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Cyber Attack: अपनी हरकतों से नहीं बाज आ रहा पाकिस्तान, पाक हैकर ग्रुप ने डिफेंस वेबसाइट्स पर किया साइबर अटैक, एजेंसियां अलर्ट

Cyber Attack: Pakistan Hackers Target Indian Defense Websites, Agencies on Alert

Cyber Attack: भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नया मोर्चा अब साइबर स्पेस में भी खुल गया है। ट्विटर पर सक्रिय एक हैंडल ‘Pakistan Cyber Force’ ने दावा किया है कि उसने भारत की दो प्रमुख रक्षा संस्थाओं Indian Military Engineering Service (MES) और Manohar Parrikar Institute of Defence Studies and Analysis (MP-IDSA) के डाटा सिस्टम को हैक कर लिया है। इस डाटा में रक्षा कर्मियों की व्यक्तिगत जानकारी और लॉगइन क्रेडेंशियल्स शामिल होने की आशंका जताई जा रही है।

हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह दावा भारत की साइबर सुरक्षा व्यवस्था पर सीधा हमला माना जा रहा है। खासकर उस वक्त जब भारत और पाकिस्तान के बीच पहलगाम आतंकी हमले के बाद तनाव पहले से ही चरम पर है।

Cyber Attack: क्या हुआ हैक?

‘Pakistan Cyber Force’ का दावा है कि उसने भारतीय रक्षा संस्थानों के संवेदनशील डाटा (Cyber Attack) को एक्सेस कर लिया है, जिसमें सैन्य कर्मियों की व्यक्तिगत जानकारी और लॉगिन क्रेडेंशियल्स जैसी जानकारियां शामिल हैं। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने इसे गंभीरता से लिया है।

‘Pakistan Cyber Force’ के मुताबिक, उन्होंने MP-IDSA और MES की कुछ आंतरिक फाइलों, ईमेल्स और पासवर्ड्स तक पहुंच बनाई है। बता दें कि MES मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर का मैनेजमेंट करता है, जबकि MP-IDSA रक्षा नीतियों और रणनीति पर शोध करता है। हालांकि MP-IDSA के वरिष्ठ अधिकारियों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उनकी वेबसाइट पर ऐसा कोई साइबर हमला (Cyber Attack) नहीं हुआ है। लेकिन साइबर सुरक्षा एजेंसियां फिलहाल इसकी गहन जांच कर रही हैं।

Cyber Attack: डिफेंस पीएसयू की वेबसाइट पर हमला

इतना ही नहीं, पाकिस्तान समर्थित इसी ग्रुप ने Armoured Vehicle Nigam Limited (AVNL), जो रक्षा मंत्रालय के तहत एक सार्वजनिक उपक्रम (PSU) है, उसकी आधिकारिक वेबसाइट को भी डिफेस करने की कोशिश की। वेबसाइट पर पाकिस्तान का झंडा और पाकिस्तानी युद्धक टैंक ‘अल खालिद’ की तस्वीरें दिखाकर भारत को उकसाने की कोशिश की गई। इस घटना के बाद AVNL की वेबसाइट (Cyber Attack) को अस्थायी रूप से ऑफलाइन कर दिया गया है और उसकी पूरी तरह से फॉरेंसिक ऑडिट की जा रही है। AVNL रक्षा मंत्रालय के तहत एक कंपनी है, जो अर्जुन टैंक, T-90 भवानी, और अन्य बख्तरबंद वाहनों का निर्माण करती है।

क्या कह रही हैं एजेंसियां?

MP-IDSA की वरिष्ठ प्रबंधन टीम ने सार्वजनिक रूप से इस बात से इनकार किया है कि उनकी वेबसाइट हैक (Cyber Attack) हुई है। लेकिन सूत्रों के अनुसार, एक उच्च स्तरीय साइबर सुरक्षा समीक्षा की जा रही है और सभी लॉग्स तथा बैकअप को जांचा जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं कोई सेंध तो नहीं लगी।

इस बीच, भारत की रक्षा साइबर एजेंसियां (Cyber Attack) और CERT-In (Computer Emergency Response Team-India) जैसे साइबर सुरक्षा प्राधिकरण मामले की निगरानी कर रहे हैं। इनका उद्देश्य है किसी भी तरह की अतिरिक्त घुसपैठ या भविष्य में संभावित हमलों को समय रहते पहचानना और रोकना।

इस संभावित साइबर अटैक (Cyber Attack) के बाद भारत की सभी प्रमुख साइबर एजेंसियों और रक्षा मंत्रालय की साइबर विंग को अलर्ट मोड पर रखा गया है। संभावित पाकिस्तानी लिंक वाले थ्रेट एक्टर्स की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है ताकि भविष्य में होने वाले किसी बड़े हमले को समय रहते रोका जा सके।

भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश की साइबर सीमाओं की रक्षा उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी भौगोलिक सीमाओं की। इसलिए रियल टाइम मॉनिटरिंग, थ्रेट इंटेलिजेंस और AI आधारित साइबर सुरक्षा समाधान लागू किए जा रहे हैं।

साइबर वॉरफेयर का नया चेहरा

इस पूरे घटनाक्रम को हाइब्रिड वॉरफेयर (Cyber Attack) के नए रूप के तौर पर देखा जा रहा है। पाकिस्तान, सीधे सैन्य टकराव से बचते हुए अब डिजिटल माध्यमों से भारत को नुकसान पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रहा है। ‘हाइब्रिड वॉरफेयर’, जिसमें साइबर हमला, फर्जी खबरें और डेटा मैनिपुलेशन शामिल हैं, का चलन बढ़ गया है। यह घटना उसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जहां दुश्मन देश न केवल फिजिकल बॉर्डर पर बल्कि डिजिटल फ्रंट पर भी भारत को निशाना बना रहे हैं।

भारत की जवाबी तैयारी

सरकारी सूत्रों ने बताया कि भारत सरकार (Cyber Attack) इस पूरे मामले को बहुत गंभीरता से ले रही है। सभी रक्षा मंत्रालय से जुड़ी वेबसाइट्स और सर्वर की सुरक्षा समीक्षा की जा रही है। इसके साथ ही कई साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट्स को तैनात किया गया है जो यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि आगे कोई और सेंध न लग सके।

इसके अलावा, भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए डेटा एन्क्रिप्शन, 2FA (Two-Factor Authentication), AI-संचालित नेटवर्क निगरानी और साइबर-रिस्पॉन्स टीमें तैयार की जा रही हैं।

India-Pakistan Tension: कराची में तुर्की वॉरशिप TCG Büyükada की एंट्री, भारत-पाक तनाव के बीच क्या है इस खास दौरे का मतलब?

क्या है ‘Pakistan Cyber Force’?

‘Pakistan Cyber Force’ खुद को एक राष्ट्रीय हैकर समूह (Cyber Attack) बताता है जो भारत के खिलाफ सूचना युद्ध छेड़ने का दावा करता है। इससे पहले भी यह समूह कई बार भारत की एजेंसियों को साइबर धमकी दे चुका है, लेकिन इस बार उसने रक्षा संस्थानों को निशाना बनाकर एक खतरनाक संकेत दिया है।

India-Pakistan Tension: कराची में तुर्की वॉरशिप TCG Büyükada की एंट्री, भारत-पाक तनाव के बीच क्या है इस ‘खास’ दौरे का मतलब?

India-Pakistan Tension: Turkish Warship TCG Büyükada in Karachi

India-Pakistan Tension: पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, तुर्की नौसेना का युद्धपोत TCG Büyükada 4 मई 2025 को कराची बंदरगाह पर पहुंचा। यह तुर्की के Ada-class पनडुब्बी-रोधी कोरवेट का दूसरा जहाज है, जो 7 मई तक कराची में रहेगा। इससे पहले तुर्की वायुसेना का C-130 हरक्यूलिस विमान कराची में उतरा था, जिसके बाद अटकलें लगाई गई थीं कि क्या तुर्की पाकिस्तान को सैन्य सहायता पहुंचा रहा है? वहीं, TCG Büyükada की इस यात्रा से पहले तुर्की के राजदूत डॉ. इरफान नेजिरोग्लू ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की थी, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के साथ तुर्की की एकजुटता का संदेश दिया था।

India-Pakistan Tension: क्या कहा पाकिस्तानी नौसेना ने?

पाकिस्तानी नौसेना (India-Pakistan Tension) ने इस यात्रा को “सद्भावना यात्रा” बताया है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करना और नौसेनाओं के बीच आपसी समझ बढ़ाना है। तुर्की ने भी इसे नियमित समुद्री दौरे का हिस्सा करार दिया। लेकिन इसकी टाइमिंग और बैकग्राउंड कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। तो क्या यह दौरा सिर्फ ‘नौसैनिक कूटनीति’ तक सीमित है या इसके पीछे कोई छिपा एजेंडा है? कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह भारत को अप्रत्यक्ष रूप से संदेश देने की कोशिश हो सकती है, क्योंकि तुर्की ने आर्टिकल 370 हटाने के वक्त कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन किया है।

कौन है TCG Büyükada?

TCG Büyükada तुर्की नौसेना (India-Pakistan Tension) का एक एडवांस्ड एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (ASW) कॉर्वेट है। यह तुर्की के MİLGEM युद्धपोत कार्यक्रम के तहत बनाया गया दूसरा जहाज है, जिसे 2013 में सेवा में शामिल किया गया था। यह युद्धपोत सतह और पानी के नीचे के खतरों से निपटने में सक्षम है। इसमें अत्याधुनिक रडार सिस्टम, 76 मिमी नौसैनिक तोप, एंटी-शिप मिसाइलें, टॉरपीडो लांचर और हेलीकॉप्टर संचालन की सुविधा भी है। यानी यह एक मिनी-युद्धपोत की तरह काम करता है। इसमें हेलिकॉप्टर लैंडिंग पैड और हैंगर है। यह जहाज खुले समुद्र में लंबी दूरी के ऑपरेशन कर सकता है और क्षेत्रीय मिशनों के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह जहाज कराची पहुंचने से पहले मलेशिया और ओमान (29 अप्रैल-1 मई) का दौरा कर चुका था।

कराची क्यों आया है यह युद्धपोत?

तुर्की और पाकिस्तान (India-Pakistan Tension) के बीच हाल के वर्षों में सैन्य सहयोग काफी बढ़ा है। 2022 में दोनों देशों ने मिलकर चार MİLGEM क्लास कॉर्वेट बनाने का समझौता किया था, जिनमें से दो जहाज तुर्की में और दो कराची शिपयार्ड में बनेंगे। इन जहाजों में पहला, PNS बाबर, अब बनकर तैयार है। पाकिस्तान नौसेना के अनुसार, TCG Büyükada का यह दौरा दोनों देशों के बीच नौसैनिक सहयोग को बढ़ाने और आपसी समझ को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है। लेकिन यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया पहलगाम आतंकी हमले के बाद तनाव चरम पर है।

तुर्की का ‘साइलेंट’ सपोर्ट?

TCG Büyükada की मौजूदगी से एक दिन पहले तुर्की के राजदूत डॉ. इरफान नजीरओग्लू ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ से मुलाकात कर “तुर्की की एकजुटता” का संदेश दिया। इस मुलाकात के बाद TCG Büyükada की मौजूदगी को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

कई पाकिस्तानी मीडिया चैनलों (India-Pakistan Tension) ने इस दौरे को ‘रणनीतिक समर्थन’ बताया है। हाल ही में जब तुर्की का सैन्य कार्गो विमान कराची में उतरा था, तब भी यह कहा गया था कि शायद इसमें हथियार या उपकरण लाए गए हैं। हालांकि, बाद में तुर्की ने बयान जारी कर इन अटकलों को खारिज कर दिया था।

हालांकि तुर्की और पाकिस्तान (India-Pakistan Tension) के बीच सैन्य सहयोग का लंबा इतिहास रहा है। दोनों देश न केवल सैन्य उपकरणों और तकनीक के क्षेत्र में बल्कि संयुक्त अभ्यासों और राजनयिक समर्थन में भी एक-दूसरे के करीब हैं। पाकिस्तान और तुर्की दोनों इस्लामिक देशों के रूप में खुद को ‘भाई’ कहते रहे हैं, लेकिन अब यह भाईचारा रणनीतिक गठजोड़ में बदल रहा है।

हाल ही में दोनों देशों ने अतातुर्क-XIII नामक संयुक्त सैन्य अभ्यास किया था। इसमें दोनों देशों के विशेष बलों ने एक-दूसरे के साथ समन्वय और युद्ध तकनीकों का अभ्यास किया। यह अभ्यास दोनों नौसेनाओं और सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी (एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने की क्षमता) को बढ़ाने के लिए था।

कमजोर है पाकिस्तानी नौसेना

पाकिस्तानी नौसेना (India-Pakistan Tension) भारतीय नौसेना की तुलना में कमजोर है, खासकर युद्धपोतों, पनडुब्बियों, और समुद्री निगरानी क्षमता के मामले में। हालांकि पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तानी नौसेना ने अपनी ताकत दिखाने के लिए अरब सागर में सैन्य अभ्यास शुरू किया था, जो 30 अप्रैल से 2 मई 2025 तक चला, जिसमें लाइव फायरिंग और नेविगेशन एरिया वॉर्निंग जारी की गई। पाकिस्तानी नौसेना प्रमुख एडमिरल नावेद अशरफ ने अपने जवानों को युद्ध के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया, इसे “खुद को साबित करने का मौका” बताया। पाक नौसेना ने यह कदम भारत की नौसेना के गुजरात तट (30 अप्रैल-3 मई 2025) के पास किए अभ्यास के जवाब में किया था।

दरअसल पाकिस्तानी नौसेना को डर है कि कहीं भारतीय नौसेना 1971 के ऑपरेशन ट्राइडेंट की हमला न कर दे, जिसमें कराची पोर्ट को भारी नुकसान पहुंचा था। पाकिस्तान ने कराची और ग्वादर पोर्ट की सुरक्षा भी कड़ी की, जिसमें 25 चीनी जे-10सी और जेएफ-17 फाइटर जेट्स तैनात किए गए।

India-Pakistan war: पाकिस्तानी सेना की सीक्रेट बातचीत हुई इंटरसेप्ट, घबराहट में है पाक आर्मी, Zoe और Markhor का है सहारा

भारतीय नौसेना ने की अरब सागर में नाकेबंदी

भारतीय नौसेना (India-Pakistan Tension) ने पहलगाम हमले के बाद अरब सागर में नाकेबंदी शुरू की है, जिसमें पाकिस्तानी जहाजों और नावों पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस समुद्री नाकेबंदी ने कराची बंदरगाह के व्यापार को प्रभावित किया है, जिससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। इसके अलावा भारत ने आईएनएस सूरत (विध्वंसक श्रेणी) को हजीरा पोर्ट पर तैनात किया है, जो आधुनिक मिसाइलों, रडार, और हेलिकॉप्टरों से लैस है। इसके अलावा भारतीय नौसेना ने (30 अप्रैल-3 मई 2025) अरब सागर में चुपचाप कई लाइव फायर ड्रिल्स और मिसाइल परीक्षण किए। इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों का परीक्षण भी शामिल था। इन सभी गतिविधियों के लिए NAVAREA वार्निंग जारी की गई थी ताकि कॉमर्शियल जहाजों को सुरक्षा अलर्ट मिल सके। यहां तक कि भारत ने अरब सागर में आईएनएस सूरत और आईएनएस विक्रांत जैसे शक्तिशाली युद्धपोत तैनात किए। इसके बाद 3 मई को नौसेना ने एक इमेज जारी की जिसमें INS कोलकाता, एक ध्रुव हेलिकॉप्टर और एक कलवरी क्लास पनडुब्बी दिख रही थी – संदेश था साफ: “Above, Below and Across Waves”।

India-Pakistan war: पाकिस्तानी सेना की सीक्रेट बातचीत हुई इंटरसेप्ट, घबराहट में है पाक आर्मी, Zoe और Markhor का है सहारा

India-Pakistan War: Pak Army's Secret Talks Intercepted, Zoe and Markhor Units on Alert

India-Pakistan war: पहलगाम हमले के बाद से नियंत्रण रेखा (LoC) पर लगातार पाकिस्तान की तरफ से सीजफायर तोड़ा जा रहा है। लगातार 11वें दिन पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा, बारामूला, पुंछ, राजौरी, मेंढर, नौशेरा, सुंदरबनी और अखनूर में सीजफायर तोड़ा और छोटे हथियारों से गोले दागे, जिसका भारतीय सेना की तरफ से मुंहतोड़ जवाब दिया गया। वहीं भारतीय अधिकारियों ने LoC पर पाकिस्तानी सेना की कुछ गोपनीय बातचीत को इंटरसेप्ट किया है, जिसमें साफ तौर पर नजर आ रहा है कि पाकिस्तानी सेना में इन दिनों जबरदस्त घबराहट है। इन इंटरसेप्ट्स से भारतीय सेना को पाकिस्तान की रणनीति की अहम जानकारी मिली है, जिससे यह साफ हो रहा है कि पाकिस्तानी सेना इस समय काफी दबाव में है और उसे लग रहा है कि भारतीय सेना कभी भी बड़ा हमला कर सकती है।

India-Pakistan war: पहलगाम हमले के बाद बढ़ा तनाव

22 अप्रैल 2025 को कश्मीर के पहलगाम (India-Pakistan war) में एक आतंकी हमला हुआ, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि यह हमला पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने किया। इस हमले के बाद दोनों देशों के बीच बचे खुचे रिश्ते और खराब हो गए। भारत ने पाकिस्तानी विमानों के लिए अपनी हवाई सीमा बंद कर दी, और सीमा पर गोलीबारी की घटनाएं भी बढ़ गईं। ऐसे में पाकिस्तानी सेना को डर है कि भारत जल्द ही कोई बड़ा सैन्य कदम उठा सकता है।

भारतीय सैन्य सूत्रों के मुताबिक, पहलगाम हमले के तुरंत बाद पाकिस्तानी सेना (India-Pakistan war) ने अपनी तैयारियां तेज कर दीं। उनकी सेना, वायुसेना और नौसेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है। सैनिकों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं, और उन्हें सीमा पर तैनात कर दिया गया है। जमीन, हवा और पानी पर गश्त भी बढ़ा दी गई है।

पाकिस्तानी सेना की बातचीत इंटरसेप्ट: कोडनेम जो

भारतीय अधिकारियों ने LoC पर पाकिस्तानी सेना (India-Pakistan war) की दो अहम बातचीत को इंटरसेप्ट किया है। पहला इंटरसेप्ट पिछले हफ्ते सुबह 9:45 बजे कश्मीर के एक गुप्त स्थान पर रिकॉर्ड किया गया। यह बातचीत एक फॉरवर्ड पोस्ट पर तैनात अधिकारियों और उनके कमांडरों के बीच हुई थी। यह संदेश उर्दू में VHF चैनल के जरिए भेजा गया था। इसमें साफ तौर पर कहा गया कि हालात “बहुत खराब” हैं। पाक सेना के जवानों को 24 घंटे हाई अलर्ट पर रहने और हथियारों को दुश्मन की तरफ तानकर तैयार रहने का आदेश दिया गया।

इसके अलावा, जवानों को तोपों को सीधे फायर करने के लिए तैयार करने, गोला-बारूद का पर्याप्त स्टॉक रखने और एक यूनिट जिसे कोडनेम ‘जो’ (Zoe) दिया गया है, उसके साथ तालमेल बिठाने का निर्देश दिया गया। इस बातचीत का लहजा और उसकी जल्दबाजी से साफ है कि पाकिस्तानी सेना (India-Pakistan war) भारतीय जवाबी कार्रवाई से डर रही है और उसे अंदाजा नहीं है कि भारत कब और कैसे हमला कर सकता है।

दूसरा इंटरसेप्ट: कोडनेम ‘मारखोर’

उसी दिन रात 8:10 बजे एक और बातचीत (India-Pakistan war) इंटरसेप्ट की गई। इसमें हालात को “पहले से कहीं ज्यादा खराब” बताया गया। इस संदेश में साफ झलक रहा था कि पाकिस्तानी सैनिक थकान और दबाव में हैं। उनकी डिफेंस लाइन कमजोर पड़ रही हैं, और उन्हें लगातार भारतीय सेना के हमले का डर सता रहा है।

इस बातचीत में एक और यूनिट का जिक्र हुआ, जिसे कोडनेम ‘मारखोर’ (Markhor) दिया गया है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह यूनिट एक माउंटेन आर्टिलरी (पहाड़ी तोपखाना) डिवीजन हो सकती है, जो लंबी दूरी की 155mm हॉवित्जर तोपों से लैस है। यह यूनिट LoC के कठिन पहाड़ी इलाकों में पाकिस्तानी सेना की अहम सहारा है। इसका मतलब है कि पाकिस्तान अपनी फ्रंट लाइन की कमजोरियों को छुपाने के लिए तोपों पर ज्यादा भरोसा कर रहा है।

पाकिस्तानी सेना की फ्रंट लाइन कमजोर

इन इंटरसेप्ट्स से भारतीय सेना (India-Pakistan war) को पाकिस्तान की डिफेंस स्ट्रेटेजी की गहरी जानकारी मिली है। इससे पता चलता है कि पाकिस्तानी सेना इस समय काफी दबाव में है और उसे किसी बड़े हमले की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि LoC पर रणनीतिक असंतुलन साफ दिख रहा है। पाकिस्तानी सेना की फ्रंट लाइन कमजोर है, और वे अपनी रक्षा के लिए तोपों पर निर्भर हैं। वहीं, भारत के तोपखाने की ताकत LoC के पहाड़ी इलाकों में पाकिस्तान से कहीं ज्यादा है, जिससे पाकिस्तान डरा हुआ है।

पाकिस्तान की ओर से बयानबाजी

पाकिस्तान (India-Pakistan war) की तरफ से भी बयानबाजी तेज हो गई है। पिछले हफ्ते पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने देर रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में दावा किया था कि उनके पास पक्की खुफिया जानकारी है कि भारत अगले 24-36 घंटों में पाकिस्तान पर सैन्य हमला करने की योजना बना रहा है। भारतीय सूत्रों का मानना है कि यह बयान जानबूझकर सार्वजनिक किया गया, ताकि भारत को हमले से रोका जा सके और वैश्विक समुदाय में पाकिस्तान के पक्ष में माहौल बनाया जा सके।

लेकिन यह बयान भी पाकिस्तानी सेना की घबराहट को ही दिखाता है। वे हर हाल में भारत के हमले को रोकना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि अगर भारत ने जवाबी कार्रवाई की, तो उनकी सेना को भारी नुकसान हो सकता है।

पहलगाम हमले का असर

पाकिस्तानी सेना (India-Pakistan war) को डर है कि भारत इस हमले का बदला लेने के लिए कोई बड़ा सैन्य कदम उठा सकता है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमले के बाद कहा था कि इस हमले के जिम्मेदार लोगों को “धरती के किसी भी कोने में छुपने नहीं दिया जाएगा”। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी सेना को पूरी छूट दे दी कि वह हमले का जवाब देने के लिए समय, निशाना और तरीका खुद तय करे।

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पाकिस्तान की तैयारियां

पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तानी सेना (India-Pakistan war) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। उनकी सेना, वायुसेना और नौसेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है। सैनिकों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं, और उन्हें सीमा पर भेजा गया है। जमीन, हवा और पानी पर गश्त बढ़ा दी गई है। लेकिन पाकिस्तानी सेना की इंटरसेप्ट हुई बातचीत से पता लगता है कि इतनी तैयारियों के बावजूद उनकी तैयारियां अधूरी हैं, और वे दबाव में हैं। सैनिक थके हुए हैं, और उनका फॉरवर्ड डिफेंस कमजोर है। जिसका फायदा भारतीय सेना को मिल सकता है।

Air Defence System: भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच भारतीय सेना का बड़ा फैसला, खरीदेगी 48 VSHORADS लॉन्चर और 85 मिसाइलें

Air Defence System: Indian Army to be equipped with VSHORADS missiles

Air Defence System: भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने शनिवार को वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (नेक्स्ट जनरेशन) यानी VSHORADS (NG) की खरीद के लिए रिक़्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी किया है। इसके तहत सेना को 48 लॉन्चर, 48 नाइट विजन साइट्स, 85 मिसाइलें और 1 मिसाइल टेस्ट स्टेशन मिलेगा। यह खरीद DAP-2020 के तहत बाय (इंडियन) कैटेगरी में होगी, यानी इसमें मेक इन इंडिया को बढ़ावा दिया जाएगा। यह खबर ऐसे समय में आई है, जब 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव चरम पर है।

Air Defence System: क्या होता है VSHORADS?

VSHORADS को आम भाषा में मैनपैड्स (मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम – Air Defence System) भी कहते हैं, एक ऐसा हथियार है जो कम दूरी पर दुश्मन के हवाई हमलों को नाकाम कर सकता है। यह हथियार खास तौर पर उन विमानों और ड्रोन्स को निशाना बनाता है जो नीची उड़ान भरते हैं, जैसे हेलिकॉप्टर, छोटे लड़ाकू विमान और मानव रहित हवाई वाहन (UAV)। इसे “फायर एंड फॉरगेट” हथियार कहा जाता है, यानी एक बार मिसाइल दागने के बाद यह अपने आप निशाने को ढूंढ लेती है और उसे तबाह कर देती है।

रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “यह मिसाइल (Air Defence System) इन्फ्रारेड होमिंग तकनीक पर काम करती है। यह तकनीक विमान के इंजन से निकलने वाली गर्मी को ट्रैक करती है। एक बार फायर होने के बाद इसकी मारक क्षमता 95% तक होती है। यह हथियार नीची उड़ान भरने वाले विमानों के खिलाफ सबसे ज्यादा प्रभावी है।”

क्यों पड़ी VSHORADS की जरूरत?

22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव चल रहा है। इस हमले में कई पर्यटकों की जान चली गई थी। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया, जिसके बाद दोनों देशों की सीमा पर तनाव बढ़ गया। सीजफायर (Air Defence System)  उल्लंघन की घटनाएं भी बढ़ी हैं, और दोनों तरफ से छोटे हथियारों से गोलीबारी की खबरें आ रही हैं। ऐसे में भारतीय सेना को अपनी हवाई सुरक्षा को मजबूत करने की जरूरत महसूस हुई।

सूत्रों का कहना है, “पाकिस्तान की तरफ से ड्रोन हमले और नीची उड़ान भरने वाले विमानों (Air Defence System) का खतरा बढ़ रहा है। VSHORADS जैसे हथियार हमें इन खतरों से निपटने में मदद करेंगे। यह हथियार बेहद हल्का और मोबाइल है। इसे एक सैनिक आसानी से कंधे पर ले जा सकता है और पहाड़ी इलाकों, वाहनों या किसी भी जगह से इस्तेमाल कर सकता है।”

VSHORADS की खासियतें

VSHORADS हथियार (Air Defence System) की कई खासियतें हैं, जो इसे भारतीय सेना के लिए खास बनाती हैं। अगर दो मिसाइलें एक साथ दागी जाएं, तो यह 85% से ज्यादा की मारक क्षमता रखती है, खासकर तेज रफ्तार से उड़ने वाले लड़ाकू विमानों के खिलाफ। वहीं, इसकी न्यूनतम रेंज 500 मीटर और अधिकतम रेंज 6 किलोमीटर है। यानी यह 6 किमी के दायरे में आने वाले किसी भी हवाई खतरे को खत्म कर सकता है। हर मिसाइल की लंबाई 1.85 मीटर से ज्यादा नहीं होगी, जिससे इसे ले जाना आसान हो। खास बात यह है कि इसे एक सैनिक अकेले इस्तेमाल कर सकता है। लॉन्चर को कंधे पर रखा जाता है, और सैनिक अपने पीठ पर दो मिसाइलें ले जा सकता है। VSHORADS सिस्टम इन्फ्रारेड होमिंग तकनीक पर काम करती है, जो विमान के इंजन की गर्मी को ट्रैक करती है। वहीं अगर एक बार मिसाइल फायर हो जाए, तो यह अपने आप निशाने को ढूंढ लेती है।

VSHORADS सिस्टम में तीन मुख्य हिस्से होते हैं। इसके मिसाइल (Air Defence System) वाले हिस्से में विस्फोटक होता है जो निशाने को तबाह करता है। इसकी लॉन्च ट्यूब में मिसाइल को फायर करने का सिस्टम होता है। वहीं इसकी बैटरी यूनिट बिजली पैदा करती है, ताकि मिसाइल सही तरीके से काम कर सके।

105 देशों की सेनाओं के पास यह हथियार

मैनपैड्स (Air Defence System) का इस्तेमाल दुनिया भर में पिछले कई दशकों से हो रहा है। करीब 105 देशों की सेनाओं के पास यह हथियार है, लेकिन इसे बनाने वाले देशों की संख्या सिर्फ 12 है, जिनमें भारत भी शामिल है। सबसे मशहूर मैनपैड्स में अमेरिका का स्टिंगर, रूस का 9K32 स्ट्रेला-2 (SA-7) और हाल ही में चीन का FN-16 शामिल है।

मैनपैड्स का सबसे ज्यादा इस्तेमाल 1980 के दशक में अफगानिस्तान में मुजाहिदीनों (Air Defence System) ने किया था। उन्हें अमेरिका ने स्टिंगर मिसाइलें दी थीं। इन मिसाइलों ने सोवियत हेलिकॉप्टरों और नीची उड़ान भरने वाले विमानों को भारी नुकसान पहुंचाया था। बाद में तालिबान ने भी इन हथियारों का इस्तेमाल अमेरिकी सेना के खिलाफ किया और उनके हेलिकॉप्टरों को निशाना बनाया।

डीआरडीओ ने बनाया स्वदेशी VSHORADS

हालांकि भारत अभी VSHORADS (Air Defence System) की खरीद कर रहा है, लेकिन देश में इस तरह के हथियार को बनाने की कोशिश भी हो रही है। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने हाल ही में स्वदेशी VSHORADS सिस्टम को विकसित किया है। इसकी टेस्टिंग पिछले कुछ सालों से चल रही है, और अक्टूबर 2024 में इसके आखिरी टेस्ट सफल रहे। DRDO का दावा है कि यह मिसाइल ड्रोन, हेलिकॉप्टर और लड़ाकू विमानों को आसानी से निशाना बना सकती है।

लेकिन स्वदेशी VSHORADS अभी पूरी तरह तैयार नहीं है। इसे ऊंचे इलाकों जैसे लद्दाख में टेस्ट करना बाकी है। साथ ही, सेना के इस्तेमाल के लिए बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन शुरू होने में अभी समय लगेगा। इसलिए रक्षा मंत्रालय ने तुरंत जरूरत को पूरा करने के लिए RFP जारी किया है।

VSHORADS: DRDO का यह नया एयर डिफेंस सिस्टम कम ऊंचाई पर उड़ने वाले टारगेट को पलक झपकते ही कर देगा तबाह, ये हैं खूबियां

RFP की शर्तें और मेक इन इंडिया

रक्षा मंत्रालय ने RFP में साफ कहा है कि यह खरीद DAP-2020 के तहत होगी, जिसमें मेक इन इंडिया (Air Defence System) को प्राथमिकता दी जाती है। इसका मतलब है कि जो भी कंपनी इस हथियार को सप्लाई करेगी, उसे भारत में ही इसका कुछ हिस्सा बनाना होगा। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के एक साल के अंदर सारी डिलीवरी पूरी करनी होगी। इसका मतलब है कि सेना को जल्द से जल्द यह हथियार चाहिए, ताकि सीमा पर बढ़ते खतरे से निपटा जा सके।

Kashmir Tourism Halt: पहलगाम आतंकी हमले के बाद 10 लाख बुकिंग्स रद्द, जम्मू-कश्मीर के पर्यटन को 2 हफ्तों में 1000 करोड़ का घाटा

Kashmir Tourism Halt: Pahalgam Terror Attack Triggers 10 Lakh Cancellations, Rs 1000 Cr Loss

Kashmir Tourism Halt: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले ने न केवल 26 पर्यटकों की जान ली, बल्कि यहां की अर्थव्यवस्था और पर्यटन इंडस्ट्री को भी बड़ा झटका दिया। इस हमले के बाद पिछले दो हफ्तों में जम्मू-कश्मीर के पर्यटन क्षेत्र को 1000 करोड़ रुपये (लगभग 120 मिलियन डॉलर) से ज्यादा का नुकसान हुआ है। अप्रैल से जून तक का समय यहां पर्यटकों का सबसे बड़ा सीजन होता है, लेकिन हमले के बाद 10 लाख से ज्यादा बुकिंग्स रद्द हो चुकी हैं। यह हमला कश्मीर की तरक्की और निवेश की उम्मीदों पर भी भारी पड़ रहा है।

Kashmir Tourism Halt: Pahalgam Terror Attack Triggers 10 Lakh Cancellations, Rs 1000 Cr Loss

Kashmir Tourism Halt: 48 रिसॉर्ट्स बंद

पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए इस आतंकी हमले ने जम्मू-कश्मीर की पर्यटन इंडस्ट्री (Kashmir Tourism Halt) को हिलाकर रख दिया। सुरक्षा कारणों से सरकार ने यहां के 87 सरकारी पर्यटक रिसॉर्ट्स में से 48 को बंद कर दिया है। पहलगाम जैसे इलाके अपनी खूबसूरत वादियों और शांति के लिए जाने जाते हैं, जहां हर साल लाखों पर्यटक आते हैं। लेकिन इस हमले के बाद पर्यटकों में डर का माहौल बन गया है।

अप्रैल से जून तक का समय कश्मीर में सबसे ज्यादा पर्यटकों का होता है। इस दौरान लोग यहां की ठंडी हवा, बर्फीले पहाड़, और शिकारा की सैर का मज़ा लेने आते हैं। लेकिन हमले के बाद हालात ऐसे हो गए कि 10 लाख से ज्यादा बुकिंग्स रद्द हो गईं। दो हफ्तों में ही पर्यटन इंडस्ट्री को 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो गया। एक टूर ऑपरेटर मुजफ्फर अहमद ने बताया, “हमारा पूरा सीजन बर्बाद हो गया। पर्यटक डर गए हैं और कोई भी बुकिंग नहीं कर रहा।”

स्थानीय लोगों की आजीविका पर संकट

इस हमले का सबसे बड़ा असर कश्मीर (Kashmir Tourism Halt) के स्थानीय लोगों पर पड़ा है, खासकर अनंतनाग और बारामूला जैसे जिलों में। यहां 70% से ज्यादा लोग पर्यटन पर निर्भर हैं। होटल मालिक, होटल कर्मचारी, टट्टू मालिक, शिकारा चलाने वाले, और हस्तशिल्प के कारीगर अब बेरोजगार हो गए हैं।

श्रीनगर और पहलगाम के बड़े होटल, जो इस सीजन में हाउसफुल रहते थे, अब खाली पड़े हैं। एक होटल मालिक गुलाम रसूल ने कहा, “हमले के बाद से एक भी गेस्ट नहीं आया। हमारे कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं।”

वहीं टट्टू मालिक और शिकारा वाले भी इससे अछूते नहीं हैं। पहलगाम में टट्टू मालिक पर्यटकों को घाटी की सैर कराते हैं, लेकिन अब उनकी कमाई बंद हो गई। डल झील में शिकारा चलाने वाले भी खाली बैठे हैं। एक शिकारा वाले बशीर अहमद ने बताया, “पहले दिन में 10-12 सैर करवाते थे, लेकिन अब कोई सवारी ही नहीं है।”

वहीं, कश्मीरी शॉल, कालीन, और दूसरी हस्तशिल्प की चीजें बेचने वाले कारीगरों का धंधा भी ठप हो गया।

निवेश और तरक्की पर असर

पहलगाम हमले ने न केवल पर्यटन (Kashmir Tourism Halt) को नुकसान पहुंचाया, बल्कि कश्मीर में निवेश और तरक्की की उम्मीदों को भी झटका दिया। जम्मू-कश्मीर में इस समय 25,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। सरकार ने 1,767 प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिनमें स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा, और उद्योग से जुड़े प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। लेकिन हमले के बाद इन प्रोजेक्ट्स पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।

यूएई की कंपनी ईमार ग्रुप ने श्रीनगर में ‘मॉल ऑफ श्रीनगर’ और दूसरी बड़ी परियोजनाओं के लिए 500 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बनाई थी। इससे 10,000 से ज्यादा नौकरियां मिलने वाली थीं। लेकिन अब यह प्रोजेक्ट रुकने की कगार पर है। नून.कॉम, अल माया ग्रुप, जीएल एम्प्लॉयमेंट, और माटू इनवेस्टमेंट्स जैसी विदेशी कंपनियों ने भी निवेश के प्रस्ताव दिए थे, लेकिन अब वे पीछे हट सकती हैं।

जम्मू-कश्मीर (Kashmir Tourism Halt) सरकार को 8,500 से ज्यादा आवेदन मिले हैं, जिनमें 1.69 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव हैं। इनसे 6 लाख लोगों को नौकरी मिलने की उम्मीद थी। लेकिन हमले के बाद निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है, और ये प्रोजेक्ट्स भी देरी का शिकार हो सकते हैं।

डर का माहौल: निवेशकों का भरोसा टूटा

इस हमले ने कश्मीर (Kashmir Tourism Halt) में डर का माहौल बना दिया है। जो निवेशक यहां पैसा लगाने की सोच रहे थे, वे अब डर रहे हैं। एक निवेशक ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “कश्मीर में बहुत संभावनाएं हैं, लेकिन इस तरह के हमले हमें डराते हैं। हमें लगता है कि यहां पैसा लगाना जोखिम भरा हो सकता है।”

पहलगाम हमले (Kashmir Tourism Halt) ने कश्मीर की छवि को भी नुकसान पहुंचाया है। पहले यहां पर्यटक और निवेशक शांति और खूबसूरती की वजह से आकर्षित होते थे, लेकिन अब डर का माहौल बन गया है। इससे न केवल मौजूदा प्रोजेक्ट्स पर असर पड़ेगा, बल्कि भविष्य में नए निवेश को लाना भी मुश्किल हो सकता है।

रोजगार और अर्थव्यवस्था पर खतरा

जम्मू-कश्मीर (Kashmir Tourism Halt) में चल रहे प्रोजेक्ट्स और भविष्य की योजनाओं से 6 लाख से ज्यादा लोगों को नौकरी मिलने की उम्मीद थी। लेकिन हमले के बाद ये नौकरियां अब अनिश्चित हो गई हैं। पर्यटन और निवेश में कमी से यहां की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान हो सकता है। अगर पर्यटन और निवेश रुक गया, तो कश्मीर की अर्थव्यवस्था में मंदी आ सकती है। इससे स्थानीय लोगों की जिंदगी और मुश्किल हो जाएगी। साथ ही, जो लोग पहले से ही पर्यटन पर निर्भर थे, उनकी कमाई बंद हो चुकी है। अगर नए प्रोजेक्ट्स रुक गए, तो भविष्य में भी रोजगार के मौके कम हो जाएंगे।

पाकिस्तान नहीं चाहता कश्मीर में शांति

भारत का मानना है कि पहलगाम हमला (Kashmir Tourism Halt) पाकिस्तान की साजिश का हिस्सा है। भारत सरकार का कहना है कि पाकिस्तान नहीं चाहता कि कश्मीर में शांति और तरक्की हो। अगर कश्मीर में निवेश बढ़ा और लोग समृद्ध हुए, तो पाकिस्तान का कश्मीर पर दावा कमजोर हो जाएगा। इसलिए वह आतंकवाद को बढ़ावा देता है, ताकि यहां अशांति बनी रहे।

Baisaran Terror attack: कश्मीर में तरक्की को रोकने की पाकिस्तान की साजिश, लीथियम भंडार मिलने से बढ़ी चीन-पाक की बेचैनी

वहीं पहलगाम हमले के बाद अगर जम्मू-कश्मीर (Kashmir Tourism Halt) की अर्थव्यवस्था और पर्यटन को फिर से पटरी पर लाना है, तो सरकार को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि यहां सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो, ताकि पर्यटकों और निवेशकों का भरोसा वापस जीता जा सके। साथ ही, आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाने होंगे, ताकि भविष्य में ऐसे हमले न हों। साथ ही, स्थानीय लोगों को भी मदद की जरूरत है। सरकार को उनके लिए वैकल्पिक रोजगार के मौके ढूंढने होंगे, ताकि उनकी आजीविका फिर से शुरू हो सके। अगर कश्मीर में शांति और तरक्की आई, तो यहां के लोग न केवल आर्थिक रूप से मजबूत होंगे, बल्कि देश की मुख्यधारा में भी शामिल हो सकेंगे।

Baisaran Terror attack: कश्मीर में तरक्की को रोकने की पाकिस्तान की साजिश, लीथियम भंडार मिलने से बढ़ी चीन-पाक की बेचैनी

Intelligence Inputs
Six Months After the Strike, New Terror Threat Emerges from Lashkar and Jaish in Jammu and Kashmir

Baisaran Terror attack: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले को लेकर रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं। इस आतंकी हमले ने न केवल 26 पर्यटकों की जान ली, बल्कि कश्मीर में शांति और तरक्की की उम्मीदों को भी झटका दिया। भारत का मानना है कि यह हमला पाकिस्तान की उस साजिश का हिस्सा है, जो कश्मीर में अशांति फैलाकर भारत की संप्रभुता को कमजोर करना चाहता है। लेकिन इस हमले के पीछे एक बड़ा एंगल भी सामने आ रहा है। जम्मू में हाल ही में मिला लीथियम भंडार चीन और पाकिस्तान की आंखों को चुभ रहा था। दोनों को लग रहा था कि लीथियम के जरिए भारत दुनिया के बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। वहीं, लीथियम मिलने के बाद कश्मीर की तरक्की को नए पंख मिल जाएंगे, जो पाकिस्तान को नागवार गुजर रहा था।

Baisaran Terror Attack: Pakistan Targets Kashmir's Growth Amid Lithium Discovery

Baisaran Terror attack: पहलगाम हमला: तरक्की पर हमला

पहलगाम हमले (Baisaran Terror attack) में बेकसूर लोग तो मारे ही गए, साथ ही कश्मीर के टूरिस्ट व्यवसाय को भी तगड़ी चोट लगी है। भारत का मानना है कि पाकिस्तान नहीं चाहता कि कश्मीर में शांति और तरक्की हो। अगर कश्मीर में शिक्षा, उद्योग, और रोजगार के मौके बढ़े, तो यह भारत के साथ पूरी तरह जुड़ जाएगा, और पाकिस्तान के दावे बेकार हो जाएंगे। इसलिए पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देता है, युवाओं को भड़काता है, और कश्मीर में अशांति फैलाने की कोशिश करता है।

पहलगाम हमले (Baisaran Terror attack) का सबसे बड़ा निशाना कश्मीर की पर्यटन इंडस्ट्री और आर्थिक तरक्की को रोकना था। कश्मीर में पर्यटन यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, और पहलगाम जैसे इलाके पर्यटकों के लिए खास आकर्षण हैं। लेकिन इस हमले ने कश्मीर की प्रगति को बड़ा झटका दिया है।

पर्यटन पर असर: बड़ा आर्थिक घाटा

पहलगाम हमले (Baisaran Terror attack) के बाद कश्मीर में पर्यटन इंडस्ट्री को भारी नुकसान हुआ है। सरकार ने सुरक्षा कारणों से 87 में से 48 सरकारी पर्यटक स्थलों को बंद कर दिया। अप्रैल से जून तक का समय कश्मीर में पर्यटकों का सबसे बड़ा सीजन होता है, लेकिन हमले के बाद 10 लाख से ज्यादा बुकिंग्स रद्द हो गईं। इससे पर्यटन इंडस्ट्री को दो हफ्तों में ही 1000 करोड़ रुपये (लगभग 120 मिलियन डॉलर) का नुकसान हुआ।

इसका सबसे बड़ा असर स्थानीय लोगों की आजीविका पर पड़ा। अनंतनाग और बारामूला जैसे जिलों में 70% से ज्यादा लोग पर्यटन पर निर्भर हैं। होटल स्टाफ, टट्टू मालिक, शिकारा चलाने वाले, और हस्तशिल्प के कारीगरों की कमाई पूरी तरह बंद हो गई। एक टट्टू मालिक अब्दुल वहीद वानी ने बताया, “हमला होने के बाद से एक भी पर्यटक नहीं आया। हमारी रोजी-रोटी छिन गई।”

निवेश पर संकट: अंतरराष्ट्रीय निवेश पर असर

कश्मीर में पिछले कुछ सालों में निवेश और तरक्की की नई उम्मीदें जगी थीं। जम्मू-कश्मीर सरकार (Baisaran Terror attack) को 8,500 से ज्यादा निवेश प्रस्ताव मिले थे, जिनमें 1.69 लाख करोड़ रुपये का निवेश और 6 लाख लोगों के लिए रोजगार की संभावना थी। इसके अलावा, 25,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं चल रही थीं, जो उद्योग, स्वास्थ्य, और बुनियादी ढांचे से जुड़ी थीं। लेकिन पहलगाम हमले ने इन सब पर सवाल खड़े कर दिए।

यूएई की कंपनी ईमार ग्रुप ने श्रीनगर में ‘मॉल ऑफ श्रीनगर’ और दूसरी परियोजनाओं के लिए 500 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बनाई थी, जिससे 10,000 नौकरियां मिलने वाली थीं। लेकिन अब यह परियोजना अनिश्चितता में है। नून.कॉम, अल माया ग्रुप, जीएल एम्प्लॉयमेंट, और माटू इनवेस्टमेंट्स जैसी विदेशी कंपनियों ने भी निवेश के प्रस्ताव दिए थे, लेकिन अब वे भी पीछे हट सकते हैं।

घरेलू निवेश पर पड़ सकता है असर

जम्मू-कश्मीर में इस समय 25,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। लेकिन हमले (Baisaran Terror attack) के बाद निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है। ये प्रोजेक्ट्स कई अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े हैं, जैसे: यहां नई फैक्ट्रियां और कारोबार स्थापित करने की योजनाएं हैं, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिले। अस्पताल, क्लीनिक, और मेडिकल सुविधाओं को बेहतर करने पर काम हो रहा था। इसके अलावा सड़कें, बिजली, पानी, और दूसरी जरूरी सुविधाओं को बढ़ाने के लिए प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं।

इन प्रोजेक्ट्स के लिए सरकार ने 1,767 प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिनमें 24,729 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है। ये प्रोजेक्ट्स न केवल आर्थिक तरक्की लाते, बल्कि यहां के लोगों की जिंदगी को भी आसान बनाते।

वहीं, जम्मू-कश्मीर में अगर ये प्रोजेक्ट्स अगर पूरे हो गए, तो यहां की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है। इसके अलावा, 50,000 करोड़ रुपये के और प्रस्ताव मंजूरी की प्रक्रिया में हैं। लेकिन हाल ही में पहलगाम (Baisaran Terror attack) में हुए आतंकी हमले ने इन योजनाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जो प्रोजेक्ट्स पहले से चल रहे हैं या जिन्हें मंजूरी मिलने वाली है, उनके लिए अब नए जोखिम पैदा हो गए हैं। निवेशक अब सोच रहे हैं कि क्या यहां पैसा लगाना सुरक्षित है। कई घरेलू निवेशक अपनी योजनाओं को टाल सकते हैं या फिर से विचार कर सकते हैं। उन्हें डर है कि यहां अशांति बढ़ सकती है।

लीथियम भंडार मिलने से चीन और पाकिस्तान बेचैन

इस हमले (Baisaran Terror attack) के पीछे एक बड़ा एंगल जम्मू के में हाल ही में मिले लीथियम भंडार का भी है। 2023 में जम्मू के रियासी जिले के सलाल-हैमाना इलाके में 5.9 मिलियन टन लीथियम भंडार की खोज हुई थी। यह दुनिया का सातवां सबसे बड़ा लीथियम भंडार है, जिसकी कीमत करीब 500 बिलियन डॉलर (लगभग 41 लाख करोड़ रुपये) है। लीथियम इलेक्ट्रिक बैटरी बनाने में काम आता है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों और रिन्यूएबल एनर्जी के लिए जरूरी है।

सूत्रों का कहना है कि वहां लीथियम के भंडार मिलने के बाद आतंकवाद (Baisaran Terror attack) में भी बढ़ोतरी हुई। क्योंकि इस खोज ने जम्मू-कश्मीर में आर्थिक तरक्की की नई उम्मीद जगाई। भारत सरकार ने इस लीथियम भंडार को जल्द से जल्द इस्तेमाल करने की योजना बनाई। लेकिन यह खोज चीन और पाकिस्तान को रास नहीं आई। चीन लीथियम के वैश्विक बाजार पर अपनी पकड़ बनाए रखना चाहता है, क्योंकि वह इसकी सबसे बड़ी आपूर्ति करता है। जम्मू में लीथियम मिलने से भारत इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो सकता है, जो चीन के लिए बड़ा झटका है।

सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान भी नहीं चाहता कि कश्मीर (Baisaran Terror attack) में आर्थिक तरक्की हो, क्योंकि इससे उसका कश्मीर पर दावा और कमजोर होगा। पहलगाम हमला कश्मीर में निवेश और तरक्की को रोकने की साजिश का हिस्सा है। लीथियम भंडार ने कश्मीर को वैश्विक आर्थिक नक्शे पर ला दिया है, और यह हमला इस प्रगति को पटरी से उतारने की कोशिश है।

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पाकिस्तान को डर है कि अगर कश्मीर आर्थिक रूप से मजबूत हुआ, तो उसका कश्मीर पर दावा खत्म हो जाएगा।
पहलगाम हमले (Baisaran Terror attack) को इस नजरिए से देखें, तो यह साफ हो जाता है कि यह सिर्फ आतंकवाद का मामला नहीं है। यह कश्मीर की आर्थिक तरक्की को रोकने की साजिश है, जिसमें लीथियम भंडार एक बड़ा कारण है। हमले के बाद निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है, और यही वह मकसद था, जिसे पाकिस्तान हासिल करना चाहता था।

Pahalgam Revenge: बहावलपुर या मुरिदके पर गिर सकती है भारत की गाज, बिना बड़ी जंग के होगा करारा वार

Pahalgam Revenge: Bahawalpur or Muridke Likely Indian Targets, No War Needed

Pahalgam Revenge: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के बाद भारत अब जवाबी कार्रवाई की तैयारी में है। इस हमले में 26 पर्यटकों की जान गई थी, जिसके लिए भारत ने पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और उसकी शाखा द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) को जिम्मेदार ठहराया। भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि इस हमले का जवाब जरूर दिया जाएगा, लेकिन यह जवाब सधी हुई रणनीति के साथ होगा, ताकि बड़ा युद्ध न छिड़े।

Pahalgam Revenge: Bahawalpur or Muridke Likely Indian Targets, No War Needed

रक्षा मंत्रालय और सेना के सूत्रों के मुताबिक, भारत लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) पार किए बिना लंबी दूरी के हथियारों से सीमित हमले (Pahalgam Revenge) करने की योजना बना रहा है। इस बीच, पाकिस्तान ने भी भारत को चेतावनी दी है कि अगर हमला हुआ, तो उसका जवाब कड़ा होगा।

Pahalgam Revenge: कैबिनेट कमेटी की बैठक में जवाबी कार्रवाई की रणनीति

पहलगाम हमले के बाद 23 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की पहली बैठक हुई थी। इस बैठक में कई कूटनीतिक कदमों (Pahalgam Revenge) का ऐलान किया गया। बैठक में इंडस वाटर ट्रीटी को निलंबित करना, पाकिस्तानी हाई कमीशन को छोटा करना, और भारत में मौजूद सभी पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करना जैसे फैसले लिए गए। इसके बाद 30 अप्रैल को दूसरी CCS बैठक हुई, जिसमें जवाबी कार्रवाई की सैन्य रणनीति पर चर्चा हुई।

प्रधानमंत्री मोदी ने सेना के प्रमुखों को साफ निर्देश दिए कि उनके पास “पूरी ऑपरेशनल आजादी” है। यानी वे यह तय कर सकते हैं कि जवाबी कार्रवाई (Pahalgam Revenge) का तरीका, टारगेट, और समय क्या होगा। एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने बताया, “यह सवाल अब यह नहीं है कि सैन्य कार्रवाई होगी या नहीं, बल्कि यह है कि यह कब होगी। हमारा जवाब जल्दबाजी में नहीं, बल्कि सोच-समझकर, विश्वसनीय और सधी हुई रणनीति के साथ दिया जाएगा। हम बड़े युद्ध की तरफ नहीं जाएंगे।”

पाकिस्तान की जवाबी हमले की धमकी

पाकिस्तान ने भारत को कड़ी चेतावनी दी है। पाकिस्तानी सेना ने कहा कि अगर भारत ने कोई हमला किया, तो उसका जवाब बहुत सख्त होगा। पाकिस्तान ने अपनी सेना को अलर्ट पर रखा है और अपनी पूरे एय़र डिफेंस सिस्टम को एक्टिव कर दिया है। एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि पिछले छह दिनों से LoC पर दोनों देशों (Pahalgam Revenge) की सेनाओं के बीच लगातार गोलीबारी हो रही है। पाकिस्तान कुपवाड़ा, बारामूला, उरी से लेकर नौशेरा, सुंदरबानी, अखनूर और पुंछ में सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है। इतना ही नहीं, जम्मू में 198 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) पर भी गोलीबारी शुरू हो गई है।

29 अप्रैल को भारतीय सेना ने डीजीएमओ हॉटलाइन के जरिए पाकिस्तानी सेना (Pahalgam Revenge) को चेतावनी दी कि वह LoC पर “बिना उकसावे की गोलीबारी” बंद करे। लेकिन रात में पाकिस्तानी सेना ने फिर सीजफायर तोड़ा। उसने जम्मू के परगवाल सेक्टर में गोलीबारी शुरू कर दी। जिसका भारतीय सेना ने दोगुनी ताकत से जवाब दिया। एक अधिकारी ने कहा, “हमारी सेना हर सीजफायर उल्लंघन का मुंहतोड़ जवाब दे रही है।”

LoC पार किए बिना हमला

भारत की सैन्य रणनीति (Pahalgam Revenge) इस बार साफ है, जवाबी कार्रवाई LoC पार किए बिना होगी, ताकि बड़ा युद्ध न छिड़े। इसके लिए लंबी दूरी के हथियारों का इस्तेमाल किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत 155 मिमी आर्टिलरी गन, 120 मिमी मोर्टार, और एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों से पाकिस्तानी सेना के ठिकानों और “आतंकी लॉन्च पैड्स” पर हमला कर सकता है। ये लॉन्च पैड LoC के पास बने हैं, जहां से आतंकी भारत में घुसपैठ करते हैं।

अधिकारी ने कहा, “LoC पार किए बिना भी हम लंबी दूरी के हथियारों से पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। हमें खबरें मिली हैं कि पाकिस्तानी सेना के पास 155 मिमी आर्टिलरी गोले की कमी है। उन्होंने अपना रिजर्व स्टॉक तीसरे पक्ष के जरिए यूक्रेन भेजा है, ताकि वे पैसे कमा सकें।” इसका मतलब है कि भारत की इस रणनीति से पाकिस्तानी सेना पर दबाव बढ़ सकता है।

भारत के पास और क्या हैं विकल्प

भारत के पास और भी सैन्य विकल्प हैं, जो सधी हुई कार्रवाई (Pahalgam Revenge) के तहत इस्तेमाल किए जा सकते हैं। एक विकल्प है सर्जिकल स्ट्राइक, जैसी 2016 में उरी हमले के बाद की गई थी। उरी में 19 भारतीय सैनिकों की शहादत के बाद भारतीय सेना की पैरा-स्पेशल फोर्स ने LoC के पास चार अलग-अलग जगहों पर आतंकी लॉन्च पैड्स को नष्ट कर दिया था। इस बार भी ऐसी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें छोटे पैमाने पर सीमा पार जाकर हमले किए जाएं।

दूसरा विकल्प है हवाई हमले, जैसा 2019 में बालाकोट (Pahalgam Revenge) में किया गया था। बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के आतंकी ठिकाने पर भारतीय वायु सेना (IAF) ने हमला किया था। एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि इस बार वायु सेना के पास पहले से ज्यादा ताकतवर हथियार और विमान हैं। 2019 में बालाकोट हमले के दौरान वायु सेना के पास 4.5 जेनरेशन राफेल फाइटर जेट्स नहीं थे, लेकिन अब वे मौजूद हैं। इसके अलावा, मिराज-2000, सुखोई-30 MKI जैसे विमान फ्रांस की ‘स्काल्प’ एयर-टु-ग्राउंड क्रूज मिसाइल, इजरायल की क्रिस्टल मेज मिसाइल, और स्पाइस-2000 प्रिसिजन गाइडेड बम से लैस हैं।

अधिकारी ने कहा, “इस बार टारगेट JeM का मुख्यालय बहावलपुर या LeT का मुख्यालय मुरिदके हो सकता है। ये दोनों संगठन पहलगाम हमले में शामिल थे।” लेकिन हवाई हमले एक जोखिम भरा कदम हो सकता है, क्योंकि इससे तनाव बढ़ने की आशंका है।

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पाकिस्तान को हमले का डर

पाकिस्तान को भारत की जवाबी कार्रवाई (Pahalgam Revenge) का डर सता रहा है। उसने अपनी सेना को हाई अलर्ट पर रखा है और अपने एय़र डिफेंस सिस्टम को एक्टिव कर दिया है। लेकिन भारत की रणनीति साफ है – जवाबी कार्रवाई सधी हुई होगी, ताकि बड़ा युद्ध न छिड़े। भारत का मकसद पाकिस्तान को यह संदेश देना है कि वह आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा, लेकिन साथ ही वह तनाव को बढ़ने से रोकना चाहता है।

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Coup in Pakistan? ISI Chief Asim Malik's surprise appointment as NSA raises coup fears

Coup in Pakistan?: पाकिस्तान की सियासत में एक बार फिर से बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। सरकार ने 29 अप्रैल 2025 को एक अधिसूचना जारी कर ISI (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस) के डायरेक्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद असीम मलिक को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया। यह पहली बार है, जब एक सक्रिय ISI प्रमुख को NSA की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि इस कदम को भारत-पाक के बीच चल रहे तनाव से जोड़ कर देखा जा रहा है। लेकिन जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति को देखते हुए किया गया है। वहीं, कई विशेषज्ञ इसे सैन्य तख्तापलट की आहट मान रहे हैं, खासकर तब जब पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान जेल में हैं और उनकी पार्टी PTI पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

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Coup in Pakistan?: NSA का पद कब से खाली था?

पाकिस्तान में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) का पद 3 अप्रैल 2022 से खाली था। इस दिन मोईद यूसुफ ने NSA पद से इस्तीफा दे दिया था। मोईद यूसुफ को 17 मई 2021 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान ने NSA नियुक्त किया था। वह पाकिस्तान के 9वें NSA थे और उनके पास फेडरल कैबिनेट मिनिस्टर का दर्जा था। मोईद यूसुफ ने इस्तीफा अप्रैल 2022 में इमरान खान की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (Coup in Pakistan) और सत्ता परिवर्तन के बाद दिया था। 10 अप्रैल 2022 को इमरान खान की सरकार गिर गई, और शहबाज शरीफ नए प्रधानमंत्री बने। जिसके बाद मोईद यूसुफ ने पद छोड़ दिया, क्योंकि वह खान के करीबी माने जाते थे।

इसके बाद 3 अप्रैल 2022 से 30 अप्रैल 2025 तक, यानी लगभग 3 साल और 27 दिन (करीब 37 महीने) तक NSA का पद खाली रहा। इस दौरान शहबाज शरीफ सरकार ने किसी को भी इस पद पर नियुक्त नहीं किया।

Coup in Pakistan?: क्यों नहीं भरा ये पद?

हालांकि शहबाज शरीफ सरकार ने NSA पद को खाली रखने का कोई आधिकारिक कारण (Coup in Pakistan) तो जाहिर नहीं किया, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह सेना और सरकार के बीच तनाव का नतीजा था। सेना का प्रभाव बढ़ने और सरकार की कमजोर स्थिति के चलते यह पद रिक्त रहा। इसके अलावा, इमरान खान और उनकी पार्टी PTI पर दबाव डालने के लिए भी सेना इस पद को भरने से बचती रही, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसले सीधे सेना के नियंत्रण में रहें। वहीं अब आईएसआई चीफ मलिक की नियुक्ति से यह नियंत्रण और मजबूत हो गया है।

क्या था अधिसूचना में?

पाकिस्तान सरकार के कैबिनेट सचिवालय ने 29 अप्रैल 2025 को एक अधिसूचना जारी की, जिसमें कहा गया कि लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद असीम मलिक, जो ISI के डायरेक्टर जनरल (DG ISI) हैं, को तत्काल प्रभाव से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) का अतिरिक्त प्रभार (Coup in Pakistan) दिया गया है। अधिसूचना पर कैबिनेट सेक्रेटरी कमरान अली अफजल और सेक्शन ऑफिसर मुहम्मद मीसम ने दस्तखत किए हैं। यह अधिसूचना गजट ऑफ पाकिस्तान में प्रकाशित की जाएगी और इसे सभी मंत्रालयों, प्रांतों और संबंधित विभागों को भेजा गया है।

असीम मलिक की यह नियुक्ति इसलिए भी खास है, क्योंकि वह अख्तर अब्दुर रहमान खान (जिन्होंने 1979-1987 तक ISI प्रमुख और सिक्योरिटी एडवाइजर के तौर पर जिया-उल-हक के साथ काम किया) के बाद दूसरे ऐसे सैन्य अधिकारी बन गए हैं, जिन्हें यह दोहरी जिम्मेदारी दी गई है।

पहलगाम हमले का असर

यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब भारत और पाकिस्तान (Coup in Pakistan) के बीच तनाव चरम पर है। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की जान गई थी। इस हमले की जिम्मेदारी द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी, जो लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का एक मुखौटा संगठन माना जाता है। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को जिम्मेदार ठहराया और इंडस वाटर ट्रीटी को निलंबित करना, वाघा-अटारी सीमा को बंद करना, और पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करना जैसे कदम कई कड़े उठाए।

वहीं भारत के इन कदमों और संभावित सैन्य जवाब (जैसे सर्जिकल स्ट्राइक) ने पाकिस्तान में खलबली मचा दी। सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने दावा किया कि भारत अगले 24-36 घंटों में हमला कर सकता है। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने तो यह तक कहा कि अगर भारत ने हमला किया, तो पाकिस्तान परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है। ऐसे संकट के बीच असीम मलिक की नियुक्ति को भारत के खिलाफ रणनीति बनाने के तौर पर देखा जा रहा है।

सैन्य तख्तापलट की आशंका

पाकिस्तान मामलों के जानकार प्रोफेसर सूर्य मलिक ने इस नियुक्ति को सैन्य तख्तापलट (Coup in Pakistan) की आहट बताया। उन्होंने कहा कि असीम मलिक का रिटायरमेंट अक्टूबर 2025 में और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर का रिटायरमेंट नवंबर 2025 में होने वाला है। ऐसे में यह नियुक्ति एक सैन्य तख्तापलट की तैयारी हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मलिक की दोहरी भूमिका (ISI और NSA) मिलने के बाद पाकिस्तानी सेना राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों (Coup in Pakistan) को अपने हिसाब से कंट्रोल कर सकती है। उनका कहना है कि इससे यह भी साबित होता है कि सरकार पर इस समय पर सेना का पूरा नियंत्रण है। शहबाज शरीफ कमजोर प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने इसे “नागरिक संस्थानों का सैन्यीकरण” बताया, जो पाकिस्तान की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए खतरनाक हो सकता है।

इमरान खान और PTI पर बढ़ा दबाव

कुछ विशेषज्ञ इसे पहलगाम हमले (Pahalgam Attack) के बाद इमरान खान के बयान से जोड़ कर देख रहे हैं। इस हमले के बाद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान, जो इस समय जेल में हैं, उन्होंने अपने आधिकारिक X अकाउंट के जरिए एक बयान जारी किया। यह बयान 29 अप्रैल 2025 को सामने आया, जिसमें खान ने हमले की निंदा की, भारत को चेतावनी दी, और शांति पर जोर दिया। इमरान खान ने अपने बयान में पहलगाम हमले (Coup in Pakistan) को “बेहद परेशान करने वाला और दुखद” बताया। उन्होंने हमले में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की और भारत पर कई गंभीर आरोप लगाए। वहीं, खान ने अपने देश की स्थिति पर भी टिप्पणी की और कहा, “दुख की बात है कि एक फर्जी फॉर्म-47 चुनाव परिणामों के जरिए थोपी गई अवैध सरकार ने राष्ट्र को बांट दिया है।”

वहीं इमरान खान (Coup in Pakistan) के इस बयान के बाद ही नया एनएसए नियुक्त करने का फैसला लिया गया। इस नियुक्ति का एक बड़ा असर इमरान खान और उनकी पार्टी PTI पर पड़ सकता है। इमरान खान इस समय जेल में हैं, और PTI पर सैन्य और सरकारी दबाव बढ़ता जा रहा है। एक सूत्र ने दावा किया कि सेना और सरकार इमरान खान को जेल में खत्म करने की योजना बना रहे हैं, जिसमें PTI के नेता अली अमीन गंडापुर की मदद ली जा रही है। दावा किया जा रहा है कि गंडापुर को जल्द ही PTI का नया अध्यक्ष बनाया जा सकता है, ताकि खान का प्रभाव खत्म हो।

असीम मलिक ने पहले भी PTI के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। 2023 में मई 9 दंगों (जो खान की गिरफ्तारी के बाद भड़के थे) की जांच मलिक ने ही की थी, जिसमें PTI के कई नेताओं और समर्थकों को गिरफ्तार किया गया। उनकी NSA नियुक्ति से PTI पर दबाव और बढ़ सकता है। NSA के तौर पर वह राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर PTI के प्रदर्शनों को और दबा सकते हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि सेना भारत के साथ तनाव का इस्तेमाल खान की रिहाई की मांग को दबाने के लिए कर रही है। उनकी नियुक्ति से PTI को और सख्ती का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, PTI समर्थक मलिक को “मुनीर का हथियार” मानते हैं, जो खान की रिहाई और उनकी पार्टी की गतिविधियों को रोकने के लिए काम करेगा।

पाकिस्तान में आंतरिक अस्थिरता

पाकिस्तान इस समय कई आंतरिक चुनौतियों (Coup in Pakistan) से जूझ रहा है। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवादी हमले बढ़ रहे हैं। हाल ही में बलूच विद्रोहियों ने एक ट्रेन को हाईजैक कर 25 यात्रियों की हत्या कर दी थी। इसके अलावा, आर्थिक संकट ने भी सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऐसे में सेना और ISI की भूमिका और मजबूत हो गई है।

असीम मलिक की नियुक्ति को सेना की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें वह भारत के साथ तनाव को बढ़ाकर जनता का ध्यान आंतरिक समस्याओं से हटाना चाहती है। सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर पर भी अपनी छवि सुधारने का दबाव है, क्योंकि खान की गिरफ्तारी के बाद उनकी लोकप्रियता में कमी आई है। मलिक की नियुक्ति से मुनीर को एक भरोसेमंद सहयोगी मिल गया है, जो उनकी रणनीतियों को लागू कर सकता है।

पहला PhD धारक ISI प्रमुख

असीम मलिक ISI के पहले डायरेक्टर जनरल हैं, जिनके पास डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (PhD) की डिग्री है। उन्होंने नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी (NDU), इस्लामाबाद से अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों पर शोध करके यह डिग्री हासिल की। मलिक ने अमेरिका के फोर्ट लेवनवर्थ में पढ़ाई के दौरान “माउंटेन वॉरफेयर: द नीड फॉर स्पेशलिस्ट ट्रेनिंग” शीर्षक से एक थीसिस लिखी। यह थीसिस पहाड़ी क्षेत्रों में युद्ध की रणनीतियों पर केंद्रित थी। भारत-पाकिस्तान सीमा, खासकर लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) और PoK जैसे इलाकों से भी इसे जोड़ कर देखा जा रहा है।

मलिक एक सैन्य परिवार से आते हैं। उनके पिता, लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) गुलाम मोहम्मद मलिक (जिन्हें “जनरल GM” कहा जाता था), 1990 के दशक में 10 कोर, रावलपिंडी के कमांडर थे और कश्मीर में LoC की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार थे। अपने पिता के नक्शे कदम पर चल कर मलिक ने फौज ज्वॉइन की। उन्होंने पाकिस्तान मिलिट्री एकेडमी (PMA) के 80वें लॉन्ग कोर्स में स्वॉर्ड ऑफ ऑनर जीता। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल नईम खालिद लोधी ने मलिक को “शांत लेकिन सम्मानित” अधिकारी बताया था।

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वहीं, मलिक ने एडजुटेंट जनरल (AG) के तौर पर मई 9, 2023 के दंगों की जांच की थी, जो इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद भड़के थे। उन्होंने पूर्व ISI प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद के खिलाफ कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया शुरू की और उसकी निगरानी की। हमीद पर भ्रष्टाचार और सैन्य अनुशासन तोड़ने के आरोप थे।

Defence Ministry: रक्षा मंत्रालय का बड़ा फैसला- छह कंपनियों पर तीन साल के लिए और बढ़ाया बैन, रक्षा सौदों में पारदर्शिता पर जोर

Defence Ministry bans six firms for 3 more years, stresses transparency

Defence Ministry: रक्षा मंत्रालय ने छह कंपनियों पर लगे प्रतिबंध को और तीन साल के लिए बढ़ा दिया है। यह फैसला रक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार रोकने के लिए लिया गया है। इन कंपनियों पर पहली बार 2012 में 10 साल का प्रतिबंध लगा था, जो अब 11 अप्रैल 2025 से 11 अप्रैल 2028 तक लागू रहेगा। यह फैसला रक्षा मंत्रालय (Defence Ministry) के उत्पादन विभाग (डीडीपी) और सतर्कता विभाग (डी/विज) ने लिया है।

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Defence Ministry: कौन हैं ये कंपनियां?

रक्षा मंत्रालय (Defence Ministry) ने जिन छह कंपनियों को प्रतिबंधित किया है, उनमें सिंगापुर टेक्नोलॉजीज काइनेटिक्स (सिंगापुर), इज़राइल मिलिट्री इंडस्ट्रीज (इज़राइल), टी.एस. किसान एंड कंपनी (नई दिल्ली), आर.के. मशीन टूल्स (लुधियाना), राइनमेटल एयर डिफेंस (ज्यूरिख) और रूस की कॉर्पोरेशन डिफेंस शामिल हैं।

इन कंपनियों पर 2009 में सीबीआई की जांच के बाद भ्रष्टाचार और गलत तरीकों से रक्षा सौदों को प्रभावित करने का आरोप लगा था। इसके चलते 2012 में इन्हें रक्षा मंत्रालय के साथ कारोबार करने से रोक दिया गया। 2023 में प्रतिबंध तीन साल बढ़ाया गया, और अब 2025 में फिर से इसे बढ़ाया गया है। रक्षा मंत्रालय (Defence Ministry) ने इस फैसले को अपनी नीतियों के पैरा F.3 के तहत लिया है, जो रक्षा मंत्रालय के साथ व्यापार करने वाली संस्थाओं के लिए दिशानिर्देश और सजा से संबंधित है।

क्यों लगा थाा प्रतिबंध?

2009 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एक स्टिंग ऑपरेशन के बाद इन कंपनियों के खिलाफ जांच शुरू की थी, जिसमें रक्षा सौदों में रिश्वतखोरी और दलाली के सबूत मिले थे। इस मामले में कई कंपनियों और व्यक्तियों पर रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों को प्रभावित करने और अनुचित लाभ लेने का आरोप लगा। 2012 में, रक्षा मंत्रालय (Defence Ministry) ने अपनी सतर्कता नीतियों के तहत इन कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया और दस साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया। इस दौरान इन कंपनियों को रक्षा मंत्रालय या इसके किसी भी विंग के साथ किसी भी तरह का व्यापार करने पर रोक लगा दी गई।

रक्षा मंत्रालय (Defence Ministry) के सूत्रों का कहना है, “यह फैसला डिफेंस सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही को सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। हमारी नीतियों के अनुसार, किसी भी तरह की अनैतिक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रतिबंध को लागू करने की जिम्मेदारी मंत्रालय के सभी विंग्स और सर्विस हेडक्वार्टर्स पर होगी।

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रक्षा मंत्रालय (Defence Ministry) ने अपने दस्तावेज़ में यह भी उल्लेख किया है कि यह फैसला 2016 में जारी किए गए दिशानिर्देशों (पैरा 37, डी(विज) आईडी नंबर 31013/1/2016) के अनुरूप है, जिसमें सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सभी यूनिट्स को निर्देश दिए गए हैं। इस नीति का मुख्य उद्देश्य रक्षा खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और भ्रष्टाचार को खत्म करना है।

Explained NSAB: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड में बड़ा बदलाव, रॉ चीफ की वापसी और तीनों सेनाओं के वेटरंस शामिल, भारत की सुरक्षा रणनीति को कैसे मिलेगा फायदा?

Explained NSAB: Major revamp, ex-RAW chief to lead, veterans join, what it means for India’s security

Explained NSAB: 30 अप्रैल 2025 को भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (NSAB) का पुनर्गठन कर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। इस बोर्ड के नए अध्यक्ष के रूप में पूर्व रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) प्रमुख अलोक जोशी को नियुक्त किया गया है। सात सदस्यीय इस बोर्ड में तीन सैन्य सेवानिवृत्त अधिकारी, दो भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के सेवानिवृत्त अधिकारी, और एक भारतीय विदेश सेवा (IFS) का सेवानिवृत्त अधिकारी शामिल हैं। इस बोर्ड के पुनर्गठन का समय बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव ने राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

Explained NSAB: Major revamp, ex-RAW chief to lead, veterans join, what it means for India’s security

Explained NSAB: क्या है और क्या करता है?

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (National Security Advisory Board – NSAB) भारत की सुरक्षा से जुड़ा एक बहुत महत्वपूर्ण समूह है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) को सलाह देता है, जिसके प्रमुख खुद प्रधानमंत्री होते हैं। NSC देश की सुरक्षा और विदेश नीति के बड़े फैसले लेता है, और NSAB उसे लंबे समय तक चलने वाली योजनाएं और सुझाव देता है। इस बोर्ड का काम है कि यह आतंकवाद, सीमा की सुरक्षा, साइबर खतरों और पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों जैसे मुद्दों पर सरकार को रास्ता दिखाए।

NSAB की शुरुआत 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने की थी। इसमें आमतौर पर सेना, खुफिया एजेंसी, पुलिस और विदेश सेवा के रिटायर्ड विशेषज्ञ शामिल होते हैं। यह बोर्ड सरकार से थोड़ा अलग काम करता है, ताकि वह निष्पक्ष और भविष्य को ध्यान में रखकर सलाह दे सके। उदाहरण के लिए, 2001 में NSAB ने भारत की परमाणु नीति बनाई थी और 2002 में रक्षा से जुड़े बड़े दस्तावेज तैयार किए थे।

Explained NSAB: सात लोगों का नया बोर्ड बनाया

इस बार सरकार ने NSAB को और मजबूत करने के लिए सात लोगों का नया बोर्ड बनाया है। इसका नेतृत्व अलोक जोशी कर रहे हैं, जो R&AW के पूर्व प्रमुख हैं। जोशी ने अपने करियर में कई बड़े खुफिया ऑपरेशन को अंजाम दिया है, और उनकी नियुक्ति से भारत की खुफिया और बाहरी सुरक्षा को नई ताकत मिलेगी। जोशी गहरी रणनीतिक सोच और कूटनीतिक समझ रखते हैं। साथ ही, भारत की विदेश नीति और खुफिया रणनीति को लेकर लंबा अनुभव है।

Explained NSAB: Major revamp, ex-RAW chief to lead, veterans join, what it means for India’s security
Former RAW Chief Alok Joshi

बोर्ड के बाकी छह सदस्य इस प्रकार हैं:

  • एयर मार्शल पी.एम. सिन्हा (रिटायर्ड) वायुसेना के वेस्टर्न एयर कमांड के पूर्व प्रमुख रहे हैं, जो वायुसेना की ताकत और एयर स्ट्रैटेजी में विशेषज्ञता रखते हैं।
  • लेफ्टिनेंट जनरल ए.के. सिंह (रिटायर्ड) थलसेना के साउदर्न आर्मी कमांडर के रूप में सेवा दे चुके हैं, और थल सेना के रणनीतिक अभियानों में लंबा अनुभव है।
  • रियर एडमिरल मॉन्टी खन्ना (रिटायर्ड) नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी हैं, जो समुद्री सुरक्षा व हिंद महासागर क्षेत्र की रणनीति के जानकार हैं।
  • राजीव रंजन वर्मा (रिटायर्ड IPS) पुलिस के पूर्व अधिकारी हैं और रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स के पूर्व महानिदेशक भी रहे हैं। उन्हें आंतरिक सुरक्षा और लॉ एंड ऑर्डर का लंबा अनुभव है।
  • मनमोहन सिंह (रिटायर्ड IPS) सशस्त्र सीमा बल (SSB) के पूर्व महानिदेशक रह चुके हैं। साथ ही, वे भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा सुरक्षा के विशेषज्ञ भी हैं।
  • बी. वेंकटेश वर्मा (रिटायर्ड IFS) पूर्व राजनयिक हैं, रूस में पूर्व राजदूत रह चुके हैं। उनका रक्षा और परमाणु कूटनीति में विशेष योगदान रहा है।

इस बोर्ड में सेना, पुलिस और विदेश सेवा के लोग शामिल हैं, जो इसे हर तरह की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाएगा। यह बोर्ड आतंकवाद, साइबर हमले और पड़ोसी देशों के साथ तनाव जैसे मुद्दों पर एक साथ काम करेगा।

Explained NSAB: क्यों हुआ यह पुनर्गठन?

NSAB का नया स्वरूप ऐसे समय में सामने आया है, जब भारत को कई तरह की सुरक्षा समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि यह सीमा पार से आतंकवाद का हिस्सा है। इसके बाद भारत ने इंडस वाटर ट्रीटी को रोक लगा दी, सीमा पर सैनिकों की संख्या बढ़ा दी और पाकिस्तान के साथ हवाई यात्रा और व्यापार पर पाबंदी लगा दी। इसके अलावा साइबर हमले और हाइब्रिड वॉर का खतरा भी बढ़ रहा है। ऐसे में भारत को एक ऐसे रणनीतिक सलाहकार ढांचे की जरूरत थी जो केवल कागजी न रहकर जमीनी, खुफिया, तकनीकी और कूटनीतिक मोर्चों पर सरकार की मदद कर सके।

इन सभी घटनाओं के बीच, NSAB का पुनर्गठन भारत की सुरक्षा को और मजबूत करने का एक जरूरी कदम है। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक के बाद लिया गया, जिसमें आतंकवाद और सीमा सुरक्षा पर गहन चर्चा हुई थी।

NSAB के पुनर्गठन से क्या फायदे होंगे?

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (NSAB) आतंकवाद, उग्रवाद, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, परमाणु नीति, विदेश नीति में रणनीति, सैन्य आधुनिकीकरण, सीमा प्रबंधन, और रक्षा अनुसंधान व विकास पर सलाह देता है। यह भारत की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक रणनीतियां बनाता है।

NSAB का नया स्वरूप भारत की सुरक्षा को कई तरह से मजबूत करेगा। यह बोर्ड देश को मौजूदा और भविष्य की चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा। नए बोर्ड में हर क्षेत्र के विशेषज्ञ एक साथ हैं। इसमें सेना, पुलिस, खुफिया और विदेश सेवा के अनुभवी लोग हैं। नए बोर्ड को हर तरह की समस्या को अलग-अलग नजरिए से देखने और हल करने की ताकत मिलेगी। मिसाल के तौर पर, अलोक जोशी खुफिया जानकारी जुटाने और आतंकवाद से निपटने की योजना बनाएंगे। सैन्य अधिकारी युद्ध और रक्षा की रणनीति पर काम करेंगे, जबकि राजनयिक विदेश नीति को बेहतर बनाएंगे।

पहलगाम हमले ने दिखाया कि आतंकवाद अब भी भारत के लिए बड़ा खतरा है। NSAB का नया बोर्ड आतंकवाद के खिलाफ लंबे समय तक चलने वाली योजनाएं बनाएगा। यह बोर्ड सरकार को सलाह देगा कि पाकिस्तान से आने वाले आतंकवाद को कैसे रोका जाए, खुफिया जानकारी को कैसे बेहतर किया जाए और आतंकवादियों को पकड़ने के लिए क्या कदम उठाए जाएं।

पड़ोसी देशों के साथ तनाव से निपटने में भी यह बोर्ड मदद करेगा। NSAB का बोर्ड इन समस्याओं का गहराई से विश्लेषण करेगा और भारत को सैन्य और कूटनीतिक रणनीति सुझाएगा। मिसाल के तौर पर, अगर पाकिस्तान आतंकियों की मदद कर रहा है, तो बोर्ड भारत को जवाबी कदम उठाने की सलाह दे सकता है।

आज युद्ध सिर्फ बंदूक और टैंक से नहीं, बल्कि कंप्यूटर और ड्रोन से भी लड़ा जाता है। NSAB का नया बोर्ड साइबर हमलों, ड्रोन युद्ध और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे नए खतरों से निपटने की योजना बनाएगा। अलोक जोशी जैसे विशेषज्ञ साइबर खुफिया जानकारी को और मजबूत करेंगे, ताकि भारत के बैंक, बिजली ग्रिड और सरकारी सिस्टम सुरक्षित रहें।

NSAB के पुलिस अधिकारी, जैसे राजीव रंजन वर्मा और मनमोहन सिंह, देश की पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को बेहतर बनाने की सलाह देंगे। यह बोर्ड केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सुरक्षा को लेकर तालमेल बढ़ाने में भी मदद करेगा।

इसके अलावा NSAB का बोर्ड भारत को दुनिया के मंच पर और मजबूत बनाएगा। यह संयुक्त राष्ट्र और अन्य जगहों पर भारत की सुरक्षा नीतियों को सही तरीके से पेश करने की रणनीति बनाएगा। मिसाल के तौर पर, यह बोर्ड पाकिस्तान के आतंकवाद समर्थन को दुनिया के सामने लाने के लिए ठोस सबूत और रास्ते सुझा सकता है।

NSAB का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह भविष्य को ध्यान में रखकर योजनाएं बनाता है। यह बोर्ड अगले 10-20 साल में भारत को किन खतरों का सामना करना पड़ सकता है, जैसे जलवायु परिवर्तन, पानी की कमी या पड़ोसी देशों की नीतियां, इन पर सलाह देगा। इससे भारत पहले से तैयार रहेगा।

क्यों जरूरी था बदलाव?

2020 के बाद भारत ने देखा कि चीन और पाकिस्तान के साथ सीमाओं पर तनाव बढ़ा है। साइबर हमले और हाइब्रिड वॉर का खतरा भी गहराया है। ऐसे में भारत को एक ऐसे रणनीतिक सलाहकार ढांचे की जरूरत थी जो केवल कागज़ी न रहकर जमीनी, खुफिया, तकनीकी और कूटनीतिक मोर्चों पर सरकार की मदद कर सके।

अजीत डोभाल को करता है रिपोर्ट

NSAB सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को रिपोर्ट करता है। इसका फीडबैक प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को जाता है। इसका काम है नीतिगत सिफारिशें तैयार करना, जिन पर राष्ट्रीय स्तर पर फैसले लिए जा सकते हैं।

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क्यों भारत के लिए है Gamechange?

भारत आज जिस जियोपॉलिटिकल टकराव के दौर से गुजर रहा है, उसमें NSAB जैसे रणनीतिक सलाहकार बोर्ड का मजबूत और अनुभवी होना जरूरी है। RAW के पूर्व प्रमुख से लेकर सेना और विदेश सेवा के दिग्गजों की मौजूदगी यह सुनिश्चित करेगी कि भारत की सुरक्षा नीतियां व्यापक, व्यावहारिक और भविष्य के प्रति सोच रखते हों। यह बोर्ड न सिर्फ सरकार को सही सलाह देगा, बल्कि भारत की रणनीतिक तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता को भी सुदृढ़ करेगा। बदलते वैश्विक समीकरणों में यह बदलाव भारत के लिए “रणनीतिक आत्मनिर्भरता” की दिशा में एक अहम कदम है।