्रे पर कब्जा किया था, लेकिन युद्धविराम समझौते के तहत इसे वापस करना पड़ा। यह फैसला भारत के लिए रणनीतिक नुकसान साबित हुआ, क्योंकि हाजी पीर बाद में आतंकी घुसपैठ का केंद्र बन गया।

Haji Pir Pass: 1965 में दूसरा कब्जा

पाकिस्तान ने ऑपरेशन जिब्राल्टर शुरू किया, जिसमें हजारों घुसपैठिए (5,000-30,000) कश्मीर में दाखिल हुए ताकि विद्रोह भड़काया जाए। हाजी पीर दर्रा इस घुसपैठ का मुख्य केंद्र था। भारत ने जवाबी कार्रवाई में ऑपरेशन बख्शी और ऑपरेशन फौलाद शुरू किए। 1 पैरा बटालियन, मेजर (बाद में लेफ्टिनेंट जनरल) रणजीत सिंह दयाल और ब्रिगेडियर जोरावर चंद बख्शी के नेतृत्व में, ने 37 घंटे की भीषण लड़ाई के बाद सांक, लेदीवाली गली, और हाजी पीर दर्रा पर कब्जा किया। 28 अगस्त 1965 का दिन भारतीय सेना के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। बारिश, कीचड़, कोहरा, और दुश्मन की गोलाबारी के बावजूद 28 अगस्त को सुबह 10:30 बजे दर्रा भारत के नियंत्रण में था। उस दिन सुबह 10:30 बजे, मेजर रंजीत सिंह दयाल (बाद में लेफ्टिनेंट जनरल) के नेतृत्व में 1 पैरा के जांबाज सैनिकों ने जम्मू-कश्मीर में हाजी पीर दर्रे पर कब्जा कर लिया। यह हमला पांच इन्फैंट्री बटालियनों और दो आर्टिलरी रेजिमेंट्स की मदद से किया गया था।

यह दर्रा, जो 1947 के बंटवारे के बाद 18 साल तक पाकिस्तान के कब्जे में था, भारतीय सेना के लिए एक बड़ी जीत थी। अगले दिन पाकिस्तान ने जवाबी हमला किया, लेकिन भारतीय सैनिकों ने उसे नाकाम कर दिया। 30 अगस्त तक दर्रे और आसपास की चोटियों पर भारत का पूर्ण नियंत्रण था। 10 सितंबर को नजदीकी काहुता पर कब्जे के साथ हाजी पीर बल्ज को पूरी तरह सील कर दिया गया, और पाकिस्तानी ने पूरी तरह से घुटने टेक दिए थे। यह मिशन ऑपरेशन बख्शी का हिस्सा था, जिसने पाकिस्तान के ऑपरेशन जिब्राल्टर को विफल किया। हमले से पांच दिन पहले सेना प्रमुख जनरल जे.एन. चौधरी ने आक्रामक रुख अपनाने की जरूरत पर जोर दिया था, ताकि पाकिस्तान को जवाब देने के लिए मजबूर किया जाए।

Haji Pir Pass: पाकिस्तान का ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम

हाजी पीर पर कब्जे ने पाकिस्तान को झटका दिया, लेकिन तीन दिन बाद उसने ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम शुरू किया। 1 सितंबर को चंब-जौरियन सेक्टर में उसने टैंकों और पैदल सेना के साथ बड़ा हमला बोला, जिसका मकसद अखनूर का पुल और फिर जम्मू-पुंछ राजमार्ग पर कब्जा करना था। इससे वह जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर नियंत्रण कर जम्मू-कश्मीर को भारत से काट सकता था। खुफिया जानकारी और तैयारी की कमी के कारण भारतीय सेना शुरू में दबाव में थी, लेकिन 6 सितंबर को भारतीय सेना के XI और I कोर ने पाकिस्तानी पंजाब में लाहौर और सियालकोट की ओर बढ़कर जवाब दिया। इससे पाकिस्तान को अपनी सेना वापस खींचनी पड़ी, और अखनूर का पुल आखिरी मौके पर बच गया।

Haji Pir Pass: ताशकंद समझौते में सोवियत दबाव

खास बात यह है कि 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में, जो 5 अगस्त को पाकिस्तानी घुसपैठियों की पहचान के साथ शुरू हुआ और 23 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र के युद्धविराम के साथ खत्म हुआ, यह भारतीय सेना की एकमात्र ऐसी आक्रामक कार्रवाई थी जो शुरू से अंत तक पूरी तरह सफल रही। मेजर रणजीत दयाल और ब्रिगेडियर बख्शी को महावीर चक्र मिला, और 1 पैरा को बैटल ऑनर हाजीपीर से सम्मानित किया गया। लेकिन ताशकंद समझौते (10 जनवरी 1966) में भारत ने हाजी पीर दर्रा और 1,920 वर्ग किमी क्षेत्र पाकिस्तान को लौटा दिया। यह फैसला सोवियत दबाव में लिया गया। पाकिस्तान ने चंब-जौरियन क्षेत्र में अखनूर के पास फटवाल रिज तक कब्जा कर लिया था, जो जम्मू के लिए खतरा था। भारत ने हाजी पीर के बदले चंब से पाकिस्तानी सेना को हटाने की शर्त मानी। यह फैसला कई सैन्य अधिकारियों को गलत लगा, क्योंकि इससे पाकिस्तानी सेना अखनूर से सिर्फ 4 किलोमीटर दूर रह सकती थी। कई विशेषज्ञों का मानना है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने पाकिस्तान के “युद्ध न करने” के वादे पर भरोसा किया। शास्त्री की ताशकंद में अचानक मृत्यु ने इस फैसले पर सवाल खड़े कर दिए।

1971 में क्यों नहीं किया कब्जा?

1971 के युद्ध में भारत ने 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों को बंदी बनाया और पूर्वी पाकिस्तान में मुक्ती बाहिनी की मदद की। जिसके बाद बांग्लादेश आजाद देश बना। हालांकि, उस दौरान भारत ने हाजी पीर दर्रे को फिर से कब्जाने की कोशिश की, लेकिन भारी नुकसान के चलते हमला वापस लेना पड़ा। मेजर रमेश बलदानी सहित कई सैनिक शहीद हुए। विश्लेषकों का कहना है कि भारत को फोकस पूर्वी मोर्चे पर था, और पश्चिमी मोर्चे पर हाजी पीर को प्राथमिकता नहीं दी। 1971 में भारत इस दर्रे को दोबारा हासिल करने का मौका चूक गया। बाद में मेजर से लेफ्टिनेंट जनरल बने रणजीत सिंह दयाल ने बाद में एक सााक्षात्कार में कहा था, “यह दर्रा भारत को रणनीतिक बढ़त दे सकता था। इसे लौटाना गलती थी। हमारे लोग नक्शे नहीं पढ़ते।”

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वहीं, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डी.बी. शेकटकर ने 23 सितंबर 2015 को एक बयान में कहा था, “हाजी पीर की वापसी ने आतंकवाद को बढ़ावा दिया”। उन्होंने विशेष रूप से कहा, “हमें यह नहीं पता कि हाजी पीर दर्रा, जो रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण था, उसे वापस करने के क्या कारण थे। आज कश्मीर में होने वाली सारी घुसपैठ उसी क्षेत्र से होती है। अगर हमने उस चौकी को, जिसे हमने कब्जा किया था, अपने पास रखा होता, तो चीजें अलग हो सकती थीं।”

India-Taliban Talks: भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच भारतीय राजनयिक की तालिबान से मुलाकात, अफगान मोर्चे पर नई चाल?

India-Taliban Talks: Indian diplomat meets Taliban amid India-Pakistan tensions
India’s key envoy for Afghanistan, Anand Prakash, held talks with Taliban’s acting Foreign Minister Amir Khan Muttaqi.

India-Taliban Talks: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम उठाया है। भारतीय विदेश मंत्रालय में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान डिवीजन के प्रमुख अधिकारी आनंद प्रकाश ने काबुल में तालिबान सरकार के कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों पक्षों ने भारत-अफगानिस्तान संबंधों, व्यापार, और निवेश के अवसरों पर चर्चा की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब कश्मीर आतंकी हमला ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

India-Taliban Talks: Indian diplomat meets Taliban amid India-Pakistan tensions
India’s key envoy for Afghanistan, Anand Prakash, held talks with Taliban’s acting Foreign Minister Amir Khan Muttaqi.

India-Taliban Talks: काबुल में क्या हुई बात?

अफगान मीडिया हाउस टोलो न्यूज के अनुसार, काबुल में हुई इस बैठक में अमीर खान मुत्तकी ने भारत के साथ राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने भारतीय निवेशकों से अफगानिस्तान में निवेश के अवसरों का लाभ उठाने की अपील की। मुत्तकी ने कहा, “भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापार और कूटनीतिक संबंध बढ़ाने की जरूरत है। अफगानिस्तान में निवेश के लिए कई क्षेत्र खुले हैं, और भारतीय कंपनियां इनका फायदा उठा सकती हैं।”

आनंद प्रकाश ने इस मुलाकात में भारत की स्थिति स्पष्ट की। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि पहलगाम आतंकी हमला का मुद्दा इस चर्चा में उठा या नहीं। सूत्रों के अनुसार, भारत ने अफगानिस्तान में मानवीय सहायता और स्थिरता पर जोर दिया। भारत ने हमेशा कहा है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं होना चाहिए।

India-Taliban Talks: तालिबान को नहीं है औपचारिक मान्यता

काबुल में हुई इस बातचीत का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि अब तक भारत ने तालिबान शासन को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं दी है। भारत लगातार यह मांग करता रहा है कि अफगानिस्तान में सभी वर्गों को शामिल करने वाली एक समावेशी सरकार का गठन हो, और यह सुनिश्चित किया जाए कि अफगान धरती का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ आतंकवाद फैलाने के लिए न हो।

तालिबान द्वारा भारत के साथ संबंध सुधारने की कोशिशें यह संकेत देती हैं कि काबुल अब नई दिल्ली के साथ अपने रिश्तों को फिर से पटरी पर लाना चाहता है। मुत्ताकी का यह बयान कि भारत के निवेशकों को अफगानिस्तान में अवसरों का लाभ उठाना चाहिए, तालिबान के भारत के प्रति नजरिए में बदलाव का इशारा है।

India-Taliban Talks: अफगानिस्तान के विकास में भारत का हाथ

भारत हमेशा से अफगानिस्तान के साथ मजबूत दोस्ती का पक्षधर रहा है। तालिबान के सत्ता में आने से पहले भारत ने वहां बड़े स्तर पर विकास परियोजनाएं चलाई थीं, जैसे सलमा डैम, अफगान संसद भवन, और कई सड़क निर्माण परियोजनाएं।

लेकिन अगस्त 2021 में जब तालिबान ने सत्ता पर कब्जा किया, तो भारत ने अपनी सुरक्षा चिंताओं के चलते काबुल से अपने राजनयिकों को वापस बुला लिया था। बाद में, जून 2022 में भारत ने एक “तकनीकी टीम” के माध्यम से फिर से काबुल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, ताकि मानवीय सहायता और सीमित राजनयिक कार्यों को संभाला जा सके।

इससे पहले भारत ने अफगानिस्तान में जारी मानवीय संकट को देखते हुए वहां खाद्यान्न, दवाइयां और अन्य राहत सामग्री भेजने का काम लगातार जारी रखा है। भारत का रुख साफ रहा है, चाहे जो भी सरकार सत्ता में हो, अफगान जनता के लिए सहायता अवश्य दी जाएगी।

भारत बार-बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इस बात की वकालत करता रहा है कि अफगानिस्तान को बिना किसी बाधा के मानवीय सहायता मिलनी चाहिए। काबुल में हुई हालिया बातचीत में भी आर्थिक सहयोग के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया।

अब आनंद प्रकाश की इस मुलाकात के बाद यह संकेत मिल रहे हैं कि भारत एक बार फिर से अफगानिस्तान में अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों को सुरक्षित करने के प्रयास कर रहा है, भले ही तालिबान को आधिकारिक मान्यता न दी गई हो।

पहलगाम हमले पर तालिबान ने दी थी ये प्रतिक्रिया

तालिबान ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की थी। तालिबान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल कहार बल्खी ने कहा था, “हम पर्यटकों पर इस हमले की निंदा करते हैं। यह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए खतरा है।” तालिबान ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। यह बयान उस समय आया, जब भारत ने हमले के बाद सिंधु जल समझौता निलंबित कर दिया और पाकिस्तान आतंकी लिंक को उजागर किया।

विश्लेषकों का मानना है कि तालिबान का बयान भारत के साथ आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। आनंद प्रकाश की काबुल यात्रा और तालिबान के कार्यवाहक विदेश मंत्री के साथ उनकी मुलाकात इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Taliban-India Relations: क्या अफगानिस्तान में फिर से खुलेगा भारतीय दूतावास? तालिबान संग रिश्ते सुधारने की कूटनीतिक कोशिश या मजबूरी?

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत अफगानिस्तान में अपना प्रभाव बनाए रखना चाहता है, ताकि पाकिस्तान और चीन जैसे देशों को वहां पूरी तरह हावी होने से रोका जा सके। अफगानिस्तान का भू-राजनीतिक महत्व, विशेषकर मध्य एशिया तक पहुंच के लिहाज से, भारत के लिए बेहद अहम है। जून 2022 में भारत ने काबुल में अपनी तकनीकी टीम तैनात कर दूतावास को फिर से शुरू किया था। यह कदम अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद भारतीय अधिकारियों की वापसी के बाद उठाया गया था।

Baisaran Terror Attack: बड़ा खुलासा! PoK का रावलाकोट है आतंक का एक्सपोर्ट हब, पहलगाम हमले के बाद जनरल असीम मुनीर ने किया था दौरा

Baisaran Terror Attack: PoK’s Rawalakot Emerges as Terror Export Hub

Baisaran Terror Attack: पहलगाम आतंकी हमले में पाकिस्तान के शामिल होने के लिंक सबके सामने हैं। यह आतंकी लिंक कितना गहरा और खतरनाक है, इसकी जांच-पड़ताल में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए इस हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। जांच में अब सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि इस कश्मीर आतंकी हमला की साजिश पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) के रावलाकोट शहर में रची गई थी। पहलगाम आतंकी हमला के पीछे लश्कर-ए-तैइबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM), और लश्कर की शाखा ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) का हाथ है, जिन्हें पाकिस्तानी सेना और ISI का पूरा सपोर्ट था। रावलाकोट में खुलेआम आतंकवादियों के ट्रेनिंग कैंप चल रहे हैं, जिनकी निगरानी पाकिस्तान की सेना करती है।

Baisaran Terror Attack: PoK’s Rawalakot Emerges as Terror Export Hub

Baisaran Terror Attack: आतंक का एक्सपोर्ट हब बना रावलाकोट

पाक अधिकृत कश्मीर के रावलाकोट के निवासी और मानवाधिकार कार्यकर्ता औऱ कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी के नेता सरदार नासिर अजीज खान ने सनसनीखेज खुलासा किया है। नासिर, जो अब यूरोप में शरण लिए हुए हैं, उन्होंने बताया कि पहलगाम आतंकी हमला (Baisaran Terror Attack) की योजना रावलाकोट में एक गुप्त बैठक में बनाई गई। इस बैठक में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, और ISI के अधिकारी शामिल थे। नासिर के पास एक वीडियो भी है, जिसमें आतंकी सरगनाओं और ISI के बीच साजिश की बातचीत दर्ज है। वीडियो में लश्कर के उपप्रमुख सैफुल्लाह और कमांडर अबू मूसा की भड़काऊ भाषणबाजी साफ सुनाई देती है।

18 अप्रैल को रावलाकोट के खाई गाला में आयोजित एक रैली में अबू मूसा ने कहा, “भारत ने अनुच्छेद 370 हटाकर कश्मीर की जनसांख्यिकी बदलने की कोशिश की। तुमने 10 लाख सैनिक तैनात किए। तुम पुलवामा, पुंछ, राजौरी में ‘राम राम’ की गूंज चाहते हो। लश्कर-ए-तैयबा तुम्हारी इस चुनौती को स्वीकार करता है। इंशाल्लाह, हम गोलियां बरसाएंगे, तुम्हारी गर्दनें काटेंगे और अपने शहीदों के बलिदान का सम्मान करेंगे।” यह भाषण पहलगाम हमले (Baisaran Terror Attack) से चार दिन पहले दिया गया था।

Baisaran Terror Attack: हमले के बाद गुपचुप PoK पहुंचे थे मुनीर

नासिर ने खुलासा किया कि जनरल असीम मुनीर 24 अप्रैल, 2025 को PoK के गिलगित-बल्तिस्तान क्षेत्र में पहुंचे। यह दौरा भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करने, अटारी बॉर्डर बंद करने, और पाकिस्तानी नागरिकों को 48 घंटे में देश छोड़ने के अल्टीमेटम के ठीक एक दिन बाद हुआ। मुनीर का यह दौरा गुप्त था, और इसे लेकर आधिकारिक तौर पर पाकिस्तानी सेना या सरकार की ओर से कोई बयान जारी नहीं किया गया। मुनीर ने वहां PoK में उच्च-स्तरीय सैन्य अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन के साथ एक गुप्त बैठक की। इस बैठक का मकसद PoK में चल रहे आतंकी प्रशिक्षण शिविरों की स्थिति का जायजा लेना और भारत के कड़े कदमों के जवाब में रणनीति तैयार करना हो सकता है। वहीं, मुनीर का PoK जाना यह भी बताता है कि पाकिस्तान खुद को अंतरराष्ट्रीय आलोचना से बचाने के लिए ‘सुरक्षित लॉन्चिंग’ और ‘डिनायल नेटवर्क’ की रणनीति पर काम कर रहा है। यानी आतंकियों को सक्रिय तो रखा जाएगा, लेकिन सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना या आईएसआई के जुड़ाव के सबूत छोड़ने से बचने की कोशिश होगी।

नासिर का कहना है कि पूर्व पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में स्वीकार किया था कि वे आतंकियों को प्रशिक्षण देते हैं और कश्मीर भेजते हैं। वर्तमान सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर भी इस नीति को जारी रखे हुए हैं।

बता दें कि जनरल असीम मुनीर हाल के महीनों में अपनी भड़काऊ बयानबाजी के लिए चर्चा में रहे हैं। 15 अप्रैल, 2025 को एक मदरसा छात्र के रूप में उन्होंने कश्मीर को पाकिस्तान की “गले की नस” बताया और दो-राष्ट्र सिद्धांत का समर्थन किया। 16 अप्रैल को दिए एक और भाषण में उन्होंने कहा कि हिंदू और मुसलमान कभी एक साथ नहीं रह सकते। एक पूर्व पाकिस्तानी सेना में अफसर रहे अफसर आदिल रजा ने दावा किया था कि यह हमला मुनीर के व्यक्तिगत आदेश पर हुआ, हालांकि उन्होंने इसे व्यक्तिगत कार्रवाई बताकर पाकिस्तानी सेना को जिम्मेदारी से मुक्त करने की कोशिश की। भारतीय खुफिया सूत्रों ने भी मुनीर को (Baisaran Terror Attack) हमले का मास्टरमाइंड बताया और कहा कि वह कश्मीर मुद्दे को प्राथमिकता देकर पाकिस्तान के आंतरिक संकटों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।

खुफिया सूत्रों के अनुसार, PoK में वर्तमान में 42 आतंकी लॉन्च पैड सक्रिय हैं, जहां करीब 130 आतंकी मौजूद हैं। मुनीर का दौरा इन शिविरों की गतिविधियों को और तेज करने या उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश हो सकता है, खासकर तब जब भारत ने इन शिविरों को निशाना बनाने की बात कही है।

Baisaran Terror Attack: PoK’s Rawalakot Emerges as Terror Export Hub

Baisaran Terror Attack: खुले आम आतंकी निकालते हैं रैलियां

नासिर ने साफ शब्दों में कहा कि रावलाकोट और पीओके के दूसरे इलाकों को ‘लॉन्चिंग पैड’ के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। यहां से आतंकवादियों को ट्रेनिंग देकर भारतीय सीमा में घुसपैठ के लिए भेजा जाता है। उन्होंने बताया कि रावलाकोट और मुजफ्फराबाद में चल रहे आतंकी शिविरों को न केवल ISI बल्कि पाकिस्तानी सेना भी समर्थन देती है। उन्होंने बताया कि ये संगठन खुले तौर पर रैलियां निकालते हैं, हथियार लहराते हैं और भारत के खिलाफ जहर उगलते हैं। उन्होंने कहा, “अगर पाकिस्तानी सरकार नहीं चाहे, तो एक चिड़िया भी पर नहीं मार सकती। लेकिन ये आतंकी संगठन हजारों की संख्या में रैलियां निकालते हैं, हथियारों के साथ। यह साफ है कि उनके पीछे कौन है।”

Baisaran Terror Attack: PoK’s Rawalakot Emerges as Terror Export Hub

Baisaran Terror Attack: बच्चों का अपहरण कर बनाते हैं आतंकी

नासिर ने बताया कि रावलाकोट और मुजफ्फराबाद में आज भी आतंकी प्रशिक्षण शिविर सक्रिय हैं, जिन्हें पाकिस्तानी सेना ऑपरेट करती है। इन शिविरों में गरीब बच्चों को मदरसों से अपहरण कर प्रशिक्षण शिविरों में ले जाकर हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है और फिदायीन बनाया जाता है। उन्होंने बताया कि दो साल पहले रावलाकोट (Baisaran Terror Attack) के पास रावलाबाग से 22 किशोर बच्चे, जो मदरसों में पढ़ते थे, अचानक गायब हो गए। जब उनके माता-पिता ने विरोध शुरू किया, तो स्थानीय प्रशासन ने कहा कि बच्चे “प्रशिक्षण” के लिए गए हैं और जल्द लौट आएंगे। लेकिन उनमें से कोई भी बच्चा वापस नहीं लौटा। नासिर ने कहा, “ये बच्चे आतंकी बनाए जाते हैं। उनके नाम बदल दिए जाते हैं, और कई बार तो उन्हें प्रशिक्षण के दौरान ही मार दिया जाता है।” नासिर ने कहा, “ये बच्चे निर्दोष हैं। उन्हें ब्रेनवॉश कर फिदायीन बनाया जाता है। यह मानवता के खिलाफ अपराध है।”

Baisaran Terror Attack: PoK में चीनी कंपनियां कर रही हैं खनिजों की लूट

नासिर ने बताया कि PoK में प्राकृतिक संसाधनों की लूट हो रही है। रावलाकोट और गिलगित-बल्तिस्तान (Baisaran Terror Attack) में सोने की खदानें, यूरेनियम और अन्य कीमती खनिज पाए गए हैं। लेकिन इन संसाधनों का दोहन पाकिस्तान की सरकार और सेना चीनी कंपनियों के जरिए कर रही है। नासिर ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के अनुसार, PoK एक विवादित क्षेत्र है, और पाकिस्तान का इन संसाधनों पर कोई कानूनी अधिकार नहीं है। फिर भी, पाकिस्तान ने चीनी कंपनियों को खनन, बांध निर्माण और बिजली परियोजनाओं के लिए खुली छूट दे रखी है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि वह खुद इन परियोजनाओं को नहीं चला सकता। इसलिए उसने चीन को PoK में खुली छूट दी है।” उन्होंने कहा कि चीन की मौजूदगी PoK में न केवल खनन तक सीमित है, बल्कि CPEC परियोजनाओं और बांध निर्माण में भी उसकी भागीदारी है। नासिर ने कहा कि PoK की जनता को इन संसाधनों का कोई लाभ नहीं मिलता।

Baisaran Terror Attack: PoK में गरीबी और बेरोजगारी चरम पर

नासिर ने PoK की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि PoK की कुल आबादी लगभग 50 लाख है, जिसमें से 20 लाख लोग रोजगार की तलाश में खाड़ी देशों और मध्य पूर्व में पलायन कर चुके हैं। वहां न उद्योग हैं, न रोजगार के अवसर। सरकारी नौकरियां केवल उन लोगों को मिलती हैं, जो पाकिस्तान के प्रति वफादारी की शपथ लेते हैं। सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की स्थिति बदहाल है। 2005 के भूकंप के बाद यूएई ने रावलाकोट और मुजफ्फराबाद में अस्पताल बनाए थे, लेकिन वहां की आधुनिक मशीनें भी हटा ली गईं, क्योंकि उन्हें चलाने वाला कोई नहीं था। नासिर ने कहा, “जो लोग विदेशों से पैसा कमाते हैं, वे निजी स्कूलों और अस्पतालों का खर्च उठा सकते हैं। लेकिन गरीबों के बच्चे या तो मदरसों में जाते हैं या आतंकी शिविरों में जबरन भेज दिए जाते हैं।”

सरदार नासिर अजीज खान ने भारत और खासकर कश्मीर के मुस्लिमों (Baisaran Terror Attack) की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारतीय मुसलमानों ने हमेशा आतंकवाद के खिलाफ और शांति के पक्ष में खड़े होने का उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कहा कि कश्मीर घाटी में “हिंदू-मुस्लिम भाईचारे” के नारे लगना इस साजिश का सबसे करारा जवाब है, जो पाकिस्तान रचने की कोशिश कर रहा है।

कोकेरनाग के रास्ते बैसरन पहुंचे थे आतंकी

बता दें कि पहलगाम हमले (Baisaran Terror Attack) में छह आतंकियों ने किश्तवाड़ से होते हुए कोकेरनाग के रास्ते बैसरन पहुंचकर 26 लोगों को गोलियों से भून डाला। ये आतंकी स्थानीय सहयोगियों यानी ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGW) की मदद से पर्यटकों के बीच घुसे और इस हमले को अंजाम दिया। जांच में पता चला कि आतंकियों ने अप्रैल के पहले सप्ताह में पहलगाम के पर्यटक स्थलों और होटलों की रेकी की थी। पहलगाम हमले में आतंकियों ने अत्याधुनिक अमेरिकी हथियार M4 राइफल का इस्तेमाल किया, जो आमतौर पर अमेरिकी और नाटो सैनिकों द्वारा उपयोग किया जाता है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, ये हथियार अफगानिस्तान से तस्करी के जरिए PoK पहुंचे। जब अमेरिका ने 2021 में अफगानिस्तान से अपनी सेना वापस बुलाई, तो लगभग 80 बिलियन डॉलर के हथियार वहां छोड़ दिए गए। तालिबान के कब्जे के बाद ये हथियार विभिन्न आतंकी संगठनों के हाथ लगे, जिन्हें ISI के जरिए PoK में सक्रिय आतंकियों तक पहुंचाया गया।

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‘अल्पाइन क्वेस्ट’ एप हो रही मददगार

जांच एजेंसियों ने खुलासा किया कि पहलगाम हमले (Baisaran Terror Attack) में आतंकियों ने ‘अल्पाइन क्वेस्ट’ नामक एक एन्क्रिप्टेड नेविगेशन ऐप का इस्तेमाल किया। यह एप एडवांस जीपीएस मैपिंग और ऑफलाइन ट्रैकिंग की सुविधा प्रदान करता है, जिसकी मदद से आतंकी घने जंगलों से होकर पहलगाम पहुंचे और भारतीय सुरक्षा बलों की नजरों से बचे रहे। सूत्रों के मुताबिक, इस एप को पाकिस्तानी सेना की देखरेख में बनाया गया था ताकि भारतीय खुफिया एजेंसियों की निगरानी से बचा जा सके। आतंकियों को इस एप के इस्तेमाल की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि वे मुश्किल इलाकों में आसानी से रास्ता ढूंढ सकें।

Pahalgam Terror Attack: भारत ने दुनिया को दिखाए पाकिस्तान के हाथ होने के सबूत, TRF के इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर दो जगहों पर किए ट्रेस

Pahalgam Terror Attack: India Traces TRF Electronic Signature to Pakistan

Pahalgam Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने दुनिया के सामने पाकिस्तान के हाथ होने के सबूत रखे हैं। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी। अब भारत ने टेक्निकल इंटेलिजेंस और चश्मदीद गवाहों के भरोसेमंद बयानों के आधार पर यह स्पष्ट कर दिया है कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों का हाथ है।

Pahalgam Terror Attack: India Traces TRF Electronic Signature to Pakistan

भारत ने इस हमले के बाद तुरंत कूटनीतिक और रणनीतिक कदम उठाए। पिछले दो दिनों में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 वैश्विक नेताओं से फोन पर बात की, जबकि विदेश सचिव विक्रम मिस्री और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने दिल्ली में 30 से ज्यादा देशों के राजदूतों के साथ बैठकें कीं। इन बैठकों में भारत ने पाकिस्तानी आतंकी लिंक को साबित करने वाले सबूत पेश किए।

Pahalgam Terror Attack: क्या हैं सबूत?

भारतीय खुफिया एजेंसियों ने पहलगाम आतंकी हमला (Pahalgam Terror Attack) के आतंकियों की पहचान कर ली है। तकनीकी खुफिया जानकारी से पता चला है कि पाकिस्तान के आतंकी समूह लश्कर-ए-तैयबा के शेडो ग्रुप ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) के इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर पाकिस्तान के दो जगहों पर ट्रेस किए गए हैं। खुफिया एजेंसियों ने मोबाइल सिग्नल, इलेक्ट्रॉनिक संचार, रेडियो फ्रीक्वेंसी मॉनिटरिंग) के जरिये आतंकियों की लोकेशन को पकड़ा। आतंकी कुछ समय पहले सीमा पार से भारत में दाखिल हुए थे और छिपे हुए थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हमलावरों में कम से कम चार आतंकी शामिल थे, जिनमें दो विदेशी (पाकिस्तानी) थे।

खुफिया सूत्रों के अनुसार, इस हमले की योजना बहुत सावधानी से बनाई गई थी। आतंकियों ने पहले बैसरन घाटी की रेकी की और सही समय का इंतजार किया। बता दें कि पाकिस्तान ने हमले से पहले ही सीमा पर तैनाती बढ़ाई और पाकिसानी सेना के जनरल आसिम मुनीर ने सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने की बात कही थी।

इसके अलावा, चश्मदीद गवाहों और अन्य खुफिया स्रोतों से मिले संकेत भी साफ बताते हैं कि हमलावर पाकिस्तान से आए थे और कुछ समय से जम्मू-कश्मीर में छिपे हुए थे।

Pahalgam Terror Attack: भारत की कूटनीतिक जवाबी कार्रवाई

पहलगाम आतंकी हमला (Pahalgam Terror Attack) के बाद भारत ने भारत-पाकिस्तान सीमा तनाव को देखते हुए कड़े कूटनीतिक कदम उठाए। भारत ने 1960 के सिंधु जल समझौते को निलंबित कर दिया, अटारी सीमा चौकी को बंद कर दिया, और पाकिस्तानी राजनयिकों को ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ घोषित कर सात दिनों में देश छोड़ने का आदेश दिया। इसके अलावा, भारत ने इस्लामाबाद में अपने दूतावास के कर्मचारियों को वापस बुला लिया और SAARC वीजा छूट योजना के तहत पाकिस्तानी नागरिकों को भारत में प्रवेश पर रोक लगा दी।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा, “इस कश्मीर आतंकी हमला के सीमा पार संबंध स्पष्ट हैं। हम आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाएंगे।” भारत ने इन कदमों को वैश्विक समुदाय के सामने जायज ठहराया, जिसका मकसद पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करना और उस पर दबाव बढ़ाना है।

Pahalgam Terror Attack: कई देशों के नेताओं ने दिया समर्थन

पहलगाम आतंकी हमले (Pahalgam Terror Attack) के बाद 13 वैश्विक नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की और हमले की निंदा की। इनमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर शामिल हैं। स्टार्मर ने इसे “भयावह” और डच प्रधानमंत्री डिक स्कूफ ने इसे “कायराना कृत्य” करार दिया। सभी ने भारत के साथ एकजुटता जताई और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में समर्थन का वादा किया।

पीएम मोदी ने इन नेताओं का आभार जताया और कहा, “भारत आतंकियों और उनके समर्थकों को धरती के किसी भी कोने से ढूंढकर सजा देगा।” विदेश मंत्री एस जयशंकर भी लगातार सक्रिय हैं। उन्होंने सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद से बातचीत की। इज़राइल, नेपाल, मिस्र और अर्जेंटीना के राजदूतों से मुलाकात की। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट से भी फोन पर चर्चा की। इसके अलावा जर्मनी के चांसलर के सलाहकार जेंस प्लॉटनर से भी मुलाकात की।

Pahalgam Terror Attack: पर्यटन को लगा झटका

पहलगाम आतंकी हमले (Pahalgam Terror Attack) ने कश्मीर के पर्यटन उद्योग को गहरा झटका दिया है। 2024 में 35 लाख पर्यटकों ने कश्मीर का दौरा किया था, लेकिन इस हमले के बाद कई बुकिंग रद्द हो गईं। भारत ने वैश्विक समुदाय को आश्वस्त किया कि कश्मीर पर्यटन सुरक्षा बरकरार है और विदेशी पर्यटकों के लिए कोई खतरा नहीं है। हालांकि, अमेरिका और ब्रिटेन ने यात्रा सलाह जारी की है, जिसे भारत ने गैरजरूरी बताया है।

Pahalgam Attack: सीमा पार से घुसपैठ को रोकने के लिए सेना बनाएगी अस्थायी ऑपरेटिंग बेस, ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात होंगे सैनिक

वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार के मधुबनी में एक रैली में कहा, “हम हर आतंकी को ट्रैक करेंगे और सजा देंगे। भारत का हौसला आतंकवाद से कभी नहीं टूटेगा।” आतंकवादी फंडिंग व्यवधान और ड्रोन-रोधी तकनीक कश्मीर जैसे कदमों के जरिए भारत आतंकवाद के इकोसिस्टम को खत्म करने की कोशिश कर रहा है। वहीं, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, “यह हमला कश्मीरियत के खिलाफ है। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

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Pahalgam Attack: Army to Set Up Temporary Bases, Deploy Troops in Higher Reaches

Pahalgam Attack: जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत पर्यटक स्थल पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए भीषण आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हमले में बैसरन घाटी में 26 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। इस घटना के बाद भारतीय सेना ने कश्मीर घाटी के प्रमुख पर्यटक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच करने और सैनिकों की दोबारा तैनाती करने का फैसला किया है। इसका मकसद पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आगामी अमरनाथ यात्रा को निर्बाध रूप से संपन्न कराना है।

Pahalgam Attack: Army to Set Up Temporary Bases, Deploy Troops in Higher Reaches

Pahalgam Attack: क्या हुआ था पहलगाम में?

पहलगाम को अपनी प्राकृतिक सुंदरता के चलते ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ भी कहा जाता है। यह पर्यटकों के लिए स्वर्ग जैसा है। लेकिन मंगलवार दोपहर करीब 2:30 बजे, बाइसारन घाटी में उस समय खौफ का माहौल बन गया, जब 3 से 6 आतंकियों ने अचानक वहां मौजूद पर्यटकों पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी संगठन ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली। हमले में 24 भारतीय पर्यटक, दो विदेशी और एक स्थानीय नागरिक की जान चली गई। मरने वालों में हरियाणा के एक नौसेना अधिकारी लेफ्टिनेंट विनय नरवाल और एक खुफिया ब्यूरो (IB) अधिकारी भी शामिल थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आतंकियों ने पहले पर्यटकों के नाम और धर्म पूछे। कुछ पुरुष पर्यटकों को कलमा पढ़ने के लिए कहा गया, और कुछ को शारीरिक जांच के बाद गोली मार दी गई। यह हमला करीब 30 मिनट तक चला, जिसके बाद आतंकी घने जंगलों की आड़ लेकर फरार हो गए। यह कश्मीर में 2019 के पुलवामा हमले के बाद सबसे बड़ा आतंकी हमला है, जिसने सुरक्षा व्यवस्थाओं की खामियों को उजागर किया।

Pahalgam Attack: बनाए जाएंगे अस्थायी ऑपरेटिंग बेस

पहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शुक्रवार को कश्मीर का दौरा किया और सुरक्षा हालात का जायजा लिया। सेना ने घाटी के सभी प्रमुख पर्यटक स्थलों का सुरक्षा ऑडिट करने का फैसला किया है। इसके तहत बैसरन जैसी दूरदराज की घाटियों वाले इलाकों की जांच की जाएगी, जो आतंकी हमलों के लिए संवेदनशील हैं।

सेना अब अपनी मौजूदा टुकड़ियों को कश्मीर के भीतरी इलाकों से उन क्षेत्रों में तैनात करेगी, जहां खतरा ज्यादा है। गर्मियों में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सैनिकों की गश्त बढ़ाई जाएगी, ताकि सीमा पार से घुसपैठ को रोका जा सके और आतंकियों को छिपने की जगह न मिले। इसके लिए अस्थायी ऑपरेटिंग बेस (Temporary Operating Bases) का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जाएगा। ये बेस सैनिकों को 72 से 96 घंटे तक किसी क्षेत्र में ऑपरेशन चलाने की सुविधा देंगे, जिससे बड़े इलाकों में तलाशी अभियान चलाए जा सकें।

सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “यह हमला आतंकियों की हताशा को दर्शाता है। वे सुरक्षा बलों से सीधे मुकाबला नहीं कर पा रहे, इसलिए निहत्थे नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। बैसरन घाटी में हमला इसलिए हुआ, क्योंकि यह इलाका मुख्य सैन्य बेस से 40 मिनट की दूरी पर है और वहां तत्काल जवाबी कार्रवाई मुश्किल थी।” साथ ही, ये सड़क से लगा हुआ नहीं है, और पैदल यहां पहुंचने में एक घंटे से ऊपर का वक्त लग जाता है।

Pahalgam Attack: अमरनाथ यात्रा पर मंडराया खतरा

पहलगाम हमला ऐसे समय हुआ है, जब अमरनाथ यात्रा की तैयारियां जोरों पर हैं। यह यात्रा 3 जुलाई से शुरू होगी और 38 दिनों तक चलेगी। पहलगाम इस यात्रा का एक प्रमुख आधार शिविर है, जहां से हजारों श्रद्धालु अमरनाथ गुफा की ओर रवाना होते हैं। 2024 में इस यात्रा में 5.12 लाख श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया था, जो एक दशक में सबसे ज्यादा था। लेकिन इस हमले के बाद यात्रा पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।

जम्मू के होटल और लॉज एसोसिएशन के अध्यक्ष इंदजीत खजुरिया ने कहा, “यह हमला पर्यटन उद्योग के लिए बड़ा झटका है। अमरनाथ यात्रा की घोषणा के ठीक बाद यह हुआ, जिससे तीर्थयात्रियों में डर फैल गया है। हम चाहते हैं कि इस यात्रा की सुरक्षा का जिम्मा पूरी तरह सेना को सौंपा जाए।” कई पर्यटकों ने अपनी बुकिंग रद्द कर दी है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है।

पहलगाम हमला कश्मीर में शांति की दिशा में एक बड़ा झटका है। 2024 में कश्मीर में 35 लाख पर्यटक आए थे, जिनमें 43,000 विदेशी थे। लेकिन इस हमले ने पर्यटन उद्योग को गहरी चोट पहुंचाई है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, “यह हमला कश्मीरियत और भारत के विचार पर हमला है। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

Pahalgam Terrorist Attack: आतंकी खतरे का आकलन

खुफिया सूत्रों के मुताबिक, इस हमले के पीछे लश्कर-ए-ताइबा के कमांडर सैफुल्लाह कसूरी उर्फ खालिद का हाथ है। माना जा रहा है कि आतंकी जम्मू के किश्तवाड़ से कोकेरनाग होते हुए बैसरन घाटी तक पहुंचे। भारत-पाकिस्तान सीमा की 3,323 किलोमीटर लंबी रेखा, जो पहाड़ों और घने जंगलों से घिरी है, को पूरी तरह सुरक्षित करना चुनौतीपूर्ण है। आतंकी स्थानीय नेटवर्क और सुरंगों का इस्तेमाल कर घुसपैठ करते हैं।

पहलगाम हमले के बाद खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि सीमा पार से समर्थित आतंकी और स्थानीय असंतोष का फायदा उठाकर और हमले हो सकते हैं। पंजाब और हिमाचल प्रदेश से सटे कठुआ, डोडा और किश्तवाड़ जैसे इलाकों में आतंकी गतिविधियां बढ़ रही हैं। अनुमान है कि जम्मू-कश्मीर में पंजाल रेंज के उत्तर में 75-80 आतंकी सक्रिय हैं, जिनमें 50 से ज्यादा विदेशी हैं। दक्षिण में 45-50 आतंकी हैं, जिनमें 30 से ज्यादा विदेशी शामिल हैं।

भारत का जवाब

इस हमले के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने 1960 के सिंधु जल समझौते को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं बंद कर दीं। अटारी-वाघा सीमा पर एकीकृत जांच चौकी को भी बंद कर दिया गया है। विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने कहा, “पाकिस्तान जब तक सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक यह निलंबन जारी रहेगा।”

सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा (LoC) पर अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा दी है, क्योंकि उसे भारत से जवाबी कार्रवाई की आशंका है। भारत ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान की ओर से किसी भी संघर्ष विराम उल्लंघन का कड़ा जवाब दिया जाएगा। सेना अब ड्रोन-रोधी तकनीक, सुरंग-रोधी उपायों और आतंकी फंडिंग को रोकने पर काम कर रही है।

LoC पर छोटे हथियारों से फायरिंग

गुरुवार और शुक्रवार रात को पाकिस्तानी सेना ने बारामूला-कुपवाड़ा के बीच नौगाम क्षेत्र में LoC पर छोटे हथियारों से फायरिंग शुरू की, जिसका भारतीय सेना ने कड़ा जवाब दिया। पाकिस्तान ने करीब 600 राउंड गोलीबारी की, जबकि भारत ने 1300 राउंड फायर किए। छोटे हथियारों में राइफल, कार्बाइन, लाइट मशीन गन (LMG) और रॉकेट लॉन्चर शामिल थे, हालांकि मोर्टार का इस्तेमाल नहीं हुआ। 778 किलोमीटर लंबी LoC पर कई जगहों से रातभर फायरिंग की आवाजें सुनाई दीं, लेकिन भारतीय सीमा में कोई गोलीबारी नहीं हुई।

Pahalgam attack: पहलगाम हमले से पहले टीला रेंज में पाकिस्तान का War Rehearsal, क्या ये इत्तेफाक था? इस अफसर ने किया था कमांड! LoC पर बढ़ाया बिल्डअप

भारतीय सेना ने पूरे LoC पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। इसका मतलब है कि सभी महत्वपूर्ण चौकियों पर सैनिक हर समय तैयार रहते हैं। क्विक रिएक्शन टीमें (QRT) तुरंत कार्रवाई के लिए तैनात हैं। राशन का 7 से 15 दिन का रिजर्व स्टॉक, गोला-बारूद और अन्य संसाधन हर यूनिट में सुनिश्चित किए गए हैं। प्रत्येक यूनिट की भौगोलिक स्थिति और कार्य के आधार पर अलर्ट स्तर अलग-अलग है। मोबलाइजेशन स्कीम के तहत यूनिट्स अपनी तैयारियों को पूरा रखती हैं, जिसमें छुट्टियों को रद्द करने जैसे कदम भी शामिल हैं।

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Pahalgam Attack Preceded by Pakistan's 'War Drill' at Tilla Range, Coincidence or Calculated Move?

Pahalgam attack: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाक समर्थित लश्कर के आतंकी हमले में 28 लोगों की जान जाने के बाद भारत-पाकिस्तान संबंध एक बार फिर से तनावपूर्ण हो गए हैं। इस हमले के बाद पाकिस्तानी सेना की ओर से नियंत्रण रेखा (LoC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सैन्य गतिविधियों में तेजी देखी गई है। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने अपनी आर्टिलरी और बख्तरबंद (आर्मर्ड) इकाइयों का जमावड़ा LoC और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास बढ़ा दिया है। इसके साथ ही, हमले से ठीक पहले पाकिस्तानी पंजाब के झेलम जिले में टीला रेंज में सैन्य अभ्यास के नाम पर बड़े पैमाने पर सैन्य तैनाती की गई थी। बताया जा रहा है कि इस एक्सरसाइज का नेतृत्व लाहौर स्थित 4 कोर के पूर्व जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल सलमान फैय्याज घनी ने किया था। उनका घर जिन्ना हाउस, मई 2023 में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) समर्थकों ने जलाया था।

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8 अप्रैल को टीला रेंज में हुई थी मिलिट्री एक्सरसाइज

पाकिस्तानी सेना ने पहलगाम हमले से ठीक पहले झेलम के टीला रेंज में 8 अप्रैल को एक सैन्य अभ्यास शुरू किया था। टीला रेंज भारत-पाकिस्तान सीमा के करीब है, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका है। सूत्रों के अनुसार, इस अभ्यास में आर्टिलरी, बख्तरबंद वाहन, और अन्य भारी हथियारों की तैनाती शामिल थी। इस एक्सरसाइज में पाकिस्तान की स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG), आर्मी एविएशन, और एयर डिफेंस यूनिट्स ने हिस्सा लिया था। यह पाकिस्तान सेना और वायुसेना का संयुक्त सैन्य अभ्यास था। यहां पर मशहूद टेस्ट फायरिंग रेंज (Mashhood Test Firing Range) भी है।

कहने के लिए यह अभ्यास कथित तौर पर नियमित सैन्य प्रशिक्षण का हिस्सा था, लेकिन इसकी टाइमिंग और जगह पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों का मानना है कि यह अभ्यास केवल एक दिखावा था, जिसका असली मकसद LoC और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अपनी सैन्य ताकत को दिखा कर भारत पर दबाव बनाना था। पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तानी सेना की ओर से LoC पर छोटे हथियारों से गोलीबारी की खबरें भी सामने आईं, जिसका भारतीय सेना ने माकूल जवाब दिया।

लेफ्टिनेंट जनरल सलमान फैय्याज घनी  

इस सैन्य अभ्यास का नेतृत्व 4 कोर के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल सलमान फैय्याज घनी ने किया था। घनी का नाम हाल ही में उस समय सुर्खियों में आया था, जब मई 2023 में PTI समर्थकों ने उनके आधिकारिक आवास, जिन्ना हाउस, पर हमला कर उसे आग के हवाले कर दिया था। यह हमला पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद भड़के दंगों के बाद हुआ था। हालांकि इस घटना के बाद घनी समेत तीन अधिकारियों को 9 मई की हिंसा में सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में विफलता के चलते पद से हटा कर उन्हें जीएचक्यू बुला लिया गया था। हालांकि जीएचक्यू में उन्हें क्या जिम्मेदारी दी गई, यह साफ नहीं हो पाया है।

Pahalgam Attack Preceded by Pakistan's 'War Drill' at Tilla Range, Coincidence or Calculated Move?
Lt Gen salman fayyaz ghani

सलमान फैयाज घनी ने पाकिस्तान मिलिट्री एकेडमी (PMA) के 79वें लॉन्ग कोर्स में ट्रेनिंगली और फ्रंटियर फोर्स रेजिमेंट (10वीं बटालियन) में सेकंड लेफ्टिनेंट के बने। नवंबर 2020 में उन्हें लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर पदोन्नत किया गया और जनरल हेडक्वार्टर्स (GHQ) में इंस्पेक्टर जनरल (आर्म्स) नियुक्त किया गया। जिसके बाद अक्टूबर 2022 में उन्हें लाहौर कोर का कोर कमांडर नियुक्त किया गया था।

LoC और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बढ़ाई तैनाती 

पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तानी सेना ने LoC और अंतरराष्ट्रीय सीमा, खासकर सियालकोट डिवीजन में, अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने अपने 10 कोर, जो रावलपिंडी में मुख्यालय रखता है, और सियालकोट में तैनात बलों को हाई अलर्ट पर रखा है। भारत की ओर से जवाबी कार्रवाई की आशंका के चलते सैनिकों को बंकरों के अंदर रहने और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

पाकिस्तानी वायुसेना ने भी उत्तरी हवाई क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक खुफिया और हवाई चेतावनी प्रणाली (AEW&C) विमानों को तैनात कर दिया है। भारतीय वायुसेना के डिफेंस स्ट्रक्चर्स और कॉमर्शियल रडार्स ने पाकिस्तानी वायुसेना की हवाई गतिविधियों को दर्ज किया है। इसके अलावा, पाकिस्तानी सेना ने अपनी एयर एसेट्स को दक्षिणी क्षेत्र से उत्तरी क्षेत्र की ओर स्थानांतरित किया है, जो भारत की संभावित जवाबी कार्रवाई को रोकने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

भारतीय खुफिया एजेंसियों का मानना है कि पहलगाम हमले की साजिश लंबे समय से बनाई जा रही थी, जिसके लिए बकायदा इस इलाके की रेकी भी की गई। इस हमले के समय दोनों देशों के प्रधानमंत्री अपने-अपने देशों से बाहर थे। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब में और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ तुर्की में थे।

वहीं, पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल सईद असीम मुनीर ने हाल ही में कश्मीर को पाकिस्तान की “जुगुलर वेन” (महत्वपूर्ण नस) करार देते हुए भारत के खिलाफ भड़काऊ भाषण दिए थे। सूत्रों का कहना है कि यह बकायदा पाकिस्तानी सेना की रणनीति थी। वह देश के अंदरूनी संकट, खासकर इमरान खान और PTI के साथ चल रहे टकराव से ध्यान हटाने के लिए भारत के खिलाफ तनाव बढ़ाना चाहती थी।

पाकिस्तान में सेना के खिलाफ जनता का गुस्सा बढ़ रहा है, खासकर अप्रैल 2022 में जिस तरह से इमरान खान को प्रधानमंत्री पद से हटाया गया, लोग उससे नाराज हैं। मई 2023 में खान की गिरफ्तारी के बाद हुए दंगों में जिन्ना हाउस पर हमला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। जनरल मुनीर, जो खुद को “हाफिज-ए-कुरान” कहते हैं, भारत के खिलाफ भावनाओं को भड़काकर जनता का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

वहीं, भारत ने पहलगाम हमले के बाद कड़े कदम उठाए हैं, जिसमें अटारी में इंटीग्रेटेड चेक पॉइंट को बंद करना, पाकिस्तानी नागरिकों के लिए सार्क वीजा छूट योजना को निलंबित करना, और 1960 की सिंधु जल संधि को रद्द करना शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया है कि इस हमले के जिम्मेदार आतंकवादियों और उनके समर्थकों को कड़ी सजा दी जाएगी।

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भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी भी शुक्रवार को श्रीनगर पहुंचे हैं, जहां वे सेना के उच्च अधिकारियों से जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति का जायजा लेंगे। भारतीय सेना ने भी LoC पर अपनी निगरानी बढ़ा दी है और आतंकवादियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया है।