back to top
Saturday, August 30, 2025
Home Blog

Operation Sindoor IAF weapons: बड़ा खुलासा! वायुसेना के 50 से भी कम हथियारों के आगे झुका था पाकिस्तान, घबरा कर बंद कर दिए थे रडार

Operation Sindoor IAF weapons: Air Marshal Tiwari reveals IAF used fewer than 50 weapons to force Pakistan to truce
Indian Air Force Vice Chief Air Marshal Narmdeshwar Tiwari

Operation Sindoor IAF weapons: भारतीय वायुसेना के वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल नरमदेश्वर तिवारी ने शनिवार को ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बड़ा खुलासा किया। उन्होंने न केवल इस सैन्य अभियान के कई नए फुटेज शेयर किए बल्कि यह भी बताया कि भारतीय वायुसेना ने 50 से भी कम हथियारों का इस्तेमाल कर पाकिस्तान को सीज फायर की मेज पर बैठने पर मजबूर कर दिया।

IAF Chief AP Singh On Theatre Command: रण संवाद में एयर फोर्स चीफ ने थिएटर कमांड को लेकर कह दी ये बड़ी बात, सामने बैठे थे CDS, रहे चुप

दिल्ली में आयोजित एनडीटीवी डिफेंस समिट के दौरान एयर मार्शल तिवारी ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के सामने कई विकल्प थे। वायुसेना के पास टारगेट्स की लंबी सूची मौजूद थी, लेकिन इनमें से नौ प्रमुख ठिकानों को चुनकर निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा, “सबसे अहम बात यह है कि 50 से कम हथियारों के इस्तेमाल करके हमने इस युद्ध को समाप्त कर दिया। यही इस अभियान का सबसे बड़ा सबक है।”

Operation Sindoor IAF weapons: पहलगाम हमले के बाद ऑपरेशन की तैयारी

22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी। इस हमले के बाद भारत सरकार ने स्पष्ट किया कि जवाब कड़ा और साफ-साफ नजर आने वाला होना चाहिए। जिसके बाद 7 मई को भारतीय वायुसेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमले किए।

एयर मार्शल तिवारी ने बताया कि 24 अप्रैल तक सभी विकल्पों पर चर्चा पूरी हो चुकी थी और नौ टारगेट तय कर लिए गए थे। बस राजनीतिक मंजूरी का इंतजार था। 7 मई की सुबह भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकी और मिलिट्री ठिकानों पर हमला किया। इसके लिए सुखोई-30 एमकेआई, राफेल और मिराज-2000 लड़ाकू विमानों से ब्रहमोस, स्कैल्प, क्रिस्टल मेज-2 और रैम्पेज मिसाइलें दागी गईं।

Operation Sindoor IAF weapons: यह थे तीन उद्देश्य

एयर मार्शल तिवारी ने बताया कि नई दिल्ली से सेना को तीन साफ-साफ निर्देश मिले थे। पहला, जवाब इतना मजबूत होना चाहिए कि दुश्मन और दुनिया दोनों इसे साफ देख सकें। दूसरा, यह कार्रवाई भविष्य के लिए एक संदेश बने और आतंकवादी हमले दोहराने की हिम्मत कोई न कर सके। तीसरा, तीनों सेनाओं को पूरी ऑपरेशनल स्वतंत्रता दी गई, ताकि हालात बिगड़ने पर वे पूरी तरह से युद्ध के लिए भी तैयार रहें।

उन्होंने कहा कि वायुसेना की सटीक कार्रवाई से यह संदेश साफ चला गया कि भारत आतंकवाद को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेगा।

Operation Sindoor IAF weapons: चलाया SEAD/DEAD अभियान

हमले के उसी दिन शाम को पाकिस्तान की तरफ से ड्रोन और लॉयटरिंग म्यूनिशन भारतीय सीमाओं की ओर भेजे गए। एयर मार्शल तिवारी ने बताया कि करीब 300 से ज्यादा ड्रोन और हाइपरसोनिक CM-400 जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया गया। लेकिन भारत के इंटग्रेटेड डिफेंस सिस्टम ने इन्हें नाकाम कर दिया।

भारतीय वायुसेना ने इसके जवाब में “SEAD/DEAD अभियान” चलाया। यानी दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को टारगेट किया गया। इसमें पाकिस्तान के कई राडार और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल सिस्टम (SAM) को निशाना बनाया गया।

तिवारी ने कहा कि पाकिस्तान ने जानबूझकर अपना एयरस्पेस बंद नहीं किया था ताकि भारत पर किसी नागरिक विमान को गिराने का आरोप लगाया जा सके। लेकिन भारतीय वायुसेना ने बेहद सावधानी बरतते हुए केवल सैन्य ठिकानों को ही निशाना बनाया।

Operation Sindoor IAF weapons: सटीकता से कार्रवाई

8 और 9 मई को पाकिस्तान ने और बड़े पैमाने पर ड्रोन और हथियार दागे। उनका मकसद भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम को थका देना था। लेकिन भारतीय वायुसेना ने न सिर्फ इसे विफल किया बल्कि पाकिस्तान के अहम एयरबेस और रडार ठिकानों को तबाह कर दिया।

भारतीय हमलों में चकला, सरगोधा, रहिम यार खान, साकर और मुरिदके जैसे ठिकानों को सटीकता से निशाना बनाया गया। तिवारी ने बताया कि पाकिस्तान ने कई रडार डर के मारे खुद ही बंद कर दिए गए ताकि वे भारतीय हमलों से बच सकें।

उन्होंने कहा, “हमारे हथियार इतने सटीक थे कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह आरोप भी नहीं लगा पाया कि नागरिक ठिकानों पर हमला हुआ है।”

ऑपरेशन सिंदूर में वायुसेना की रणनीति

एयर मार्शल तिवारी ने खुलासा किया कि ऑपरेशन सिंदूर में केवल हथियारों की संख्या पर नहीं, बल्कि उनके सही इस्तेमाल पर ध्यान दिया गया। उन्होंने कहा कि नौ ठिकानों को चुनकर सटीक हमले किए गए और इन्हीं हमलों से पाकिस्तान को संघर्ष विराम के लिए राजी होना पड़ा।

वायुसेना के मुताबिक, कम समय में तेज और निर्णायक हमले करने की क्षमता ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है। इस पूरे अभियान के दौरान भारतीय सेनाओं के बीच तालमेल और टेक्टिकल प्लानिंग का लेवल स्तर देखने को मिला जिसने पाकिस्तान को चौंका दिया। उन्होंने खुलासा किया कि मई 2025 में चले इस अभियान में वायुसेना ने 50 से भी कम एयर-लॉन्च हथियारों का इस्तेमाल कर पाकिस्तान के एयरबेस, राडार साइट और कमांड सेंटर को तबाह कर दिया। इनमें से कई ठिकाने परमाणु प्रतिष्ठानों के नजदीक भी थे।

एयर मार्शल तिवारी ने कहा कि यह पूरा अभियान एक “टेक्स्टबुक उदाहरण” था कि कैसे सीमित संसाधनों से सटीक और निर्णायक वार किया जा सकता है। उन्होंने इसे “कोएर्सिव डिप्लोमेसी” यानी दबाव डालने वाली कूटनीति और लागत प्रभावी वायु शक्ति का बेहतरीन नमूना बताया।

एयर मार्शल तिवारी ने कहा, “यह पहली बार हुआ कि इतने कम हथियारों से हमने इस जंग को खत्म कर दिया। इससे हमारी योजना और एयरपावर की क्षमता का पता चलता है।”

तिवारी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह दिखा दिया कि एयरपावर का इस्तेमाल अगर सटीक और योजनाबद्ध तरीके से किया जाए तो बड़े नतीजे हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह अभियान इस बात का उदाहरण है कि भारत अब किसी भी आतंकी हमले का जवाब अपने तरीके से देने में सक्षम है।

Self-Reliance in Defence: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले- रक्षा में आत्मनिर्भरता अब विकल्प नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त

Rajnath Singh: Self-Reliance in Defence is a Condition for Survival
Defence Minister Rajnath Singh (Photo: PIB)

Self-Reliance in Defence: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में आयोजित एनडीटीवी के ‘वारफेयर इन द ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी’ डिफेंस कॉन्क्लेव में जोर देकर कहा कि आज के समय में आत्मनिर्भरता सिर्फ एक नारा नहीं बल्कि भारत की सुरक्षा और अस्तित्व की शर्त है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद, महामारी और क्षेत्रीय संघर्षों के बीच यदि भारत को अपनी पहचान बनाए रखनी है तो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना बेहद जरूरी है।

Rajnath Singh Ran Samwad 2025: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले- “भारत ने कभी नहीं की युद्ध की शुरुआत, पर सुरक्षा के लिए हमेशा तैयार”

रक्षा मंत्री ने साफ किया कि यह आत्मनिर्भरता किसी भी तरह का संरक्षणवाद नहीं है। उन्होंने कहा, “यह सुरक्षा कवच नहीं बल्कि संप्रभुता की पहचान है। जब एक युवा, तकनीक और ऊर्जा से भरा देश आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ता है तो पूरी दुनिया उसे देखकर रुक जाती है। यही भारत की असली ताकत है, जो हमें वैश्विक दबावों से और मजबूत बनाती है।”

Self-Reliance in Defence: ऑपरेशन सिंदूर का किया जिक्र

राजनाथ सिंह ने हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर को भारत की बढ़ती स्वदेशी ताकत का सबसे बड़ा उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पर निर्णायक जीत और भारतीय सेना के तेज और सटीक हमलों के पीछे वर्षों की तैयारी और आत्मनिर्भर डिफेंस सिस्टम की भूमिका रही। रक्षा मंत्री ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर कुछ दिनों की लड़ाई की कहानी जरूर लगती है, लेकिन इसके पीछे वर्षों की रणनीतिक तैयारी और आत्मनिर्भर डिफेंस इक्विपमेंट्स पर निर्भरता है।”

Self-Reliance in Defence: सुदर्शन चक्र मिशन और एयर डिफेंस सिस्टम

रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री द्वारा घोषित सुदर्शन चक्र मिशन को भारत की सुरक्षा का भविष्य बताया। इस मिशन के तहत अगले दस वर्षों में देश के अहम ठिकानों को स्वदेशी तकनीक से बने एयर डिफेंस सिस्टम से सुरक्षित किया जाएगा। राजनाथ सिंह ने जानकारी दी कि 23 अगस्त 2025 को डीआरडीओ ने स्वदेशी एयर डिफेंस वेपन सिस्टम का सफल परीक्षण किया, जिसमें एक साथ तीन लक्ष्यों को भेदा गया। उन्होंने कहा कि यह सफलता प्रधानमंत्री के विजन की दिशा में पहला बड़ा कदम है।

Self-Reliance in Defence: भारत में ही बन रहे हैं वॉरशिप

रक्षा मंत्री ने बताया कि आज सभी युद्धपोत भारत में ही बन रहे हैं। हाल ही में कमीशन किए गए आईएनएस हिमगिरी और आईएनएस उदयगिरि जैसे स्टेल्थ फ्रिगेट्स आधुनिक हथियारों और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम से लैस हैं और यह दिखाते हैं कि अब नौसेना किसी विदेशी युद्धपोत पर निर्भर नहीं है।

Self-Reliance in Defence: स्वदेशी एयरो-इंजन प्रोजेक्ट

रक्षा मंत्री ने ऐलान किया कि भारत अब स्वदेशी एयरो-इंजन प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर चुका है। लंबे समय से यह क्षेत्र भारत की कमजोरी माना जाता रहा है, लेकिन अब सरकार ने इस चुनौती को स्वीकार कर लिया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि पहले सवाल होता था कि क्या भारत इतना जटिल इंजन बना सकता है, लेकिन आज सवाल यह है कि इसे कितनी जल्दी बनाया और तैनात किया जा सकता है।

Self-Reliance in Defence: डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर

रक्षा मंत्री ने उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में बनाए गए डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का जिक्र करते हुए कहा कि इनसे आत्मनिर्भरता और इनोवेशन को बढ़ावा मिला है। उन्होंने कहा कि ये कॉरिडोर अब विकास के नए इंजन बन चुके हैं और भविष्य में इन्हें अन्य राज्यों तक भी विस्तार दिया जाएगा।

रक्षा निर्यात में बड़ी छलांग

राजनाथ सिंह ने गर्व के साथ कहा कि 2014 में जहां रक्षा निर्यात 700 करोड़ रुपये से भी कम था, वहीं 2025 में यह बढ़कर लगभग 24,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि यह सफलता सिर्फ सरकारी कंपनियों की वजह से नहीं बल्कि निजी उद्योग, स्टार्टअप और उद्यमियों के योगदान से संभव हुई है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने रक्षा क्षेत्र में कई बड़े सुधार किए हैं। डिफेंस लाइसेंसिंग प्रक्रिया को आसान बनाया गया है, विदेशी निवेश (FDI) की सीमा 74 प्रतिशत तक बढ़ाई गई है और मेक इन इंडिया की प्रक्रिया को सरल किया गया है ताकि निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ सके।

उन्होंने कहा कि iDEX योजना ने युवाओं और स्टार्टअप्स के लिए डिफेंस इनोवेशन का नया रास्ता खोल दिया है। आज भारतीय युवा ऐसे समाधान पेश कर रहे हैं, जिनके लिए पहले भारत को विदेशी तकनीक पर निर्भर रहना पड़ता था।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने महिलाओं को कॉम्बैट रोल में शामिल कर ऐतिहासिक कदम उठाया है। आज महिलाएं लड़ाकू विमान उड़ा रही हैं, युद्धपोतों को नेविगेट कर रही हैं और कठिन इलाकों में सीमाओं की रक्षा कर रही हैं।

मीडिया पर कही ये बात

राजनाथ सिंह ने मीडिया की भूमिका पर भी बात की और कहा कि युद्ध के समय एक सही रिपोर्ट करोड़ों लोगों का मनोबल बढ़ा सकती है, जबकि छोटी सी गलती जानलेवा हो सकती है। उन्होंने कहा कि मीडिया स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी निभाए।

रक्षा मंत्री ने कहा कि घरेलू रक्षा उत्पादन 1.5 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है, जिसमें 25 फीसदी निजी क्षेत्र का योगदान है। उन्होंने बताया कि रक्षा क्षेत्र अब केवल खर्च नहीं बल्कि डिफेंस इकोनॉमिक्स का हिस्सा है, जो नौकरियां, इनोवेशन और औद्योगिक विकास का बड़ा जरिया बन चुका है।

India defence indigenisation: रक्षा सचिव बोले- मेक इन इंडिया के तहत भारत में मैन्युफैक्चरिंग करें विदेशी कंपनियां, वरना नहीं मिलेंगे बड़े ऑर्डर, HALE और MALE ड्रोन पर फोकस

India defence indigenisation: Defence Secretary Rajesh Kumar said- Atmanirbhar Bharat in defence is a necessity, not just policy
Defence Secretary Rajesh Kumar Singh

India defence indigenisation: भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार ने साफ कहा है कि HALE और MALE ड्रोन फ्यूचर बैटलफील्ड में निर्णायक साबित होंगे। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी यह साफ हो गया कि ड्रोन युद्ध की तस्वीर बदल रहे हैं और इन्हें तेजी से आत्मनिर्भर भारत कार्यक्रम में शामिल करना होगा। उन्होंने आगे कहा कि आत्मनिर्भर भारत की नीति अब सिर्फ एक सरकारी पहल नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरत बन चुकी है। उन्होंने बताया कि मौजूदा वैश्विक हालात और लगातार बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों के बीच भारत को अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए रक्षा उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर होना ही होगा।

ALH Dhruv: रक्षा सचिव बोले- ध्रुव हेलीकॉप्टर के बेड़े का ग्राउंड होना आर्म्ड फोर्सेस के लिए बड़ा झटका, ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर पड़ रहा असर

India defence indigenisation: भारत में मैन्युफैक्चरिंग करें विदेशी कंपनियां

एनडीटीवी के डिफेंस समिट में रक्षा सचिव राजेश कुमार ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले साल डिफेंस सेक्टर में लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिनमें से 81 प्रतिशत रकम देश के भीतर ही खर्च हुई। उनका कहना था कि आने वाले समय में रक्षा पूंजीगत खर्च का कम से कम 75 फीसदी हिस्सा घरेलू उद्योगों से लिया जाएगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर भारत को विदेशी कंपनियों से किसी तकनीक या उत्पादन की आवश्यकता होगी, तो उन्हें भारत में निवेश और निर्माण करना ही होगा। यानी कोई भी विदेशी कंपनी बिना मेक इन इंडिया में भागीदारी किए बड़े ऑर्डर नहीं पा सकेगी।

रक्षा सचिव ने कहा कि यह कदम सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने हाल ही में किए गए एक अध्ययन का हवाला दिया, जिसमें पाया गया कि रक्षा क्षेत्र में घरेलू खर्च से जीडीपी पर 2.4 गुना प्रभाव पड़ता है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं और इंडस्ट्री का विस्तार होता है।

India defence indigenisation: 2023-24 में दो लाख करोड़ रुपये के डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट साइन

उन्होंने याद दिलाया कि 25-30 साल पहले भारत के रक्षा क्षेत्र में प्राइवेट कंपनियों की भूमिका लगभग नगण्य थी। उस समय डीआरडीओ और सार्वजनिक उपक्रम जैसे ऑर्डनेंस फ़ैक्ट्रियां ही प्रमुख थीं। लेकिन अब धीरे-धीरे प्राइवेट सेक्टर ने अपनी जगह बना ली है और कई मामलों में उनकी तकनीक अत्याधुनिक स्तर तक पहुंच चुकी है।

राजेश कुमार ने कहा कि वे सरकारी और निजी कंपनियों में कोई फर्क नहीं देखते। उनके अनुसार दोनों भारतीय कंपनियां हैं और रक्षा मंत्रालय की नजर में समान हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रालय का काम है इन्हें बराबरी का मौका देना और लगातार ऑर्डर देते रहना।। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष में लगभग दो लाख करोड़ रुपये के डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट साइन किए गए, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।

India defence indigenisation: ऑपरेशन सिंदूर के बाद ड्रोन पर फोकस

उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए बताया कि इस संघर्ष ने भारत के लिए ड्रोन तकनीक की अहमियत साबित कर दी। उन्होंने माना कि इस क्षेत्र में अभी सुधार की गुंजाइश है, लेकिन भारतीय निजी कंपनियों ने अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन किया। हाल ही में हुए कई ट्रायल्स में कुछ घरेलू ड्रोन निर्माताओं को सफलता मिली है और उन्हें जल्द ही ऑर्डर मिलने की संभावना है।

रक्षा सचिव ने बताया कि भारत तीन स्तरों पर ड्रोन निर्माण को आगे बढ़ा रहा है। पहला स्तर है अमेरिका की जनरल एटॉमिक्स के साथ एमक्यू-9बी सी गार्डियन ड्रोन (HALE) का करार। दूसरा स्तर है मध्यम ऊंचाई वाले ड्रोन (MALE) जिन्हें भारत में ही डिजाइन और डेवलप किया जाएगा। तीसरा स्तर है छोटे और स्वार्म ड्रोन जिन्हें कॉम्बैट एम्युनिशन की तरह इस्तेमाल किया जाएगा।

तेजस पर बोली ये बड़ी बात

उन्होंने तेजस लड़ाकू विमान परियोजना पर भी विस्तार से जानकारी दी। उनका कहना था कि यह विमान भारतीय वायुसेना के पुराने मिग-21 को बदलने के लिए तैयार किया जा रहा है। अब तक 40 से अधिक तेजस वायुसेना में शामिल हो चुके हैं, जबकि 80 और निर्माणाधीन हैं। सितंबर तक दो नए तेजस पूरी तरह हथियारों के साथ तैयार कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अब से तेजस के नए ऑर्डर तभी दिए जाएंगे, जब पुराने कॉन्ट्रैक्ट की पूरी डिलीवरी हो जाएगी।

उन्होंने डीआरडीओ और घरेलू इंडस्ट्री को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक जेट इंजन बनाने में भारत अब तक पीछे रहा है, लेकिन सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम उठाने का फैसला कर लिया है। फिलहाल फ्रांस के साथ साझेदारी में एक नई इंजन परियोजना को मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया चल रही है, जो आने वाले वर्षों में भारतीय लड़ाकू विमानों के लिए अहम साबित होगी।

उन्होंने यह भी माना कि युद्ध जैसे हालात लंबे समय तक चल सकते हैं, इसलिए भारत को अपने युद्ध भंडार यानी वॉर वेस्टेज रिजर्व को दोगुना करने की जरूरत है। इसके लिए गोलाबारूद और मिसाइलों के उत्पादन में सार्वजनिक उपक्रमों के साथ-साथ निजी कंपनियों को भी शामिल किया जाएगा।

नौसेना को मिलेंगे 59 वॉरशिप!

जहाज निर्माण और नौसेना के विस्तार पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि इस समय 59 वॉरशिप भारत के विभिन्न शिपयार्ड्स में निर्माणाधीन हैं। आने वाले वर्षों में सभी नौसैनिक प्रोजेक्ट घरेलू शिपयार्ड्स में ही पूरे किए जाएंगे। निजी और सरकारी कंपनियों के बीच प्रतियोगिता को बढ़ावा देने से उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा।

रक्षा सचिव ने छोटे और मध्यम उद्योगों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उनके अनुसार रक्षा क्षेत्र से जुड़ी लगभग 15,000 एमएसएमई कंपनियां सक्रिय हैं और इन्हें ऑर्डर मिलने से लाखों नौकरियां पैदा होती हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रालय का काम इन कंपनियों को विजिबिलिटी और स्थिर ऑर्डर देना है ताकि वे लगातार विकास कर सकें।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपने अनुभव पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि शुरुआती एक-दो दिन थोड़ी चिंता रही, लेकिन जल्द ही विश्वास हो गया कि भारत की सेनाएं हर स्थिति से निपटने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय से लगातार संवाद होता रहा और हर सुबह स्थिति की समीक्षा की जाती थी। उनका कहना था कि भारत ने उस संघर्ष में साबित कर दिया कि अगर दुश्मन संघर्ष को आगे बढ़ाता है तो हम और आगे बढ़कर जवाब देने की क्षमता रखते हैं।

Indian Navy NUH RFI: सेना के बाद नेवी को भी चाहिए 76 नेवल यूटिलिटी हेलिकॉप्टर, जारी हुए 276 प्लेटफॉर्म के RFI, मेक इन इंडिया को मिलेगी प्राथमिकता

Indian Navy NUH RFI: India fast-tracks helicopter procurement with dual RFIs for 276 platforms

Indian Navy NUH RFI: भारत ने अपने हेलिकॉप्टर बेड़े को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में रक्षा मंत्रालय ने एक साथ दो बड़े रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन (RFI) जारी किए हैं, जिनके तहत कुल 276 नए हेलिकॉप्टरों की खरीद की जाएगी। इन हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल सेना, वायुसेना, नौसेना और कोस्ट गार्ड द्वारा किया जाएगा।

LUH RFI: पुराने चेतक-चीता बेड़े की जगह सेना और वायुसेना को चाहिए 200 नए हल्के हेलिकॉप्टर, जारी की आरएफआई, ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी को प्राथमिकता

पहला रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन इस महीने जारी किया गया है, जिसमें 200 रिकॉनिसेंस एंड सर्विलांस हेलिकॉप्टर (RSH) की तत्काल जरूरत बताई गई है। इनमें से 120 हेलिकॉप्टर भारतीय सेना और 80 हेलिकॉप्टर भारतीय वायुसेना को दिए जाएंगे। इन हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल सीमावर्ती इलाकों में निगरानी करने, सैनिकों को तेजी से पहुंचाने और दुर्गम इलाकों में छोटी लेकिन अहम कार्रवाइयों के लिए किया जाएगा।

दूसरा रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन 22 अगस्त को 76 नेवल यूटिलिटी हेलिकॉप्टर (NUH) के लिए जारी की गई। इसमें 51 हेलिकॉप्टर नौसेना और 25 कोस्ट गार्ड को दिए जाएंगे। इन हेलिकॉप्टरों से समुद्री निगरानी और तटीय सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा।

दोनों ही खरीद प्रक्रियाओं में कहा गया है कि भारत मेक इन इंडिया पहल को प्राथमिकता देगा। इसका मतलब है कि इन हेलिकॉप्टरों का उत्पादन और तकनीक का बड़ा हिस्सा भारत में ही बनाया जाएगा।

सरकार इस बार समयसीमा पर खास ध्यान दे रही है। रिकॉनिसेंस और सर्विलांस हेलिकॉप्टरों के लिए कंपनियों को 18 अक्टूबर तक प्रस्ताव भेजने का समय दिया गया है और 2026 की शुरुआत में रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी किया जाएगा। इसके बाद 2027 के मध्य तक कॉन्ट्रैक्ट साइन होने की उम्मीद है और 2028 से हेलिकॉप्टरों की डिलीवरी शुरू हो जाएगी। नेवल यूटिलिटी हेलिकॉप्टर कार्यक्रम का शेड्यूल भी इसी तरह रहेगा और 2029-30 तक इनकी सप्लाई होने लगेगी।

भारतीय सेना लंबे समय से पुराने चीता और चेतक हेलिकॉप्टरों को रिप्लेस करने की कोशिश कर रही है। ये हेलिकॉप्टर 1960 के दशक से सेवा में हैं और कई बार तकनीकी खामियों की वजह से हादसे हो चुके हैं। हालांकि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL ने सेना के लिए लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर भी बनाया, लेकिन ऑटोपायलट और फ्लाइट कंट्रोल सॉफ्टवेयर में दिक्कतों के चलते यह परियोजना समय पर आगे नहीं बढ़ पाई। यही वजह है कि अब सरकार ने विदेशी कंपनियों को भी इस प्रतिस्पर्धा में शामिल करने का रास्ता खोला है।

इस बड़ी खरीद में कई कंपनियां दिलचस्पी दिखा रही हैं। एयरबस अपने H145M मॉडल को टाटा के साथ साझेदारी के जरिए पेश कर रही है। एमडी हेलिकॉप्टर्स हल्के टेक्टिकल जरूरतों के लिए MD 530F ला रही है। रूस का KA-226T भी इस दौड़ में है, लेकिन कीमत और लोकल मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी शर्तों के चलते इस पर अनिश्चय है। इस बीच मुंबई की मैक्स एयरोस्पेस एंड एविएशन भी इस प्रक्रिया में उतरी है। कंपनी Bell 407Xi हेलिकॉप्टर पेश कर रही है, जो ऊंचाई वाले इलाकों और कठिन मौसम में काम करने के लिए बेहतरीन माना जाता है।

मैक्स एयरोस्पेस ने हाल ही में महाराष्ट्र सरकार के साथ एक बड़ा समझौता किया है। जून में कंपनी ने 960 मिलियन डॉलर का एमओयू साइन किया, जिसके तहत नागपुर एयरपोर्ट के पास एक हेलिकॉप्टर असेंबली और टेस्टिंग प्लांट बनाया जाएगा। नागपुर पहले से ही एयरोस्पेस सेक्टर का मजबूत सेंटर है और 2026 तक यह प्लांट चालू हो जाएगा। इसके बाद अगले आठ साल में यहां बड़े पैमाने पर हेलिकॉप्टर निर्माण शुरू होगा।

नेवल यूटिलिटी हेलिकॉप्टर कार्यक्रम की चर्चा 2014 से चल रही है, लेकिन इस बार जारी RFI को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नौसेना ने साफ कर दिया है कि नए हेलिकॉप्टरों में ब्लेड फोल्डिंग की सुविधा होनी चाहिए ताकि जहाजों पर इन्हें आसानी से रखा जा सके। साथ ही इनमें पहियों वाला लैंडिंग गियर और पहले से ऑपरेशनल सेवा का अनुभव होना भी अनिवार्य होगा।

बता दें कि रक्षा मंत्रालय ने इस साल का बजट नौ फीसदी बढ़ाया है और इसे सुधारों का साल बताया है। हेलिकॉप्टरों की खरीद को उसी व्यापक योजना का हिस्सा माना जा रहा है। मंत्रालय का मकसद अब छोटे अपग्रेड की बजाय बड़े स्तर पर पूरी सिस्टम को आधुनिक बनाना है।

Indian Army Restructuring: पाकिस्तान और चीन ने किया कोई दुस्साहस तो काल बनेंगे भैरव कमांडोज! 23 बटालियन खड़ी करने की तैयारी, ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना ने शुरू की री-स्ट्रक्चरिंग

Indian Army Restructuring Bhairav Commandos Operation Sindoor

Indian Army Restructuring: पाकिस्तान और चीन से एक साथ चुनौती झेल रही भारतीय सेना ने अपने स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव करते हुए भैरव कमांडोज (Bhairav Commandos) की बटालियन तैयार की है। इन्हें अक्टूबर के आखिर तक तैनात कर दिया जााएगा। इसके लिए सेना पूरी तैयारियों में जुटी है। सेना ने पहले चरण में पांच यूनिट्स खड़ी की हैं, जिनमें से तीन उधमपुर स्थित उत्तरी मोर्चे यानी नॉर्दन कमांड में लद्दाख, श्रीनगर और नागरोटा और एक पश्चिमी रेगिस्तानी सेक्टर और एक पूर्वोत्तर के पहाड़ी इलाके में तैनात की जा रही हैं। बता दें कि लद्दाख में 14 कोर, श्रीनगर में 15 कोर और नागरोटा में 16 कोर तैनात है।

Bhairav Vs Ghatak Platoon: क्या भैरव फोर्स के आने के बाद खत्म हो जाएगी बटालियन में घातक प्लाटून? जानिए क्या है सेना का असली प्लान?

रक्षा सूत्रों के मुताबिक, यह कदम ऑपरेशन सिंदूर के बाद उठाया गया है। जिसमें पाकिस्तान ने चीन की मदद से भारत के खिलाफ रियल-टाइम इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी सपोर्ट का इस्तेमाल किया था। 7 से 10 मई तक चार दिनों तक इस युद्ध से भारतीय सेना को यह सबक मिला कि पुराने स्ट्रक्चर के साथ-साथ अब नई, तेज और हल्की यूनिट्स की जरूरत है, जो सीमा पर तुरंत कार्रवाई कर सकें और स्पेशल फोर्सेस को राहत दे सकें।

Indian Army Restructuring: ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख

मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय सेना को दिखा दिया कि मॉडर्न वॉरफेयर का स्वरूप कितना बदल चुका है। ड्रोन, लाइट म्यूनिशंस, नेटवर्क्ड इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस ने यह साबित कर दिया कि दुश्मन को सीमा पार से भी रियल-टाइम मदद मिल सकती है। खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने पाकिस्तान को भारतीय टुकड़ियों की मूवमेंट और हथियारों की तैनाती की जानकारी लगातार मुहैया कराई थी।

यही वजह रही कि सेना ने युद्ध के बाद तुरंत नए स्ट्रक्चर का एलान कर दिया। आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के अवसर पर कहा कि अब सेना रूद्र ब्रिगेड्स, शक्तिबाण रेजिमेंट्स और भैरव बटालियन जैसे नए फॉर्मेशन खड़े करेगी।

Indian Army Restructuring: भैरव बटालियन में 250 जवान

भैरव कमांडोज दरअसल लाइट कमांडो बैटालियन है, जिनमें लगभग 250 जवान होंगे। ये रेगुलर इन्फैंट्री और पैरा स्पेशल फोर्सेस के बीच की कड़ी माने जा रहे हैं। सेना इन्हें अपने मौजूदा रेगुलर 415 इन्फैंट्री बटालियनों से चुन रही है। इसे सेव एंड रेज मॉडल कहा जा रहा है, यानी नई भर्ती के बजाय मौजूदा टुकड़ियों से सैनिक चुनकर इन्हें रीऑर्गेनाइज्ड किया जा रहा है।

योजना के मुताबिक मौजूदा सैनिकों से धीरे-धीरे 23 भैरव बटालियन खड़ी की जाएं। सूत्रों ने बताया कि फिलहाल पहली पांच यूनिट्स 31 अक्टूबर तक तैयार करने का टारगेट रखा गया है। ये यूनिटें सेना की मौजूदा 10 पैरा-स्पेशल फोर्सेस और 5 पैरा (एयरबोर्न) बटालियनों के अतिरिक्त होंगी। इन प्रत्येक बटालियनों में करीब 620 सैनिक होते हैं, जिन्हें बेहद मुश्किल ट्रेनिंग के बाद चुना जाता है।

भैरव कमांडोज को लेटेस्ट वेपंस, गैजेट्स और ड्रोन से लैस किया जाएगा। इनका मकसद है तेजी से कार्रवाई करना, दुश्मन की पोजीशन पर हिट एंड रन ऑपरेशन करना और स्पेशल फोर्सेस को उन मुश्किल मिशनों के लिए खाली करना जिन्हें सामान्य सैनिक पूरा नहीं कर सकते। एक अन्य सूत्र ने बताया, “भैरव बटालियन में सात से आठ अधिकारी होंगे। भैरव कमांडो कई महीनों तक अपने-अपने रेजिमेंटल सेंटर्स में खास ट्रेनिंग लेंगे। इसके बाद उन्हें अपने-अपने इलाकों में तैनात स्पेशल फोर्सेस यूनिट्स के साथ एक महीने तक अटैच किया जाएगा, जहां उन्हें एडवांस ट्रेनिंग दी जाएगी।

बता दें कि 27 अगस्त बुधवार को स्पेशल फोर्सेस ऑपरेशन्स के लिए एक नई ट्राई-सर्विसेज जॉइंट डॉक्ट्रिन जारी की थी। इस नए फॉर्मेशन में थलसेना की स्पेशल फोर्सेस के अलावा वायुसेना के लगभग 1,600 गरुड़ कमांडो (27 फ्लाइट्स में तैनात) और नौसेना के 1,400 से ज्यादा मरीन कमांडो (मार्कोस) को भी शामिल किया गया है।

Indian Army Restructuring: शक्तिबाण और दिव्यास्त्र

सेना के इस बड़े बदलाव में केवल कमांडोज ही नहीं, बल्कि आर्टिलरी की नई यूनिट्स भी शामिल हैं। सूत्र बताते हैं कि शक्तिबाण आर्टिलरी रेजिमेंट्स पूरी तरह से ड्रोन और लाइट म्यूनिशंस से लैस होंगी। हर रेजीमेंट में तीन बैटरियां होंगी दो मिड और लॉन्ग-रेंज लाइट म्यूनिशंस वाली और तीसरी स्वॉर्म ड्रोन और रिमोटली पायलेटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम यानी RPAS से लैस होगी।

इसके अलावा पुरानी आर्टिलरी रेजीमेंट्स में भी दिव्यास्त्र बैटरीज जोड़ी जा रही हैं। यानी अब हर आर्टिलरी रेजीमेंट में कम से कम एक ऐसी बैटरी होगी, जो रीयल-टाइम सेंसर टू शूटर मिशन को अंजाम दे सके। इसका मतलब यह है कि निगरानी से लेकर हमले तक की पूरी प्रक्रिया खुद यूनिट्स कर पाएंगी, और किसी बाहरी इंटेलिजेंस पर निर्भर नहीं रहेंगी।

Indian Army Restructuring: रूद्र ब्रिगेड्स का गठन

इसी क्रम में सेना ने रूद्र ऑल-आर्म्स ब्रिगेड्स भी खड़ी की हैं। इन ब्रिगेड्स में इन्फैंट्री, आर्मर, मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री, आर्टिलरी, इंजीनियर्स, एयर डिफेंस, UAVs और स्पेशल फोर्सेस सब एक ही फॉर्मेशन में लाए जाएंगे। यह ब्रिगेड्स पारंपरिक इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स (IBGs) से अलग होंगी। जहां IBG को मेजर जनरल लीड करते हैं, वहीं रूद्र ब्रिगेड्स को ब्रिगेडियर लीड करेंगे। यह साइज में सामान्य ब्रिगेड से बड़ी लेकिन डिवीजन से छोटी होंगी।

Indian Army Restructuring: क्यों अहम है यह बदलाव

सेना के जानकारों का कहना है कि युद्ध के समय स्पेशल फोर्सेस को कई बार छोटे-छोटे मिशनों में लगाना पड़ता है। इससे उनकी क्षमता बड़े मिशनों पर कम हो जाती है। भैरव कमांडोज इस गैप को भरेंगे। साथ ही शक्तिबाण रेजिमेंट्स और दिव्यास्त्र बैटरीज बैटलफील्ड को पूरी तरह नेटवर्क्ड बना देंगी, जहां हर तोप और हर ड्रोन सीधे सेंसर डेटा के आधार पर काम करेगा। इस तरह सेना का यह कदम पोस्ट-सिंदूर वॉर री-स्ट्रक्चरिंग है, जिसमें पुराने स्ट्रक्चर को बदले बिना मौजूदा संसाधनों को नए तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है।

ECHS Scheme for Disabled Cadets: ट्रेनिंग में घायल कैडेट्स को बड़ी राहत, अब ECHS से मिलेगा मुफ्त इलाज, रक्षा मंत्रालय का बड़ा फैसला

ECHS Scheme for Disabled Cadets: Defence Ministry Grants Free Medical Facilities to Injured Trainees

ECHS Scheme for Disabled Cadets: ट्रेनिंग के दौरान घायल होकर स्थायी विकलांगता का शिकार होने वाले भारतीय सेना के अफसर कैडेट्स के लिए सरकार ने बड़ा राहत देने वाला कदम उठाया गया है। रक्षा मंत्रालय ने आदेश जारी कर कहा है कि ऐसे कैडेट्स को एक्स-सर्विसमेन कॉन्ट्रिब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ECHS) के तहत चिकित्सा सुविधाएं दी जाएंगी। यह फैसला उस समय आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लेकर सरकार से पूछा था कि इन कैडेट्स के लिए बेहतर देखभाल, मुआवजा और बीमा की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही।

Speedy Justice for Armed Forces: दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश; आर्मी, नेवी, एयरफोर्स और पैरामिलिट्री मामलों की सुनवाई को मिलेगी प्राथमिकता

यह कदम ऐसे समय में आया है जब कोर्ट और मीडिया रिपोर्ट्स ने बार-बार इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान खींचा। दरअसल, अब तक ट्रेनिंग के दौरान विकलांग हुए कैडेट्स को एक्स-सर्विसमेन का दर्जा नहीं दिया जाता था। नतीजतन, वे ECHS जैसी योजनाओं के दायरे से बाहर थे और केवल एक मामूली से एक्स-ग्रेशिया रकम पर निर्भर थे।

ECHS Scheme for Disabled Cadets: क्या है रक्षा मंत्रालय का आदेश

रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि अब ऐसे कैडेट्स जिन्हें ट्रेनिंग के दौरान मेडिकल ग्राउंड पर बाहर कर दिया जाता है, उन्हें ECHS की सुविधाओं का लाभ मिलेगा। इसके तहत वे ECHS की सदस्यता ले सकेंगे, आउट पेशेंट और इन पेशेंट दोनों तरह की सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे और एम्पैनल्ड अस्पतालों में कैशलेस इलाज करा सकेंगे।

मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि कैडेट्स से किसी तरह की एकमुश्त सदस्यता फीस नहीं ली जाएगी। वर्तमान में एक्स-सर्विसमेन अधिकारियों के लिए यह फीस 1.20 लाख रुपये है, लेकिन कैडेट्स को इससे छूट दी गई है।

Supreme Court on Cadets Medical Relief

ECHS Scheme for Disabled Cadets: सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इस मामले पर सुनवाई की थी। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और आर. महादेवन की बेंच ने सरकार से कहा था कि इस मामले को मानवीय दृष्टिकोण से हल किया जाए। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि अब तक करीब 500 कैडेट्स अलग-अलग स्तर की विकलांगता के शिकार हो चुके हैं। अकेले नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) से ही 2021 से जुलाई 2025 के बीच 20 कैडेट्स मेडिकल कारणों से बाहर कर दिए गए।

कोर्ट ने इस तरफ भी ध्यान दिलाया कि फिलहाल इन कैडेट्स को केवल 40,000 रुपये तक की मासिक सहायता मिलती है, जबकि उनका औसतन मेडिकल खर्च ही 50,000 रुपये से ऊपर है।

जस्टिस नागरत्ना ने एक मीडिया रिपोर्ट पर संज्ञान लिया और इसे चीफ जस्टिस बी.आर. गवई की अनुमति से स्वतः संज्ञान याचिका के रूप में दर्ज किया गया।

सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने चंडीगढ़ के कैडेट विक्रांत राज का भी जिक्र किया। विक्रांत एनडीए में ट्रेनिंग के दौरान सिर पर गंभीर चोट लगने से ब्रेन हैमरेज का शिकार हुए और छह महीने तक कोमा में रहे। आज वे सामान्य कामकाज करने में असमर्थ हैं। उनकी मां ने बताया कि फिजियोथेरेपी और प्राइवेट हॉस्पिटल के इलाज का खर्च इतना ज्यादा है कि परिवार पर भारी बोझ आ गया है। कोर्ट ने इस मामले में सरकार से विशेष जवाब मांगा है।

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने आश्वासन दिया कि सरकार 4 सितंबर तक इस मुद्दे पर जवाब दाखिल करेगी। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि प्रभावित कैडेट्स की ओर से आने वाले सुझाव लिखित रूप में सरकार तक पहुंचाए जाएं।

कोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या इन कैडेट्स को बीमा कवर दिया जा सकता है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में उनके परिवार को सुरक्षा मिल सके। साथ ही यह भी जांचने को कहा गया कि क्या इन्हें ‘राइट्स ऑफ पर्सन्स विद डिसएबिलिटीज एक्ट, 2016’ के तहत अधिकार मिल सकते हैं।

कोर्ट ने सुनवाई में कहा कि सरकार की यह जिम्मेदारी है कि जो युवा देश की रक्षा के लिए खुद को तैयार करने के दौरान घायल या विकलांग हो जाते हैं, उन्हें अनदेखा न किया जाए। अदालत ने जोर दिया कि इन्हें स्वास्थ्य बीमा, पर्याप्त मुआवजा और पुनर्वास प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं मिलनी ही चाहिए।

Pakistan Narrative Warfare: नैरेटिव को कैसे हथियार बना रहा पाकिस्तान, कैसे किसान आंदोलन, दिल्ली हिंसा और पहलगाम हमला हैं “सॉफ्ट पावर वॉर” का हिस्सा? भारत को कमजोर करने की साजिश

Pakistan Narrative Warfare: Was Pahalgam Attack a Trap by Pakistan? Maj Gen SP Vishwasrao at Ran Samvad
Maj Gen SP Vishwasrao at Ran Samvad 2025

Pakistan Narrative Warfare: मऊ (मध्य प्रदेश) में आयोजित पहले ट्राई-सर्विसेज कॉन्क्लेव ‘रण संवाद 2025’ में भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी मेजर जनरल एसपी विश्वसराव ने इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर और नैरेटिव बिल्डिंग की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने इसे “Weaponising the Narrative” यानी नैरेटिव को हथियार बनाने की प्रक्रिया बताया, जो न सिर्फ युद्ध के मैदान बल्कि जनता की सोच और दुश्मन के मनोबल को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला पाकिस्तान की तरफ से भारत को जाल में फंसाने की कोशिश हो सकती है।

Ran Samwad 2025 Doctrine: युद्ध का मैदान बने इंसानी दिमाग से ऐसे जंग लड़ेंगे स्पेशल फोर्सेज के जवान! ऑपरेशन सिंदूर के बाद सौंपा गया नया काम

वेस्टर्न सेक्टर में एडिशनल डायरेक्टर जनरल रिक्रूटमेंट मेजर जनरल विश्वसराव पहले पाकिस्तान में भारत के डिफेंस अताशे रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस हमले का मकसद भारत को उकसाना और सीमा पर तनाव बढ़ाना था। उन्होंने इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर पर अपने संबोधन के दौरान बताया कि आतंकियों ने हिंदुओं को चुनकर निशाना बनाया और बचे हुए लोगों से कहा कि यह संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाना। उनके मुताबिक यह सीधा-सीधा राजनीतिक और सांप्रदायिक संदेश था, जिसका लक्ष्य भारत में विभाजनकारी स्थिति पैदा करना था।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान चाहता था कि भारत गुस्से में आकर सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कोई बड़ी कार्रवाई करे और इसके लिए शायद पाकिस्तान पहले से तैयार भी था।

बता दें कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ और स्वयंभू फील्डमार्शल जनरल आसिम मुनीर अपने कट्टरपंथी इस्लामी विचारों के लिए जाने जाते हैं। मुनीर पहले आईएसआई के प्रमुख भी रह चुके हैं और पुलवामा हमले के दौरान वे इसी पद पर थे। उनकी सोच अपने पूर्ववर्ती जनरल बाजवा से अलग है। बाजवा डॉक्ट्रिन में भारत से कामकाजी रिश्तों पर जोर दिया गया था, जबकि मुनीर फिर से वैश्विक मंच पर कश्मीर मुद्दे को उभारना चाहते हैं।

Pakistan Narrative Warfare: नैरेटिव वॉरफेयर कितनी है जरूरी

मेजर जनरल विश्वसराव ने नैरेटिव को हथियार बनाने की प्रक्रिया (Weaponising the Narrative) विषय पर बोलते हुए बताया कि कैसे आज की दुनिया में युद्ध सिर्फ गोलियों और मिसाइलों से नहीं, बल्कि विचारों और सूचनाओं से भी लड़े जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक की मदद से स्ट्रैटेजिक कम्यूनिकेशन को तीनों सेनाओं में एकसाथ जोड़ा जा सकता है और इससे दुश्मन की सोच पर दबाव बनाया जा सकता है।

उनके अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाले एनालिसिस और टेक्नोलॉजी बेस्ड इनफॉरमेशन सेल अब जरूरी हो गए हैं, ताकि भारत अपनी कहानी और अपना नैरेटिव मजबूती से दुनिया के सामने रख सके। उन्होंने कहा कि Neocortical Warfare यानी ‘नैरेटिव को हथियार की तरह इस्तेमाल करना’ शांति बनाए रखने और भारत की रणनीतिक विश्वसनीयता को मजबूत करने का अहम साधन बन सकता है।

Pakistan Narrative Warfare: किसान आंदोलन ‘नैरेटिव वॉर’ का हिस्सा!

मेजर जनरल विश्वसराव ने अपने प्रेजेंटेशन के दौरान किसान आंदोलन, नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विरोध, दिल्ली हिंसा, जम्मू-कश्मीर, यमुना और मणिपुर के हालात की तस्वीरें दिखाईं। उन्होंने कहा कि यह सब भारत को अस्थिर करने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा थे। उन्होंने इसे कलर रिवोल्यूशन (Colour Revolution) की तरह बताया, जिसमें “कलर रिवोल्यूशन” जैसी रणनीतियों के जरिए समाज में अस्थिरता पैदा की जाती है और विरोध प्रदर्शनों को एक नैरेटिव की शक्ल दी जाती है।

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान कैसे आतंकवाद और हिंसा का इस्तेमाल केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उसे “सॉफ्ट पावर वॉर” यानी नैरेटिव के जरिए भारत को अस्थिर करने के लिए भी इस्तेमाल करता है। उन्होंने कहा कि ऐसा ही प्रयोग पहले बांग्लादेश में हुआ था और अब भारत में भी विरोध प्रदर्शनों को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उनके मुताबिक, 2008-2010 और 2016 में कश्मीर में जो हिंसक आंदोलन हुए, वे भी इसी रणनीति का हिस्सा थे।

उन्होंने दुश्मन की “Centre of Gravity” यानी उसकी असली ताकत और हौसले के स्रोत को निशाना बनाने की बात कही। मतलब, जहां से दुश्मन को ताकत और आत्मविश्वास मिलता है, अगर उसी को कमजोर कर दिया जाए, तो उसका पूरा ढांचा हिल सकता है।

Pakistan Narrative Warfare: ऑपरेशन सिंदूर का नैरेटिव

अपने संबोधन में मेजर जनरल विश्वसराव ने ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस अभियान ने भारतीय सेना को यह सबक दिया कि सूचना युद्ध (Information Warfare) कितनी अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि नैरेटिव पर कंट्रोल रखना और सही समय पर सही संदेश देना युद्ध के मैदान में हथियारों जितना ही महत्वपूर्ण है।

उन्होंने बताया कि अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर, नाटो-रूस संघर्ष, आर्टिकल 370 हटना, गलवान झड़प, बलूचिस्तान और तालिबान के हालात, पाकिस्तान की राजनीति और जम्मू-कश्मीर चुनाव, इन सबका इस्तेमाल पाकिस्तान भारत के खिलाफ नैरेटिव वॉर में करता है।

उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्धों में सिर्फ टैंक, जहाज और लड़ाकू विमान ही नहीं, बल्कि साइबर ऑपरेशन्स, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) जैसे हथियार निर्णायक भूमिका निभाएंगे। सूचना और नैरेटिव को कंट्रोल करना दुश्मन को मानसिक तौर पर कमजोर करने का तरीका है। इससे न केवल देश एकजुट रहता है बल्कि ऑपरेशनल क्षमता भी और मजबूत होती है।

Airbus Mahindra H125 helicopter fuselage: भारत में एयरबस और महिंद्रा की बड़ी साझेदारी, बेंगलुरु में बनेगा H125 हेलिकॉप्टर का मुख्य ढांचा

Airbus Mahindra H125 helicopter fuselage contract India

Airbus Mahindra H125 helicopter fuselage: भारत में एयरोस्पेस सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है। एयरबस हेलिकॉप्टर्स ने महिंद्रा एयरोस्ट्रक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड (MASPL) को H125 हेलिकॉप्टर का मेन फ्यूजलाज (ढांचा) बनाने का कॉन्ट्रैक्ट दिया है। यह कॉन्ट्रैक्ट बेंगलुरु में महिंद्रा के प्लांट को मिला है। वहीं, पहले फ्यूजलाज की डिलीवरी साल 2027 तक होनी है। गौरतलब है कि इसी साल अप्रैल 2025 में H130 हेलिकॉप्टर के फ्यूजलाज का निर्माण भी महिंद्रा एयरोस्ट्रक्चर्स को सौंपा गया था।

LUH Vs H125M Helicopter: क्या भारतीय सेना की पसंद बनेगा HAL का लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर, या फ्रांस का H125M मार ले जाएगा बाजी? क्या होगा मेक इन इंडिया का?

Airbus Mahindra H125 helicopter fuselage: एयरबस का भरोसा भारत पर

कॉन्ट्रैक्ट की घोषणा के मौके पर एयरबस के इंटरनेशनल एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट वाउटर वैन वर्श, एयरबस इंडिया और साउथ एशिया के प्रेसिडेंट एंड मैनेजिंग डायरेक्टर जुर्गन वेस्टरमियर और MASPL के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ अरविंद मेहरा मौजूद थे।

जुर्गन वेस्टरमियर ने कहा, “यह नया कॉन्ट्रैक्ट भारत में हमारे साझेदारों की क्षमता और देश के एयरोस्पेस सेक्टर के लिए साझा दृष्टिकोण का सबूत है। H125 का यह बड़ा पैकेज, H130 साझेदारी और निर्माणाधीन H125 की फाइनल असेंबली लाइन (FAL) के साथ मिलकर इस बात को दिखाता है कि हमें भारत पर पूरा भरोसा है। हम केवल हेलिकॉप्टर नहीं बना रहे, बल्कि यहां एक पूरा इकोसिस्टम खड़ा कर रहे हैं, जो भारत में रोटरक्राफ्ट बाजार को डेवलप करेगा।”

Airbus Mahindra H125 helicopter fuselage contract India

इस कॉन्ट्रैक्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा, “एयरबस हेलिकॉप्टर्स ने महिंद्रा एयरोस्ट्रक्चर्स प्रा. लि. (MASPL) को H125 हेलिकॉप्टर के मुख्य ढांचे के निर्माण के लिए चुना है। यह हमारे ग्रुप के लिए बहुत बड़ी खबर है। लेकिन मुझे इससे भी ज्यादा खुशी इस बात की है कि यह कॉन्ट्रैक्ट भारत की मेक इन इंडिया महत्वाकांक्षाओं और दुनिया के नए बाजारों में देश की बढ़ती क्षमता का सबूत है।”

इस समझौते के साथ भारत एयरबस हेलिकॉप्टर्स की ग्लोबल सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बन गया है। अभी एयरबस हर साल भारत से 1.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के पुर्जे और सेवाएं खरीदती है। H125 और H130 हेलिकॉप्टर्स के फ्यूजलाज का उत्पादन भारत में होने से देश एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग के ग्लोबल नेटवर्क में और गहराई से जुड़ जाएगा। इससे भारत की छवि एक भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी पार्टनर के रूप में और मजबूत होगी।

महिंद्रा ग्रुप के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. अनीश शाह ने कहा, “एयरबस के साथ साझेदारी करना हमारे लिए गौरव की बात है। यह कॉन्ट्रैक्ट न सिर्फ हमारी लंबी अवधि की साझेदारी को और मजबूत करता है, बल्कि मेक इन इंडिया के लिए हमारी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। हम एयरबस के साथ मिलकर भारत के एयरोस्पेस इकोसिस्टम को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए तैयार हैं।”

Image

दरअसल एयरबस का यह फैसला भारत में उसकी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। कंपनी पहले से ही H125 हेलिकॉप्टर और C295 मिलिट्री एयरक्राफ्ट की फाइनल असेंबली लाइन भारत में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के साथ बना रही है। जिसके बाद भारत में एक एंड-टू-एंड एयरोस्पेस इकोसिस्टम तैयार हो जाएगा, जिसमें डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली, मेंटेनेंस और ट्रेनिंग जैसी पूरी प्रक्रिया भारत में ही की जाएगी।

इससे भारत न सिर्फ घरेलू जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकेगा।

महिंद्रा एयरोस्ट्रक्चर्स का बेंगलुरु प्लांट अब एयरबस के कई प्रोजेक्ट्स का अहम हिस्सा बन चुका है। यहां पहले से H130 का काम चल रहा है और अब H125 का कॉन्ट्रैक्ट मिलने से यह केंद्र और भी महत्वपूर्ण हो गया है। एयरोस्पेस इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि यह साझेदारी भारत को रोटरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग में वैश्विक स्तर पर एक मजबूत खिलाड़ी बना देगी।

Ran Samwad 2025 में वाइस एडमिरल तरुण सोबती ने बताया, ऑपरेशन सिंदूर में INS विक्रांत पर तैनात थे 15 मिग-29 फाइटर जेट, ये 9 ट्रेंड्स तय करेंगे भविष्य के युद्धों की बिसात

Ran Samwad 2025 Vice Admiral Tarun Sobti Future Wars Analysis
VAdm Tarun Sobti, Deputy Chief of Naval Staff Indian Navy analyses Global conflicts and their Lessons for India.

Ran Samwad 2025: भारतीय नौसेना के डिप्टी चीफ वाइस एडमिरल तरुण सोबती का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक ऑपरेशन नहीं था, बल्कि भविष्य के युद्ध की झलक थी। इससे मिली सीखों ने भारतीय नौसेना और तीनों सेनाओं को यह समझने में मदद की कि आने वाले समय में युद्ध केवल बंदूकों, टैंकों और जहाजों से नहीं, बल्कि ड्रोन, साइबर युद्ध, सैटेलाइट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नैरेटिव कंट्रोल से भी लड़े जाएंगे।

Ran Samwad 2025 Training Reforms: भारतीय सेना में बड़े बदलाव की तैयारी, अब ट्रेनिंग में ड्रोन और साइबर वॉरफेयर होंगे शामिल

Ran Samwad 2025: ऑपरेशन सिंदूर से मिली बड़ी सीख

मऊ के आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित रण संवाद 2025 कार्यक्रम में बोलते हुए वाइस एडमिरल तरुण सोबती ने स्वीकार किया कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय नौसेना को कई अहम सबक दिए। उन्होंने बताया कि जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकियों ने आतंकी हमले को अंजाम दिया और उसके बाद जब हालात युद्ध की ओर बढ़े, तब नौसेना ने मात्र 96 घंटे के भीतर अपनी पूरी तैयारी पूरी कर ली थी।

Ran Samwad 2025: अपने ही बंदरगाहों में कैद हुई पाकिस्तानी सेना

उन्होंने रक्षा समाचार को बताया कि नौसेना हर दो साल में थिएटर-लेवल एक्सरसाइज Tropex करती है। इस साल भी जनवरी से मार्च के बीच यह अभ्यास हुआ था। उसी तैयारी का फायदा यह हुआ कि जब हालात बिगड़े, तो नौसेना तुरंत समुद्र में उतरने के लिए तैयार थी। सभी जहाजों और पनडुब्बियों को तुरंत गोला-बारूद से लैस किया गया। उन्होंने बताया कि एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत पर 15 मिग-29 लड़ाकू विमान तैनात किए गए और पूरी नौसेना पश्चिमी समुद्र तट पर सक्रिय हो गई।

उद्देश्य स्पष्ट था फॉरवर्ड पोस्टचर और डिटरेंस, ताकि पाकिस्तान किसी भी हाल में भारत की समुद्री सीमाओं, व्यापारिक मार्गों या तटवर्ती क्षेत्रों को खतरा न पहुंचा सके। इस तेज और संगठित कार्रवाई का नतीजा यह हुआ कि पाकिस्तान की नौसेना अरब सागर से बाहर निकल ही नहीं पाई। वाइस एडमिरल सोबती ने गर्व से कहा, “हमने उन्हें उनके ही बंदरगाहों में कैद कर दिया। वे बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।”

Ran Samwad 2025: कैसा होगा भविष्य का युद्ध?

सोबती ने कहा कि इतिहास गवाह है कि हर बड़ी तकनीकी क्रांति ने युद्ध का चेहरा बदला है। तलवार से तोप तक, टैंक से परमाणु बम तक, हर युग में तकनीक ने निर्णायक भूमिका निभाई। आज हम एक साथ कई तकनीकी क्रांतियों के बीच खड़े हैं।

उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, साइबर ऑपरेशंस और ड्रोन टेक्नोलॉजी ने युद्ध को पूरी तरह बदल दिया है। खास बात यह है कि ये तकनीकें अब बहुत तेजी से विकसित हो रही हैं, सस्ती हो गई हैं और हर किसी के लिए उपलब्ध हैं। सोबती ने कहा कि अब युद्ध का आधार केवल संख्या नहीं बल्कि स्पीड और सटीकता (Precision) है।

उन्होंने कहा कि आज की निर्णायक शक्ति ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और रियल-टाइम कम्युनिकेशन है। उनका कहना था कि सिविल सोर्स तकनीक जैसे Starlink सैटेलाइट इंटरनेट, AI आधारित डेटा एनालिटिक्स और ऑफ-द-शेल्फ ड्रोन अब युद्ध के मैदान पर हथियार के रूप में इस्तेमाल हो रहे हैं। इसका असर यह है कि युद्ध केवल सेनाओं के बीच नहीं, बल्कि तकनीक को अपनाने और इस्तेमाल करने की क्षमता पर निर्भर हो गया है।

Ran Samwad 2025: प्रिसिजन-गाइडेड म्युनिशन से कम कॉलेटरल डैमेज

वाइस एडमिरल सोबती ने रूस-यूक्रेन युद्ध और गाजा संघर्ष का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ड्रोन अब युद्ध के सबसे बड़े हथियार बन गए हैं। ईरान-इजरायल संघर्ष में लंबी दूरी से की गई स्ट्राइक और प्रिसिजन-गाइडेड म्युनिशन (PGMs) ने युद्ध की दिशा बदल दी। प्रिसिजन-गाइडेड म्युनिशन का इस्तेमाल करते हुए कम से कम कॉलेटरल डैमेज के साथ दुश्मन के मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया।

वाइस एडमिरल सोबती ने कहा कि अब ये हथियार केवल टैक्टिकल लग्जरी नहीं बल्कि रणनीतिक जरूरत बन चुके हैं।

उन्होंने बताया कि यूक्रेन युद्ध ने दिखा दिया कि कम लागत वाले ड्रोन अब बड़े हथियारों के बराबर असर डाल सकते हैं। साधारण क्वाडकॉप्टर को बम गिराने और आत्मघाती (Kamikaze) मिशनों के लिए बदला गया। रूसी टैंकों और आर्मर्ड कॉलम्स को ड्रोन और सैटेलाइट से पहले पहचानकर यूक्रेनी सेना ने सटीक हमले किए। यमन के हूती विद्रोहियों ने रेड सी और गल्फ ऑफ एडन में सस्ते UAVs का इस्तेमाल कर बड़े जहाजों और व्यापारिक मार्गों को चुनौती दी। सोबती ने कहा कि अब ड्रोन स्वॉर्म्स (झुंड) हाई टेक्नोलॉजी वेपंस और जहाजों को टक्कर दे रहे हैं।

Ran Samwad 2025: स्पेस: वॉर का नया डोमेन

सोबती ने कहा कि अब अंतरिक्ष केवल वैज्ञानिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहा। युद्ध में यह सबसे अहम साधन बन चुका है। यूक्रेन को Maxar और Planet Labs जैसी कंपनियों से रियल टाइम सैटेलाइट इमेजरी मिली। Starlink इंटरनेट नेटवर्क ने उन्हें सेफ कम्युनिकेशन उपलब्ध कराया, जबकि रूस लगातार इलेक्ट्रॉनिक जामिंग कर रहा था। इसी तरह गाजा में इजरायल ने सैटेलाइट से हमास की सुरंगों और ठिकानों का पता लगाकर चुनिंदा हमले किए। उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि आधुनिक युद्ध में स्पेस-बेस्ड एसेट्स निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।

Ran Samwad 2025: इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर का बढ़ता दबदबा

वाइस एडमिरल सोबती ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) आज की लड़ाई का अहम हिस्सा बन गया है। रूस ने यूक्रेनी ड्रोन और GPS आधारित हथियारों को जैमिंग और स्पूफिंग से बेकार कर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को भी जॉइंट इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर एसेट्स तैयार करने होंगे क्योंकि आज “जो स्पेक्ट्रम को कंट्रोल करता है, वही युद्ध को कंट्रोल करता है।”

इनफॉरमेशन वॉर और नैरेटिव कंट्रोल

वाइस एडमिरल सोबती ने बताया कि युद्ध केवल मैदान में नहीं बल्कि लोगों के दिमाग में भी लड़ा जाता है। रूस और यूक्रेन दोनों ने अपने-अपने पक्ष में नैरेटिव बनाने के लिए मीडिया लीक, सोशल मीडिया, वीडियो और प्रोपेगैंडा का इस्तेमाल किया। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में भी दुश्मन ने दुष्प्रचार फैलाने की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेना ने समय रहते इसका जवाब दिया। उनका कहना है, “नैरेटिव कंट्रोल अब युद्ध का जरूरी हिस्सा बन चुका है।”

बता दें कि सीडीएस अनिल चौहान ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लगभग 15 प्रतिशत ऊर्जा दुश्मन के झूठे नैरेटिव और दुष्प्रचार को रोकने में लग गई। यही कारण है कि ऑपरेशन के बाद भारत ने अपनी बात मजबूत ढंग से रखी और वैश्विक स्तर पर समर्थन हासिल किया।

साइबर ऑपरेशंस का रोल

वाइस एडमिरल सोबती के मुताबिक साइबर अटैक युद्ध का हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन अभी तक निर्णायक नहीं साबित हुए हैं। रूस ने यूक्रेन की पावर ग्रिड और कम्युनिकेशन सिस्टम को निशाना बनाया, वहीं ईरान समर्थित हैकर्स ने इजरायल की वाटर सप्लाई और एनर्जी फैसिलिटी पर हमला किया। हालांकि, यूक्रेन रेडंडेंसी और बैकअप सिस्टम के जरिए ऐसे हमलों से जल्दी उबर गया। लेकिन इन हमलों का असर लंबे समय तक नहीं रहा। उन्होंने कहा कि साइबर हमले सहयोगी तो हैं लेकिन निर्णायक नहीं हैं। लेकिन उन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक होगा।

नेटवर्क-इंटीग्रेटेड फोर्स स्ट्रक्चर

उन्होंने कहा कि भारत को नेटवर्क-इंटीग्रेटेड फोर्स स्ट्रक्चर की ओर बढ़ना होगा, जहां सेंसर और शूटर अलग-अलग होकर भी डेटा शेयर कर सकें और तुरंत हमला कर सकें। सोबती ने कहा कि आधुनिक युद्ध ने यह साबित कर दिया है कि अब केवल सैनिकों की संख्या से जीत नहीं मिलती। बल्कि स्पीड, एक्यूरेसी और टेक्निकल ऑप्टिमाइजेशन ही युद्ध में जीत दिला सकते हैं।

उन्होंने सुझाव दिया कि भारतीय सेनाओं को मॉड्यूलर, टेक-एनेबल्ड और एगाइल फोर्स पैकेजेज अपनाने होंगे। युद्ध अब “Mass vs Mass” नहीं बल्कि “Fast vs Fast” हो गया है। उन्होंने कहा कि अब भारत को अपने डॉक्ट्रिन्स (सैन्य सिद्धांतों) में मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस शामिल करने होंगे, ताकि थल, जल, नभ, अंतरिक्ष और साइबर हर क्षेत्र में एक साथ तालमेल बनाया जा सके।

Ran Samwad 2025 Training Reforms: भारतीय सेना में बड़े बदलाव की तैयारी, अब ट्रेनिंग में ड्रोन और साइबर वॉरफेयर होंगे शामिल

Ran Samwad 2025 Training Reforms in Indian Army tech-centric
Lt Gen NS Sarna, Commandant School of Artillery Indian Army, deliberating on 'Integrating Technology for Warfighting Through Training Initiatives'.

Ran Samwad 2025 Training Reforms: मध्यप्रदेश के मऊ स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में तीनों सेनाओं के संयुक्त रण संवाद 2025 सेमीनार में भारतीय सेना के टॉप अफसरों ने भविष्य के युद्ध की नई रूपरेखा पर चर्चा की। फोकस था, पारंपरिक ट्रेनिंग से आगे बढ़कर टेक्नोलॉजी-बेस्ड ट्रेनिंग मॉडल की ओर बढ़ना। रण संवाद के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 2027 तक भारतीय सेना के हर जवान को ड्रोन तकनीक की ट्रेनिंग दी जाएगी। वहीं, स्कूल ऑफ आर्टिलरी के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल एनएस सरना ने कहा कि भविष्य का युद्ध पारंपरिक नहीं बल्कि तकनीकी होगा और इसके लिए हमें सैनिकों को नए स्किल्स की ट्रेनिंग देनी होगी।

Ran Samwad 2025 Doctrine: युद्ध का मैदान बने इंसानी दिमाग से ऐसे जंग लड़ेंगे स्पेशल फोर्सेज के जवान! ऑपरेशन सिंदूर के बाद सौंपा गया नया काम

Ran Samwad 2025 Training Reforms: बदलना होगा ट्रेनिंग स्ट्रक्चर

पिछले एक दशक में दुनिया भर में हुई हालिया जंगों में देखा गया है कि ड्रोन, साइबर हमले, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। जनरल सरना ने कहा कि यह संकेत है कि अगला युद्ध इन्हीं तकनीकों के इर्द-गिर्द लड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर हमें आने वाले संघर्षों के लिए तैयार रहना है तो हमें अपने ट्रेनिंग स्ट्रक्चर को पूरी तरह बदलना होगा।

लेफ्टिनेंट जनरल एनएस सरना ने ‘इंटीग्रेटिंग टेक्नोलॉजी फॉर वॉरफाइटिंग थ्रू ट्रेनिंग इनिशिएटिव्स’ पर बोलते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि हमारी मिलिट्री ट्रेनिंग इंस्टीट्यूशंस केवल शारीरिक क्षमता और पारंपरिक युद्ध तक सीमित न रहकर टेक्नोलॉजी वॉरफेयर के लिए भी तैयार हों।

उन्होंने कहा कि अधिकांश सैन्य अकादमियां अभी भी पारंपरिक युद्ध पर आधारित प्रशिक्षण देती हैं, जहां शारीरिक फिटनेस और बुनियादी रणनीति पर ज्यादा जोर होता है। लेकिन अब यह काफी नहीं है। नए समय की मांग है कि जवान साइबर सिक्योरिटी, ड्रोन ऑपरेशन, इंफॉर्मेशन वॉरफेयर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसे विषयों में भी एक्सपर्ट बनें।

उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्धों को देखते हुए सैनिकों के लिए ऐसा ट्रेनिंग सिस्टम डेवलप करना जरूरी है, जो चुस्त और अनुकूलनशील हो और बदलती तकनीक के साथ कदम मिला सके। उनका कहना था कि सेना के प्रशिक्षण संस्थानों को तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र (Technology Training Hubs) के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने सिमुलेशन बेस्ड पाठ्यक्रम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वारगेमिंग और जॉइंट ट्रेनिंग इनिशिएटिव को पारंपरिक सैन्य शिक्षा में बड़ा परिवर्तनकारी कदम बताया। साथ ही उन्होंने एक राष्ट्रीय सैन्य डिजिटल ज्ञान भंडार (Military Digital Knowledge Repository) बनाने की सिफारिश की, ताकि आधुनिक ज्ञान और तकनीकी अनुभव को संस्थागत ढांचे में संरक्षित और साझा किया जा सके।

Ran Samwad 2025 Training Reforms: सिद्धांत, संगठन और ट्रेनिंग पर फोकस

इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (HQ-IDS) के डिप्टी चीफ (Doctrine, Organisation & Training) लेफ्टिनेंट जनरल विपुल सिंघल ने कहा कि भविष्य के युद्धों में जीत का आधार जॉइंटनेस और ऑर्गनाइजेशन तालमेल होगा। उन्होंने कहा, “आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के बीच सामरिक एकजुटता और साझा प्रशिक्षण ही हमें भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों में बढ़त दिलाएगा।”

उन्होंने कहा कि सैन्य प्रशिक्षण को लगातार अपडेट करते रहना होगा ताकि वह तकनीकी बदलावों के साथ तालमेल बना सके। उनके अनुसार, युद्ध की तैयारी के तीन स्तंभ हैं Doctrine (सिद्धांत), Organisation (संगठन) और Training (प्रशिक्षण)। इन तीनों का तालमेल ही कॉम्बैट रेडीनेस यानी युद्ध के लिए तैयार रहने की गारंटी है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल प्रशिक्षण को तकनीकी रूप से आधुनिक बनाया जा सकेगा, बल्कि विभिन्न सेनाओं के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान भी आसान होगा।

Ran Samwad 2025 Training Reforms: तीन प्रमुख क्षेत्रों पर दे ध्यान

सेंट्रल कमांड यानी सूर्या कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल सेनगुप्ता ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुश्मन की तरफ से बड़े पैमाने पर ड्रोन का इस्तेमाल देखने के बाद भारत अब तीन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दे रहा है। पहला, काउंटर-ड्रोन सिस्टम विकसित करना ताकि दुश्मन के ड्रोन खतरों को तुरंत न्यूट्रलाइज किया जा सके। दूसरा, ज्यादा से ज्यादा सैनिकों को ड्रोन चलाने और टैक्टिकल बैटल एरिया में इस्तेमाल करने का प्रशिक्षण देना। तीसरा, ऑटोनोमस हवाई हमलों के तरीके तैयार करना, ताकि दुश्मन की रणनीतियों का प्रभावी जवाब दिया जा सके। उन्होंने कहा कि अब ड्रोन कोई विकल्प नहीं रह गए हैं, बल्कि युद्ध के मैदान में प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं।

जनरल सेनगुप्ता ने कहा, “तकनीक को केवल सेंट्रल कमांड में ही नहीं, बल्कि पूरी भारतीय सेना में अपनाया जा रहा है। हर कमांड अपने ऑपरेशनल माहौल और चुनौतियों के हिसाब से इसे लागू कर रही है।” उन्होंने आगे कहा कि रण संवाद अब भारतीय सेनाओं के लिए गहन चर्चा, जॉइंट रिसर्च और मल्टी-डोमेन चैलेंजेस की तैयारी का अहम मंच बन चुका है। उन्होंने आगे कहा कि इस सेमिनार से मिले अनुभव और निष्कर्ष भारतीय सशस्त्र बलों को मानवीय जिम्मेदारियों और युद्धक तैयारी (combat readiness) के बीच संतुलन साधने में अहम भूमिका निभाएंगे।

ड्रोन और ऑटोमेटेड वेपन सिस्टम पर जोर

आर्मी ट्रेनिंग कमांड के ब्रिगेडियर रेवती भंडारी ने अनमैन्ड ऑटोनॉमस सिस्टम्स (UAS) यानी ड्रोन और ऑटोमेटेड वेपन सिस्टम पर बोलते हुए कहा कि ह्यूमन-मशीन टीमिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम मैनेजमेंट और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट के लिए ड्रोन का इस्तेमाल आने वाले समय में युद्ध का अहम हिस्सा बनेगा।

उन्होंने यह भी बताया कि कई देशों ने पहले ही सर्विलांस, टारगेटिंग और सप्लाई के लिए बड़े पैमाने पर ड्रोन और बिना चालक वाले वाहन (UAVs) को शामिल कर लिया है। भारत को भी इसी दिशा में तेज कदम उठाने होंगे।

ब्रिगेडियर भंडारी ने दुनिया भर के मिलिट्री स्ट्रक्चर का उदाहरण देते हुए कहा कि अब वॉर स्ट्रक्चर्स को चरणबद्ध तरीके से सेमी-ऑटोनॉमस से पूरी तरह ऑटोनॉमस सिस्टम्स की ओर ले जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अगर भारत को 2035 तक ऑटोनॉमस कैपेबिलिटी हासिल करनी है तो उसे अभी से अपने ट्रेनिंग, डॉक्ट्रिन और स्ट्रक्चर में बदलाव करना होगा।

उन्होंने चेतावनी दी कि ऑटोनॉमस सिस्टम्स के इस्तेमाल से कई कानूनी और नैतिक प्रश्न भी उठेंगे। ऐसे में प्रशिक्षण में इन पहलुओं को भी शामिल करना होगा।

सेना प्रमुख ने कही थी ये बात

बता दे कि इसी महीने चार अगस्त को सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आईआईटी मद्रास में ‘अग्निशोध’ रिसर्च सेंटर के उद्घाटन के दौरान ‘बूट्स से बॉट्स’ की कॉन्सेप्ट पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि भारतीय सेनाएं अब पारंपरिक सैन्य शक्ति (बूट्स) से तकनीक-आधारित युद्ध (बॉट्स) की ओर बढ़ रहे हैं, जिसमें नॉन कॉन्टैक्ट वॉर, स्ट्रेजेटिज मूमेंटम और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल शामिल है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए कहा था कि यह एक शतरंज के खेल की तरह था, जहां स्ट्रेटेजिकल और टेक्टिकल प्लानिंग के साथ दुश्मन को शह और मात दी गई। ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, और अन्य तकनीकों का इस्तेमाल कर सेना ने आतंकी ठिकानों को नष्ट किया। उन्होंने यह भी कहा कि नैरेटिव मैनेजमेंट के जरिए जनता तक सही संदेश पहुंचाना महत्वपूर्ण है, और इसके लिए सोशल मीडिया का उपयोग किया गया।

Share on WhatsApp