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Hanle-Chumar Road: रंग लाई बीआरओ की मेहनत, लद्दाख में 17,200 फीट ऊंचाई पर बनी 91 किमी लंबी ऑल वेदर रोड जनता के लिए खुली

Hanle-Chumar Road

Hanle-Chumar Road: लद्दाख के दुर्गम रास्तों के बीच बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के प्रोजेक्ट हिमांक के तहत बनी हानले-चुमार रोड को जनता के लिए खोल दिया गया है। यह सड़क कुल 91 किलोमीटर लंबी है और 14,500 फीट से लेकर 17,200 फीट तक की ऊंचाई पर बनी है। इस मार्ग पर स्थित साल्सा ला पास को पार करना रोड इंजीनियरिंग की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। बता दें कि प्रोजेक्ट हिमांक 1985 से चल रहा है।

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यह सड़क भारत-चीन सीमा लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के करीब स्थित है। इस सड़क के बन जाने के बाद चुमार सेक्टर तक आवाजाही आसान हो गई है। इस मार्ग से भारतीय सेना को सैनिकों, हथियारों और रसद सामग्री की सप्लाई में बड़ी मदद मिलेगी। 2020 के गलवान संघर्ष के बाद से लद्दाख में सड़क और पुलों का नेटवर्क तेजी से बनाया जा रहा है। हानले-चुमार रोड इस रणनीतिक प्रयास का अहम हिस्सा है।

हाई-एल्टीट्यूड सड़कें बनाने में सामान्य से ज्यादा वक्त लगता है। क्योंकि लद्दाख जैसे क्षेत्र में जहां काम केवल गर्मियों (मई से अक्टूबर) में ही संभव होता है।

वहीं सेना के साथ आम लोग भी इस सड़क का इस्तेमाल कर सकेंगे। यह मार्ग कई पर्यटन स्थलों को जोड़ता है जहां अभी तक बेहद कठिन रास्तों से ही पहुंचा जा सकता था। इस सड़क के जरिए पर्यटक अब आसानी से हानले हान्ले वेधशाला, क्यूं त्सो लेक, चिलिंग त्सो लेक और आगे त्सो मोरिरी लेक तक पहुंच सकेंगे। हानले ऑब्जर्वेटरी दुनिया की सबसे ऊंचाई पर स्थित वेधशालाओं में से एक है, जहां रात का आसमान तारों से भरा हुआ दिखाई देता है। वहीं, यह सड़क के बनने के बाद अब पर्यटक भी इस अनुभव का आनंद दे सकेंगे।

लद्दाख जैसे कठिन भौगोलिक इलाके में सड़क बनाना आसान नहीं होता। यहां का मौसम बेहद शुष्क है, तापमान अक्सर शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है और ऑक्सीजन का स्तर भी कम हो जाता है। ऐसे हालात में बीआरओ ने इस सड़क का निर्माण किया और दिखाया कि भारतीय इंजीनियरिंग क्षमता कितनी मजबूत है। प्रोजेक्ट हिमांक पहले भी उमलिंग ला पास पर 19,024 फीट की ऊंचाई पर दुनिया की सबसे ऊंची सड़क बनाकर रिकॉर्ड कायम कर चुका है।

वहीं इस रोड के बनने से स्थानीय लोगों को भी फायदा होगा। अब गांवों तक सामान की सप्लाई आसान होगी। स्थानीय किसान और हस्तशिल्प कलाकार अपने उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचा पाएंगे। स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाएं भी इन इलाकों में तेजी से पहुंचेंगी। साथ ही पर्यटन बढ़ने से होमस्टे, गाइड और स्थानीय परिवहन सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा।

हानले-चुमार रोड का उद्घाटन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुआ था, जिसमें 50 बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण किया गया था। इनमें से 16 प्रोजेक्ट्स लद्दाख में पूरे किए गए हैं। इनकी कुल लागत लगभग 947 करोड़ रुपये है। इनमें कई महत्वपूर्ण सड़कें और छह बड़े पुल भी शामिल हैं। साथ ही, हनले में एक विशेष एम्युनिशन स्टोरेज साइट और सड़कों पर नई इंटरलॉकिंग कंक्रीट ब्लॉक तकनीक का इस्तेमाल भी किया गया है, जिससे सर्दियों में सड़कें टिकाऊ बनी रह सकें।

साल्सा ला पास से गुजरेगी सड़क

इस सड़क का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा सालसा ला पास है। यह पास 17,200 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और यहां पर मौसम अचानक बदल जाता है। बर्फबारी और तेज हवाओं के बीच सड़क निर्माण बेहद कठिन था। बीआरओ ने कठिन परिश्रम और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके इस रास्ते को तैयार किया, जो अब पूरे साल इस्तेमाल किया जा सकेगा।

IAF MiG-21 ceremony: वायुसेना अपने वर्कहॉर्स मिग-21 को खास तरीके से देगी विदाई, तेजस और जगुआर ऐसे देंगे आखिरी सलामी

IAF MiG-21 ceremony

IAF MiG-21 ceremony: भारतीय वायुसेना 26 सितंबर के दिन को एतिहासिक बनाने की तैयारी कर रही है। 62 साल की सेवा के बाद 26 सितंबर को उसका सबसे पुराना फाइटर जेट मिग-21 आखिरी बार आसमान में गरजता नजर आएगा। चंडीगढ़ वायुसेना स्टेशन पर होने वाले इस भव्य विदाई समारोह में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह खुद कॉकपिट में बैठेंगे। उनके साथ स्क्वॉड्रन लीडर प्रिया शर्मा भी MiG-21 की आखिरी उड़ान का हिस्सा होंगे और इस तरीके से MiG-21 ceremony होगी

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IAF MiG-21 ceremony: बादल और पैंथर फॉर्मेशन

वायुसेना सूत्रों के मुताबिक मिग-21 नंबर 23 स्क्वॉड्रन “पैंथर्स” का हिस्सा हैं, आखिरी बार दो अलग-अलग फॉर्मेशन में उड़ान भरेंगे। इनमें पहला होगा तीन विमानों का “बादल फॉर्मेशन”, जिसमें एयर चीफ मार्शल एपी सिंह लीड करेंगे। वे लैंडिंग करेंगे जबकि बाकी दो मिग-21 ऊपर उठकर कॉम्बैट एयर पेट्रोल (CAP) का प्रदर्शन करेंगे।

दूसरा होगा “पैंथर फॉर्मेशन”, जिसमें तीन MiG-21 और दो स्वदेशी तेजस एलसीए मैक-1 शामिल होंगे। जैसे ही मिग-21 स्क्वॉड्रन सलामी देंगे, वे अलग हो जाएंगे और तेजस विमान भारतीय आसमान में आगे बढ़ते हुए भविष्य का संकेत देंगे। MiG-21 ceremony नजारा पुराने युग से नए युग की ओर बढ़ते कदमों की तस्वीर पेश करेगा।

IAF MiG-21 ceremony: जगुआर भी बनेंगे हिस्सा

समारोह में सिर्फ मिग-21 ही नहीं बल्कि जगुआर लड़ाकू विमान भी हिस्सा लेंगे। वे बेस स्ट्राइक का डेमो देंगे और दिखाएंगे कि वायुसेना की ताकत अब किस तरह आधुनिक विमानों पर टिक चुकी है। इसके अलावा स्वदेशी तेजस भी पहली बार मिग-21 के साथ आधिकारिक विदाई में शामिल होंगे।

प्रिया शर्मा ने पहले भी उड़ाया था मिग

कुछ हफ्ते पहले राजस्थान के नाल एयरबेस पर एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने खुद मिग-21 बाइसन सीयू2777 पर सोलो कॉम्बैट सॉर्टी की थी। खास बात यह रही कि उस फॉर्मेशन की अगुवाई स्क्वॉड्रन लीडर प्रिया शर्मा ने की थी। वायुसेना ने इसे “ट्रेडिशन एंड ट्रांसफॉर्मेशन” का पल बताया था। अब यही जोड़ी MiG-21 की आखिरी उड़ान में भी हिस्सा लेकर इतिहास का हिस्सा बनेगी।

राजस्थान के झुंझुनू जिले में जन्मी स्क्वाड्रन लीडर प्रिया शर्मा आईएएफ की सातवीं महिला फाइटर पायलट हैं। वे 2018 में एयर फोर्स अकादमी, दुंदिगल से ग्रेजुएट हुईं, जहां उन्होंने स्टेज-1 (पिलाटस पीसी-7), स्टेज-2 (किरण) पर ट्रेनिंग पूरी की। जनवरी 2019 से स्टेज-3 (बीदर AFS) में मिग-21 पर एडवांस्ड ट्रेनिंग ली। वहीं वे मोहना सिंह औऱ प्रतिभा सिंह के बाद राजस्थान की तीसरी महिला फाइटर पायलट हैं। उनके पिता भी बीदर एयरफोर्स स्टेशन में सेवाएं चुके हैं।

वहीं भारतीय वायुसेना के लिए यह सिर्फ MiG-21 ceremony नहीं बल्कि दुनिया को यह संदेश भी देना है कि वायुसेना में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है।

एसीएम एपी सिंह के पास 5000 घंटे का फ्लाइंग एक्सपीरियंस

मिग-21 केवल एक विमान नहीं बल्कि कई पीढ़ियों के पायलटों की पहचान रहा है। भारतीय वायुसेना के लगभग हर एयर चीफ ने इस विमान को उड़ाया है और इसकी कठिन उड़ानों से खुद को तैयार किया है। वर्तमान एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के पास कुल पांच हजार घंटे से ज्यादा का फ्लाइंग अनुभव है और उन्होंने MiG-21 पर लंबा समय बिताया है। 1984 में कमीशन हुए एसीएम एपी सिंह मिग-21 पर कमांडर रहे थे और 1985 में उन्होंने तेजपुर में टाइप-77 वेरिएंट उड़ाया था। उन्होंने कहा था कि मिग-21 ने पीढ़ियों को ट्रेनिंग दी है, इसकी एजिलिटी और क्विक एक्सेलरेशन ने ऑपरेशनल फिलॉसफी को प्रभावित किया है। खुद एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने मिग-29 अपग्रेड प्रोजेक्ट भी लीड किया है।

उनके पहले एयर चीफ्स का इतना है फ्लाइंग अनुभव

उनके पूर्ववर्ती एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी (2021-2024) के पास 3,800 घंटे का फ्लाइंग एक्सपीरियंस है, जिसमें मिग-21, मिग-23एमएफ, मिग-29 और सुखोई-30एमकेआई शामिल हैं।

वहीं रिटायर्ड एसीएम आरकेएस भदौरिया (2019-2021) के नाम 26 तरह के विमानों पर 4,250 घंटे का फ्लाइंग एक्सपीरियंस है। जबकि बीएस धनोआ (2016-2019) ने 3,000 घंटे लॉग किए। वे 1999 कारगिल में नंबर 17 स्क्वाड्रन कमांडर रहे, जहां उन्होंने मिग-21 पर सॉर्टी उड़ाईं। उन्होंने 2019 में विंग कमांडर अभिनंदन वर्थमान के साथ अंतिम ट्रेनर सॉर्टी उड़ाई थी।

जबकि उनके पूर्ववर्ती एसीएम अरूप राहा (2013-2016) के 3,400 घंटे का फ्लाइंग एक्सपीरियंस है। उन्होंने मिग-29 स्क्वाड्रन कमांड किया। जबकि एनएके ब्राउन (2012-2013) ने 3,500 घंटे लॉग किए। एक बार MiG-21 ने उनकी जान बचाई थी, जब इंजन फेल होने पर बेली आउट के बजाय इमरजेंसी लैंडिंग की। वहीं उनके भी पूर्ववर्ती पीवी नाइक (2009-2012) के 3,000 घंटे हैं, जिनमें 2,000 घंटे मिग-21 पर बिताए। उन्होंने 1971 युद्ध में भाग लिया और मिग-21 बाइसन अपग्रेड शुरू किया। एफएच मेजर (2007-2009) ने 3,200 घंटे लॉग किए, जिनमें मिग-21 प्रमुख रहा।

उनके पहले एसपी त्यागी (2005-2007) के 3,000 घंटे हैं, और उन्होंने मिग-21 पर खूब सोलो सॉर्टी उड़ाईं। 1980 के दशक में बॉर्डर टेंशन के दौरान कमांड किया।

जबकि उनके पहले प्रदीप वासंत नाइक (2009-2011) के पास 3,000 घंटे काा फ्लाइंग एक्सपीरियंस रहा। उन्होंने मिग-21 के सभी वैरियंट्स पर उड़ान भरी। साथ ही, उन्होंने 1971 युद्ध में पूर्वी-पश्चिमी सेक्टर में सक्रिय भूमिका भी निभाई थी।

मिग का कॉकपिट किसी राजा की गद्दी से भी ज्यादा कीमती

मिग-21 का सफर भारतीय वायुसेना में लगभग 900 विमानों से शुरू हुआ था। अलग-अलग वेरिएंट्स में इसे शामिल किया गया। दशकों तक यह भारतीय वायुसेना का सबसे बड़ा फाइटर फ्लीट रहा। 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ निर्णायक जीत से लेकर 1999 कारगिल युद्ध में हवाई सुरक्षा तक इसने अपनी क्षमता दिखाई। वहीं, 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान के एफ-16 को गिराने वाले मिग-21 बाइसन की सफलता आज भी लोगों को याद है।

पूर्व एयर चीफ मार्शल एवाई टिपनिस ने “भारतीय वायुसेना के साथ मिग-21 के 50 साल” किताब में लिखा था कि मिग-21 का कॉकपिट किसी राजा की गद्दी से भी ज्यादा कीमती है, क्योंकि यह लड़कों को मर्द और पायलटों को योद्धा बना देता है।

पहला सुपरसोनिक इंटरसेप्टर

1963 में भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ मिग-21 सोवियत संघ का पहला सुपरसोनिक इंटरसेप्टर था। जो आने वाले दशकों में भारत की एयर पावर की बैक बोन बना। 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के कई ठिकाने तबाह करने से लेकर करगिल युद्ध और बालाकोट एयरस्ट्राइक तक में मिग-21 ने अपनी क्षमता साबित की। पिछले छह दशकों में 400 से ज्यादा मिग-21 हादसों का शिकार हुए औऱ तकरीबन 200 पायलटों ने अपनी जान गंवाई। बावजूद इसके, भारतीय वायुसेना अपने इस वर्कहॉर्स को लगातार अपग्रेड किया और नए हथियारों की मदद से इसे 21वीं सदी तक ऑपरेशन में बनाए रखा और अब MiG-21 ceremony हो रही है।

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MiG-21 Retirement on Sept 26

MiG-21 Retirement on Sept 26: भारतीय वायुसेना के लिए साल 2025 बेहद अहम रहा है। पहले ऑपरेशन सिंदूर और अब वायुसेना के वर्कहॉर्स के नाम से मशहूर मिग-21 की विदाई भी इसी साल हो रही है। पिछले पांच दशकों से आसमान पर राज करने वाला मिग-21 26 सितंबर को भारतीय वायुसेना को अलविदा कह देगा। इनके साथ ही भारतीय वायुसेना के इतिहास का एक बड़ा अध्याय भी बंद हो जाएगा। भारतीय वायुसेना के इतिहास में शायद मिग-21 ही ऐसा फाइटर जेट रहा है, जिस पर पायलटों की कई पीढ़ियों ने ट्रेनिंग ली है। पिता ने भी मिग-21 को उड़ाया तो बेटे ने भी बाइसन पर ट्रेनिंग लेकर अपने करियर की नींव रखी। ऐसी ही एक कहानी है पाकिस्तान का एफ-16 गिराने वाले अभिनंदन वर्थमान की।

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MiG-21 Retirement on Sept 26: एफ-16 और मिग-21 की यादगार डॉगफाइट

साल 2019 का वह वाकया तो आपको याद होगा, जब बालाकोट एयर स्ट्राइक के अगले दिन भारत-पाकिस्तान के फाइटर जेट्स की डॉग फाइट हुई थी। इसी दौरान जब ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्थमान ने पाकिस्तानी एफ-16 को अपने मिग-21 बाइसन से गिराया था। हालांकि उनका विमान भी गिरा और उन्हें पाकिस्तान ने बंदी बना लिया था। उस दौरान उनकी मूंछों वाली तस्वीर खूब वायरल हुई थी। ऐसा इतिहास में पहली बार था जब किसी MiG-21 ने अमेरिका के अत्याधुनिक एफ-16 को निशाना बनाया हो।

MiG-21 Retirement on Sept 26: दादा भी थे वायुसेना में

वहीं उनके पिता एयर मार्शल (रिटायर्ड) सिम्हकुत्ती वर्थमान भी कभी मिग-21 उड़ाते थे। वे चार दशक तक वायुसेना में रहे और कई युद्धों व अभियानों का हिस्सा बने। इससे पहले उनके दादा भी वायुसेना में रहे। यानी वर्थमान परिवार की तीन पीढ़ियां भारतीय आसमान की रखवाली करती रही हैं।

MiG-21 Retirement on Sept 26: 1973 में जॉइन की थी वायुसेना

तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित सैनिक स्कूल अमरावतीनगर से पढ़ाई करने के बाद एयर मार्शल सिम्हकुत्ती वर्थमान ने 1973 में वायुसेना जॉइन की। वे एक कुशल फाइटर पायलट बने और बाद में टेस्ट पायलट के रूप में जाने गए। उनके करियर के कई अहम पड़ाव भारतीय वायुसेना के इतिहास से जुड़े हुए हैं।

पूर्वी क्षेत्र में उन्होंने मिग-21 स्क्वॉड्रन की कमान संभाली। उनकी यूनिट ने 9,500 उड़ानें बिना किसी दुर्घटना के पूरी कीं, जिसके लिए उन्हें 2002 में विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। सिम्हकुत्ती ने MiG-21 के कई वेरिएंट्स जैसे टाइप 77 औऱ बाइसन उड़ाए।

1999 के कारगिल युद्ध के दौरान वे ग्वालियर एयरबेस के चीफ ऑपरेशंस ऑफिसर थे। उनकी प्लानिंग और कॉर्डिनेशन के कारण मिराज-2000 विमानों का इस्तेमाल कर भारत ने पाकिस्तानी ठिकानों को सटीक निशाना बनाया। यह युद्ध भारतीय वायुसेना की क्षमता दिखाने वाला अहम मोड़ था।

बेंगलुरु की एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट (ASTE) में वे चीफ टेस्ट पायलट रहे। यहां उन्होंने मिग-21 सहित कई विमानों की टेस्टिंग की। बाद में 2011 में उन्हें ईस्टर्न एयर कमांड का प्रमुख बनाया गया और 2012 में वे रिटायर हुए। उनकी पत्नी डॉ. शोभा वर्थमान डॉक्टर हैं और बेटी अदिति फ्रांस में रहती हैं।

MiG-21 Retirement on Sept 26: हीरो बनकर लौटे थे अभिनंदन

वहीं, अभिनंदन 2004 में भारतीय वायुसेना में कमीशन हुए और फिर फाइटर पायलट बने। वे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के पूर्व छात्र रहे हैं। अभिनंदन ने 16 साल तक मिग-21 उड़ाया और 3,000 से ज्यादा उड़ान घंटे पूरे किए।

26 फरवरी 2019 को भारत ने बालाकोट एयरस्ट्राइक कर पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को नष्ट किया, तो अगले दिन पाकिस्तानी वायुसेना ने जवाबी कार्रवाई की और एफ-16 समेत कई लड़ाकू विमान भारतीय सीमा में दाखिल हुए। अभिनंदन ने श्रीनगर एयर बेस से MiG-21 बाइसन से उड़ान भरी। इस दौरान अभिनंदन वर्थमान ने अपने मिग-21 बाइसन के साथ एफ-16 का मुकाबला किया।

उन्होंने हवा में डॉगफाइट कर एक एफ-16 को मार गिराया। लेकिन उनका मिग-21 भी गिरा और उन्हें पाकिस्तान की सीमा में लैंडिंग करनी पड़ी। उन्हें पाकिस्तानी सेना ने पकड़ लिया। दो दिन बाद पाकिस्तान ने उन्हें रिहा कर दिया और वे हीरो बनकर लौटे। इस मिशन में उनकी बहादुरी के लिए उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया गया। उनके थर्ड जनरेशन मिग-21 ने पुराने डिजाइन के बावजूद फोर्थ जनरेशन एफ-16 जैसे आधुनिक जेट को टक्कर दी।

पिता ने कहे थे ये शब्द

जब अभिनंदन पाकिस्तान की हिरासत में थे तो एयर मार्शल (रिटायर्ड) सिम्हकुत्ती वर्थमान ने अपने बेटे विंग कमांडर अभिनंदन वर्थमान की बहादुरी पर गर्व जताया था। पाकिस्तानी मीडिया में अभिनंदन के इंटरोगेशन वीडियो सामने आने के बाद प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा था, “एक सच्चा सैनिक, देखिए कैसे बहादुरी से बोला। मैं प्रार्थना करता हूं कि उसे प्रताड़ित न किया जाए और वह सुरक्षित लौटे।” वहीं जब अभिनंदन रिहा हुए थे उनके पिता ने कहा, “हमारी प्रार्थनाएं सुन ली गईं,” और उन्होंने उनकी मिग-21 उड़ाने की क्षमता को परिवार का गौरव बताया।

एक युग का अंत!

भारतीय वायुसेना के इतिहास में मिग-21 सिर्फ एक फाइटर जेट नहीं है, बल्कि यह एक युग के खत्म होने जैसा है। इस विमान ने 1965, 1971 और 1999 के युद्धों में अपनी अहमियत साबित की। इसने पायलटों को वह अनुभव दिया, जिसने उन्हें अनुभवी बनाया। वर्थमान परिवार इसका जीता-जागता उदाहरण है। पिता और पुत्र दोनों ने अलग-अलग समय में इस विमान को उड़ाया। एक ने कारगिल युद्ध के समय प्लानिंग और स्ट्रैटेजी से इतिहास रचा, तो दूसरे ने पाकिस्तानी F-16 को मार गिराकर नई पीढ़ी के सामने साहस का उदाहरण पेश किया।

Navy Chief Sri Lanka Visit: श्रीलंका की पीएम से मिले नेवी चीफ, संयुक्त अभ्यास में और ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाएंगी दोनों देशों की नौसेनाएं

Indian Navy Chief Sri Lanka Visit: Admiral Dinesh K Tripathi strengthens defence ties in Colombo
Indian Peace Keeping Force (IPKF) Memorial in Colombo.

Indian Navy Chief Sri Lanka Visit: भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी इन दिनों चार दिवसीय आधिकारिक दौरे पर श्रीलंका में हैं। 22 सितंबर से शुरू हुआ यह दौरा 25 सितंबर तक चलेगा। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और श्रीलंका के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा और समुद्री संबंधों को और अधिक मजबूत करना है।

Navy Chief Sri Lanka Visit: भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी श्रीलंका की चार दिवसीय यात्रा पर, गाले डायलॉग 2025 में लेंगे हिस्सा

23 सितंबर को एडमिरल त्रिपाठी ने श्रीलंका की प्रधानमंत्री डॉ. हरिनी अमरसूरिया से मुलाकात की। दोनों के बीच व्यापक स्तर पर रक्षा सहयोग को लेकर चर्चा हुई। जिसमें समुद्री सुरक्षा, क्षमता विकास, प्रशिक्षण और सहयोग के नए रास्ते तलाशने पर खास जोर दिया गया। मुलाकात के दौरान यह भी तय हुआ कि भारत और श्रीलंका की सेनाएं भविष्य में संयुक्त अभ्यास और समुद्री अभियानों में और ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाएंगी।

दौरे के दौरान एडमिरल त्रिपाठी ने श्रीलंका के कई वरिष्ठ सैन्य और प्रशासनिक अधिकारियों से भी मुलाकात की। इनमें डिप्टी डिफेंस मिनिस्टर मेजर जनरल केपी अरुण जयसेकेरा, रक्षा सचिव एयर वाइस मार्शल संपथ थुयाकोंथा (रिटायर्ड), श्रीलंका नेवी के कमांडर वाइस एडमिरल कंचना बनागोडा, श्रीलंका एयर फोर्स के कमांडर एयर मार्शल वीबी एदिरिसिंघे और श्रीलंका आर्मी के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल लसनथा रोड्रिगो शामिल रहे। इन बैठकों में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और सेवाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने पर सहमति जताई गई।

एडमिरल त्रिपाठी ने इस दौरे के दौरान श्रीलंका की धरती पर भारतीय शांति सेना के शहीद सैनिकों को भी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने 22 सितंबर को कोलंबो स्थित आईपीकेएफ यानी इंडियन पीस कीपिंग फोर्स मेमोरियल पर पुष्पचक्र भी अर्पित किया। इस समारोह ने दोनों देशों के बीच साझा इतिहास और बलिदानों की याद दिलाई।

Indian Navy Chief Sri Lanka Visit
VAdm Kanchana Banagoda, Commander of the Sri Lanka Navy (in Left), Lt Gen Lasantha Rodrigo, Commander of the Sri Lanka Army. (in Right)

23 सितंबर को एडमिरल त्रिपाठी ने कोलंबो स्थित नेशनल डिफेंस कॉलेज में भी संबोधन किया। अपने संबोधन में उन्होंने भारत और श्रीलंका के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक रिश्तों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बदलती वैश्विक समुद्री परिस्थितियों, तकनीकी बदलावों और ग्रे-जोन खतरों का उल्लेख करते हुए तीन मुख्य बिंदुओं पर जोर देते हुए विश्वसनीय क्षमता, गहन सहयोग और तकनीकी परिवर्तन पर बात की। उन्होंने यह भी बताया कि भारत और श्रीलंका ने मिलकर एंटी-पाइरेसी मिशनों और नारकोटिक्स इंटरडिक्शन ऑपरेशनों में सफलता हासिल की है। SLINEX (श्रीलंका-इंडिया नेवल एक्सरसाइज) और गोवा मैरिटाइम सेमिनार जैसे प्लेटफॉर्म्स को भी उन्होंने दोनों देशों की साझा दक्षता का अहम हिस्सा बताया।

दौरे के दौरान भारतीय नौसेना का स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस सतपुड़ा भी कोलंबो में मौजूद रहा। इस जहाज पर 22 सितंबर को डेक रिसेप्शन आयोजित किया गया, जिसकी मेजबानी खुद नौसेना प्रमुख एडमिरल त्रिपाठी ने की। इस कार्यक्रम में श्रीलंका के न्याय और राष्ट्रीय एकीकरण मंत्री हर्षना ननायक्कारा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। भारत के उच्चायुक्त संतोष झा भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

भारतीय नौसेना और श्रीलंका नौसेना के बीच लंबे समय से मजबूत सहयोग रहा है। दोनों देश हर साल सालाना डिफेंस टॉक्स, स्टाफ टॉक्स और संयुक्त अभ्यासों जैसे SLINEX यानी श्रीलंका-इंडिया नेवल एक्सरसाइज, पासेज एक्सरसाइज और हाइड्रोग्राफी सहयोग में हिस्सा लेते रहे हैं। इसके अलावा दोनों नौसेनाएं बहुपक्षीय आयोजनों जैसे इंडियन ओशन नेवल सेमिनार, गॉल डायलॉग, मिलन और कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव में भी सक्रिय रूप से शामिल होती हैं।

इस दौरे का एक अहम हिस्सा गॉल डायलॉग 2025 भी है। यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री सम्मेलन 12वीं बार आयोजित किया जा रहा है, जिसका विषय है, “बदलती गतिशीलता के तहत हिंद महासागर का समुद्री परिदृश्य”। इस सम्मेलन में एडमिरल त्रिपाठी भारत की तरफ से हिस्सा लेंगे और क्षेत्रीय समुद्री चुनौतियों, बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्यों और सहयोग की संभावनाओं पर विचार साझा करेंगे।

श्रीलंका दौरे का एक और महत्वपूर्ण पहलू भारत और श्रीलंका के बीच बढ़ते औद्योगिक सहयोग का है। मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) श्रीलंका की सबसे बड़ी शिपबिल्डिंग और रिपेयर कंपनी कोलंबो डॉकयार्ड पीएलसी (CDPLC) में हिस्सेदारी हासिल करने की प्रक्रिया में है। इसे भारतीय महासागर क्षेत्र में भारत की औद्योगिक मौजूदगी को मजबूत करने के रूप में देखा जा रहा है।

एडमिरल त्रिपाठी का यह दौरा भारत-श्रीलंका संबंधों को एक नई ऊर्जा देने वाला माना जा रहा है। समुद्री सुरक्षा, प्रशिक्षण और रक्षा सहयोग पर हुई चर्चाएं आने वाले समय में दोनों देशों के रिश्तों की गहराई को और बढ़ाने वाली हैं।

Indian Navy Androth: समंदर में एंटी-सबमरीन वॉरफेयर को मिलेगी मजबूती, इस दिन भारतीय नौसेना में शामिल होगा ‘अंद्रोथ’

Indian Navy Androth
Indian Navy Androth

Indian Navy Androth: भारतीय नौसेना 6 अक्टूबर 2025 को अपनी नई एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘अंद्रोथ’ (Androth) को औपचारिक रूप से शामिल करने जा रही है। विशाखापट्टनम के नेवल डॉकयार्ड में होने वाले इस कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता ईस्टर्न नेवल कमांड के प्रमुख वाइस एडमिरल राजेश पेंढरकर करेंगे। यह सोलह जहाजों की सीरीज का दूसरा जहाज है जिसे नौसेना में शामिल किया जा रहा है।

Indian Navy Expansion: भारतीय नौसेना को 2027 तक मिलेंगे 25 नए युद्धपोत, एंटी सबमरीन वॉरफेयर के लिए कर रही है बड़ी तैयारी

अंद्रोथ का निर्माण कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड ने किया है। इसमें 80 फीसदी से अधिक स्वदेशी उपकरण और तकनीक का इस्तेमाल हुआ है। इस जहाज को 13 सितंबर 2025 को भारतीय नौसेना को सौंपा गया था। यह प्रोजेक्ट डायरेक्टरेट ऑफ शिप प्रोडक्शन और वारशिप ओवरसीइंग टीम, कोलकाता की निगरानी में तैयार हुआ है।

इस नए युद्धपोत का नाम लक्षद्वीप द्वीप समूह के ‘अंद्रोथ द्वीप’ से लिया गया है। इसका नाम भारत की सामरिक सोच और समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे पहले आईएनएस अंद्रोथ (P69) भारतीय नौसेना में 27 साल तक सेवा दे चुका है। नया अंद्रोथ पुराने जहाज को रिप्लेस करेगा।

Indian Navy Androth
Indian Navy Androth

नया अंद्रोथ अत्याधुनिक हथियार और सेंसर सिस्टम, आधुनिक संचार प्रणाली और वॉटरजेट प्रोपल्शन से लैस है। यह जहाज पानी के भीतर छिपे खतरों को पहचानने, उनका पीछा करने और उन्हें तबाह करने की क्षमता रखता है। यह न केवल एंटी-सबमरीन वॉरफेयर में काम आएगा, बल्कि मैरिटाइम सर्विलांस, सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन, और कोस्टल डिफेंस मिशन जैसे अहम कार्य भी करेगा।

Indian Navy Expansion: भारतीय नौसेना को 2027 तक मिलेंगे 25 नए युद्धपोत, एंटी सबमरीन वॉरफेयर के लिए कर रही है बड़ी तैयारी

Indian Navy Expansion: 25 New Warships to Join Fleet by 2027 Amid Indo-Pacific Tensions
Source: Indian Navy (File Photo)

Indian Navy Expansion: भारतीय नौसेना आने वाले तीन वर्षों में 25 नए जहाजों को अपने बेड़े में शामिल करने जा रही है। इसके साथ ही 2027 तक भारतीय नौसेना की ताकत 150 जहाजों तक पहुंच जाएगी। रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस समय देश में 54 जहाजों के निर्माण का काम चल रहा है, जो अगले छह से सात सालों में नौसेना का हिस्सा बनेंगे। यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते तनाव और हिंद महासागर में चीन की मौजूदगी के चलते किया जा रहा है।

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सूत्रों ने बताया कि इन 25 जहाजों में चार वॉरशिप प्रोजेक्ट 17A से जुड़े हैं। इनमें से एक इस साल के आखिर तक तक और बाकी 2026 और 2027 में नौसेना को सौंप दिए जाएंगे। इसके अलावा दो सर्वे वेसल भी अगले दो वर्षों में कमीशन किए जाएंगे। ये जहाज समुद्री सीमाओं की जांच, पोर्ट और हार्बर सर्वे, ओशनोग्राफिक और जियो-ग्राफिकल डेटा इकट्ठा करने में सक्षम होंगे, जो रक्षा जरूरतों के लिए जरूरी है।

भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी क्षमता यानी एंटी सबमरीन वॉरफेयर को बढ़ाने के लिए 14 नए जहाज भी अगले छह से सात वर्षों में शामिल किए जाएंगे। ये जहाज अत्याधुनिक सेंसर और हथियारों से लैस होंगे, जो दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाकर उन्हें नष्ट करने में सक्षम होंगे।

इसके अलावा एक डाइविंग सपोर्ट वेसल आईएनएस निपुण भी इस साल नौसेना में शामिल किया जाएगा। इसका निर्माण लार्सन एंड टूब्रो कर रही है। इसी दौरान दो मल्टीपर्पज वेसल भी नौसेना को मिलेंगे। कोलकाता स्थित टिटागढ़ कंपनी पांच छोटे डाइविंग सपोर्ट वेसल बना रही है, जिनमें से एक अगले महीने कमीशन हो जाएगा। ये 30 मीटर लंबे जहाज आधुनिक डाइविंग उपकरणों से लैस हैं और कोस्टल ऑपरेशन के लिए बनाए जा रहे हैं।

नौसेना के ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करने के लिए तीन नए कैडेट ट्रेनिंग शिप्स बनाए जा रहे हैं। इन्हें एलएंडटी बना रही है। वहीं, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड मिलकर 11 नेक्स्ट जनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल का निर्माण कर रहे हैं।

विशाखापट्टनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड पांच फ्लीट सपोर्ट शिप्स का निर्माण कर रहा है, जो नौसेना की लंबी दूरी की तैनाती और ऑपरेशंस को सपोर्ट करेंगे। यह पूरी योजना भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की बढ़ती समुद्री गतिविधियां, जिबूती में उसका नेवल बेस और हिंद महासागर क्षेत्र में उसके युद्धपोतों और पनडुब्बियों की तैनाती के चलते ही भारत तेजी से अपनी नौसेना को और मजबूत बना रहा है।

जिसके चलते 2027 तक भारतीय नौसेना न केवल संख्या के लिहाज से बड़ी होगी, बल्कि तकनीकी रूप से भी और अधिक आधुनिक और सक्षम होगी। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्वदेशी शिपयार्ड इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं, जिससे भारत की सामरिक ताकत और औद्योगिक क्षमता दोनों को मजबूती मिलेगी।

India Su-57 Fighter Jets: ऑपरेशन सिंदूर में वायुसेना को हुई थी ये दिक्कत, इसलिए चाहिए Su-57 फाइटर जेट्स, 2026 तक आएगा S-400

India Su-57 Fighter Jets and S-400

India Su-57 Fighter Jets: भारत अब रूस के Su-57 फाइटर जेट्स खरीदने को लेकर फिर से गंभीरता से विचार कर रहा है। रूस ने भारत को Su-57 फाइटर जेट्स की सप्लाई और भारत में इनके लोकल प्रोडक्शन का प्रस्ताव भेजा है। सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव में भारत की एयरोस्पेस कंपनियों को शामिल करने की संभावना भी है। साथ ही, रूस ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारत को दिए जा रहे पांच एस-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम्स की डिलीवरी 2026 तक पूरी कर दी जाएगी। यह डील 2018 में दोनों देशों के बीच हुई थी और अब यह अंतिम चरण में है।

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India Su-57 Fighter Jets: दो स्क्वॉड्रन एसयू-57 खरीदने पर विचार

सूत्रों का कहना है कि भारत रूस से कम से कम दो स्क्वॉड्रन एसयू-57 खरीदने पर विचार कर रहा है। इनमें से कुछ विमान सीधे रूस से आएंगे और बाकी का निर्माण भारत में हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड करेगी। एचएएल पहले से ही रूस के सुखोई ब्यूरो के साथ काम कर रही है। एचएएल की नासिक स्थित फैक्ट्री में इन विमानों का निर्माण संभव हो सकता है।

रूस की ओर से प्रस्ताव है कि 2 स्क्वॉड्रन उड़ान भरने की तैयार हालत में आएंगे और जबकि 3 से 5 स्क्वॉड्रन भारत में ही बनाए जा सकते हैं।

भारत ने क्यों किया FGFA प्रोग्राम से बाहर निकलने का फैसला

दिलचस्प बात यह है कि 2018 में भारत ने रूस के साथ मिलकर चल रहे फिफ्थ जनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट (FGFA) प्रोग्राम से खुद को अलग कर लिया था। उस समय कई वजहें थीं। पहली बड़ी वजह लागत थी। भारत ने शुरुआती डिजाइन स्टेज में ही करीब 1,483 करोड़ रुपये (295 मिलियन अमेरिकी डॉलर) लगाए थे। लेकिन 127 विमानों के लिए आगे का खर्चा लगभग 35 अरब डॉलर तक पहुंच जाता। प्रति विमान लागत 150 से 200 मिलियन डॉलर तक जा सकती थी।

दूसरी बड़ी समस्या परफॉर्मेंस की थी। एसयू-57 के एएल-41एफ1 इंजन में असली सुपर क्रूज क्षमता नहीं थी। उस समय भारतीय वायुसेना ने सुपर क्रूज (बिना आफ्टरबर्नर लगातार सुपरसोनिक उड़ान भरने की क्षमता) को कमजोर माना था। नए इंजन इजडेलिये-30 का वादा तो किया गया था, लेकिन उपलब्ध नहीं हो पाया।

तीसरी समस्या स्टेल्थ डिजाइन की थी। यह केवल सामने के 60 डिग्री आर्क तक स्टेल्थ रहता था। यानी चौथी पीढ़ी के सुखोई-30 के मुकाबले कोई बड़ा फायदा नहीं था। एक और बड़ी चुनौती थी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर। रूस अहम तकनीक साझा करने को तैयार नहीं था, जबकि भारत जॉइंट-प्रोडक्शन चाहता था।

2018 में भारत के बाहर निकलने के बाद भी रूस ने इस विमान को सीमित स्तर पर ही अपनाया। 2023 तक रूस के पास केवल दो दर्जन एसयू-57 फाइटर जेट थे। रूस-यूक्रेन युद्ध में भी इसका प्रदर्शन खास प्रभावी नहीं रहा। यही वजह थी कि भारत ने इस प्रोजेक्ट से हाथ खींच लिए थे।

India Su-57 Fighter Jets: आईएएफ को चाहिए लॉन्ग रेंज स्ट्राइक पावर

मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना को अहसास हुआ कि पाकिस्तान के खिलाफ लंबी दूरी तक स्ट्राइक करने की क्षमता नहीं है। भारतीय वायुसेना के पास राफेल और सुखोई-30 जैसे ताकतवर विमान तो थे, लेकिन वे लंबी रेंज तक मार नहीं सकते थे। जिसके बाद एसयू-57 पर फोकस किया गया। हालांकि यह पूरी तरह से फिफ्थ जनरेशन विमान नहीं है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी ताकत है हथियार ले जाने की क्षमता और लंबी रेंज।

एसयू-57 में R-37M एयर टू एयर मिसाइल लग सकती है, जिसकी रेंज 300 किलोमीटर से ज्यादा है। यानी दुश्मन को बेहद दूर से निशाना बनाया जा सकता है। भारतीय वायुसेना सुखोई-30 अपग्रेड में भी इसी मिसाइल को शामिल करने की योजना बना रही है।

इसके अलावा एसयू-57 में किंझल (Kinzhal) हाइपरसोनिक एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल भी लग सकती है। यह हाई-वैल्यू टारगेट को तेजी और सटीकता से मार गिराने की क्षमता देती है।

सूत्रों का कहना है कि एसयू-57 का इस्तेमाल स्टेल्थ के लिए नहीं, बल्कि लॉन्ग-रेंज स्ट्राइक प्लेटफॉर्म के तौर पर होगा। इसका वेपन बे और लॉन्ग रेंज क्षमता इसे डीप-स्ट्राइक मिशन के लिए मुफीद बनाती है, जो आईएएफ की असल जरूरत है।

यह वायुसेना की मौजूदा राफेल और सुखोई-30 स्क्वॉड्रन की मदद करेगा। खासतौर पर तब, जब चीन ने पाकिस्तान को अपना जे-31 स्टेल्थ फाइटर देने की पेशकश की है।

बता दें कि एसयू-57 का प्रस्ताव अलग है और इसे MRFA यानी मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोग्राम से नहीं जोड़ा गया है। MRFA के तहत भारतीय वायुसेना राफेल को प्राथमिकता दे रही है।

2026 तक एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की डिलीवरी

रूस ने इसके अलावा भारत को भरोसा दिलाया है कि 2026 तक एस-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम की डिलीवरी पूरी कर दी जाएगी। 2018 में 5.5 अरब डॉलर का यह सौदा हुआ था। अभी तक तीन यूनिट मिल चुकी हैं और बाकी दो 2026 और 2027 तक आएंगी।

सूत्रों के अनुसार भारत और रूस के बीच अतिरिक्त एस-400 सिस्टम्स पर भी बातचीत चल रही है। रूस की तरफ से यह प्रस्ताव भी आया है कि ट्रायम्फ का प्रोडक्शन भारत में शुरू किया जाए।

माना जा रहा है कि इस साल के आखिरी में होने वाली रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत के यात्रा के दौरान इन समझौतों को अमली जामा पहनाया जा सकता है।

भारत और रूस की रक्षा साझेदारी दशकों पुरानी है। टैंक से लेकर मिसाइल और एयरक्राफ्ट तक, दोनों देशों ने मिलकर कई प्रोजेक्ट पूरे किए हैं। टी-90 टैंक, सुखोई-30 फाइटर जेट, ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम और एके-203 राइफल्स इसका उदाहरण हैं। भारतीय नौसेना का एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रमादित्य भी रूस से मिला है।

बता दें कि हाल ही में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात हुई थी। दोनों नेताओं ने मुश्किल हालात में भी साथ खड़े होने का संदेश दिया था। वहीं, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी कहा था कि भारत ने पश्चिमी दबाव के बावजूद रूस से संसाधन खरीदना बंद नहीं किया, जिससे रूस भारत को अपना सच्चा दोस्त मानता है।

Indian Navy Amphibious Warships: 80 हजार करोड़ का सौदा; नौसेना को मिलेंगे चार मेगा लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक वारशिप्स

Indian Navy MDL Projects:
INS Jalashwa

Indian Navy Amphibious Warships: भारतीय नौसेना अपनी सामरिक क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए जल्द ही चार बड़े साइज वाले एंफीबियस वॉरशिप्सके निर्माण के लिए लगभग 80,000 करोड़ रुपये का टेंडर जारी करने जा रही है। इन जहाजों को लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक (LPD) कहा जाता है।

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि इस प्रस्ताव को उच्च-स्तरीय बैठक में जल्द ही मंजूरी दी जाएगी। इस अनुबंध में भारतीय शिपबिल्डर्स यानी लार्सन एंड टुब्रो, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड और हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड प्रमुख दावेदार होंगे। इन भारतीय शिपयार्ड्स को अंतरराष्ट्रीय डिजाइन पार्टनर्स के साथ मिलकर जहाजों का निर्माण करना होगा। इसमें नवानिया (स्पेन), नेवल ग्रुप (फ्रांस) और फिनकैंटिएरी (इटली) जैसे ग्लोबल शिपबिल्डर डिजाइन सहयोग दे सकते हैं।

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भारतीय नौसेना लंबे समय से अपनी एम्फीबियस वॉरफेयर क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इन जहाजों से न केवल तटीय इलाकों में सैनिकों और हथियारों की तैनाती की जा सकेगी, बल्कि इन्हें ह्यूमेनिटेरियन असिस्टेंस एंड डिजास्टर रिलीफ (HADR) मिशनों के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा।

चीन के पास 13 जहाज

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एम्फीबियस वारशिप्स का महत्व लगातार बढ़ रहा है। चीन की नौसेना के पास 13 से अधिक अत्याधुनिक एम्फीबियस जहाज हैं, जिनमें टाइप 075 LHD और टाइप 071 LPD शामिल हैं।

वर्ष 2021 से 2025 के बीच चीन ने चार टाइप 075 लैंडिंग हेलीकॉप्टर डॉक जहाज कमीशन किए हैं। इनमें सीएनएस हैनान, गुआंग्शी, अनहुई और हुबेई हैं। लगभग 36,000 टन वजनी ये जहाज 30 हेलीकॉप्टर्स, 1,200 सैनिक और कई लैंडिंग क्राफ्ट ले जाने में सक्षम हैं।

इसके अलावा, चीन के पास आठ से अधिक टाइप 071 लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक युझाओ क्लास जहाज भी हैं। ये 25,000 टन के युद्धपोत चार हेलीकॉप्टर्स, 60 बख्तरबंद वाहन और 800 सैनिक ले जा सकते हैं।

चीन ने दिसंबर 2024 में पहला टाइप 076 लैंडिंग हेलीकॉप्टर असॉल्ट जहाज सीएनएस सिचुआन लॉन्च किया था, जिसके 2025 में कमीशन होने की उम्मीद है। 40,000 टन वजनी यह जहाज ड्रोन और फिक्स्ड-विंग विमानों को ले जाने में सक्षम है।

वहीं, पाकिस्तान नौसेना के पास कोई बड़ा LPD या LHD नहीं है, सिर्फ कुछ छोटे लैंडिंग क्राफ्ट हैं, जो बड़े अभियान के लिए नाकाफी हैं।

नौसेना के पास सीमित LPD

वर्तमान में भारतीय नौसेना के पास सीमित संख्या में ही एम्फीबियस जहाज हैं। आईएनएस जलाश्व (L41), जो अमेरिका से खरीदा गया ऑस्टिन-क्लास एलपीडी है, नौसेना की मुख्य ताकत है। आईएनएस जलाश्व 16,590 टन वजनी है और 2007 में कमीशन हुआ था। यह 900 सैनिक, चार लैंडिंग क्राफ्ट और हेलीकॉप्टर्स ले जाने में सक्षम है। इसके अलावा चार लैंडिंग शिप टैंक (LST) भी हैं। इनमें मगर क्लास का आईएनएस घड़ियाल (L23, 1997) तथा शार्दुल क्लास के आईएनएस शार्दुल (L16, 2007), आईएनएस केसरी (L15, 2008) और आईएनएस एरावत (L24, 2009) हैं। प्रत्येक जहाज 8 टैंक या 500 सैनिक ले सकता है। इनके साथ 8 एलसीयू Mk-IV जहाज भी ऑपरेशन में हैं। लेकिन बड़े पैमाने के अभियान के लिए ये नाकाफी हैं।

इनमें से अधिकतर पुराने हैं। नए लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक आने से भारत इस क्षेत्र में चीन के मुकाबले अपनी ताकत बढ़ा सकेगा और पाकिस्तान पर भारी बढ़त बनाए रखेगा। नए लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक (LPD) बनने के बाद नौसेना को समुद्र से तट पर बड़े पैमाने पर सैनिकों, टैंकों और हेलीकॉप्टरों को ले जाने की क्षमता मिलेगी। इन जहाजों में आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम, लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइलें और ड्रोन भी होंगे।

2021 में जारी की थी आरएफआई

भारतीय नौसेना ने वर्ष 2021 में एलपीडी प्रोजेक्ट के लिए आरएफआई जारी की थी। नौसेना चाहती है कि ये युद्धपोत आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम्स से लैस हों, ताकि किसी भी हवाई खतरे से पूरी तरह सुरक्षा की जा सके। इन जहाजों में आक्रामक क्षमता भी होगी, जिनमें लॉन्ग-रेंज एंटी-शिप मिसाइल्स और ड्रोन शामिल होंगे।

नौसेना की योजना है कि ये वारशिप्स “आउट-ऑफ-एरिया कंटिन्जेंसी ऑपरेशंस” करने में सक्षम हों, यानी वे बड़े पैमाने पर सैनिकों और भारी सैन्य उपकरणों को समुद्र से तट तक पहुंचाकर ऑपरेशन चला सकें। इसके अलावा, इन एम्फीबियस वारशिप्स का उपयोग मानव सहायता और डिज़ास्टर रिलीफ ऑपरेशंस में भी किया जाएगा, ताकि प्राकृतिक आपदाओं या संकट की स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।

2004 की सुनामी और 2015 के नेपाल भूकंप जैसी आपदाओं के दौरान भारतीय नौसेना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। भविष्य में लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक जैसे जहाजों से यह क्षमता और बढ़ेगी।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन नए जहाजों से भारत को न केवल हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी, बल्कि यह पड़ोसी देशों के साथ मानवीय सहायता और आपदा प्रबंधन सहयोग में भी अहम साबित होंगे।

Navy Chief Sri Lanka Visit: भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी श्रीलंका की चार दिवसीय यात्रा पर, गाले डायलॉग 2025 में लेंगे हिस्सा

Navy Chief Sri Lanka Visit

Navy Chief Sri Lanka Visit: भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी 22 से 25 सितंबर तक श्रीलंका की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सहयोग को और गहरा करना और सुरक्षा साझेदारी को मजबूत बनाना है।

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यात्रा के दौरान एडमिरल त्रिपाठी श्रीलंका की प्रधानमंत्री हरीनी अमरसूरिया से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वे श्रीलंका के तीनों सेनाध्यक्षों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। इन चर्चाओं का फोकस मैरीटाइम सिक्योरिटी, सैन्य क्षमता में वृद्धि, प्रशिक्षण और रक्षा सहयोग के नए रास्तों की पहचान पर रहेगा।

नौसेना ने सोमवार को बताया कि इस यात्रा के दौरान होने वाली बातचीत से दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के ढांचे को और मजबूती मिलेगी। भारत और श्रीलंका समुद्र से जुड़े कई साझा मुद्दों पर पहले से मिलकर काम कर रहे हैं और यह यात्रा उस दिशा में एक अहम कदम है।

एडमिरल त्रिपाठी इस दौरान गाले डायलॉग 2025 (Galle Dialogue 2025) में भी हिस्सा लेंगे। यह एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री सम्मेलन है, जिसका आयोजन कोलंबो में किया जा रहा है। इस सम्मेलन का विषय है – बदलती परिस्थितियों में हिंद महासागर का समुद्री परिदृश्य। इसमें क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर समुद्री सुरक्षा, सहयोग और नई चुनौतियों पर चर्चा होगी।

भारतीय नौसेना और श्रीलंका नौसेना के बीच नियमित तौर पर गहरे संबंध और बातचीत होती रही है। दोनों देश सालाना डिफेंस डॉयलॉग, स्टाफ टॉक्स और अन्य ऑपरेशनल आदान-प्रदान के जरिए लगातार सहयोग कर रहे हैं। इसमें सबसे अहम है श्रीलंका-इंडिया नेवल एक्सरसाइज (SLINEX), जहां दोनों देशों की नौसेनाएं साझा अभ्यास करती हैं। इसके अलावा प्रशिक्षण, हाइड्रोग्राफी और समुद्री मानचित्रण के क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ रहा है।

इनके अलावा दोनों नौसेनाएं इंडियन ओशन नेवल सिंपोजियम, गाले डायलॉग, मिलन, गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव और कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव जैसे आयोजनों में भी सक्रिय रूप से भाग लेती हैं।

New Terror Outfit: दुनिया को धोखा देने के लिए पाकिस्तान ने कश्मीर में खड़ा किया नया आतंकी संगठन! एक दिन में बदला प्रवक्ता

Mountain Warriors of Kashmir: New Terror Outfit Emerges in Pakistan
Lashkar e Taiba LeT commander Saifullah Kasuri

New Terror Outfit: पांच महीने पहले हुए ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान की सरजमीं पर बने आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था। बावजूद इसके पाकिस्तान का कारगुजारियां अभी भी जारी हैं। एक तरफ जहां पाकिस्तान आतंकी ढाचों के पुनर्निर्माण में लगा हुआ है, तो दूसरी तरफ नए आतंकी संगठन भी बना रहा है। अब पाकिस्तान से एक नया आतंकी संगठन सामने आया है, जिसने खुद को “माउंटेन वॉरियर्स ऑफ कश्मीर” (MWK) नाम दिया है। इस नए नाम का मकसद एक बार फिर आतंक को कश्मीरियत और आजादी की आड़ में छिपाकर पेश करना है।

Relocation of terror camps: ऑपरेशन सिंदूर के बाद जैश-हिजबुल के ठिकाने पीओके से खैबर पख्तूनख्वा हुए शिफ्ट, 25 सितंबर को पेशावर में बड़ी भर्ती की तैयारी में आतंकी

New Terror Outfit: एक दिन में बदल दिया प्रवक्ता

11 सितम्बर को जारी प्रेस रिलीज में इस संगठन ने खुद को “हम माउंटेन वॉरियर्स ऑफ कश्मीर, युद्ध के मैदान में अपनी एंट्री की घोषणा करते हैं…हम अपनी जान को आजादी की लड़ाई में न्यौछावर करने की कसम खाते हैं” कहकर पेश किया। बयान पर हस्ताक्षर अहमद हनन नामक प्रवक्ता के थे। लेकिन अगले ही दिन 12 सितम्बर को जारी प्रेस रिलीज में संगठन का प्रवक्ता दानिश भट को दिखाया गया। सूत्रों का कहना है कि यह संगठन जबरदस्ती अपनी पहचान को ‘कश्मीरी मूल’ से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।

Mountain Warriors of Kashmir: New Terror Outfit Emerges in Pakistan
Destroyed Terror outfit during Operation Sindoor

New Terror Outfit: नाम बदलने की नई चाल

आतंकी संगठनों की यह पुरानी रणनीति रही है कि वे खुद को नया चेहरा देकर कश्मीर से जुड़ा बताते हैं। लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे नाम आतंकी गतिविधियों के चलते दुनियाभर में बदनाम हो चुके हैं। इसलिए अब वे नए नामों से सामने आ रहे हैं, जैसे पीपुल्स एंटी फासीस्ट फ्रंट (PAFF), द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF), कश्मीर टाइगर्स (KT) और अब माउंटेन वॉरियर्स ऑफ कश्मीर। लेकिन असलियत में ये सब पुराने संगठनों के ही मुखौटे हैं।

New Terror Outfit: पाकिस्तान की आईएसआई है पीछे

भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि नाम बदलने की यह कवायद महज एक धोखा है। एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि द रेसिस्टेंस फ्रंट भले ही एक अलग संगठन दिखाई देता हो, लेकिन असल में यह लश्कर-ए-तैयबा की ही ब्रांच है। इसके लीडरशिप, हथियारों की खरीद, ट्रेनिंग मॉड्यूल और ठिकाने सब लश्कर के ही नेटवर्क से जुड़े हैं, जिनका संचालन पाकिस्तान की आईएसआई करती है।

2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद द रेसिस्टेंस फ्रंट को जन्म दिया गया था, ताकि अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचा जा सके और यह जताया जा सके कि आतंकी गतिविधियां कश्मीरियों की स्थानीय पहल है। अब यही पैटर्न नए संगठन माउंटेन वॉरियर्स ऑफ कश्मीर यानी MWK के साथ भी अपनाया जा रहा है।

New Terror Outfit: आतंकियों को टेंपरेरी किया शिफ्ट

पाकिस्तान सरकार ने लश्कर-ए-तैयबा के पुनर्निर्माण में भी सीधा सहयोग दिया है। जानकारी के अनुसार, पाक सरकार ने 4 करोड़ पाकिस्तानी रुपये देकर लश्कर के मुख्यालय मरकज तैयबा (मुरीदके) को फिर से खड़ा करने की अनुमति दी है। यह वही मुख्यालय है, जिसे भारतीय वायुसेना ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर में तबाह कर दिया था।

अस्थायी तौर पर लश्कर के कैडर्स को मरकज अक्सा (बहावलपुर) और जुलाई से मरकज यरमौक (पटोकी, जिला कसूर) में शिफ्ट किया गया है। यहां उनकी ट्रेनिंग और ठहरने की व्यवस्था की जा रही है। इस पूरी व्यवस्था की निगरानी अब्दुल राशिद मोहसिन कर रहा है, जो लश्कर के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी का करीबी है।

New Terror Outfit: चाहिए 15 करोड़ रुपये

लश्कर-ए-तैयबा फरवरी 2026 तक, यानी कश्मीर सॉलिडैरिटी डे या योम-ए-यकजहती कश्मीर से पहले, अपने मुख्यालय का निर्माण पूरा करना चाहता है। भारतीय खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लश्कर को लगभग 15 करोड़ पाकिस्तानी रुपये की जरूरत है, लेकिन उसके पास अभी पर्याप्त धनराशि नहीं है। संगठन फिलहाल अपने आंतरिक संसाधनों और बाहरी सहयोग से फंड जुटाने की कोशिश कर रहा है। यह पुनर्निर्माण कार्य मरकज तैयबा के चीफ मौलाना अबू जार, लश्कर-ए-तैयबा का मुख्य प्रशिक्षक उस्तादुल मुजाहिद्दीन और कमांडर (ऑपरेशनल ओवरसाइट) यूनुस शाह बुखारी की निगरानी में हो रहा है।

जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान बार-बार नाम बदलकर और नए संगठन खड़े कर, आतंकी गतिविधियों को छिपाने की कोशिश करता है। लेकिन असलियत वही रहती है कि इन सबका संचालन पाकिस्तान की धरती से होता है और इन्हें सीधे आईएसआई की मदद मिलती है। एमडब्ल्यूके भी उसी सिलसिले की नई कड़ी है।