Home Blog Page 96

Pakistan Narrative Warfare: नैरेटिव को कैसे हथियार बना रहा पाकिस्तान, कैसे किसान आंदोलन, दिल्ली हिंसा और पहलगाम हमला हैं “सॉफ्ट पावर वॉर” का हिस्सा? भारत को कमजोर करने की साजिश

Pakistan Narrative Warfare: Was Pahalgam Attack a Trap by Pakistan? Maj Gen SP Vishwasrao at Ran Samvad
Maj Gen SP Vishwasrao at Ran Samvad 2025

Pakistan Narrative Warfare: मऊ (मध्य प्रदेश) में आयोजित पहले ट्राई-सर्विसेज कॉन्क्लेव ‘रण संवाद 2025’ में भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी मेजर जनरल एसपी विश्वसराव ने इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर और नैरेटिव बिल्डिंग की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने इसे “Weaponising the Narrative” यानी नैरेटिव को हथियार बनाने की प्रक्रिया बताया, जो न सिर्फ युद्ध के मैदान बल्कि जनता की सोच और दुश्मन के मनोबल को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला पाकिस्तान की तरफ से भारत को जाल में फंसाने की कोशिश हो सकती है।

Ran Samwad 2025 Doctrine: युद्ध का मैदान बने इंसानी दिमाग से ऐसे जंग लड़ेंगे स्पेशल फोर्सेज के जवान! ऑपरेशन सिंदूर के बाद सौंपा गया नया काम

वेस्टर्न सेक्टर में एडिशनल डायरेक्टर जनरल रिक्रूटमेंट मेजर जनरल विश्वसराव पहले पाकिस्तान में भारत के डिफेंस अताशे रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस हमले का मकसद भारत को उकसाना और सीमा पर तनाव बढ़ाना था। उन्होंने इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर पर अपने संबोधन के दौरान बताया कि आतंकियों ने हिंदुओं को चुनकर निशाना बनाया और बचे हुए लोगों से कहा कि यह संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाना। उनके मुताबिक यह सीधा-सीधा राजनीतिक और सांप्रदायिक संदेश था, जिसका लक्ष्य भारत में विभाजनकारी स्थिति पैदा करना था।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान चाहता था कि भारत गुस्से में आकर सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कोई बड़ी कार्रवाई करे और इसके लिए शायद पाकिस्तान पहले से तैयार भी था।

बता दें कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ और स्वयंभू फील्डमार्शल जनरल आसिम मुनीर अपने कट्टरपंथी इस्लामी विचारों के लिए जाने जाते हैं। मुनीर पहले आईएसआई के प्रमुख भी रह चुके हैं और पुलवामा हमले के दौरान वे इसी पद पर थे। उनकी सोच अपने पूर्ववर्ती जनरल बाजवा से अलग है। बाजवा डॉक्ट्रिन में भारत से कामकाजी रिश्तों पर जोर दिया गया था, जबकि मुनीर फिर से वैश्विक मंच पर कश्मीर मुद्दे को उभारना चाहते हैं।

Pakistan Narrative Warfare: नैरेटिव वॉरफेयर कितनी है जरूरी

मेजर जनरल विश्वसराव ने नैरेटिव को हथियार बनाने की प्रक्रिया (Weaponising the Narrative) विषय पर बोलते हुए बताया कि कैसे आज की दुनिया में युद्ध सिर्फ गोलियों और मिसाइलों से नहीं, बल्कि विचारों और सूचनाओं से भी लड़े जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक की मदद से स्ट्रैटेजिक कम्यूनिकेशन को तीनों सेनाओं में एकसाथ जोड़ा जा सकता है और इससे दुश्मन की सोच पर दबाव बनाया जा सकता है।

उनके अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाले एनालिसिस और टेक्नोलॉजी बेस्ड इनफॉरमेशन सेल अब जरूरी हो गए हैं, ताकि भारत अपनी कहानी और अपना नैरेटिव मजबूती से दुनिया के सामने रख सके। उन्होंने कहा कि Neocortical Warfare यानी ‘नैरेटिव को हथियार की तरह इस्तेमाल करना’ शांति बनाए रखने और भारत की रणनीतिक विश्वसनीयता को मजबूत करने का अहम साधन बन सकता है।

Pakistan Narrative Warfare: किसान आंदोलन ‘नैरेटिव वॉर’ का हिस्सा!

मेजर जनरल विश्वसराव ने अपने प्रेजेंटेशन के दौरान किसान आंदोलन, नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विरोध, दिल्ली हिंसा, जम्मू-कश्मीर, यमुना और मणिपुर के हालात की तस्वीरें दिखाईं। उन्होंने कहा कि यह सब भारत को अस्थिर करने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा थे। उन्होंने इसे कलर रिवोल्यूशन (Colour Revolution) की तरह बताया, जिसमें “कलर रिवोल्यूशन” जैसी रणनीतियों के जरिए समाज में अस्थिरता पैदा की जाती है और विरोध प्रदर्शनों को एक नैरेटिव की शक्ल दी जाती है।

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान कैसे आतंकवाद और हिंसा का इस्तेमाल केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उसे “सॉफ्ट पावर वॉर” यानी नैरेटिव के जरिए भारत को अस्थिर करने के लिए भी इस्तेमाल करता है। उन्होंने कहा कि ऐसा ही प्रयोग पहले बांग्लादेश में हुआ था और अब भारत में भी विरोध प्रदर्शनों को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उनके मुताबिक, 2008-2010 और 2016 में कश्मीर में जो हिंसक आंदोलन हुए, वे भी इसी रणनीति का हिस्सा थे।

उन्होंने दुश्मन की “Centre of Gravity” यानी उसकी असली ताकत और हौसले के स्रोत को निशाना बनाने की बात कही। मतलब, जहां से दुश्मन को ताकत और आत्मविश्वास मिलता है, अगर उसी को कमजोर कर दिया जाए, तो उसका पूरा ढांचा हिल सकता है।

Pakistan Narrative Warfare: ऑपरेशन सिंदूर का नैरेटिव

अपने संबोधन में मेजर जनरल विश्वसराव ने ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस अभियान ने भारतीय सेना को यह सबक दिया कि सूचना युद्ध (Information Warfare) कितनी अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि नैरेटिव पर कंट्रोल रखना और सही समय पर सही संदेश देना युद्ध के मैदान में हथियारों जितना ही महत्वपूर्ण है।

उन्होंने बताया कि अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर, नाटो-रूस संघर्ष, आर्टिकल 370 हटना, गलवान झड़प, बलूचिस्तान और तालिबान के हालात, पाकिस्तान की राजनीति और जम्मू-कश्मीर चुनाव, इन सबका इस्तेमाल पाकिस्तान भारत के खिलाफ नैरेटिव वॉर में करता है।

उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्धों में सिर्फ टैंक, जहाज और लड़ाकू विमान ही नहीं, बल्कि साइबर ऑपरेशन्स, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) जैसे हथियार निर्णायक भूमिका निभाएंगे। सूचना और नैरेटिव को कंट्रोल करना दुश्मन को मानसिक तौर पर कमजोर करने का तरीका है। इससे न केवल देश एकजुट रहता है बल्कि ऑपरेशनल क्षमता भी और मजबूत होती है।

Airbus Mahindra H125 helicopter fuselage: भारत में एयरबस और महिंद्रा की बड़ी साझेदारी, बेंगलुरु में बनेगा H125 हेलिकॉप्टर का मुख्य ढांचा

Airbus Mahindra H125 helicopter fuselage contract India

Airbus Mahindra H125 helicopter fuselage: भारत में एयरोस्पेस सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है। एयरबस हेलिकॉप्टर्स ने महिंद्रा एयरोस्ट्रक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड (MASPL) को H125 हेलिकॉप्टर का मेन फ्यूजलाज (ढांचा) बनाने का कॉन्ट्रैक्ट दिया है। यह कॉन्ट्रैक्ट बेंगलुरु में महिंद्रा के प्लांट को मिला है। वहीं, पहले फ्यूजलाज की डिलीवरी साल 2027 तक होनी है। गौरतलब है कि इसी साल अप्रैल 2025 में H130 हेलिकॉप्टर के फ्यूजलाज का निर्माण भी महिंद्रा एयरोस्ट्रक्चर्स को सौंपा गया था।

LUH Vs H125M Helicopter: क्या भारतीय सेना की पसंद बनेगा HAL का लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर, या फ्रांस का H125M मार ले जाएगा बाजी? क्या होगा मेक इन इंडिया का?

Airbus Mahindra H125 helicopter fuselage: एयरबस का भरोसा भारत पर

कॉन्ट्रैक्ट की घोषणा के मौके पर एयरबस के इंटरनेशनल एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट वाउटर वैन वर्श, एयरबस इंडिया और साउथ एशिया के प्रेसिडेंट एंड मैनेजिंग डायरेक्टर जुर्गन वेस्टरमियर और MASPL के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ अरविंद मेहरा मौजूद थे।

जुर्गन वेस्टरमियर ने कहा, “यह नया कॉन्ट्रैक्ट भारत में हमारे साझेदारों की क्षमता और देश के एयरोस्पेस सेक्टर के लिए साझा दृष्टिकोण का सबूत है। H125 का यह बड़ा पैकेज, H130 साझेदारी और निर्माणाधीन H125 की फाइनल असेंबली लाइन (FAL) के साथ मिलकर इस बात को दिखाता है कि हमें भारत पर पूरा भरोसा है। हम केवल हेलिकॉप्टर नहीं बना रहे, बल्कि यहां एक पूरा इकोसिस्टम खड़ा कर रहे हैं, जो भारत में रोटरक्राफ्ट बाजार को डेवलप करेगा।”

Airbus Mahindra H125 helicopter fuselage contract India

इस कॉन्ट्रैक्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा, “एयरबस हेलिकॉप्टर्स ने महिंद्रा एयरोस्ट्रक्चर्स प्रा. लि. (MASPL) को H125 हेलिकॉप्टर के मुख्य ढांचे के निर्माण के लिए चुना है। यह हमारे ग्रुप के लिए बहुत बड़ी खबर है। लेकिन मुझे इससे भी ज्यादा खुशी इस बात की है कि यह कॉन्ट्रैक्ट भारत की मेक इन इंडिया महत्वाकांक्षाओं और दुनिया के नए बाजारों में देश की बढ़ती क्षमता का सबूत है।”

इस समझौते के साथ भारत एयरबस हेलिकॉप्टर्स की ग्लोबल सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बन गया है। अभी एयरबस हर साल भारत से 1.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के पुर्जे और सेवाएं खरीदती है। H125 और H130 हेलिकॉप्टर्स के फ्यूजलाज का उत्पादन भारत में होने से देश एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग के ग्लोबल नेटवर्क में और गहराई से जुड़ जाएगा। इससे भारत की छवि एक भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी पार्टनर के रूप में और मजबूत होगी।

महिंद्रा ग्रुप के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. अनीश शाह ने कहा, “एयरबस के साथ साझेदारी करना हमारे लिए गौरव की बात है। यह कॉन्ट्रैक्ट न सिर्फ हमारी लंबी अवधि की साझेदारी को और मजबूत करता है, बल्कि मेक इन इंडिया के लिए हमारी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। हम एयरबस के साथ मिलकर भारत के एयरोस्पेस इकोसिस्टम को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए तैयार हैं।”

Image

दरअसल एयरबस का यह फैसला भारत में उसकी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। कंपनी पहले से ही H125 हेलिकॉप्टर और C295 मिलिट्री एयरक्राफ्ट की फाइनल असेंबली लाइन भारत में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के साथ बना रही है। जिसके बाद भारत में एक एंड-टू-एंड एयरोस्पेस इकोसिस्टम तैयार हो जाएगा, जिसमें डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली, मेंटेनेंस और ट्रेनिंग जैसी पूरी प्रक्रिया भारत में ही की जाएगी।

इससे भारत न सिर्फ घरेलू जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकेगा।

महिंद्रा एयरोस्ट्रक्चर्स का बेंगलुरु प्लांट अब एयरबस के कई प्रोजेक्ट्स का अहम हिस्सा बन चुका है। यहां पहले से H130 का काम चल रहा है और अब H125 का कॉन्ट्रैक्ट मिलने से यह केंद्र और भी महत्वपूर्ण हो गया है। एयरोस्पेस इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि यह साझेदारी भारत को रोटरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग में वैश्विक स्तर पर एक मजबूत खिलाड़ी बना देगी।

Ran Samwad 2025 में वाइस एडमिरल तरुण सोबती ने बताया, ऑपरेशन सिंदूर में INS विक्रांत पर तैनात थे 15 मिग-29 फाइटर जेट, ये 9 ट्रेंड्स तय करेंगे भविष्य के युद्धों की बिसात

Ran Samwad 2025 Vice Admiral Tarun Sobti Future Wars Analysis
VAdm Tarun Sobti, Deputy Chief of Naval Staff Indian Navy analyses Global conflicts and their Lessons for India.

Ran Samwad 2025: भारतीय नौसेना के डिप्टी चीफ वाइस एडमिरल तरुण सोबती का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक ऑपरेशन नहीं था, बल्कि भविष्य के युद्ध की झलक थी। इससे मिली सीखों ने भारतीय नौसेना और तीनों सेनाओं को यह समझने में मदद की कि आने वाले समय में युद्ध केवल बंदूकों, टैंकों और जहाजों से नहीं, बल्कि ड्रोन, साइबर युद्ध, सैटेलाइट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नैरेटिव कंट्रोल से भी लड़े जाएंगे।

Ran Samwad 2025 Training Reforms: भारतीय सेना में बड़े बदलाव की तैयारी, अब ट्रेनिंग में ड्रोन और साइबर वॉरफेयर होंगे शामिल

Ran Samwad 2025: ऑपरेशन सिंदूर से मिली बड़ी सीख

मऊ के आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित रण संवाद 2025 कार्यक्रम में बोलते हुए वाइस एडमिरल तरुण सोबती ने स्वीकार किया कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय नौसेना को कई अहम सबक दिए। उन्होंने बताया कि जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकियों ने आतंकी हमले को अंजाम दिया और उसके बाद जब हालात युद्ध की ओर बढ़े, तब नौसेना ने मात्र 96 घंटे के भीतर अपनी पूरी तैयारी पूरी कर ली थी।

Ran Samwad 2025: अपने ही बंदरगाहों में कैद हुई पाकिस्तानी सेना

उन्होंने रक्षा समाचार को बताया कि नौसेना हर दो साल में थिएटर-लेवल एक्सरसाइज Tropex करती है। इस साल भी जनवरी से मार्च के बीच यह अभ्यास हुआ था। उसी तैयारी का फायदा यह हुआ कि जब हालात बिगड़े, तो नौसेना तुरंत समुद्र में उतरने के लिए तैयार थी। सभी जहाजों और पनडुब्बियों को तुरंत गोला-बारूद से लैस किया गया। उन्होंने बताया कि एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत पर 15 मिग-29 लड़ाकू विमान तैनात किए गए और पूरी नौसेना पश्चिमी समुद्र तट पर सक्रिय हो गई।

उद्देश्य स्पष्ट था फॉरवर्ड पोस्टचर और डिटरेंस, ताकि पाकिस्तान किसी भी हाल में भारत की समुद्री सीमाओं, व्यापारिक मार्गों या तटवर्ती क्षेत्रों को खतरा न पहुंचा सके। इस तेज और संगठित कार्रवाई का नतीजा यह हुआ कि पाकिस्तान की नौसेना अरब सागर से बाहर निकल ही नहीं पाई। वाइस एडमिरल सोबती ने गर्व से कहा, “हमने उन्हें उनके ही बंदरगाहों में कैद कर दिया। वे बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।”

Ran Samwad 2025: कैसा होगा भविष्य का युद्ध?

सोबती ने कहा कि इतिहास गवाह है कि हर बड़ी तकनीकी क्रांति ने युद्ध का चेहरा बदला है। तलवार से तोप तक, टैंक से परमाणु बम तक, हर युग में तकनीक ने निर्णायक भूमिका निभाई। आज हम एक साथ कई तकनीकी क्रांतियों के बीच खड़े हैं।

उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, साइबर ऑपरेशंस और ड्रोन टेक्नोलॉजी ने युद्ध को पूरी तरह बदल दिया है। खास बात यह है कि ये तकनीकें अब बहुत तेजी से विकसित हो रही हैं, सस्ती हो गई हैं और हर किसी के लिए उपलब्ध हैं। सोबती ने कहा कि अब युद्ध का आधार केवल संख्या नहीं बल्कि स्पीड और सटीकता (Precision) है।

उन्होंने कहा कि आज की निर्णायक शक्ति ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और रियल-टाइम कम्युनिकेशन है। उनका कहना था कि सिविल सोर्स तकनीक जैसे Starlink सैटेलाइट इंटरनेट, AI आधारित डेटा एनालिटिक्स और ऑफ-द-शेल्फ ड्रोन अब युद्ध के मैदान पर हथियार के रूप में इस्तेमाल हो रहे हैं। इसका असर यह है कि युद्ध केवल सेनाओं के बीच नहीं, बल्कि तकनीक को अपनाने और इस्तेमाल करने की क्षमता पर निर्भर हो गया है।

Ran Samwad 2025: प्रिसिजन-गाइडेड म्युनिशन से कम कॉलेटरल डैमेज

वाइस एडमिरल सोबती ने रूस-यूक्रेन युद्ध और गाजा संघर्ष का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ड्रोन अब युद्ध के सबसे बड़े हथियार बन गए हैं। ईरान-इजरायल संघर्ष में लंबी दूरी से की गई स्ट्राइक और प्रिसिजन-गाइडेड म्युनिशन (PGMs) ने युद्ध की दिशा बदल दी। प्रिसिजन-गाइडेड म्युनिशन का इस्तेमाल करते हुए कम से कम कॉलेटरल डैमेज के साथ दुश्मन के मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया।

वाइस एडमिरल सोबती ने कहा कि अब ये हथियार केवल टैक्टिकल लग्जरी नहीं बल्कि रणनीतिक जरूरत बन चुके हैं।

उन्होंने बताया कि यूक्रेन युद्ध ने दिखा दिया कि कम लागत वाले ड्रोन अब बड़े हथियारों के बराबर असर डाल सकते हैं। साधारण क्वाडकॉप्टर को बम गिराने और आत्मघाती (Kamikaze) मिशनों के लिए बदला गया। रूसी टैंकों और आर्मर्ड कॉलम्स को ड्रोन और सैटेलाइट से पहले पहचानकर यूक्रेनी सेना ने सटीक हमले किए। यमन के हूती विद्रोहियों ने रेड सी और गल्फ ऑफ एडन में सस्ते UAVs का इस्तेमाल कर बड़े जहाजों और व्यापारिक मार्गों को चुनौती दी। सोबती ने कहा कि अब ड्रोन स्वॉर्म्स (झुंड) हाई टेक्नोलॉजी वेपंस और जहाजों को टक्कर दे रहे हैं।

Ran Samwad 2025: स्पेस: वॉर का नया डोमेन

सोबती ने कहा कि अब अंतरिक्ष केवल वैज्ञानिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहा। युद्ध में यह सबसे अहम साधन बन चुका है। यूक्रेन को Maxar और Planet Labs जैसी कंपनियों से रियल टाइम सैटेलाइट इमेजरी मिली। Starlink इंटरनेट नेटवर्क ने उन्हें सेफ कम्युनिकेशन उपलब्ध कराया, जबकि रूस लगातार इलेक्ट्रॉनिक जामिंग कर रहा था। इसी तरह गाजा में इजरायल ने सैटेलाइट से हमास की सुरंगों और ठिकानों का पता लगाकर चुनिंदा हमले किए। उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि आधुनिक युद्ध में स्पेस-बेस्ड एसेट्स निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।

Ran Samwad 2025: इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर का बढ़ता दबदबा

वाइस एडमिरल सोबती ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) आज की लड़ाई का अहम हिस्सा बन गया है। रूस ने यूक्रेनी ड्रोन और GPS आधारित हथियारों को जैमिंग और स्पूफिंग से बेकार कर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को भी जॉइंट इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर एसेट्स तैयार करने होंगे क्योंकि आज “जो स्पेक्ट्रम को कंट्रोल करता है, वही युद्ध को कंट्रोल करता है।”

इनफॉरमेशन वॉर और नैरेटिव कंट्रोल

वाइस एडमिरल सोबती ने बताया कि युद्ध केवल मैदान में नहीं बल्कि लोगों के दिमाग में भी लड़ा जाता है। रूस और यूक्रेन दोनों ने अपने-अपने पक्ष में नैरेटिव बनाने के लिए मीडिया लीक, सोशल मीडिया, वीडियो और प्रोपेगैंडा का इस्तेमाल किया। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में भी दुश्मन ने दुष्प्रचार फैलाने की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेना ने समय रहते इसका जवाब दिया। उनका कहना है, “नैरेटिव कंट्रोल अब युद्ध का जरूरी हिस्सा बन चुका है।”

बता दें कि सीडीएस अनिल चौहान ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लगभग 15 प्रतिशत ऊर्जा दुश्मन के झूठे नैरेटिव और दुष्प्रचार को रोकने में लग गई। यही कारण है कि ऑपरेशन के बाद भारत ने अपनी बात मजबूत ढंग से रखी और वैश्विक स्तर पर समर्थन हासिल किया।

साइबर ऑपरेशंस का रोल

वाइस एडमिरल सोबती के मुताबिक साइबर अटैक युद्ध का हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन अभी तक निर्णायक नहीं साबित हुए हैं। रूस ने यूक्रेन की पावर ग्रिड और कम्युनिकेशन सिस्टम को निशाना बनाया, वहीं ईरान समर्थित हैकर्स ने इजरायल की वाटर सप्लाई और एनर्जी फैसिलिटी पर हमला किया। हालांकि, यूक्रेन रेडंडेंसी और बैकअप सिस्टम के जरिए ऐसे हमलों से जल्दी उबर गया। लेकिन इन हमलों का असर लंबे समय तक नहीं रहा। उन्होंने कहा कि साइबर हमले सहयोगी तो हैं लेकिन निर्णायक नहीं हैं। लेकिन उन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक होगा।

नेटवर्क-इंटीग्रेटेड फोर्स स्ट्रक्चर

उन्होंने कहा कि भारत को नेटवर्क-इंटीग्रेटेड फोर्स स्ट्रक्चर की ओर बढ़ना होगा, जहां सेंसर और शूटर अलग-अलग होकर भी डेटा शेयर कर सकें और तुरंत हमला कर सकें। सोबती ने कहा कि आधुनिक युद्ध ने यह साबित कर दिया है कि अब केवल सैनिकों की संख्या से जीत नहीं मिलती। बल्कि स्पीड, एक्यूरेसी और टेक्निकल ऑप्टिमाइजेशन ही युद्ध में जीत दिला सकते हैं।

उन्होंने सुझाव दिया कि भारतीय सेनाओं को मॉड्यूलर, टेक-एनेबल्ड और एगाइल फोर्स पैकेजेज अपनाने होंगे। युद्ध अब “Mass vs Mass” नहीं बल्कि “Fast vs Fast” हो गया है। उन्होंने कहा कि अब भारत को अपने डॉक्ट्रिन्स (सैन्य सिद्धांतों) में मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस शामिल करने होंगे, ताकि थल, जल, नभ, अंतरिक्ष और साइबर हर क्षेत्र में एक साथ तालमेल बनाया जा सके।

Ran Samwad 2025 Training Reforms: भारतीय सेना में बड़े बदलाव की तैयारी, अब ट्रेनिंग में ड्रोन और साइबर वॉरफेयर होंगे शामिल

Ran Samwad 2025 Training Reforms in Indian Army tech-centric
Lt Gen NS Sarna, Commandant School of Artillery Indian Army, deliberating on 'Integrating Technology for Warfighting Through Training Initiatives'.

Ran Samwad 2025 Training Reforms: मध्यप्रदेश के मऊ स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में तीनों सेनाओं के संयुक्त रण संवाद 2025 सेमीनार में भारतीय सेना के टॉप अफसरों ने भविष्य के युद्ध की नई रूपरेखा पर चर्चा की। फोकस था, पारंपरिक ट्रेनिंग से आगे बढ़कर टेक्नोलॉजी-बेस्ड ट्रेनिंग मॉडल की ओर बढ़ना। रण संवाद के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 2027 तक भारतीय सेना के हर जवान को ड्रोन तकनीक की ट्रेनिंग दी जाएगी। वहीं, स्कूल ऑफ आर्टिलरी के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल एनएस सरना ने कहा कि भविष्य का युद्ध पारंपरिक नहीं बल्कि तकनीकी होगा और इसके लिए हमें सैनिकों को नए स्किल्स की ट्रेनिंग देनी होगी।

Ran Samwad 2025 Doctrine: युद्ध का मैदान बने इंसानी दिमाग से ऐसे जंग लड़ेंगे स्पेशल फोर्सेज के जवान! ऑपरेशन सिंदूर के बाद सौंपा गया नया काम

Ran Samwad 2025 Training Reforms: बदलना होगा ट्रेनिंग स्ट्रक्चर

पिछले एक दशक में दुनिया भर में हुई हालिया जंगों में देखा गया है कि ड्रोन, साइबर हमले, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। जनरल सरना ने कहा कि यह संकेत है कि अगला युद्ध इन्हीं तकनीकों के इर्द-गिर्द लड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर हमें आने वाले संघर्षों के लिए तैयार रहना है तो हमें अपने ट्रेनिंग स्ट्रक्चर को पूरी तरह बदलना होगा।

लेफ्टिनेंट जनरल एनएस सरना ने ‘इंटीग्रेटिंग टेक्नोलॉजी फॉर वॉरफाइटिंग थ्रू ट्रेनिंग इनिशिएटिव्स’ पर बोलते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि हमारी मिलिट्री ट्रेनिंग इंस्टीट्यूशंस केवल शारीरिक क्षमता और पारंपरिक युद्ध तक सीमित न रहकर टेक्नोलॉजी वॉरफेयर के लिए भी तैयार हों।

उन्होंने कहा कि अधिकांश सैन्य अकादमियां अभी भी पारंपरिक युद्ध पर आधारित प्रशिक्षण देती हैं, जहां शारीरिक फिटनेस और बुनियादी रणनीति पर ज्यादा जोर होता है। लेकिन अब यह काफी नहीं है। नए समय की मांग है कि जवान साइबर सिक्योरिटी, ड्रोन ऑपरेशन, इंफॉर्मेशन वॉरफेयर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसे विषयों में भी एक्सपर्ट बनें।

उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्धों को देखते हुए सैनिकों के लिए ऐसा ट्रेनिंग सिस्टम डेवलप करना जरूरी है, जो चुस्त और अनुकूलनशील हो और बदलती तकनीक के साथ कदम मिला सके। उनका कहना था कि सेना के प्रशिक्षण संस्थानों को तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र (Technology Training Hubs) के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने सिमुलेशन बेस्ड पाठ्यक्रम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वारगेमिंग और जॉइंट ट्रेनिंग इनिशिएटिव को पारंपरिक सैन्य शिक्षा में बड़ा परिवर्तनकारी कदम बताया। साथ ही उन्होंने एक राष्ट्रीय सैन्य डिजिटल ज्ञान भंडार (Military Digital Knowledge Repository) बनाने की सिफारिश की, ताकि आधुनिक ज्ञान और तकनीकी अनुभव को संस्थागत ढांचे में संरक्षित और साझा किया जा सके।

Ran Samwad 2025 Training Reforms: सिद्धांत, संगठन और ट्रेनिंग पर फोकस

इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (HQ-IDS) के डिप्टी चीफ (Doctrine, Organisation & Training) लेफ्टिनेंट जनरल विपुल सिंघल ने कहा कि भविष्य के युद्धों में जीत का आधार जॉइंटनेस और ऑर्गनाइजेशन तालमेल होगा। उन्होंने कहा, “आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के बीच सामरिक एकजुटता और साझा प्रशिक्षण ही हमें भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों में बढ़त दिलाएगा।”

उन्होंने कहा कि सैन्य प्रशिक्षण को लगातार अपडेट करते रहना होगा ताकि वह तकनीकी बदलावों के साथ तालमेल बना सके। उनके अनुसार, युद्ध की तैयारी के तीन स्तंभ हैं Doctrine (सिद्धांत), Organisation (संगठन) और Training (प्रशिक्षण)। इन तीनों का तालमेल ही कॉम्बैट रेडीनेस यानी युद्ध के लिए तैयार रहने की गारंटी है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल प्रशिक्षण को तकनीकी रूप से आधुनिक बनाया जा सकेगा, बल्कि विभिन्न सेनाओं के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान भी आसान होगा।

Ran Samwad 2025 Training Reforms: तीन प्रमुख क्षेत्रों पर दे ध्यान

सेंट्रल कमांड यानी सूर्या कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल सेनगुप्ता ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुश्मन की तरफ से बड़े पैमाने पर ड्रोन का इस्तेमाल देखने के बाद भारत अब तीन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दे रहा है। पहला, काउंटर-ड्रोन सिस्टम विकसित करना ताकि दुश्मन के ड्रोन खतरों को तुरंत न्यूट्रलाइज किया जा सके। दूसरा, ज्यादा से ज्यादा सैनिकों को ड्रोन चलाने और टैक्टिकल बैटल एरिया में इस्तेमाल करने का प्रशिक्षण देना। तीसरा, ऑटोनोमस हवाई हमलों के तरीके तैयार करना, ताकि दुश्मन की रणनीतियों का प्रभावी जवाब दिया जा सके। उन्होंने कहा कि अब ड्रोन कोई विकल्प नहीं रह गए हैं, बल्कि युद्ध के मैदान में प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं।

जनरल सेनगुप्ता ने कहा, “तकनीक को केवल सेंट्रल कमांड में ही नहीं, बल्कि पूरी भारतीय सेना में अपनाया जा रहा है। हर कमांड अपने ऑपरेशनल माहौल और चुनौतियों के हिसाब से इसे लागू कर रही है।” उन्होंने आगे कहा कि रण संवाद अब भारतीय सेनाओं के लिए गहन चर्चा, जॉइंट रिसर्च और मल्टी-डोमेन चैलेंजेस की तैयारी का अहम मंच बन चुका है। उन्होंने आगे कहा कि इस सेमिनार से मिले अनुभव और निष्कर्ष भारतीय सशस्त्र बलों को मानवीय जिम्मेदारियों और युद्धक तैयारी (combat readiness) के बीच संतुलन साधने में अहम भूमिका निभाएंगे।

ड्रोन और ऑटोमेटेड वेपन सिस्टम पर जोर

आर्मी ट्रेनिंग कमांड के ब्रिगेडियर रेवती भंडारी ने अनमैन्ड ऑटोनॉमस सिस्टम्स (UAS) यानी ड्रोन और ऑटोमेटेड वेपन सिस्टम पर बोलते हुए कहा कि ह्यूमन-मशीन टीमिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम मैनेजमेंट और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट के लिए ड्रोन का इस्तेमाल आने वाले समय में युद्ध का अहम हिस्सा बनेगा।

उन्होंने यह भी बताया कि कई देशों ने पहले ही सर्विलांस, टारगेटिंग और सप्लाई के लिए बड़े पैमाने पर ड्रोन और बिना चालक वाले वाहन (UAVs) को शामिल कर लिया है। भारत को भी इसी दिशा में तेज कदम उठाने होंगे।

ब्रिगेडियर भंडारी ने दुनिया भर के मिलिट्री स्ट्रक्चर का उदाहरण देते हुए कहा कि अब वॉर स्ट्रक्चर्स को चरणबद्ध तरीके से सेमी-ऑटोनॉमस से पूरी तरह ऑटोनॉमस सिस्टम्स की ओर ले जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अगर भारत को 2035 तक ऑटोनॉमस कैपेबिलिटी हासिल करनी है तो उसे अभी से अपने ट्रेनिंग, डॉक्ट्रिन और स्ट्रक्चर में बदलाव करना होगा।

उन्होंने चेतावनी दी कि ऑटोनॉमस सिस्टम्स के इस्तेमाल से कई कानूनी और नैतिक प्रश्न भी उठेंगे। ऐसे में प्रशिक्षण में इन पहलुओं को भी शामिल करना होगा।

सेना प्रमुख ने कही थी ये बात

बता दे कि इसी महीने चार अगस्त को सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आईआईटी मद्रास में ‘अग्निशोध’ रिसर्च सेंटर के उद्घाटन के दौरान ‘बूट्स से बॉट्स’ की कॉन्सेप्ट पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि भारतीय सेनाएं अब पारंपरिक सैन्य शक्ति (बूट्स) से तकनीक-आधारित युद्ध (बॉट्स) की ओर बढ़ रहे हैं, जिसमें नॉन कॉन्टैक्ट वॉर, स्ट्रेजेटिज मूमेंटम और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल शामिल है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए कहा था कि यह एक शतरंज के खेल की तरह था, जहां स्ट्रेटेजिकल और टेक्टिकल प्लानिंग के साथ दुश्मन को शह और मात दी गई। ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, और अन्य तकनीकों का इस्तेमाल कर सेना ने आतंकी ठिकानों को नष्ट किया। उन्होंने यह भी कहा कि नैरेटिव मैनेजमेंट के जरिए जनता तक सही संदेश पहुंचाना महत्वपूर्ण है, और इसके लिए सोशल मीडिया का उपयोग किया गया।

Ran Samwad 2025 Doctrine: ‘युद्ध का मैदान बने इंसानी दिमाग’ से ऐसे जंग लड़ेंगे स्पेशल फोर्सेज के जवान! ऑपरेशन सिंदूर के बाद सौंपा गया नया काम

Ran Samwad 2025 Doctrine: Indian Special Forces Information Warfare
AI Image

Ran Samwad 2025 Doctrine: मध्यप्रदेश के मऊ स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित रण संवाद 2025 भारतीय रक्षा इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। इस दो दिवसीय ट्राई सर्विसेज सेमिनार में सेना, नौसेना और वायुसेना के टॉप अफसरों के साथ-साथ इंडस्ट्री, एकेडमिशियंस और रणनीतिक विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इसी मौके पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने भारतीय स्पेशल फोर्सेज के लिए पहली बार जॉइंट डॉक्ट्रिन (Joint Doctrine for Special Forces Operations) जारी की।

Rajnath Singh Ran Samwad 2025: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले- “भारत ने कभी नहीं की युद्ध की शुरुआत, पर सुरक्षा के लिए हमेशा तैयार”

यह डॉक्ट्रिन बताती है कि अब स्पेशल फोर्सेज को केवल पारंपरिक युद्धक्षेत्रों जमीन, हवा और समुद्र में ही नहीं बल्कि सूचना युद्ध (Information Warfare) और नैरेटिव प्रबंधन (Narrative Management) जैसे नए क्षेत्रों में भी एक्टिव रहना होगा। देश की पहली सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जॉइंट स्पेशल फोर्सेस पॉलिसी में यह साफ कहा गया है कि स्पेशल फोर्सेस को अब प्रचार का मुकाबला करने, सूचनाओं को नियंत्रित करने और समाज में सही संदेश पहुंचाने की रणनीति तैयार करनी होगी। इस नीति में सूचना युद्ध को एक महत्वपूर्ण युद्धक्षेत्र के रूप में मान्यता दी गई है, जो पारंपरिक सैन्य कार्रवाइयों जितना ही जरूरी है।

Ran Samwad 2025 Doctrine: ह्यूमन ब्रेन बना बैटलफील्ड

डॉक्ट्रिन में कहा गया है कि आधुनिक समय में “इंसान का दिमाग भी युद्धक्षेत्र बन चुका है”। सोशल मीडिया, डीप फेक तकनीक और मनोवैज्ञानिक अभियानों के जरिए विरोधी देश जनमत को प्रभावित कर सकते हैं और समाज में अस्थिरता पैदा कर सकते हैं।

इसलिए भारतीय स्पेशल फोर्सेज को अब आक्रामक और रक्षात्मक दोनों प्रकार के इन्फो वॉरफेयर में सक्षम बनाया जाएगा। उन्हें न केवल दुश्मन के प्रोपेगेंडा को रोकना होगा, बल्कि भारत के पक्ष में मजबूत नैरेटिव तैयार करके उसे दुनियाभर में पहुंचाना भी होगा।

Ran Samwad 2025 Doctrine: ऑपरेशन सिंदूर से सीखे सबक

नई डॉक्ट्रिन का सबसे बड़ा संदर्भ ऑपरेशन सिंदूर है, जिसने दिखा दिया कि युद्ध केवल गोलियों और मिसाइलों से नहीं, बल्कि इनफॉरमेशन और परसेप्शन से भी जीता या हारा जा सकता है। इस ऑपरेशन ने यह साफ कर दिया कि युद्ध के मैदान में जीत के साथ-साथ लोगों के दिमाग में सही संदेश पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है। मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान पर आतंक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की थी। उस समय जनरल चौहान ने बताया था कि लगभग 15 फीसदी ऊर्जा दुश्मन की झूठी सूचनाओं और दुष्प्रचार को रोकने में खर्च हुई।

उन्होंने यह भी कहा था कि मिसइन्फॉर्मेशन (गलत सूचना) किसी एक घटना तक सीमित नहीं होती बल्कि यह लगातार चलती रहती है। इसलिए इसका जवाब भी बेहद सावधानीपूर्वक और संयमित तरीके से देना जरूरी है, ताकि दुश्मन को नैरेटिव बनाने का मौका न मिल सके।

मई 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ चले इस ऑपरेशन में भारत ने हवाई, थल और नौसैनिक तीनों मोर्चों पर निर्णायक बढ़त हासिल की थी। लेकिन इस दौरान दुश्मन ने सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर झूठे नैरेटिव फैलाने की कोशिश की। पाकिस्तान ने यह प्रचारित किया कि उसने भारत को भारी नुकसान पहुंचाया, जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट थी।

Ran Samwad 2025 Doctrine: “विक्ट्री इज इन द माइंड”- जनरल उपेंद्र द्विवेदी

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हाल हाल ही में कहा था कि आज की लड़ाई केवल जमीन पर जीतने से तय नहीं होती, बल्कि जनता के दिमाग में भी लड़ी जाती है। उन्होंने याद दिलाया कि पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर में हार के बावजूद यह प्रचार किया कि उसने ऑपरेशन सिंदूर जीता, और वहां की जनता भी यही मानने लगी। जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत थी।

जनरल द्विवेदी ने कहा कि अगर आप किसी पाकिस्तानी से पूछें कि ऑपरेशन सिंदूर में उनकी हार हुई या जीत, तो वह कहेगा, “हमारे प्रमुख को फील्ड मार्शल बनाया गया है, हमने तो जीत हासिल की।” इस घटना से यह साफ होता है कि लोगों के परसेप्शन को कंट्रोल करना अब युद्ध का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। उन्होंने एक “मैसेज मैनेजमेंट सिस्टम” की जरूरत पर भी जोर दिया ताकि इनफॉरमेशन और परसेप्शन वॉर को और मजबूत किया जा सके।

Ran Samwad 2025 Doctrine: Indian Special Forces Information Warfare
General Anil Chauhan, Chief of Defence Staff along with Admiral Dinesh Kumar Tripathi #CNS, Air Chief Marshal AP Singh CAS and Lt Gen PP Singh VCOAS released two joint doctrines on ‘Special Forces Operations’ and
‘Airborne & Heliborne Operations’ during RAN SAMWAD 2025, at the Army War College.

Ran Samwad 2025 Doctrine: स्पेशल फोर्सेज की नई भूमिका

भारतीय स्पेशल फोर्सेज जिनमें आर्मी के पैरा एसएफ (Para SF), नौसेना की मरीन कमांडो यूनिट्स (MARCOS) और वायुसेना की गरुड़ कमांडो फोर्स शामिल हैं, उन्हें अब एक नए बैटलफील्ड में काम करना होगा।

नई डॉक्ट्रिन कहती है कि स्पेशल फोर्सेज को सांस्कृतिक समझ, रणनीतिक संवाद और मनोवैज्ञानिक दृढ़ता (Psychological Resilience) की भी ट्रेनिंग दी जाएगी। यह स्किल उन्हें दुश्मन की प्रचार मशीनरी का मुकाबला करने और अपने संदेश को सही रूप में दुनिया तक पहुंचाने में मदद करेगी।

हाइब्रिड वॉरफेयर की तैयारी

डॉक्ट्रिन ने यह भी साफ किया है कि भविष्य का युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों से नहीं लड़ा जाएगा। इसे हाइब्रिड वॉरफेयर कहा जाता है। इसमें पारंपरिक सैन्य बलों के साथ-साथ साइबर हमले, आर्थिक दबाव, फर्जी सूचनाएं और प्रॉक्सी संगठनों का इस्तेमाल किया जाएगा।

इसलिए भारतीय स्पेशल फोर्सेज को मल्टी-डोमेन यानी जमीन, हवा, समुद्र, अंतरिक्ष, साइबर और सूचना हर क्षेत्र में तैयार रहना होगा।

पहली स्वतंत्र स्पेशल ऑपरेशंस कमांड!

2018 में गठित और 2019 में पूरी तरह एक्टिव हुई आर्मर्ड फोर्सेस स्पेशल ऑपरेशन डिविजन (AFSOD) भारत की पहली ट्राई सर्विसेज स्पेशल ऑपरेशन यूनिट है। इसमें लगभग 3,000 कमांडो शामिल हैं, जो अलग-अलग सेवाओं से आते हैं। नई डॉक्ट्रिन में संकेत दिया गया है कि भविष्य में AFSOD का दायरा और स्ट्रक्चर बढ़ाया जा सकता है। इसे एक फुल-फ्लेज्ड कमांड का रूप दिया जा सकता है, जो सीधे चीफ ऑफ स्टााफ कमेटी (COSC) के तहत काम करेगा। वहीं, अगर ऐसा होता है तो भारत धीरे-धीरे उस दिशा में बढ़ेगा, जहां एक स्वतंत्र स्पेशल ऑपरेशंस कमांड (SOC) बनाया जा सके।

ट्रेनिंग सिस्टम में बड़ा बदलाव

इस डॉक्ट्रिन में ट्रेनिंग को लेकर भी अहम सुधारों की बात कही गई है। अभी तक तीनों सेनाओं की अपनी-अपनी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूशंस और स्कूल हैं। लेकिन अब इन्हें अपग्रेड करके जॉइंट सर्विस ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स (JSTIs) बनाने की योजना है। हर JSTI को किसी खास कौशल (Core Competency) जैसे माउंटेन वॉर, समुद्री अभियान या साइबर ऑपरेशंस में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जाएगा। हालांकि इन संस्थानों का प्रशासनिक नियंत्रण संबंधित मूल सेना के पास ही रहेगा।

सूचना की जंग पर खुलेगा मोर्चा

यह डॉक्ट्रिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद जारी की गई है। जिसने भारतीय सैन्य रणनीति को यह बड़ा सबक दिया कि युद्ध केवल हथियारों से नहीं जीते जाते। इस ऑपरेशन में भारत ने दिखाया कि कैसे भारचीय मिसाइलों ने दुश्मन की सीमा के अंदर तक प्रहार किया, नौसेना ने अरब सागर में पाकिस्तान की गतिविधियों को रोका और थल सेना ने सीमा पर मोर्चा संभाला।

लेकिन इसके साथ ही एक और जंग लड़ी गई सूचना की जंग। पाकिस्तान ने फर्जी वीडियो, मनगढ़ंत खबरें और सोशल मीडिया ट्रेंड्स के जरिए यह दिखाने की कोशिश की कि भारत को नुकसान हुआ है। भारतीय सेना और सरकार ने इस प्रोपेगेंडा का समय रहते जवाब दिया और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सही तस्वीर रखी। यही वजह है कि अब डॉक्ट्रिन में इसे “ऑपरेशनल इम्पेरेटिव” यानी युद्ध का जरूरी हिस्सा माना गया है।

Rajnath Singh Ran Samwad 2025: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले- “भारत ने कभी नहीं की युद्ध की शुरुआत, पर सुरक्षा के लिए हमेशा तैयार”

Rajnath Singh Ran Samwad 2025 speech
Raksha Mantri Rajnath Singh Ran Samwad 2025 speech

Rajnath Singh Ran Samwad 2025: मध्यप्रदेश के मऊ स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय ट्राई सर्विसेज सेमिनार रण संवाद 2025 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत ने कभी किसी देश पर आक्रमण की शुरुआत नहीं की। लेकिन जब भी राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनौती मिली है, भारत ने पूरी ताकत और आत्मविश्वास के साथ उसका जवाब दिया है।

Ran Samwad 2025: सीडीएस चौहान बोले- ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीखों को अमल में ला रही सेना, ताकत के बिना शांति असंभव

उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा में हमेशा संवाद और संघर्ष, दोनों का संतुलन रहा है। महाभारत का उदाहरण देते हुए रक्षा मंत्री ने बताया कि युद्धभूमि में भी संवाद की परंपरा चलती रही। यह भारत की विशेषता है कि यहां ‘शास्त्र’ और ‘शस्त्र’ को एक ही तलवार की दो धार माना जाता है।

राजनाथ सिंह ने कहा, “भारत शांति प्रेमी राष्ट्र है, लेकिन शांतिवाद का समर्थक नहीं। बिना शक्ति के शांति केवल एक कल्पना है।”

राजनाथ सिंह ने कहा कि “आज युद्ध केवल हथियारों का खेल नहीं रह गया है। यह तकनीक, खुफिया जानकारी, अर्थव्यवस्था और कूटनीति के मेल से लड़ा जाएगा। जो देश इस त्रिकोण तकनीक, रणनीति और अनुकूलन क्षमता को साध लेगा, वही असली वैश्विक शक्ति बनेगा।”

Rajnath Singh Ran Samwad 2025: तकनीक और ‘सरप्राइज’ की भूमिका

रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक युद्ध में तकनीक और आश्चर्य (Surprise) का मेल ही उसकी जटिलता और अप्रत्याशित स्वरूप की सबसे बड़ी वजह है। उन्होंने कहा कि तकनीकी विकास इतनी तेजी से हो रहा है कि एक इनोवेशन को समझने से पहले ही दूसरा सामने आ जाता है और युद्ध की दिशा बदल देता है।

उन्होंने कहा कि “अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स (UAV), हाइपरसोनिक मिसाइलें, साइबर हमले और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फैसले आज के युद्ध की नई पहचान बन चुके हैं। इस बदलाव का सबसे बड़ा पहलू यह है कि इसका कोई स्थायी रूप नहीं है। यह लगातार बदलता रहता है और यही अनिश्चितता दुश्मन को भ्रमित करती है।”

Rajnath Singh Ran Samwad 2025: ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण

राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में हालिया ऑपरेशन सिंदूर का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने दिखाया कि भारत की सेनाएं तकनीक-आधारित रणनीति और संयुक्त कार्रवाई से किस तरह त्वरित और निर्णायक सफलता हासिल कर सकती हैं।

उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन में वायुसेना ने गहराई तक प्रहार कर दुश्मन की क्षमताओं को निष्क्रिय किया, नौसेना ने अरब सागर में दुश्मन की गतिविधियों को रोक दिया और थलसेना ने रणनीतिक मोर्चों पर दबदबा बनाया।

रक्षा मंत्री ने इसे “तकनीक-चालित युद्ध का परफेक्ट उदाहरण” बताया और कहा कि इससे भारत को ऐसे अनुभव मिले जो भविष्य के किसी भी संघर्ष के लिए मार्गदर्शन करेंगे।

Rajnath Singh Ran Samwad 2025: “सुदर्शन चक्र मिशन” का विशेष रूप से उल्लेख

रण संवाद 2025 में अपने संबोधन के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित “सुदर्शन चक्र मिशन” का विशेष रूप से उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि यह मिशन भारत सरकार की आत्मरक्षा (Self Defence) की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इस मिशन के तहत देश के महत्वपूर्ण ठिकानों और सामरिक स्थलों को आधुनिक और स्वदेशी तकनीक से बने सुरक्षा कवच से ढका जाएगा।

रक्षा मंत्री ने बताया कि सुदर्शन चक्र मिशन का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि भारत की रक्षा प्रणाली भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम रहे। इसमें उन्नत एयर डिफेंस टेक्नोलॉजी, डाइरेक्टेड एनर्जी वेपन (Directed Energy Weapons) और अत्याधुनिक स्वदेशी हथियार प्रणालियों को शामिल किया जाएगा।

राजनाथ सिंह ने इस संदर्भ में डीआरडीओ की हालिया उपलब्धियों का भी जिक्र किया और कहा कि संगठन ने इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम और हाई पॉवर्ड डाइरेक्टेड एनर्जी वेपन का सफल परीक्षण किया है। उन्होंने इसे पूरे राष्ट्र की सफलता बताया और कहा कि यह भारत की वैज्ञानिक और औद्योगिक क्षमता की बड़ी उपलब्धि है।

Ran Samwad 2025: आत्मनिर्भरता: सुरक्षा की रीढ़

राजनाथ सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भरता अब सिर्फ एक नारा नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की अटूट नींव है। उन्होंने बताया कि भारत कभी रक्षा उपकरणों का सबसे बड़ा आयातक था, लेकिन आज वह निर्यातक देशों में गिना जा रहा है।

उन्होंने कहा कि “आज हमारे स्वदेशी प्लेटफॉर्म तेजस हल्का लड़ाकू विमान, एडवांस्ड टोव्ड आर्टिलरी गन सिस्टम, आकाश मिसाइल सिस्टम और स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर – दुनिया को यह संदेश दे रहे हैं कि भारत की तकनीक और गुणवत्ता अब विश्वस्तरीय है। यह आत्मविश्वास हमारे वैज्ञानिकों, उद्योग जगत और नेतृत्व की देन है।”

रक्षा मंत्री ने बताया कि वर्ष 2014 में जहां रक्षा उत्पादन 46,425 करोड़ रुपये था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। इसी तरह, रक्षा निर्यात 10 साल पहले 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था, जो अब 24,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

युद्ध का बदलता चेहरा

अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि अब केवल सैनिकों की संख्या या हथियारों का भंडार युद्ध जीतने के लिए पर्याप्त नहीं है। अब सफलता के लिए वास्तविक समय की खुफिया जानकारी, सटीक हथियार और डेटा-आधारित रणनीति अनिवार्य हो गई है।

उन्होंने रूस-यूक्रेन संघर्ष का उदाहरण देते हुए कहा कि 2022 में यह युद्ध पारंपरिक हथियारों से शुरू हुआ था, लेकिन तीन साल में ही यह पूरी तरह बदल गया। अब इसमें ड्रोन, सेंसर-आधारित हथियार और सटीक प्रहार करने वाले म्युनिशन निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।

अपने भाषण में रक्षा मंत्री ने इतिहास से लेकर आधुनिक समय तक युद्ध के स्वरूप में आए बदलावों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वायु शक्ति निर्णायक बन गई और 1962 के क्यूबा मिसाइल संकट ने दिखाया कि परमाणु हथियारों ने दुनिया के संतुलन को बदल दिया।

आज के युग में युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है। यह साइबर स्पेस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर तक फैल चुका है।

उन्होंने कहा कि “आज का युद्ध केवल बंदूक या मिसाइलों से नहीं लड़ा जाता। डेटा, सूचना और तकनीकी श्रेष्ठता ही निर्णायक कारक बन गई है।”

भविष्य की तैयारियां और नई पहलें

रक्षा मंत्री ने कहा कि युद्ध अब इतने अचानक और अप्रत्याशित हो गए हैं कि यह अनुमान लगाना कठिन है कि कोई संघर्ष कब शुरू होगा और कब खत्म होगा। इसलिए भारत को हर स्थिति के लिए तैयार रहना होगा।

उन्होंने कहा कि “अगर कोई युद्ध दो महीने, चार महीने, एक साल या पांच साल तक भी खिंच जाए, तो हमें पूरी तरह तैयार रहना चाहिए। हमारी क्षमता ऐसी होनी चाहिए कि हम किसी भी स्थिति का सामना कर सकें।”

राजनाथ सिंह ने यह भी जानकारी दी कि आर्मी ट्रेनिंग कमांड ने 2027 तक सभी सैनिकों को ड्रोन तकनीक की ट्रेनिंग देने का निर्णय लिया है। साथ ही सेना में नई यूनिट्स जैसे रुद्र ब्रिगेड, शक्तिबाण रेजिमेंट, दिव्यास्त्र बैटरी, ड्रोन प्लाटून और भैरव बटालियन बनाई गई हैं, जो भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप हैं।

नौसेना और वायुसेना की मजबूती

राजनाथ सिंह ने बताया कि हाल ही में आईएनएस हिमगिरी और आईएनएस उदयगिरी जैसे स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट नौसेना में शामिल किए गए हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना ने अरब सागर में दुश्मन की गतिविधियों को पूरी तरह रोक दिया था, जिससे भारत की समुद्री सीमाएं सुरक्षित रहीं।

वायुसेना को भी लगातार नई क्षमताओं से लैस किया जा रहा है। लंबी दूरी की मिसाइलें, अगली पीढ़ी के हथियार और काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स ग्रिड वायुसेना की शक्ति को और बढ़ा रहे हैं।

संपूर्ण राष्ट्र की जिम्मेदारी

रक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा अब केवल सशस्त्र सेनाओं की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें देश की अर्थव्यवस्था, औद्योगिक ढांचा, शिक्षा व्यवस्था, तकनीकी क्षमताएं और नागरिक समाज सभी की भूमिका है।

उन्होंने कहा कि “आज की दुनिया में सुरक्षा केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है। यह हमारी आर्थिक प्रणाली, औद्योगिक संरचना और तकनीकी नेटवर्क से भी जुड़ी हुई है। इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा अब पूरे राष्ट्र का विषय है। इसमें उद्योग, शिक्षाविद, मीडिया और नागरिक समाज सभी की सक्रिय भूमिका जरूरी है।”

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत कभी युद्ध की शुरुआत नहीं करता और न ही किसी की भूमि पर नजर रखता है। लेकिन अगर किसी ने भारत की भूमि या संप्रभुता को चुनौती दी, तो भारत अपनी पूरी शक्ति से उसका सामना करेगा।

उन्होंने कहा कि “दुनिया हमें केवल हमारी शक्ति के लिए नहीं बल्कि सत्य, शांति और न्याय के प्रति हमारी प्रतिबद्धता के लिए सम्मान देती है। लेकिन जब बात सुरक्षा की आती है, तो हम हर संभव कदम उठाएंगे।”

Differences on Theatre Commands: क्या थिएटर कमांड को लेकर सेनाओं में बढ़ रहे हैं मतभेद? CDS जनरल चौहान ने कैसे निकाला बीच का रास्ता?

Differences on Theatre Commands iaf navy cds ran samwad 2025
General Anil Chauhan, Chief of Defence Staff along with Admiral Dinesh Kumar Tripathi #CNS, Air Chief Marshal AP Singh CAS and Lt Gen PP Singh VCOAS released two joint doctrines on 'Special Forces Operations' and 'Airborne & Heliborne Operations' during RAN SAMWAD 2025, at the Army War College.

Differences on Theatre Commands: भारतीय सेनाओं की टॉप लीडरशिप में थिएटर कमांड के स्ट्रक्चर को लेकर मतभेद सामने आ गए हैं। जहां नौसेना प्रमुख एडमिरल डीके त्रिपाठी ने बुधवार को थिएटराइजेशन की पैरवी की। तो वहीं, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने यह स्वीकार किया कि इस मुद्दे पर असहमतियां हैं, लेकिन उन्होंने भरोसा दिलाया कि इसे जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। इससे एक दिन पहले ही एयरफोर्स चीफ एपी सिंह ने थिएटर कमांड को लेकर जल्दबाजी नहीं करने की बात कही थी।

IAF Chief AP Singh On Theatre Command: रण संवाद में एयर फोर्स चीफ ने थिएटर कमांड को लेकर कह दी ये बड़ी बात, सामने बैठे थे CDS, रहे चुप

Differences on Theatre Commands: क्या कहा था एयरफोर्स चीफ ने?

मऊ के आर्मी वॉर कालेज में आयोजित दो दिवसीय रण संवाद कार्यक्रम में बोलते हुए वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने थिएटर कमांड के प्रस्तावित स्ट्रक्चर को लेकर अलग बात कही थी। उन्होंने सुझाव दिया कि मिलिट्री कॉर्डिनेशन का स्स्ट्रक्चर ऐसा होना चाहिए जिसे सीधे तीनों सेनाओं के प्रमुख मिलकर ऑपरेट करें। वायुसेना प्रमुख का कहना था कि इस स्तर पर जॉइंट प्लानिंग और फैसले अधिक व्यावहारिक होंगे और इससे अनावश्यक नई परतें जोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने यह भी कहा था कि अभी थिएटर कमांड लागू करने का समय नहीं है। उन्होंने समझाया कि इस तरह की जल्दबाजी से तीनों सेनाओं की कोर स्ट्रेंथ को नुकसान हो सकता है।

एयर चीफ का कहना था कि “हमें अभी किसी नए स्ट्रक्चर की जरूरत नहीं है। जो सिस्टम मौजूद है, उसी के जरिए बेहतर काम हो सकता है। हमें दिल्ली में एक जॉइंट प्लानिंग और कॉर्डिनेशन सेंटर बनाना चाहिए, जहां से योजनाएं तैयार हों और फिर उनका क्रियान्वयन अलग-अलग स्तरों पर किया जाए।”

वायुसेना की चिंता यह है कि उसके पास सीमित संख्या में विमान, रिफ्यूलर और निगरानी प्रणाली (AWACS) हैं। अगर हवाई संसाधन अलग-अलग थिएटर कमांड को दे दिए गए, तो वायुसेना तेजी से किसी भी मोर्चे पर अपने संसाधन नहीं भेज पाएगी। वर्तमान में वायुसेना सिर्फ 48 घंटों में अपने संसाधनों को किसी भी हिस्से में भेज सकती है, और यही उसकी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत है।

Differences on Theatre Commands: नौसेना प्रमुख ने किया समर्थन

वहीं नौसेना प्रमुख एडमिरल डीके त्रिपाठी ने थिएटराइजेशन का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि नौसेना इस सुधार को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि तीनों सेनाओं के बीच कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन और कॉम्बैट यानी युद्धक क्षमता का बेहतर कॉर्डिनेशन हो। हमें एक साझा ऑपरेशनल पिक्चर और जॉइंट प्लानिंग बनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।”

नौसेना प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि वर्तमान में भी तीनों सेनाएं जॉइंटनेस और इंटीग्रेशन को मजबूत करने की दिशा में बड़े कदम उठा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी और थिएटर कमांड उसका अंतिम स्वरूप होगा।

नौसेना प्रमुख ने यह भी बताया कि समुद्री क्षेत्र में नए खतरे उभर रहे हैं। मछली पकड़ने वाली नावें और रिसर्च वेसल अब आधुनिक तकनीक से लैस होकर निगरानी और सूचनाएं इकट्ठा कर रहे हैं, जिन्हें सैन्य उद्देश्यों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

CDS ने साधा संतुलन

दो सेनाओं के अलग-अलग विचार सामने आने के बाद, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने बीच का रास्ता अपनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि मतभेद होना कोई बुरी बात नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि हम खुलकर चर्चा कर रहे हैं।

सीडीएस ने कहा, “अगर असहमति नज़र आ रही है तो यह अच्छी बात है, क्योंकि हम इसे देशहित में सुलझा लेंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि तीनों सेनाओं में भरोसा है और हम एक-दूसरे की बात सुनने को तैयार हैं।”

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि थिएटर कमांड पर काम तेज करना होगा। “शायद हमें यह काम 10 साल पहले ही शुरू कर देना चाहिए था। अब देर हो चुकी है, लेकिन हमें इस कमी को जल्द पूरा करना होगा।”

जनरल चौहान ने कहा, “सीडीएस बनने के बाद से मेरा उद्देश्य तीनों सेनाओं में जॉइंटनेस को बढ़ावा देना रहा है। आज हम खुलकर अपनी राय रखते हैं, मतभेदों पर चर्चा करते हैं और फिर भी एक साझा समाधान तक पहुंचते हैं। यही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है।” सीडीएस ने यह भी कहा कि विचार-विमर्श की यह परंपरा तीनों सेनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे यह साबित होता है कि वे जॉइंटनेस और सहयोग के लिए गंभीर हैं।

उन्होंने कहा कि भविष्य में केवल सेना, वायुसेना और नौसेना ही नहीं, बल्कि खुफिया एजेंसियों, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और तकनीकी संगठनों के साथ भी गहन तालमेल जरूरी होगा।

गौरतलब है कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद औपचारिक रूप से 1 जनवरी 2020 को अस्तित्व में आया था, जब जनरल बिपिन रावत को देश का पहला सीडीएस नियुक्त किया गया। उनके निधन के बाद सितंबर 2022 में जनरल अनिल चौहान ने यह जिम्मेदारी संभाली। सरकार ने सीडीएस को थिएटर कमांड्स बनाने और तीनों सेनाओं के बीच तालमेल को मजबूत करने का जिम्मेदारी सौंपी है।

जनरल चौहान ने कहा कि थिएटर कमांड की दिशा में आगे बढ़ने की प्रक्रिया को और तेज करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “यकीन रखिए, हम पूरी कोशिश कर रहे हैं और इसे आगे ले जाएंगे।”

क्या है थिएटर कमांड?

थिएटर कमांड के कॉन्सेप्ट का मतलब है कि सेना, नौसेना और वायुसेना को एक ही कमांडर के अधीन रखा जाए। यह कमांडर किसी खास भौगोलिक क्षेत्र की सुरक्षा का जिम्मा संभाले और उसके पास सभी तरह के संसाधन जैसे टैंक, तोप, जहाज, विमान, हेलिकॉप्टर और सैनिक एक साथ हों।

अभी भारतीय सेना और वायुसेना के पास सात-सात कमांड हैं और नौसेना के पास तीन। यानी कुल 17 स्वतंत्र कमांड काम कर रहे हैं। चीन ने 2016 में अपने सात सैन्य क्षेत्रों को पांच थिएटर कमांड में बदल दिया था, जिनमें भारत से सटे इलाके उसके पश्चिमी थिएटर कमांड के अंतर्गत आते हैं।

भारत में डिफेंस रिफॉर्म्स 2019 में शुरू हुए थे, जब डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स का गठन हुआ और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद सृजित किया गया। तब से लेकर अब तक थिएटर कमांड के कॉन्सेप्ट पर लगातार विचार-विमर्श चल रहा है।

भविष्य के युद्ध की नई तस्वीर

जनरल चौहान ने कहा कि आने वाले समय में युद्ध केवल जमीन या आसमान तक सीमित नहीं रहेंगे। अब यह घनी आबादी वाले शहरों, रेगिस्तानों, समुद्र के भीतर, अंतरिक्ष और साइबर स्पेस तक फैलेगा। उन्होंने उदाहरण दिया कि शहरी इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए हल्के ड्रोन, डिटेक्शन सिस्टम और नई तकनीक निर्णायक साबित होंगी।

उन्होंने यह भी कहा कि अब युद्ध केवल संगठित सेनाओं के बीच नहीं हो रहे। आज पैरामिलिट्री फोर्स, निजी सुरक्षा कंपनियां, भाड़े के सैनिक और टेक्नोलॉजी आधारित हथियार प्रणाली भी सक्रिय हैं। आने वाले समय में रोबोट और स्वचालित हथियार भी युद्ध का हिस्सा बन सकते हैं।

सीडीएस ने कहा कि आज हमें सिर्फ स्कॉलर वॉरियर ही नहीं, बल्कि टेक वॉरियर और इंफ्लुएंस वॉरियर की भी जरूरत है। जहां स्कॉलर वॉरियर युद्ध की कला और विज्ञान को समझेगा। तो टेक वॉरियर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर और अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करेगा। जबकि इंफ्लुएंस वॉरियर नैरेटिव, सूचना और जनमत को नियंत्रित करेगा।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ेगी भूमिका

जनरल चौहान ने तकनीकी विकास को युद्ध का निर्णायक पहलू बताया। आधुनिक युद्ध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिग डेटा एनालिटिक्स निर्णायक भूमिका निभाएंगे। डायरेक्टेड एनर्जी वेपन और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर युद्धक्षेत्र की दिशा को पूरी तरह बदल देंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि आज साइबर वारफेयर, ऑनलाइन प्रोपेगैंडा और नैरेटिव ऑपरेशंस व्यक्तिगत स्तर तक पहुंच चुके हैं। आम नागरिक भी अब युद्ध का हिस्सा बन गए हैं और सोशल मीडिया, साइबर अभियानों तथा ऑनलाइन नैरेटिव्स के जरिए सीधे प्रभावित हो रहे हैं।

रण संवाद से मिली सीख

रण संवाद 2025 के दो दिनों की चर्चा का सार प्रस्तुत करते हुए सीडीएस ने कहा कि असमानता अब शक्ति संतुलन का नया आधार बन चुकी है। सटीकता पारंपरिक भारी बल प्रयोग की जगह ले रही है। युद्ध धीरे-धीरे मानव संचालित से मशीन संचालित होता जा रहा है, जिससे नैतिक सवाल भी उठेंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नैरेटिव बिल्डिंग अब केवल मीडिया का हिस्सा नहीं है, बल्कि युद्ध का निर्णायक पहलू बन गई है।

जनरल चौहान ने यह भी कहा कि युद्ध में काइनेटिक ऑपरेशंस और इंफॉर्मेशन ऑपरेशंस का इंटीग्रेशन अब अनिवार्य हो गया है। उन्होंने भरोसा जताया कि रण संवाद जैसे मंच भविष्य के युद्धों को समझने और भारतीय सेनाओं की तैयारियों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

 

IAF Chief AP Singh On Theatre Command: रण संवाद में एयर फोर्स चीफ ने थिएटर कमांड को लेकर कह दी ये बड़ी बात, सामने बैठे थे CDS, रहे चुप

IAF Chief AP Singh on Theatre Command: Warns Against Rushed Theaterisation
File Photo

IAF Chief AP Singh On Theatre Command: भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा है कि थिएटर कमांड (Theaterisation) की प्रक्रिया को जल्दबाजी में लागू करना सही कदम नहीं होगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत को किसी दूसरे देश का मॉडल नहीं अपनाना चाहिए बल्कि अपनी जरूरतों के हिसाब से फैसला लेना होगा।

Ran Samwad 2025: सीडीएस चौहान बोले- ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीखों को अमल में ला रही सेना, ताकत के बिना शांति असंभव

अपनी बेबाक और सीधे-सपाट शब्दों में अपनी बाात कहने के लिए मशहूर एयर चीफ मार्शल एपी सिंह मंगलवार को मध्यप्रदेश के डॉ. भीमराव अंबेडकर नगर (मऊ) स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित रण संवाद 2025 कार्यक्रम के फायर साइट चैट कार्यक्रम में बोल रहे थे। यह ट्राई सर्विसेज (थलसेना, नौसेना और वायुसेना) का जॉइंट सेमिनार है, जिसमें वॉर, वॉर फाइटिंग और भविष्य की सैन्य चुनौतियों पर चर्चा की जा रही है।

IAF Chief AP Singh On Theatre Command: सामने बैठे थे जनरल अनिल चौहान

वर्तमान में सेना के सात, वायुसेना के सात और नौसेना के तीन कमांड अलग-अलग काम करते हैं, लेकिन इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड से सभी सेवाओं के संसाधनों को एक ही कमांडर के अधीन इंटीग्रेट किया जाएगा। यह सुधार 2019 में सैन्य मामलों के विभाग के गठन और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की नियुक्ति से शुरू हुआ था।

मध्यप्रदेश के डॉ. अंबेडकर नगर (मऊ) में आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित रण संवाद 2025 के दौरान भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने थिएटर कमांड पर बोलते हुए उन्होंने मौजूदा मिलिट्री फॉरमेशंस में जल्दबाजी से बदलाव न करने की बीत कही। उनका कहना था कि सेनाओं के कोर स्किल्स को बनाए रखते हुए ही कोई फैसला लिया जाना चाहिए।

खास बात यह है कि जब एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने यह खरा-खरा बयान दिया तो दर्शक दीर्घा में सीडीएस जनरल अनिल चौहान भी बैठे हुए उन्हें सुन रहे थे और उनके बयान पर वे सिर्फ मुस्कुरा कर रह गए और कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। बता दें कि रण संवाद कार्यक्रम को सीडीएस अनिल चौहान की पहल के बाद बाद ही आयोजित किया गया है।

IAF Chief AP Singh On Theatre Command: अतिरिक्त लेयर्स न जोड़ी जाएं

वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने जोर दिया कि कंबाइंड स्ट्रक्चर्स में फैसला लेने की प्रक्रिया में अतिरिक्त लेयर्स न जोड़ी जाएं, क्योंकि इससे कमांडर स्तर पर जल्दी फैसला लेना मुश्किल हो जाता है। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि थिएटर कमांड का उद्देश्य फटाफट फैसला लेना है, लेकिन इसके लिए मौजूदा व्यवस्था को बिना सोचे-समझे बदलना ठीक नहीं।

उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए कहा कि इस अभियान में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने चार वरिष्ठ अधिकारियों सीडीएस और तीनों सेवाओं के प्रमुखों के बीच कॉर्डिनेशन का बड़ा काम किया। सिंह ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान केवल चार लोगों की जॉइंट प्लानिंग से कोई कमी नहीं आई। सब कुछ व्यवस्थित तरीके से हो गया। इस ऑपरेशन के दौरान चारों शीर्ष सैन्य अधिकारी सीडीएस जनरल अनिल चौहान और तीनों सेवा प्रमुख—साथ मिलकर काम कर रहे थे। इसलिए, उन्होंने टॉप लेवल पर जॉइंट प्लानिंग और क्रियान्वयनपर जोर दिया।

सिंह ने यह भी कहा कि कुछ छोटी-मोटी चुनौतियां जरूर सामने आईं, लेकिन उन्हें तुरंत हल कर लिया गया। इसका सबसे बड़ा सबक यह था कि दिल्ली में एक ज्वॉइंट प्लानिंग और कोऑर्डिनेशन सेंटर स्थापित होना चाहिए, जिसे सीडीएस और चीफ़्स ऑफ़ स्टाफ कमिटी के अधीन रखा जाए।

IAF Chief AP Singh On Theatre Command: गंभीर समस्याएं खड़ी होंगी

सिंह ने कहा कि “कोई भी नया स्ट्रक्चर निर्णय प्रक्रिया को लंबा नहीं करे। ओओडीए लूप (OODA Loop – Observe, Orient, Decide, Act) जितना छोटा रहेगा, युद्धक निर्णय उतने तेज होंगे।” उन्होंने यह भी जोर दिया कि हर सेवा की मुख्य क्षमता (Core Competence) बरकरार रहनी चाहिए। अगर थलसेना का कार्य वायुसेना को सौंपा जाएगा या नौसेना का कार्य किसी अन्य सेवा को, तो इससे गंभीर समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।

नए स्ट्रक्चर की अभी जरूरत नहीं”

एयर चीफ ने दोहराया कि भारत को अमेरिका या चीन के मॉडल की नकल नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “हर देश की अपनी जरूरतें होती हैं। चीन ने अपने हिसाब से थिएटर कमांड बनाए, अमेरिका ने अपने हिसाब से। लेकिन भारत को वही करना चाहिए जो हमारी स्थिति और जरूरत के अनुसार सही हो। सिर्फ दबाव में आकर अभी तुरंत इसे लागू करना ठीक नहीं है।”

उन्होंने यह भी कहा कि अगर थिएटर कमांडर कहीं और बैठकर केवल फोन पर आदेश देंगे, तो यह व्यवस्था कारगर नहीं होगी। युद्ध के दौरान वास्तविक समय (Real-time) पर कॉर्डिनेशन होना जरूरी है।

कल के युद्ध की आज करनी होगी तैयारी

रण संवाद में एयर चीफ ने कहा कि भारत को कल के युद्ध की तैयारी आज करनी होगी। आधुनिक तकनीकें जैसे साइबर युद्ध, अंतरिक्ष निगरानी (Space Surveillance), इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भविष्य की लड़ाई का अहम हिस्सा होंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को स्टार्टअप्स और स्वदेशी टेक्नोलॉजी में निवेश करना चाहिए ताकि रक्षा क्षेत्र में इनोवेशंस को बढ़ावा मिले।

भारत में थिएटर कमांड की बहस 2019 के बाद तेज हुई, जब सरकार ने डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स (DMA) बनाया और सीडीएस का पद सृजित किया। वर्तमान में भारतीय थलसेना और वायुसेना की सात-सात कमांड हैं जबकि नौसेना की तीन कमांड हैं। योजना यह है कि इन्हें मिलाकर इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड बनाए जाएं।

चीन की तर्ज पर थिएटर कमांड

चीन ने 2016 में अपनी सात सैन्य क्षेत्रों को पांच थिएटर कमांड में बदला था, जिसमें भारत से लगती सीमा का दायित्व वेस्टर्न थिएटर कमांड को सौंपा गया।

लेकिन भारत में इस स्ट्रक्चर को लागू करने पर कई बार सवाल उठते रहे हैं। खासकर वायुसेना ने चिंता जताई है कि उसकी सीमित स्क्वॉड्रन, एयरबोर्न वार्निंग सिस्टम (AWACS) और मिड-एयर रीफ्यूलर को विभिन्न थिएटरों में बांटने से फ्लेक्सिबिलिटी घट सकती है।

वायुसेना का तर्क है कि उसके पास पूरे देश में 48 घंटे के भीतर रिसोर्सेस को कहीं भी तैनात करने की क्षमता है। अगर इन्हें थिएटरों में बांट दिया गया तो यह रणनीतिक लाभ कम हो जाएगा।

दुनियाभर में हो रहे संघर्षों पर हुई चर्चा

रण संवाद में सिर्फ ऑपरेशन सिंदूर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय युद्धों जैसे रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया की लड़ाइयों के अनुभवों पर भी चर्चा हुई।

एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि युद्ध की प्रकृति बदल रही है। आज प्लेटफॉर्म महत्वपूर्ण हैं लेकिन उससे भी ज्यादा अहम है उनका रैप-अराउंड इकोसिस्टम जैसे साइबर, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और स्पेस टेक्नोलॉजी। उन्होंने स्वीकार किया कि भारत इन क्षेत्रों में पर्याप्त तेजी से आगे नहीं बढ़ रहा है और जरूरत है कि इन्हें प्राथमिकता दी जाए।

Ran Samwad 2025: सीडीएस चौहान बोले- ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीखों को अमल में ला रही सेना, ताकत के बिना शांति असंभव

Ran Samwad 2025: india future warfare response cds sudarshan chakra operation sindoor
CDS General Anil Chauhan in Ran Samwad 2025

Ran Samwad 2025: मध्यप्रदेश के महू में स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित रण संवाद 2025 के उद्घाटन सत्र में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने भारतीय सेनाओं की प्राथमिक जिम्मेदारी और बदलती युद्ध रणनीति पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भारत की प्रतिक्रिया तेज, निर्णायक और संयुक्त होनी चाहिए क्योंकि युद्ध का स्वरूप बदल रहा है और भविष्य के युद्ध केवल जमीन, समुद्र और आसमान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि साइबर और अंतरिक्ष जैसे डोमेन भी शामिल होंगे।

Ran Samwad-2025: कैसे टेक्नोलॉजी ने ऑपरेशन सिंदूर में किया कमाल, ट्राई सर्विसेज सेमिनार में होगी चर्चा, कई देशों के डिफेंस अताशे भी होंगे शामिल

उन्होंने कहा कि यह सेमिनार शक्ति प्रदर्शन का मंच नहीं बल्कि उद्देश्य की स्पष्टता और साझा समझ विकसित करने का एक प्रयास है। उनके अनुसार, “हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी वॉर और वॉर फाइटिंग की समझ विकसित करना है। कई बार हम कूटनीति, भू-राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अधिक ध्यान देते हैं और मूल विषय यानी युद्ध की तैयारी को नजरअंदाज कर देते हैं। रण संवाद का मकसद इस सोच को बदलना है।”

उन्होंने कहा कि पिछले दो सालों से उनकी कोशिश रही है कि सेनाओं का ध्यान वॉर और वॉर फाइटिंग पर केंद्रित हो। वॉर फाइटिंग केवल सिद्धांतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तकनीक, रणनीति और टैक्टिक्स (युद्ध कौशल) के वास्तविक इस्तेमाल से जुड़ा हुआ है।

Ran Samwad 2025: पहली बार भारतीय मिलिट्री कॉन्क्लेव

जनरल चौहान मध्यप्रदेश के महू स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित ट्राई सर्विसेज रण संवाद 2025 मिलिट्री कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। यह सेमिनार 26–27 अगस्त तक आयोजित हो रहा है और इसे मुख्य रूप से हेडक्वार्टर इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (IDS) और आर्मी वॉर कॉलेज ने मिलकर तैयार किया है।

सीडीएस ने कहा, “जॉइंटमैनशिप अब कोई कल्पना नहीं रही। यह हमारे मौजूदा परिवर्तन की नींव है, जिसमें थिएटराइजेशन, इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक्स और जॉइंट ट्रेनिंग शामिल हैं।” उन्होंने कहा कि यह सेमिनार शक्ति प्रदर्शन का मंच नहीं बल्कि उद्देश्य की स्पष्टता और साझा समझ विकसित करने का एक प्रयास है।

Ran Samwad 2025: तकनीक ने रणनीति और युद्धकला को बदला

रण संवाद का मुख्य विषय है – युद्ध पर तकनीकी प्रगति का प्रभाव। इस दौरान वरिष्ठ सैन्य अफसर हाल में हुए संघर्षों का अध्ययन करेंगे और बताएंगे कि कैसे तकनीक ने रणनीति और युद्धकला को बदला है। चर्चा के प्रमुख बिंदुओं में शामिल हैं – उभरती तकनीकें, आधुनिक युद्ध की चुनौतियां, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल, समुद्री अभियानों में ड्रोन स्वॉर्म, लैंड वॉरफेयर में यूएवी का इस्तेमाल, ट्रेनिंग में टेक्नोलॉजी का इंटीग्रेशन और 2035 तक नई युद्ध संरचनाओं की योजना।

Ran Samwad 2025: इस बार सर्विंग अफसर हैं स्पीकर

जनरल चौहान ने बताया कि पहले ऐसे सेमिनारों में मुख्य वक्ता (स्पीकर) रिटायर्ड अफसर होते थे और दर्शकों में सर्विंग अफसर होते थे। लेकिन उन्होंने इस परंपरा को उलट दिया है। इस बार वर्तमान में सेवा दे रहे अधिकारी ही मुख्य वक्ता हैं, जबकि पूर्व अधिकारी अपने अनुभव साझा करेंगे। उनका मानना है कि नई पीढ़ी तकनीक और आधुनिक युद्ध पद्धतियों के प्रति ज्यादा जागरूक है और उनके विचारों को सुना जाना जजरूरी है।

सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही विचारों और ज्ञान का केंद्र रहा है। उन्होंने कौटिल्य का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे यहां हमेशा से बौद्धिक परंपरा रही है, लेकिन भारतीय युद्धों के गहन विश्लेषण या रणनीति पर शैक्षणिक विमर्श से जुड़ा साहित्य बहुत कम उपलब्ध है। उन्होंने कहा, “युद्ध के विभिन्न आयामों, नेतृत्व, प्रेरणा, मनोबल और तकनीक पर गंभीर शोध की आवश्यकता है। भारत को सशक्त, सुरक्षित, आत्मनिर्भर और विकसित बनाना है। यह तभी संभव है जब सभी हितधारक मिलकर भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार सेनाओं के निर्माण की प्रक्रिया में सामूहिक रूप से भाग लें।”

सीडीएस चौहान ने कहा कि आज युद्ध और शांति के बीच का फर्क धुंधला हो गया है। आधुनिक युग में संकट, संघर्ष और युद्ध एक-दूसरे से जुड़ गए हैं। उन्होंने कहा कि पहले जीत का पैमाना इलाके पर कब्जा या युद्धबंदियों की संख्या होती थी, लेकिन अब जीत का अर्थ है तेज और प्रभावी कार्रवाई, मानसिक और मनोवैज्ञानिक बढ़त, और तकनीकी श्रेष्ठता।

उनके अनुसार, आज की लड़ाइयां केवल भौतिक नुकसान पर नहीं बल्कि नैरेटिव कंट्रोल पर भी निर्भर करती हैं। यही कारण है कि पारंपरिक हथियार के साथ सूचना युद्ध (information warfare) और साइबर अभियान (cyber ops) उतने ही अहम हो गए हैं।

Ran Samwad 2025: “जो सबसे तेज है वही आगे रहेगा”

सीडीएस चौहान ने कहा कि रण संवाद का उद्देश्य है भविष्य के युद्धों पर चर्चा करना। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में युद्ध का स्वरूप और तकनीकी का इस्तेमाल इतना मुश्किल हो जाएगा कि सेनाओं को हर क्षेत्र में बराबरी से तैयार रहना होगा।
उन्होंने कहा, “हम एक ऐसी दौड़ में हैं जहां जो सबसे तेज है वही आगे रहेगा। लेकिन यह दौड़ केवल रफ्तार की नहीं है, बल्कि नई तकनीकों और नए क्षेत्रों में कूदने की भी है। भारत को इस दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहिए।”

सीडीएस चौहान ने आगे कहा, देश हमेशा शांति के पक्ष में खड़ा रहा है। “हम एक शांति-प्रिय राष्ट्र हैं, लेकिन गलती से हमें निष्क्रियतावादी (Pacifist) न समझा जाए। मेरा मानना है कि ताकत के बिना शांति केवल एक कल्पना है। एक लैटिन कहावत है, जिसका अर्थ है- यदि आप शांति चाहते हैं, तो युद्ध की तैयारी करें।”

उन्होंने आगे कहा कि भारत ने हमेशा ‘शस्त्र’ और ‘शास्त्र’ को एक साथ जोड़ा है, जो वास्तव में एक ही तलवार की दो धार हैं। शांति के लिए युद्ध लड़ना ही होगा। उन्होंने अंत में कहा कि भारतीय सेनाओं को सौ प्रतिशत तैयारी रखनी होगी क्योंकि भविष्य के युद्ध बहुआयामी होंगे और उनका स्वरूप पहले से कहीं अधिक जटिल होगा।

Ran Samwad 2025: ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबक

सीडीएस ने अपने भाषण में मई 2025 के ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया। यह ऑपरेशन पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था। इसमें भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेनाओं ने 9 आतंकी कैंप और 13 पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। इसमें कम से कम 100 आतंकियों के मारे जाने की पुष्टि हुई थी। भारतीय वायुसेना ने कई हवाई अड्डों और सैन्य ठिकानों को टारगेट किया। सेना ने पाक अधिकृत कश्मीर में कई लॉन्चपैड नष्ट किए। सीडीएस ने कहा कि इस ऑपरेशन से भारतीय सेनाओं ने कई सबक लिए हैं और उनमें से अधिकांश को लागू किया जा चुका है।

मिशन सुदर्शन चक्र का जिक्र

अपने संबोधन में सीडीएस चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस पर किए गए मिशन सुदर्शन चक्र के एलान का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह भारत के पास अपना आयरन डोम जैसा एयर डिफेंस सिस्टम, जो दुश्मन के हवाई हमलों से न सिर्फ रक्षा करेगा बल्कि जवाबी कार्रवाई भी करेगा।

उन्होंने कहा कि इसके लिए भारी स्तर पर इंटीग्रेशन की जजरूरत होगी। इसमें जमीन, समुद्र, वायु, अंतरिक्ष और साइबर सभी क्षेत्रों के सेंसर और निगरानी तंत्र को जोड़ा जाएगा। रियल टाइम प्रतिक्रिया के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग का इस्तेमाल करना होगा।

DRDO का सफल परीक्षण

23 अगस्त को DRDO ने ओडिशा तट पर Integrated Air Defence Weapon System (IADWS) का पहला सफल परीक्षण किया था। इस स्वदेशी सिस्टम में QRSAM, VSHORADS और हाई-पावर लेज़र आधारित Directed Energy Weapon शामिल हैं। परीक्षण के दौरान तीन अलग-अलग टारगेट्स—दो हाई-स्पीड UAV और एक मल्टी-कॉप्टर ड्रोन को एक साथ नष्ट किया गया।

CDS चौहान ने कहा कि यह सिस्टम भविष्य के सुदर्शन चक्र का हिस्सा होगा। DRDO प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत ने भी इस सफलता को ऐतिहासिक बताया था।

आकाशतीर सिस्टम की भूमिका

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने अपने स्वदेशी एयर डिफेंस नेटवर्क आकशतीर का इस्तेमाल किया था। इस सिस्टम ने पाकिस्तानी हमलों को रोकने में अहम योगदान दिया। आकसटीर ने तेजी से दुश्मन के मिसाइल और ड्रोन का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय किया। इसे भारतीय वायुसेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) से जोड़ा गया था।

गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, चार दिन तक चले ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया था कि भारत की नई एयर डिफेंस क्षमता कितनी मजबूत हो चुकी है।

Rashtriya Rifles in Jammu Kashmir: जम्मू-कश्मीर से राष्ट्रीय राइफल्स को हटाने की तैयारी! पहलगाम हमले के बाद केंद्र का बड़ा कदम, CRPF संभालेगी सुरक्षा व्यवस्था!

Rashtriya Rifles in Jammu Kashmir replacing CRPF
Photo: Rashtriya Rifles

Rashtriya Rifles in Jammu Kashmir: जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा व्यवस्था में केंद्र सरकार एक बड़े बदलाव पर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार चाहती है कि भारतीय सेना की विशेष आतंकवाद-रोधी इकाई राष्ट्रीय राइफल्स (Rashtriya Rifles – RR) को घाटी के शहरी और ग्रामीण इलाकों से हटाकर अंतरराष्ट्रीय सीमा और एलओसी पर तैनात किया जाए। वहीं, आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) को सौंपी जाए।

Drone warfare in Indian Army: ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना की हर बटालियन होगी मॉडर्न! सर्विलांस और कॉम्बैट ड्रोंस होंगे स्टैंडर्ड हथियार

सूत्रों के मुताबिक रक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय के बीच इस मुद्दे पर लगातार बैठकें हो रही हैं। हालांकि अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम जम्मू-कश्मीर की बदलती परिस्थितियों के मद्देनजर एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव साबित होगा।

Rashtriya Rifles in Jammu Kashmir: पहलगाम आतंकी हमले के बाद बढ़ी चर्चा

अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की थी। जांच में सामने आया कि इस हमले में शामिल आतंकवादी सीमा पार से कुछ महीने पहले ही घुसपैठ करके आए थे। इसके बाद सरकार की राय बनी कि सीमाओं की सुरक्षा में प्रशिक्षित राष्ट्रीय राइफल्स को एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात करना चाहिए।

सुरक्षा मामलों के जानकार मानते हैं कि सेना की ताकत का इस्तेमाल सीमा की सुरक्षा के लिए करना अधिक उचित है, जबकि आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए अर्धसैनिक बलों को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।

Rashtriya Rifles in Jammu Kashmir: स्थानीय लोगों की है मांग

सूत्रों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर की मौजूदा स्थिति को देखते हुए आंतरिक सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ सबसे उपयुक्त विकल्प है। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय राइफल्स सीमा की सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित हैं, जबकि सीआरपीएफ देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए विशेष रूप से तैयार की गई है। यह बदलाव एक संतुलित कदम होगा।”

रक्षा मामलों से जुड़े जानकारों का मानना है कि केवल सीआरपीएफ ही नहीं बल्कि सीमा सुरक्षा बल (BSF) को भी जम्मू-कश्मीर की आंतरिक सुरक्षा में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “बीएसएफ ने 1990 के दशक में कश्मीर में आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाई थी। इसलिए सरकार को बीएसएफ की तैनाती पर भी विचार करना चाहिए।”

घाटी के स्थानीय लोग और नेताओं की अक्सर मांग रही है कि इस इलाके को केवल सुरक्षा के नजरिए से न देखा जाए। अब सरकार का दावा है कि स्थिति बदल गई है, इसलिए सेना को आंतरिक ड्यूटी से हटाकर सीमा पर लगाया जा रहा है। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल और जम्मू-कश्मीर पुलिस अब किसी भी कानून-व्यवस्था की समस्या से निपटने में सक्षम हैं। वहीं अब आतंकवाद संबंधी घटनाओं में कमी आने से सरकार का फोकस सीमा सुरक्षा पर शिफ्ट हो रहा है।

सेना की विशेष विशेष काउंटर-इंसरजेंसी फोर्स है आरआर

राष्ट्रीय राइफल्स की स्थापना 1990 के दशक में उस समय की गई थी जब जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद तेजी से फैल रहा था। यह यूनिट भारतीय सेना के जवानों से बनी एक विशेष काउंटर-इंसरजेंसी फोर्स है, जिसने घाटी में आतंकवाद से निपटने में अहम भूमिका निभाई। कारगिल युद्ध के बाद मंत्रियों के एक समूह ने सिफारिश की थी कि सीमा सुरक्षा बल (BSF) को अपनी प्राथमिक भूमिका यानी सीमाओं की रक्षा पर केंद्रित किया जाए और जम्मू-कश्मीर में आंतरिक सुरक्षा का दायित्व सीआरपीएफ को सौंपा जाए। इसी रणनीति के तहत 2005 के आसपास सीआरपीएफ ने बीएसएफ की जगह पूरी तरह से ले ली थी। अब सरकार एक बार फिर सुरक्षा ढांचे में बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रही है।

हर साल छिड़ती है बहस

राष्ट्रीय राइफल्स की स्थापना 1990 में हुई थी, और तब से पिछले 25 सालों में इसकी तैनाती को कम करने पर कई बहसें हुईं। 2011 से 2016 के बीच भारतीय सेना ने शहरों और गांवों से अपनी मौजूदगी कम करने की कोशिश की, जहां जिम्मेदारी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और जम्मू-कश्मीर पुलिस को शिफ्ट करने की बात थी। इसकी वजह थी कि राष्ट्रीय राइफल्स मुख्य रूप से इन्फैंट्री बटालियनों से बनी है, और लंबे समय तक आंतरिक सुरक्षा में लगे रहने से सेना पर बोझ पड़ता है।

2022 में भी राष्ट्रीय राइफल्स की संख्या कम करने पर चर्चा हुई। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना था कि कश्मीर घाटी में आतंकवाद संबंधी घटनाओं में कमी आई है, और ओवर ग्राउंड नेटवर्क कमजोर हुए हैं। अनुच्छेद 370 हटने के बाद पर्यटन बढ़ा, व्यापार सुधरा, और सामान्य स्थिति की ओर कदम बढ़े, जिससे केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राइफल्स की मौजूदगी कम करने पर विचार किया। हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि अचानक बड़ा बदलाव नहीं करना चाहिए, क्योंकि सुरक्षा चुनौतियां बनी रह सकती हैं।

2023 की शुरुआत में सरकार ने कश्मीर घाटी के अंदरूनी इलाकों से सेना, जिसमें राष्ट्रीय राइफल्स शामिल है, को चरणबद्ध तरीके से हटाने पर विचार किया। यह चर्चा करीब दो साल से चल रही थी और एडवांस लेवल तक पहुंच गई थी। प्रस्ताव था कि सेना को सिर्फ नियंत्रण रेखा तक सीमित रखा जाए, और आंतरिक सुरक्षा सीआरपीएफ को सौंपी जाए। राष्ट्रीय राइफल्स की 63 बटालियनों को कम करके तीन चरणों में बदलाव करने की योजना थी, जिसमें हर बटालियन से दो कंपनियां कम की जातीं। इसका आधार था कि 2019 के बाद आतंकवाद में 50 फीसदी कमी आई है, लेकिन अंतिम फैसला राजनीतिक स्तर पर होना था।

उसी साल मई में जम्मू क्षेत्र से राष्ट्रीय राइफल्स की चरणबद्ध वापसी की योजना बनी, जहां तीन काउंटर-इंसर्जेंसी फोर्सेस डेल्टा फोर्स, रोमियो फोर्स और यूनिफॉर्म फोर्स की जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस और अर्धसैनिक बलों को सौंपनी थी। लेकिन सीमा पार से हो रहे आतंकी हमलों की वजह से यह योजना अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। उस साल 17 हत्याएं हुईं, राजौरी और पुंछ में हमले हुए जिसमें सेना के जवान भी शामिल थे।

क्या कहते हैं गृह मंत्रालय के ताजा आंकड़े

गृह मंत्रालय के नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि जम्मू-कश्मीर में पिछले पांच सालों में आतंकवादी घटनाओं में 70 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। 2019 में आतंकवाद से जुड़ी 286 घटनाएं हुई थीं, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर केवल 40 रह गई। इसी अवधि में सुरक्षा बलों पर हमलों की संख्या भी 96 से घटकर 5 रह गई। नागरिकों की हत्याओं के मामलों में भी उल्लेखनीय कमी आई है। 2019 में सुरक्षाकर्मियों की 77 हत्याएं हुई थीं, जबकि 2024 में यह आंकड़ा घटकर केवल सात रह गया।

चरणबद्ध बदलाव की योजना

सूत्रों के अनुसार सरकार की योजना है कि जम्मू और कश्मीर के कई जिलों से धीरे-धीरे राष्ट्रीय राइफल्स की टुकड़ियों को हटाया जाए और उनकी जगह सीआरपीएफ की बटालियनों को तैनात किया जाए। सीआरपीएफ के एक अधिकारी ने बताया कि उनकी यूनिट्स आधुनिक उपकरणों से लैस हैं और स्थानीय समुदाय के साथ बेहतर तालमेल रखती हैं। जम्मू क्षेत्र में तीन बटालियनों की तैनाती इसी रणनीति का पहला कदम है। उदयपुर और कठुआ में राष्ट्रीय राइफल्स की यूनिटों को हटाकर सीआरपीएफ को सौंपा जाएगा, जिससे आतंकियों की घुसपैठ को रोकने में सेना को नियंत्रण रेखा पर मजबूती मिलेगी। प्रत्येक बटालियन में लगभग 800 जवान होते हैं। माना जा रहा है कि यह बदलाव धीरे-धीरे कश्मीर घाटी तक भी पहुंचेगा। इससे राष्ट्रीय राइफल्स को पूरी तरह से एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लगाया जा सकेगा।