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Harimau Shakti 2024: भारत और मलेशिया के सैन्य संबंधों को मजबूत करेगा ‘हरिमाऊ’, दोनों देशों के बीच शुरू हुआ विशेष संयुक्त सैन्य अभ्यास

Harimau Shakti 2024: Strengthening India-Malaysia Defense Ties Through Joint Military Exercise

Harimau Shakti 2024: भारत और मलेशिया के बीच रक्षा संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास हरिमाऊ शक्ति 2024 का शुभारंभ हुआ। इस समारोह ने दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी सहयोग को और मजबूती देने और क्षेत्रीय सुरक्षा में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया।

Harimau Shakti 2024: Strengthening India-Malaysia Defense Ties Through Joint Military Exercise

Harimau Shakti 2024: समारोह की शुरुआत

समारोह की शुरुआत दोनों देशों की संयुक्त टुकड़ियों के शानदार मार्च पास्ट से हुई। भारतीय सेना की टुकड़ी ने एक प्रभावशाली परेड का प्रदर्शन किया, जिसमें उनकी उच्च प्रशिक्षण और संचालनात्मक तत्परता को दिखाया गया। इस अवसर पर मलेशियाई सेना के ब्रिगेडियर जनरल शहीर हफीजुल बिन अब्द रहमान ने दोनों देशों की टुकड़ियों के कमांडरों और अभ्यास में शामिल अंपायरों को विशेष आर्म बैंड सौंपे।

Harimau Shakti 2024: Strengthening India-Malaysia Defense Ties Through Joint Military Exercise

सद्भावना के प्रतीक

कार्यक्रम के दौरान भारतीय और मलेशियाई सेना के अधिकारियों ने आपसी सद्भावना और सहयोग को दर्शाते हुए स्मृति चिह्नों का आदान-प्रदान किया। यह कदम दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक और सकारात्मक प्रयास था।

ब्रिगेडियर जनरल का संबोधन

अपने उद्घाटन भाषण में ब्रिगेडियर जनरल शहीर हफीजुल बिन अब्द रहमान ने इस अभ्यास को औपचारिक रूप से शुरू करते हुए कहा कि वर्तमान समय की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए ऐसे संयुक्त सैन्य अभ्यास बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने विशेष रूप से आतंकवाद विरोधी अभियानों और शांति स्थापना कार्यों में इस तरह के सहयोग की भूमिका को रेखांकित किया।

Harimau Shakti 2024: Strengthening India-Malaysia Defense Ties Through Joint Military Exercise

तकनीकी प्रदर्शन

समारोह के बाद आधुनिक सैन्य उपकरणों और हथियारों का प्रदर्शन किया गया, जिसमें नेगेव एलएमजी, मिनी-आरपीए, अनकूल्ड एचएचटीआई, एमटीएमएसएल और एमजीएल जैसे उन्नत हथियार शामिल थे। इन हथियारों ने दर्शकों को दोनों देशों की सैन्य ताकत और तकनीकी प्रगति की झलक दिखाई।

संयुक्त प्रशिक्षण और सहयोग की भूमिका

हरिमाऊ शक्ति 2024 का उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे की संचालनात्मक क्षमताओं और रणनीतियों से परिचित कराना है। यह अभ्यास आतंकवाद विरोधी अभियानों और शांति स्थापना कार्यों में समन्वय और साझेदारी को बेहतर बनाने पर केंद्रित है।

इस अभ्यास के माध्यम से सैनिक न केवल एक-दूसरे के अनुभवों से सीखेंगे, बल्कि जमीनी हकीकत के आधार पर बेहतर तालमेल विकसित करने में भी सक्षम होंगे।

भारतीय रक्षा अटैच का योगदान

कार्यक्रम में भारत के डिफेंस अटैच कर्नल एस. प्रवीन ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने इस कार्यक्रम को दोनों देशों के सैन्य और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

साझेदारी की नई ऊंचाइयां

हरिमाऊ शक्ति 2024 जैसे अभ्यास दोनों देशों के लिए केवल सैन्य सहयोग का ही नहीं, बल्कि आपसी विश्वास और साझेदारी को मजबूत करने का भी अवसर हैं। यह अभ्यास न केवल सैन्य क्षेत्र में तकनीकी और रणनीतिक कौशल को बढ़ावा देता है, बल्कि दो देशों के बीच सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाता है।

संयुक्त अभ्यास के दौरान सैनिकों को जमीनी संचालन, संघर्ष प्रबंधन और मानवीय सहायता जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा, दोनों सेनाएं अपने अनुभव साझा करेंगी और एक-दूसरे की चुनौतियों को समझकर समाधान खोजेंगी।

हरिमाऊ शक्ति 2024 भारत और मलेशिया की सेनाओं के लिए एक ऐसा मंच है, जहां वे एक-दूसरे से सीखते हुए क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करेंगे। यह अभ्यास दोनों देशों के रक्षा संबंधों को और मजबूत करेगा और आने वाले समय में क्षेत्रीय सुरक्षा में एक नई परिभाषा गढ़ेगा।

हरिमाऊ शक्ति 2024 सिर्फ एक सैन्य अभ्यास नहीं है, बल्कि यह भारत और मलेशिया के बीच एक गहरी साझेदारी और आपसी सहयोग का प्रतीक है। यह दोनों देशों के सैनिकों को एकजुट होने और एक साझा उद्देश्य की दिशा में काम करने का अवसर देता है। इस तरह के कार्यक्रम न केवल क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वे हमारे सैनिकों को आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए और अधिक तैयार करते हैं।

हरिमाऊ शक्ति 2024 भारतीय सेना की क्षमता और प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जो न केवल अपनी सीमाओं की सुरक्षा करती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति और स्थिरता में भी योगदान देती है।

Defence: भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने के लिए DAC ने 21,772 करोड़ रुपये के 5 प्रस्तावों को दी मंजूरी

Defence Emergency Procurement Extension

Defence: रक्षा मंत्रालय के तहत रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने 3 दिसंबर 2024 को पांच प्रमुख डिफेंस इक्विपमेंट्स की खरीद को मंजूरी दे दी है। इन प्रस्तावों में कुल 21,772 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इन उपकरणों का उद्देश्य भारतीय सेना की क्षमता को और मजबूत करना है और हमारी सुरक्षा में बढ़ोतरी करना है।

Defence: DAC Approves 5 Proposals Worth Rs. 21,772 Crores to Strengthen India's Defence Preparedness

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने इन प्रस्तावों को मंजूरी दी। इन प्रस्तावों के तहत भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल को अत्याधुनिक रक्षा उपकरण प्राप्त होंगे, जो समुद्र और तटीय क्षेत्रों में सुरक्षा की स्थिति को और बेहतर करेंगे।

1. Defence: वाटर जेट फास्ट अटैक क्राफ्ट (Water Jet Fast Attack Crafts) की खरीद:

DAC ने भारतीय नौसेना के लिए 31 जल जेट फास्ट अटैक क्राफ्ट (NWJFACs) की खरीद को मंजूरी दी है। ये क्राफ्ट समुद्र के किनारे की निगरानी, गश्त, और खोज एवं बचाव कार्यों के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे। इन क्राफ्टों का इस्तेमाल विशेष रूप से एंटी-पाइरेसी मिशनों में किया जाएगा, जो हमारे समुद्री क्षेत्र और द्वीप क्षेत्रों के आसपास सुरक्षा में मदद करेंगे। यह कदम समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।

2. फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट (Fast Interceptor Craft) की खरीद:

भारतीय नौसेना के लिए 120 तेज इंटरसेप्टर क्राफ्ट (FIC-1) की भी खरीद को मंजूरी दी गई है। यह क्राफ्ट एयरक्राफ्ट कैरियर, डिस्ट्रॉयर, फ्रिगेट और पनडुब्बियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होंगे। यह तेज क्राफ्ट तटीय रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और तटीय क्षेत्रों में सुरक्षा को बढ़ावा देंगे।

3. इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली (Electronic Warfare Suite):

DAC ने SU-30 MKI विमान के लिए एक उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली (EWS) की खरीद को मंजूरी दी है। इसमें एयरबॉर्न सेल्फ प्रोटेक्शन जैमर पॉड्स और अगला पीढ़ी का रडार वार्निंग रिसीवर शामिल है। यह प्रणाली SU-30 MKI को शत्रु के रडार और रक्षा प्रणालियों से बचाने में मदद करेगी और उसे शत्रु के विमानों और मिसाइलों से सुरक्षित रखते हुए मिशन में सफलता प्राप्त करने में सक्षम बनाएगी। यह प्रणाली भारतीय वायु सेना की ताकत को और बढ़ाएगी, विशेष रूप से उन अभियानों में जहां शत्रु की हवाई रक्षा प्रणाली मौजूद होती है।

4. उन्नत लाइट हेलीकॉप्टर (Advanced Light Helicopters):

भारतीय तटरक्षक बल के लिए 6 उन्नत लाइट हेलीकॉप्टर (ALH-MR) की खरीद को भी मंजूरी दी गई है। ये हेलीकॉप्टर तटीय सुरक्षा और निगरानी को मजबूत करेंगे। तटीय क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इन हेलीकॉप्टरों का विशेष रूप से उपयोग किया जाएगा। इसके साथ ही तटीय सुरक्षा की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए ये हेलीकॉप्टर तटरक्षक बल के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण साबित होंगे।

5. पुराने टैंक और विमानों की मरम्मत:

इसके अलावा, DAC ने T-72 और T-90 टैंकों, BMP वाहनों और सुखोई लड़ाकू विमानों के इंजन की ओवरहालिंग के लिए मंजूरी दी है। इससे इन महत्वपूर्ण सैन्य उपकरणों की सेवा जीवन में वृद्धि होगी और इन्हें और अधिक प्रभावी रूप से इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह कदम भारतीय सेना की ताकत को बनाए रखने में मदद करेगा और रक्षा प्रणाली की कार्यक्षमता को बढ़ाएगा।

बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत कदम

भारत के रक्षा विभाग द्वारा इन प्रस्तावों को मंजूरी देने का निर्णय आने वाले समय में हमारी सुरक्षा स्थिति को मजबूत करेगा। आजकल समुद्र और तटीय क्षेत्रों में बढ़ती चुनौतियों के बीच यह कदम बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। आतंकवाद, समुद्री लूटपाट और सीमा पार से होने वाली घुसपैठ जैसी समस्याओं को लेकर हमारी सेनाओं को हमेशा तैयार रहना होता है। इन नए उपकरणों के अधिग्रहण से भारतीय सेना और नौसेना की तैयारियों में और अधिक मजबूती आएगी।

SIPRI Arms Export: दुनियाभर में बढ़ा हथियारों का कारोबार, भारत की तीन बड़ी हथियार निर्माता कंपनियों ने गाड़े झंडे, आत्मनिर्भर भारत को मिली बड़ी कामयाबी

SIPRI Report: Global Arms Sales Reach Rs 52 Lakh Crore in 2023, Rise by 4.2%

SIPRI Arms Export: दुनिया के प्रमुख हथियार बनाने वाली कंपनियों की आय में 2023 में बड़ा इज़ाफा हुआ है। इस बढ़ोतरी की वजह दुनिया भर में जारी युद्ध, क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा को लेकर देशों का बढ़ता खर्च बताया जा रहा है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट के अनुसार, हथियारों की बिक्री में बढ़ोतरी लगभग हर क्षेत्र में दर्ज की गई है। खासकर रूस, मध्य पूर्व और एशिया में हथियार निर्माताओं का तगड़ा मुनाफा हासिल हुआ है।

SIPRI Arms Export: Global Arms Trade Soars, India's Top Three Manufacturers Shine, Major Boost for Aatmanirbhar Bharat

युद्ध और वैश्विक तनाव ने बढ़ाई हथियारों की मांग

2023 में वैश्विक स्तर पर हथियारों की मांग में बड़ा उछाल आया है। SIPRI की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के शीर्ष 100 हथियार निर्माता कंपनियों ने अपनी आय में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी की। इनमें से छोटे और मध्यम आकार के निर्माता कंपनियों ने तेज़ी से नए ऑर्डर पूरे करने में जबरदस्त तेजी दिखाई।

SIPRI के रिसर्चर लोरेंजो स्कारज़ाटो कहते हैं, “2023 में हथियारों की बिक्री में तेज़ी देखी गई, और यह रुझान 2024 में भी जारी रहने की संभावना है।” रिपोर्ट बताती है कि कई कंपनियां अपने उत्पादन को बढ़ाने और नए कर्मचारियों को हायर करने में लगी हुई हैं, जिससे यह साफ़ होता है कि वे भविष्य में और भी अधिक ऑर्डर की उम्मीद कर रही हैं।

अमेरिका: सबसे आगे, लेकिन चुनौतियां बरकरार

अमेरिका के 41 हथियार निर्माता कंपनियों ने कुल 317 बिलियन डॉलर का कमाई की, जो SIPRI की टॉप 100 कंपनियों की कुल आय का लगभग आधा है। हालांकि, कुछ बड़ी कंपनियां जैसे लॉकहीड मार्टिन और RTX को सप्लाई चेन में में आने वाली समस्याओं के कारण काफी नुकसान उठाना पड़ा है।

इन चुनौतियों के बावजूद, अमेरिका ने वैश्विक हथियार बाजार में अपना दबदबा बनाए रखा है। पिछले पांच वर्षों से SIPRI की टॉप 5 कंपनियां में अमेरिका की पोजिशन बरकरार है।

यूरोप में मामूली बढ़ोतरी

यूरोप की हथियार निर्माता कंपनियों की आय में केवल 0.2% की मामूली वृद्धि दर्ज की गई। इसकी वजह यह है कि कई यूरोपीय कंपनियां पुराने कॉन्ट्रैक्ट्स पर काम कर रही थीं, जिसका असर उनकी आय पर असर पड़ा।

हालांकि, कुछ देशों जैसे जर्मनी, पोलैंड और नॉर्वे ने तेज़ी से बढ़ोतरी दर्ज की। जर्मनी की कंपनी राइनमेटल ने गोला-बारूद और टैंकों के उत्पादन में बढ़ोतरी की, जिससे उसकी आय में बड़ा इज़ाफा हुआ।

रूसी कंपनियों की आय बढ़ी

रूस की हथियार कंपनियों ने 2023 में 40% की आय वृद्धि दर्ज की। SIPRI की रिपोर्ट के अनुसार, यह वृद्धि मुख्य रूप से रोस्टेक के कारण हुई, जो कई हथियार निर्माताओं को कंट्रोल करती है।

रूस ने अपनी सेना के लिए टैंकों, मिसाइलों और ड्रोन जैसे हथियारों के उत्पादन में बड़ा इज़ाफा किया है। हालांकि, रूस के हथियार उत्पादन पर सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन जानकारों का मानना है कि यूक्रेन युद्ध ने इस बढ़ोतरी में इजाफा किया है।

भारत और दक्षिण कोरिया का प्रदर्शन शानदार

एशिया और ओशिनिया क्षेत्र में हथियारों की बिक्री में 5.7% की वृद्धि दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया और जापान ने इस क्षेत्र में बढ़त बनाई। दक्षिण कोरिया की कंपनियों की आय में 39% की वृद्धि हुई, जबकि जापान की कंपनियों ने 35% की बढ़ोतरी दर्ज की।

भारत की तीन बड़ी हथियार निर्माता कंपनियों ने भी 5.8% की आय वृद्धि के साथ 6.7 बिलियन डॉलर का राजस्व अर्जित किया। भारत सरकार की “आत्मनिर्भर भारत” योजना के तहत घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे भारत का प्रदर्शन भी हथियारों के निर्यात में लगातार बेहतर हो रहा है।

मध्य पूर्व: अभूतपूर्व बढ़ोतरी

मध्य पूर्व की हथियार कंपनियों ने 2023 में 18% की वृद्धि के साथ 19.6 बिलियन डॉलर की आय दर्ज की। इज़राइल की कंपनियों ने 13.6 बिलियन डॉलर की आय के साथ रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया। तुर्की की कंपनियों ने भी 24% की बढ़ोतरी दर्ज की।

भारत: आत्मनिर्भर बनने की ओर

भारत ने अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) जैसी कंपनियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत का लक्ष्य न केवल अपनी सुरक्षा जरूरतों को पूरा करना है, बल्कि वैश्विक हथियार बाजार में एक प्रमुख स्थान हासिल करना भी है।

सरकार की नीतियां भारतीय कंपनियों को नए अवसर प्रदान कर रही हैं। स्वदेशी उत्पादन के जरिए भारत न केवल विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता कम कर रहा है, बल्कि निर्यात को भी बढ़ावा दे रहा है।

Indian Air Force: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले में वायुसेना के अधिकारी के खिलाफ जांच जारी रखने का दिया आदेश

Indian Air Force: Jammu-Kashmir and Ladakh High Court Orders Continuation of Investigation Against Air Force Officer in Sexual Harassment Case

Indian Air Force: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) बडगाम की तरफ से जारी दो आदेशों को रद्द करते हुए विशेष जांच दल (SIT) को वायुसेना के विंग कमांडर के खिलाफ चल रही जांच को जारी रखने का निर्देश दिया है। आरोपी विंग कमांडर पर एक महिला फ्लाइंग ऑफिसर ने यौन उत्पीड़न और बलात्कार का आरोप लगाया है।

Indian Air Force: Jammu-Kashmir and Ladakh High Court Orders Continuation of Investigation Against Air Force Officer in Sexual Harassment Case

क्या है मामला?

यह मामला 31 दिसंबर 2023 का है, जब महिला फ्लाइंग ऑफिसर ने आरोप लगाया कि श्रीनगर में ऑफिसर्स मेस में आयोजित न्यू ईयर पार्टी के दौरान विंग कमांडर ने उसका यौन उत्पीड़न किया। इस घटना के करीब नौ महीने बाद, 8 सितंबर 2024 को बडगाम पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2) (जिसमें पद और अधिकार का दुरुपयोग कर बलात्कार करने का मामला आता है) के तहत एफआईआर दर्ज की गई।

क्या कहा अदालत ने?

CJM बडगाम ने 10 और 16 अक्टूबर 2024 को क्रमशः दो आदेश जारी किए, जिनमें भारतीय वायुसेना अधिनियम की धारा 124 का हवाला देते हुए यह तय करने का प्रयास किया गया था कि आरोपी पर कोर्ट मार्शल द्वारा मुकदमा चलेगा या किसी आपराधिक अदालत में।

हाई कोर्ट ने इन आदेशों को रद्द कर दिया है और SIT को निर्देश दिया है कि वह अपनी जांच जारी रखे। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि ऐसे गंभीर मामलों में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना आवश्यक है।

आरोपी को मिली अंतरिम जमानत

13 सितंबर 2024 को हाई कोर्ट ने आरोपी विंग कमांडर को अंतरिम जमानत दी थी। अदालत ने यह जमानत उनकी वायुसेना में पदस्थ स्थिति और करियर पर संभावित प्रभाव को ध्यान में रखते हुए दी थी। हालांकि, इसके साथ ही कड़ी शर्तें भी लागू की गईं। इनमें जांच अधिकारी के समक्ष नियमित उपस्थिति और यात्रा प्रतिबंध शामिल थे।

अगली सुनवाई पर नजर

सेहरावत की जमानत याचिका पर अगली सुनवाई 10 दिसंबर 2024 को होगी। इस मामले में महिला अधिकारी और आरोपी दोनों के लिए न्याय की मांग के साथ-साथ वायुसेना और पुलिस की भूमिका की भी बारीकी से जांच की जा रही है।

यह मामला भारतीय सशस्त्र बलों में यौन उत्पीड़न और अधिकारों के दुरुपयोग जैसे संवेदनशील मुद्दों को उजागर करता है। यह घटना यह सोचने पर मजबूर करती है कि सेना में भी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में सशस्त्र बलों को पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए। साथ ही, महिला अधिकारियों को सुरक्षा और समर्थन प्रदान करने के लिए व्यापक नीति बनाने की आवश्यकता है।

Autonomous Underwater Vehicles: भारतीय नौसेना के क्यों बेहद खास हैं ये अंडर वाटर व्हीकल्स? बिना किसी ऑपरेटर के सीक्रेट तरीके से समुद्र के अंदर मिशन को देंगे अंजाम

Autonomous Underwater Vehicles: Why These Underwater Drones Are Crucial for the Indian Navy? Undertaking Secret Missions Underwater Without Any Operator

Autonomous Underwater Vehicles: भारत की नौसेना इस हफ्ते ‘नौसेना दिवस’ मनाने जा रही है, और इस अवसर पर एक बेहद खास और गेम-चेंजिंग इनोवेशन की चर्चा हो रही है — स्वदेशी ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल्स (AUVs)। इन्हें खास तौर पर सागर डिफेंस इंजीनियरिंग ने बनाया है। ये अत्याधुनिक अंडरवाटर ड्रोन, जो ‘इनोवेशन्स फॉर डिफेंस एक्सीलेंस’ (iDEX) पहल के तहत बनाए गए हैं, भारतीय नौसेना की मिशन कैपेबिलिटीज को पूरी तरह से बदलने जा रहे हैं। इन AUVs से नौसेना को माइन क्लीयरेंस, सर्विलांस और रिकॉन्गनाइज़ेंस जैसे महत्वपूर्ण मिशन को अंजाम देने में मदद मिलेगी।

Autonomous Underwater Vehicles: Why These Underwater Drones Are Crucial for the Indian Navy? Undertaking Secret Missions Underwater Without Any Operator

सागर डिफेंस इंजीनियरिंग के सूत्रों ने बताया कि ये AUVs नौसेना की ऑपरेशनल कैपेबिलिटीज में बड़ी बढ़त लेकर आ रहे हैं। इन AUVs को पूरी तरह से ऑटोनॉमस तौर पर काम करने के लिए डिजाइन किया गया है और इनमें अत्याधुनिक सेंसर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नेविगेशन सिस्टम्स हैं, इन्हें चलाने के लिए किसी मानवीय हस्तक्षेप की जरूरत नहीं पड़ती है। बता दें कि भारतीय नौसेना ने माइन डिटेक्शन जैसे कामों के लिए सागर डिफेंस इंजीनियरिंग को 30 AUVs का ऑर्डर भी दिया है।

सूत्रों ने बताया, “इन AUVs का फायदा यह है कि ये बिना किसी मानव जीवन को खतरे में डाले समुद्र के अंदर मिशन को पूरा कर सकते हैं, साथ ही साथ ऑपरेशनल लागत को भी कम करते हैं। ये प्री-प्रोग्राम्ड रूट्स पर ऑटोनॉमस तरीके से नेविगेट कर सकते हैं, रिकॉन्गनाइज़ेंस कर सकते हैं, और वास्तविक समय में जरूरी डेटा कमांड सेंटर तक भेज सकते हैं, जिससे किसी भी इमरजेंसी हालात में तुरंत तैयारी की जा सकती है।”

इन AUVs का उपयोग विभिन्न प्रकार के मिशन के लिए किया जा सकता है, जैसे माइन काउंटरमेजर्स, पर्यावरण निगरानी, और सर्विलांस। यह उन्हें सैन्य और व्यावसायिक दोनों क्षेत्रों में बेहद महत्वपूर्ण बनाता है। खास बात यह है कि ये AUVs एक साथ समूहों में काम कर सकते हैं, यानी कई AUVs मिलकर सूचना साझा करते हुए समुद्र की गहराई की मैपिंग और तटीय निगरानी भी कर सकते हैं।

ऑटोनॉमस फीचर होने से AUVs खुद फैसला ले सकते हैं, जिसका इनकी निगरानी की आवश्यकता कम हो जाती है। जिससे ऑपरेटर दूसरे कामों पर फोकस कर सकते हैं, जबकि AUVs बिना ज्यादा मानवीय हस्तक्षेप के अपने मिशन को अंजाम देते हैं। इससे नौसेना की समुद्र में निगरानी की क्षमता और भी बेहतर हो जाती है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

इन AUVs का व्यावसायिक क्षेत्र में भी बड़ा उपयोग हो सकता है, खासकर हाइड्रोग्राफिक सर्वे, अंडरवाटर एक्सप्लोरेशन और पर्यावरणीय निगरानी में। सूत्रों का कहना है कि इनका हल्का डिजाइन और एडवांस क्षमताएं इन्हें सैन्य और व्यावसायिक दोनों प्रकार के कार्यों के लिए उपयुक्त बनाती हैं। इन AUVs में AI-चालित सेंसर लगाए गए हैं। जिसके चलते ये AUVs लंबी अवधि के मिशन को बिना निरंतर मानवीय निगरानी के पूरा कर सकते हैं। इसके अलावा, इनकी AI-आधारित सेंसर प्रणाली वास्तविक समय में बेहतर डेटा विश्लेषण करने में मदद करती है, जिससे ऑपरेटरों को कार्रवाई योग्य जानकारी मिलती है और निर्णय लेने की गति बढ़ती है।

वर्तमान में इन AUVs को स्वॉर्म ऑपरेशंस के लिए भी विकसित किया जा रहा है, यानी एक साथ कई यूनिट्स मिलकर काम करेंगे, जिससे मिशन की कार्यक्षमता और कवरेज बढ़ जाएगी। वहीं, भविष्य में, इन AUVs की तकनीक को रक्षा क्षेत्र से बाहर विभिन्न उद्योगों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। हाइड्रोग्राफिक कंपनियां, शोध संस्थान और पर्यावरणीय एजेंसियां इन AUVs का उपयोग समुद्र के तल का मानचित्रण, समुद्री जीवन की निगरानी और प्रदूषण का पता लगाने के लिए कर सकती हैं, जिससे ये सिस्टम बेहद अनुकूलनीय हो जाएंगे।

वहीं, इन AUVs का विकास भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ नौसेना की क्षमताओं को बढ़ाने के बारे में नहीं है, बल्कि यह भारत को वैश्विक मंच पर स्वायत्त रक्षा प्रौद्योगिकियों में एक नेता बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।”

Loitering munitions: भारत का पहला स्वदेशी लॉइटरिंग म्यूनिशन “नागास्त्र-1” भारतीय सेना में शामिल होने के लिए तैयार, अब लंबी रेंज वाले ड्रोन की तैयारी

Loitering Munitions: India's First Indigenous Loitering Munition "Nagastra-1" Set to Join Indian Army, Preparation for Indigenous Long-Range Drones Underway

Loitering Munitions: भारतीय सशस्त्र बलों को हाल ही में देश में बने लॉइटरिंग म्यूनिशन  (loitering munitions) की डिलीवरी मिली है, इन्हें सुसाइड ड्रोन भी कहा जाता है। वहीं, अब उनकी नजर स्वदेशी लंबे रेंज के ड्रोन पर है, जिनका उपयोग खुफिया जानकारी जुटाने से लेकर आक्रामक अभियानों तक में किया जा सके। वहीं, भारत का पहला स्वदेशी लॉइटरिंग म्यूनिशन (Loitering Munition) “नागास्त्र-1” भारतीय सेना में शामिल होने के लिए तैयार है।

स्वदेशी ड्रोन की जरूरत

मध्यम ऊंचाई और लंबी अवधि तक उड़ने वाले (Medium Altitude Long Endurance – MALE) ड्रोन की मांग तीनों सेनाओं—थलसेना, वायुसेना और नौसेनो को है। अभी तक ये ड्रोन मुख्यतः इजरायल से आयात किए जाते थे, लेकिन अब इसे स्वदेशी तकनीक से बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, MALE ड्रोन को Indigenously Designed, Developed, and Manufactured (IDDM) रूट के तहत खरीदा जाएगा। इसका मतलब है कि ये ड्रोन पूरी तरह भारत में निर्मित होंगे। इस योजना के तहत, नागपुर स्थित इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड (EEL) नामक एक कंपनी ने प्रस्ताव भेजा है। कंपनी इन ड्रोन के विकास के लिए रिसर्च का काम पहले ही शुरू कर चुकी है।

“नागास्त्र-1” भारतीय सेना में शामिल होने के लिए तैयार

भारत की रक्षा तकनीक में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए, स्वदेशी लॉइटरिंग म्यूनिशन (Loitering Munition) “नागास्त्र-1” भारतीय सेना में शामिल होने के लिए तैयार है। यह लॉइटरिंग म्यूनिशन सोलर इंडस्ट्रीज ने डेवलप किया है और इसे इकोनॉमिक्स एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड (EEL), जो सोलर ग्रुप की एक सहायक कंपनी है, ने भारतीय सेना के लिए आपातकालीन खरीद के तहत 480 यूनिट्स का निर्माण किया है।

यह स्वदेशी लॉइटरिंग म्यूनिशन भारतीय सेना की आधुनिक तकनीकी जरूरतों को पूरा करेगा और युद्ध के मैदान में एक महत्वपूर्ण हथियार साबित होगा। नागास्त्र-1 को विशेष रूप से सटीक लक्ष्यों पर हमला करने, दुश्मन के उपकरणों को नष्ट करने और खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के लिए डिजाइन किया गया है।

EEL ने इस परियोजना को आपातकालीन खरीद (Emergency Procurement) के तहत पूरा किया है, जिससे भारतीय सेना को जल्द से जल्द अपनी युद्ध क्षमताओं को मजबूत करने में मदद मिली है। यह लॉइटरिंग म्यूनिशन भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का एक प्रमुख कदम है।

“नागास्त्र” ड्रोन की प्रमुख विशेषताएँ

  • वजन: 9 किलोग्राम
  • विकास स्थान: नागपुर, भारत
  • जीपीएस क्षमता: सटीक लक्ष्य निर्धारण के लिए
  • प्रभावी रेंज: 30 किलोमीटर (स्वतंत्र मोड में)
  • रडार प्रतिरोध: दुश्मन के रडार से सुरक्षा सुनिश्चित
  • मुख्य लॉन्च रेंज: 15 किलोमीटर
  • ऑपरेशनल ऊंचाई: 1,200 मीटर

नई तकनीक और टेस्टिंग सुविधा

EEL ने देश के निजी क्षेत्र में पहली बार 1.4 किमी लंबा रनवे और ड्रोन परीक्षण के लिए अत्याधुनिक सुविधा तैयार की है। यह देश में सबसे बड़ा निजी परीक्षण केंद्र है, जो खास तौर पर लंबे रेंज के ड्रोन के लिए बनाया गया है।

चीन के खतरे के मद्देनजर त्वरित कार्रवाई

IDDM रूट के तहत MALE ड्रोन को प्राथमिकता से हासिल करने की योजना को चीन के साथ लगी पूर्वी सीमा पर खतरों के चलते बनाया गया है। निजी क्षेत्र की कंपनियों ने आपातकालीन खरीद (Emergency Procurement) श्रेणी में रिकॉर्ड समय में लॉइटरिंग म्यूनिशन जैसे ड्रोन बना कर सरकार का भरोसा जीता है।

इस परियोजना में तीनों सेनाओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर ड्रोन विकसित किए जाएंगे। हालांकि, शुरुआती चरण में छोटे पैमाने पर ऑर्डर दिया जाएगा।

आयात पर कम होगी निर्भरता

पिछले वर्षों में इजरायल से सीधे आयात किए गए ड्रोन पर अब निर्भरता कम करने का प्रयास हो रहा है। इस दिशा में सरकारी और निजी क्षेत्र मिलकर काम कर रहे हैं। राज्य संचालित शोध संस्थाओं की कोशिशें अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं दे सकी थीं, लेकिन निजी क्षेत्र के योगदान से उम्मीदें बढ़ गई हैं।

वहीं, स्वदेशी ड्रोन का विकास भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा कदम है। लॉइटरिंग म्यूनिशन की सफल डिलीवरी से यह साबित हो गया है कि भारतीय कंपनियां अब उन्नत रक्षा तकनीक को तेजी से विकसित करने में सक्षम हैं। इन प्रयासों से भारत न केवल आयात पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में अपनी स्थिति भी मजबूत करेगा।

इस परियोजना का सफल क्रियान्वयन सशस्त्र बलों को तकनीकी बढ़त देने के साथ-साथ भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।

BrahMos Aerospace: क्यों विवादों में घिरा देश के लिए अचूक मिसाइल बनाने वाला संस्थान? जानें क्या है पूरा मामला

BrahMos Missile Deal: India-Vietnam Set to Finalize Agreement Soon!

BrahMos Aerospace: भारत और रूस के जॉइंट वेंचर BrahMos Aerospace में इन दिनों सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। ताजा विवाद लीडर को लेकर सामने आया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब डॉ. जैतर्थ आर जोशी को कंपनी का नया सीईओ बनाया गया। इस फैसले को लेकर वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शिवसुबरमण्यम नाम्बी नायडू ने आपत्ति जताते हुए 19 नवंबर को हैदराबाद स्थित केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) में याचिका दायर की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नियुक्ति में वरिष्ठता और अनुभव को नजरअंदाज किया गया है।

BrahMos Aerospace: Why Is the Maker of India's Deadly Missile Embroiled in Controversy? Here's the Full Story

BrahMos Aerospace: कैट ने मांगा चार हफ्तों में जवाब

BrahMos Aerospace भारत के डिफेंस सिस्टम का अहम हिस्सा है। यहां चल रहे इस नेतृत्व विवाद ने कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं पर संकट खड़ा कर दिया है। डॉ. नाम्बी नायडू का दावा है कि वह डॉ. जोशी से सात साल वरिष्ठ हैं और उनका अभी तीन साल का सेवा काल अभी बाकी है। उन्होंने मांग की है कि नियुक्ति प्रक्रिया में एक्सपीरियस और सीनियरिटी को महत्व दिया जाए।

वहीं केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) ने इस मामले में DRDO और डॉ. जोशी से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 30 दिसंबर को होगी।

डॉ. नाम्बी की पृथ्वी कार्यक्रम में अहम भूमिका

डॉ. नाम्बी नायडू प्रथ्वी मिसाइल प्रोग्राम में एक अहम भूमिका निभा चुके हैं। वह भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) में मिसाइल प्रोडक्शन मैनेजमेंट का नेतृत्व कर चुके हैं। उनके अनुभव और प्रबंधन कौशल को देखते हुए BrahMos के कई बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए उन्हें जिम्मेदारी दी जाती है।

डॉ. जोशी की LRSAM और MRSAM में अहम भूमिका

डॉ. जोशी ने लॉन्ग रेंज और मीडियम रेंज सर्फेस-टू-एयर मिसाइल (LRSAM और MRSAM) के डेपलपमेंट में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने इन प्रणालियों को भारत के स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर (IAC) में सफलतापूर्वक जोड़ा और इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी मजबूत किया।

सूत्रों के मुताबिक, इस विवाद को जल्द से जल्द सुलझाना बेहद जरूरी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “रक्षा मंत्रालय के लिए इस विवाद को अनदेखा करना मुश्किल होगा। BrahMos भारत की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं के लिए बहुत अहम है। इस तरह के विवादों से संस्थान की विश्नसनियता को नुकसान पहुंच सकता है।”

BrahMos मिसाइल सिस्टम अपनी तेज रफ्तार और अचूक मारक क्षमता के लिए जानी जाती है। यह भारत और रूस के सहयोग से बनी एक मजबूत मिसाइल सिस्टम है।

BrahMos फिलहाल इंडोनेशिया, वियतनाम और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के साथ निर्यात को लेकर बातचीत के अंतिम चरण में है। यह सौदे भारत की रणनीति का हिस्सा हैं, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं।

फिलीपींस पहले ही BrahMos मिसाइल का ऑर्डर दे चुका है। जनवरी 2022 में हुए $375 मिलियन के इस अनुबंध के तहत अगली सप्लाई का इंतजार कर रहा है। भारत की सेना और वायुसेना भी इस मिसाइल प्रणाली को खरीदने पर विचार कर रही हैं।

BrahMos Aerospace में चल रहा यह विवाद जल्द खत्म होना चाहिए। यह कंपनी भारत की सुरक्षा और वैश्विक रक्षा बाजार में हमारी स्थिति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है। रक्षा मंत्रालय को इस मामले को सुलझाने के लिए तुरंत और निर्णायक कदम उठाने होंगे, ताकि देश की रक्षा क्षमता पर इसका असर न पड़े और BrahMos की प्रतिष्ठा पर कोई आंच न आने पाए।

Navy Day 2024: नौसेना प्रमुख बोले- 2025 में हर महीने एक नया जहाज नौसेना में होगा शामिल, 2036-37 तक मिलेगी देश को पहली परमाणु हमलावर पनडुब्बी (SSN)

Navy Day 2024: Navy Chief Announces Contracts for Three Scorpene Submarines Next Month, Sets Goal to Build Six SSNs

Navy Day 2024: भारतीय नौसेना अगले कुछ महीनों में बड़े रणनीतिक कदम उठा सकती है। नौसेना प्रमुख एडमिरल डीके त्रिपाठी ने सोमवार को संकेत दिए कि जल्द ही तीन अतिरिक्त स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों और 26 नए लड़ाकू विमानों के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत किए जा सकते हैं। बता दें कि नौसेना प्रमुख ने ये एलान नौसेना दिवस से ठीक पहले किया है। नौसेना दिवस हर साल 4 दिसंबर को 1971 के युद्ध में कराची पर नौसेना के हमले की याद में मनाया जाता है।

Navy Day 2024: Navy Chief Announces Contracts for Three Scorpene Submarines Next Month, Sets Goal to Build Six SSNs

Navy Day 2024: तीन स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का ऑर्डर अंतिम चरण में

एडमिरल त्रिपाठी ने बताया कि तीन स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों के लिए “रिपीट ऑर्डर” की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा, “यह केवल औपचारिकताओं को पूरा करने की बात है।” ये पनडुब्बियां मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और फ्रांस की नेवल ग्रुप के सहयोग से बनाई जाएंगी।

पहले से ही छह स्कॉर्पीन पनडुब्बियां बनाई जा चुकी हैं, जिनमें से पांच को नौसेना में शामिल किया जा चुका है। यह नई पनडुब्बियां आने से भारत की समुद्री सुरक्षा प्रणाली को और मजबूती मिलेगी।

एडमिरल डीके त्रिपाठी ने यब भी बताया कि देश को पहली परमाणु हमलावर पनडुब्बी (SSN) 2036-37 तक मिल सकती है। इसके बाद, दूसरी पनडुब्बी अगले कुछ वर्षों में तैयार हो जाएंगी।

नई परियोजनाएं और योजनाएं

नौसेना प्रमुख ने बताया कि 32 नए जहाजों के लिए आवश्यकता स्वीकृति (Acceptance of Necessity) दी गई है, जिनमें सात स्टील्थ जहाज (P-17B) और छह पनडुब्बियां (P-75I) शामिल हैं। इसके अलावा, पुराने चेतक हेलीकॉप्टरों को बदलने के लिए 60 नए UH-मेरिटाइम हेलीकॉप्टर खरीदने की भी योजना है।

एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, “अगले साल औसतन हर महीने एक नया जहाज नौसेना में शामिल किया जाएगा। यह भारत की समुद्री ताकत को और मजबूत करेगा।”

परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां

नौसेना प्रमुख ने बताया कि INS अरिहंत, जो पहली परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) है, ने कई डिटरेंस पेट्रोल पूरे कर लिए हैं। दूसरी SSBN, INS अरिघात, हाल ही में कमीशन हुई है और फिलहाल परीक्षण के दौर से गुजर रही है, जिसमें मिसाइल परीक्षण भी शामिल है।

भारत की ताकत बढ़ाने की तैयारी

2036 तक परमाणु हमलावर पनडुब्बी और अन्य जहाजों के आने से भारतीय नौसेना की ताकत में बड़ी बढ़ोतरी होगी। एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, “ये योजनाएं हमारे सुरक्षा और रणनीतिक लक्ष्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।”

भारत अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति में एक प्रमुख भूमिका निभाने के लिए तेजी से कदम उठा रहा है।

राफेल-एम लड़ाकू विमानों को लेकर कॉन्ट्रैक्ट

फ्रांसीसी मूल के राफेल-एम लड़ाकू विमानों को नौसेना में शामिल करने की प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है। एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, “कैबिनेट सुरक्षा समिति से मंजूरी के लिए मामला जल्द ही जाएगा और अनुबंध अगले महीने तक हस्ताक्षरित होने की संभावना है।” ये लड़ाकू विमान भारतीय नौसेना के समुद्री एयरक्राफ्ट कैरियर पर तैनात किए जाएंगे। वर्तमान में नौसेना रूसी मूल के मिग-29के लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल करती है।

चीन और पाकिस्तान पर नजर

एडमिरल त्रिपाठी ने बताया कि भारतीय नौसेना भारतीय महासागर क्षेत्र में चीन के जहाजों और पनडुब्बियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही है। उन्होंने कहा, “पिछले एक साल में हमने चीनी नौसेना पर करीब से नजर रखी। और हमें पता है कि कौन कहां है और क्या कर रहा है।”

पाकिस्तानी नौसेना की बढ़ती ताकत पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि चीन इसमें मदद कर रहा है। “पाकिस्तान की खस्ता आर्थिक स्थिति के बावजूद, उन्होंने हथियारों को प्राथमिकता दी है। वे 50 जहाजों के बेड़े तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हमें उनके इस कदम से कोई खतरा नहीं है। हम अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।”

INS अरिघात और परमाणु शक्ति का विस्तार

भारत की सुरक्षा रणनीति को और मजबूती देते हुए हाल ही में परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम पनडुब्बी आईएनएस अरिघात को शामिल किया गया। इसे नौसेना के ट्रायड सुरक्षा ढांचे का हिस्सा बताया गया। यह पनडुब्बी समुद्र से परमाणु हमला करने की क्षमता देती है।

इसके अलावा, दो नई परमाणु क्षमता से चलने वाली पनडुब्बियों (एसएसएन) को बनाने की योजना को भी सरकारी मंजूरी मिल चुकी है। एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, “हमारा लक्ष्य छह एसएसएन बनाने का है, जो हमारी रक्षा रणनीति को और सुदृढ़ करेगा।”

Navy Day 2024: नौसेना प्रमुख बोले, फ्रांस से 26 राफेल मरीन विमान खरीदने का समझौता अगले महीने तक, चीन-पाकिस्तान पर कही ये बड़ी बात

Navy Day 2024: Navy Chief Admiral Dinesh K Tripathi Says Deal for 26 Rafale Marine Aircraft with France Likely Next Month, Makes Key Statements on China and Pakistan

Navy Day 2024: 4 दिसंबर को मनाए जाने वाले नौसेना दिवस की पूर्व संध्या पर भारतीय नौसेना के प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए नौसेना की उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान ऑपरेशन ट्राइडेंट में नौसेना के साहसिक प्रदर्शन को याद करते हुए हमारे वीर जवानों की वीरता को नमन किया।

Navy Day 2024: Navy Chief Admiral Dinesh K Tripathi Says Deal for 26 Rafale Marine Aircraft with France Likely Next Month, Makes Key Statements on China and Pakistan

कराची पर किया गया ऐतिहासिक हमला

नौसेना प्रमुख ने ऑपरेशन ट्राइडेंट की बात करते हुए कहा, “जब हमारे मिसाइल बोट से दागे गए मिसाइलों ने कराची बंदरगाह को आग के हवाले कर दिया, वह हमारे सैनिकों की अदम्य वीरता और साहस का प्रतीक है। यह समय है कि हम उन सभी वीर सैनिकों को याद करें जिन्होंने उस युद्ध में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।”

पिछले साल सिंधुदुर्ग में आयोजित हुए नौसेना दिवस के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मुख्य अतिथि थे। इस बार का आयोजन पुरी में किया गया है, जो एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध स्थान है।

पुरी में होगा समारोह

उन्होंने बताया कि इस वर्ष नौसेना दिवस का मुख्य कार्यक्रम ओडिशा के पुरी में आयोजित किया जाएगा, जहां राष्ट्रपति और सशस्त्र बलों के सुप्रीम कमांडर मुख्य अतिथि होंगे। यह आयोजन भारतीय नौसेना के सामरिक महत्व और उसके राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान को उजागर करेगा।

नौसेना के सफल ऑपरेशन्स

नौसेना प्रमुख ने बताया कि भारतीय नौसेना की ताकत केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं है। उन्होंने ऑपरेशन के कई उदाहरण दिए, जैसे कि अदन की खाड़ी और उत्तरी अरब सागर में की गई एंटी-पायरेसी ऑपरेशन्स। नौसेना ने 2000 किलोमीटर दूर समुद्र में मार्कोस कमांडो को पैराड्रॉपिंग कर एक असाधारण अभियान को अंजाम दिया।

नौसेना प्रमुख ने हाल ही में हुए एमवी रुएन मामले का जिक्र किया और बताया कि हमारी नौसेना ने ड्रग्स की तस्करी रोकने के लिए कई सफल अभियानों को अंजाम दिया है। साथ ही, रक्षा मंत्री ने हाल ही में एसएसबीएन आईएनएस अरिघाट को कमीशन किया, जो देश की सामरिक ताकत को और बढ़ाता है।

  • गुल्फ ऑफ एडन और उत्तरी अरब सागर में तैनात नौसेना इकाइयों ने समुद्री डकैती के खिलाफ सफल ऑपरेशन किए।
  • एडमिरल ने बताया कि भारतीय नौसेना ने 2000 किलोमीटर दूर अरब सागर में मार्कोस कमांडो को पैराड्रॉप कर एक असाधारण मिशन पूरा किया।
  • नौसेना ने एमवी रुएन जैसे ड्रग्स तस्करी मामलों में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

उन्होंने रक्षा मंत्री द्वारा हाल ही में आईएनएस अरिघाट के कमीशन को नौसेना की सामरिक क्षमता में एक मील का पत्थर बताया।

आत्मनिर्भर भारत में नौसेना की भूमिका

नौसेना प्रमुख ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत नौसेना की उपलब्धियों पर चर्चा की। आत्मनिर्भर भारत अभियान में नौसेना की भूमिका पर चर्चा करते हुए, एडमिरल त्रिपाठी ने बताया कि आज 62 जहाज और एक पनडुब्बी देश में ही निर्माणाधीन हैं। उन्होंने कहा, “भारतीय नौसेना आत्मनिर्भरता के मोर्चे पर हमेशा अग्रणी रही है।” वहीं, परीक्षण में सफल होने के बाद के-4 मिसाइल को जल्द ही नौसेना में शामिल करने की योजना है।

उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और मिनिकॉय द्वीपों के विकास कार्यों पर भी प्रकाश डाला। जब उनसे अमेरिका के साथ सहयोग पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय नौसेना को किसी और की सहायता की आवश्यकता नहीं है।

पाकिस्तान और चीन पर नजर

भारतीय महासागरों में अन्य देशों की मौजूदगी पर नौसेना प्रमुख ने कहा, “महासागर सभी के लिए खुले हैं। कोई भी देश यहां संचालन कर सकता है, बशर्ते वह हमारी सुरक्षा को प्रभावित न करे।”

एडमिरल त्रिपाठी ने पाकिस्तान नौसेना की अप्रत्याशित वृद्धि पर टिप्पणी करते हुए कहा, “वे 50 जहाजों की नौसेना बनने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह आश्चर्यजनक है कि वे इतने जहाज कैसे प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने अपने लोगों के कल्याण के बजाय हथियारों को प्राथमिकता दी है।”

चीन के साथ बांग्लादेश के सहयोग पर उन्होंने कहा कि यह एक सामान्य प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन भारतीय नौसेना हर गतिविधि पर पैनी नजर रख रही है। उन्होंने कहा, “हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हमारे राष्ट्रीय हितों पर कोई प्रभाव न पड़े।”

Navy Day 2024: Navy Chief Admiral Dinesh K Tripathi Says Deal for 26 Rafale Marine Aircraft with France Likely Next Month, Makes Key Statements on China and Pakistan

भविष्य की योजनाएं और नई परियोजनाएं

नौसेना प्रमुख ने बताया कि अगले वर्ष से हर महीने औसतन एक नया जहाज नौसेना में शामिल होगा।

  • आईएनएस विक्रमादित्य का मरम्मत कार्य चार महीने में पूरा होगा।
  • दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने पर बातचीत चल रही है।
  • रफाल एम और तीन अतिरिक्त स्कॉर्पीन पनडुब्बियों की डील अगले महीने तक साइन होने की संभावना है।
  • परमाणु हमला पनडुब्बी (SSN) के लिए 2036-37 की समयसीमा तय की गई है।

नौसेना का बढ़ता वैश्विक प्रभाव

एडमिरल ने बताया कि इस साल भारतीय नौसेना ने रिमपैक और रूस में एक साथ जहाज तैनात कर अपनी वैश्विक क्षमताओं का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा, “यह भारतीय नौसेना की पहुंच, स्थायित्व और परिचालन क्षमता को दर्शाता है।”

नौसेना का संदेश

एडमिरल त्रिपाठी ने प्रधानमंत्री के एक उद्धरण का जिक्र करते हुए कहा, “युद्ध के रूप, संसाधन और तकनीक बदल रही है। भारतीय नौसेना इन बदलावों के साथ खुद को ढालते हुए हमेशा देश की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है।”

उन्होंने अंत में कहा कि नौसेना देश की संप्रभुता, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के प्रति हमेशा समर्पित है। इस नौसेना दिवस पर हमें हमारे वीर सैनिकों के साहस और बलिदान को याद करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त करना चाहिए।

AGNI WARRIOR-2024: सिंगापुर और भारतीय सेना के बीच समाप्त हुआ संयुक्त सैन्य अभ्यास, देवलाली फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय सेना ने दिखाई अपनी फायर पावर

AGNI WARRIOR-2024: Joint Military Exercise Between Singapore and Indian Army Concludes, Indian Army Demonstrates Firepower at Devlali Field Firing Ranges

AGNI WARRIOR-2024: महाराष्ट्र के देवलाली स्थित फील्ड फायरिंग रेंज में 30 नवंबर 2024 को भारतीय सेना और सिंगापुर सशस्त्र बलों के बीच 13वां संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘अग्नि वॉरियर-2024’ (XAW-2024) का समापन हुआ। यह तीन दिवसीय अभ्यास 28 से 30 नवंबर 2024 तक आयोजित किया गया, जिसमें सिंगापुर आर्टिलरी के 182 और भारतीय सेना के रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी के 114 सैनिकों ने भाग लिया।

AGNI WARRIOR-2024: Joint Military Exercise Between Singapore and Indian Army Concludes, Indian Army Demonstrates Firepower at Devlali Field Firing Ranges

AGNI WARRIOR-2024: अभ्यास का उद्देश्य और महत्व

इस अभ्यास का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत एक बहुराष्ट्रीय बल के रूप में संयुक्त संचालन के लिए आपसी समझ, तालमेल और प्रक्रियाओं को अधिकतम करना था। इसमें दोनों सेनाओं की तोपखाना इकाइयों द्वारा नई पीढ़ी के उपकरणों का उपयोग, संयुक्त फायर पावर की योजना और निष्पादन का प्रदर्शन किया गया।

इस अवसर पर आर्टिलरी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल आदोश कुमार, आर्टिलरी स्कूल के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल एनएस सरना, और सिंगापुर सशस्त्र बलों के चीफ आर्टिलरी ऑफिसर कर्नल ओंग चियू पर्न मौजूद थे। उन्होंने दोनों सेनाओं के जवानों की पेशेवर दक्षता और उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की।

AGNI WARRIOR-2024: Joint Military Exercise Between Singapore and Indian Army Concludes, Indian Army Demonstrates Firepower at Devlali Field Firing Ranges

संयुक्त अभ्यास की विशेषताएं

‘अग्नि वॉरियर-2024’ में दोनों सेनाओं ने अपने अनुभव, कौशल और तकनीकी क्षमताओं का आदान-प्रदान किया। इस दौरान:

  1. संयुक्त योजना और समन्वय: दोनों सेनाओं ने एक-दूसरे की प्रक्रियाओं को समझने और सामंजस्य स्थापित करने पर काम किया।
  2. आधुनिक तकनीकों का उपयोग: तोपखाना इकाइयों ने उन्नत उपकरणों और आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए रणनीतियों को साझा किया।
  3. बेहतरीन संचालन: फायर पावर प्लानिंग के जटिल पहलुओं को प्रदर्शित करते हुए, दोनों सेनाओं ने एकीकृत संचालन के लिए अपने दृष्टिकोण का विकास किया।
  4. बेहतर तैयारी: सिंगापुर सशस्त्र बलों के जवानों को भारतीय सेना के साथ मिलकर फायर पावर प्लानिंग और निष्पादन की बारीकियों को समझने का मौका मिला।

अभ्यास के समापन समारोह में मौजूद अधिकारियों ने जवानों का उत्साहवर्धन किया। लेफ्टिनेंट जनरल आदोश कुमार ने कहा कि इस तरह के अभ्यास दोनों देशों के सैन्य सहयोग को मजबूत करते हैं और आपसी विश्वास बढ़ाते हैं। कर्नल ओंग चियू पर्न ने कहा कि सिंगापुर और भारत के बीच रक्षा साझेदारी समय के साथ और मजबूत हो रही है।

AGNI WARRIOR-2024: Joint Military Exercise Between Singapore and Indian Army Concludes, Indian Army Demonstrates Firepower at Devlali Field Firing Ranges

दोनों सेनाओं की साझेदारी का महत्व

सिंगापुर और भारतीय सेनाओं के बीच यह संयुक्त सैन्य अभ्यास दर्शाता है कि कैसे दो अलग-अलग देशों की सेनाएं साझा उद्देश्यों और मूल्यों के लिए एक मंच पर आ सकती हैं। यह अभ्यास न केवल सैन्य कौशल को बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है, बल्कि दोनों देशों के बीच मित्रता और सहयोग को भी बढ़ावा देता है।

संयुक्त अभ्यास का भविष्य

‘अग्नि वॉरियर-2024’ इस बात का प्रमाण है कि भारतीय सेना और सिंगापुर सशस्त्र बल उन्नत तकनीक, पेशेवर प्रशिक्षण और सामरिक सहयोग में नए आयाम स्थापित कर रहे हैं। इस अभ्यास ने दोनों देशों को अपनी सैन्य प्रक्रियाओं को साझा करने और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर तरीके से तैयार होने का मौका दिया।

AGNI WARRIOR-2024: Joint Military Exercise Between Singapore and Indian Army Concludes, Indian Army Demonstrates Firepower at Devlali Field Firing Ranges

ऊंचा हुआ सैनिकों का मनोबल

अभ्यास के दौरान जवानों ने कठिन परिस्थितियों में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया। भारतीय और सिंगापुर के सैनिकों ने अपनी उत्कृष्ट क्षमता और सामरिक कौशल का परिचय देते हुए दिखाया कि वे किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग का प्रतीक

‘अग्नि वॉरियर’ जैसा अभ्यास यह दर्शाता है कि भारत वैश्विक स्तर पर अपने रक्षा साझेदारों के साथ सहयोग को प्राथमिकता देता है। यह अभ्यास न केवल भारत और सिंगापुर के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत करता है, बल्कि वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए भी एक संदेश है।

‘अग्नि वॉरियर-2024’ भारतीय सेना और सिंगापुर सशस्त्र बलों के बीच गहरे सैन्य संबंधों का प्रतीक है। यह दोनों देशों के जवानों को नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करने के साथ-साथ एक मजबूत साझेदारी का निर्माण भी करता है। इस तरह के अभ्यास भविष्य में और भी व्यापक और प्रभावी होंगे, जो दोनों देशों की रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।