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ISI in Bangladesh: आसिम मुनीर की अगुवाई में भारत के दो मोर्चों पर हाइब्रिड वॉरफेयर की तैयारी कर रहा पाकिस्तान! अलर्ट पर एजेंसियां

ISI in Bangladesh
General Sahir Shamshad Mirza with Chief Adviser Professor Muhammad Yunus

ISI in Bangladesh: पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई अब बांग्लादेश में अपना नेटवर्क तेजी से फैला रही है। इसका उद्देश्य भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और बंगाल की खाड़ी पर नजर रखना है। हाल ही में जनरल शमशाद मिर्जा के नेतृत्व में पाकिस्तान के कुछ मिलिट्री अफसर ढाका पहुंचे थे, जिसमें आईएसआई के कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे।

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सूत्रों के अनुसार, इस टीम ने बांग्लादेश की नेशनल सिक्योरिटी इंटेलिजेंस और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फोर्सेज इंटेलिजेंस के टॉप अफसरों के साथ कई दौर की मुलाकातें कीं। इन बैठकों में भारत के पूर्वोत्तर इलाकों और सीमाई इलाकों की गतिविधियों की निगरानी के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच संयुक्त खुफिया तंत्र बनाने पर चर्चा हुई।

ISI in Bangladesh: इन इलाकों पर पकड़ बढ़ाने की तैयारी

रिपोर्टों के मुताबिक, आईएसआई कॉक्स बाजार, उखिया, टेकनाफ, मौलवीबाजार, हबिगंज और शेरपुर जैसे रणनीतिक इलाकों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की योजना बना रही है। ये सभी इलाके भारत-बांग्लादेश सीमा और बंगाल की खाड़ी के नजदीक हैं, जो खुफिया गतिविधियों के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं।

सूत्रों के अनुसार, शेख हसीना के शासनकाल (2009 से 2024) के दौरान आईएसआई को बांग्लादेश में काम करने में दिक्कत हो रही थी। उस दौरान बांग्लादेश सरकार के साथ भारत के मजबूत संबंध थे, जिसके चलते आईएसआई की गतिविधियों पर अंकुश लगा रहा।

हालांकि, अगस्त 2024 में आईएसआई ने बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी से जुड़े छात्र संगठनों का इस्तेमाल कर शेख हसीना सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की थी। रिपोर्टों में कहा गया है कि आईएसआई अब उन पुराने नेटवर्क को फिर से सक्रिय करना चाहती है, जो पाकिस्तान की आजादी से पहले पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में मौजूद थे।

इस साल जनवरी में आईएसआई के वरिष्ठ अधिकारियों का एक और दल ढाका गया था। उस दौरे के दौरान बांग्लादेश की सेना के कुछ अधिकारियों के साथ भी चर्चा हुई थी, जिसमें आईएसआई नेटवर्क को भारत की पूर्वी और उत्तर-पूर्वी सीमा के नजदीक बढ़ाने की योजना पर बात हुई।

जानकारों का कहना है कि बांग्लादेश में आईएसआई की बढ़ती सक्रियता भारत के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इसका सीधा असर पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा पर पड़ सकता है। इन क्षेत्रों में पहले से ही उग्रवादी गतिविधियां और सीमा पार तस्करी की समस्या मौजूद है।

ISI in Bangladesh: साजिश का हिस्सा हैं प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस

सूत्रों का कहना है कि बांग्लादेश के अंतरिम प्रमुख प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस भी इस साजिश का हिस्सा हैं। पाकिस्तान के जनरल साहिर शमशाद मिर्जा के दौरे के दौरान यूनुस ने उन्हें एक ऐसी किताब उपहार में दी, जिसके कवर पर बने नक्शे जैसी आकृति में भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को बांग्लादेश का हिस्सा दिखाया गया है। बताया गया है कि यह किताब ‘आर्ट ऑफ ट्रायम्फ: बांग्लादेश्स न्यू डॉन 2024 में जुलाई शहीद स्मृति फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित की गई थी। इसमें जुलाई 2024 में हुए उस छात्र आंदोलन की ग्रैफिटी शामिल हैं, जिसके बाद शेख हसीना सरकार को सत्ता से हटना पड़ा था।

यूनुस ने इस किताब को पहले भी सितंबर 2024 में जस्टिन ट्रूडो और जेन गुडॉल को संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान उपहार में दिया था। लेकिन पाकिस्तान के जनरल मिर्जा के साथ मुलाकात की उनकी एक्स (X) पोस्ट ने विवाद को हवा दे दी। इस पोस्ट में यूनुस को किताब देते हुए देखा जा सकता है, जिसके कवर पर यह विवादित नक्शा स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

कूटनीतिक हलकों में यह घटना इसलिए भी संवेदनशील मानी जा रही है क्योंकि यूनुस ने पिछले कुछ महीनों में भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को लेकर कई बार विवादास्पद बयान दिए हैं। अप्रैल में चीन दौरे के दौरान यूनुस ने कहा था कि बांग्लादेश “महासागर का एकमात्र संरक्षक” है और भारत का पूर्वोत्तर “लैंडलॉक्ड” इलाका है, जो समुद्री पहुंच के लिए ढाका पर निर्भर है। उन्होंने नेपाल, भूटान और भारत के सात उत्तरपूर्वी राज्यों को जोड़ने की बात कही थी।

बता दें कि इंटरिम गवर्नमेंट के चीफ एडवाइजर मुहम्मद यूनुस ने 16 अक्टूबर को घोषणा की कि चुनाव 2026 के अप्रैल के पहले हाफ (1 अप्रैल से 15 अप्रैल के बीच) किसी भी दिन होंगे।

ISI in Bangladesh: लगातार भारत के खिलाफ बोल रहे हैं जनरल मिर्जा

इसी महीने की शुरुआत में इस्लामाबाद में हुए सिंपोजियम 2025 में जनरल मिर्जा ने भारत पर निशाना साधते हुए कहा था कि “भारत की सेना राजनीति में शामिल है और भारत की राजनीति सैन्यीकरण की ओर बढ़ रही है।” उन्होंने यह भी कहा था कि इससे दक्षिण एशिया में परमाणु जोखिम बढ़ गया है।

मिर्जा ने इससे पहले शांगरी-ला डायलॉग में भी भारत के खिलाफ बयान दिया था और कश्मीर मुद्दे पर “तीसरे पक्ष की मध्यस्थता” की मांग की थी, जो भारत की लंबे समय से चली आ रही नीति के खिलाफ है।

पिछले साल दिसंबर में यूनुस के सलाहकार महफूज आलम ने फेसबुक पर लिखा था कि “हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी तक का इलाका सांस्कृतिक रूप से एक है और एक ‘कटे-फटे बंगाल’ से असली आजादी अधूरी है।” इस बयान पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था, जिसके बाद पोस्ट हटा दिया गया।

ISI in Bangladesh: भारत के पूर्वी मोर्चे पर नया खतरा

पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का फोकस इस बार कश्मीर नहीं, बल्कि भारत का पूर्वी इलाका और बांग्लादेश के जरिए नया मोर्चा खोलने पर है। कुछ समय पहले ब्रिटिश मैगजीन द इकॉनॉमिस्ट को दिए एक इंटरव्यू में पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा था, “अगर भविष्य में संघर्ष हुआ तो हम पूर्व से शुरू करेंगे।” यह बयान साफ संकेत देता है कि पाकिस्तान भारत के पूर्वोत्तर को लेकर नई रणनीति बना रहा है।

कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान अब बांग्लादेश को “ईस्टर्न फ्रंट” के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है, ताकि भारत को दो मोर्चों पश्चिम में कश्मीर और पूर्व में पूर्वोत्तर भारत पर उलझाया जा सके। रिपोर्टों के अनुसार, चिटगांव हिल ट्रैक्ट्स और भारत की सीमा से सटे इलाकों में हथियार तस्करी, कट्टरपंथी संगठनों की गतिविधियां और ऑपरेटिव्स की आवाजाही बढ़ी है।

सूत्रों का कहना है कि मुनीर का प्लान यह है कि बांग्लादेश या उसकी सीमा का इस्तेमाल कर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों असम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में अस्थिरता पैदा की जाए। इन इलाकों की भौगोलिक और सांस्कृतिक समानताएं, सीमित सुरक्षा तंत्र और खुले बॉर्डर पाकिस्तान को फायदा पहुंचा सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि यह सिर्फ एक सैन्य योजना नहीं, बल्कि एक हाइब्रिड वॉरफेयर रणनीति है, जिसमें साइबर ऑपरेशन्स, दुष्प्रचार, और स्थानीय असंतोष को भड़काने जैसे तरीके शामिल हैं।

वहीं, भारतीय खुफिया एजेंसियों ने इस संभावित पूर्वी खतरे को गंभीरता से लिया है। असम, मेघालय और त्रिपुरा में निगरानी बढ़ा दी गई है। सैन्य खुफिया और सीमा सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। साथ ही भारत ने आसियान और खाड़ी देशों के साथ राजनयिक बातचीत तेज कर दी है ताकि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय समर्थन न मिल सके।

विशेषज्ञों के मुताबिक, मुनीर की यह नीति पाकिस्तान के लिए जोखिम भरी हो सकती है, लेकिन यह संकेत भी देती है कि दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन एक नए मोड़ पर पहुंच चुका है।

Indian Navy Satellite Launch: इसरो कल लॉन्च करेगा नौसेना का सबसे भारी सैटेलाइट, ‘बाहुबली’ में है 150 हाथियों जितना वजन

Indian Navy Satellite Launch

Indian Navy Satellite Launch: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो रविवार को अपना सबसे भारी रॉकेट ‘बाहुबली’ लॉन्च करने जा रहा है। यह रॉकेट भारतीय नौसेना के लिए खास तौर पर तैयार किए गए कम्यूनिकेशन सैटेलाइट सीएमएस-03 को अंतरिक्ष में स्थापित करेगा। इस सैटेलाइट का उद्देश्य नौसेना के जहाजों और बेस को सिक्योर कम्यूनिकेशन नेटवर्क से जोड़ना है, ताकि समुद्री सुरक्षा और निगरानी को और मजबूत किया जा सके।

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यह प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से रविवार शाम 5:26 बजे किया जाएगा। यह लॉन्च व्हीकल मार्क-3 यानी एलवीएम-3 रॉकेट का आठवां मिशन होगा। इसरो का यह भारी रॉकेट अब तक 100 फीसदी सफल रहा है और 2023 में इसी ने चंद्रयान-3 को चांद तक पहुंचाया था।

43.5 मीटर ऊंचा यह रॉकेट लगभग 15 मंजिला इमारत के बराबर है और इसका वजन 642 टन है, जो करीब 150 एशियाई हाथियों के वजन के बराबर माना जाता है। इस बार रॉकेट अपने साथ जो सैटेलाइट ले जा रहा है, वह भारत का अब तक का सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट है। इसका वजन करीब 4,400 किलोग्राम है और यह जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा।

यह नया सैटेलाइट जीसैट-7 या रुक्मिणी सैटेलाइट की जगह लेगा, जो 2013 से नौसेना की सेवा कर रहा है। सीएमएस-03 सैटेलाइट की खासियत यह है कि यह कई फ्रीक्वेंसी बैंड्स में काम करता है और भारत के तटीय क्षेत्रों से 2,000 किलोमीटर तक फैले नौसैनिक संसाधनों को एक साथ जोड़ सकता है।

इस मिशन में इस्तेमाल होने वाला हर एलवीएम-3 रॉकेट लगभग 500 करोड़ रुपये का होता है। इस 16 मिनट की उड़ान के दौरान रॉकेट में भारत में विकसित किया गया क्रायोजेनिक इंजन इस्तेमाल किया जाएगा। इसरो के वैज्ञानिकों के अनुसार, यह तकनीक भारत की अंतरिक्ष आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।

इस सैटेलाइट का सैन्य महत्व भी बेहद अहम है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना ने रुक्मिणी सैटेलाइट की मदद से पाकिस्तान की नौसेना पर नजर रखी थी और नेटवर्क सेंट्रिक ऑपरेशंस के जरिए अपनी बढ़त बनाई थी। अब नया सैटेलाइट सीएमएस-03 उस क्षमता को और अधिक आधुनिक और तेज बनाएगा।

यह भी उल्लेखनीय है कि यही ‘बाहुबली’ रॉकेट भविष्य में भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ को भी अंतरिक्ष में ले जाएगा। इसके लिए रॉकेट का ह्यूमन रेटेड वर्जन तैयार किया जा रहा है।

Vayu Samanvay-II: पाकिस्तान से सटे रेगिस्तान में भारतीय सेना ने की बड़ी ड्रोन और काउंटर-ड्रोन एक्सरसाइज, देखें वीडियो

Ex Trishul-Poorvi Prachand Prahar

Vayu Samanvay-II: भारतीय सेना ने बड़े स्तर का ड्रोन और काउंटर-ड्रोन एक्सरसाइज वायु समन्वय–II का आयोजन किया। यह अभ्यास 28 से 29 अक्टूबर के बीच रेगिस्तानी इलाके में आयोजित किया गयाा था। इस एक्सरसाइज का आयोजन भारतीय सेना की दक्षिणी कमान ने किया था। अभ्यास में ऑपरेशन सिंदूर और अन्य ऑपरेशंस में इस्तेमाल की गई ड्रोन तकनीकों की क्षमता को भी परखा गया।

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दो दिन तक चले इस अभ्यास का उद्देश्य भारतीय सेना की नई पीढ़ी की युद्ध प्रणाली की तैयारियों को परखना था। इसमें एरियल और ग्राउंड एसेट्स को इंटीग्रेट करके मल्टी-डोमेन कमांड एंड कंट्रोल सेंटर्स के माध्यम से विभिन्न ऑपरेशनल यूनिट्स को जोड़ा गया। यह पूरा अभ्यास इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और मुश्किल परिस्थितियों में किया गया, जिससे यह एक्सरसाइज और ज्यादा वास्तविक और चुनौतीपूर्ण बन गई।

इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य ड्रोन और काउंटर-ड्रोन अभियानों (यानि दुश्मन के ड्रोन को पहचानना और रोकना) के लिए नई तकनीकों और तरीकों को परखना था, ताकि भारतीय सेना उभरते हवाई खतरों का बेहतर तरीके से सामना कर सके। रेगिस्तान के कठिन मौसम और इलाके ने सैनिकों को असली हालात में अभ्यास करने का मौका दिया। इसमें जमीन और हवा से हेलिकॉप्टर, ड्रोन, और अन्य आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर सेना ने दिखाया कि वे मिलकर युद्ध को लड़ सकते हैं और एक-दूसरे को सपोर्ट कर सकते हैं।

वायु समन्वय–II ने भारतीय सेना की अलग-अलग शाखाओं के बीच बेहतर तालमेल और संयुक्त काम करने की क्षमता को दिखाया। इस दौरान सैनिकों ने “आत्मनिर्भर भारत” अभियान के तहत देश में बनी तकनीकों का इस्तेमाल किया। “स्वावलंबनेन विजयः, नवोन्मेषे जयः” के मंत्र को साकार करते हुए यह अभ्यास भारत की रक्षा क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम है।

Vayu Samanvay-II

दक्षिणी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने इस अभ्यास की सफलता की प्रशंसा करते हुए कहा कि वायु समन्वय–II से मिली सीखें सेना में ड्रोन और काउंटर-ड्रोन प्रणालियों को और तेजी से डेवलप करने में मदद करेंगी।

भारतीय सेना के अनुसार, यह अभ्यास आधुनिक तकनीक को अपनाने और मल्टी डोमेन वॉरफेयर की तैयारी को मजबूत करने के लिए किया गया। इस अभ्यास में विभिन्न प्रकार के स्वदेशी ड्रोन, आर्टिलरी, इलेक्ट्रॉनिक फ्यूज, और काउंटर-ड्रोन इक्विपमेंट का प्रदर्शन हुआ, जिसे भारतीय उद्योग और सेना के सहयोग से डेवलप किया गया है।

MISW 2025: ‘महासागर’ विजन के तहत गुरुग्राम के INS अरावली में जुटेंगे 30 देश, हिंद महासागर में समुद्री सहयोग पर होगी चर्चा

MISW 2025-Maritime Information Sharing Workshop 2025
Maritime Information Sharing Workshop in IFC-IOR, Gurugram

MISW 2025: अगले सप्ताह दुनिया भर के मैरीटाइम सिक्युरिटी स्पेशलिस्ट भारत में एकत्र हो रहे हैं, जहां इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर– इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR) की तरफ से मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन शेयरिंग वर्कशॉप 2025 का तीसरा एडिशन आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन 3 से 5 नवंबर 2025 तक चलेगा और इसका विषय है- “हिंद महासागर क्षेत्र में रियल-टाइम कोऑर्डिनेशन और इन्फॉर्मेशन शेयरिंग को बढ़ाना।”

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यह वर्कशॉप भारत की “महासागर” नीति का हिस्सा है, जिसका पूरा नाम है “म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्युरिटी एंड ग्रोथ अक्रोस रीजंस” यानी साझा सुरक्षा और विकास के लिए सामूहिक प्रगति। इस नीति का मकसद हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के बीच भरोसेमंद सहयोग और इन्फॉर्मेशन शेयरिंग को मजबूती देना है।

इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन का उद्घाटन डिप्टी चीफ ऑफ नेवल स्टाफ वाइस एडमिरल तरुण सोबती करेंगे। इस आयोजन में डीजी शिपिंग के एडिशनल डायरेक्टर जनरल आईपीएस सुशील मानसिंग खोपड़े मुख्य अतिथि होंगे। इस आयोजन में हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (आईओआरए), जिबूती कोड ऑफ कंडक्ट/जेद्दा अमेंडमेंट और बिम्सटेक देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। कुल मिलाकर 30 देशों के समुद्री सुरक्षा अधिकारी इस वर्कशॉप में हिस्सा ले रहे हैं।

मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन शेयरिंग वर्कशॉप 2025 (MISW) की शुरुआत साल 2019 में हुई थी। तब से यह कार्यक्रम समुद्री सुरक्षा क्षेत्र में एक अहम मंच बन गया है, जो ऑपरेशनल स्तर पर देशों के बीच बेहतर संवाद, साझेदारी और इनफॉरमेशन एक्सचेंज को बढ़ावा देता है। इसका उद्देश्य समुद्री खतरों जैसे पाइरेसी, ड्रग स्मगलिंग, मानव तस्करी और गैरकानूनी मछली पकड़ने जैसी गतिविधियों को नियंत्रित करना है।

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पहले के एडिशंस के मुकाबले वर्कशॉप 2025 में कई अंतरराष्ट्रीय संगठन हिस्सा ले रहे हैं। इनमें यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम, रीकेप इंफॉर्मेशन शेयरिंग सेंटर, रीजनल मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर, इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर सिंगापुर और कई प्रमुख शिपिंग कंपनियां शामिल हैं।

वर्कशाप में इस बात पर चर्चा होगी कि कैसे नई टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डाटा एनालिटिक्स और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम्स के इस्तेमाल से समुद्री सुरक्षा को कैसे मजबूत किया जा सकता है। भारत इस दौरान अपने नेशनल मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन शेयरिंग सेंटर्स की भूमिका की भी जानकारी देगा, जो विभिन्न देशों के साथ मिलकर समुद्री घटनाओं, जहाजों की गतिविधियों और आपात स्थितियों की जानकारी साझा करते हैं।

गुरुग्राम में भारतीय नौसेना के नेवल बेस आईएनएस अरावली में इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर– इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR) की स्थापना 22 दिसंबर 2018 को की गई थी। इसका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना और मित्र देशों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान करना है। यहां 25 देशों के 43 मल्टीनैशनल सेंटर की लाइव फीड उपलब्ध होती है। इस सेंटर ने 28 देशों के साथ 76 से अधिक अंतरराष्ट्रीय संपर्क स्थापित किए हैं। इसमें ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, फ्रांस, जापान और यूनाइटेड किंगडम समेत 15 देशों के इंटरनेशनल लाइजन ऑफिसर्स तैनात हैं, जो 57 समुद्री सुरक्षा संगठनों और 25 साझेदार देशों के साथ लगातार सहयोग कर रहे हैं।

हाल ही में चीफ ऑफ द नेवल स्टाफ एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग 2025 कहा था कि गुरुग्राम में स्थित इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर– इंडियन ओशन रीजन (एएफसी-एओआर) को अंतरराष्ट्रीय सूचना केंद्र के तौर पर तैयार किया गया है। यह केंद्र अब समुद्री सूचनाओं को साझा करने का एक बड़ा प्लेटफॉर्म बन चुका है। यहां इस समय 15 अंतरराष्ट्रीय लायजन अधिकारी काम कर रहे हैं और 2028 तक इसकी संख्या 50 तक पहुंचाने का लक्ष्य है।

वर्कशॉप के अंतिम दिन एक टेबल टॉप एक्सरसाइज आयोजित की जाएगी, जिसमें सभी प्रतिभागी देश एक सिमुलेटिंग मैरीटाइम क्राइसेस पर संयुक्त रूप से काम करेंगे। इसका उद्देश्य है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग को व्यावहारिक रूप में लागू किया सके।

Indian Army Raising Day 2025: सेना ने मनाई आर्मी एविएशन की 40वीं और इंटेलिजेंस कॉर्प्स की 83वीं वर्षगांठ

Indian Army Raising Day 2025
INDIAN ARMY CELEBRATES 40 GLORIOUS YEARS OF ARMY AVIATION AND 83 YEARS OF INTELLIGENCE CORPS VIGILANCE

Indian Army Raising Day 2025: भारतीय सेना ने शनिवार को अपनी दो अहम ब्रांच आर्मी एविएशन कॉर्प्स और इंटेलिजेंस कॉर्प्स की वर्षगांठ मनाई। इस मौके पर नई दिल्ली के नेशनल वॉर मेमोरियल में एक श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया, जिसमें शहीद सैनिकों को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए जिन्होंने देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान दिया।

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कार्यक्रम में आर्मी एविएशन के डायरेक्टर जनरल और कर्नल कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल विनोद नाम्बियार और मेजर जनरल गोपाल वर्मा, एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री इंटेलिजेंस ने अधिकारियों और जवानों के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर दोनों अधिकारियों ने अपने-अपने कॉर्प्स के योगदान की सराहना की।

Indian Army Raising Day 2025
INDIAN ARMY CELEBRATES 40 GLORIOUS YEARS OF ARMY AVIATION AND 83 YEARS OF INTELLIGENCE CORPS VIGILANCE

आर्मी एविएशन कॉर्प्स की स्थापना 1986 में हुई थी। यह अब सेना की एक आधुनिक और तकनीकी रूप से मजबूत ब्रांच बन चुकी है। यह युनिट बैटल फील्ड में सैनिकों की मोबिलिटी, रिकॉनिसेंस, घायल सैनिकों की अस्पताल पहुंचाने और मानवीय सहायता जैसे मिशन में अहम भूमिका निभाती है। वर्ष 2025 में इसके बेड़े में एएच-64ई अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर शामिल किए गए हैं, जिससे इसकी मारक और निगरानी क्षमता में बड़ा इजाफा हुआ है। साथ ही, रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम ने इसकी सर्विलांस और जानकारी जुटाने की क्षमता को और मजबूत किया है।

वहीं इंटेलिजेंस कॉर्प्स की स्थापना 1940 में हुई थी। इंटेलिजेंस कॉर्प्स ने 83 सालों में देश की सुरक्षा और इंटेलिजेंस सिस्टम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसका आदर्श वाक्य सदा सतर्क इसकी पहचान है। यह युनिट सीमा सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी अभियानों, सीमा सुरक्षा, साइबर इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के क्षेत्र में प्रमुख भूमिका निभाती है।

Indian Army Raising Day 2025
INDIAN ARMY CELEBRATES 40 GLORIOUS YEARS OF ARMY AVIATION AND 83 YEARS OF INTELLIGENCE CORPS VIGILANCE

भारतीय सेना ने इस मौके पर कहा कि दोनों यूनिट्स न केवल युद्ध के समय बल्कि, शांति के दौर में भी देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

Malabar Exercise 2025: अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ के बावजूद गुआम में मालाबार नेवल एक्सरसाइज में हिस्सा लेगा भारत

Malabar Exercise 2025
Malabar Exercise (File Photo)

Malabar Exercise 2025: भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक मतभेद और 50 फीसदी टैरिफ विवाद के बावजूद, दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग पहले की तरह जारी है। इसी के तहत भारत ने मालाबार नौसैनिक अभ्यास 2025 में शामिल होने की बात कही है। यह अभ्यास 25 से 26 नवंबर को गुआम में होगा, जो पश्चिमी प्रशांत महासागर में स्थित है।

Indian Navy on Chinese Vessel: हिंद महासागर में मौजूद चीनी जहाज पर बोली भारतीय नौसेना- शिप की हर गतिविधि पर है हमारी नजर, पाकिस्तान को सीधी चेतावनी

इस अभ्यास में क्वॉड समूह के चारों सदस्य देश भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल होंगे। चारों देशों की नौसेनाएं मिलकर समुद्री सुरक्षा और आपसी समन्वय पर काम करेंगी। यह अभ्यास ऐसे समय हो रहा है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों में तनाव बना हुआ है, क्योंकि अमेरिका ने भारतीय सामान पर अभी भी 50 फीसदी तक का आयात शुल्क लगाया हुआ है।

भारतीय नौसेना ने पुष्टि की है कि इस साल के अभ्यास के लिए आईएनएस सह्याद्री, एक लेटेस्ट स्टील्थ फ्रिगेट को गुआम भेजा गया है। यह वॉरशिप एंटी-सबमरीन वारफेयर, सरफेस स्ट्राइक ऑपरेशन और एयर डिफेंस मिशन जैसे अभियानों में सक्षम है। इसके साथ भारतीय नौसेना के पी-8आई लॉन्ग रेंज मैरीटाइम एयरक्राफ्ट और रोमियो सीहॉक एमएच-60आर हेलिकॉप्टर भी शामिल होंगे, जो समुद्री निगरानी और सर्च एंड रेस्क्यू आपरेशंस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भारतीय नौसेना के अनुसार, इस अभ्यास का उद्देश्य इंडो-पैसिफिक इलाके में सुरक्षित समुद्री मार्ग सुनिश्चित करना और सहयोगी देशों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाना है। यह अभ्यास समुद्र में आपसी समन्वय, तकनीकी कौशल और सामरिक तैयारी को मजबूत करेगा।

Malabar Exercise 2025: गुआम में बड़ा अंतरराष्ट्रीय अभ्यास

मालाबार अभ्यास का यह एडिशन गुआम में हो रहा है, जो जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक स्ट्रैटेजिक द्वीप समूह है। अमेरिका इस क्षेत्र का इस्तेमाल अपने नौसैनिक अभियानों और प्रशिक्षण गतिविधियों के लिए करता है। इस बार का अभ्यास दो चरणों में होगा। पहला हार्बर फेज, जिसमें बंदरगाह पर योजनाओं और प्रशिक्षणों पर चर्चा होगी। दूसरा सी फेज, जिसमें रिअल सी प्रैक्टिस, लाइव फायरिंग, एंटी-सबमरीन वारफेयर और एयर डिफेंस ऑपरेशन शामिल होंगे।

इस दौरान सभी देशों की नौसेनाएं एक साथ जटिल ऑपरेशनों का अभ्यास करेंगी। इससे समुद्री खतरों से निपटने और संकट के समय मानव सहायता या आपदा राहत में सामूहिक कार्रवाई की क्षमता मजबूत होगी।

Malabar Exercise 2025: लगभग 300 नौसैनिक अधिकारी और जवान शामिल

भारतीय नौसेना ने इस अभ्यास में बड़ी तैयारी के साथ हिस्सा लिया है। इस मिशन का नेतृत्व एक रियर एडमिरल कर रहे हैं और लगभग 300 नौसैनिक अधिकारी व जवान इसमें शामिल हैं। आईएनएस सह्याद्री ने 25 अक्टूबर को जापान के योकोसुका नौसैनिक अड्डे से गुआम के लिए यात्रा शुरू की थी।

अभ्यास से पहले भारत और अमेरिका की नौसेनाओं ने अरब सागर में संयुक्त ड्रिल की, जिसमें एंटी-पाइरेसी और विजुअल बोर्डिंग एंड सर्च ऑपरेशन जैसे मिशन की ट्रेनिंग हुई। भारतीय नौसेना ने कहा कि “मालाबार अभ्यास इंडो-पैसिफिक में हमारी रणनीतिक भागीदारी और साझेदारी की भावना को दर्शाता है।”

अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर अभी भी 50 प्रतिशत तक का टैरिफ लगा रखा है, जिससे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में तनाव जारी है और इसमें कटौती को लेकर बातचीत भी जारी है। फिर भी, रक्षा क्षेत्र में संबंध पहले की तरह मजबूत बने हुए हैं।

हाल ही में भारत और ब्रिटेन ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर सहमति जताई है, लेकिन अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ ऐसी बातचीत अभी जारी है। इसके बावजूद भारत और अमेरिका के बीच सैन्य और सामरिक सहयोग में कोई रुकावट नहीं आई है।

मालाबार अभ्यास की शुरुआत 1992 में भारत और अमेरिका के बीच एक द्विपक्षीय अभ्यास के रूप में हुई थी। बाद में जापान और ऑस्ट्रेलिया भी इसमें शामिल हुए। अब यह चार देशों की संयुक्त रणनीतिक कवायद बन चुका है। ये चारों देश क्वाड समूह के सदस्य हैं, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में खुला, सुरक्षित और संतुलित मरीन इंफ्रास्ट्रक्चर सुनिश्चित करने पर काम करते हैं।

भारत ने पिछले वर्ष मालाबार 2024 का आयोजन विशाखापत्तनम में किया था, जबकि इस वर्ष इसे अमेरिका गुआम में आयोजित कर रहा है। हर वर्ष इसकी मेजबानी चारों देशों में बारी-बारी से होती है।

Young Leaders Forum 2025: सेना प्रमुख बोले- युवा ही भारत की सबसे बड़ी ताकत, अनुशासन और आत्मनिर्भरता से बनाएं 2047 का विकसित भारत

Young Leaders Forum 2025:
General Upendra Dwivedi, Chief of the Army Staff

Young Leaders Forum 2025: सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि भारत की 65 फीसदी आबादी 35 साल से कम उम्र की है, और यही युवा भारत के भविष्य की असली ताकत हैं। उन्होंने कहा कि इन युवाओं की ऊर्जा, साहस और इनोवेशन की भावना को अनुशासन और जिम्मेदारी के साथ सही दिशा में लगाना देश की सबसे बड़ी जरूरत है।

उन्होंने यह बात शुक्रवार नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में भारतीय सेना और सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज (क्लॉज) की तरफ से आयोजित यंग लीडर्स फोरम में कही। यह कार्यक्रम भारतीय सेना के वार्षिक चाणक्य डिफेंस डायलॉग 2025 से पहले आयोजित किया गया था, जो 27–28 नवंबर को होगा।

सेना प्रमुख ने कहा कि युवाओं को आत्मनिर्भरता, राष्ट्रीय जिम्मेदारी और देशभक्ति को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने कहा, “भारत की प्रगति केवल सरकारों या संस्थानों से नहीं होगी, बल्कि युवाओं की सोच, समर्पण और कर्म से होगी।”

Young Leaders Forum 2025: सेना प्रमुख ने ऑपरेशन सिंदूर का दिया उदाहरण

अपने संबोधन में जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना ने आने वाले दशक को ‘डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन’ घोषित किया है, जिसमें रिस्ट्रक्चरिंग, टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन और युवाओं की भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सेना ने युवाओं को डिफेंस इनोवेशन से जोड़ने के लिए आईआईटी में आर्मी सेल्स, टेक्नोलॉजी क्लस्टर्स, और इंडियन आर्मी इंटर्नशिप प्रोग्राम 2025 जैसी पहलें शुरू की हैं।

उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभियान में युवाओं का योगदान भारत की दृढ़ता और संयम का उदाहरण है। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि भारत की सेना न केवल ताकत में बल्कि नैतिक बल में भी सबसे आगे है।”

सेना प्रमुख ने युवाओं से कहा कि वे देश की संप्रभुता और सुरक्षा को बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाएं, क्योंकि आने वाले वर्षों में वही “विकसित भारत 2047” के निर्माण के केंद्र में होंगे।

Young Leaders Forum 2025-1
Union Minister Shri Kiren Rijiju

रिजिजू बोले- फिटनेस, अनुशासन और देशभक्ति को जीवन का हिस्सा बनाएं युवा

फोरम में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विकसित भारत 2047 का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब देश के युवा और सशस्त्र बल मिलकर काम करेंगे।

उन्होंने सरदार पटेल और मेजर बॉब खाथिंग के योगदान को याद करते हुए कहा कि इन महान व्यक्तित्वों ने भारत की एकता और सुरक्षा को मजबूत किया। मंत्री ने कहा कि आज भारत 7 फीसदी से अधिक की आर्थिक वृद्धि दर के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो देश के आत्मविश्वास और क्षमता को दर्शाता है।

रिजिजू ने युवाओं से कहा कि वे फिटनेस, अनुशासन और देशभक्ति को जीवन का हिस्सा बनाएं और देश की प्रगति में सक्रिय योगदान दें। उन्होंने कहा कि “सेना और युवाओं की एकजुटता भारत को आने वाले वर्षों में विश्व के अग्रणी राष्ट्रों में शामिल करेगी।”

Young Leaders Forum 2025-2
Lt Gen (Retd.) Dushyant Singh, Director General – CLAWS with COAS

“युवा हैं राष्ट्रीय सुरक्षा के केंद्र में”

कार्यक्रम की शुरुआत में सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज (क्लॉज) के महानिदेशक ले. जनरल (सेवानिवृत्त) दुष्यंत सिंह ने कहा कि यह आयोजन युवाओं की भागीदारी और देश की सुरक्षा में उनकी भूमिका को समर्पित है। उन्होंने कहा कि यंग लीडर्स फोरम “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को साकार करता है और यह दिखाता है कि भारत की एकता और सुरक्षा की असली ताकत उसके युवा हैं।

उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम आने वाले चाणक्य डिफेंस डायलॉग 2025 की दिशा तय करता है। उन्होंने कहा, “नवंबर का महीना पूरी तरह सेना और क्लॉज के लिए विशेष है, क्योंकि यह महीना युवा नेतृत्व और राष्ट्रीय सुरक्षा पर गहन चर्चा के लिए समर्पित रहेगा।”

उन्होंने बताया कि इस वर्ष के संवाद की तीन मुख्य थीमें हैं। पहली, युवा और राष्ट्रीय सुरक्षा का भविष्य, जिसमें यह चर्चा होगी कि बदलती परिस्थितियों में सुरक्षा की परिभाषा क्या होनी चाहिए। दूसरी, युवा नेतृत्व और रक्षा सेवाएं, जिसमें युवाओं की भूमिका को सुरक्षा रणनीति के केंद्र में रखा गया है। तीसरी, नए युद्ध क्षेत्रों में युवाओं की भूमिका, जैसे साइबर, स्पेस और इंफॉर्मेशन वारफेयर।

दुश्यंत सिंह ने कहा कि “भारत का युवा वर्ग न केवल सेना में बल्कि समाज, विज्ञान, उद्योग और तकनीक के हर क्षेत्र में देश की सुरक्षा और विकास की नई ताकत बनकर उभर रहा है।” स्वामी विवेकानंद के शब्दों में उन्होंने कहा, “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत, यही आज के युवाओं का मंत्र होना चाहिए।”

Young Leaders Forum 2025-2
Major Radhika Sen

“सुरक्षा केवल सीमाओं की नहीं, समाज की भी जिम्मेदारी है”

संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में अपनी सेवाएं दे चुकीं और संयुक्त राष्ट्र सैन्य जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड से सम्मानित
मेजर राधिका सेन ने फोरम में युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि “राष्ट्रीय सुरक्षा” की परिभाषा अब केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक की जिम्मेदारी बन चुकी है।

उन्होंने कहा कि “आज सुरक्षा केवल बंदूक से नहीं, बल्कि कीबोर्ड, लैब, अस्पताल और खेतों से भी तय होती है। जो युवा साइबर सुरक्षा में काम कर रहा है, जो किसान जलवायु के बदलाव के लिए नई तकनीक अपना रहा है, या जो छात्र झूठी खबरें रोक रहा है, वह भी देश की सुरक्षा में योगदान दे रहा है।”

मेजर राधिका सेन ने युवाओं से कहा कि आज सुरक्षा की कई नई परतें हैं, डिजिटल सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, पर्यावरणीय सुरक्षा और सामाजिक एकता। उन्होंने कहा कि “जब कोई नागरिक फेक न्यूज रोकता है, जब कोई छात्र साइबर ठगी की रिपोर्ट करता है, या जब कोई युवा बाढ़ राहत में मदद करता है, वह भी एक सच्चा रक्षक होता है।”

उन्होंने कहा कि “21वीं सदी में सुरक्षा की पहली लाइन सीमा पर नहीं, बल्कि हर नागरिक के दिल और दिमाग में है।”
अपने भाषण में उन्होंने कौटिल्य के अर्थशास्त्र, स्वतंत्रता संग्राम, हरित क्रांति, पोखरण परमाणु परीक्षण, और कोविड-19 महामारी के उदाहरण देकर बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा का अर्थ समय के साथ कैसे बदला है।

मेजर सेन ने कहा कि “आज जब दुनिया डिजिटल, तकनीकी और पर्यावरणीय चुनौतियों से घिरी है, तो भारत के युवाओं को न केवल बहादुर बल्कि जागरूक और संवेदनशील नागरिक बनना होगा।”

राष्ट्रीय एकता दिवस पर हुआ आयोजन

यह कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता दिवस पर आयोजित किया गया, जो सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। फोरम का उद्देश्य था युवाओं में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करना और उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा, एकता और विकास की दिशा में प्रेरित करना। इस आयोजन में देशभर से युवा नेता, शोधकर्ता, विद्यार्थी, उद्यमी, एनसीसी कैडेट्स, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और सशस्त्र बलों के सदस्य शामिल हुए। कार्यक्रम को हाइब्रिड मोड में आयोजित किया गया और इसे देशभर के सेना प्रशिक्षण संस्थानों, आईआईटी, विश्वविद्यालयों और अन्य पेशेवर केंद्रों में लाइव प्रसारित किया गया।

India US defence framework pact: भारत-अमेरिका के बीच नया 10 वर्षीय रक्षा समझौता, दोनों देशों के रिश्तों को मिलेगी मजबूती

India US defence framework pact
Defence Minister Rajnath Singh and his American counterpart Pete Hegseth signed the document on the sidelines of the ASEAN Defence Ministers’ Meeting in Malaysia.

India US defence framework pact: भारत और अमेरिका ने शुक्रवार को एक नया रक्षा सहयोग समझौता किया है, जो दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी को और मजबूत करेगा। यह समझौता मलेशिया में आयोजित आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान हुआ। जहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके अमेरिकी समकक्ष पीट हेगसेथ ने दस्तावेज पर दस्तखत किए।

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि डिफेंस सेक्टर भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों का प्रमुख स्तंभ रहेगा। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “कुआलालंपुर में अपने अमेरिकी समकक्ष से उपयोगी बातचीत हुई। हमने नया 10 वर्षीय डिफेंस फ्रेमवर्क साइन किया है। यह समझौता हमारी मजबूत साझेदारी को एक नए युग में ले जाएगा।”

यह तीसरा डिफेंस फ्रेमवर्क है जिसे भारत और अमेरिका ने अब तक साइन किया है। इससे पहले 2005 और 2015 में ऐसे समझौते हो चुके हैं। हर नए समझौते के साथ दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के दायरे में बढ़ोतरी हुई है।

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि यह समझौता रक्षा उद्योग सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देगा। उन्होंने X पर लिखा, “हम अपने समन्वय, सूचना साझेदारी और तकनीकी सहयोग को और मजबूत कर रहे हैं। भारत के साथ हमारे रक्षा संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत हैं।”

भारत और अमेरिका के बीच हुआ यह 10 साल का नया रक्षा समझौता दोनों देशों के रिश्तों को एक नई दिशा देगा। इस समझौते का मकसद है कि भारत और अमेरिका अपने रक्षा सहयोग को और मजबूत करें। इसके तहत दोनों देश मिलकर सैन्य अभ्यास, लॉजिस्टिक्स, और क्षमता बढ़ाने पर साथ काम करेंगे।

यह फ्रेमवर्क दोनों देशों की सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाएगा और संयुक्त अभियान चलाने में मदद करेगा। इसमें नई तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन्स और साइबर सुरक्षा में भी सहयोग होगा।

दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगे। साथ ही आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और जानकारी साझा करने में भी साझेदारी करेंगे। यह समझौता क्वाड (भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया) को और मजबूत बनाता है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के फरवरी 2025 के साझा बयान पर आधारित है, जिसमें इस डिफेंस प्लान की रूपरेखा तय की गई थी।

MALE RPAS UAS: भारत में बनेंगे अत्याधुनिक MALE ड्रोन, लार्सन एंड टूब्रो ने अमेरिकी कंपनी जनरल एटॉमिक्स एरोनॉटिकल सिस्टम्स के साथ की साझेदारी

MALE RAPS UAS
MALE RAPS UAS

MALE RPAS UAS: भारतीय इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टूब्रो और अमेरिकी रक्षा कंपनी जनरल एटॉमिक्स एरोनॉटिकल सिस्टम्स इंक ने भारत में मीडियम ऑल्टिट्यूड लॉन्ग एंड्यूरेंस (MALE) रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम (आरपीएएस) बनाने के लिए साझेदारी का एलान किया है। यह समझौता भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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जनरल एटॉमिक्स एरोनॉटिकल सिस्टम्स को अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स (अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स) बनने का दशकों का अनुभव है। वहीं, लार्सन एंड टूब्रो के पास इंजीनियरिंग, प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग और सिस्टम इंटीग्रेशन में महारत है। दोनों कंपनियां मिलकर भारत में कॉम्बैट-प्रूवेन मेल रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम प्लेटफॉर्म्स बनाएंगी, जो पूरी तरह से मेड इन इंडिया होंगे।

MALE RAPS UAS: 87 मेल आरपीएएस के लिए साझेदारी

यह साझेदारी भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के 87 मेल आरपीएएस कार्यक्रम के तहत की जा रही है। इस कार्यक्रम में लार्सन एंड टूब्रो मुख्य बोलीदाता होगी और जनरल एटॉमिक्स एरोनॉटिकल सिस्टम्स तकनीकी साझेदार के तौर पर काम करेगी। इस सहयोग के जरिए जनरल एटॉमिक्स की एमक्यू-सीरीज रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम का उत्पादन भारत में किया जाएगा। ये सिस्टम दुनिया के कई देशों में निगरानी और स्ट्राइक मिशनों में काम आ रहे हैं और लाखों उड़ान घंटे भर चुके हैं।

कंपनी का कहना है कि यह कार्यक्रम ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत चलाया जाएगा। इसमें जरूरी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और इंडिजीनियस कंटेंट के मानदंडों को पूरा किया जाएगा। यह पहल भारत के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को आत्मनिर्भर बनाने और विदेशी निर्भरता घटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

एल एंड टी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक एसएन सुब्रह्मण्यम ने कहा, “यह साझेदारी भारत के लिए अत्याधुनिक अनमैन्ड प्लेटफॉर्म्स को स्वदेशी रूप से बनाने का अनोखा अवसर है। जनरल एटॉमिक्स एरोनॉटिकल सिस्टम्स के साथ मिलकर हमें गर्व है कि यह साझेदारी भारत की रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करेगी।”

वहीं, जनरल एटॉमिक्स एरोनॉटिकल सिस्टम्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. विवेक लाल ने कहा, “एल एंड टी के साथ सहयोग भारत के आत्मनिर्भरता विजन को आगे बढ़ाने वाला कदम है। जनरल एटॉमिक्स एरोनॉटिकल सिस्टम्स की तकनीक और एल एंड टी की निर्माण क्षमता मिलकर भारतीय सशस्त्र बलों के लिए मेल आरपीएएस का निर्माण करेगी।”

Indian Navy on Chinese Vessel: हिंद महासागर में मौजूद चीनी जहाज पर बोली भारतीय नौसेना- शिप की हर गतिविधि पर है हमारी नजर, पाकिस्तान को सीधी चेतावनी

Indian Navy on Chinese Veseel
Navy Vice Admiral Sanjay Vatsayan (Background Photo: Damien Symon)

Indian Navy on Chinese Vessel: भारतीय नौसेना ने साफ किया है कि वह भारतीय महासागर क्षेत्र में आने वाले हर जहाज पर कड़ी नजर रख रही है, चाहे वह किसी भी देश का हो। खास तौर पर चीन के जहाजों की हर गतिविधि पर बारीकी से निगरानी की जा रही है। नौसेना उप प्रमुख वाइस एडमिरल संजय वात्सायन ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय नौसेना वर्तमान में ऑपरेशन सिंदूर के तहत पूरी तरह तैनात है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

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उन्होंने बताया कि भारतीय नौसेना के इस समय लगभग 40 जहाज हिंद महासागर क्षेत्र में तैनात हैं और जल्द ही इनकी संख्या 50 से ऊपर कर दी जाएगी। उन्होंने यह जानकारी अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू की तैयारियों के दौरान दी, जो फरवरी 2026 में विशाखापट्टनम में आयोजित होगा।

Indian Navy on Chinese Vessel: हिंद महासागर क्षेत्र में एक्स्ट्रा-रीजनल पावर्स की मौजूदगी

वाइस एडमिरल वात्सायन ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में लगातार एक्स्ट्रा-रीजनल पावर्स की मौजूदगी बढ़ रही है। उन्होंने बताया, “किसी भी समय कम से कम 40 जहाज हिंद महासागर में एक्टिव रहते हैं, और यह संख्या अब 50 से भी अधिक होने जा रही है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि नौसेना क्षेत्र में मौजूद हर विदेशी जहाज की गतिविधि को ट्रैक कर रही है, कि वह कब आता है, कब जाता है, क्या कर रहा है और उसका उद्देश्य क्या है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में तेल और माल परिवहन का सबसे बड़ा रास्ता हिंद महासागर से होकर गुजरता है, इसलिए इस क्षेत्र की निगरानी बहुत जरूरी है।

चीन का शोध जहाज शेन हाई यी हाओ भारतीय महासागर में

भारतीय नौसेना की बढ़ी सतर्कता के बीच, चीन का डीप-सी रिसर्च जहाज शेन हाई यी हाओ हिंद महासागर में प्रवेश कर चुका है। यह जहाज वर्तमान में मालदीव की राजधानी माले की ओर बढ़ रहा है और 30 अक्टूबर 2025 को इसे मलक्का जलडमरूमध्य में ट्रैक किया गया था।

यह जहाज एक मानव-संचालित गहरे समुद्र वाला सबमर्सिबल ‘जियाओलोंग’ लेकर चल रहा है, जो 7000 मीटर से अधिक गहराई तक गोता लगाने में सक्षम है। यह चीन के समुद्र-तल सर्वेक्षण और गहरे समुद्र की खोज के मिशनों में इस्तेमाल होता है।

चीन की गतिविधियों पर कड़ी नजर

वाइस एडमिरल वात्सायन ने बताया कि भारतीय नौसेना हिंद महासागर में आने वाले हर चीनी युद्धपोत और रिसर्च वेसल पर नजर रख रही है। उन्होंने कहा, “हम हर जहाज को मॉनिटर कर रहे हैं, चाहे वह नेवल शिप हो या रिसर्च वेसल। हमें उनकी हर गतिविधि की जानकारी रहती है।”

ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है

वाइस एडमिरल वात्सायन ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है और इसके तहत नौसेना किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा, “हमारे सभी ऑपरेशनल प्लान्स तैयार हैं। हम पूरी तरह तैनात हैं और किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, ऑपरेशन सिंदूर जारी है और आगे भी जारी रहेगा।”

उन्होंने यह भी बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के साथ-साथ भारतीय नौसेना अपनी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और अभ्यासों को भी जारी रखे हुए है। उन्होंने कहा, “हम विदेशी नौसेनाओं के साथ अपनी जॉइंट एक्सरसाइजेज और योजनाओं को बिना किसी रुकावट के जारी रख रहे हैं।”

अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू 2026

भारतीय नौसेना फरवरी 2026 में विशाखापट्टनम में अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू आयोजित करेगी। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू नौसेना बेड़े का निरीक्षण करेंगी। यह कार्यक्रम 18 फरवरी को होगा। पहला फ्लीट रिव्यू 2001 में आयोजित हुआ था, जबकि दूसरा फ्लीट रिव्यू 2016 में विशाखापट्टनम में आयोजित किया गया था।

इस बार के फ्लीट रिव्यू में स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत और कलवरी क्लास पनडुब्बियां भी हिस्सा लेंगी। यह पहली बार होगा जब भारत का स्वदेशी विमानवाहक पोत इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन का हिस्सा बनेगा। साथ ही, विशाखापट्टनम क्लास डेस्ट्रॉयर, नीलगिरी क्लास फ्रिगेट्स, और अर्नाला क्लास एंटी-सबमरीन युद्धपोत भी प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके साथ ही दोस्त राष्ट्रों की नौसेनाओं, कोस्ट गार्ड और मर्चेंट मरीन जहाजों की भी भागीदारी रहेगी।

वाइस एडमिरल वात्सायन ने कहा कि भारत के सभी योजनाबद्ध रक्षा और कूटनीतिक कार्यक्रम पहले की तरह जारी रहेंगे। उन्होंने कहा, “हम ऑपरेशन सिंदूर के तहत पूरी तरह तैनात हैं और साथ ही अपनी वैश्विक गतिविधियां और अभ्यास भी जारी रखे हुए हैं।”

वाइस एडमिरल के अनुसार, भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उसके रक्षा कार्यक्रम और सैन्य तैयारियां किसी भी तरह की ज्योपॉलिटिकल परिस्थितियों से प्रभावित नहीं होंगी। भारतीय नौसेना अपनी सभी योजनाओं को समानांतर रूप से चला रही है, चाहे वह ऑपरेशन सिंदूर के तहत की जाने वाली तैनाती हो या फिर अंतरराष्ट्रीय अभ्यासों की योजना। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना हमेशा तैयार रहती है और किसी भी संभावित चुनौती या आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने में सक्षम है।

पहली बार एक साथ तीन बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों की मेजबानी

भारत फरवरी 2026 में एक ऐतिहासिक समुद्री आयोजन की मेजबानी करने जा रहा है। देश पहली बार एक साथ तीन बड़े अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक कार्यक्रम आयोजित करेगा, जिनमें इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026, अभ्यास मिलन 2026 और आईओएनएस कॉन्क्लेव ऑफ चीफ्स शामिल हैं। ये सभी आयोजन 15 से 25 फरवरी 2026 के बीच विशाखापट्टनम में होंगे।

यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए समुद्री विजन ‘महासागर’ को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। यह विजन भारत की मौजूदा नीति ‘सागर’ (सिक्युरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन) का विस्तार है, जो अब पूरे क्षेत्र में सुरक्षा, विकास, स्थिरता और सहयोग पर केंद्रित है।

इन आयोजनों का मकसद भारत की नौसैनिक ताकत, स्वदेशी तकनीकी क्षमता और वैश्विक साझेदारी को प्रदर्शित करना है। इस ऐतिहासिक समुद्री सम्मेलन में दुनिया भर की नौसेनाओं को आमंत्रित किया गया है। विशाखापट्टनम इन तीनों आयोजनों की मेजबानी करेगा।

कार्यक्रम के दौरान भारत एक विश्वसनीय सुरक्षा सहयोगी के रूप में अपनी भूमिका दिखाएगा। आयोजन में भारत की “एक्ट ईस्ट पॉलिसी, महासागर और इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव जैसे स्ट्रेटेजिक फ्रेमवर्क्स की झलक भी देखने को मिलेगी।

एक्सरसाइज मिलन 2026 का सी फेज

एक्सरसाइज मिलन 2026 का सी फेज और हार्बर फेज दोनों ही अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर केंद्रित होंगे। इसमें विभिन्न देशों की नौसेनाएं एंटी-सबमरीन वारफेयर, एयर डिफेंस, सर्च एंड रेस्क्यू, और मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस जैसे अभियानों में हिस्सा लेंगी।

इस दौरान आरके बीच पर एक भव्य इंटरनेशनल सिटी परेड भी आयोजित होगी, जिसमें भारतीय नौसेना, थल सेना, वायु सेना और अन्य देशों की टुकड़ियां हिस्सा लेंगी। इस परेड में आम नागरिकों को मैरीटाइम डिप्लोमेसी की झलक देखने को मिलेगी।

आईओएनएस कॉन्क्लेव ऑफ चीफ्स 2026

आईओएनएस (इंडियन ओशन नवल सिम्पोजियम) के दौरान भारतीय नौसेना दूसरी बार (2025-2027) के लिए इसकी अध्यक्षता करेगी। इस बैठक में 25 सदस्य देशों, 9 पर्यवेक्षक देशों और कई विशेष आमंत्रित देशों के नौसेना प्रमुख शामिल होंगे। वे समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता, सूचना और साझेदारी जैसे विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे।

भारत ने पहली बार 2001 में मुंबई में इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू की मेजबानी की थी, जिसमें 20 देशों की नौसेनाएं शामिल हुई थीं। इसके बाद 2016 में विशाखापट्टनम में यह आयोजन और बड़ा हुआ। इसी तरह अभ्यास मिलन की शुरुआत 1995 में पोर्ट ब्लेयर से हुई थी, जिसमें सिर्फ चार नौसेनाएँ शामिल थीं। अब यह दुनिया का प्रमुख बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास बन चुका है।