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India-China: इधर देश ऑपरेशन सिंदूर में उलझा रहा, उधर चीन ने अरुणाचल प्रदेश में रची ये बड़ी साजिश, भारत ने दिखाया आइना

India-China: China renames Arunachal Pradesh locations, India rejects
Credit: AI Image

India-China: जब पूरा देश भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव और ऑपरेशन सिंदूर की सफलताओं में व्यस्त था, उसी दौरान चीन ने चुपचाप भारत के राज्य अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों के नाम बदलने की घोषणा कर दी। यह कोई पहली बार नहीं है, बल्कि चीन की ओर से अरुणाचल को लेकर इस तरह की यह पांचवीं सूची है, जिसमें उसने भारतीय क्षेत्र को अपने नक्शे और नामों में शामिल करने की कोशिश की है।

वहीं भारत ने इसे चीन का एक और बेतुका और आधारहीन प्रयास करार देते हुए कहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। साथ ही, भारत सरकार ने चीन के प्रोपेगंडा पर कड़ी कार्रवाई करते हुए चीन के माउथपीस ग्लोबल टाइम्स औऱ शिनहुआ न्यूज एजेंसी के एक्स अकाउंट को भारत में ब्लॉक कर दिया है।

India-China: जांगनान का हिस्सा मानता है चीन

चीन ने अपने नागरिक मामलों के मंत्रालय के जरिए 11 मई को अरुणाचल प्रदेश के 27 जगहों के लिए नए नामों का एलान किया। चीन के सिविल अफेयर्स मंत्रालय ने इसे “दक्षिण तिब्बत क्षेत्र के सार्वजनिक नामकरण (पांचवी सूची)” के रूप में जारी किया है। चीन इसे तिब्बत के दक्षिणी हिस्से (जिसे वह “जांगनान” कहता है) का हिस्सा मानता है और इन नामों को “मानकीकृत भौगोलिक नाम” के रूप में पेश करता है।

भारत ने दिया जवाब

भारत ने इसे चीन का एक और बेतुका और आधारहीन प्रयास करार देते हुए कहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। विदेश मंत्रालय का कहना है, “चीन की यह हरकत न केवल आधारहीन है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय नियमों और भारत की संप्रभुता का उल्लंघन भी है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह की कोशिशें न तो ऐतिहासिक तथ्यों को बदल सकती हैं और न ही अरुणाचल प्रदेश के लोगों की भावनाओं को।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “चीन बार-बार अरुणाचल प्रदेश में जगहों के नाम बदलने की नाकाम कोशिश कर रहा है। हम इस तरह के प्रयासों को पूरी तरह खारिज करते हैं।” चीन की इस हरकत को लेकर भारत ने साफ कर दिया है कि इस तरह की “नामकरण” की कोशिशें अरुणाचल प्रदेश की वास्तविकता को कभी नहीं बदल सकतीं। जयसवाल ने कहा, “यह सच्चाई अटल है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का हिस्सा है और रहेगा।”

विदेश मंत्री का सख्त रुख

हालांकि यह पहली बार नहीं है जब चीन ने इस तरह की हरकत की हो। यह अरुणाचल प्रदेश में स्थानों के नाम बदलने की उसकी यह पांचवीं सूची है। इससे पहले भी चीन ने कई बार इस तरह की कोशिशें की हैं, जिन्हें भारत ने हर बार करारा जवाब दिया है।

इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी इस मुद्दे पर चीन को कड़ा संदेश दिया था। उन्होंने कहा था, “अगर मैं आपके घर का नाम बदल दूं, तो क्या वह मेरा हो जाएगा? अरुणाचल प्रदेश भारत का हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। नाम बदलने से हकीकत नहीं बदलती।” जयशंकर ने यह भी कहा था कि चीन की यह हरकत “बेतुकी” है और बार-बार ऐसा करने से भी यह बेतुकी ही रहेगी।

उन्होंने यह भी जोड़ा, “मैं इसे इतनी स्पष्टता से कह रहा हूं कि न केवल देश में, बल्कि देश के बाहर भी लोग इस संदेश को अच्छी तरह समझ लें।” जयशंकर का यह बयान न केवल चीन के लिए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी एक साफ संदेश था कि भारत अपनी संप्रभुता पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।

क्या है इस विवाद की जड़?

चीन और भारत के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। चीन अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों को तिब्बत का हिस्सा मानता है और इसे “जांगनान” कहता है। वह समय-समय पर इस क्षेत्र में सड़क निर्माण, बस्तियां बसाने और नाम बदलने जैसी गतिविधियां करता रहता है, जिन्हें भारत अपनी संप्रभुता पर हमला मानता है।

अरुणाचल प्रदेश भारत का एक महत्वपूर्ण राज्य है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और सामरिक महत्व के लिए जाना जाता है। यह क्षेत्र भारत-चीन सीमा पर स्थित है और दोनों देशों के बीच तनाव का एक प्रमुख कारण रहा है। 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद से ही इस क्षेत्र को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है।

दबे शब्दों में चीन की बौखलाहट

खास बात यह है कि चीन ने इस सूची को भारत-पाकिस्तान तनाव के समय जारी किया, जब भारत का फोकस सीमा पर सैन्य ऑपरेशन और राजनयिक गतिविधियों पर था। यह चीन की रणनीति हो सकती है कि जब भारत किसी और मोर्चे पर व्यस्त हो, तब वह अपने पुराने एजेंडे को आगे बढ़ाए।

लेकिन भारत ने समय रहते प्रतिक्रिया दी और चीन की इस कूटनीतिक चाल को नकार दिया। भारत ने चीन की इस हरकत पर कड़ा लेकिन संतुलित प्रतिक्रिया दी। सरकार की नीति यह रही है कि उकसावे में आए बिना, तथ्यों और कूटनीतिक आधार पर जवाब दिया जाए। भारत ने न केवल इस कदम की आलोचना की, बल्कि चीन को यह स्पष्ट संदेश भी दिया कि नाम बदलना, इतिहास और भूगोल को नहीं बदल सकता।

वहीं, अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत की स्थिति अंतरराष्ट्रीय कानूनों और सीमाओं के अनुसार मजबूत है। यहां लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार है, संविधान के तहत शासन है, और यहां के लोग खुद को भारतीय नागरिक मानते हैं।

संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया जैसे कई देशों ने भी यह साफ कहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है। चीन की इस प्रकार की गतिविधियां वैश्विक समुदाय में उसकी स्थिति को और कमजोर करती हैं।

Operation Sindoor: भारत की जवाबी कार्रवाई, ढेर हुआ चीन से खरीदा पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन से लाहौर तक की मार!

भारत सरकार ने इस क्षेत्र में विकास कार्यों को तेज किया है, जिसमें सड़कें, पुल, स्कूल, अस्पताल और अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण शामिल है। अरुणाचल प्रदेश के लोग भी चीन की इन हरकतों का पुरजोर विरोध करते हैं। भारत ने वहां अपनी सीमाओं की सुरक्षा को और मजबूत किया है। अरुणाचल प्रदेश में सैन्य अड्डों का निर्माण, सड़कों का जाल और संचार सुविधाओं का विस्तार इसका प्रमाण है। भारत ने यह भी साफ कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

Nur Khan Airbase: जब ‘दिल’ पर लगी चोट, तो क्यों घबराया पाकिस्तान? इसलिए घुटने पर आने को हुआ मजबूर, चीन भी हुआ बेनकाब

Nur Khan Airbase Strike: Why Pakistan Buckled and China Got Exposed

Nur Khan Airbase: 10 मई 2025 की रात पाकिस्तान के लिए एक बुरे सपने की तरह थी, जब भारत ने रावलपिंडी के पास स्थित नूर खान एयरबेस या चकलाला एयरबेस को तबाह कर दिया। यह हमला न केवल पाकिस्तान के ‘दिल’ के पर चोट थी, बल्कि उसके सबसे बड़े साझेदार चीन को भी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। इस दिल पर लगी चोट की वजह से ही पाकिस्तान घुटने पर आया और संघर्ष विराम के लिए मजबूर हुआ। यह हमला सिर्फ नूर खान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत ने 90 मिनट के भीतर पाकिस्तान के कई अन्य एयरबेस को भी निशाना बनाया।

सैन्य सूत्रों का कहना है कि यह एयरबेस पाकिस्तान की परमाणु रणनीति का एक बड़ा केंद्र माना जाता है। भारत ने इस हमले के जरिए न केवल पाकिस्तान की सैन्य ताकत को झकझोर दिया, बल्कि उसकी परमाणु हथियारों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए। भारत ने साफ कर दिया है कि वह अब पाकिस्तान की हरकतों का जवाब सख्ती से देगा। इस हमले ने पाकिस्तान को हिलाकर रख दिया है और उसे अपनी रक्षा नीतियों पर फिर से सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।

वहीं भारत ने इस हमले से दो बातें स्पष्ट कर दीं, पहली यह कि भारत आतंक के हर अड्डे को उसके गढ़ में घुसकर नष्ट करेगा, और दूसरी, अब पाकिस्तान की ‘परमाणु धमकी’ की ब्लफिंग काम नहीं करेगी।

Nur Khan Airbase पर हमला: क्या हुआ?

10 मई की रात भारत ने एक सटीक सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया। इस हमले में रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस को निशाना बनाया गया। यह बेस इस्लामाबाद के बेहद करीब है और कहा जाता है कि यहां पाकिस्तान ने अपने परमाणु जखीरे को रखा हुआ है। यह हमला इतना सटीक था कि नूर खान एयरबेस के कई अहम ढांचे मिनटों में तबाह हो गए। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, भारत ने इस हमले में ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल किया, जो अपनी सटीकता के लिए जाना जाती है औऱ किसी रडार सिस्टम की पकड़ में नहीं आती है।

लेकिन भारत का हमला सिर्फ नूर खान तक सीमित नहीं था। भारत ने एक के बाद एक कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें रफीकी एयरबेस (शोरकोट), मुरिद एयरबेस (पंजाब), सुक्कुर एयरबेस (सिंध), सियालकोट एयरबेस, सरगोधा एयरबेस, स्कर्दू एयरबेस, भोलारी एयरबेस (कराची के पास), जैकोबाबाद एयरबेस और पासरूर हवाई पट्टी शामिल थे। ये सभी हमले 90 मिनट के भीतर किए गए, जिसने पाकिस्तान की वायु सेना को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया।

ऑपरेशन सिंदूर के तहत की गई कार्रवाई में भारत ने न केवल पाकिस्तान के हमलों का जवाब दिया, बल्कि पाकिस्तान की ओर से दागी गई 8 मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। इसके बाद भारत ने लाहौर और इस्लामाबाद में भी जवाबी कार्रवाई की।

नूर खान एयरबेस क्यों है इतना अहम?

नूर खान एयरबेस पाकिस्तान की सैन्य और परमाणु रणनीति का एक बड़ा केंद्र है। यह बेस रावलपिंडी में है, जो इस्लामाबाद से ज्यादा दूर नहीं है। इसकी खासियत यह है कि यह पाकिस्तान की सेना के मुख्यालय के करीब है। इस वजह से यह बेस सेना और वायु सेना के बीच तालमेल बनाने में अहम भूमिका निभाता है।

खुफिया सूत्रों के मुताबिक, नूर खान एयरबेस पर कई अहम सैन्य उपकरण रखे गए थे। यहां पर साब एरियाई जैसे हवाई चेतावनी सिस्टम, C-130 ट्रांसपोर्टर विमान और IL-78 रिफ्यूलिंग विमान मौजूद थे। ये सिस्टम पाकिस्तान की वायु सेना के लिए बहुत जरूरी हैं, क्योंकि ये निगरानी, सामान ढोने और विमानों को हवा में ईंधन भरने का काम करते हैं। यह बेस न सिर्फ वीआईपी ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स का मुख्य अड्डा है, बल्कि यहां से एयर मोबिलिटी कमांड और ड्रोन ऑपरेशंस का संचालन भी होता है। यही वह स्थान है जहां से शाहपर-I और तुर्की निर्मित बैरक्तार TB2 ड्रोन उड़ाए जाते थे, जो हाल ही में भारत के खिलाफ हमलों में इस्तेमाल हुए।

Nur Khan Airbase Strike: Why Pakistan Buckled and China Got Exposed

नूर खान बेस का सबसे बड़ा महत्व यह है कि यह पाकिस्तान के परमाणु हथियारों से जुड़ा हुआ है। यहां पर परमाणु हथियार रखे जाते हैं। इस बेस पर परमाणु हथियारों से लैस विमानों को तैनात किया जाता है, जो भारत के खिलाफ पाकिस्तान की परमाणु रणनीति का हिस्सा हैं। इसके अलावा, यह बेस इस्लामाबाद और रावलपिंडी के करीब होने की वजह से पाकिस्तान की त्वरित प्रतिक्रिया रणनीति में अहम भूमिका निभाता है।

सूत्रों ने बताया कि नूर खान बेस का इस्तेमाल बड़े नेताओं और वीआईपी लोगों को ले जाने वाले विमानों के लिए भी होता था। यहाँ पर खास पायलटों को ट्रेनिंग दी जाती थी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जैसे लोग इस बेस से अपने विमानों का इस्तेमाल करते थे। इतना ही नहीं, यह बेस सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने में भी शामिल था।

पाकिस्तान आया घुटनों पर

इस हमले ने पाकिस्तान को कई तरह से नुकसान पहुंचाया। सबसे बड़ा नुकसान यह हुआ कि नूर खान एयरबेस के नष्ट होने से पाकिस्तान की वायु सेना और सेना के बीच का संपर्क टूट गया। यह बेस पाकिस्तान की वायु सेना की रीढ़ की हड्डी माना जाता था। इसके तबाह होने से पाकिस्तान के एयर डिफेंस और जवाबी हमले करने की क्षमता पर बड़ा असर पड़ा। नूर खान एयर बेस पर परमाणु हथियारों से लैस मिराज-5 विमानों को तैनात करने की क्षमता है, जो भारत के खिलाफ पाकिस्तान की परमाणु प्रतिरोधक रणनीति का हिस्सा हैं।

दूसरा, इस हमले ने पाकिस्तान के डिफेंस सिस्टम को तार-तार कर दिया। नूर खान एयरबेस की सुरक्षा में चीनी रडार तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। लेकिन भारतीय हमले ने स्पष्ट कर दिया कि HQ-9 जैसे चीनी सिस्टम भारतीय मिसाइलों के सामने बेकार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि “यह हमला चीन के लिए भी शर्मनाक है क्योंकि उसकी टेक्नोलॉजी पाकिस्तान के लिए ढाल नहीं बन सकी।”

तीसरा, इस हमले ने पाकिस्तान की सैन्य छवि को बड़ा नुकसान पहुंचाया। पाकिस्तान हमेशा से खुद को भारत के बराबर की सैन्य ताकत बताता रहा है, लेकिन इस हमले ने उसकी इस छवि को तोड़ दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और तस्वीरों में नूर खान एयरबेस के जलते ढांचे साफ दिख रहे थे। पाकिस्तान की सेना ने दावा किया कि उसने भारत के हमले को रोक लिया, लेकिन इन तस्वीरों ने उसके दावों की पोल खोल दी।

पाकिस्तान में आम लोगों ने भी अपनी सेना का मजाक उड़ाया। सोशल मीडिया पर लोग मीम्स और वीडियो शेयर कर रहे थे, जिनमें वे सेना के झूठे दावों की हंसी उड़ा रहे थे। इससे पाकिस्तान की सेना को अपने ही देश में शर्मिंदगी झेलनी पड़ी।

पाकिस्तान के अन्य सैन्य ठिकानों का हाल

पाकिस्तान के पास कई ऐसे सैन्य ठिकाने हैं, जो परमाणु हथियारों से जुड़े हैं। नूर खान एयरबेस के अलावा भारत ने कई अन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया। वाह कैंट में पाकिस्तानी ऑर्डिनेंस फैक्ट्री को भी निशान बनाया गया, जो परमाणु हथियार बनाने का एक बड़ा केंद्र है। यहां पर परमाणु हथियारों के लिए जरूरी सामान तैयार किया जाता है। वहीं, हरिपुर में तरनावा मिसाइल कॉम्प्लेक्स को निशाना बनाया, यह जगह मिसाइलों और परमाणु हथियारों को बनाने और उनकी टेस्टिंग के लिए जानी जाती है।

Op Sindoor: कौन हैं कश्मीरी मुस्लिम एयर वाइस मार्शल हिलाल अहमद? जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान पर बरसाए बम!
जबकि इस्लामाबाद के निलोर रीप्रोसेसिंग प्लांट में परमाणु हथियारों के लिए प्लूटोनियम बनाया जाता है, इसे भी निशाना बनाया गया। इसके अलावा फतेह जंग के नेशनल डेवलपमेंट कॉम्प्लेक्स, जहां परमाणु हथियारों और मिसाइलों को बनाया जाता है, वहां भी भारतीय मिसाइलों ने चोट पहुंचाई। इसके अलावा काहुता एनरिचमेंट प्लांट (काहुता), जहां परमाणु हथियारों के लिए यूरेनियम को तैयार किया जाता है, वहां भी भारतीय मिसाइलों के हमले हुए। इन सभी ठिकानों का नूर खान एयरबेस के साथ सीधा कनेक्शन है।

Op Sindoor: कौन हैं कश्मीरी मुस्लिम एयर वाइस मार्शल हिलाल अहमद? जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान पर बरसाए बम!

Op Sindoor: Kashmiri Muslim AVM Hilal Ahmed Bombed Pakistan in Operation Sindoor!

Op Sindoor: भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी एयर वाइस मार्शल हिलाल अहमद इन दिनों चर्चा में हैं। वजह है ऑपरेशन सिंदूर। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 7 मई को पाकिस्तान और पीओके में स्थित 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। कश्मीर के अनंतनाग से आने वाले हिलाल एक कश्मीरी मुस्लिम हैं और पहले भारतीय हैं, जिन्होंने अत्याधुनिक राफेल लड़ाकू विमान को उड़ाया। ऑपरेशन सिंदूर में उनकी रणनीति के तहत ही पाकिस्तान को जबरदस्त चोट पहुंचाई गई।

Op Sindoor: कौन हैं एयर वाइस मार्शल हिलाल अहमद?

हिलाल अहमद जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले से ताल्लुक रखते हैं और भारतीय वायुसेना में एक कश्मीरी मुस्लिम अधिकारी के रूप में उन्होंने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्हें भारत का पहला ऐसा पायलट माना जाता है, जिसने राफेल फाइटर जेट उड़ाया। उनके नाम पर 3,000 से अधिक एक्सीडेंट-फ्री फ्लाइंग ऑवर्स हैं, और वे मिराज-2000 और मिग-21 जैसे कई फ्रंटलाइन कॉम्बैट एयरक्राफ्ट उड़ा चुके हैं।

Op Sindoor: Kashmiri Muslim AVM Hilal Ahmed Bombed Pakistan in Operation Sindoor!

हिलाल अहमद का जन्म जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में एक साधारण परिवार में हुआ। उनके पिता, मोहम्मद अब्दुल्ला राथर, जम्मू-कश्मीर में एक छोटे-मोटे कारोबारी थे, और परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। अनंतनाग उस समय आतंकवाद और अशांति का केंद्र था, और वहां बड़े सपने देखना आसान नहीं था। लेकिन हिलाल ने बचपन से ही आसमान छूने का सपना देखा। वे अपने स्कूल के दिनों में पढ़ाई में बहुत अच्छे थे और खेलों में भी हिस्सा लेते थे। हिलाल की मेहनत और लगन ने उन्हें राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) तक पहुंचाया, जहाँ से उन्होंने अपनी सैन्य सफर शुरू किया।

1988 में भारतीय वायुसेना में बने फाइटर पायलट

हिलाल ने 1988 में भारतीय वायुसेना में एक फाइटर पायलट के तौर पर अपनी शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने कई बड़े संस्थानों से ट्रेनिंग ली। वे अमेरिका के एयर वार कॉलेज गए, जहां उन्होंने डिस्टिंक्शन के साथ डिग्री हासिल की। उनकी इस उपलब्धि ने उन्हें वायुसेना में एक अलग पहचान दी। समय के साथ वे फ्लाइट लेफ्टिनेंट, विंग कमांडर, ग्रुप कैप्टन, और फिर 2019 में एयर कोमोडोर बने। उनकी मेहनत और अनुशासन ने उन्हें 2025 तक एयर वाइस मार्शल की रैंक तक पहुंचाया।

उनकी पहली बड़ी उड़ान मिग-21 विमान के साथ थी, जो उन्होंने 1990 के दशक में श्रीनगर एयरबेस से भरी थी। उस समय कश्मीर में हालात बहुत खराब थे, और हिलाल ने वहां से कई मिशन पूरे किए।

राफेल डील में अहम भूमिका

हिलाल अहमद उस वक्त भारत के लिए एयर अताशे के तौर पर फ्रांस में तैनात थे, जब राफेल डील को अंतिम रूप दिया जा रहा था। वे न सिर्फ राफेल विमानों की डिलीवरी के गवाह बने, बल्कि उन्होंने भारतीय ऑपरेशनल जरूरतों के मुताबिक हथियार (weaponization), कस्टमाइजेशन और ट्रेनिंग मॉड्यूल्स को भी सुपरवाइजज किया। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि इन विमानों में भारत की जरूरतों के हिसाब से बदलाव हों, जैसे कि ठंडे इलाकों में काम करने की क्षमता, लंबी दूरी की मेटियोर मिसाइलें, और दुश्मन के रडार को चकमा देने की तकनीक भी हो। यही नहीं, 27 जुलाई 2020 को वे राफेल फाइटर जेट को फ्रांस से भारत तक खुद उड़ाकर लाए और भारतीय रक्षा इतिहास में बड़ा इतिहास रचा।

इसके अलावा, हिलाल ने ग्वालियर में मिराज स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर के तौर पर भी काम किया, जहां उन्होंने मिराज 2000 विमानों को उड़ाया और स्क्वाड्रन को मजबूती दी। उनके इस अनुभव ने उन्हें राफेल जैसे विमानों को समझने और उनकी तकनीक को भारतीय जरूरतों के हिसाब से ढालने में मदद की।

सूत्रों ने बताया कि उनकी अगुवाई में वायुसेना ने नई तकनीकों जैसे ड्रोन, साइबर सुरक्षा, और इलेक्ट्रॉनिक युद्धको अपनाया। हिलाल ने यह सुनिश्चित किया कि वायुसेना आज के समय की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो।

ऑपरेशन सिंदूर में हिलाल की भूमिका

7 मई 2025 को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। यह कार्रवाई अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब थी, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। इस ऑपरेशन में राफेल विमानों का भी इस्तेमाल हुआ, जिन्होंने बहावलपुर में आतंकी ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया। हालांकि के ऑपरेशन सिंदूर के ऑन-ग्राउंड एक्जीक्यूशन में हिलाल अहमद का नाम सीधे तौर पर जुड़ा नहीं है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, उनकी रणनीति और अनुभव ने इस अभियान को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।

राफेल जैसे स्टेल्थ फाइटर जेट्स, स्कैल्प मिसाइल, हैमर बम और उनके ऑपरेशनल प्लांस में हिलाल अहमद की गहरी तकनीकी समझ और अनुभव ने वायुसेना को एक नई दिशा दी है। ऑपरेशन सिंदूर में जब पाकिस्तान के भीतर 100 किलोमीटर तक सटीक हमले किए गए, तो यह एयरफोर्स की तकनीकी परिपक्वता और रणनीतिक परिपक्वता का परिचायक था, जिसे बनाने में हिलाल अहमद जैसे अधिकारियों का योगदान अहम है।

Operation Sindoor: भारत की जवाबी कार्रवाई, ढेर हुआ चीन से खरीदा पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन से लाहौर तक की मार!

सूत्रों का कहना है कि हिलाल जैसे अनुभवी अधिकारियों की जानकारी और रणनीति इस तरह के बड़े अभियानों के लिए बहुत जरूरी होती है। राफेल विमानों को भारत लाने और उनकी तैयारी में हिलाल की मेहनत का असर इस ऑपरेशन में साफ दिखा। राफेल जैसे फाइटर जेट्स, स्कैल्प मिसाइल, हैमर बम और उनके ऑपरेशनल प्लांस में हिलाल अहमद की गहरी तकनीकी समझ और अनुभव ने वायुसेना को एक नई दिशा दी। राफेल विमानों ने जिस तरह से पाकिस्तान के भीतर 100 किलोमीटर तक आतंकी ठिकानों को नष्ट किया तो इसके पीछे हिलाल अहमद की पहले की मेहनत को श्रेय दिया जा रहा है।

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Operation Sindoor: India Retaliation, Pakistan Air Defense System Destroyed

Operation Sindoor: पाकिस्तान में आतंक के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है। सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के तहत लाहौर में हुए एक कामिकाजे ड्रोन हमले में पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचा है। पाकिस्तानी सेना की HQ-9 के एयर डिफेंस मिसाइल लॉन्चर यूनिट्स को गंभीर क्षति पहुंची है। वहीं, इस हमले में लाहौर के वाल्टन इलाके में 4 एयर डिफेंस रेजिमेंट (4 AD Regt) की अल्फा बैटरी के डिप्टी बैटरी कमांडर सहित पांच सैनिक मारे गए हैं। इसके अलावा, 4 AD रेजिमेंट की HQ-16 बैटरी पर एक ड्रोन हमले (UAV) ने बड़ा नुकसान पहुंचाया। सूत्रों के के अनुसार, भारतीय सेना ने दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाने के लिए हरपी ड्रोनों का इस्तेमाल किया।

भारत ने 7 मई 2025 की रात शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। इस ऑपरेशन की प्रेस ब्रीफिंग में भारत ने अपनी कार्रवाई को केंद्रित, संयमित और गैर-उत्तेजक बताया था। भारत ने साफ किया था कि पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को निशाना नहीं बनाया गया है। साथ ही यह भी दोहराया गया कि भारत में सैन्य ठिकानों पर किसी भी हमले का उचित जवाब दिया जाएगा। लेकिन इसके बाद पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया, जिसके जवाब में भारत को सख्त कार्रवाई करनी पड़ी।

Operation Sindoor: पाकिस्तान ने किया ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल

7-8 मई 2025 की रात को पाकिस्तान ने उत्तरी और पश्चिमी भारत में कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की। इन ठिकानों में अवंतीपुरा, श्रीनगर, जम्मू, पठानकोट, अमृतसर, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, आदमपुर, भटिंडा, चंडीगढ़, नाल, फलोदी, उत्तरलाई, और भुज शामिल थे। पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल किया। वहीं पुंछ में इन हमलों में जानमाल का गंभीर नुकसान हुआ है। वहां 13 लोग मारे गए और 44 जख्मी हो गए।

लेकिन भारत की इंटीग्रेटेड काउंटर UAS ग्रिड और एयर डिफेंस सिस्टम्स ने इन हमलों को नाकाम कर दिया। इन हमलों का मलबा कई जगहों से बरामद किया गया है।

भारत ने लाहौर में की जवाबी कार्रवाई

पाकिस्तान के हमले के जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने 8 मई 2025 की सुबह पाकिस्तान में कई जगहों पर एयर डिफेंस रडार और सिस्टम को निशाना बनाया। भारत ने अपनी कार्रवाई को उसी तरह और उसी तीव्रता के साथ अंजाम दिया, जैसा पाकिस्तान ने किया था। सूत्रों से पक्की जानकारी मिली है कि लाहौर में एक एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है। यह सिस्टम लाहौर जैसे बड़े शहर की हवाई रक्षा के लिए तैनात था।

पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम: HQ-9 और HQ-16

पाकिस्तान ने अपनी हवाई रक्षा को मजबूत करने के लिए चीन से HQ-9 और HQ-16 जैसी एडवांस मिसाइल सिस्टम खरीदे हैं। HQ-9 एक लंबी दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम है, जो 200 किलोमीटर तक विमानों, ड्रोनों, और मिसाइलों को नष्ट कर सकता है। इसे “चाइनीज पैट्रियट” भी कहा जाता है, क्योंकि यह अमेरिका की पैट्रियट मिसाइल प्रणाली की तरह काम करती है। HQ-9 का रडार 300 किलोमीटर तक लक्ष्य का पता लगा सकता है और एक साथ कई लक्ष्यों को निशाना बना सकता है।

वहीं, HQ-16 एक मध्यम दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम है, जो 40 किलोमीटर तक विमानों और मिसाइलों को रोक सकता है। यह सिस्टम क्रूज मिसाइलों और ड्रोनों जैसे छोटे लक्ष्यों को नष्ट करने में माहिर है। पाकिस्तान ने इन प्रणालियों को अपनी सीमाओं, खासकर भारत से लगते इलाकों में तैनात किया था, ताकि भारतीय विमानों और मिसाइलों से अपनी रक्षा कर सके।

लाहौर में हमला: अल्फा बैटरी पर निशाना

सूत्रों के अनुसार, लाहौर के वाल्टन इलाके में 4 एयर डिफेंस रेजिमेंट (4 AD Regt) की अल्फा बैटरी पर बड़ा हमला हुआ। इस हमले में अल्फा बैटरी के डिप्टी बैटरी कमांडर सहित पांच सैनिक मारे गए। अल्फा बैटरी HQ-9 मिसाइल लॉन्चरों से लैस थी, जो लाहौर जैसे बड़े शहर की हवाई रक्षा के लिए तैनात थी। इस हमले में HQ-9 सिस्टम के रडार और लॉन्चर को भी भारी नुकसान पहुंचा है। सूत्रों का कहना है कि कई लॉन्चर पूरी तरह नष्ट हो गए। इससे लाहौर और आसपास के इलाकों का एयर डिफेंस कमजोर हो गया है।

HQ-16 बैटरी पर ड्रोन हमला

4 AD रेजिमेंट की एक दूसरी बैटरी, जो HQ-16 मिसाइलों से लैस थी, उस पर भी कामीकाजा ड्रोन (UAV) ने हमला किया। यह बैटरी भी लाहौर के पास तैनात थी। यह कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोनों और क्रूज मिसाइलों के खिलाफ कारगार है। लेकिन भारतीय ड्रोन हमले में यह बैटरी भी ढेर हो गई। सूत्रों के अनुसार, ड्रोन ने बैटरी के रडार और कमांड सेंटर को निशाना बनाया।

हरपी ड्रोन क्या हैं?

हरपी ड्रोन एक खास तरह का मानवरहित हवाई वाहन (UAV) है, जिसे इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) ने बनाया है। इसे “लॉइटरिंग मुनिशन” कहा जाता है, यानी यह ऐसा ड्रोन है जो दुश्मन के इलाके में मंडराता रहता है और सही समय पर हमला करता है। हरपी ड्रोन को खास तौर पर दुश्मन की हवाई रक्षा प्रणालियों, जैसे रडार सिस्टम, को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह ड्रोन 32 किलोग्राम का विस्फोटक ले जा सकता है और इसमें एक खास “एंटी-रेडिएशन सीकर” होता है, जो रडार से निकलने वाली रेडियो तरंगों को ट्रैक करके हमला करता है।

हरपी ड्रोन की खासियत यह है कि यह पूरी तरह स्वचालित मोड में काम कर सकता है या फिर “मैन-इन-द-लूप” मोड में, जिसमें एक ऑपरेटर इसे कंट्रोल करता है। यह 6 घंटे तक हवा में रह सकता है और 500 किलोमीटर की दूरी तक हमला कर सकता है। इसका छोटा आकार और कम रडार सिग्नेचर इसे दुश्मन के रडार से बचने में मदद करते हैं। भारत ने 2000 के दशक की शुरुआत से हरपी ड्रोनों का इस्तेमाल शुरू किया था, और 2009 में भारतीय वायुसेना ने 100 मिलियन डॉलर में 10 हरपी ड्रोन खरीदे थे।

हरपी ड्रोन का इस्तेमाल भारत की रणनीति का एक अहम हिस्सा है। ये ड्रोन दुश्मन के डिफेंस सिस्टम को कमजोर करने में माहिर हैं। इन्हें “सप्रेशन ऑफ एनिमी एयर डिफेंस” (SEAD) के लिए डिज़ाइन किया गया है, यानी दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट करना ताकि भारतीय वायुसेना के विमान सुरक्षित रूप से ऑपरेशन कर सकें। हरपी ड्रोन ऑटोमैटिकली रडार सिग्नल्स को पकड़कर हमला करते हैं, जिससे वे बड़े रडार सिस्टम को आसानी से नष्ट कर सकते हैं।

Operation Sindoor को लेकर क्यों कोर्ट पहुंचे रिलायंस, वायुसेना के पूर्व अफसर और दिल्ली के नामी वकील, मिलिट्री ऑपरेशन पर कब्जा करने की कोशिश!

पाकिस्तान ने इस घटना पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, वह इस नुकसान को छिपाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तानी सेना ने ऑपरेशन सिंदूर को “युद्ध की घोषणा” करार दिया था और जवाबी कार्रवाई की धमकी दी थी।

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Operation Sindoor: भारत की सैन्य कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर के एलान के कुछ ही घंटों बाद, इस नाम के ट्रेडमार्क के लिए होड़ शुरू हो गई। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने सबसे पहले 7 मई 2025 को सुबह 10:42 बजे ट्रेडमार्क के लिए आवेदन किया। अगले 24 घंटों में तीन और आवेदकों मुंबई के मुकेश चेतराम अग्रवाल, रिटायर्ड वायुसेना अधिकारी ग्रुप कैप्टन कमल सिंह ओबेरो, और दिल्ली के वकील आलोक कोठारी ने भी इस नाम के लिए दावा ठोका। ये सभी आवेदन क्लास 41 के तहत किए गए, जो मनोरंजन, शिक्षा, सांस्कृतिक और मीडिया सेवाओं को कवर करता है। लेकिन सवाल यह है कि ऑपरेशन सिंदूर जैसे राष्ट्रीय महत्व के नाम पर ट्रेडमार्क की दौड़ क्यों और कैसे शुरू हुई? आइए, इसकी पूरी कहानी समझते हैं।

वहीं इस खबर के बाद रिलायंस की तरफ से स्पष्टीकरण जारी किया गया है।

Operation Sindoor: एक नाम, कई अर्थ

ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) भारत की हालिया सीमा पार सैन्य कार्रवाई का नाम है, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा। 7 मई 2025 को तड़के भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। यह कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में थी, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। “सिंदूर” शब्द भारतीय संस्कृति में बलिदान, वीरता और प्रतिबद्धदेवता का प्रतीक माना जाता है, जिसने इस ऑपरेशन को भावनात्मक और देशभक्ति से जोड़ा। इस नाम की लोकप्रियता के चलते इसे फिल्मों, वेब सीरीज, डॉक्यूमेंट्री, या अन्य व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर लोगों में होड़ मच गई।

ट्रेडमार्क की दौड़: कौन-कौन शामिल?

भारत की (Operation Sindoor) सबसे बड़ी कंपनियों में से एक रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने सबसे पहले सुबह 10:42 बजे आवेदन किया। इसके बाद मुकेश चेतराम अग्रवाल (मुंबई), ग्रुप कैप्टन कमल सिंह ओबेरो (रिटायर्ड वायुसेना अधिकारी), और आलोक कोठारी (दिल्ली के वकील) ने 7 मई को शाम 6:27 बजे तक अपने आवेदन दाखिल किए। सभी ने ऑपरेशन सिंदूर को “प्रस्तावित उपयोग” के तौर पर चिह्नित किया, यानी अभी इसका व्यावसायिक उपयोग शुरू नहीं हुआ, लेकिन भविष्य में इसके लिए योजना है।

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ये आवेदन क्लास 41 के तहत हैं, जो निम्नलिखित सेवाओं जैसे शिक्षा और प्रशिक्षण सेवाएं, फिल्म और मीडिया प्रोडक्शन, लाइव प्रदर्शन और इवेंट्स, डिजिटल कंटेंट डिलीवरी और प्रकाशन, सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों को कवर करता है। इसका मतलब है कि “ऑपरेशन सिंदूर” का नाम फिल्म, वेब सीरीज, डॉक्यूमेंट्री, या किसी इवेंट के लिए इस्तेमाल हो सकता है।

भारत में ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया

भारत में ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन (Operation Sindoor) ट्रेड मार्क्स एक्ट, 1999 के तहत होता है। यह प्रक्रिया व्यवस्थित लेकिन जटिल है, जिसमें कई चरण शामिल हैं। कोई व्यक्ति या कंपनी ट्रेडमार्क रजिस्ट्री में आवेदन दाखिल करती है। इसमें ट्रेडमार्क का नाम, लोगो, या स्लोगन, साथ ही उसकी क्लासिफिकेशन (जैसे क्लास 41) और उपयोग का विवरण देना होता है। आवेदन के साथ फीस जमा की जाती है, जो व्यक्तिगत आवेदकों के लिए कम और कंपनियों के लिए ज्यादा हो सकती है।

“ऑपरेशन सिंदूर” (Operation Sindoor) के मामले में, चार आवेदकों ने 7 मई 2025 को क्लास 41 के तहत आवेदन किया, जो मनोरंजन, शिक्षा, और सांस्कृतिक सेवाओं से संबंधित है।

इसके बाद ट्रेड मार्क्स रजिस्ट्री आवेदन की जांच करती है। यह देखा जाता है कि ट्रेडमार्क मौजूदा रजिस्टर्ड मार्क्स से मिलता-जुलता तो नहीं है। रजिस्ट्री यह भी जांचती है कि ट्रेडमार्क भ्रामक, आपत्तिजनक, या सार्वजनिक नीति के खिलाफ तो नहीं है। “ऑपरेशन सिंदूर” जैसे नाम के लिए, रजिस्ट्री यह जांच सकती है कि क्या यह राष्ट्रीय भावनाओं या रक्षा से गलत संबंध सुझाता है।

यदि आवेदन प्रारंभिक जांच में पास हो जाता है, तो इसे ट्रेडमार्क्स जर्नल में चार महीने के लिए प्रकाशित किया जाता है। इस दौरान कोई भी व्यक्ति या संगठन, जैसे रक्षा मंत्रालय या अन्य आवेदक, ट्रेडमार्क के खिलाफ विरोध दर्ज कर सकता है। ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के मामले में, यदि सरकार यह मानती है कि इस नाम का व्यावसायिक उपयोग अनुचित है, तो वह विरोध कर सकती है।

यदि कोई विरोध होता है, तो ट्रेडमार्क रजिस्ट्री दोनों पक्षों को सुनवाई का मौका देती है। विरोध के आधार पर आवेदन खारिज हो सकता है, या आवेदक को अपने दावे को मजबूत करने के लिए सबूत पेश करने पड़ सकते हैं। यदि कई आवेदक एक ही नाम के लिए दावा करते हैं, जैसे “ऑपरेशन सिंदूर”, (Operation Sindoor) तो रजिस्ट्री जांच को रोक सकती है और विरोध कार्यवाही शुरू हो सकती है। वहीं, अगर कोई विरोध नहीं होता या आवेदक विरोध में जीत जाता है, तो ट्रेडमार्क रजिस्टर हो जाता है। रजिस्ट्रेशन के बाद ट्रेडमार्क धारक को 10 साल के लिए विशेष अधिकार मिलते हैं, जिसे नवीनीकरण के साथ बढ़ाया जा सकता है।

क्या सैन्य ऑपरेशन का नाम ट्रेडमार्क हो सकता है?

भारत में सैन्य ऑपरेशन के नाम, जैसे “ऑपरेशन सिंदूर”, (Operation Sindoor) स्वतः बौद्धिक संपदा के रूप में संरक्षित नहीं होते। रक्षा मंत्रालय आमतौर पर ऐसे नामों को रजिस्टर या व्यावसायिक उपयोग के लिए सुरक्षित नहीं करता। कोई विशेष कानूनी ढांचा इन नामों को निजी व्यक्तियों या कंपनियों द्वारा ट्रेडमार्क के रूप में दावा करने से नहीं रोकता, जब तक कि सरकार हस्तक्षेप न करे।

हालांकि, ट्रेड मार्क्स एक्ट, 1999 की धारा 9(2) और धारा 11 के तहत, रजिस्ट्रार किसी ट्रेडमार्क को खारिज कर सकता है, अगर वह भ्रामक हो, राष्ट्रीय रक्षा से गलत संबंध सुझाता हो, सार्वजनिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता हो। इसके बावजूद, वर्तमान में ऐसे नामों को रजिस्टर करने पर कोई रोक नहीं है, जब तक कि सरकार या कोई अन्य पक्ष इसका विरोध न करे।

क्यों मची है होड़?

ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) का नाम देशभक्ति और भावनात्मक जुड़ाव के चलते लोगों को लुभा रहा है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने अनुमान लगाया कि रिलायंस इस नाम का इस्तेमाल किसी फिल्म, वेब सीरीज, या डॉक्यूमेंट्री के लिए कर सकता है। मुकेश चेतराम अग्रवाल और आलोक कोठारी जैसे व्यक्तियों के आवेदन से यह संकेत मिलता है कि छोटे निर्माता या उद्यमी भी इस नाम को भुनाने की कोशिश में हैं। ग्रुप कैप्टन कमल सिंह ओबेरो, जो एक रिटायर्ड वायुसेना अधिकारी हैं, शायद इस नाम का उपयोग किसी सैन्य थीम वाली शैक्षिक या सांस्कृतिक परियोजना के लिए करना चाहते हैं।

वहीं, इस खबर पर रिलायंस का कहना है,

रिलायंस इंडस्ट्रीज का ऑपरेशन सिंदूर को ट्रेडमार्क करने का कोई इरादा नहीं है, यह एक ऐसा नाम है जो अब राष्ट्रीय चेतना का हिस्सा बन चुका है और भारतीय वीरता का एक प्रभावशाली प्रतीक है। जियो स्टूडियोज, जो रिलायंस इंडस्ट्रीज की एक इकाई है, ने अपनी ट्रेडमार्क आवेदन वापस ले लिया है, जो एक जूनियर कर्मचारी द्वारा अनजाने में और बिना अनुमति के दायर किया गया था। रिलायंस इंडस्ट्रीज और इसके सभी हितधारक ऑपरेशन सिंदूर पर बेहद गर्व करते हैं, जो पहलगाम में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी हमले के जवाब में शुरू हुआ था। ऑपरेशन सिंदूर हमारे वीर सशस्त्र बलों की गर्वपूर्ण उपलब्धि है, जो भारत की आतंकवाद के बुराई के खिलाफ अडिग लड़ाई का प्रतीक है। रिलायंस आतंकवाद के खिलाफ इस लड़ाई में हमारी सरकार और सशस्त्र बलों के साथ पूरी तरह से समर्थन में खड़ा है। ‘इंडिया फर्स्ट’ के हमारे नारे के प्रति हमारी प्रतिबद्धता अटूट बनी हुई है।”

Operation Sindoor: भारत ने क्यों चुनीं पाकिस्तान में ये नौ खास साइटें? स्कैल्प क्रूज मिसाइलों और हैमर बमों ने मचाया कहर

सोशल मीडिया पर इस ट्रेडमार्क दौड़ को लेकर बहस छिड़ी है। एक यूजर ने लिखा, “जब देश सैन्य कार्रवाई की बात कर रहा था, कुछ लोग ट्रेडमार्क फाइल करने में व्यस्त थे।” वहीं, कुछ लोग इसे व्यावसायिक अवसर मान रहे हैं। एक अन्य यूजर ने कहा, “अगर रिलायंस इस नाम से फिल्म बनाए, तो यह ब्लॉकबस्टर होगी।”

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Operation Sindoor: Why India Chose These 9 Specific Sites in Pakistan

Operation Sindoor: भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत 7 मई 2025 को पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए। ये हमले 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में थे, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। साथ ही, यह कार्रवाई 2001 के संसद हमले, 2008 के मुंबई हमले, 2016 के उरी हमले, और 2019 के पुलवामा हमले जैसे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी कृत्यों के खिलाफ थी। भारतीय सेना और वायुसेना ने इन हमलों को 25 मिनट के भीतर अंजाम दिया। भारत ने इन नौ ठिकानों को सावधानीपूर्वक चुना, जो आतंकी संगठनों के प्रमुख केंद्र थे। आइए, समझते हैं कि इन ठिकानों का चयन क्यों हुआ और यह ऑपरेशन भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति का हिस्सा कैसे बना।

Operation Sindoor: स्कैल्प क्रूज मिसाइलों और हैमर बमों ने मचाया कहर

ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने राफेल लड़ाकू विमानों और स्कैल्प क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया। 24 मिसाइलें 25 मिनट (1:05 बजे से 1:30 बजे) के भीतर नौ ठिकानों पर गिरीं। इनमें चार ठिकाने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में (बहावलपुर, मुरीदके, सियालकोट, और रावलपिंडी) और पांच पीओके में (मुजफ्फराबाद, कोटली, बाघ, भिंबर, और चकस्वारी) थे। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इन हमलों में 70 से अधिक आतंकी मारे गए और 60 से ज्यादा घायल हुए। भारत ने तुरंत सैटेलाइट तस्वीरें, ड्रोन फुटेज, और एक 1 मिनट 40 सेकंड का वीडियो भी जाारी किया, जिसमें इन ठिकानों की गतिविधियां और हमलों का असर दिखाया गया।

स्कैल्प (SCALP) क्रूज मिसाइलों की बात करें, तो इन्हें स्टॉर्म शैडो के नाम से भी जाना जाता है। इसकी रेंज 250 किलोमीटर से अधिक है, और यह रात में और किसी भी मौसम में सटीक हमले करने में सक्षम है। इसका इस्तेमाल बहावलपुर और मुरीदके जैसे आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए किया गया।

वहीं, हैमर (HAMMER) प्रेसिजन-गाइडेड स्मार्ट बम है, जिसकी रेंज 50-70 किलोमीटर है। हैमर (Highly Agile Modular Munition Extended Range) का इस्तेमाल आतंकी प्रशिक्षण केंद्रों और बहुमंजिला इमारतों को निशाना बनाने के लिए किया गया, जहां जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के नेता मौजूद थे।

मरकज सुब्हान अल्लाह, बहावलपुर (पंजाब, पाकिस्तान)

भारत ने इन आतंकी ठिकानों को उनकी आतंकी गतिविधियों, खुफिया जानकारी, और रणनीतिक महत्व के आधार पर चुना। प्रत्येक ठिकाना आतंकवाद के नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। मरकज सुब्हान अल्लाह की बात करें, तो यह जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का मुख्यालय है, जो 2000 में मौलाना मसूद अजहर ने बनाया था। यह अंतरराष्ट्रीय सीमा से 100 किलोमीटर दूर है। यह 10 एकड़ में फैला एक मजबूत परिसर है, जिसमें प्रशिक्षण सुविधाएं, हथियार डिपो, और आवासीय क्षेत्र शामिल हैं। 2019 के पुलवामा हमले (40 सीआरपीएफ जवान शहीद) और 2016 के उरी हमले (19 जवान शहीद) की योजना यहीं बनी थी। खुफिया जानकारी के अनुसार, पहलगाम हमले के लिए आतंकियों को यहीं से निर्देश और हथियार मिले थे। यह जैश का सबसे बड़ा प्रशिक्षण और कमांड सेंटर है। इसे नष्ट करने से संगठन की भर्ती और हमले की योजना बनाने की क्षमता को गहरा नुकसान पहुंचेगा। यहां पर हमला रात 01:12 बजे किया गया।

मरकज तैबा, मुरीदके (पंजाब, पाकिस्तान)

लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का यह प्रमुख केंद्र 200 एकड़ में फैला है, जिसमें स्कूल, मस्जिद, और प्रशिक्षण शिविर शामिल हैं। यह लाहौर से 30 किलोमीटर दूर है। 2008 के मुंबई हमले (166 मारे गए) के आतंकी यहीं प्रशिक्षित हुए थे। यह केंद्र आत्मघाती हमलावरों को प्रशिक्षण, हथियार निर्माण, और भारत में घुसपैठ की योजना बनाता है। पहलगाम हमले में इसकी भूमिका की जांच चल रही थी। यह लश्कर का सबसे महत्वपूर्ण ठिकाना है, जो भारत के खिलाफ लंबे समय से आतंकी गतिविधियों का केंद्र रहा है। यहां पर हमला रात 01:06 से 01:10 के बीच किया गया।

महमूना जोया कैंप, सियालकोट (पंजाब, पाकिस्तान)

हिजबुल मुजाहिदीन का यह कैंप अंतरराष्ट्रीय सीमा से केवल 12 किलोमीटर दूर है। यह छोटा लेकिन सक्रिय प्रशिक्षण केंद्र है, जो जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देता है। 2016 के पठानकोट एयरबेस हमले और मार्च 2025 में चार सैनिकों की हत्या की योजना यहीं बनी थी। यह घुसपैठ और हमलों के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट देता है। इसकी सीमा से निकटता और जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को फिर से आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के चलते इसे निशाना बनाना जरूरी समझा गया। यहां पर हमला रात 01:15 बजे बजे किया गया।

सय्यदना बिलाल कैंप, मुजफ्फराबाद (पीओके)

जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा यह कैंप नियंत्रण रेखा (एलओसी) से 10 किलोमीटर की दूरी पर है। यह आत्मघाती हमलावरों और स्नाइपर्स को प्रशिक्षण देता है। पहलगाम हमले के लिए आतंकियों को यहीं प्रशिक्षित किया गया था। यह भारत के खिलाफ सशस्त्र हमलों की योजना बनाता है। इसकी रणनीतिक स्थिति और पहलगाम हमले में प्रत्यक्ष भूमिका ने इसे प्राथमिक लक्ष्य बनाया। यहां पर हमला रात 01:17 बजे किया गया।

अब्बास आतंकी कैंप, कोटली (पीओके)

लश्कर-ए-तैयबा का यह प्रशिक्षण केंद्र 50 से अधिक आतंकियों को प्रशिक्षण देता है। यह पहाड़ी इलाके में स्थित है, जिसके चलते आतंकियों को यहां छिपने की जगह मिलती है। यह आत्मघाती हमलावरों और बम विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करता है। पहलगाम हमले के बाद इसकी गतिविधियां बढ़ी थीं। इसकी आतंकी प्रशिक्षण क्षमता और एलओसी से 13 किलोमीटर की निकटता ने इसे खतरा बनाया। यहां पर हमला रात 01:04 बजे किया गया।

बाघ (पीओके)

हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर का संयुक्त केंद्र, जो घुसपैठ और हथियार तस्करी का अड्डा है। यह एक गुप्त परिसर है, जिसमें भूमिगत बंकर हैं। यह भारत में आतंकी हमलों के लिए लॉजिस्टिक और हथियार सप्लाई करता है। पहलगाम हमले से पहले इसकी गतिविधियां नोट की गई थीं। इसकी भूमिगत सुविधाएं और घुसपैठ में भूमिका के चलते इसे निशाना बनाना जरूरी समझा गया।

भिंबर (पीओके)

जैश और लश्कर का यह संयुक्त केंद्र साइबर युद्ध और प्रचार अभियान चलाता है। यह प्रशिक्षण और कमांड सेंटर के रूप में काम करता है। पहलगाम हमले से पहले यहां से सोशल मीडिया के जरिए प्रचार और निर्देश दिए गए थे। इसकी साइबर युद्ध क्षमता और आतंकी गतिविधियों को समन्वय करने की भूमिका के चलते यह भारतीय मिसाइलों का का निशाना बना। यहां पर हमला रात 01:19 बजे किया गया।

चकस्वारी (पीओके)

यह आतंकियों के लिए हथियार डिपो और लॉजिस्टिक हब है, जो पहाड़ी इलाके में छिपा है। पहलगाम हमले के लिए विस्फोटक और हथियार यहीं से सप्लाई हुए थे। यह भारत में हमलों के लिए सप्लाई चेन का हिस्सा था। भारत में भविष्य में आतंकी हमले न हों, इसके लिए सप्लाई चेन को तोड़ना आतंकी नेटवर्क को कमजोर करने के लिए यहां हमला करना जरूरी था। यहां पर हमला रात 01:22 बजे हुआ।

Operation Sindoor vs Balakot Strike: बालाकोट से क्या सीखा भारत ने, ऑपरेशन सिंदूर में इन बातों का रखा ध्यान, मिला फायदा

गुलपुर (पीओके)

लश्कर-ए-तैयबा का यह कमांड सेंटर भारत में हमलों की योजना बनाता है। यह एक गुप्त सुविधा है, जिसमें संचार और प्रशिक्षण केंद्र हैं। पहलगाम हमले में इसकी संभावित भूमिका की जांच चल रही थी। यह भारत के खिलाफ दीर्घकालिक योजनाओं का हिस्सा था। इसकी कमांड और नियंत्रण क्षमता ने इसे भारत के लिए खतरा बनाया। यहां पर हमला रात 01:25 बजे किया गया।

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Operation Sindoor vs Balakot Strike: Lessons Learned, Precision Delivered

Operation Sindoor vs Balakot Strike: भारत ने बुधवार को “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओके) में 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। यह ऑपरेशन 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। साथ ही, यह पिछले दो दशकों के पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद, जैसे संसद हमला (2001), मुंबई हमला (2008), उरी (2016), और पुलवामा (2019) के खिलाफ भारत की निर्णायक कार्रवाई थी। लेकिन यह ऑपरेशन 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक से कई मायनों में अलग है। बालाकोट से मिली सीख ने ऑपरेशन सिंदूर को और प्रभावी और सटीक बनाया। आइए, जानते हैं कि दोनों में क्या अंतर है और भारत ने बालाकोट से क्या सबक लिया?

Operation Sindoor vs Balakot Strike: बालाकोट स्ट्राइक

14 फरवरी 2019 को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें 40 जवान शहीद हुए थे। इसके जवाब में 26 फरवरी 2019 को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में बालाकोट के जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के आतंकी प्रशिक्षण शिविर पर हवाई हमला किया। इस ऑपरेशन में मिराज-2000 लड़ाकू विमानों ने 1000 किलोग्राम के स्पाइस-2000 बमों का इस्तेमाल किया, जिससे जैश का शिविर तबाह हो गया। भारत ने दावा किया कि 300 से अधिक आतंकी मारे गए, हालांकि पाकिस्तान ने इसे खारिज किया।

बालाकोट स्ट्राइक ने दिखाया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत जीरो टॉलरेंस नीति रखता है। यह पहली बार था जब भारतीय वायुसेना ने एलओसी को पार करके पाकिस्तान में घुसकर हमला किया। लेकिन इस ऑपरेशन में कुछ चुनौतियां भी सामने आईं, जिन्हें भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में सुधारा।

ऑपरेशन सिंदूर

ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने राफेल, मिराज, मिग-29 औऱ जैगुआर लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया। इस हमले में स्कैल्प क्रूज मिसाइलों औऱ हैमर बमों का इस्तेमाल किया। बुधवार तड़के 1:44 बजे नौ आतंकी ठिकानों पर हमले किए गए, जिनमें बहावलपुर (जैश-ए-मोहम्मद का मुख्यालय) और मुरीदके (लश्कर-ए-तैयबा का आधार) शामिल थे। बहावलपुर को राफेल ने निशाना बनाया, तो बाकी आतंकी अड्डों को नेस्तानाबूद करने में मिराज, मिग-29 औऱ जैगुआर लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया।

Operation Sindoor vs Balakot Strike: Lessons Learned, Precision Delivered

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि इन हमलों में 90 से अधिक आतंकी मारे गए और 60 से ज्यादा घायल हुए। हालांकि बालाकोट की तरह इस हमले में भी किसी भी पाकिस्तानी सैन्य ठिकाने को निशाना नहीं बनाया गया।

बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर में क्या है अंतर

बालाकोट में मिराज-2000 विमानों ने एक बड़े आतंकी शिविर को निशाना बनाया, लेकिन हमले के बाद पाकिस्तान ने नुकसान को कम करके दिखाया। जबकि ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने 9 ठिकानों को निशाना बनाया। स्कैल्प मिसाइलों ने छोटे-छोटे ठिकानों को भी सटीकता से नष्ट किया। इसके अलावा भारत ने इस बार ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी का भी बेहतर इस्तेमाल किया, जिससे खुफिया जानकारी अधिक विश्वसनीय थी।

बालाकोट स्ट्राइक के बाद भारत ने अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों को जानकारी दी, लेकिन कुछ देशों ने इसकी आलोचना की थी। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पहले से ही वैश्विक समुदाय को भरोसे में लिया। हमले के तुरंत बाद अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, चीन और सऊदी अरब को कार्रवाई की जानकारी दी गई। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के 25 अप्रैल के बयान, जिसमें आतंकवादियों को जवाबदेह ठहराने की बात थी, को भारत ने अपने पक्ष में इस्तेमाल किया।

इसके अलावा सबसे बड़ी बात यह कि बालाकोट स्ट्राइक का उद्देश्य आतंकियों को चेतावनी देना था, लेकिन इसका दायरा सीमित था। ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल पहलगाम हमले का जवाब दिया, बल्कि दो दशकों के आतंकवाद का हिसाब भी लिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाए गए 1 मिनट 40 सेकंड के वीडियो ने 2001 से 2025 तक के हमलों को सबसे सामने रखा, जिससे भारत ने वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान को बेनकाब किया।

इस बार तुरंत सामने रखे सबूत

बालाकोट के बाद सबूतों की मांग ने सरकार को बैकफुट पर ला दिया था। विपक्ष ने सवाल उठाए, और पाकिस्तान ने प्रचार किया कि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पहले ही सबूत तैयार रखे। हमले के कुछ घंटों बाद ही प्रेस विज्ञप्ति और सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस में सैटेलाइट तस्वीरें और वीडियो पेश किए गए। इससे न केवल विपक्ष के सवालों को ऑपरेशन की सफलता पर सवाल उठाने का मौका ही नहीं मिला, साथ ही वीडियो और फोटोग्राफ के जरिए पाकिस्तान के झूठ को भी बेनकाब किया गया।

सटीक खुफिया जानकारी

बालाकोट में खुफिया जानकारी पर कुछ सवाल उठे थे, क्योंकि पाकिस्तान ने नुकसान को कम करके दिखाया था। साथ ही उस समय हमारे पास सीधे विजुअल्स नहीं थे। जिससे पाकिस्तान स्ट्राइक की सफलता पर सवाल उठा रहा था। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (एनटीआरओ), रॉ, और सैन्य खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय किया। सैटेलाइट इमेज और ड्रोन ने ठिकानों की सटीक जानकारी दी, जिससे हमले अधिक प्रभावी हुए।

मीडिया और जनता को विश्वास में लिया

बालाकोट में सबूतों की देरी ने विपक्ष और पाकिस्तान को सवाल उठाने का मौका दिया। बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद भारत सरकार की ओर से आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस 26 फरवरी 2019 को दोपहर में हुई थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश सचिव विजय गोखले ने स्ट्राइक के बारे में जानकारी दी थी, लेकिन सार्वजनिक रूप से कोई ठोस सबूत, जैसे सैटेलाइट तस्वीरें, ड्रोन फुटेज, या वीडियो, नहीं दिखाए थे। गोखले ने बताया था कि भारतीय वायुसेना ने खैबर पख्तूनख्वा के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शिविर पर सटीक हमला किया, जिसमें “बड़ी संख्या में आतंकी, प्रशिक्षक, और कमांडर” मारे गए। उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्रवाई खुफिया जानकारी के आधार पर की गई थी, जिसके अनुसार जैश भारत में और हमले की योजना बना रहा था। हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस में केवल मौखिक बयान दिए गए, और कोई दृश्य सबूत (जैसे तस्वीरें या वीडियो) साझा नहीं किए गए। इसकी वजह से पाकिस्तान और भारत के कुछ विपक्षी दलों ने सबूतों की मांग की थी।

वहीं, ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने तथ्यों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की। वीडियो और खुफिया जानकारी साझा करके सरकार ने जनता का भरोसा जीता।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने बालाकोट की कमियों को सुधारकर ऑपरेशन सिंदूर को एक मॉडल ऑपरेशन बनाया। रक्षा विशेषज्ञ राहुल बेदी ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य और कूटनीतिक परिपक्वता को दर्शाता है। यह दिखाता है कि भारत अब पहले से ज्यादा तैयार और आत्मविश्वास से भरा है।”

Operation Sindoor: 20 साल के जख्मों का एक जवाब, आतंक की जड़ें हिलाकर रख दीं!

ऑपरेशन सिंदूर को देश भर में समर्थन मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमारे सैनिकों ने आतंकियों को उनके घर में घुसकर सजा दी। यह भारत की नई ताकत है।” कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने भी सेना की कार्रवाई की सराहना की। खड़गे ने कहा, “आतंकवाद के खिलाफ भारत एकजुट है।”

Operation Sindoor: 20 साल के जख्मों का एक जवाब, आतंक की जड़ें हिलाकर रख दीं!

Operation Sindoor: A Reckoning for 20 Years of Pain, Striking Terror at Its Roots!

Operation Sindoor: भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारतीय सशस्त्र बलों ने बुधवार को “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत न केवल पहलगाम आतंकी हमले का बदला लिया, बल्कि पिछले दो दशकों से पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भी निर्णायक कार्रवाई की।

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भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारतीय सशस्त्र बलों ने बुधवार को “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत न केवल पहलगाम आतंकी हमले का बदला लिया, बल्कि पिछले दो दशकों से पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भी निर्णायक कार्रवाई की। भारत ने वर्षों तक संयम बरता, लेकिन 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम नरसंहार के बाद देश की सहनशक्ति जवाब दे गई।

Operation Sindoor: दो दशकों का इंतजार, एक जवाब

इस ऑपरेशन में 2001 के संसद हमले, 2002 के अक्षरधाम हमले, 2008 के मुंबई हमले, 2016 के उरी हमले, 2019 के पुलवामा हमले और हाल ही में 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब दिया गया। यह अभियान भारत की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का प्रतीक है और पाकिस्तान को कड़ा संदेश देता है कि भारत अब और बर्दाश्त नहीं करेगा।

22 अप्रैल को लश्कर-ए-तैयबा की शाखा The Resistance Force (TRF) ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में श्रद्धालुओं पर हमला किया, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान गई। पहले TRF ने इस हमले की जिम्मेदारी ली, फिर सोशल मीडिया अकाउंट ‘हैक’ होने का बहाना बनाकर बयान वापस ले लिया।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नेशनल मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता में स्पष्ट शब्दों में कहा, “भारत ने अपने आत्मरक्षा के अधिकार का प्रयोग करते हुए यह कार्रवाई की। ये स्ट्राइक न केवल जवाबी कार्रवाई थी, बल्कि आतंक के नेटवर्क को नष्ट करने और भविष्य के हमलों को रोकने की भी आवश्यकता थी।” उन्होंने बताया कि खुफिया इनपुट से संकेत मिला था कि पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन भारत पर और हमले की योजना बना रहे थे।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय सेना ने 1 मिनट 40 सेकंड का एक वीडियो दिखाया, जिसमें 2001 से अब तक के प्रमुख आतंकी हमलों को दर्शाया गया।

  • 2001 संसद हमला: जैश-ए-मोहम्मद ने भारत की संसद पर हमला किया, जिसमें 9 लोग मारे गए।
  • 2002 अक्षरधाम हमला: आतंकियों ने गुजरात के मंदिर पर हमला किया, जिसमें 30 से अधिक लोग मारे गए।
  • 2008 मुंबई हमला: लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने 60 घंटे तक मुंबई को बंधक बनाए रखा, जिसमें 166 लोग मारे गए।
  • 2016 उरी हमला: जैश-ए-मोहम्मद ने उरी में सेना के शिविर पर हमला किया, जिसमें 19 जवान शहीद हुए
  • 2019 पुलवामा हमला: जैश के आत्मघाती हमलावर ने सीआरपीएफ के काफिले पर हमला किया, जिसमें 40 जवान शहीद हुए।

इन हमलों ने भारत को गहरे जख्म दिए, और हर बार जांच में पाकिस्तान का हाथ सामने आया। मिस्री ने कहा, “पाकिस्तान ने हमेशा आतंकवाद को बढ़ावा दिया है, और पहलगाम हमला इसका ताजा उदाहरण है।”

नौ आतंकी ठिकाने तबाह

ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सशस्त्र बलों ने बुधवार तड़के 1:44 बजे पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए। इनमें बहावलपुर, मुरीदके, सियालकोट, कोटली और मुज़फ़्फराबाद के लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े ट्रेनिंग सेंटर और लॉन्‍च पैड शामिल थे। रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यह हमला “केंद्रित, संयमित और उकसाने वाले नहीं थे, जिसमें किसी भी पाकिस्तानी सैन्य ठिकाने को निशाना नहीं बनाया गया।

भारतीय वायुसेना के राफेल और SCALP स्टील्थ मिसाइल का इस्तेमाल करते हुए बहावलपुर में मौजूद जैश के मुख्यालय मरकज सुभान अल्लाह को 560 किलोमीटर दूर से ध्वस्त किया। यह मिसाइल जीपीएस जैमिंग को मात देकर 100 फीट से भी कम ऊंचाई पर सटीक निशाना लगाने में सक्षम है।

वहीं भारतीय सेना ने ड्रोन, स्मार्ट म्यूनिशन और सतह से सतह पर मार करने वाले हथियारों की मदद से सात ठिकानों को निशाना बनाया।

पाकिस्तानी सेना की चुप्पी

ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने राफेल और मिराज लड़ाकू विमानों और स्कैल्प क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया। इन हमलों में 70 से अधिक आतंकवादी मारे गए और 60 से ज्यादा घायल हुए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बहावलपुर में हुए हमले में जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अज़हर के कई परिजनों की मौत हुई है। पाकिस्तानी मीडिया ने 14 मौतों की पुष्टि की है, जबकि मसूद अज़हर ने खुद 10 परिजनों के मारे जाने की बात मानी है।

पाकिस्तानी सरकार ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, न ही आतंकियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की है। विदेश सचिव मिस्री ने कहा, “पाकिस्तान की ज़मीन से आतंकवाद को प्रायोजित करने और कार्रवाई न करने की उसकी नीति अब उजागर हो चुकी है।”

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महिला अधिकारी फ्रंटफुट पर

इस ऑपरेशन की जानकारी प्रेस को देने के लिए भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी और वायुसेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह को आगे लाया गया। यह पहली बार है जब इतनी बड़ी सैन्य कार्रवाई पर महिला अधिकारियों ने प्रेस ब्रीफिंग की और दुनिया को बताया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कितना गंभीर है।

India-Pak Tensions: पाकिस्तान को अपनी ताकत दिखाएगी भारतीय वायुसेना, सीमा पर तनाव के बीच राजस्थान में होगी मेगा एयर ड्रिल

India-Pak Tensions: IAF to Showcase Strength in Rajasthan Air Drill

India-Pak Tensions: उत्तर प्रदेश में गंगा एक्सप्रेस-वे पर अपनी ताकत दिखाने के बाद भारतीय वायुसेना (आईएएफ) बुधवार को राजस्थान में पाकिस्तान के साथ लगने वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एक बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास करने जा रही है। मंगलवार शाम को जारी नोटिस टू एयरमेन (NOTAM- Notice to Airmen) के अनुसार, यह अभ्यास बुधवार रात 9:30 बजे शुरू होगा और गुरुवार तड़के 3 बजे तक चलेगा। यह कवायद ऐसे समय में हो रही है, जब पिछले महीने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है। इस हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे।

India-Pak Tensions: भारत का कड़ा रुख

पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद भारत (India-Pak Tensions) ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमले के दोषियों और इसके पीछे के षड्यंत्रकारियों को “धरती के किसी भी कोने में ढूंढकर सजा देने” की कसम खाई है। उन्होंने मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल के साथ बैठक की, जिसमें सीमा पर सुरक्षा और संभावित जवाबी कार्रवाई पर चर्चा हुई। सूत्रों का कहना है कि यह सैन्य अभ्यास भारत की युद्धक तैयारियों को परखने और पाकिस्तान को साफ संदेश देने का हिस्सा है।

इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय (India-Pak Tensions) ने सभी राज्यों को बुधवार को सिविल डिफेंस ड्रिल करने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने “नए और जटिल खतरों” का हवाला देते हुए कहा कि देश को किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहना होगा। इस ड्रिल में हवाई हमले की चेतावनी, ब्लैकआउट उपाय, बंकरों की जांच, निकासी अभ्यास, संचार ड्रिल और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को छिपाने जैसे कई गतिविधियां शामिल होंगी।

क्या है यह सैन्य अभ्यास?

न्यूज एजेंसी एएनआई के हवाले से वायुसेना (India-Pak Tensions) के अधिकारियों ने बताया कि यह अभ्यास राजस्थान में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास होगा। इसमें वायुसेना के सभी टॉप फाइटर जेट जैसे राफेल, मिराज 2000 और सुखोई-30 शामिल होंगे। NOTAM के अनुसार, यह कवायद 7 मई को दोपहर 3:30 बजे शुरू होगी और 8 मई को रात 9:30 बजे तक चलेगी। इस दौरान प्रभावित क्षेत्रों में हवाई क्षेत्र को प्रतिबंधित किया जाएगा।

अधिकारियों ने कहा कि यह अभ्यास नियमित ऑपरेशनल (India-Pak Tensions) तैयारियों का हिस्सा है, लेकिन मौजूदा तनाव के बीच इसका महत्व और बढ़ गया है। इस ड्रिल का उद्देश्य वायुसेना की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता, सामरिक युद्ध कौशल और सीमा पर किसी भी स्थिति से निपटने की तैयारी को परखना है। अभ्यास में कम ऊंचाई पर उड़ान, हवाई युद्धाभ्यास और लक्ष्य पर सटीक हमले जैसे कई ऑपरेशन शामिल होंगे।

भारत हर जवाब के लिए तैयार

यह अभ्यास भारत की सैन्य ताकत और उसकी रणनीतिक तैयारियों (India-Pak Tensions) का प्रदर्शन है। राजस्थान की सीमा पर होने वाला यह ड्रिल न केवल वायुसेना की ताकत को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारत किसी भी आक्रामकता का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभ्यास पाकिस्तान (India-Pak Tensions) को यह संदेश देता है कि भारत न केवल अपनी सीमाओं की रक्षा करने में सक्षम है, बल्कि जरूरत पड़ने पर त्वरित और निर्णायक कार्रवाई भी कर सकता है। इसके अलावा, यह ड्रिल वायुसेना के पायलटों और ग्राउंड क्रू की दक्षता को और निखारने का अवसर प्रदान करेगी।

उत्तर प्रदेश में गंगा एक्सप्रेसवे पर वायुसेना की कवायद

हाल ही में, 2 मई 2025 को भारतीय वायुसेना ने उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे (India-Pak Tensions) पर एक और महत्वपूर्ण अभ्यास किया था। इस अभ्यास में वायुसेना ने 3.5 किलोमीटर लंबे हवाई पट्टी पर टेक-ऑफ और लैंडिंग का प्रदर्शन किया। इस ड्रिल का उद्देश्य युद्ध या राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान वैकल्पिक रनवे के रूप में इस एक्सप्रेसवे की क्षमता को परखना था।

इस अभ्यास में राफेल, जगुआर और मिराज जैसे एडंवास लड़ाकू और परिवहन विमानों (India-Pak Tensions) ने हिस्सा लिया था। यह भारत का पहला रोड रनवे है, जो दिन और रात दोनों समय लड़ाकू विमानों की लैंडिंग के लिए उपयुक्त है। इसके लिए उन्नत प्रकाश व्यवस्था और नेविगेशन सिस्टम लगाए गए थे। हवाई पट्टी के दोनों ओर 250 सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए थे।

गंगा एक्सप्रेसवे, जो मेरठ को प्रयागराज से जोड़ता है, 594 किलोमीटर लंबा है। इस अभ्यास के लिए वायुसेना ने हवाई पट्टी का ऑपरेशनल कंट्रोल अपने हाथ में लिया था, जिसमें उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीईआईडीए) के अधिकारियों ने सहयोग किया। यह हवाई पट्टी उत्तर प्रदेश के आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के बाद चौथा एक्सप्रेस-वे है, जिसे वायुसेना के ऑपरेशनल जरूरतों को देखते हुए डिजाइन किया गया है।

राष्ट्रीय स्तर पर सिविल डिफेंस ड्रिल

सैन्य अभ्यास के साथ-साथ, भारत बुधवार को राष्ट्रव्यापी सिविल डिफेंस ड्रिल (India-Pak Tensions) भी आयोजित करेगा। यह ड्रिल देश की शत्रुतापूर्ण हमलों से निपटने की तैयारियों का मूल्यांकन करेगी। इसमें गांव स्तर तक विभिन्न गतिविधियां शामिल होंगी, जैसे हवाई हमले की सायरन, ब्लैकआउट उपाय, बंकरों की जांच, निकासी अभ्यास और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को छिपाने की प्रक्रिया। यह ड्रिल नागरिकों और प्रशासन को आपात स्थिति में समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए तैयार करने में मदद करेगी।

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सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के अभ्यास न केवल सैन्य बलों की दक्षता बढ़ाते हैं, बल्कि आम नागरिकों में भी सुरक्षा और विश्वास का भाव पैदा करते हैं। यह अभ्यास भारत की रक्षा नीति का हिस्सा है, जो न केवल रक्षात्मक, बल्कि जरूरत पड़ने पर आक्रामक रुख अपनाने की क्षमता को भी दर्शाता है।

Pinaka MBRL: पोखरण में गरजा ‘शिव का धनुष’, भारतीय सेना ने किया सफल परीक्षण, जानिए पाकिस्तान के लिए क्यों है खतरे की घंटी?

Indian Army Year Ender 2025
Pinaka MBRL

Pinaka MBRL: भारतीय सेना ने हाल ही में राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में अपने स्वदेशी पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (MBRL) सिस्टम का सफल फायरिंग टेस्ट किया। सूत्रों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में एक और फायरिंग टेस्ट की योजना है। आइए जानते हैं कि आखिर क्या है पिनाका मिसाइल सिस्टम, इसकी ताकत क्या है, और पाकिस्तान क्यों इससे इतना डरा हुआ है?

Pinaka MBRL: क्या है पिनाका मिसाइल सिस्टम?

पिनाका (Pinaka MBRL) नाम भगवान शिव के पौराणिक धनुष से प्रेरित है। पिनाका भारतीय सेना के तोपखाने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पिनाका को भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है। यह एक मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम है जो 44 सेकंड में 72 रॉकेट दाग सकता है। हर एक रॉकेट करीब 100 किलो विस्फोटक ले जाने में सक्षम होता है। यह रॉकेट 60 किलोमीटर तक दुश्मन के ठिकानों को ध्वस्त कर सकता है। पिनाका का एडवांस वर्जन Mk-II ER अब 90 किलोमीटर तक मार कर सकता है, और आने वाले समय में इसके 120, 150, और 200 किलोमीटर रेंज वाले मॉडल विकसित किए जा रहे हैं।

120 किमी रेंज (Pinaka MBRL) का वेरिएंट मौजूदा 214 मिमी कैलिबर का होगा, जिसे पुराने लॉन्चरों से भी दागा जा सकता है। इसका डेवलपमेंट 2024 में शुरू हुआ, और पहला टेस्ट अक्टूबर 2025 में है। जबकि इसके 300 किमी रेंज वाला वेरिएंट काफी एडवांस है। जिसके लिए प्रारंभिक आवश्यकताएं तय की जा रही हैं। इसमें रैमजेट प्रोपल्सन टेक्नोलॉजी का उपयोग होगा, जिसे आईआईटी मद्रास के शोधकर्ता और डीजी आर्टिलरी रह चुके रिटायरर्ड लेफ्टिनेंट जनरल पी.आर. शंकर की टीम तैयार कर रही है।

इसमें लगा है जीसीएस सिस्टम

वहीं, पिनाका (Pinaka MBRL) बिल्कुल सटीक मार करता है। इसमें जीपीएस और इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम लगा हुआ है, जो इसे दुश्मन के ठिकानों को सटीक निशाना बनाने में मदद करता है। साथ ही आसपास के क्षेत्रों को नुकसान से बचाता है। यह सिस्टम भारत के डिजिटल बैटलफील्ड फ्रेमवर्क के साथ पूरी तरह से इंटीग्रेटेड है। यह ड्रोन, सैटेलाइट, रडार और दूसरे टोही उपकरणों के साथ मिलकर काम करता है, जिससे दुश्मन के अहम ठिकानों को फौरन नष्ट किया जा सकता है। इसमें इजरायल मिलिट्री इंडस्ट्रीज के साथ मिलकर DRDO ने पिनाका में ट्रैजेक्ट्री करेक्शन सिस्टम (TCS) जोड़ा है, जिससे इसकी सटीकता और बेहतर हुई है।

पिनाका को “शूट-एंड-स्कूट” के लिए डिज़ाइन किया गया है, यानी यह तेजी से हमला करके अपनी जगह बदल सकता है, जिससे दुश्मन के जवाबी हमले से बचा जा सकता है। पिनाका (Pinaka MBRL) चार मोड में काम करता है – ऑटोनॉमस, स्टैंडअलोन, रिमोट (200 मीटर की दूरी से नियंत्रण), और मैनुअल। यह इसे हर स्थिति में उपयोगी बनाता है।

पोखरण टेस्ट का मतलब

हालांकि पोखरण में पिनाका (Pinaka MBRL) का टेस्ट 30 मार्च 2025 को हुआ था। आगामी जून में एक और टेस्ट होगा, जो इसकी नई खूबियों को और दिखाएगा। इससे पहले DRDO ने नवंबर 2024 में गाइडेड पिनाका (Pinaka MBRL) रॉकेट के उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए, जिसकी रेंज 75 किमी से अधिक है। इन परीक्षणों ने सटीकता, स्थिरता और एक साथ कई लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता को सत्यापित किया। यह सिस्टम अब भारतीय सेना में शामिल होने के लिए तैयार है।

बहुत कम लोगों को पता है कि पिनाका (Pinaka MBRL) का उपयोग कारगिल युद्ध (1999) में हुआ था। कारगिल युद्ध के दौरान पिनाका का विकास अंतिम चरण में था, और केवल दो लॉन्चरों का उपयोग 121 रॉकेट रेजिमेंट के तहत जून 1999 में परीक्षण के लिए किया गया था।

पाकिस्तान के लिए क्यों है पिनाका खतरनाक?

पिनाका (Pinaka MBRL) की ताकत और इसकी बढ़ती रेंज पाकिस्तान के लिए बड़ा खतरा है। भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव का पुराना इतिहास है। हाल ही में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सीमा पर टेंशन है। बता दें कि इस हमले में 26 लोग मारे गए थे। ऐसे में पिनाका जैसे हथियार भारत की रक्षा रणनीति को और मजबूत करते हैं।

युद्ध की स्थिति में भारतीय सेना पिनाका (Pinaka MBRL) से सीमा पार आतंकी लॉन्च पैड्स, गोला-बारूद के ठिकानों, कमांड पोस्ट और एयर डिफेंस यूनिट्स को मिनटों में नेस्तनाबूद कर सकती है। यही नहीं, इसमें जीपीएस-नेविगेशन बेस्ड सिस्टम होने की वजह से यह बेहद सटीक निशाना लगाता है, जिससे आम नागरिकों की क्षति से भी बचा जा सकता है। इसकी तेजी और सटीकता दुश्मन को जवाब देने का मौका ही नहीं देती। पिनाका का डिजाइन ऐसा है कि यह पहाड़ों, रेगिस्तान और मैदानी इलाकों में आसानी से काम कर सकता है। इसका तेज हमला और “शूट-एंड-स्कूट” क्षमता दुश्मन को जवाबी कार्रवाई का मौका नहीं देती।

वहीं, पाकिस्तान के पास इस तरह का कोई एडवांस मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर MBRL सिस्टम नहीं है। उनके हथियार पिनाका की तुलना में रेंज और सटीकता में कमजोर हैं। पिनाका (Pinaka MBRL) की ड्रोन और टोही उपकरणों के साथ मिलकर काम करने की खूबी इसे और भी घातक बनाती है, क्योंकि यह दुश्मन के ठिकानों को ढूंढकर उन्हें नष्ट कर सकता है।

मॉडर्न वॉरफेयर में पिनाका की ताकत

पिनाका (Pinaka MBRL) को आज के युद्ध की जरूरतों के हिसाब से बनाया गया है। यह ऐसा हथियार है, जो तेजी से काम करता है। इसका कमांड और कंट्रोल सिस्टम अलग-अलग सैन्य उपकरणों, जैसे ड्रोन, तोपें और मिसाइलों, के साथ कॉर्डिनेट करता है। पिनाका का फायर कंट्रोल सिस्टम बहुत स्मार्ट है। यह अपने आप दुश्मन के खतरों को पहचान लेता है, सही निशाना लगा सकता है। अगर हालात बदल जाएं, तो तुरंत नया प्लान बना लेता है। यह होवित्जर तोपों, मिसाइल बैटरी और ड्रोन के साथ मिलकर काम करता है।

कमांडरों को यह सुविधा मिलती है कि वे जरूरत पड़ने पर अलग-अलग पिनाका बैटरी को फौरन नए मिशन दे सकते हैं। इसका सॉफ्टवेयर-बेस्ड डिजाइन इसे और भी खास बनाता है, क्योंकि भविष्य में इसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) और नए स्वार्मिंग रॉकेट सिस्टम को जोड़ा जा सकता है। सीधे शब्दों में कहें तो पिनाका आधुनिक युद्ध में भारत के लिए एक ऐसा हथियार है, जो तेज, सटीक और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार है।

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पूरी तरह से स्वदेशी

इसके अलावा पिनाका सिस्टम (Pinaka MBRL) पूरी तरह से स्वदेशी है। सोलर इंडस्ट्रीज, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, लार्सन एंड टूब्रो, और म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड जैसे निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां इसका उत्पादन करती हैं। पिनाका की लागत प्रति सिस्टम लगभग 2.3 करोड़ रुपये है, जो अमेरिकी M270 सिस्टम (19.5 करोड़ रुपये) की तुलना में बहुत कम है। वहीं पूरी तरह से स्वदेशी होने से भारत को इसके लिए किसी विदेशी मदद की जरूरत नहीं है। भारत हर साल 5,000 से ज्यादा रॉकेट बना सकता है, जिससे सेना की जरूरतें पूरी होती हैं और निर्यात की भी काफी संभावनाएं हैं। पिनाका की मांग दुनियाभर में बढ़ रही है। आर्मेनिया ने इसे खरीदा है, और फ्रांस जैसे देश भी इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं। 2023 में आर्मेनिया ने 245 मिलियन डॉलर के सौदे में पिनाका खरीदा, जो इसका पहला विदेशी ग्राहक बना। वहीं, फ्रांस की सेना पिनाका को अपने पुराने M270 MLRS की जगह लेने के लिए सोचविचार कर रही है। ब्रिगेडियर जनरल स्टीफन रिचौ ने नवंबर 2024 में कहा था कि फ्रांस पिनाका की मैनुवेरिएबिलिटी और एक्यूरेसी से प्रभावित हैं। हालांकि, फ्रांस 2026 में अपने स्वदेशी रॉकेट सिस्टम का टेस्ट भी कर रहा है। इसके अलावा इंडोनेशिया, नाइजीरिया, और कुछ दक्षिण अमेरिकी, दक्षिण-पूर्व एशियाई, और यूरोपीय देशों ने भी पिनाका में रुचि दिखाई है।