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Indian Air Force HADR: श्रीलंका में फंसे पाकिस्तानी नागरिक समेत 45 लोगों को IAF ने किया रेस्क्यू, 400 से अधिक भारतीयों की सुरक्षित वापसी

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Indian Air Force HADR: श्रीलंका में साइक्लोन दित्वाह और भारी बारिश से आए भीषण लैंडस्लाइड के बाद हालात गंभीर हो गए हैं। कई इलाके पूरी तरह सड़क संपर्क से कट गए हैं। प्रभावित इलाकों में इंडियन एयर फोर्स ने ऑपरेशन सागर बंधु के तहत एक बड़ा मानवीय राहत अभियान (HADR) शुरू किया है। इस अभियान में भारतीय वायुसेना ने पहले ही दिन न सिर्फ भारतीय नागरिकों को बल्कि पाकिस्तान के एक नागरिक समेत 45 से अधिक विदेशी नागरिकों को भी सुरक्षित निकाला जा चुका है।

श्रीलंका के कोटमाले क्षेत्र में भारी भूस्खलन के बाद सड़कें बह गईं और क्षेत्र पूरी तरह अलग-थलग पड़ गया। ऐसे में वायुसेना के एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टरों ने दिनभर लगातार उड़ानें भरकर फंसे लोगों को निकालकर कोलंबो पहुंचाया गया।

Operation Sagar Bandhu: चक्रवात ‘दित्वाह’ से त्रस्त श्रीलंका और तमिलनाडु में फंसे लोगों की मदद में जुटी भारतीय वायुसेना, शुरू किया ऑपरेशन सागर बंधु

कोटमाले से 45 लोगों को हेलीकॉप्टरों द्वारा कोलंबो पहुंचाया गया, जिनमें 6 गंभीर रूप से घायल, 4 छोटे बच्चे और कई विदेशी नागरिक शामिल थे। इन नागरिकों में 12 भारतीय थे, जबकि अन्य में जर्मनी, साउथ अफ्रीका, स्लोवेनिया, ब्रिटेन, पोलैंड, बेलारूस, ईरान, ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित कई देशों के निवासी थे। इसके अलावा, कई श्रीलंकाई नागरिक भी शामिल थे।

इसके अलावा भारतीय वायुसेना ने भिष्म कैप्सूल और एक मेडिकल टीम को भी श्रीलंका भेजा। साथ ही 400 से अधिक भारतीय नागरिकों को रात 8 बजे तक सुरक्षित भारत वापस लाया गया। वायुसेना के ट्रांसपोर्ट विमान पूरे समय सक्रिय रहे और देर रात तक कई और उड़ानों की योजना बनाई गई है, ताकि सभी फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके।

इस राहत कार्य में वायुसेना के एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टरों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कई यात्री ऐसे जगह फंसे थे जहां हेलीकॉप्टर उतर नहीं सकता था। मुश्किल हालात के बीच ऊंचे इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए पहले एक गरुड़ कमांडो को उतारा गया, जिसने उन्हें पैदल चलते हुए एक सुरक्षित हेलीपैड तक पहुंचाया। जिसके बाद वहां से सभी 24 लोगों को एयरलिफ्ट कर कोलंबो लाया गया।

वायुसेना ने अलग से एक मिशन चलाकर 3 गंभीर घायल लोगों को भी तुरंत कोलंबो के अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज शुरू किया गया। इसके अलावा राहत ऑपरेशन को और मजबूती से चलाने के लिए भारतीय वायुसेना ने श्रीलंकाई सेना के 57 सैनिकों को हेलीकॉप्टरों के जरिये लैंडस्लाइड क्षेत्र में एयरलिफ्ट किया। ये टीमें राहत और रास्ते साफ करने में स्थानीय प्रशासन की मदद कर रही हैं।

वहीँ, तमिलनाडु में राहत सामग्री और एनडीआरएफ (राष्ट्रीय डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स) दल पहुंचाने के लिए भारतीय वायुसेना के ट्रांसपोर्ट विमानों ने भी उड़ान भरी। सूत्रों के अनुसार, पुणे से एक सी-17 विमान चेन्नई भेजा गया जिसमें भारी उपकरण और राहत सामग्रियां थीं।

भारतीय वायुसेना का कहना है कि इन विमानों ने अब तक कुल 27 टन राहत सामग्री श्रीलंका पहुंचाई है। इसमें मेडिकल किट, आपदा राहत उपकरण, पोर्टेबल हॉस्पिटल “भिष्म क्यूब” और अन्य जरूरी सामान शामिल था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना जताई और कहा कि भारत हमेशा अपने समुद्री पड़ोसी के साथ खड़ा है। विदेश मामलों के मंत्रालय और एनडीआरएफ की स्थानीय टीमों ने मिलकर राहत अभियान को दिशा दी। इस ऑपरेशन का नाम ऑपरेशन सागर बंधु रखा गया है, जिसमें भारत ने “पड़ोसी प्रथम” नीति के अनुरूप तुरंत कदम उठाए। राहत, रेस्क्यू और पुनर्स्थापना कार्य तेजी से जारी है।

राहत एवं रेस्क्यू अभियान में वायुसेना के साथ-साथ श्रीलंकाई नौसेना, सेना, व अन्य अग्निशमन व राहत एजेंसियां भी जुटी हुई हैं। प्रभावित नागरिकों में बच्चों, बुजुर्गों और घायल शामिल हैं, जिन्हें प्राथमिक चिकित्सा के बाद सुरक्षित कोलंबो या भारत भेजा गया।

INS Taragiri delivery: भारतीय नौसेना को मिली प्रोजेक्ट 17ए की तीसरी स्टेल्थ फ्रिगेट, इस जहाज पर लगी हैं घातक बराक मिसाइलें

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INS Taragiri delivery: मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने भारतीय नौसेना को प्रोजेक्ट 17ए की तीसरी स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस तारागिरी औपचारिक रूप से सौंप दी है। यह नीलगिरी क्लास की चौथी फ्रिगेट है। इस प्रोजेक्ट के तहत प्रोजेक्ट 7 अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं। ये नई पीढ़ी की फ्रिगेट हैं जो पुरानी शिवालिक क्लास (प्रोजेक्ट 17) से कहीं ज्यादा ताकतवर, स्टील्थ और स्वदेशी हैं।

इस प्रोजेक्ट के तहत आईएनएस तारागिरी (यार्ड 12653) एमडीएल की बनाई तीसरी फ्रिगेट है। यह डिलीवरी भारतीय नौसेना के आधुनिक बेड़े में एक बड़ा इजाफा है।

आईएनएस तारागिरी का निर्माण वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो के डिजाइन पर आधारित है और इसे वॉरशिप ओवरसीइंग टीम मुंबई ने मॉनिटर किया है। आईएनएस तारागिरी की कील लेइंग सेरेमनी 10 सितंबर 2020 को हुई थी, जिसके बाद 14 सितंबर 2022 को इसे लॉन्च किया गया। सभी सी-ट्रायल्स सफलतापूर्वक पूरे होने के बाद अब यह पूरी तरह नौसेना को सौंपा जा चुकी है। इसकी कमीशनिंग 2026 के शुरुआत में होने की उम्मीद है।

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तारागिरी वास्तव में भारतीय नौसेना की पारंपरिक विरासत का हिस्सा भी है। इससे पहले 1980 से 2013 तक एक लींडर क्लास की आईएनएस तारागिरी नौसेना में 33 साल तक सेवा दे चुकी है। नई तारागिरी उस गौरवशाली परंपरा को आधुनिक और कहीं ज्यादा ताकतवर है।

तारागिरी का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह स्वदेशी है। इसकी लंबाई 149 मीटर और वजन करीब 6,670 टन है। यह एक मल्टी-मिशन स्टेल्थ फ्रिगेट है, जो हवा, समुद्र और पानी के भीतर तीनों तरह की लड़ाई एक साथ लड़ने की क्षमता रखती है। इसका स्टेल्थ डिजाइन ऐसा है कि इसका रडार, थर्मल और एकाउस्टिक सिग्नेचर बेहद कम रहता है, जिससे दुश्मन के सेंसर इसे पकड़ नहीं पाते।

हथियारों के मामले में यह बेहद घातक प्लेटफॉर्म है। इसके अलावा जहाज में बराक-8 और बराक-8 ईआर मिसाइलों के लिए 32-सेल वर्टिकल लॉन्च सिस्टम लगा है, जो 150–200 किलोमीटर दूरी तक हवाई खतरों को नष्ट कर सकता है। इसके अलावा जहाज में आठ सुपरसॉनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलें लगी हैं जो समुद्र और जमीन दोनों पर हमला कर सकती हैं। मेन गन के तौर पर इसमें 76 एमएम सुपर रैपिड गन माउंट सिस्टम और नजदीकी सुरक्षा के लिए दो एके-630 क्लोज-इन वेपन सिस्टम लगे हैं। साथ ही, यह आरबीयू-6000 एंटी-सबमरीन रॉकेट और टॉरपीडो ट्यूब से भी लैस है।

सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक्स की बात करें तो तारागिरी भारत के एमएफ-स्टार एईएसए रडार से लैस है, जो 360-डिग्री में सैकड़ों लक्ष्यों को एक साथ ट्रैक कर सकता है। जहाज में स्वदेशी हुमसा-एनजी सोनार और एडवांस्ड टोन्ड एरे सोनार (एटीएएस) भी लगा है, जो पनडुब्बी की गतिविधियों को दूर से पकड़ सकते हैं। पूरा कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम भारत में तैयार किया गया है, जो कई सेंसर और हथियारों को इंटीग्रेट करके ऑपरेट करता है।

आईएनएस तारागिरी में आधुनिक स्टेल्थ डिजाइन का उपयोग किया गया है जिससे इसका रडार, थर्मल, मैग्नेटिक और एकाउस्टिक सिग्नेचर काफी कम रहता है और दुश्मन के सेंसर इसे पकड़ना मुश्किल होता है।

आईएनएस तारागिरी प्रोजेक्ट 17ए का हिस्सा है, जिसे नीलगिरि क्लास भी कहा जाता है। इस कार्यक्रम के तहत सात आधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं। इनमें से तीन मझगांव डॉकयार्ड में और चार गार्डन रीच शिपबिल्डर्स लिमिटेड कोलकाता में बन रहे हैं। यह पूरा प्रोजेक्ट भारतीय नौसेना की “मल्टी-रोल” क्षमता को बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है, जिसमें हवाई रक्षा, समुद्री युद्ध, जमीन पर हमला और एंटी-सबमरीन ऑपरेशन शामिल हैं।

आईएनएस तारागिरी की डिलीवरी भारत के जहाज निर्माण क्षेत्र की क्षमता का प्रमाण है। एमडीएल ने पिछले 11 महीनों में प्रोजेक्ट 17ए की चार फ्रिगेट नौसेना को सौंपकर भारतीय निर्माण क्षमता की ताकत दिखाई है। पहले जहाज के निर्माण में जहां 93 महीने लगे थे, वहीं तारागिरी को सिर्फ 81 महीनों में पूरा कर लिया गया। इस प्रोजेक्ट में 200 से अधिक एमएसएमई कंपनियों का योगदान रहा और लगभग 4,000 लोगों को सीधी तथा 10,000 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिला।

Operation Sagar Bandhu: चक्रवात ‘दित्वाह’ से त्रस्त श्रीलंका और तमिलनाडु में फंसे लोगों की मदद में जुटी भारतीय वायुसेना, शुरू किया ऑपरेशन सागर बंधु

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Operation Sagar Bandhu: मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियान के तहत भारतीय वायुसेना लगातार श्रीलंका और तमिलनाडु में फंसे लोगों तक राहत पहुंचाने में लगी हुई है। चक्रवात ‘दित्वाह’ के कारण श्रीलंका में भारी तबाही आने के बाद भारत ने तुरंत सहायता भेजी और वायुसेना ने राहत और बचाव कार्यों की कमान संभाल ली।

Operation Sindoor: भारतीय वायुसेना के वाइस चीफ एयर मार्शल नरमदेश्वर तिवारी बोले- ऑपरेशन सिंदूर में दिखा इंटीग्रेटेड नेटवर्क का कमाल

29 नवंबर की रात से ही वायुसेना ने अपने भारी परिवहन विमानों को राहत अभियान में लगा दिया। पुणे से चेन्नई के लिए एक सी17 ग्लोबमास्टर ने उड़ान भरी, जिसमें एनडीआरएफ टीम और उनके उपकरण लोड किए गए थे। इसी दौरान हिंडन एयर बेस से सी-130 सुपर हरक्यूलिस और आईएल-76 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट राहत सामग्री लेकर श्रीलंका के लिए रवाना हुए। इन विमानों में कुल 21 टन राहत सामग्री, जरूरी दवाइयां, मेडिकल किट और भिष्म क्यूब्स जैसी आपदा सहायता सामग्री शामिल थी।

30 नवंबर की सुबह स्थिति और गंभीर हो गई, जिसके बाद वायुसेना ने राहत मिशन को और तेज कर दिया। सुबह 0500 बजे से ही हिंडन और तिरुवनंतपुरम से सी-130 और आईएल-76 उड़ान भरने के लिए तैयार थे। इनमें से एक आईएल-76 पहले ही कोलंबो उतर चुका था और वहीं से फंसे हुए भारतीय नागरिकों को वापस लाने की तैयारी शुरू हो गई। वायुसेना के अनुसार, इन दोनों विमानों से कोलंबो एयरपोर्ट पर फंसे हुए भारतीयों को सुरक्षित भारत लाया जाएगा।

श्रीलंका में फंसे कई भारतीय नागरिक अपने परिवारों से संपर्क नहीं कर पा रहे थे। तूफान के कारण फ्लाइटें रद्द हुईं और लगभग 800–1000 भारतीय कोलंबो में फंस गए। इसी स्थिति को देखते हुए भारत ने तुरंत ऑपरेशन सागर बंधु शुरू किया। इस अभियान के तहत बचाव कार्यों को तेज करने के लिए भारतीय वायुसेना ने कोलंबो में एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टर भी तैनात किए, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से मदद पहुंचाई जा सके।

तमिलनाडु में भी हालात गंभीर थे। चेन्नई और आसपास के तटीय इलाकों में राहत और बचाव कार्यों को मजबूती देने के लिए वायुसेना ने अतिरिक्त दल और राहत सामग्री भेजी। इसी क्रम में वडोदरा से एक और सी-17 ग्लोबमास्टर को चेन्नई के लिए लोड किया जा रहा था, जिसमें एनडीआरएफ की टीम और भारी उपकरण शामिल थे।

भारतीय वायुसेना ने बताया कि राहत मिशन के दौरान कोई भी विमान खाली नहीं लौट रहा है। जहां से राहत सामग्री उतारी जा रही है, वहीं से फंसे हुए भारतीयों को वापस लाया जा रहा है। यह मिशन निरंतर चल रहा है ताकि श्रीलंका और तमिलनाडु में फंसे नागरिकों तक समय पर मदद पहुंच सके।

Indian Navy Car Expedition: 290 साल पुराने नेवल डॉकयार्ड के सम्मान में भोपाल से शुरू हुई नौसेना की कार यात्रा, सुदर्शन कॉर्प्स के GoC ने दिखाई हरी झंडी

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Indian Navy Car Expedition: भोपाल के द्रोणाचल मिलिट्री कैंटोनमेंट में आज भारतीय नौसेना के इंडियन नेवी कार एक्सपीडिशन को औपचारिक रूप से फ्लैग-ऑफ किया गया। यह कार यात्रा मुंबई स्थित नेवल डॉकयार्ड की 290वीं वर्षगांठ मनाने के लिए आयोजित की गई है, ताकि देश की समुद्री विरासत और तीनों सेनाओं के बीच मजबूत संबंधों को प्रदर्शित किया जा सके।

मध्य प्रदेश के मिलिट्री एरिया भोपाल कैंट में शनिवार सुबह को सुदर्शन चक्र कॉर्प्स के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल अरविंद चौहान ने भारतीय नौसेना के इंडियन नेवी कार एक्सपीडिशन को औपचारिक रूप से फ्लैग-ऑफ किया।

Indian Navy Modernisation: ब्लू वाटर फोर्स बनने के लिए तैयार है भारतीय नौसेना, 2026 में शामिल होंगे 17 नए वॉरशिप

यह कार एक्सपीडिशन मुंबई स्थित नेवल डॉकयार्ड की स्थापना के 290 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया है। यह डॉकयार्ड वर्ष 1735 में स्थापित हुआ था और तब इसे बॉम्बे डॉकयार्ड के नाम से जाना जाता था। इसका इतिहास लगभग 300 वर्षों से भी ज्यादा पुराना है और इसे एशिया के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित समुद्री प्रतिष्ठानों में गिना जाता है।

 

सन् 1725 से 1821 के बीच इस डॉकयार्ड में 100 टन से बड़े 150 से अधिक जहाज बनाए गए थे। इनमें एचएमएस हिंदुस्तान, एचएमएस एशिया और एचएमएस कॉर्नवालिस जैसे कई महत्वपूर्ण युद्धपोत शामिल थे, जिनका उपयोग बाद में ब्रिटिश रॉयल नेवी ने भी किया। यही नहीं, वर्ष 1750 में यहां एशिया का पहला ड्राई डॉक बॉम्बे डॉक तैयार किया गया, जो आज भी ऑपरेशन में है। इसके बाद बना डंकन डॉक लंबे समय तक यूरोप के बाहर सबसे बड़ा ड्राई डॉक माना गया।

इतिहास ही नहीं, यह डॉकयार्ड 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका में रहा। नौसेना के जहाजों की मरम्मत और मॉडिफिकेशन यहीं किए गए थे। यह स्थान आज भारत के आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण का अहम केंद्र माना जाता है।

भोपाल से शुरू हुई इंडियन नेवी कार एक्सपीडिशन कुल 21 दिनों की यात्रा पर है, जिसे चार चरणों में पूरा किया जाएगा। इस अभियान में कुल 12 आइकॉनिक वाहन शामिल हैं और हर चरण में लगभग 40 प्रतिभागी भाग लेंगे, जिनमें नौसेना के अधिकारी और डिफेंस सिविलियंस शामिल हैं। यह कार रैली मुंबई, शिमला, कल्पा और किन्नौर जैसे स्थानों से होकर गुजरेगी और देशभर में लोगों को नौसेना के इतिहास, क्षमता और राष्ट्र-सेवा से जोड़ने का संदेश देगी।

100 किमी की Malnad Ultra 2025 रेस में उम्र नहीं आई आड़े, सबसे उम्रदराज फिनिशर बने ब्रिगेडियर संजय दिखित

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Malnad Ultra 2025 में भारतीय सेना के अधिकारी ब्रिगेडियर संजय दिखित ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति उम्र से कहीं ज्यादा ताकतवर होती है। 60 वर्ष की उम्र पार करने के बाद भी सेना से रिटायर्ड ब्रिगेडियर दिखित ने देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली 100 किलोमीटर अल्ट्रा-ट्रेल रन को सफलतापूर्वक पूरा किया और इस कैटेगरी में सबसे उम्रदराज फिनिशर बने।

ब्रिगेडियर दिखित मध्य प्रदेश के महू से कर्नाटक के चिकमंगलूर तक लगभग 3,100 किलोमीटर की मोटरसाइकिल राइड करके पहुंचे। इसके बाद उन्होंने सीधे पश्चिमी घाटों की चुनौतीपूर्ण पहाड़ियों में आयोजित इस रन में हिस्सा लिया, जिसे आयोजकों ने “माउंटेन लेवल 4” की कैटेगरी में रखा है। (Malnad Ultra 2025)

Army Chief Sri Lanka Visit: 2021 के बाद श्रीलंका दौरे पर जाएंगे सेना प्रमुख, पहली बार दी ‘ऑपरेशन पवन’ के शहीदों को आधिकारिक श्रद्धांजलि

यह 100 किलोमीटर की रेस दो 50 किलोमीटर लूप में बंटी थी, जिसमें लगभग 95 फीसदी रास्ता जंगलों और कॉफी प्लांटेशनों की ट्रेल्स पर था। पूरे कोर्स में करीब 3,801 मीटर चढ़ाई और उतनी ही उतराई शामिल थी। रास्ते में घना जंगल, तीखे ढलान और फिसलन भरी पगडंडियां थीं। (Malnad Ultra 2025)

ब्रिगेडियर दिखित के लिए मुश्किलें तब और बढ़ गई जब 70 किलोमीटर के बाद तेज बारिश शुरू हो गई और ऊंचाई वाले हिस्सों में घना कोहरा छा गया। रात के अंधेरे में केवल एक हेडलैम्प के सहारे रास्ता तलाशते हुए वे कई बार फिसल कर गिरे भी। गिरने से उनका जूता तक टूट गया और उन्हें एक हेल्प सेंटर पर जूते बदलने पड़े। (Malnad Ultra 2025)

लगभग 38वें किलोमीटर पर गलती से गलत रास्ते पर चले जाने के चलते उन्हें अपना रूट वापस पकड़ने में करीब एक घंटे का नुकसान हुआ। लेकिन उनकी जीपीएस डिवाइस ने अंत में कुल दूरी 103 किलोमीटर दर्ज की। ब्रिगेडियर संजय दिखित बता दिया कि नुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ कोई भी दौड़ कठिन नहीं है, चाहे उम्र कुछ भी हो। (Malnad Ultra 2025)

128 प्रतिभागियों में से केवल 79 ही रेस पूरी कर पाए, और ब्रिगेडियर दिखित उनमें सबसे वरिष्ठ फिनिशर थे। रेस पूरी करने के बाद उन्होंने कहा कि यह अनुभव “सुंदर लेकिन बेहद मुश्किल” था। उन्होंने बताया कि लगातार बारिश, कोहरा, अंधेरा और थकान के बावजूद जंगल के बीच अकेले दौड़ना उनके लिए एक चुनौती थी। (Malnad Ultra 2025)

मलनाड अल्ट्रा में देश-विदेश के अनुभवी ट्रेल-रनर्स हिस्सा लेते हैं और इसे पूरी तरह वालंटियर्स द्वारा आयोजित किया जाता है। इस प्रतियोगिता का मकसद रेसर्स की शारीरिक क्षमता, मानसिक धैर्य और साहस को परखना होता है। (Malnad Ultra 2025)

Kashmir in the Line of Fire: मेजर जनरल महाजन ने अपनी नई किताब में साझा की कश्मीर के जाबांजों की अनसुनी दास्तानें

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Kashmir in the Line of Fire: मेजर (रि.) जनरल रंजन महाजन की नई किताब “कश्मीर इन द लाइन ऑफ फायर” कश्मीर घाटी में कठिन परिस्थितियों में सेवा करने वाले भारतीय सैनिकों को समर्पित है। किताब में उन्होंने सैनिकों के जीवन की उन अनकही कहानियों को शामिल किया है, जो सिर्फ ऑपरेशन नहीं बल्कि साहस, दोस्ती, बलिदान और संघर्ष के बीच मानवीय जज्बातों की सच्ची तस्वीर पेश करती हैं। मेजर जनरल महाजन ने घाटी में अपने लंबे अनुभवों के आधार पर यह भी बताया है कि कैसे आतंकवाद के शुरुआती वर्षों से लेकर आज तक कश्मीर का माहौल बदला और कैसे भारतीय सेना ने अपने काउंटर-टेररिज्म ग्रिड को मजबूत करते हुए हालात का सामना किया।

Four Stars of Destiny book: जनरल एमएम नरवणे बोले- मेरी जिम्मेदारी किताब लिखना थी, रक्षा मंत्रालय की मंजूरी का अभी भी है इंतजार

हाल ही में नई दिल्ली में उनकी नई किताब का विमोचन हुआ। कार्यक्रम को “सेरेमनी ऑफ ग्रैटिट्यूड” का नाम दिया गया, जिसका उद्देश्य उन वीर जवानों को सम्मान देना था, जिन्होंने घाटी में आतंकवाद और हिंसा के बीच ड्यूटी निभाई। यह आयोजन राजपूताना राइफल्स रेजिमेंट के स्मरण दिवस के साथ आयोजित किया गया। किताब का विमोचन अशोक चक्र (मरणोपरांत) सम्मानित नायक नीरज कुमार सिंह की वीर नारियों और उनके दो बेटों ने किया। (Kashmir in the Line of Fire)

मेजर जनरल महाजन को 1987 में राजपूताना राइफल्स में ही कमीशन मिला था, और पांच बार कश्मीर में सेवा देते हुए उन्होंने घाटी के संघर्ष, सैनिकों के बलिदान और स्थानीय लोगों की बहादुरी को बेहद नजदीक से देखा।

Kashmir in the Line of Fire Book Launch

मेजर जनरल महाजन ने किताब में कश्मीर की कहानी को सिर्फ ऑपरेशन के नजरिए से नहीं, बल्कि इंसानियत की दृष्टि से लिखा है। कई अध्याय ऐसे हैं, जहां गोलीबारी और घुसपैठ की घटनाओं के बीच सैनिकों की हंसी, डर, दोस्ती और उम्मीद साथ-साथ चलती दिखती है। वे बताते हैं कि कैसे सैनिक रात-रात भर बर्फ में बैठकर घाटी की सुरक्षा करते हैं, कैसे हर ऑपरेशन के बाद शहीद साथियों की यादें दिल में घर कर लेती हैं, और कैसे स्थानीय नागरिक कई बार अपनी जान जोखिम में डालकर सेना की मदद करते हैं। (Kashmir in the Line of Fire)

किताब में मच्छल सेक्टर के 2014 ऑपरेशन का विस्तार से वर्णन है। इसमें उन्होंने उस रात का जिक्र किया है जब भारतीय जवानों ने नौ घुसपैठियों को रोका था। भोर होते-होते 8 ढेर थे, 1 पकड़ा गया। ऑपरेशन सफल रहा, लेकिन एक 24 साल के जवान, लांस नाइक राजेश कुमार ने अपनी जान गंवाई। मेजर जनरल महाजन इस घटना को बताते हुए कहते हैं, “वह सिर्फ एक सैनिक नहीं था, किसी का बेटा था, जिसका सपना वहीं बर्फ में दफन हो गया।” (Kashmir in the Line of Fire)

मेजर जनरल महाजन ने कश्मीर में आतंकवाद के बढ़ने, घुसपैठ की बदलती रणनीतियों और काउंटर-टेररिज्म ग्रिड के मजबूत होने की पूरी यात्रा को सरल भाषा में समझाया है। वे बताते हैं कि कैसे 1980 के दशक के अंत में कश्मीर का माहौल अचानक बदल गया और कैसे भारत ने इन चुनौतियों का मुकाबला करते हुए धीरे-धीरे हालात को संभाला। किताब में उन्होंने कुछ प्रमुख ऑपरेशंस, जैसे 2014 का मशाल ऑपरेशन, और शहीद कैप्टन तुषार महाजन के शौर्य की कहानी भी लिखी है।

मेजर जनरल महाजन के मुताबिक असली जंग सिर्फ हथियारों से नहीं जीती जाती, बल्कि भरोसे, संवाद और एकजुटता से जीती जाती है। उन्होंने किताब में घाटी के आम लोगों की भूमिका और उनकी हिम्मत को भी बराबर स्थान दिया है। उन्होंने उल्लेख किया कि कैसे कई बार स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर सेना को महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। किताब उन मनोवैज्ञानिक दबावों को भी सामने लाती है जिनका सामना सैनिक हर दिन करते हैं।

मेजर जनरल महाजन वर्ष 1987 में चार राजपूताना राइफल्स में कमीशंड हुए थे। 35 से अधिक वर्षों की सेवा के दौरान उन्होंने पूरे भारत में अहम कमांड संभाली, जिनमें राष्ट्रीय राइफल्स, लाइन ऑफ कंट्रोल पर इन्फैंट्री ब्रिगेड, और पश्चिमी सीमा पर एक डिवीजन का नेतृत्व शामिल है। वे डीएसएसस, सीडीएम और एनडीसी के पूर्व छात्र भी रहे हैं और सेना मेडल व विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित हैं।

“Kashmir in the Line of Fire” कश्मीर को सिर्फ एक संघर्ष के तौर पर नहीं, बल्कि उन असली लोगों की नजर से दिखाती है जिन्होंने वहां सालों तक “लाइन ऑफ फायर” में रहकर देश की रक्षा की।

The book is now available on Amazon and FaujiDays (Signed Copy).

Civil-Military Fusion: रक्षा मंत्री बोले- ऑपरेशन सिंदूर बना सिविल-मिलिट्री कोऑर्डिनेशन का सबसे बड़ा उदाहरण, प्रशासन भी रहे सैनिकों की तरह तैयार

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Civil-Military Fusion: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर भारत में सिविल-मिलिट्री फ्यूजन का सबसे बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस पूरे अभियान में प्रशासनिक मशीनरी और सशस्त्र बलों ने एक साथ मिलकर जिस तरह समन्वय दिखाया, उसने देश में जनता का भरोसा मजबूत किया और हालात को नियंत्रित रखने में बड़ी भूमिका निभाई।

Civil-Military Fusion: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले- सिविल-मिलिट्री फ्यूजन ही भारत की डिफेंस पावर की असली नींव

मसूरी में आयोजित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) के 100वें कॉमन फाउंडेशन कोर्स के समापन समारोह में बोलते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पीओके में मौजूद आतंकवादी कैंपों को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि भारत ने संतुलित और नॉन-एस्कलेटरी प्रतिक्रिया दी, लेकिन पड़ोसी देश के व्यवहार के चलते बॉर्डर एरिया में हालात सामान्य होने में दिक्कतें आईं। इसके बावजूद, देश के प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरे अभियान में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने समय पर महत्वपूर्ण जानकारी जनता तक पहुंचाई और देशभर में आयोजित मॉक ड्रिल्स को सफलतापूर्वक आयोजित किया। (Civil-Military Fusion)

राजनाथ सिंह ने यंग सिविल सर्वेंट्स से कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रशासन भी संकट की हर स्थिति में उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि जैसे सैनिक हमेशा हर स्थिति के लिए तैयार रहते हैं, वैसे ही युवा प्रशासनिक अधिकारी भी किसी भी चुनौती के लिए तैयार रहें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस” और “रिफॉर्म, परफॉर्म एंड ट्रांसफॉर्म” के मंत्र का जिक्र करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि 2014 में भारत दुनिया की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, जो अब चौथे स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि कई ग्लोबल वित्तीय संस्थाएं, जैसे मॉर्गन स्टेनली, अब अनुमान लगा रही हैं कि भारत अगले दो-तीन सालों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। (Civil-Military Fusion)

उन्होंने कहा कि सिविल सेवक केवल “रूल मेकर्स” नहीं, बल्कि जनता के हितों के संरक्षक और सुविधा प्रदान करने वाले “एनैब्लर्स” होते हैं। उन्होंने अधिकारियों को ईमानदारी, नैतिकता और सार्वजनिक जवाबदेही के साथ काम करने की सलाह दी।

तकनीक के महत्व पर बोलते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि आज की तारीख में टेक्नोलॉजी शासन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। जनधन योजना, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और इनकम टैक्स विभाग की फेसलेस असेसमेंट स्कीम इसका उदाहरण हैं। उन्होंने रक्षा मंत्रालय की संपूर्ण (एआई-ड्राइवन आटोमेशन सिस्टम) का जिक्र करते हुए कहा कि यह पारदर्शिता के साथ रक्षा खरीद प्रक्रिया को विश्लेषित करने और भुगतान प्रक्रिया को सरल बनाने में मदद कर रही है। (Civil-Military Fusion)

उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग जनता की पहुंच, पारदर्शिता और समावेशन बढ़ाने के लिए होना चाहिए, लेकिन यह कभी अंतिम लक्ष्य नहीं बनना चाहिए।

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने युवा अधिकारियों को संवेदनशील बने रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जब अधिकारी समाज के वंचित या कमजोर वर्गों के लोगों से मिलें, तो उन्हें उनकी कठिनाइयों को समझना चाहिए, क्योंकि कई बार लोगों की परेशानियां सिर्फ उनके प्रयासों से नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक स्थितियों से भी तय होती हैं। यही सोच एक अधिकारी को वास्तव में “पीपल-सेंट्रिक” बनाती है। (Civil-Military Fusion)

समारोह में उन्होंने महिला अधिकारियों की बढ़ती भागीदारी की तारीफ करते हुए कि यूपीएससी के इस वर्ष के परिणाम में पहले स्थान सहित टॉप पांच में तीन महिलाएं शामिल थीं। उन्होंने कहा कि 2047 तक बड़ी संख्या में महिलाएं कैबिनेट सचिव के स्तर तक पहुंचेंगी और भारत की विकास यात्रा को नेतृत्व देंगी। (Civil-Military Fusion)

India China Arunachal Issue: शंघाई एयरपोर्ट विवाद पर बोला चीन- “अरुणाचल को बताया चीन का हिस्सा”, भारत ने दिया करारा जवाब

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India China Arunachal Issue: चीन की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने जांगनान (अरुणाचल प्रदेश) को चीन का इलाका बताया है। चीनी प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने अरुणाचल प्रदेश पर अवैध रूप से कब्जा किया हुआ है। बता दें कि 1950 के बाद से ही चीन इसे “दक्षिण तिब्बत” यानी जांगनान कहता है और अपना दावा जताता है। वहीं, भारत ने चीन के इस दावे को पुरजोर से खारिज किया है।

चीन ने यह बयान मंगलवार को जारी किया, जब उनसे शंघाई पुडोंग एयरपोर्ट पर अरुणाचल प्रदेश की एक भारतीय महिला के साथ कथित बदसलूकी पर सवाल पूछा गया था। यह बयान ऐसे समय पर आया है जब इस घटना ने भारत-चीन संबंधों में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। (India China Arunachal Issue)

India China Arunachal Issue: चीन ने जांच को “कानूनी” करार दिया

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, “जांगनान चीन का क्षेत्र है। चीन ने भारत द्वारा अवैध रूप से स्थापित किए गए तथाकथित ‘अरुणाचल प्रदेश’ को कभी स्वीकार नहीं किया है।” चीन ने साफ तौर पर कहा कि वह अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा नहीं मानता, और इस आधार पर एयरपोर्ट पर हुई जांच को “कानूनी” करार दिया। माओ निंग ने दावा किया कि चीनी अधिकारियों ने “किसी तरह की हिरासत या उत्पीड़न नहीं किया” और महिला के “सभी अधिकार सुरक्षित थे”। उन्होंने कहा कि एयरलाइन ने यात्री को आराम और भोजन की सुविधा भी दी। (India China Arunachal Issue)

चीन का यह बयान पीड़ित महिला प्रेमा वांगजम थोंगडोक के आरोपों के ठीक उलट है। प्रेमा ने सोशल मीडियो पर एक पोस्ट जारी करके बताया था कि शंघाई एयरपोर्ट पर उन्हें लगभग 18 घंटे रोके रखा गया और इमिग्रेशन अधिकारी बार-बार उनका मजाक उड़ाते रहे। उनके मुताबिक, अधिकारियों ने उनसे कहा, “अरुणाचल इंडिया का हिस्सा नहीं है, तुम चीनी हो… भारतीय पासपोर्ट मान्य नहीं।” प्रेमा पिछले 14 वर्षों से यूके में रहती हैं और लंदन से जापान यात्रा कर रही थीं। उन्होंने बताया कि चीन में ट्रांजिट उनके लिए एक “अपमानजनक अनुभव” बन गया। (India China Arunachal Issue)

प्रेमा के अनुसार, चीन ईस्टर्न एयरलाइंस के कर्मचारियों ने भी इमिग्रेशन अधिकारियों की तरह व्यवहार किया और हंसते हुए कहा कि “तुम्हें चीनी पासपोर्ट बनवाना चाहिए।” उन्होंने दावा किया कि अधिकारी उनकी बात सुनने को भी तैयार नहीं थे और लगातार “अरुणाचल चाइना” कहते रहे। वह अपने परिवार से भी बहुत देर तक संपर्क नहीं कर सकीं। अंततः उन्होंने शंघाई और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास से मदद मांगी, जिसके बाद भारतीय अधिकारी एयरपोर्ट पहुंचे, उन्हें भोजन दिया और 18 घंटे बाद समस्या का समाधान कराया गया। (India China Arunachal Issue)

वहीं, भारत सरकार ने इस घटना पर बेहद कड़ी प्रतिक्रिया दी है। नई दिल्ली और बीजिंग दोनों जगह भारत ने चीन को सख्त डिमार्शे (औपचारिक विरोध) सौंपा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा, हमने चीन के विदेश मंत्रालय द्वारा दिए गए उन बयानों को देखा है, जो एक भारतीय नागरिक अरुणाचल प्रदेश की निवासी के मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने से संबंधित हैं। उन्होंने कहा कि वह एक वैध भारतीय पासपोर्ट रखती थीं और जापान की यात्रा पर थीं, जिसके दौरान वे शंघाई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से ट्रांजिट कर रही थीं। (India China Arunachal Issue)

वहीं, अरुणाचल प्रदेश को लेकर आए चीन के बयान पर उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। यह एक स्वयंसिद्ध तथ्य है। चीन की ओर से कितनी भी बार इनकार किया जाए, यह निर्विवाद सच्चाई बदल नहीं सकती। भारत ने इस अवैध हिरासत के मुद्दे को चीनी पक्ष के समक्ष कड़े शब्दों में उठाया है। अब तक चीनी अधिकारियों ने अपने उस व्यवहार की कोई विश्वसनीय व्याख्या नहीं दी है, जो अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा से संबंधित कई कन्वेंशनों का उल्लंघन है। चीनी अधिकारियों की कार्रवाई उनके अपने उन नियमों के भी विरुद्ध है, जिनमें सभी देशों के नागरिकों को 24 घंटे तक वीजा-फ्री ट्रांजिट की अनुमति दी गई है। (India China Arunachal Issue)

यह घटना ऐसे समय हुई है जब भारत-चीन रिश्तों में हल्की नरमी के संकेत मिल रहे थे। लेकिन चीन द्वारा अरुणाचल पर पुराना दावा दोहराने और प्रेमा के आरोपों ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव को फिर बढ़ा दिया है। भारत लगातार कहता रहा है कि चीन का कोई दावा या नाम बदलने की कोशिश वास्तविकता को नहीं बदल सकती। (India China Arunachal Issue)

Army Chief Sri Lanka Visit: 2021 के बाद श्रीलंका दौरे पर जाएंगे सेना प्रमुख, पहली बार दी ‘ऑपरेशन पवन’ के शहीदों को आधिकारिक श्रद्धांजलि

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Army Chief Sri Lanka Visit: भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी दो दिन के श्रीलंका के आधिकारिक दौरे पर जाएंगे। यह यात्रा भारत–श्रीलंका रक्षा सहयोग में एक नया अध्याय जोड़ने वाली मानी जा रही है, क्योंकि हाल के सालों में दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर पर लगातार हाई-लेवल एंगेजमेंट बढ़े हैं। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत क्षेत्रीय स्थिरता, साझेदारी और पड़ोसी देशों के साथ सुरक्षा सहयोग को मजबूती देना चाहता है।

Army Chief Sikkim Visit: दो दिन के दौरे पर सिक्किम पहुंचे सेना प्रमुख, एक दिन पहले ही चीन पर कही थी ये बात

दौरे से पहले 25 नवंबर को नई दिल्ली राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, नई दिल्ली में एक बेहद महत्वपूर्ण क्षण देखने को मिला, जब सेना प्रमुख ने पहली बार ‘ऑपरेशन पवन’ में शहीद हुए सैनिकों को आधिकारिक श्रद्धांजलि दी। यह वही ऑपरेशन था जिसमें इंडियन पीस कीपिंग फोर्स ने श्रीलंका में तैनात होकर आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की थी। इस ऑपरेशन में 1,171 भारतीय जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था और 3,500 से अधिक घायल हुए थे।

Army Chief Sri Lanka Visit: पहली बार ‘ऑपरेशन पवन’ की आधिकारिक कमेमोरेशन

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर हुए कार्यक्रम में जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मेजर आर. परमेश्वरन सहित सभी वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर मरणोपरांत परम वीर चक्र से सम्मानित मेजर रामास्वामी परमेश्वरन की पत्नी उमा परमेश्वरन भी मौजूद थीं। मेजर परमेश्वरन उन इंडियन पीस कीपिंग फोर्स के एकमात्र सैनिक थे जिन्हें विदेशी धरती पर किसी ऑपरेशन में परम वीर चक्र मिला। यह पहला मौका था जब सेना की ओर से आधिकारिक कमेमोरेशन आयोजित की गई। अब तक यह सम्मान केवल वेटरंस और उनके परिवार निजी तौर पर निभाते आ रहे थे।

कार्यक्रम में वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टॉफ लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह भी मौजूद रहे, जो खुद ‘ऑपरेशन पवन’ में एक युवा अधिकारी के रूप में हिस्सा ले चुके हैं। यह समारोह वेटरंस के लिए वर्षों से लंबित एक सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है और इसे भारतीय सेना द्वारा इतिहास को औपचारिक रूप से सम्मान देने के बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।

Army Chief Sri Lanka Visit: श्रीलंका दौरे से मजबूत होगा रक्षा सहयोग

आर्मी चीफ का 01 से 02 दिसंबर तक होने वाला श्रीलंका दौरा दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करेगा। इससे पहले भी भारतीय सेना प्रमुखों ने श्रीलंका का दौरा किया है। आखिरी बार 2021 में जनरल एमएम नरवणे ने श्रीसंका का दौरा किया था, जिसके बाद से दोनों सेनाओं के बीच ट्रेनिंग, एक्सरसाइज और ऑपरेशनल इंटरैक्शन का दायरा बढ़ता गया।

इसी साल सितंबर में भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी भी श्रीलंका के दौरे पर गए थे। वहीं श्रीलंका आर्मी के कई शीर्ष अधिकारी भी हाल के वर्षों में भारत का दौरा कर चुके हैं। श्रीलंका आर्मी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल बीकेजीएम लसांथा रोड्रिगो भी इसी साल 11-14 जून तक भारत की 4-दिवसीय यात्रा पर आए थे। उन्होंने इंडियन मिलिट्री अकादमी (आईएमए) में पासिंग आउट परेड की समीक्षा की थी, हालांकि वे खुद भी 1990 में आईएमए से कमीशंड रह चुके हैं। उस दौरान उनकी आर्मी चीफ, नेवी चीफ और एयर चीफ से मुलाकात की थी। इसकी बाद अक्टूबर में श्रीलंका आर्मी चीफ ने नई दिल्ली में यूनाइटेड नेशंस ट्रूप कंट्रीब्यूटिंग कंट्रीज चीफ्स कॉनक्लेव में हिस्सा भी लिया था। इसके अलावा नवंबर में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग की समीक्षा के लिए 11वीं आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ टॉक्स (AAST) हुईं थी।

वहीं भारत और श्रीलंका की सेनाओं के बीच मित्र शक्ति अभ्यास का 11वां संस्करण इस साल 10 नवंबर से 23 नवंबर तक कर्नाटक के बेलगावी (फॉरेन ट्रेनिंग नोड) में हुआ है।

सेना प्रमुख की यह यात्रा “पड़ोसी पहले” नीति के तहत भारत का संदेश दोहराती है कि श्रीलंका भारत का भरोसेमंद साझेदार और करीबी मित्र है। इस दौरान दोनों देशों के सैन्य नेतृत्व क्षेत्रीय सुरक्षा, इंडो-पैसिफिक स्थिति, समुद्री चुनौतियों और आतंकवाद विरोधी प्रयासों पर व्यापक चर्चा करेंगे।

Army Chief Sri Lanka Visit: ट्रेनिंग, एक्सरसाइज और क्षमता निर्माण पर फोकस

दौरे के दौरान दोनों सेनाएं ट्रेनिंग, जॉइंट एक्सरसाइज और कैपेसिटी बिल्डिंग पर अपने सहयोग को और व्यापक बनाएंगी। साथ ही, आधुनिक युद्ध की जरूरतों, मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स, इंटेलिजेंस-शेयरिंग और मानवीय सहायता में सहयोग पर भी विस्तार से बातचीत होगी। भारत पिछले कई वर्षों से श्रीलंका को उपकरण, ट्रेनिंग स्लॉट और विशेष मिलिटरी कोर्स उपलब्ध कराता आ रहा है।

भारत और श्रीलंका के बीच रक्षा संबंध सिर्फ भौगोलिक निकटता के चलते नहीं हैं, बल्कि सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सुरक्षा हितों पर भी टिके हैं। दोनों देश आतंकवाद विरोधी सहयोग में एक-दूसरे के मजबूत रणनीतिक साझेदार हैं। श्रीलंका ने भारत के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के दावे का समर्थन किया है, जबकि भारत श्रीलंका को ब्रिक्स जैसे समूहों में महत्वपूर्ण भूमिका दिलाने में मदद कर रहा है।

वेटरंस के लिए ऐतिहासिक क्षण

ऑपरेशन पवन की आधिकारिक कमेमोरेशन को वेटरंस लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे थे। अब तक हर साल वे खुद एक “साइलेंट” अनौपचारिक सभा में शहीदों को श्रद्धांजलि देते थे। इस बार पहली बार भारतीय सेना प्रमुख ने आधिकारिक तौर पर नेतृत्व किया।

इस आयोजन के साथ भारतीय सेना ने यह संदेश दिया कि बलिदान कभी भूला नहीं जाता, और इतिहास के उन अध्यायों को भी सम्मान मिलेगा जिन्हें अब तक आधिकारिक मान्यता नहीं मिली थी।

Samudra Utkarsh: रक्षा मंत्री बोले- भारत बन रहा ग्लोबल शिपबिल्डिंग हब, स्वदेशी क्षमता से दुनिया भी हुई प्रभावित

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Samudra Utkarsh: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि दुनिया के देशों को भारत की तेजी से बढ़ती शिपबिल्डिंग इंडस्ट्री की क्षमता को समझना चाहिए और भविष्य की समुद्री तकनीकों को मिलकर विकसित करना चाहिए। वे मंगलवार को दिल्ली में आयोजित समुद्र उत्कर्ष सेमिनार में उद्योग प्रतिनिधियों, विदेशी पार्टनर्स और सैन्य अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत का शिपबिल्डिंग सेक्टर आज उन कुछ देशों में शामिल है जो कॉन्सेप्ट डिजाइन, मॉड्यूलर कंस्ट्रक्शन, आउटफिटिंग, रिफिट, रिपेयर, और लाइफ-साइक्ल सपोर्ट जैसी सभी प्रक्रियाएं खुद करने में पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने कहा कि यह क्षमता भारत को न सिर्फ आत्मनिर्भर बनाती है बल्कि वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद मरीटाइम हब के रूप में स्थापित करती है। उन्होंने बताया कि देश के सार्वजनिक और निजी शिपयार्ड, और हजारों एमएसएमई मिलकर एक मजबूत वैल्यू-चेन तैयार करते हैं जो स्टील, प्रोपल्शन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर और एडवांस्ड कॉम्बैट सिस्टम जैसे सेक्टर्स को सपोर्ट करती है।

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अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की समुद्री क्षमता अब ठोस उदाहरणों के रूप में दुनिया के सामने है। भारत का पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत, कलवरी-क्लास सबमरीन, और स्टेल्थ फ्रिगेट्स व डेस्ट्रॉयर्स न सिर्फ नौसेना की ताकत को बढ़ाते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि भारत बड़े युद्धपोतों का डिजाइन और निर्माण दोनों करने की क्षमता रखता है।

रक्षा मंत्री मे कहा, “हमारे शिपयार्ड एयरक्राफ्ट कैरियर से लेकर रिसर्च वेसल और कमर्शियल शिप तक बनाने में सक्षम हैं। यही क्षमता भारत को शिपबिल्डिंग, शिप रिपेयर और मैरीटाइम इनोवेशन का ग्लोबल हब बना सकती है।” उन्होंने कहा कि भारतीय शिपयार्ड हमारे उभरती हुए ब्लू इकॉनमी के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सेमिनार का थीम ‘2500 बीसीई-2025 सीई सेलिब्रेटिंग 4,524 ईयर्स ऑफ शिपबिल्डिंग एक्सीलेंस’ केवल एक औद्योगिक लक्ष्य नहीं, बल्कि एक सभ्यता की निरंतर यात्रा को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि लोथल के प्राचीन बंदरगाहों से लेकर मुंबई, गोवा, विशाखापत्तनम, कोलकाता और कोच्चि के आधुनिक शिपयार्ड तक भारत की समुद्री यात्रा लगातार प्रगति और मजबूती की कहानी है। रक्षा मंत्री ने कहा कि खोज, इनोवेशन और समुद्री जुड़ाव की यह सदियों पुरानी भावना आज भी उतनी ही जीवंत है और भारत इसे नई दिशा दे रहा है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि आज भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड के हर जहाज का निर्माण भारत में ही हो रहा है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन का सबसे बड़ा प्रमाण है। उन्होंने कहा कि भारत की मैरीटाइम पॉलिसी मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 ने उद्योग को नई दिशा दी है। रक्षा उत्पादन एवं निर्यात प्रोत्साहन नीति और डिफेंस प्रोक्योरमेंट मैनुअल 2025 ने भी घरेलू उत्पादन को मजबूत आधार दिया है।

Samudra Utkarsh
Raksha Mantri released a coffee-table book ‘Shipyards of Bharat – Infrastructure, Capability, Capability, Outreach’ and two compendiums – ‘Samudra Navpravartan’ and 10-year AI roadmap for Indian shipyards

उन्होंने बताया कि भारतीय नौसेना के पास इस समय 262 स्वदेशी डिजाइन और डेवलपमेंट परियोजनाएं चल रही हैं, जिनमें कई एडवांस्ड स्टेज में हैं। कुछ शिपयार्ड तो अगले कुछ वर्षों में अपने उत्पादन में 100 फीसदी स्वदेशी कंटेंट हासिल करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। इससे भारत से सप्लाई होने वाले जहाजों पर ग्लोबल सप्लाई-चेन की बाधाएं लगभग समाप्त हो जाएंगी। उन्होंने भरोसा जताया कि निकट भविष्य में भारत के वाणिज्यिक जहाज भी पूरी तरह देश में बनेंगे।

रक्षा मंत्री ने भारतीय शिपयार्ड्स को देश की उभरती ब्लू इकोनॉमी का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय शिपयार्ड न सिर्फ डिफेंस प्लेटफॉर्म बना रहे हैं बल्कि समुद्री विज्ञान, मरीन इकोसिस्टम मॉनिटरिंग, मत्स्य संसाधन प्रबंधन और मरीटाइम लॉ-एन्फोर्समेंट जैसे क्षेत्रों के लिए भी एडवांस वेसल तैयार कर रहे हैं। उन्होंने पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया, जिसे भारतीय शिपयार्ड अब तेजी से अपना रहे हैं।

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने उन मानवीय मिशनों का भी जिक्र किया जिनमें भारतीय नौसेना के जहाजों ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई। उन्होंने कोविड काल के ऑपरेशन समुद्र सेतु, म्यांमार भूकंप के दौरान ऑपरेशन ब्रह्मा और इस वर्ष आईएनएस विक्रांत द्वारा किए गए मेडिकल एवैक्यूएशन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मिशन दिखाते हैं कि भारत न सिर्फ युद्धपोत बनाता है, बल्कि वे जहाज भी बनाता है जो जान बचाते हैं और वैश्विक स्थिरता को मजबूत करते हैं।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि हाल के वर्षों में कई देशों ने अपने युद्धपोतों और बड़े जहाजों की मरम्मत के लिए भारतीय शिपयार्ड को चुना है। जो भारत की क्षमता और भरोसे को दिखाता है। उन्होंने कहा कि भारत पूरे हिंद महासागर क्षेत्र के लिए एक प्रमुख रीफिट और रिपेयर हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

इस मौके पर रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने कहा कि समुद्र उत्कर्ष भारतीय शिपबिल्डिंग की ताकत को दिखाने वाला एक महत्वपूर्ण आयोजन है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले वर्षों में यह क्षेत्र कई गुना बढ़ा है। उन्होंने नवाचार, कौशल विकास और एक्सपोर्ट क्षमता पर लगातार ध्यान देने की जरूरत बताई।