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आ रही है ब्रह्मोस की ‘बाप’, भारत की नई हाइपरसोनिक मिसाइल क्यों है चीन के एयरक्राफ्ट कैरियर के लिए बुरी खबर

India Hypersonic Missile LR-AShM

India Hypersonic Missile LR-AShM: भारत की मिसाइल ताकत अब एक नए दौर में प्रवेश करने जा रही है। जिस ब्रह्मोस मिसाइल को अब तक भारत की सबसे घातक और तेज मिसाइल माना जाता रहा है, उससे भी कहीं ज्यादा ताकतवर और तेज एक नई मिसाइल तैयार की जा रही है। यह खुलासा खुद डीआरडीओ यानी रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के चेयरमैन डॉ. समीर वी. कामत ने किया है। उन्होंने बताया कि भारत की लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (LR-AShM) का विकास तेजी से आगे बढ़ रहा है और यह भविष्य में भारतीय सेनाओं के लिए एक “गेमचेंजर” साबित होगी।

डॉ. समीर कामत ने मीडिया से बातचीत के दौरान साफ शब्दों में कहा कि यह नई हाइपरसोनिक मिसाइल मौजूदा ब्रह्मोस से कहीं ज्यादा तेज, ज्यादा दूर तक मार करने वाली और ज्यादा घातक होगी। यही वजह है कि रक्षा विशेषज्ञ इसे अनौपचारिक तौर पर “ब्रह्मोस की बाप” कहकर संबोधित कर रहे हैं। (India Hypersonic Missile LR-AShM)

India Hypersonic Missile LR-AShM: दो सफल परीक्षण, तीसरा जल्द

डीआरडीओ प्रमुख ने जानकारी दी कि इस हाइपरसोनिक मिसाइल के अब तक दो डेवलपमेंट ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं। तीसरा डेवलपमेंट ट्रायल जल्द ही किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जैसे ही ये डेवलपमेंट ट्रायल्स पूरे होंगे, इस मिसाइल को यूजर इवैल्यूएशन ट्रायल के लिए भारतीय सेनाओं को सौंप दिया जाएगा।

यूजर इवैल्यूएशन ट्रायल का मतलब होता है कि सेना खुद इस मिसाइल को अलग-अलग हालात में टेस्ट करेगी। अगर ये परीक्षण सफल रहते हैं, तो इसके बाद इस मिसाइल को आधिकारिक तौर पर भारतीय सेना या नौसेना में शामिल किया जाएगा। (India Hypersonic Missile LR-AShM)

ब्रह्मोस से कहीं ज्यादा ताकतवर

डॉ. समीर कामत ने स्पष्ट किया कि यह हाइपरसोनिक मिसाइल ब्रह्मोस से कई मामलों में आगे होगी। उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस जहां मैक 3 की रफ्तार से उड़ती है, वहीं यह नई मिसाइल मैक 5 से लेकर मैक 10 से भी ज्यादा स्पीड हासिल कर सकती है। इतनी तेज रफ्तार से उड़ने वाली मिसाइल को दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम के लिए रोक पाना बेहद मुश्किल हो जाता है।

इसके साथ ही इस मिसाइल की रेंज भी ब्रह्मोस से कहीं ज्यादा होगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी रेंज 1,500 किलोमीटर से ज्यादा हो सकती है। यानी भारत अपने समुद्री इलाकों से ही दुश्मन के एयरक्राफ्ट कैरियर और बड़े युद्धपोतों को बहुत दूर से निशाना बना सकेगा। (India Hypersonic Missile LR-AShM)

समुद्र में दुश्मन के लिए बड़ी चुनौती

यह मिसाइल खास तौर पर एंटी-शिप रोल के लिए डिजाइन की गई है। यानी इसका मुख्य लक्ष्य दुश्मन के जहाज, एयरक्राफ्ट कैरियर और नेवल टास्क फोर्स होंगे। मौजूदा दौर में समुद्री ताकत किसी भी देश की मिलिटरी पावर का अहम हिस्सा बन चुकी है।

हाइपरसोनिक मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि यह बेहद तेज रफ्तार से उड़ते हुए बीच रास्ते में अपना रास्ता बदल सकती है। इससे दुश्मन के रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम भ्रमित हो जाते हैं। यही वजह है कि अमेरिका, चीन और रूस जैसे देश हाइपरसोनिक हथियारों पर भारी निवेश कर रहे हैं। अब भारत भी इस एलीट क्लब में शामिल होने जा रहा है। (India Hypersonic Missile LR-AShM)

पूरी तरह स्वदेशी तकनीक

डीआरडीओ की यह हाइपरसोनिक मिसाइल पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। इसका विकास हैदराबाद स्थित डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम मिसाइल कॉम्प्लेक्स में किया जा रहा है। इसमें बूस्ट-ग्लाइड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें मिसाइल को पहले रॉकेट से ऊंचाई तक ले जाया जाता है और फिर वह हाइपरसोनिक स्पीड पर ग्लाइड करती हुई अपना टारगेट तक पहुंचती है।

इस तकनीक की वजह से मिसाइल की ट्रैजेक्टरी यानी उड़ान का रास्ता अनुमान लगाना बेहद कठिन हो जाता है। यही कारण है कि इसे भविष्य के युद्धों का सबसे खतरनाक हथियार माना जा रहा है। (India Hypersonic Missile LR-AShM)

लैंड अटैक और एयर लॉन्च वर्जन भी प्लान में

डीआरडीओ प्रमुख ने यह भी बताया कि फिलहाल एंटी-शिप वर्जन सबसे आगे है, लेकिन इसी मिसाइल के लैंड अटैक वर्जन पर भी काम चल रहा है। यानी भविष्य में यही मिसाइल जमीन पर मौजूद दुश्मन के ठिकानों को भी निशाना बना सकेगी।

इसके अलावा, एयर लॉन्च वर्जन पर भी योजना बनाई जा रही है। हालांकि डॉ. कामत ने साफ किया कि एयर लॉन्च वर्जन पर काम बाद में होगा। पहले जमीन से और जहाज से लॉन्च होने वाले वर्जन को पूरी तरह तैयार किया जाएगा। (India Hypersonic Missile LR-AShM)

इंडो-पैसिफिक में भारत की बढ़ेगी ताकत

रणनीतिक नजरिए से देखें तो यह मिसाइल भारत के लिए बेहद अहम है। इंडो-पैसिफिक और हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती नौसैनिक मौजूदगी भारत के लिए लंबे समय से चिंता का विषय रही है। चीन लगातार नए एयरक्राफ्ट कैरियर और अत्याधुनिक युद्धपोत तैनात कर रहा है।

ऐसे में भारत की यह हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल दुश्मन के लिए बड़ा डर साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मिसाइल के आने के बाद दुश्मन की कोई भी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भारतीय समुद्री सीमा के पास आने से पहले कई बार सोचेगी। (India Hypersonic Missile LR-AShM)

आत्मनिर्भर भारत की बड़ी छलांग

यह प्रोजेक्ट आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। अब तक भारत को हाइपरसोनिक हथियारों के मामले में विदेशी तकनीक पर निर्भर माना जाता था। लेकिन इस मिसाइल के जरिए भारत ने दिखा दिया है कि वह अत्याधुनिक और भविष्य की तकनीक खुद विकसित करने में सक्षम है।

डीआरडीओ प्रमुख ने भरोसा जताया कि यह मिसाइल भारतीय सेनाओं के आर्मरी में एक बड़ा और निर्णायक बदलाव लाएगी। उन्होंने कहा कि आने वाले सालों में भारत की सैन्य ताकत का स्वरूप पूरी तरह बदलने वाला है। (India Hypersonic Missile LR-AShM)

जल्द दिखेगा असर

अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो अगले कुछ वर्षों में यह हाइपरसोनिक मिसाइल भारतीय नौसेना और अन्य सेनाओं का हिस्सा बन सकती है। इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जिनके पास हाइपरसोनिक स्ट्राइक क्षमता है। (India Hypersonic Missile LR-AShM)

संसद में जनरल नरवणे के संस्मरण को लेकर बड़ा बवाल, राहुल गांधी के बयान पर सदन में हंगामा

General Naravane memoir controversy

General Naravane memoir controversy: लोकसभा में बजट सत्र के दौरान सोमवार, 2 फरवरी को उस वक्त बड़ा राजनीतिक हंगामा देखने को मिला, जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव यानी मोशन ऑफ थैंक्स पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के एक कथित संस्मरण से जुड़ा हवाला दिया। इस पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तथा गृह मंत्री अमित शाह ने इसे संसद की मर्यादा और नियमों के खिलाफ बताया।

यह पूरा विवाद एक मैगजीन आर्टिकल से जुड़ा है, जो जनरल नरवणे के अब तक अप्रकाशित संस्मरण पर आधारित बताया जा रहा है। इस आर्टिकल को लेकर पहले से ही राजनीतिक हलकों में चर्चा थी, लेकिन जब इसका हवाला नेताा प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसद के पटल पर दिया, तो इस पर बवाल मच गया। (General Naravane memoir controversy)

General Naravane memoir controversy: किस आर्टिकल से शुरू हुआ विवाद

1 फरवरी को एक अंग्रेजी मैगजीन में “नरवणेज मोमेंट ऑफ ट्रुथ” शीर्षक से एक लेख प्रकाशित हुआ। इस लेख में दावा किया गया कि यह पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे के अभी तक प्रकाशित न हुए संस्मरण पर आधारित है। लेख में भारत-चीन सीमा से जुड़े कुछ घटनाक्रमों, खासकर डोकलाम गतिरोध और गलवान घाटी संघर्ष का उल्लेख किया गया था।

लेख में यह लिखा गया कि 2020 में हुए गलवान संघर्ष के दौरान सीमा पर हालात को लेकर सरकार और सेना के आकलन में अंतर था और कुछ मौकों पर सरकार ने स्थिति को अलग तरीके से पेश किया। यही बातें राजनीतिक तौर पर संवेदनशील मानी गईं, क्योंकि सीमा और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे संसद में हमेशा बेहद गंभीर माने जाते हैं। (General Naravane memoir controversy)

लोकसभा में राहुल गांधी का बयान

मोशन ऑफ थैंक्स पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने अपने भाषण में इस लेख का हवाला दिया। उन्होंने सदन में मैगजीन की प्रिंटेड कॉपी दिखाते हुए कहा कि पूर्व आर्मी चीफ के संस्मरण में सीमा हालात को लेकर ऐसे तथ्य बताए गए हैं, जो सरकार के आधिकारिक दावों से मेल नहीं खाते।

राहुल गांधी ने कहा कि अगर सरकार को सच से डर नहीं है, तो उन्हें यह बातें सदन में पढ़ने दी जानी चाहिए। उन्होंने चीन सीमा से जुड़े मुद्दों, गलवान घाटी की घटना और सरकार के “एक इंच भी जमीन नहीं गई” वाले बयान पर सवाल उठाए। साथ ही उन्होंने अग्निपथ योजना को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि यह फैसला सेना पर अचानक थोपा गया। (General Naravane memoir controversy)

क्यों भड़का सत्ता पक्ष

राहुल गांधी के बयान के तुरंत बाद सत्ता पक्ष के सांसदों ने जोरदार आपत्ति जताई। उनका कहना था कि संसद में किसी ऐसी किताब या संस्मरण का हवाला नहीं दिया जा सकता, जो अभी प्रकाशित ही नहीं हुई है और जिसकी प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं हुई है।

सत्ता पक्ष का तर्क था कि अनऑथेंटिकेटेड यानी गैर-प्रमाणित स्रोतों से कोट करना संसद के नियमों के खिलाफ है। हंगामा इतना बढ़ गया कि कई सांसद अपनी सीटों से खड़े हो गए और सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया। (General Naravane memoir controversy)

स्पीकर को करना पड़ा हस्तक्षेप

हंगामे के बीच लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने राहुल गांधी से कहा कि सदन के नियमों के तहत किसी अप्रकाशित और अप्रमाणित स्रोत से उद्धरण पढ़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। स्पीकर ने बार-बार सदन को शांत करने की कोशिश की, लेकिन हंगामा कुछ देर तक चलता रहा।

आखिरकार, स्पीकर ने राहुल गांधी से अपना भाषण समेटने और अगले वक्ता को बोलने का आग्रह किया, जिसके बाद संसद 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। लेकिन जब 3 बजे जब संसद शुरू हुई तो फिर से राहुल गांधी ने उस विषय पर बोलना चाहा, जिसके बाद हंगामा बढ़ गया और स्पीकर ने संसद को चार बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। (General Naravane memoir controversy)

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा संसदीय नियमों के खिलाफ

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि नेता प्रतिपक्ष को ऐसे संस्मरण से कोट नहीं करना चाहिए, जो अभी प्रकाशित नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि यह न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर भ्रम फैलाने जैसा भी है। उन्होंने दोहराया कि सरकार ने पहले भी संसद में साफ किया है कि सीमा पर भारत की एक इंच जमीन भी नहीं गई है।

गृह मंत्री अमित शाह ने जताया कड़ा ऐतराज

गृह मंत्री अमित शाह ने भी सदन में इस मुद्दे पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने स्पीकर से अपील की कि अनपब्लिश्ड और अनवेरिफाइड सामग्री को संसद की कार्यवाही का हिस्सा न बनने दिया जाए।

बाद में गृह मंत्री ने कहा कि संसद का विशेषाधिकार राष्ट्रीय हित में जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा करता है। उनका कहना था कि सेना और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर गैर-जिम्मेदार बयान देश के खिलाफ नकारात्मक माहौल बना सकते हैं। (General Naravane memoir controversy)

अभी तक अप्रकाशित है जनरल एमएम नरवणे की किताब

दरअसल यह पूरा मामला पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की एक अप्रकाशित आत्मकथा से जुड़ा है, जिसे लेकर संसद में विवाद हुआ। जनरल एमएम नरवणे की किताब का नाम “फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी: एन ऑटोबॉयोग्राफी” है, जिसे पेंग्विन रैंडम हाउस प्रकाशित करने वाली थी, लेकिन अभी तक यह किताब बाजार में नहीं आई है।

दरअसल, नियमों के मुताबिक पूर्व सेना प्रमुखों को अपनी किताब प्रकाशित करने से पहले रक्षा मंत्रालय से मंजूरी लेनी होती है। यह मंजूरी इसलिए जरूरी होती है ताकि कोई संवेदनशील या गोपनीय जानकारी सार्वजनिक न हो। जनरल नरवणे की यह किताब भी इसी मंजूरी के इंतजार में अटकी हुई है।

इस किताब में गलवान वैली संघर्ष, डोकलाम स्टैंडऑफ, अग्निपथ स्कीम और चीन सीमा से जुड़े अनुभवों का जिक्र है। कुछ अंश पहले मीडिया में आए थे, जिनमें सरकार की नीतियों पर सवाल उठते दिखे। इन्हीं अंशों पर आधारित एक मैगजीन लेख का हवाला राहुल गांधी ने संसद में दिया, जिससे हंगामा खड़ा हो गया। (General Naravane memoir controversy)

पहली बार दिखे सूर्यास्त्र के EXTRA और प्रेडेटर हॉक रॉकेट, 300 किमी तक करते हैं मार

Indian Army Suryastra
Indian Army Reviews Indigenous Suryastra PULS Rocket Launcher, EXTRA and Predator Hawk Systems at NIBE Facility in Pune

Indian Army Suryastra: आर्मी डे परेड और रिपब्लिक डे परेड में पहली बार दिखा सूर्यास्त्र यानी पल्स (प्रिसाइज एंड यूनिवर्सल लॉन्चिंग सिस्टम) आज भारतीय सेना की लॉन्ग-रेंज और हाई-प्रिसिजन स्ट्राइक क्षमता का नया चेहरा बनता जा रहा है। इसी आधुनिक और स्वदेशी सिस्टम से जुड़े EXTRA और प्रेडेटर हॉक जैसे एडवांस्ड रॉकेट और मिसाइल मॉडल्स को हाल ही में पुणे के चाकन में पहली बार शोकेस किया गया, जहां साउदर्न कमांड के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने निबे लिमिटेड की डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का दौरा किया। हाल ही में भारतीय सेना को इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट के तहत दो पल्स यानी सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर की डिलीवरी भी की गई है। (Indian Army Suryastra)

साउदर्न कमांड के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का यह दौरा ऐसे समय पर हुआ है, जब भारतीय सेना अपनी मारक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रही है। चाकन स्थित इस फैसिलिटी में आर्मी कमांडर को उन आधुनिक तकनीकों और इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में जानकारी दी गई, जिनकी मदद से देश में ही मिशन-क्रिटिकल डिफेंस इक्विपमेंट तैयार किए जा रहे हैं। (Indian Army Suryastra)

Indian Army Suryastra: एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को किया शोकेस

दौरे के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने निबे लिमिटेड की लीडरशिप और टेक्निकल टीम के साथ विस्तृत बातचीत की। उन्हें बताया गया कि कंपनी किस तरह प्रिसिजन कटिंग, ऑटोमेटेड वेल्डिंग, वर्टिकल और सीएनसी मशीनिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रही है।

कंपनी ने यह भी समझाया कि उसकी लार्ज स्ट्रक्चरल असेंबली लाइन किस तरह बड़े और जटिल मिलिटरी स्ट्रक्चर तैयार करने में सक्षम है। इन सुविधाओं की मदद से लॉन्चर असेंबली, स्ट्रक्चरल सब-सिस्टम और अन्य हाई-एंड डिफेंस कंपोनेंट्स बनाए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल मिसाइल, रॉकेट और आर्टिलरी सिस्टम्स में होता है। (Indian Army Suryastra)

EXTRA और प्रेडेटर हॉक को पहली बार किया शोकेस

आर्मी कमांडर की इस विजिट के EXTRA और प्रेडेटर हॉक मॉडल्स का डिस्प्ले भी किया गया। ये दोनों लॉन्ग-रेंज और हाई-प्रिसिजन स्ट्राइक सिस्टम्स पहली बार इस स्तर पर सेना के वरिष्ठ नेतृत्व के सामने प्रदर्शित किए गए।

ये सिस्टम्स मल्टी-कैलिबर यूनिवर्सल लॉन्चर प्लेटफॉर्म का हिस्सा हैं, जिसे भारत में सूर्यास्त्र नाम से जाना जाता है। यह सिस्टम एक ही लॉन्चर से अलग-अलग रेंज और क्षमता वाले रॉकेट और मिसाइल फायर करने की सुविधा देता है। (Indian Army Suryastra)

EXTRA: लंबी दूरी तक सटीक हमला

EXTRA एक 306 एमएम कैलिबर का एक्सटेंडेड रेंज आर्टिलरी रॉकेट है। इसकी मारक क्षमता करीब 150 किलोमीटर तक मानी जाती है। इसमें करीब 120 किलोग्राम का वारहेड लगाया जा सकता है और इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी जबरदस्त सटीक स्ट्राइक क्षमता है। इसका सीईपी यानी सर्कुलर एरर प्रोबेबल 10 मीटर से भी कम बताया जाता है।

इसका मतलब यह है कि यह रॉकेट दुश्मन के हाई-वैल्यू टारगेट्स को बेहद सटीक तरीके से निशाना बना सकता है। एक लॉन्चर पर चार EXTRA रॉकेट्स लगाए जा सकते हैं, जिससे कम समय में कई टारगेट्स पर हमला संभव हो जाता है। (Indian Army Suryastra)

प्रेडेटर हॉक: 300 किलोमीटर तक मार

वहीं प्रेडेटर हॉक को और भी ज्यादा ताकतवर सिस्टम माना जाता है। इसका कैलिबर 370 एमएम है और इसकी रेंज करीब 300 किलोमीटर तक जाती है। यह लगभग एक टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल की तरह काम करता है, लेकिन इसे रॉकेट लॉन्चर प्लेटफॉर्म से दागा जाता है।

प्रेडेटर हॉक में करीब 140 किलोग्राम का यूनिटरी वारहेड होता है और यह मौसम से प्रभावित हुए बिना अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सक्षम है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि लॉन्च के बाद महज कुछ ही मिनटों में यह दुश्मन के कमांड सेंटर, एयरफील्ड या अन्य अहम ठिकानों को निशाना बना सकता है। (Indian Army Suryastra)

टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के तहत देश में बनेंगे

EXTRA और प्रेडेटर हॉक मूल रूप से इजराइल की कंपनी एल्बिट सिस्टम्स के सिस्टम्स हैं, लेकिन निबे लिमिटेड ने टेक्नोलॉजी कोलैबोरेशन के तहत इन्हें भारत में मैन्युफैक्चर और इंटीग्रेट करने की क्षमता विकसित की है।

इस मॉडल के तहत लॉन्चर, स्ट्रक्चर और कई अहम कंपोनेंट्स भारत में बनाए जा रहे हैं, जबकि एडवांस्ड फायर कंट्रोल और गाइडेंस सिस्टम्स का इंटीग्रेशन किया जा रहा है। इससे न केवल विदेशी निर्भरता कम हुई है, बल्कि देश में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को भी मजबूती मिलेगी। (Indian Army Suryastra)

आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 की दिशा में कदम

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने इस दौरे के दौरान कहा कि भारतीय सेना और निजी रक्षा उद्योग के बीच इस तरह की साझेदारी भविष्य की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज की जियो-पॉलिटिकल स्थिति में देश को ऐसी क्षमताओं की जरूरत है, जो तेजी से विकसित हों और संकट के समय विदेशों पर निर्भर न रहें। उन्होंने यह भी कहा कि आत्मनिर्भर भारत सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक रणनीतिक जरूरत बन चुका है। (Indian Army Suryastra)

पाकिस्तान-बांग्लादेश सीधी फ्लाइट शुरू होने से आतंकियों को मिल रहा सुरक्षित रास्ता, ढाका पहुंचे लश्कर के कई खूंखार आतंकी

Karachi Dhaka flight Lashkar-e-Taiba
Photo: Sahidul Hasan Khokon/X

Karachi Dhaka flight Lashkar-e-Taiba: पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच सीधी फ्लाइट क्या शरू हुई कि आतंकियों को ढाका तक पहुंचने का सीधा और सुरक्षित रास्ता मिल गया है। हाल ही में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान से बांग्लादेश आने वाली एक कमर्शियल फ्लाइट के जरिए कुख्यात आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा से जुड़े कुछ आतंकवादी ढाका पहुंचे हैं। यह उड़ान कराची–ढाका रूट पर 14 साल बाद दोबारा शुरू हुई है और इसे दोनों देशों के बीच रिश्तों में “नया भरोसा” बताया जा रहा है। (Karachi Dhaka flight Lashkar-e-Taiba)

Karachi Dhaka flight Lashkar-e-Taiba: कराची–ढाका फ्लाइट बीजी-342 से पहुंचे आतंकी

30 जनवरी को बिमान बांग्लादेश एयरलांइस की फ्लाइट बीजी-342 कराची के जिन्ना इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरकर ढाका के हजरत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुबह करीब 4 बजकर 20 मिनट पर उतरी। फ्लाइट में कुल 113 यात्री सवार थे। सूत्रों का दावा है कि इस फ्लाइट में कुछ ऐसे यात्री भी थे, जिनके संबंध लश्कर-ए-तैयबा से था। इस फ्लाइट में लगभग 28 ऐसे यात्री थे, जिनके संबंध लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों से हैं। सूत्र ने आगे बताया कि इन लश्कर आतंकवादियों में से कम से कम चार तेज शूटर हैं। इनमें से एक आतंकी शाह मुकामिल है, जिसका पासपोर्ट नंबर: DK-5144924 है, यह आतंकी लश्कर ए तैबया यूनिट का रिंगलीडर है। इसके अलावा नबी मुहताज (पासपोर्ट नंबर AP-9099953), अनवर सज्जाद (पासपोर्ट नंबर KH-1798374), मनूर घाली, खान खानावाज, कलाम नूर, इब्राहिम, रसूल मोहम्मद, खान मुकरब, सफिर उल्लाह और जान सालेह भी इसी फ्लाइट से बांग्लादेश पहुंचे हैं। (Karachi Dhaka flight Lashkar-e-Taiba)

पासपोर्ट और ट्रैवल पैटर्न से गहराया शक

जिन यात्रियों पर शक जताया गया है, उनके ट्रैवल पैटर्न, पाकिस्तान से बार-बार आवाजाही और यात्रा के समय को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि आतंकी संगठन अक्सर नए या दोबारा खुले ट्रैवल रूट्स का इस्तेमाल करते हैं, ताकि शुरुआती दौर में सुरक्षा जांच की कमजोरियों को परखा जा सके। यही वजह है कि 14 साल बाद शुरू हुई इस फ्लाइट को लेकर अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत बताई जा रही थी। (Karachi Dhaka flight Lashkar-e-Taiba)

तबलीगी जमात की आड़ का दावा

इन संदिग्ध यात्रियों में से कुछ लोगों ने खुद को तबलीगी जमात से जुड़ा बताकर यात्रा की थी और ढाका पहुंचने के बाद वे अलग-अलग मस्जिदों और धार्मिक ठिकानों में चले गए। सूत्रों का कहना है कि इससे पहले भी आतंकी नेटवर्क धार्मिक यात्राओं और जमातों की आड़ में मूवमेंट करते रहे हैं। हालांकि, इसे लेकर बांग्लादेशी एजेंसियों की तरफ से कोई औपचारिक बयान नहीं आया है। (Karachi Dhaka flight Lashkar-e-Taiba)

‘स्ट्रैंडेड पाकिस्तानियों’ का एंगल

इस पूरे मामले में एक और एंगल भी देखा जा रहा है। इसी रूट के शुरू होने के दौरान बांग्लादेश से कुछ ‘स्ट्रैंडेड पाकिस्तानी’ (बांग्लादेश में फंसे पाकिस्तानी मूल के लोग) पाकिस्तान भेजे गए थे। जहां पाकिस्तान पहुंचने के बाद उन्हें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के अधिकारियों ने रिसीव किया। उन्हें पाकिस्तान में आईईडी, सुसाइड अटैक और कोवर्ट ऑपरेशंस की ट्रेनिंग दी गई। जिसका उद्देश्य बांग्लादेश में आतंकवाद को बढ़ावा देना और भारत के खिलाफ हमले की योजना बनाना हो सकता है। (Karachi Dhaka flight Lashkar-e-Taiba)

‘ढाका सेल’ हुई एक्टिव

इन आरोपों के केंद्र में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस यानी आईएसआई का नाम भी आ रहा है। बांग्लादेश के भीतर आईएसआई से जुड़ा एक नेटवर्क, जिसे ‘ढाका सेल’ कहा जा रहा है, वह भी सक्रिय हो गया है। यह सेल एक स्पेशल यूनिट है जो पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस ने ढाका में तैयार की है।

खुफिया सूत्रों ने बताया कि पिछले साल नवंबर में आईएसआई ने ढाका में पाकिस्तान हाई कमीशन के अंदर यह खास सेल बनाई थी। यह सेल जनरल साहिर शमशाद मिर्जा (पाकिस्तान के चेयरमैन जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमिटी) की ढाका यात्रा के बाद बनाई गई थी। इस सेल को एक ब्रिगेडियर हेड कर रहा है, इसमें एक कर्नल, कई मेजर, और पाकिस्तान आर्मी, नेवी, एयर फोर्स के अधिकारी शामिल हैं। ये लोग फेक आईडेंटिटी या डिप्लोमैटिक कवर से ढाका आए हैं। हर महीने इस सेल पर करीब 20 करोड़ टका (बांग्लादेशी मुद्रा) खर्च होते है, और यह रकम जो ड्रग्स, तस्करी और काउंटरफिट इंडियन करेंसी से आती है।

बताया जाता है कि ढाका सेल ने ही इन आतंकियों के डॉक्यूमेंट्स तैयार कराए, और सुरक्षित यात्रा के अलावा शुरुआती वैरिफिकेशन और लॉजिस्टिक सपोर्ट में अहम भूमिका निभाई। (Karachi Dhaka flight Lashkar-e-Taiba)

भारत के लिए बढ़ी चिंता

वहीं आतंकियों का इस तरह सुरक्षित तरीके से ढाका तक पहुंचना भारत के लिए चिंता की बात है। अगर बांग्लादेश की जमीन का इस्तेमाल किसी भी तरह से भारत विरोधी साजिशों के लिए होता है, तो इससे पूर्वी सीमा पर नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। हालांकि भारतीय एजेंसियां बांग्लादेश सीमा पर पहले से ही हाई अलर्ट पर हैं, लेकिन कुछ इलाके अब भी संवेदनशील बने हुए हैं। (Karachi Dhaka flight Lashkar-e-Taiba)

बांग्लादेश के सामने दोहरी चुनौती

बांग्लादेश के लिए यह मामला बेहद नाजुक है। एक तरफ उसे अपनी आंतरिक सुरक्षा और इमेज को लेकर सख्त कदम उठाने होंगे, वहीं दूसरी तरफ भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह भरोसा भी देना होगा कि उसकी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकी साजिश के लिए नहीं होने दिया जाएगा।

विश्लेषकों का कहना है कि अगर इन आरोपों की अनदेखी की गई, तो बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय दबाव, डिप्लोमैटिक सवालों और यहां तक कि सुरक्षा सहयोग में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। (Karachi Dhaka flight Lashkar-e-Taiba)

रक्षा मंत्री बोले- ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाई भारत की समुद्री ताकत, इंडियन कोस्ट गार्ड बनी फ्रंटलाइन फोर्स

Operation Sindoor Indian Coast Guard

Operation Sindoor Indian Coast Guard: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की समुद्री सुरक्षा में इंडियन कोस्ट गार्ड की भूमिका कितनी अहम है, यह ऑपरेशन सिंदूर के दौरान साफ तौर पर देखने को मिला। इंडियन कोस्ट गार्ड के 50वें स्थापना दिवस के मौके पर रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की मल्टी-लेयर्ड मैरीटाइम सिक्योरिटी सिस्टम में तीनों सेनाओं के बीच बेहतरीन तालमेल को दिखाया और यह भी साबित किया कि इंडियन कोस्ट गार्ड देश की समुद्री सीमाओं पर एक मजबूत फ्रंटलाइन फोर्स है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ऐसे समय में अंजाम दिया गया, जब समुद्री क्षेत्र में संवेदनशीलता काफी ज्यादा थी। इसके बावजूद इंडियन कोस्ट गार्ड ने तेजी और मजबूती के साथ हालात को संभाला। पश्चिमी तट पर पहले से रणनीतिक संसाधन तैनात किए गए, निगरानी बढ़ाई गई और तटीय इलाकों व खाड़ी क्षेत्रों में हाई अलर्ट बनाए रखा गया। उन्होंने कहा कि इंडियन कोस्ट गार्ड भारत की समुद्री सीमाओं पर भरोसे की एक मजबूत दीवार की तरह खड़ा है। (Operation Sindoor Indian Coast Guard)

Operation Sindoor Indian Coast Guard: राष्ट्रीय सुरक्षा का मजबूत स्तंभ है आईसीजी

राजनाथ सिंह ने इंडियन कोस्ट गार्ड को राष्ट्रीय सुरक्षा के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद, हथियारों और मानव तस्करी को रोकने से लेकर समुद्र में होने वाली अवैध गतिविधियों पर नजर रखने तक, आईसीजी हर मोर्चे पर सतर्क रहती है। आज के दौर में जब वैश्विक अस्थिरता और समुद्री खतरे बढ़ रहे हैं, तब कोस्ट गार्ड की जिम्मेदारियां और भी बढ़ गई हैं।

उन्होंने बताया कि ड्रग तस्करी, समुद्री डकैती, अवैध व्यापार और समुद्री प्रदूषण जैसी चुनौतियों से निपटने में इंडियन कोस्ट गार्ड की भूमिका निर्णायक रही है। अपने गठन से अब तक आईसीजी ने समुद्र में 11,800 से ज्यादा लोगों की जान बचाई है, जो इसके साहस, कौशल और कर्तव्यनिष्ठा को दिखाता है। (Operation Sindoor Indian Coast Guard)

आपदा में भी सबसे पहले पहुंचती है आईसीजी

रक्षा मंत्री ने कहा कि चाहे चक्रवात हों, समुद्री हादसे हों या फिर मानवीय सहायता से जुड़े मिशन जैसे ऑपरेशन सागर बंधु, इंडियन कोस्ट गार्ड ने हमेशा तेज प्रतिक्रिया, संवेदनशीलता और प्रोफेशनल रवैया दिखाया है। आपदा प्रबंधन में फर्स्ट रिस्पॉन्डर के रूप में आईसीजी की भूमिका और मल्टी-एजेंसी कोऑर्डिनेशन, देश की सुरक्षा को और मजबूत करता है।

आधुनिक और ताकतवर फोर्स बन चुकी है इंडियन कोस्ट गार्ड

राजनाथ सिंह ने कहा कि आज इंडियन कोस्ट गार्ड एक विशाल, आधुनिक और शक्तिशाली फोर्स बन चुकी है। इसके पास एडवांस्ड जहाज, हेलीकॉप्टर, आधुनिक एयरक्राफ्ट और नई तकनीकें मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि आईसीजी की वजह से ही भारत अपने मैरीटाइम इंटरेस्ट्स को लेकर आत्मविश्वास के साथ बात करता है और ब्लू इकोनॉमी, मैरीटाइम सिक्योरिटी और कोस्टल डेवलपमेंट के लिए साफ रणनीति बना पाता है।

उन्होंने कहा कि पूरा देश इंडियन कोस्ट गार्ड पर गर्व करता है। (Operation Sindoor Indian Coast Guard)

अगले 25 सालों का रोडमैप बनाने का आह्वान

रक्षा मंत्री ने इंडियन कोस्ट गार्ड से अपील की कि वह अगले 25 सालों के लिए एक स्पष्ट, लक्ष्य आधारित और दूरदर्शी रोडमैप तैयार करे। उन्होंने कहा कि यह रोडमैप सिर्फ मैनपावर प्लानिंग और क्षमताओं के विकास तक सीमित न हो, बल्कि यह भी तय करे कि 2047 में इंडियन कोस्ट गार्ड खुद को किस रूप में देखती है।

उन्होंने संगठनात्मक और संरचनात्मक सुधारों पर भी जोर दिया, ताकि आईसीजी और ज्यादा चुस्त, तेज और भविष्य के लिए तैयार बन सके। उनका कहना था कि अगर आज आत्ममंथन और सुधार की प्रक्रिया शुरू होती है, तो आजादी के 100 साल पूरे होने पर इंडियन कोस्ट गार्ड न सिर्फ समुद्री सुरक्षा की मजबूत प्रहरी होगी, बल्कि विकसित भारत की समुद्री ताकत का चमकता प्रतीक भी बनेगी। (Operation Sindoor Indian Coast Guard)

रक्षा मंत्रालय का है पूरा समर्थन

राजनाथ सिंह ने दोहराया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी और इंडियन कोस्ट गार्ड को हर स्तर पर रक्षा मंत्रालय का पूरा समर्थन मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकताओं में आईसीजी को तकनीकी रूप से सशक्त बनाना, उसकी ऑपरेशनल क्षमताओं को बढ़ाना और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना शामिल है।

उन्होंने साफ कहा कि जब इंडियन कोस्ट गार्ड मजबूत होगी, तभी भारत की समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी। और जब समुद्री सीमाएं सुरक्षित होंगी, तब भारत क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी ज्यादा आत्मविश्वास के साथ अपनी भूमिका निभा सकेगा। (Operation Sindoor Indian Coast Guard)

Operation Sindoor Indian Coast Guard

स्वर्ण जयंती का लोगो किया जारी

इस मौके पर रक्षा मंत्री ने इंडियन कोस्ट गार्ड की स्वर्ण जयंती का लोगो जारी किया, जो 50 साल की सतर्कता, समुद्री सुरक्षा और मानवीय सेवा का प्रतीक है। उन्होंने 50 सालों की यात्रा को समर्पित एक स्मारक डाक टिकट भी जारी किया। एक विशेष फिल्म के जरिए आईसीजी के विकास, ऑपरेशनल एक्सीलेंस और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति उसके समर्पण को दिखाया गया।

समारोह के तहत नेशनल वॉर मेमोरियल में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि भी दी गई। एक मिनट का मौन रखकर देश ने उन वीरों को नमन किया, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया। (Operation Sindoor Indian Coast Guard)

नई दिल्ली में इंडियन नेवी हाफ मैराथन का भव्य आयोजन, इंडिया गेट से कर्तव्य पथ तक दौड़े हजारों लोग

Indian Navy Half Marathon 2026
CNS and COAS

Indian Navy Half Marathon 2026: भारतीय नौसेना ने रविवार को इंडियन नेवी हाफ मैराथन का दूसरा संस्करण राजधानी नई दिल्ली में सफलतापूर्वक आयोजित किया। इस आयोजन में देश-विदेश से आए हजारों लोगों ने हिस्सा लिया और फिटनेस, अनुशासन और राष्ट्रीय गौरव का संदेश दिया। मैराथन को तीन कैटेगरी में आयोजित किया गया था- 21.1 किलोमीटर (हाफ मैराथन), 10 किलोमीटर और 5 किलोमीटर ताकि हर उम्र और हर स्तर के रनर्स इसमें शामिल हो सकें।

मुख्य हाफ मैराथन रेस को चीफ ऑफ नेवल स्टाफ ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ भी मौजूद रहे। वहीं 10 किलोमीटर की दौड़ की शुरुआत युवा कार्य और खेल मंत्री मनसुख एल. मांडविया ने की। कार्यक्रम में मशहूर खिलाड़ी साइना नेहवाल और पीआर श्रीजेश की मौजूदगी ने खिलाड़ियों का उत्साह और बढ़ा दिया। आयोजन में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक समेत कई सहयोगी संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

मैराथन का आयोजन जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम से हुआ और दौड़ का रूट इंडिया गेट तथा ऐतिहासिक कर्तव्य पथ से होकर गुजरा। इसके अलावा पूर्व सैनिकों और सीनियर सिटीजंस के लिए एक विशेष रन और वॉक का भी आयोजन किया गया, जिसे खूब सराहना मिली।

इस आयोजन का मकसद लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना और युवाओं में भारतीय नौसेना के प्रति आकर्षण बढ़ाना था। दिल्ली पुलिस, दिल्ली मेट्रो और एनडीएमसी के सहयोग से आयोजन पूरी तरह सुरक्षित और व्यवस्थित रहा। 24 देशों से आए अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों ने भी इस मैराथन को खास बना दिया।

21.1 किलोमीटर हाफ मैराथन में पुरुष वर्ग में दिनेश और महिला वर्ग में रीमा पटेल विजेता रहीं। 10 किलोमीटर दौड़ में पुरुष वर्ग में आदित्य त्यागी और महिला वर्ग में रामिनी पटेल ने पहला स्थान हासिल किया। 5 किलोमीटर दौड़ में पुरुष वर्ग में चंदरपाल मैया और महिला वर्ग में अंजलि ने जीत दर्ज की।

कुल मिलाकर, इंडियन नेवी हाफ मैराथन का यह दूसरा संस्करण फिटनेस, जोश और देशभक्ति से भरा एक यादगार आयोजन साबित हुआ।

10 पॉइंट्स में समझिए Defence Budget 2026-27, क्यों कहा जा रहा है इतिहास का सबसे बड़ा रक्षा बजट

Defence Budget 2026-27 Explained

Defence Budget 2026-27: ऑपरेशन सिंदूर के बाद पेश किए गए यूनियन बजट 2026-27 में रक्षा मंत्रालय को 7.85 लाख करोड़ रुपये का ऐतिहासिक आवंटन मिला है। यह पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के मुकाबले करीब 15.19 फीसदी ज्यादा है। वहीं, रक्षा बजट केंद्र सरकार के खर्च का 14.67 फीसदी है और यह सभी मंत्रालयों में सबसे ज्यादा है। खास बात यह है कि इस बजट में सिर्फ खर्च बढ़ाने पर नहीं, बल्कि आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भरता, बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर, रिसर्च और सैनिकों व पूर्व सैनिकों के कल्याण पर भी बड़ा जोर दिया गया है। आइए 10 पॉइंट्स में समझते हैं कि इस डिफेंस बजट में क्या खास है…

Defence Budget 2026-27 

1. अब तक का सबसे बड़ा रक्षा बजट: 7.85 लाख करोड़ रुपये

डिफेंस बजट 2026-27 में रक्षा मंत्रालय को 7.85 लाख करोड़ रुपये दिए गए हैं। यह न सिर्फ पिछले साल से ज्यादा है, बल्कि सभी मंत्रालयों में सबसे बड़ा आवंटन भी है। यह बजट अनुमानित जीडीपी का करीब 2 फीसदी है और कुल केंद्रीय बजट का लगभग 14.7 प्रतिशत हिस्सा रक्षा के लिए रखा गया है। सरकार का साफ मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात, सीमा पर चुनौतियां और आधुनिक युद्ध की जरूरतों को देखते हुए यह बढ़ोतरी जरूरी थी। (Defence Budget 2026-27)

2. कैपिटल बजट में रिकॉर्ड उछाल: आधुनिकीकरण पर फोकस

इस बजट की सबसे बड़ी ताकत है कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी पूंजीगत खर्च। वित्त वर्ष 2026-27 में कैपिटल हेड के तहत 2.19 लाख करोड़ रुपये दिए गए हैं, जो पिछले साल के 1.80 लाख करोड़ रुपये से करीब 21.84 फीसदी ज्यादा हैं। इसका मतलब साफ है – अब पैसा सिर्फ सैलरी या मेंटेनेंस पर नहीं, बल्कि नए हथियार, प्लेटफॉर्म और टेक्नोलॉजी पर ज्यादा खर्च होगा। (Defence Budget 2026-27)

3. मॉडर्नाइजेशन बजट में 24% की छलांग

कैपिटल बजट के भीतर जो हिस्सा सीधे तौर पर मॉडर्नाइजेशन के लिए होता है, उसे कैपिटल एक्विजिशन बजट कहा जाता है। वित्त वर्ष 2025-26 में यह बजट करीब 1.48 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 1.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है। जो वित्त वर्ष 2025-26 के कैपिटल एक्विजिशन बजट से लगभग 24 फीसदी ज्यादा है। मौजूदा वैश्विक हालात में, आधुनिकीकरण बजट में इतनी बड़ी बढ़ोतरी एक रणनीतिक जरूरत है।

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, तीसरी तिमाही तक यानी दिसंबर 2025 तक, रक्षा मंत्रालय ने 2.10 लाख करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट पूरे किए हैं और अब तक 3.50 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा के लिए ‘एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी’ मंजूरी दी है। कैपिटल एक्विजिशन के तहत आने वाले प्रोजेक्ट्स से सेनाओं को अगली पीढ़ी के फाइटर एयरक्राफ्ट, स्मार्ट और घातक हथियार, जहाज/पनडुब्बी, मानवरहित हवाई वाहन, ड्रोन, स्पेशलिस्ट वाहन आदि मिलेंगे। (Defence Budget 2026-27)

4. ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी तैयारी

ऑपरेशन सिंदूर के बाद सामने आई जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस बजट में इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट के लिए भी पर्याप्त जगह बनाई गई है। चाहे गोला-बारूद हो, हथियार हों या जरूरी उपकरण, सरकार ने साफ कर दिया है कि सेनाओं की तैयारी में किसी तरह की कमी नहीं छोड़ी जाएगी। कैपिटल और रेवेन्यू, दोनों हेड्स में बढ़ा हुआ बजट इसी सोच को दिखाता है। (Defence Budget 2026-27)

5. आत्मनिर्भर भारत पर बड़ा दांव: 1.39 लाख करोड़ स्वदेशी उद्योगों के लिए

इस बजट का एक और मजबूत पहलू है आत्मनिर्भर भारत। कैपिटल एक्विजिशन बजट का 75 फीसदी, यानी करीब 1.39 लाख करोड़ रुपये, घरेलू उद्योगों से खरीद के लिए तय किया गया है। इसमें सरकारी डिफेंस कंपनियों के साथ-साथ प्राइवेट सेक्टर को भी बड़ी भूमिका मिलेगी। इससे न सिर्फ विदेशी निर्भरता घटेगी, बल्कि देश में रोजगार, स्टार्टअप्स और सप्लाई चेन को भी मजबूती मिलेगी। (Defence Budget 2026-27)

6. ऑपरेशनल रेडीनेस के लिए ज्यादा पैसा

डिफेंस बजट में रेवेन्यू एक्सपेंडिचर के तहत करीब 3.65 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस पैसे से सैनिकों की सैलरी, अलाउंस, ईंधन, राशन, स्पेयर पार्ट्स और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी होंगी। सरकार ने यह भी साफ किया है कि बॉर्डर पर अतिरिक्त तैनाती, ज्यादा फ्लाइंग आवर्स और लंबे नेवल डिप्लॉयमेंट को ध्यान में रखकर यह आवंटन किया गया है। (Defence Budget 2026-27)

7. बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती

सीमाओं पर सड़क, सुरंग और पुल जितने मजबूत होंगे, उतनी ही मजबूत सेना होगी। इसी सोच के तहत बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) के लिए कैपिटल हेड में 7,394 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में टनल्स, ब्रिज और एयरफील्ड्स बनेंगे। साथ ही, इससे सीमावर्ती इलाकों में पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। (Defence Budget 2026-27)

8. पूर्व सैनिकों के लिए हेल्थकेयर पर खास ध्यान

सरकार ने साफ किया है कि देश की सेवा करने वाले सैनिकों और उनके परिवारों की जिम्मेदारी भी उतनी ही अहम है। इसीलिए एक्स-सर्विसमेन कॉन्ट्रिब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ईसीएचएस) के लिए 12,100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह पिछले साल की तुलना में करीब 45 फीसदी ज्यादा है। पिछले पांच सालों में ईसीएचएस का बजट तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ चुका है, जो पूर्व सैनिकों के कल्याण को लेकर सरकार की गंभीरता दिखाता है। (Defence Budget 2026-27)

9. रिसर्च और डेवलपमेंट को नई ताकत

आधुनिक युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और इनोवेशन से जीता जाता है। इसीलिए डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) को इस साल 29,100 करोड़ रुपये मिले हैं। इसमें से करीब 17,250 करोड़ रुपये कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए हैं, जिससे नई मिसाइल्स, एडवांस्ड सिस्टम्स और डीप टेक्नोलॉजी पर काम तेज होगा। (Defence Budget 2026-27)

10. पेंशन और सुरक्षा-विकास-आत्मनिर्भरता का संतुलन

डिफेंस पेंशन के लिए इस बजट में 1.71 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह पैसा करीब 34 लाख पेंशनर्स को समय पर पेंशन देने के लिए इस्तेमाल होगा। रक्षा मंत्री ने साफ कहा है कि यह बजट सिक्योरिटी, डेवलपमेंट और सेल्फ-रिलायंस के बीच संतुलन बनाता है और देश के हित में है। (Defence Budget 2026-27)

Defence Budget 2026: 7.85 लाख करोड़ का डिफेंस बजट: रक्षा मंत्री और डिफेंस सचिव दोनों ने बताया क्यों है यह जरूरी

Defence Budget 2026
Union Budget 2026: Defence Allocation Jumps 20% to Rs 7.84 Lakh Crore, Major Push for Armed Forces Modernisation

Defence Budget 2026: देश और दुनिया में बदलते सुरक्षा हालात के बीच केंद्र सरकार ने यूनियन बजट 2026 में डिफेंस सेक्टर को बड़ी राहत दी है। इस बार रक्षा मंत्रालय को 7.85 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 14.68 फीसदी ज्यादा है। यह पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के 6.81 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले अब तक की सबसे बड़ी छलांग मानी जा रही है।

सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब सीमा पर हालात संवेदनशील बने हुए हैं और आधुनिक युद्ध में लगातार बदलाव हो रहे हैं। ड्रोन, साइबर हमले, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और हाई-टेक हथियारों के दौर में भारत अपनी सेनाओं को तकनीकी रूप से और ज्यादा सक्षम बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। (Defence Budget 2026)

Defence Budget 2026: राजनाथ सिंह बोले – यह बजट सुरक्षा और विकास की मजबूत नींव

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बजट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह बजट देशवासियों की उम्मीदों पर खरा उतरने वाला है और विकसित भारत @2047 के संकल्प को मजबूत आधार देता है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि इस बजट में समाज के हर वर्ग के विकास की विस्तृत योजना बनाई गई है। उन्होंने खास तौर पर इस बात पर जोर दिया कि 7.85 लाख करोड़ रुपये का रक्षा आवंटन देश की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की ऐतिहासिक सफलता के बाद यह बजट भारत की सुरक्षा प्रणाली को और सशक्त बनाने के संकल्प को मजबूत करता है। (Defence Budget 2026)

आधुनिकीकरण पर सबसे ज्यादा जोर

रक्षा मंत्री ने बताया कि इस बार बजट का सबसे अहम हिस्सा तीनों सेनाओं के आधुनिकीकरण से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि सेनाओं के लिए कुल 2.19 लाख करोड़ रुपये का कैपिटल एक्सपेंडिचर रखा गया है। इसमें से करीब 1.85 लाख करोड़ रुपये सीधे आधुनिकीकरण के लिए हैं, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 24 फीसदी ज्यादा है।

इस फंड से नई टेक्नोलॉजी, आधुनिक हथियार, बेहतर प्लेटफॉर्म और भविष्य की जरूरतों के मुताबिक सिस्टम्स खरीदे जाएंगे। इससे सेना की ऑपरेशनल क्षमता और युद्ध की तैयारी दोनों को मजबूती मिलेगी। (Defence Budget 2026)

पूर्व सैनिकों के कल्याण पर भी ध्यान

राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि इस बजट में पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण को भी प्राथमिकता दी गई है। एक्स-सर्विसमेन कॉन्ट्रिब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ईसीएचएस) के तहत इस साल करीब 12,100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो मौजूदा साल के मुकाबले लगभग 45 फीसदी ज्यादा है। इससे पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।

सरकार का यह कदम साफ संकेत देता है कि मौजूदा वैश्विक अस्थिरता, सीमा पर तनाव और नई तरह की चुनौतियों को देखते हुए भारत अपनी सैन्य ताकत को और मजबूत करना चाहता है। (Defence Budget 2026)

रक्षा सचिव ने बताया क्यों जरूरी थी बढ़ोतरी

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने बजट को लेकर संतोष जताया है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री द्वारा घोषित बजटीय प्रावधानों से रक्षा मंत्रालय काफी संतुष्ट है। उन्होंने बताया कि कुल मिलाकर रक्षा मंत्रालय का बजट करीब 7.85 लाख करोड़ रुपये का होगा, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 15 फीसदी ज्यादा है। सबसे अहम बात यह है कि कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स), यानी हथियारों और आधुनिक तकनीक पर होने वाला खर्च, इसमें करीब 21 फीसदी बढ़ाया गया है, जो बढ़ कर 2.9 लाख करोड़ रुपये हो गया है। (Defence Budget 2026)

सेना की वास्तविक जरूरतों पर होगा खर्च

रक्षा सचिव के मुताबिक, इस बजट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आधुनिकीकरण से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि अब बजट सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे आधुनिक हथियारों, नई तकनीक और सेना की वास्तविक जरूरतों पर खर्च किया जाएगा। उनका कहना है कि इससे थलसेना, वायुसेना और नौसेना की क्षमताओं में तेजी से सुधार किया जा सकेगा। (Defence Budget 2026)

यूनियन बजट में सबसे बड़ा हिस्सा रक्षा का

इस बार यूनियन बजट में रक्षा मंत्रालय को सबसे ज्यादा हिस्सा मिला है। कुल बजट का करीब 14.68 फीसदी सिर्फ रक्षा क्षेत्र के लिए रखा गया है। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह आवंटन देश की सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करेगा, इनोवेशन को बढ़ावा देगा और राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत आधार देगा।

रक्षा सचिव आरके सिंह ने यह भी बताया कि रक्षा मंत्रालय ने 20 फीसदी की बढ़ोतरी की मांग इसलिए की थी क्योंकि अब मंत्रालय में बजट खर्च करने की क्षमता बेहतर हुई है और रणनीतिक चुनौतियां भी बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय ने इन तथ्यों को समझते हुए रक्षा मंत्रालय की मांग को मंजूरी दी है। (Defence Budget 2026)

बजट में क्या है पूरा गणित

डिफेंस बजट में कुल कैपिटल एक्सपेंडिचर करीब 2.31 लाख करोड़ रुपये रखा गया है, जबकि रेवेन्यू एक्सपेंडिचर यानी सैलरी, मेंटेनेंस और अन्य खर्चों के लिए 5.54 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान है। कुल केंद्रीय बजट में रक्षा मंत्रालय का हिस्सा करीब 14.68 फीसदी है, जो सभी मंत्रालयों में सबसे ज्यादा है।

रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि यह आवंटन सैन्य तैयारियों को मजबूत करने, इनोवेशन को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती देने में मदद करेगा। (Defence Budget 2026)

एमआरओ सेक्टर को राहत, लेकिन बाजार रहा निराश

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण में किसी खास रक्षा परियोजना का नाम नहीं लिया गया, जिससे सुबह के सत्र में भारतीय रक्षा कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। हालांकि उन्होंने सिविल और डिफेंस एयरक्राफ्ट के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कंपोनेंट्स और पार्ट्स पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी से छूट का प्रस्ताव रखा।

इसका मकसद देश में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (एमआरओ) इंडस्ट्री को बढ़ावा देना है। सरकार भारत को एक ग्लोबल एमआरओ हब के तौर पर विकसित करना चाहती है। पहले ही एमआरओ सेवाओं पर जीएसटी को 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी किया जा चुका है, जिससे इस सेक्टर को बड़ी राहत मिली है।

पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा मंत्रालय के लिए 1.80 लाख करोड़ रुपये का कैपिटल आउटले रखा गया था, जिसे संशोधित अनुमान में बढ़ाकर 1.86 लाख करोड़ रुपये किया गया। अब 2026-27 में इसमें और बड़ी छलांग लगाई गई है। इससे साफ है कि सरकार अब सिर्फ मौजूदा जरूरतों पर नहीं, बल्कि भविष्य की जंग के लिए भी तैयारी कर रही है। (Defence Budget 2026)

इतना बड़ा रक्षा बजट, फिर भी धड़ाम डिफेंस स्टॉक्स! जानिए डिफेंस बजट 2026 का पूरा सच

Defence Budget 2026
Union Budget 2026: Record Defence Allocation of Rs 7.8 Lakh Crore, Yet Defence Stocks Decline

Defence Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में यूनियन बजट 2026-27 पेश करते हुए रक्षा मंत्रालय को अब तक का सबसे बड़ा बजट दिया है। इस बार डिफेंस सेक्टर के लिए 7.8 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 6.81 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 15 फीसदी ज्यादा है। इसके साथ ही भारतीय सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये अलग से रखे गए हैं।

सरकार ने इस बजट को “विकसित भारत @2047” और “आत्मनिर्भर भारत” के विजन से जोड़ते हुए तैयार किया है। सीमा पर हालात, चीन और पाकिस्तान से जुड़ी चुनौतियां, साइबर और ड्रोन जैसे नए खतरे – इन सबको ध्यान में रखते हुए रक्षा बजट में बढ़ोतरी की गई है। (Defence Budget 2026)

लेकिन हैरानी की बात यह रही कि इतने बड़े आवंटन के बावजूद शेयर बाजार में डिफेंस सेक्टर से जुड़े स्टॉक्स में गिरावट देखने को मिली। बजट के दिन ही बीईएल, एचएएल, जीआरएसई, कोचिन शिपयार्ड, मझगांव डॉक, बीईएमएल और भारत फोर्ज जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर लाल निशान में चले गए। (Defence Budget 2026)

Defence Budget 2026: रक्षा बजट में क्या-क्या खास रहा

इस बार रक्षा मंत्रालय को मिला कुल 7.8 लाख करोड़ रुपये केंद्रीय बजट का बड़ा हिस्सा है। इसमें से करीब 2.19 लाख करोड़ रुपये कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी नए हथियारों, प्लेटफॉर्म और टेक्नोलॉजी खरीदने के लिए रखे गए हैं। सरकार का दावा है कि इस रकम का बड़ा हिस्सा स्वदेशी रक्षा उद्योग से खरीद पर खर्च किया जाएगा।

बजट में यह भी साफ किया गया है कि एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल यानी एमआरओ से जुड़े कुछ रॉ मटेरियल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी में छूट दी जाएगी। इससे देश में ही एमआरओ हब को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

कुल रक्षा खर्च को मिलाकर देखा जाए तो यह करीब 5.95 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिसमें सैलरी, पेंशन और ऑपरेशनल खर्च भी शामिल हैं। पेंशन का हिस्सा करीब 1.41 लाख करोड़ रुपये के आसपास है। (Defence Budget 2026)

फिर भी डिफेंस स्टॉक्स क्यों गिरे?

इतना मजबूत बजट आने के बाद भी डिफेंस स्टॉक्स में गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया। निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स करीब 3 से 4 फीसदी तक नीचे चला गया।

बजट वाले दिन बाजार में जिन प्रमुख डिफेंस स्टॉक्स में गिरावट दिखी, उनमें भारत फोर्ज, एचएएल, बीईएल, डाटा पैटर्न्स, कोचिन शिपयार्ड, मझगांव डॉक और जीआरएसई शामिल रहे। कुछ शेयरों में गिरावट 5 से 6 फीसदी तक भी देखने को मिली।

इस गिरावट के पीछे कई वजहें मानी जा रही हैं। (Defence Budget 2026)

उम्मीदें ज्यादा, हकीकत थोड़ी कम

बाजार के जानकारों का कहना है कि निवेशकों को इस बार रक्षा बजट से 20 से 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी की उम्मीद थी। हालांकि लगभग 15 फीसदी की बढ़ोतरी अपने आप में बड़ी है, लेकिन उम्मीदों के मुकाबले यह आंकड़ा थोड़ा कम लगा।

खासतौर पर कुछ निवेशक चाहते थे कि कैपिटल एक्सपेंडिचर में और ज्यादा आक्रामक बढ़ोतरी हो, ताकि सीधे-सीधे डिफेंस कंपनियों के ऑर्डर बुक पर असर दिखे। (Defence Budget 2026)

ओवरवैल्यूएशन और प्रॉफिट बुकिंग

एक बड़ी वजह यह भी है कि पिछले एक साल में कई डिफेंस स्टॉक्स ने 100 से 200 फीसदी तक का रिटर्न दिया था। मझगांव डॉक, जीआरएसई और कोचिन शिपयार्ड जैसे शेयर पहले ही काफी ऊपर जा चुके थे।

ऐसे में बजट के दिन निवेशकों ने मुनाफा वसूलना यानी प्रॉफिट बुकिंग शुरू कर दी। इसका नतीजा यह हुआ कि अच्छे बजट के बावजूद शेयरों में गिरावट देखने को मिली। (Defence Budget 2026)

पूरे बाजार का असर भी दिखा

यह भी ध्यान देने वाली बात है कि बजट के दिन सिर्फ डिफेंस सेक्टर ही नहीं, बल्कि पूरा शेयर बाजार दबाव में रहा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में बड़ी गिरावट आई। जब समग्र बाजार कमजोर होता है, तो मजबूत सेक्टर के शेयर भी उसकी चपेट में आ जाते हैं। डिफेंस स्टॉक्स भी इसी ट्रेंड का हिस्सा बने और उनमें बिकवाली बढ़ गई। (Defence Budget 2026)

नई बड़ी घोषणाओं की कमी

कुछ निवेशकों को उम्मीद थी कि बजट में डिफेंस एक्सपोर्ट, एफडीआई लिमिट या किसी बड़े नए प्रोजेक्ट को लेकर कोई चौंकाने वाली घोषणा होगी।

हालांकि बजट में लंबी अवधि की योजनाओं का जिक्र जरूर है, लेकिन कोई ऐसी नई स्कीम या नीति सामने नहीं आई, जिससे बाजार को तुरंत उत्साह मिले। इसी वजह से भी निवेशकों की प्रतिक्रिया थोड़ी ठंडी रही। (Defence Budget 2026)

लंबी अवधि में सेक्टर अब भी मजबूत

हालांकि अल्पकाल में डिफेंस स्टॉक्स में गिरावट दिखी है, लेकिन जानकार मानते हैं कि लंबी अवधि में सेक्टर की कहानी अब भी मजबूत है।

राफेल फाइटर जेट्स की आगे की डील, प्रोजेक्ट 75आई के तहत नई सबमरीन्स, ड्रोन और अनमैन्ड सिस्टम्स, एयर डिफेंस और नेवल शिपबिल्डिंग – ये सभी ऐसे क्षेत्र हैं, जहां आने वाले सालों में बड़े ऑर्डर निकल सकते हैं।

बीईएल, एचएएल, मझगांव डॉक, जीआरएसई और कोचिन शिपयार्ड जैसी कंपनियां सीधे इन प्रोजेक्ट्स से जुड़ी हैं। (Defence Budget 2026)

निवेशकों के लिए क्या है संकेत

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट को घबराने की बजाय लंबी अवधि के नजरिये से देखा जाना चाहिए। मजबूत ऑर्डर बुक, सरकार का सपोर्ट और आत्मनिर्भर भारत की नीति – ये सभी फैक्टर डिफेंस सेक्टर को आने वाले समय में फायदा पहुंचा सकते हैं।

संक्षेप में कहा जाए तो बजट 2026 ने रक्षा क्षेत्र की नींव और मजबूत की है। शेयर बाजार की मौजूदा प्रतिक्रिया थोड़े समय के लिए हो सकती है, जबकि असली असर आने वाले महीनों और वर्षों में दिखने की उम्मीद है। (Defence Budget 2026)

Union Budget 2026-27 में रक्षा मंत्रालय को रिकॉर्ड 7.8 लाख करोड़, मॉडर्नाइजेशन के लिए 2.19 लाख करोड़

Defence Budget 2026 India
Union Budget 2026-27: India Allocates Record Rs 7.8 Trillion to Defence, Rs 2.19 Trillion for Modernisation

Defence Budget 2026 India: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार एक फरवरी को संसद में अपना नौंवा केंद्रीय बजट पेश किया। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पेश हुए यूनियन बजट 2026-27 में वित्त मंत्री ने रक्षा मंत्रालय को अब तक का सबसे बड़ा बजट दिया है। इस बार रक्षा मंत्रालय को कुल 7.8 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के 6.81 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 15 फीसदी ज्यादा है। सरकार के इस फैसले को देश की सुरक्षा जरूरतों, बदलते वैश्विक हालात और भविष्य की जंग की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

इस बड़े आवंटन में सबसे खास बात यह है कि रक्षा बलों के आधुनिकीकरण, यानी नए हथियार, प्लेटफॉर्म और टेक्नोलॉजी खरीदने के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये रखे गए हैं। इसे कैपिटल आउटले कहा जाता है। यह रकम सीधे तौर पर सेना, नौसेना और वायुसेना की ताकत बढ़ाने पर खर्च होगी। (Defence Budget 2026 India)

Defence Budget 2026 India: क्यों खास है इस बार का रक्षा बजट

पिछले कुछ सालों से भारत की सीमाओं पर हालात आसान नहीं रहे हैं। पिछले साल हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद एलओसी और एलएसी पर लगातार तनाव बना हुआ है। एलओसी पर पाकिस्तान की तरफ से लगातार ड्रोन, आतंकवाद और हाइब्रिड वॉरफेयर जैसी चुनौतियां सामने आ रही हैं। इसके अलावा साइबर हमले और स्पेस से जुड़ी सुरक्षा भी अब बड़े खतरे के रूप में उभर रही हैं।

इन्हीं हालात को देखते हुए सरकार ने इस बार रक्षा बजट में सिर्फ मामूली बढ़ोतरी नहीं, बल्कि एक ठोस और रणनीतिक बढ़त दी है। यह बजट “विकसित भारत @2047” और “आत्मनिर्भर भारत” के विजन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, ताकि आने वाले 20-25 सालों में भारत सैन्य रूप से पूरी तरह सक्षम और आत्मनिर्भर बन सके। (Defence Budget 2026 India)

रक्षा बजट का पूरा ब्रेकडाउन

अगर पूरे बजट को समझा जाए, तो रक्षा मंत्रालय के 7.85 लाख करोड़ रुपये को कई हिस्सों में बांटा गया है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा रेवेन्यू एक्सपेंडिचर का है, जिसमें सैनिकों की सैलरी, पेंशन, भत्ते, ईंधन और मेंटेनेंस जैसे खर्च शामिल होते हैं। यह खर्च जरूरी और टालना मुश्किल होता है।

वहीं, रेवेन्यू एक्सपेंडिचर के तहत लगभग 3.65 से 3.70 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह हिस्सा पिछले साल की तुलना में करीब 7 से 10 प्रतिशत ज्यादा है। इसमें सैनिकों की तनख्वाह, भत्ते, हथियारों और सिस्टम्स की मेंटेनेंस, स्टोर्स और ट्रांसपोर्ट जैसे जरूरी खर्च शामिल होते हैं।

पेंशन के लिए इस बार करीब 1.41 लाख करोड़ रुपये रखे गए हैं, जो पिछले साल से लगभग 5 प्रतिशत ज्यादा है। यह रकम देश के पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए बेहद अहम मानी जाती है। जिससे लाखों पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को लाभ मिलेगा।

इसके अलावा अन्य मदों, जैसे डीआरडीओ के प्रोजेक्ट्स, बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर और कोस्ट गार्ड से जुड़ी जरूरतों के लिए करीब 0.40 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें लगभग 12 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है, ताकि रिसर्च, सीमावर्ती सड़कों और समुद्री सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके।

लेकिन इस बजट की असली पहचान है 2.19 लाख करोड़ रुपये का कैपिटल आउटले, जो पिछले साल के 1.80 लाख करोड़ रुपये से करीब 22 फीसदी ज्यादा है। यही पैसा नए फाइटर जेट, मिसाइल, ड्रोन, सबमरीन और अत्याधुनिक सिस्टम्स पर खर्च होगा। (Defence Budget 2026 India)

आधुनिकीकरण में कहां जाएगा पैसा

कैपिटल आउटले का बड़ा हिस्सा तीनों सेनाओं में बांटा जाएगा। अनुमान है कि इसमें से करीब 50 फीसदी नौसेना, 28 फीसदी थल सेना और 22 फीसदी वायुसेना को मिलेगा। इसका मकसद सिर्फ पुराने हथियार बदलना नहीं, बल्कि भविष्य की जंग के हिसाब से सेनाओं को तैयार करना है।

सरकार ने साफ किया है कि इस कैपिटल आउटले का करीब 75 फीसदी हिस्सा स्वदेशी खरीद पर खर्च किया जाएगा। यानी हथियार और सिस्टम देश में बनी कंपनियों से खरीदे जाएंगे। इससे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स जैसी कंपनियों को बड़ा फायदा मिलेगा। (Defence Budget 2026 India)

फाइटर जेट्स पर बड़ा फोकस

इस बजट में वायुसेना की जरूरतों को खास तौर पर ध्यान में रखा गया है। इंडियन एयर फोर्स की स्क्वाड्रन स्ट्रेंथ लगातार घटती रही है और अब वह जरूरत से काफी नीचे आ गई है। इसे सुधारने के लिए राफेल फाइटर जेट्स की नई डील पर काम चल रहा है।

मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोग्राम के तहत करीब 114 राफेल जेट्स खरीदने की योजना है। इनमें से ज्यादातर नए और एडवांस्ड स्टैंडर्ड वाले होंगे। इस डील की कुल कीमत 1.5 से 2 लाख करोड़ रुपये तक हो सकती है। बजट में इसका शुरुआती असर दिखने की उम्मीद है।

इसके अलावा स्वदेशी तेजस मार्क-2 और भविष्य के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट को भी फंडिंग मिलेगी। साथ ही, स्वदेशी जेट इंजन डेवलपमेंट पर भी खर्च बढ़ाया जाएगा, ताकि भारत को विदेशी इंजनों पर निर्भर न रहना पड़े। (Defence Budget 2026 India)

नौसेना को मिलेगी नई ताकत

नौसेना के लिए इस बजट में खास ध्यान सबमरीन और समुद्री सुरक्षा पर दिया गया है। प्रोजेक्ट 75आई के तहत 6 नई सबमरीन बनाने की योजना है, जिनमें एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन सिस्टम होगा। इससे ये सबमरीन लंबे समय तक पानी के अंदर रह सकेंगी।

इन सबमरीन का निर्माण भारत में ही होगा और इसमें विदेशी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा स्कॉर्पीन क्लास की अतिरिक्त सबमरीन पर भी बातचीत चल रही है। इसका सीधा फायदा हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की स्थिति को मजबूत करने में मिलेगा। (Defence Budget 2026 India)

ड्रोन और अनमैन्ड सिस्टम्स पर जोर

बजट 2026-27 में ड्रोन और अनमैन्ड सिस्टम्स को भी बड़ी प्राथमिकता दी गई है। हाल के सालों में ड्रोन ने युद्ध की तस्वीर बदल दी है। इसी को देखते हुए सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए अलग-अलग तरह के ड्रोन खरीदे जाएंगे।

नौसेना के लिए शिपबोर्न अनमैन्ड एरियल सिस्टम, सेना के लिए सर्विलांस और अटैक ड्रोन, और वायुसेना के लिए एडवांस्ड अनमैन्ड प्लेटफॉर्म्स पर काम तेज होगा। इसके अलावा काउंटर ड्रोन सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर पर भी खर्च बढ़ेगा। (Defence Budget 2026 India)

आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बड़ा सहारा

इस रक्षा बजट से देश के डिफेंस इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम को बड़ा बूस्ट मिलने की उम्मीद है। निजी कंपनियों, स्टार्टअप्स और एमएसएमई सेक्टर को ज्यादा ऑर्डर मिलेंगे। इससे न सिर्फ रोजगार बढ़ेगा, बल्कि भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट भी मजबूत होगा।

सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले कुछ सालों में भारत का रक्षा निर्यात 5.5 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो। इस बजट को उस दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

हालांकि बजट में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा बजट अभी भी जीडीपी का करीब 2 फीसदी ही है। जबकि संसदीय समितियां लंबे समय से इसे 3 फीसदी बढ़ाने की सलाह देती रही हैं। पेंशन और सैलरी पर बड़ा खर्च होने की वजह से कैपिटल आउटले पर दबाव बना रहता है। (Defence Budget 2026 India)