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China on LAC: पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर चीन की बड़ी तैयारी; चीनी सेना के लिए बना रहा ‘किला’, रखेगा बड़े हथियारों का जखीरा

China on LAC: China Expands Underground Facility Near India Amid Border Tensions

China on LAC: सीमा विवाद को लेकर चीन और भारत के बीच डिसएंगेजमेंट प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद, लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से सटे इलाकों में चीन की गतिविधियां जारी हैं। चीन ने एलएसी से 60 किलोमीटर दूर अपने इलाके में गतिविधियों को तेज कर दिया है। सैटेलाइट इमेजरी के मुताबिक, चीन यहां अंडरग्राउंड फैसिलिटी का विस्तार कर रहा है। इस फैसिलिटी को बनााने का मकसद चीनी सेना (PLA) को रणनीतिक बढ़त देना और अपनी क्षमताओं को बढ़ाना बताया जा रहा है। इससे पहले जो सैटेलाइट इमेज सामने आई थीं, उसमें चीन पैंगोंग झील के पास फिंगर-4 से आगे बड़े स्तर पर निर्माण कार्यों को अंजाम दे रहा है।

China on LAC: China Expands Underground Facility Near India Amid Border Tensions
Credit: Damien Symon

हाल ही में जारी कई सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि पूर्वी लद्दाख की सीमा पर चीन अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने में जुटा हुआ है। चीन ने भारत-चीन सीमा के पास पहले से मौजूद अंडरग्राउंड सुविधा का बड़े पैमाने पर विस्तार करना शुरू कर दिया है। यह साइट 2015-16 में बनाई गई थी, लेकिन अब इसे और मजबूत और बड़ा किया जा रहा है। माना जा रहा है कि यह चीन की सैन्य रणनीति और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए तैयार की जा रही है।

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China on LAC: सैटेलाइट इमेज में क्या दिखा?

सैटेलाइट इमेजरी में पूर्वी लद्दाख के पास स्थित इस अंडरग्राउंड सुविधा में नई सुरंगों और इमारतों का निर्माण साफ नजर आ रहा है। यह फैसिलिटी भारत के डेमचोक क्षेत्र से लगभग 60 किलोमीटर दूर नागरी में स्थित है। इसमें कई प्री-एग्जिस्टिंग पोर्टल और सपोर्ट बिल्डिंग्स को जोड़कर और बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किय जा रहा है।

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विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्ट्रक्चर चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के लिए एक सुरक्षित स्थान यानी किले के रूप में तैयार किया जा रहा है। यहां हथियारों और सैन्य उपकरणों को सुरक्षित रखने और आवश्यकतानुसार उपयोग करने के लिए सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि यह निर्माण कार्य तेज गति से हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम चीन की सैन्य रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह विवादित क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है।

  • मल्टीपल पोर्टल्स: साइट पर कई प्री-एग्जिस्टिंग पोर्टल्स हैं, जिन्हें और ज्यादा मजबूत किया जा रहा है।
  • नई सुरंगें: सैटेलाइट इमेजरी में नए पोर्टल्स का निर्माण दिखा है, जो अंडरग्राउंड गतिविधियों को आसान बना सकते हैं।
  • सपोर्ट बिल्डिंग्स: साइट पर सपोर्ट बिल्डिंग्स और कंस्ट्रक्शन साइट साफ नजर आ रही हैं, जो इसके लॉजिस्टिक्स को संभालने में मदद करेंगी।

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LAC पर क्या हो रहा है?

हालांकि, 2021 में पेंगोंग त्सो क्षेत्र में समझौते के बाद, कई फ्रिक्शन पॉइंट्स से सैनिकों को वापस बुलाया गया। हाल ही में डेपसांग और डेमचोक में भी सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया पूरी हुई। भारत ने उम्मीद जताई थी कि इससे सीमा पर स्थायी शांति स्थापित होगी। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संसद में कहा था, “हमारी प्राथमिकता थी कि टकराव वाले इलाकों से सैनिक हटाए जाएं। यह काम पूरा हो चुका है। अब अगली प्राथमिकता है सीमा पर सेना की तैनाती को कम करना।”

हालांकि, चीन की गतिविधियां दिखाती हैं कि वह पीछे हटने के बावजूद अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटा है।

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Source: Damien Symon

China on LAC: पेंगोंग त्सो झील के पास गतिविधियां

पेंगोंग त्सो झील के उत्तरी किनारे पर चीन तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। सैटेलाइट इमेज में नई इमारतें और हेलिपैड के साथ सड़कों और पुलों का निर्माण देखा गया है। यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से भारत का हिस्सा माना जाता है, लेकिन 1959-62 के बीच चीन ने इस पर कब्जा जमा लिया था।

रक्षा विशेषज्ञ कर्नल (सेवानिवृत्त) अजय रैना ने कहा, “चीन अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। भारत अभी भी सिरिजाप और खुर्नाक को अपना मानता है, लेकिन वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति बदल चुकी है।”

सैटेलाइट इमेजरी से पता चलता है कि सिरिजाप और खुरनाक क्षेत्र में चीन तेजी से निर्माण कर रहा है। सिरिजाप में अस्थायी ढांचों की जगह अब बड़े और स्थायी निर्माण हो चुके हैं। खुरनाक किले में पुराने ढांचों को तोड़कर नई दीवारें और सड़कों का निर्माण किया गया है।

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देपसांग में बनाया नया ठिकाना

सैटेलाइट इमेजरी से यह भी सामने आया है कि देपसांग के पीछे की स्थिति में चीनी सेना ने नए ठिकानों का निर्माण किया है। यह स्थान चिप चाप नदी के पास स्थित है। नई सुविधाओं में बड़े पैमाने पर सैन्य शिविर और हेलिपैड शामिल हैं। यह निर्माण चीन की सेना के दक्षिणी शिंजियांग मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट द्वारा किया जा रहा है।

देपसांग क्षेत्र में PLA ने अपने पुराने स्थान से 3 किलोमीटर पीछे हटकर नया शिविर बनाया है। यह शिविर चिप चप नदी से 7 किलोमीटर दक्षिण में है। सैटेलाइट तस्वीरों से यह भी पता चला है कि PLA ने एक और शिविर लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थापित किया है।

भारत-चीन वार्ता: NSA अजीत डोभाल की बैठक

हाल ही में बीजिंग में भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई। इसमें NSA अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भाग लिया। बैठक में सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने की बात कही गई, ताकि दोनों देशों के बीच रिश्ते सामान्य हो सकें। विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया, “दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखना भारत-चीन संबंधों के सामान्य विकास के लिए महत्वपूर्ण है।”

चीन की रणनीतिक तैयारियां

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह निर्माण कार्य उसकी “स्लामी स्लाइसिंग” रणनीति का हिस्सा है। यह रणनीति छोटे-छोटे कदमों के जरिए विवादित क्षेत्रों पर कब्जा करने की कोशिश है। देपसांग और पेंगोंग त्सो के आसपास की गतिविधियां इस बात का संकेत हैं कि चीन अपनी सैन्य उपस्थिति को और मजबूत करने के प्रयास में है।

Ladakh: माइनस 10 डिग्री टेंपरेचर में भारतीय सेना ने दिखाया दमखम, 12,000 फीट पर खड़ा किया ब्रिज!

Ladakh: Indian Army Builds Bridge at 12,000 Feet in Sub-Zero Temperatures!
Credit: firefurycorps

Ladakh: लद्दाख में तैनात भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स ने जीरो डिग्री से कम टेंपरेचर में हाई एल्टीट्यूड 12,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर हाई लेवल इंजीनियरिंग ट्रेनिंग शुरू की है। इस चुनौतीपूर्ण अभ्यास में सेना के कॉम्बैट इंजीनियर्स (सैपर्स) को मुश्किल हालात में अपनी दक्षता और कुशलता को निखारने का मौका मिल रहा है।

Ladakh: Indian Army Builds Bridge at 12,000 Feet in Sub-Zero Temperatures!
Credit: firefurycorps

इस हाई लेवल ट्रेनिंग में सैपर्स को न केवल युद्धक्षेत्र की इंजीनियरिंग तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया गया कि उनके साथ प्लांट ऑपरेटरों भी मिल काम करें और दोनों का समन्वय बना रहे। यह ट्रेनिंग बताती है कि भारतीय सेना दुर्गम इलाकों में भी किसी भी चुनौती से निपटने के लिए हमेशा तैयार है।

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Ladakh: ब्रिजिंग ऑपरेशन का अभ्यास

भारतीय सेना फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स की तरफ से अपने एक्स सोशल मीडिया अकाउंट पर की गई पोस्ट में बताया है कि इस ट्रेनिंग के दौरान, सैपर्स ने अस्थायी पुलों और अन्य महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया। इन स्ट्रक्चर्स का महत्व उन इलाकों में बढ़ जाता है जहां सैन्य गतिविधियों के लिए मोबिलिटी और रसद की सप्लाई अत्यंत आवश्यक होती है। अभ्यास में दिखाए गए ब्रिजिंग ऑपरेशन्स ने यह सुनिश्चित किया कि सेना की तैयारियां शांतिकाल और युद्धकाल दोनों स्थितियों में तेज और प्रभावी रहें।

लद्दाख की 12,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बीच फायर एंड फ्यूरी सैपर्स (इंजीनियरिंग विशेषज्ञ) संयंत्र ऑपरेटरों के साथ कॉम्बैट इंजीनियरिंग अभियानों का समन्वित प्रशिक्षण ले रहे हैं। यह उच्च ऊंचाई पर होने वाला प्रशिक्षण सेना की ऑपरेशनल तैयारियों, विश्वसनीयता और आत्मविश्वास को प्रदर्शित करता है!

लद्दाख क्षेत्र, जो सामरिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है, में यह पहल भारतीय सेना के आत्मविश्वास और रणनीतिक दक्षता को उजागर करती है। फायर एंड फ्यूरी कोर, जो देश की उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है, उसने एक बार फिर अपनी विश्वसनीयता साबित की है।

भारतीय सेना का यह अभ्यास उसकी तैयारियों और समर्पण को दर्शाता है। “ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया” के अपने आदर्श वाक्य को साकार करते हुए, सेना न केवल बदलती चुनौतियों के अनुकूल हो रही है, बल्कि कठिनतम परिस्थितियों में भी अपनी श्रेष्ठता बनाए रख रही है।

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लद्दाख जैसे क्षेत्रों में जहां तापमान माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है, वहां ब्रिजिंग ऑपरेशन और रसद संबंधी तैयारियां सैनिकों के लिए जीवनरेखा साबित होती हैं। ऐसे अभियानों से न केवल सीमा पर तैनात जवानों की गतिशीलता सुनिश्चित होती है, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में राहत कार्यों में भी तेजी आती है।

Ladakh: सैनिकों का मनोबल बढ़ाने की कवायद

अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में प्रशिक्षण और ऑपरेशनल अभ्यास न केवल तकनीकी कौशल को बेहतर बनाता है, बल्कि सैनिकों का आत्मविश्वास भी बढ़ाता है। यह सुनिश्चित करता है कि सेना के जवान हर परिस्थिति में देश की सुरक्षा के लिए तैयार रहें।

Indian Navy Warships: भारतीय नौसेना के लिए नया साल होगा खास, 2025 में दो वारशिप और एक पनडुब्बी होगी कमीशन

INS Tushil: Indian Navy to Commission Stealth Frigate, Destroyer Surat & Submarine Vagsheer in 2025

Indian Navy Warships: भारतीय नौसेना के लिए नए साल की शुरुआत बड़ी उपलब्धियों के साथ होने जा रहीहै। हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में चीन की बढ़ती गतिविधियों और इसके प्रभाव को संतुलित करने के लिए जनवरी में दो स्वदेशी फ्रंटलाइनर युद्धपोत और एक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी भारतीय नौसेना में कमीशन के लिए तैयार है। इसके अलावा, रूस निर्मित फ्रिगेट INS तुशील भी भारत पहुंचने की तैयारी में है।

INS Tushil: Indian Navy to Commission Stealth Frigate, Destroyer Surat & Submarine Vagsheer in 2025

Indian Navy Warships: स्वदेशी युद्धपोत ‘सूरत’ और ‘नीलगिरी’

नए कमीशन किए जाने वाले युद्धपोतों में सबसे बड़ा होगा 7,400 टन वजन वाला गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर ‘सूरत’। इसके बाद 6,670 टन वजन वाला स्टील्थ फ्रिगेट ‘नीलगिरी’ और 1,600 टन वजनी पनडुब्बी ‘वाग्शीर’। ये सभी एडवांस सेंसर और हथियारों से लैस हैं, जो  इन्हें बेहद घातक बनाते हैं। हाल ही में मुंबई स्थित मझगांव डॉक (MDL) ने सूरत और नीलगिरी को नौसेना को सौंप दिया है।

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सूरत: पहला AI-एनेबल्ड युद्धपोत

‘सूरत’ भारतीय नौसेना का पहला ऐसा युद्धपोत है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस है। इस युद्धपोत के आने से नौसेना की ऑपरेशनल कैपेबिलिटी में कई गुना इजाफा होगा। इसमें 72% स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इसकी लंबाई 164 मीटर है और यह 4,000 नॉटिकल मील की दूरी तक सफर कर सकता है। ‘सूरत’ को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, बराक-8 मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, 76mm सुपर रैपिड गन और पनडुब्बी रोधी हथियार जैसे रॉकेट और टॉरपीडो से लैस किया गया है।

नीलगिरी: मल्टी-रोल फ्रिगेट

‘नीलगिरी’ सात मल्टी-रोल फ्रिगेट्स में से पहला है, जो प्रोजेक्ट-17ए के तहत निर्मित हो रहा है। इनमें से चार को मुंबई के मझगांव डॉक (MDL) और तीन को कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) में बनाया जा रहा है। लगभग 45,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस फ्रिगेट को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि दुश्मनों के लिए खोज पाना बेहद कठिन होगा। सभी मल्टी-रोल सात फ्रिगेट्स को 2026 के अंत तक तैयार कर दिया जाएगा।

INS Tushil: New Multi-Role Stealth Guided Missile Frigate Joins the Indian Navy

Indian Navy Warships: पनडुब्बी ‘वाग्शीर’: स्कॉर्पीन श्रेणी की अंतिम पनडुब्बी

‘वाग्शीर’ फ्रांसीसी मूल की स्कॉर्पीन या कलवरी-श्रेणी की छठवीं और अंतिम पनडुब्बी है, जिसे मझगांव डॉक पर 23,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट-75 के तहत निर्मित किया गया है। भारत और फ्रांस वर्तमान में तीन और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के लिए समझौता वार्ता कर रहे हैं, जिनमें से पहली पनडुब्बी छह साल में तैयार होगी। पहली पनडुब्बी छह वर्षों में तैयार होगी, और उसके बाद हर साल एक नई पनडुब्बी शामिल की जाएगी।

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INS तुशील: रूस निर्मित फ्रिगेट का आगमन

रूसी निर्मित 3,900 टन वजनी फ्रिगेट INS तुशील बाल्टिक सागर, उत्तरी सागर, अटलांटिक महासागर और हिंद महासागर से होकर भारत आ रही है। इसके बाद मार्च-अप्रैल 2025 में रूस से एक और फ्रिगेट ‘तामल’ की डिलीवरी होगी। इसके बाद मार्च-अप्रैल 2025 में एक और रूसी फ्रिगेट ‘तामल’ की डिलीवरी की जाएगी।

भारतीय नौसेना वर्तमान में 251 विमानों और हेलीकॉप्टरों के साथ 130 से अधिक युद्धपोतों का संचालन कर रही है। इसके साथ ही, भारतीय शिपयार्ड में 60 युद्धपोत और जहाज निर्माणाधीन हैं। भविष्य के लिए 31 और युद्धपोतों का अप्रूवल हो चुका है, जिसमें सात नई पीढ़ी के फ्रिगेट, आठ कॉर्वेट और छह स्टील्थ डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां शामिल हैं।

हालांकि, 2030 तक भारतीय नौसेना के युद्धपोतों की संख्या केवल 155-160 तक पहुंच पाएगी। इसकी वजह भारतीय शिपयार्ड में निर्माण की धीमी गति और पुराने जहाजों का चरणबद्ध तरीके से हटना है।

चीन से मुकाबला: एक बड़ी चुनौती

चीन अपनी नौसैनिक ताकत को तेजी से बढ़ा रहा है और हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी गतिविधियों को जारी रखे हुए है। चीन के पास वर्तमान में 370 से अधिक युद्धपोत और पनडुब्बियां हैं, जिनमें से 140 प्रमुख सरफेस फाइटर जेट हैं,, जो भारतीय नौसेना की तुलना में बहुत अधिक हैं।

वहीं, चीन नए युद्धपोतों और पनडुब्बियों को रिकॉर्ड समय में तैयार कर रहा है। इसके साथ ही, चीन ने अपनी नौसैनिक ताकत को बढ़ाने के लिए विदेशी ठिकानों की तलाश तेज कर दी है।

भारतीय नौसेना को आने वाले सालों में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। आधुनिक युद्धपोतों और पनडुब्बियों के निर्माण में तेजी लाना और नौसैनिक क्षमताओं को अपग्रेड करना समय की मांग है। नए युद्धपोत और पनडुब्बियां नौसेना की ताकत बढ़ाने में मदद करेंगी, लेकिन चीन जैसे प्रतिद्वंद्वी के मुकाबले यह प्रयास काफी धीमा है।

इससे यह साफ है कि भारत को अपनी समुद्री रणनीति में तेजी लानी होगी ताकि क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखा जा सके। प्रोजेक्ट-15बी और प्रोजेक्ट-17ए जैसे योजनाएं सही दिशा में कदम हैं, लेकिन इन्हें तय समय सीमा के भीतर पूरा करना भी जरूरी है।

LCA Tejas Mk-1A: अगले साल 31 मार्च तक भारतीय वायुसेना को मिल जाएगा पहला स्वदेशी फाइटर जेट, संसदीय समिति देरी पर जता चुकी है चिंता

HAL Tejas Mk1A Engine Delivery: HAL receives fourth GE-F404-IN20 engine, moves closer to IAF handover
File Photo

LCA Tejas Mk-1A: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) अगले साल जनवरी से अपने नए तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA Mk-1A) के जरूरी ट्रायल्स शुरू करने जा रहा है। इनमें स्वदेशी बियोंड विजुअल रेंज मिसाइल स्वदेशी Astra, देश में निर्मित इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट और इजरायली एल्टा रडार का परीक्षण शामिल होगा। एचएएल ने 31 मार्च 2025 तक भारतीय वायुसेना को पहला विमान सौंपने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए जरूरी सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को पूरी किया जाना बाकी है।

LCA Tejas Mk-1A: IAF to Get First Indigenous Fighter Jet by March 31, 2025
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LCA Tejas Mk-1A: GE इंजन आपूर्ति में देरी

तेजस Mk-1A के लिए F404 इंजन की आपूर्ति को लेकर एचएएल और अमेरिकी कंपनी GE एयरोस्पेस के बीच बातचीत चल रही है। भारतीय अधिकारियों ने हाल ही में अमेरिका का दौरा किया और बोस्टन के पास स्थित F404 प्रोडक्शन लाइन का निरीक्षण किया। GE ने संकेत दिया है कि उत्पादन संबंधी समस्याएं हल हो गई हैं, और मार्च 2025 तक इंजन की आपूर्ति शुरू हो सकती है। हालांकि, अभी तक सप्लाई को लेकर कोई तारीख फइनल नहीं हुई है।

LCA Tejas Mk1A Engine: ऑनलाइन मिल रहा तेजस का GE-F404 इंजन! यूजर बोले- HAL को कैश ऑन डिलीवरी ऑप्शन दे दो, अब शायद समय पर इंजन मिल जाए

बता दें कि पहला विमान भारतीय वायुसेना (IAF) को 31 मार्च 2024 तक डिलीवरी होनी थी, लेकिन यह समय सीमा पूरी नहीं हो पाई। इसके पीछे कई कारण थे, जिनमें कुछ जरूरी सर्टिफकेशन में देरी और GE की तरफ से समय पर इंजन सप्लाई न किया जाना था। अमेरिकी कंपनी GE को वित्तीय वर्ष 2023-24 में HAL को छह इंजन सप्लाई करने थे।

सूत्रों ने बताया कि GE ने कुछ साल पहले मैसाचुसेट्स के लिन में F404 इंजन की प्रोडक्शन लाइन को बंद कर दिया था। जब उन्होंने इस प्रोडक्शन लाइन को फिर से शुरू किया, तो पुर्जों और कंपोनेंट्स के सर्टिफिकेशन से संबंधित कुछ दिक्कतें सामने आईं। अब उन सभी समस्याओं का समाधान कर लिया गया है। HAL के अधिकारियों ने इस महीने की शुरुआत में GE के प्रमुख विक्रेताओं के साथ भी बातचीत की है, और अब चीजें सही दिशा में बढ़ रही हैं।

पहला LCA Tejas Mk-1A मार्च 2025 तक

एचएएल सूत्रों ने बताया कि पहला LCA Mk-1A विमान भारतीय वायुसेना को जरूरी कॉन्फिगरेशन के साथ 31 मार्च 2025 तक सौंप दिया जाएगा। शुरुआती कुछ विमान रिजर्व इंजनों के साथ डिलीवर किए जाएंगे, जिन्हें GE के इंजन आने के बाद बदला जाएगा। HAL द्वारा बनाए गए पहले LCA Mk-1A को टेंपरेरी इंजन (कैटेगरी B) के साथ IAF को दिया जाएगा।

LCA Tejas: भारत के स्वदेशी फाइटर जेट तेजस के प्रोडक्शन में तेजी लाने पर जोर, संसदीय समिति ने रक्षा मंत्रालय को दिए निर्देश

भारतीय वायुसेना ने फरवरी 2021 में 83 Mk-1A लड़ाकू विमानों का ऑर्डर दिया था, जिनकी कीमत 48,000 करोड़ रुपये है। इसके अतिरिक्त, 97 और Mk-1A विमानों को करीब 67,000 करोड़ रुपये की लागत से खरीदने की योजना है। वायुसेना के मुताबिक, नए विमानों की देरी से उनकी सामरिक क्षमता पर असर पड़ सकता है।

तेजस Mk-1A अपने पुराने वर्जन Mk-1 के मुकाबले ज्यादा एडवांस है और इसे आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट, उन्नत रडार और लंबी दूरी की मिसाइलों के साथ तैयार किया गया है। यह विमान वायुसेना की भविष्य की युद्धक क्षमताओं का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

एचएएल ने नासिक में एक नई प्रोडक्शन लाइन स्थापित की है। इससे तेजस Mk-1A विमानों का प्रोडक्शन बढ़ाकर 24 विमानों प्रति वर्ष तक किया जा सकेगा। अभी बेंगलुरु 16 विमान सालाना बनाए जा सकते हैं।

LCA Tejas Mk-1A: इंजन उत्पादन के लिए साझेदारी

एचएएल और GE एयरोस्पेस ने F414 इंजन के संयुक्त उत्पादन के लिए समझौता किया है। ये इंजन तेजस Mk-2 कार्यक्रम के लिए बनाए जाएंगे। इस समझौते के तहत GE भारत में 80% तकनीकी हस्तांतरण (ToT) करेगा। यह साझेदारी भारत को स्वदेशी बड़े जेट इंजनों के विकास में मदद करेगी और निर्यात के लिए भी रास्ते खोलेगी।

LCA Tejas MK1: तेजस फाइटर जेट को इंजन सप्लाई में हो रही देरी को देखते हुए HAL चलाएगा जुगाड़ से काम, बनाया ये खास प्लान

तेजस Mk-1A भारतीय वायुसेना के मॉर्डनाइजेशन के रोडमैप के बेहद महत्वपू्र्ण है। यह विमान लेटेस्ट तकनीक और आधुनिक हथियारों से लैस है, जो वायुसेना की युद्धक क्षमताओं को नई ऊंचाई प्रदान करेगा। वायुसेना की योजना है कि आने वाले दशक में लगभग 350 तेजस विमानों (Mk-1, Mk-1A और भविष्य के Mk-2) को सेवा में शामिल किया जाए।

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अक्टूबर 2024 में एचएएल को हर साल 24 विमान बनाने के अपने वादे पर कायम रहने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि इस परियोजना से मिले सबक भविष्य की परियोजनाओं जैसे कि LCA Mk-2 और एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) में भी लागू किए जाने चाहिए।

संसदीय समिति ने तेजस के प्रोडक्शन में देरी पर जताई चिंता

बता दें कि भारतीय वायुसेना (IAF) की ताकत बढ़ाने और स्क्वाड्रन की कमी को पूरा करने के लिए, संसद की रक्षा पर स्थायी समिति ने इसी शीत कालीन सत्र में रक्षा मंत्रालय (MoD) को निर्देश दिया है कि वह हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को तेजस लड़ाकू विमानों के उत्पादन में तेजी लाने के लिए कहे। यह बात समिति के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद राधा मोहन सिंह की अध्यक्षता में संसद में पेश की गई रिपोर्ट में कही गई।

रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय वायुसेना को पाकिस्तान और चीन के साथ संभावित दो-फ्रंट युद्ध की तैयारी के लिए 42 फाइटर स्क्वाड्रन की जरूरत है। हालांकि, वर्तमान में वायुसेना के पास केवल 31 सक्रिय स्क्वाड्रन हैं, जिनमें प्रत्येक में 16-18 लड़ाकू विमान होते हैं। समिति ने तेजस विमानों की देरी से डिलीवरी को लेकर भी चिंता जताई। HAL को 83 तेजस मार्क-1ए विमानों का ऑर्डर दिया गया था, जिसकी कुल लागत 48,000 करोड़ रुपये है। मार्च 2024 से इनकी डिलीवरी शुरू होनी थी, लेकिन अभी तक एक भी विमान वायुसेना को नहीं सौंपा गया है।

HAL को अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। रक्षा मंत्रालय, जो HAL का प्रमुख हिस्सेदार है, ने समिति को आश्वस्त किया है कि इस मामले में जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

रक्षा मंत्रालय ने यह भी बताया कि वायुसेना ने 97 अतिरिक्त तेजस मार्क-1ए विमानों को खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रक्षा अधिग्रहण परिषद ने इन विमानों की खरीद को प्रारंभिक मंजूरी दे दी है और इसके लिए औपचारिक प्रस्ताव मांगे गए हैं।

 

China military exercises: बातचीत के बावजूद पूर्वी लद्दाख में एक्सरसाइज कर रही चीनी सेना, सैन्य गतिविधियां जारी रख कर बीजिंग दे रहा यह संदेश

China Military Exercises: Despite Talks, Beijing Signals Strength with Ongoing Drills in Ladakh

China Military Exercises: भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के प्रयासों के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने 18 दिसंबर 2024 को बीजिंग का दौरा किया था। यह पांच वर्षों में दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच पहली औपचारिक बातचीत थी, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की उम्मीद जगी। लेकिन इसी बीच एक चौंकाने वाली खबर भी सामने आई कि वार्ता के बावजूद चीन ने लद्दाख से सटे शिनजियांग में चीनी सेना ने सैन्य अभ्यास किया। इस अभ्यास में चीनी सेना की रॉकेट आर्टिलरी रेजिमेंट ने पूर्वी लद्दाख के पास लाइव-फायर अभ्यास किया।

China Military Exercises: Despite Talks, Beijing Signals Strength with Ongoing Drills in Ladakh

China Military Exercises: लद्दाख में सैन्य अभ्यास जारी

डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच वार्ता के अगले ही दिन चीन के सरकारी समाचार पत्र पीएलए डेली ने शिंजियांग में रॉकेट आर्टिलरी रेजिमेंट के लाइव-फायर अभ्यास की खबर प्रकाशित की। यह अभ्यास पूर्वी लद्दाख के पास किया गया था।

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पीएलए डेली के मुताबिक, इस अभ्यास में सैनिकों ने वास्तविक युद्ध परिस्थितियों के माहौल में सूचनाओं का आदान-प्रदान, खुफिया जानकारी, कमांड और नियंत्रण जैसी ड्रिल्स कीं। खास बात यह रही कि इस दौरान 122 मिमी के पीएचएल-11 मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम का उपयोग किया गय। PHL-11 चीनी ट्रक-माउंटेड रॉकेट सिस्टम है, जिसमें 40 लॉन्च ट्यूब हैं। यह 30 सेकंड में 40 रॉकेट दागने की क्षमता रखता है और 50 किलोमीटर तक मार कर सकता है।

China Military Exercises: Despite Talks, Beijing Signals Strength with Ongoing Drills in Ladakh

पीएचएल-11 की खूबियां

  • पीएचएल-11 में 40 लॉन्च ट्यूब होते हैं, जिनमें से प्रत्येक 20 रॉकेट फायर कर सकता है। यह 30 सेकंड में 40 रॉकेट दाग सकता है।
  • मानक 122 मिमी रॉकेट की सीमा 20 से 40 किलोमीटर है। गोला-बारूद के साथ यह 50 किलोमीटर तक मार कर सकता है।
  • इसे 6×6 शानक्सी SX2190KA ट्रक चेसिस पर लगाया गया है, जो मुश्किल इलाकों में भी आसानी से चल सकता है। PHL-11 को 206 kW के वेचाई WD615-77A डीजल इंजन से पावर मिलती है, यह 80 किमी/घंटा की अधिकतम रफ्तार पकड़ सकता है।
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China Military Exercises: बातचीत के बावजूद चीनी इरादे साफ

ताइवान प्लस न्यूज में रिपोर्टर और चीनी सेना की गतिविधियों पर बारीकी से निगाह रखने वाले आदिल बरार कहते हैं,

“पीएलए डेली और शिन्हुआ में इस अभ्यास की खबर प्रकाशित करना चीन की ओर से भारत को स्पष्ट संकेत है कि वह लद्दाख में अपनी गतिविधियां जारी रखेगा। यह दिखाता है कि बातचीत के बावजूद, चीन की मंशा अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन और दावे को मजबूत करना है। वह कहते हैं कि यह स्पष्ट है कि चीन का इरादा तनाव कम करने के बजाय अपने क्षेत्रीय दावों को मजबूत करना है।”

वह आगे कहते हैं कि बीजिंग नई दिल्ली पर दबाव बनाए रखना चाहता है क्योंकि उसका मानना है कि इस समय भारत के पास सीमित विकल्प हैं। बदलते भू-राजनीतिक माहौल ने नई दिल्ली को बातचीत के लिए मजबूर किया है, लेकिन बीजिंग इस मौके का फायदा अपने दावों को मजबूत करने के लिए करेगा।

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वह कहते हैं कि भले ही चीन ने अपनी सेनाओं डिसएंगेजमेंट पॉइंट से पीछे अपनी सेना को तैनात कर दिया है, लेकिन क्षेत्रीय दावों को मजबूत करने की वह लगातार कोशिशें कर रहा है। हाल ही में चीन ने पिछले आठ वर्षों में भूटान के क्षेत्र में 22 नए गांव और बस्तियां बनाई हैं। यह निर्माण चीन की रणनीति का हिस्सा है, जिससे वह क्षेत्रीय दावों को मजबूती दे रहा है।

2014-16 के दौरान बीजिंग में भारत के राजदूत रहे और इंस्टीट्यूट ऑफ चाइनीज स्टडीज के मानद फेलो अशोक कंठा के अनुसार, भूटान की सीमा के भीतर चीन का गांव बनाना यह 1998 में भूटान और चीन के बीच हुए शांति समझौते का उल्लंघन है। उन्होंने चीन के इन कदमों को “जबरदस्ती की कूटनीति” करार दिया गया है।

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सीमा सुरक्षा पर शी जिनपिंग का फोकस

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हाल ही में हुई एक बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा और विकास को प्राथमिकता देने की बात कही। यह दर्शाता है कि चीन अपने सीमावर्ती क्षेत्रों को अपनी राजनीतिक और सामरिक योजनाओं में शामिल करने की कोशिश कर रहा है। 9 दिसंबर को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की केंद्रीय समिति ने सीमा प्रबंधन और सुरक्षा पर एक विशेष सत्र आयोजित किया। इस सत्र में शी जिनपिंग ने सीमा क्षेत्रों के विकास और सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। शी के बयान से स्पष्ट है कि चीन न केवल सीमा पर बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि अपनी कूटनीतिक स्थिति को भी सुदृढ़ करेगा।

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शी जिनपिंग के पोलितब्यूरो स्टडी सेशन में दिए गए बयान से यह संकेत मिलता है कि नई दिल्ली के साथ बातचीत के बावजूद चीन गांवों के निर्माण को जारी रखेगा। बैठक के दौरान, चाइनीज एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज के सदस्य और चाइनीज एकेडमी ऑफ हिस्ट्री के उपाध्यक्ष कॉमरेड ली गुओकिआंग ने एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। ली की रिपोर्ट और शी के बयान यह दर्शाते हैं कि चीन अपनी दावेदारी को मजबूत करने के लिए सीमा क्षेत्रों के इतिहास को फिर से लिखने के प्रयासों को तेज करेगा।

चीन की रणनीति और भारत पर प्रभाव

आदिल के मुताबिक चीन की रणनीति स्पष्ट रूप से भारत पर दबाव बनाए रखने की है। वह बातचीत की मेज पर रहते हुए अपने दावों को जमीन पर मजबूत कर रहा है। वहीं, भारत के लिए चिंता का विषय यह है कि इन वार्ताओं के दौरान चीन का रुख लद्दाख के तनाव को एक व्यापक “पैकेज डील” का हिस्सा बनाकर पीछे धकेलने का है।

हालांकि, भारत ने वार्ता के दौरान 2005 के सीमा प्रबंधन समझौते का जिक्र किया, लेकिन चीन की इस पर जोर देने की कोशिश से भारत ने दूरी बनाए रखी। एनएसए अजीत डोभाल की चीन यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने 2005 के सीमा प्रबंधन समझौते का जिक्र किया। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस समझौते को लेकर चीन के रुख से दूरी बनाते हुए कहा कि दोनों पक्ष एक निष्पक्ष और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान की दिशा में काम करेंगे।

चीन की ‘पैकेज डील’ रणनीति

चीन का उद्देश्य आर्थिक संबंधों को फिर से स्थापित करना है। वह भारत को कैलाश मानसरोवर यात्रा और व्यापारिक संबंधों में बहाली की राहत देकर अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत में चीन की गतिविधियों में कोई बदलाव नहीं दिख रहा है। लद्दाख में चीन के सैन्य अभ्यास और गांवों के निर्माण के साथ-साथ उसकी बयानबाजी यह संकेत देती है कि वह अपने दावों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। जो दिखाता है कि बीजिंग मौजूदा तनाव को हल करने के बजाय, इसे दीर्घकालिक रणनीति के हिस्से के रूप में देखता है।

फिंगर-4 के आगे जारी है निर्माण कार्य

पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग झील के इलाके में चीन की तरफ निर्माण गतिविधियों के जारी रहने की नई सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं। चीन ने 21 अक्तूबर को हुए डिसइंगेजमेंट और कई दौर की वार्ताओं के बावजूद बफर ज़ोन से आगे के इलाकों में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। इन तस्वीरों से पता चलता है कि फिंगर-4 (फॉक्सहोल पॉइंट) से आगे के क्षेत्रों में, जो अब एक बफर ज़ोन के अंतर्गत आते हैं, चीन ने बड़ी निर्माण गतिविधियां शुरू कर दी हैं। इसमें सिरिजाप और रिमुचांग जैसे क्षेत्रों में पेट्रोल बोट बेस का विस्तार करते हुए देखा गया है।

14 दिसंबर 2024 को ली गई सैटेलाइट तस्वीरों से यह पता चलता है कि चीन सिरिजाप और रिमुचांग पेट्रोल बोट बेस के पास नए निर्माण कार्य कर रहा है। सिरिजाप क्षेत्र में कई नई इमारतें निर्माणाधीन हैं और झील के किनारे पर नए निर्माण की संभावना दिखाई दे रही है। रिमुचांग बेस पर भी नए निर्माण कार्य की तस्वीर साफ तौर पर दिखाई दे रही है।

इसके अलावा, खुरनाक फोर्ट के पास एक पुराने निर्माण स्थल को बड़े हेलीपैड में बदलने की पुष्टि हुई है। पैंगोंग ब्रिज, जो झील के उत्तर और दक्षिण किनारों को जोड़ता है, के पास भी चीन की गतिविधियां बढ़ती हुई दिखाई दे रही हैं।

देपसांग बुल्ज़ में चीनी सेना ने बनाईं नई पोस्ट

12 दिसंबर, 2024 की हालिया सैटेलाइट इमेजरी से यह संकेत मिलता है कि चीन ने 21 अक्टूबर 2024 में अपने तीन पोस्ट्स को हटाकर देपसांग बुल्ज़ में नए स्थानों पर तैनाती की है। चीनी सेना करीब 20 किमी पीछे हटी है। देपसांग के वाई-जंक्शन 1 और 2 पर मौजूद चीनी सेना ने अपनी आउट पोस्टों को हटा लिया है और चीनी सेना पीछे हट गई है। इनमें से दो पोस्टों को चीनी सेना ने अक्टूबर 2024 में भारत-चीन डिसइंगेजमेंट समझौते के बाद हटा दिया था। जिसके चलते भारतीय सेना पीपी-10 से पीपी-12 तक अपनी पेट्रोलिंग नहीं कर पा रही थी। हालांकि चीन ने जो तीसरी पोस्ट बनाई है वह पीपी-13 से कुछ दूर बनाई है। वहीं, चीन ने जो नया इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है वह अस्थाई है औऱ प्री-फैब यूनिट्स से बनाया है।

नवंबर में जो सैटेलाइट इमेज सामने आईं थीं, उनके अनुसार, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने अपनी कुछ अस्थायी चौकियों और इंफ्रास्ट्रक्चर को राकी नाला, वाई-जंक्शन 1 और वाई-जंक्शन 2 के पास से हटाया था। उसने राकी नाला के स्रोत के पास और बुर्त्सा नाला के ऊपरी हिस्से में दो नई अस्थायी चौकियां बनाई थीं। इन नई पोस्ट्स को ऑपरेशनल ट्रैक्स से जोड़ा गया है, जिससे चीनी सेना की मोबिलिटी बनी रहे। हालांकि यह नई स्थिति भारतीय सेना के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है क्योंकि यह इन इलाकों के पारंपरिक पेट्रोलिंग रूट्स को प्रभावित कर सकती है।

KZF Jagjeet Singh: दादा, पिता और भाई रहे भारतीय सेना में, लेकिन बेटा बना खालिस्तानी आतंकी, जानें कौन है ब्रिटिश सेना का जगजीत सिंह?

KZF Jagjeet Singh: From Indian Army Legacy to Khalistani Terrorist

KZF Jagjeet Singh: आमतौर पर जब विदेश में बसे किसी भारत वंशी को उस देश में कोई सम्मानित पद हासिल होता है, तो पूरे भारत के लिए गर्व की बात होती है। ब्रिटिश सेना के सिख सैनिक जगजीत सिंह ने पूरे देश को शर्मसार कर दिया है। हाल ही में पंजाब में पुलिस ठिकानों पर ग्रेनेड हमलों की जांच में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। पंजाब पुलिस ने खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (KZF) के रंजीत सिंह नीटा मॉड्यूल से जुड़े एक ब्रिटिश सेना के सिख सैनिक जगजीत सिंह को इन हमलों के पीछे होने का संदेह जताया है। यह सिख सैनिक अफगानिस्तान में अपनी सेवा दे चुका है और अब भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों में शामिल होने की आशंका जताई जा रही है।

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KZF Jagjeet Singh: दादा, पिता और भाई भारतीय सेना में रहे

पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने एक्स पर एक पोस्ट में इस सिख सैनिक की पहचान जगजीत सिंह के रूप में की, जो ब्रिटेन में फतेह सिंह ‘बागी’ के नाम से जाना जाता है। पुलिस के अनुसार, जगजीत सिंह का संबंध पंजाब के तरनतारन जिले के एक सैन्य परिवार से है। उनके दादा, पिता और भाई भारतीय सेना में सेवा दे चुके हैं।

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पुलिस सूत्रों के अनुसार, जगजीत सिंह करीब 10 साल पहले स्टूडेंट वीजा पर ब्रिटेन गया था, जहां उसने ईस्ट लंदन यूनिवर्सिटी से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त की। इसके बाद वह ब्रिटिश सेना में शामिल हो गया। पुलिस का कहना है कि उसने ब्रिटिश सेना की इंफेंट्री रेजिमेंट चौथी बटालियन, द राइफल्स, में सेवा दी और अफगानिस्तान में एक मिशन पर तैनात रहा। राइफल्स रेजिमेंट इराक, अफगानिस्तान, कोसोवो और सिएरा लियोन में कई ऑपरेशनों में शामिल रह चुका है।

KZF Jagjeet Singh: आतंकवाद में शामिल होने का आरोप

पंजाब पुलिस ने दावा किया है कि यह पहली बार है जब किसी व्यक्ति, जिसने ब्रिटिश सेना में सेवा दी है, को भारत के खिलाफ आतंकवादी मॉड्यूल का नेतृत्व करते हुए पाया गया है। पुलिस ने ब्रिटिश एजेंसियों के माध्यम से मामले की जांच शुरू कर दी है।

सूत्रों के मुताबिक, यह भी जांच की जा रही है कि क्या पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने जगजीत को खालिस्तानी आतंकवाद के लिए भर्ती किया था। आईएसआई अक्सर ब्रिटेन और कनाडा की सेनाओं में मौजूद सिख सैनिकों पर नजर रखती है ताकि खालिस्तान आंदोलन के लिए समर्थन जुटाया जा सके।

पंजाब में KZF मॉड्यूल का खुलासा

पंजाब पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि पिलीभीत में मारे गए तीन संदिग्ध आतंकियों का संबंध KZF के जगजीत सिंह-नीटा मॉड्यूल से था। इस मॉड्यूल का उद्देश्य पुलिस थानों और सरकारी संस्थानों पर ग्रेनेड हमले करना था।

पुलिस के मुताबिक, इस मॉड्यूल में भर्ती किए गए लोग खालिस्तान विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध नहीं थे। मॉड्यूल में ऐसे लोगों को शामिल किया गया था जो मामूली अपराधों में शामिल थे।

आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर असर

जगजीत सिंह की कथित भूमिका ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। पुलिस ने कहा कि यह ब्रिटिश सरकार की जिम्मेदारी है कि वह जांच करे कि क्या उनके सरकारी संस्थानों में और भी ऐसे लोग मौजूद हैं जो आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं।

पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में ब्रिटिश सरकार से सहयोग प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अक्सर विदेशी एजेंसियां ऐसे मामलों में अपनी नागरिकता वाले किसी व्यक्ति की संलिप्तता से इनकार करती हैं। पंजाब पुलिस ने कहा कि वह इस मामले को गंभीरता से ले रही है और मॉड्यूल की गहराई तक जांच कर रही है।

जगजीत सिंह का परिवार सैन्य पृष्ठभूमि का है। उनके दादा भारतीय सेना में थे, पिता सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए और भाई सिख रेजिमेंट में सेवा दे चुके हैं। ऐसी पृष्ठभूमि से आने के बावजूद, जगजीत का आतंक की राह पर जाना कई सवाल खड़े करता है।

Republic Day 2025: 15 राज्यों और 11 मंत्रालयों की झांकियां होंगी आकर्षण का केंद्र, इस बार ये होगी थीम

Republic Day 2025: 15 States, 11 Ministries to Showcase 'Swarnim Bharat' Theme

Republic Day 2025: गणतंत्र दिवस 2025 के अवसर पर ‘कर्तव्य पथ’ पर भारत की सांस्कृतिक धरोहर और विकास को प्रदर्शित करने के लिए 15 राज्यों और 11 केंद्रीय मंत्रालयों की झांकियां शामिल होंगी। रक्षा मंत्रालय ने इस बार झांकियों की थीम ‘स्वर्णिम भारत: विरासत और विकास’ (Golden India: Heritage and Development) रखी है।

Republic Day 2025: 15 States, 11 Ministries to Showcase 'Swarnim Bharat' Theme

Republic Day 2025: भारत पर्व 26 जनवरी से 31 जनवरी तक 

रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को घोषणा की कि 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियां इस साल कर्तव्य पथ पर प्रदर्शित की जाएंगी। इनमें आंध्र प्रदेश, बिहार, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव, गोवा, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पंजाब, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। इसके अलावा, 11 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों की झांकियां भी परेड का हिस्सा होंगी।

गणतंत्र दिवस परेड में शामिल न हो पाने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ‘भारत पर्व’ में अपनी झांकियां प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। यह आयोजन 26 जनवरी से 31 जनवरी 2025 तक लाल किले में आयोजित किया जाएगा।

Republic Day 2025: ‘स्वर्णिम भारत’ थीम पर झांकियां

इस वर्ष की थीम का उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक विविधता और विकास यात्रा को प्रदर्शित करना है। इस थीम के तहत झांकियां न केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करेंगी, बल्कि आधुनिक भारत की विकास यात्रा को भी दर्शाएंगी।

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि झांकियों के चयन की प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और योग्यता आधारित रही। चयन समिति में कला, संस्कृति, संगीत, वास्तुकला और कोरियोग्राफी के विशेषज्ञ शामिल थे। झांकियों के चयन में मौलिकता, रचनात्मकता, सौंदर्य और ‘विरासत और विकास’ के बीच संतुलन पर जोर दिया गया।

चयन प्रक्रिया और नई पहल

इस वर्ष झांकियों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने पहले से ही एक सुसंगठित प्रक्रिया अपनाई। अप्रैल 2024 में आयोजित एक वरिष्ठ स्तर की बैठक में झांकियों को और बेहतर बनाने के सुझाव दिए गए थे, जिन्हें इस प्रक्रिया में शामिल किया गया।

सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों से झांकियों के प्रस्ताव मांगे गए थे। चयन प्रक्रिया के दौरान विशेषज्ञों की समिति ने झांकियों को उनकी मूल संरचना, संदेश की स्पष्टता और कलात्मक प्रस्तुति के आधार पर चुना।

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इस बार की झांकियों में आधुनिक तकनीक और पारंपरिक कलाओं का मिश्रण होगा। हर झांकी को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि वह न केवल देखने में सुंदर हो, बल्कि संदेशप्रद भी हो।

झांकियां: भारत की विविधता और विकास का प्रतीक

कर्तव्य पथ पर प्रदर्शित होने वाली झांकियां भारत की सांस्कृतिक विविधता और समृद्ध इतिहास को दर्शाएंगी। उदाहरण के तौर पर:

  • गुजरात की झांकी में भारत की प्राचीन वास्तुकला और पर्यावरण संरक्षण को प्रदर्शित किया जा सकता है।
  • कर्नाटक की झांकी में ‘होयसला मंदिर समूह’, जो हाल ही में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ है, को दर्शाया जा सकता है।
  • उत्तर प्रदेश अपनी झांकी में काशी विश्वनाथ धाम और राम मंदिर अयोध्या जैसे आधुनिक विकास परियोजनाओं को शामिल कर सकता है।

केंद्रीय मंत्रालयों की झांकियां विभिन्न राष्ट्रीय योजनाओं और परियोजनाओं को दर्शाएंगी। उदाहरण के लिए, ‘स्वच्छ भारत मिशन’, ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा।

‘भारत पर्व’ का आयोजन

गणतंत्र दिवस परेड में शामिल न होने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए ‘भारत पर्व’ एक विशेष अवसर है। यह आयोजन लाल किले पर 26 जनवरी से 31 जनवरी तक होगा। इसमें राज्यों की झांकियां, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, हस्तशिल्प, और पारंपरिक व्यंजन शामिल होंगे।

‘भारत पर्व’ का उद्देश्य भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को देशभर के नागरिकों और विदेशी पर्यटकों के सामने प्रस्तुत करना है। यह आयोजन न केवल एक उत्सव है, बल्कि भारत के विकास और प्रगति का भी प्रतीक है।

15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का चयन

कर्तव्य पथ पर झांकियों की संख्या सीमित होने के कारण केवल 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रदर्शनी के लिए चुना गया है। ये राज्य और यूटी हैं:

  1. आंध्र प्रदेश
  2. बिहार
  3. चंडीगढ़
  4. दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
  5. गोवा
  6. गुजरात
  7. हरियाणा
  8. झारखंड
  9. कर्नाटक
  10. मध्य प्रदेश
  11. पंजाब
  12. त्रिपुरा
  13. उत्तराखंड
  14. उत्तर प्रदेश
  15. पश्चिम बंगाल

11 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों की भागीदारी

इन राज्यों के अलावा, 11 केंद्रीय मंत्रालय और विभाग भी झांकियों के माध्यम से अपनी उपलब्धियों और योजनाओं को प्रस्तुत करेंगे।

Sheikh Hasina Extradition: क्या भारत शेख हसीना को बांग्लादेश वापस भेजेगा? दोस्ती और कानून के बीच फंसा मामला

Sheikh Hasina Extradition: Will India Send Her Back to Bangladesh?

Sheikh Hasina Extradition: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत को एक डिप्लोमैटिक नोट भेजकर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को वापस भेजने का अनुरोध किया है। 77 वर्षीय अवामी लीग की नेता शेख हसीना, जो अपने 16 साल लंबे शासन के बाद बड़े विरोध प्रदर्शनों के चलते 5 अगस्त को भारत आई थीं, लेकिन अब प्रत्यर्पण की मांग ने भारत और बांग्लादेश के बीच एक नया कूटनीतिक और कानूनी मोर्चा खोल दिया है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत शेख हसीना को बांग्लादेश वापस भेजने के लिए प्रत्यार्पण प्रक्रिया शुरू करेगा या पुरानी दोस्त के लिए बांग्लादेश की मांग को नजरअंदाज करेगा?

Sheikh Hasina Extradition: Will India Send Her Back to Bangladesh?

Sheikh Hasina Extradition:  शेख हसीना के खिलाफ आरोप और अंतर्राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल

ढाका स्थित अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल (ICT) ने शेख हसीना और उनके मंत्रियों, सलाहकारों, पूर्व सैन्य और सिविल अधिकारियों के खिलाफ “मानवता के खिलाफ अपराध” और “नरसंहार” के आरोपों में गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।

विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने कहा, “हमने भारत को नोट वर्बेल (राजनयिक संदेश) भेजकर अनुरोध किया है कि शेख हसीना को वापस भेजा जाए ताकि उनके खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया शुरू हो सके।”

Sheikh Hasina: शेख हसीना को वापस भेजें ढाका, बांग्लादेश ने की भारत से मांग

इस बीच, बांग्लादेश के गृह सलाहकार जहांगिर आलम ने बताया कि उनके कार्यालय ने भारतीय विदेश मंत्रालय को एक पत्र भेजा है, जिसमें शेख हसीना की प्रत्यर्पण प्रक्रिया को तेज करने की मांग की गई है।

भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि, 2013 और भारत का प्रत्यर्पण अधिनियम, 1962

शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मामला दो प्रमुख कानूनों पर आधारित है:

  1. भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि, 2013: इस संधि के अनुच्छेद 1 और 2 के अनुसार, प्रत्यर्पण का अनुरोध तभी किया जा सकता है जब संबंधित व्यक्ति के खिलाफ औपचारिक आरोप लगाए गए हों। शेख हसीना के मामले में, अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।
  2. भारत का प्रत्यर्पण अधिनियम, 1962: इस अधिनियम के सेक्शन 31 में स्पष्ट किया गया है कि “किसी भी राजनीतिक कारण से अपराध के आरोपी व्यक्ति को प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता।” इसी के तहत, भारत यह तर्क दे सकता है कि शेख हसीना पर लगाए गए आरोप राजनीतिक प्रकृति के हैं।

Sheikh Hasina Extradition: क्या हैं भारत के पास विकल्प

भारत-बांग्लादेश संधि और भारत के प्रत्यर्पण अधिनियम के तहत, भारत को शेख हसीना को प्रत्यर्पित करने का कोई कानूनी दायित्व नहीं है, खासकर जब आरोप राजनीतिक प्रकृति के माने जा सकते हैं।

संधि के अनुच्छेद 6 (1) के तहत, यदि अपराध राजनीतिक चरित्र का हो, तो भारत प्रत्यर्पण से इनकार कर सकता है। इसके अतिरिक्त, अनुच्छेद 8 (3) के तहत यह साबित करना आवश्यक है कि आरोप “न्याय के हित में” और “सद्भावना” के तहत लगाए गए हैं।

शेख हसीना ने युनुस को बताया तानाशाह

शेख हसीना ने अंतरिम सरकार और उनके प्रमुख, नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद युनुस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शेख हसीना ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर “तानाशाही” का आरोप लगाया है। उन्होंने एक वर्चुअल संबोधन में कहा कि युनुस उनके शासन को गिराने के पीछे “मुख्य साजिशकर्ता” हैं और “बांग्लादेश अब एक तानाशाही शासन के कब्जे में है, जहाँ लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार समाप्त कर दिए गए हैं।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अल्पसंख्यकों और धार्मिक स्थलों पर हमले बढ़ गए हैं, जिससे बांग्लादेश का लोकतांत्रिक ढांचा खतरे में है। इन परिस्थितियों में, भारत के लिए यह तय करना कठिन हो जाता है कि वह शेख हसीना को प्रत्यर्पित करे या नहीं।

हसीना ने आरोप लगाया कि उनके शासन के दौरान गरीबी उन्मूलन और आधारभूत ढांचे के विकास के क्षेत्र में हुई प्रगति को मुहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली सरकार ने नुकसान पहुँचाया है।

भारत के लिए कूटनीतिक चुनौती

भारत और बांग्लादेश के संबंध ऐतिहासिक हैं। भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से घनिष्ठ संबंध रहे हैं। बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारत ने अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन मौजूदा हालात से दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। हाल ही में, भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ढाका का दौरा किया और अंतरिम सरकार के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों पर अपनी चिंता व्यक्त की।

मिसरी ने कहा, “हमने इस संबंध में ईमानदारी और रचनात्मकता के साथ चर्चा की।” हालांकि, इस बैठक में शेख हसीना के भारत में ठहरने का मुद्दा भी उठा, जिससे मामला और जटिल हो गया।

प्रत्यर्पण का संभावित परिणाम

विशेषज्ञों का मानना है कि कानूनी दृष्टिकोण से देखा दजाए तो भारत के पास शेख हसीना को प्रत्यर्पित करने के लिए कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। लेकिन राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जााए तो यह मामला भारत और बांग्लादेश के संबंधों पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य से देखा जाए तो, भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके फैसले से उसकी निष्पक्षता और पड़ोसी देशों के साथ उसके संबंध प्रभावित न हों।

पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने कहा,

“बांग्लादेश जानता है कि भारत ऐसा नहीं करेगा। यह एक राजनीतिक चाल है। राजनीतिक प्रत्यर्पण भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि के दायरे में नहीं आता। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार इस अव्यवस्थित कदम से भारत को राजनीतिक रूप से चुनौती देने पर तुली हुई लगती है। इससे दोनों देशों के संबंधों में लगातार समस्याएं पैदा होंगी। यूनुस सरकार को उन ताकतों से समर्थन मिल रहा है जिन्होंने बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन का समर्थन किया था, और अब वह भारत का सामना करने के लिए प्रोत्साहित महसूस कर रही है। यह घटना विदेश सचिव मिसरी की सौहार्दपूर्ण बांग्लादेश यात्रा के बाद हुई है, जो दिखाती है कि वहां के इस्लामवादी भारत के साथ संबंधों को सुधारने के लिए तैयार नहीं हैं और संबंधों को पीछे ले जाने पर आमादा हैं।”

विदेश मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी ने बांग्लादेश का तमाशा करार दिया है। उन्होंने मौजूदा युनुस सरकार के लिए कहा,

“एक ऐसा शासन, जिसे न तो संवैधानिक वैधता प्राप्त है और न ही जनादेश, जो भीड़ हिंसा के बल पर सत्ता में आई है, ने भारत को एक नोट वर्बेल भेजकर निष्कासित प्रधानमंत्री की वापसी का अनुरोध किया है, जिन्हें सेना ने उनके इस्तीफा देने से पहले ही भारत भेज दिया।”

क्या कहता है भारत का प्रत्यर्पण अधिनियम 1962?

भारत का प्रत्यर्पण अधिनियम, 1962, प्रत्यर्पण के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश प्रदान करता है। इसमें कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता यदि:

  • अपराध राजनीतिक प्रकृति का हो।
  • आरोप न्याय और सद्भावना के हित में न लगाए गए हों।

क्या होगा भारत का फैसला?

शेख हसीना का प्रत्यर्पण न केवल एक कानूनी मामला है, बल्कि यह भारत के लिए कूटनीतिक संतुलन की परीक्षा भी है।कानूनी दृष्टिकोण से भारत इस मामले में प्रत्यर्पण से इनकार कर सकता है। वहीं, राजनीतिक दृष्टिकोण से भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके फैसले से उसके पड़ोसी देशों के साथ उसके संबंध प्रभावित न हों। अब देखने वाली बात होगी कि क्या भारत अपनी पुरानी दोस्त शेख हसीना को वापस भेजेगा या उनके लिए कूटनीतिक समर्थन जारी रखेगा? यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत इस संवेदनशील मुद्दे को कैसे हल करता है।

Sheikh Hasina: शेख हसीना को वापस भेजें ढाका, बांग्लादेश ने की भारत से मांग

Sheikh Hasina slams ICT verdict

Sheikh Hasina: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत को एक कूटनीतिक नोट भेजकर निवर्तमान प्रधानमंत्री शेख हसीना को ढाका वापस भेजने का अनुरोध किया है। 77 वर्षीय अवामी लीग नेता शेख हसीना 5 अगस्त से भारत में रह रही हैं, जब उन्हें अपने 16 साल लंबे शासन के दौरान बड़े विरोध प्रदर्शनों के बीच देश छोड़ना पड़ा था।

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Sheikh Hasina: अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण का वारंट

ढाका स्थित इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने शेख हसीना, उनके मंत्रियों, सलाहकारों और पूर्व सैन्य व सिविल अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। इन सभी पर “मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार” के आरोप लगाए गए हैं।

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने बताया, “हमने भारत सरकार को एक कूटनीतिक संदेश भेजा है, जिसमें कहा गया है कि बांग्लादेश उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के लिए वापस लाना चाहता है।”

Sheikh Hasina: भारत से प्रत्यर्पण का अनुरोध

बांग्लादेश के गृह सलाहकार जहांगिर आलम ने कहा कि उनके कार्यालय ने भारतीय विदेश मंत्रालय को शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर पत्र भेजा है। उन्होंने मीडिया को बताया, “हमने विदेश मंत्रालय को उनके प्रत्यर्पण के लिए पत्र भेजा है। यह प्रक्रिया अभी चल रही है।”

उन्होंने यह भी बताया कि ढाका और नई दिल्ली के बीच एक प्रत्यर्पण संधि है, जिसके तहत शेख हसीना को वापस लाया जा सकता है।

भारत और बांग्लादेश के कूटनीतिक संबंधों पर असर

शेख हसीना की वापसी का अनुरोध ऐसे समय में आया है जब भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने हाल ही में बांग्लादेश का दौरा किया है। उन्होंने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद युनुस से मुलाकात की। ढाका में संवाददाताओं से बात करते हुए, मिसरी ने कहा कि उन्होंने अपने समकक्षों के साथ ईमानदारी और रचनात्मकता से चर्चा की और “अत्यंत महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों” पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

मोहम्मद युनुस के कार्यालय ने कहा कि इस मुलाकात के दौरान शेख हसीना के भारत में ठहराव पर भी चर्चा हुई। मुख्य सलाहकार ने कहा था, “हमारे लोग चिंतित हैं क्योंकि वह वहां से कई बयान दे रही हैं। इससे तनाव पैदा होता है।”

शेख हसीना का आरोप

विदेश सचिव की यात्रा से पहले, शेख हसीना ने अंतरिम सरकार पर हमला बोला और मोहम्मद युनुस पर “तानाशाही शासन” चलाने का आरोप लगाया। लंदन में अवामी लीग समर्थकों को दिए वर्चुअल संबोधन में, उन्होंने कहा कि राजनीतिक उथल-पुथल के पीछे युनुस का हाथ है, जिसने उनके शासन को समाप्त कर दिया।

शेख हसीना ने कहा, “5 अगस्त से अल्पसंख्यकों, हिंदुओं, ईसाइयों और बौद्धों के पूजा स्थलों पर हमले बढ़ गए हैं। हम इसकी निंदा करते हैं। जमात और आतंकवादी नई सरकार के तहत स्वतंत्र रूप से काम कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “बांग्लादेश अब एक फासीवादी शासन के चंगुल में है, जहां लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार खत्म कर दिए गए हैं। हमारे शासन के दौरान गरीबी उन्मूलन, बुनियादी ढांचे के विकास और लोकतंत्र को मजबूत करने की जो उपलब्धियां थीं, उन्हें युनुस के नेतृत्व में खत्म किया जा रहा है।”

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार द्वारा भारत को भेजे गए इस डिप्लोमैटिक संदेश ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे का समाधान भारत और बांग्लादेश के कूटनीतिक संबंधों की परीक्षा करेगा।

कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे कथित अत्याचार और मानवाधिकार हनन को लेकर चिंता जता चुके हैं। शेख हसीना ने अल्पसंख्यकों पर हो रहे इन हमलों के लिए अंतरिम सरकार को जिम्मेदार ठहराया है और इसे “लोकतंत्र के लिए खतरा” करार दिया है।

ECHS: आयुष्मान कार्ड को लेकर ईसीएचएस ने पूर्व-सैनिकों को किया सावधान! अगर की ये गलती तो जिंदगी भर पड़ेगा पछताना

ECHS Cautions Veterans: Think Twice Before Opting for Ayushman Card!

ECHS: पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए सेंट्रल ऑर्गनाइजेशन ईसीएचएस (Ex-Servicemen Contributory Health Scheme) ने 16 दिसंबर 2024 को एक महत्वपूर्ण फैसला किया है। ईसीएचएस (ECHS) की तरफ से जारी एक आधिकारिक पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि पूर्व सैनिक अब प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) का लाभ उठा सकते हैं। हालांकि, इसके साथ कुछ शर्तें और चेतावनियां भी जारी की गई हैं, जो सभी पूर्व सैनिकों को ध्यान में रखनी होंगी।

ECHS Cautions Veterans: Think Twice Before Opting for Ayushman Card!

ECHS: क्या है नया आदेश?

ईसीएचएस की ओर से जारी लेटर में कहा गया है कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत आयुष्मान कार्ड का विकल्प पूर्व सैनिकों के लिए खुला है। इसका मतलब यह है कि जो पूर्व सैनिक ईसीएचएस या सीजीएचएस (Central Government Health Scheme) की सुविधाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं, वे आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज करा सकते हैं।

लेकिन इसके साथ ही यह भी साफ किया गया है कि यदि कोई पूर्व सैनिक ईसीएचएस छोड़कर आयुष्मान भारत के तहत इलाज का विकल्प चुनता है, तो यह प्रक्रिया अपरिवर्तनीय होगी। इसका अर्थ है कि एक बार ईसीएचएस छोड़ने के बाद, वह इसे दोबारा नहीं अपना सकता।

ECHS: और आयुष्मान भारत: क्या है अंतर?

ईसीएचएस (Ex-Servicemen Contributory Health Scheme):
ईसीएचएस पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को विशेष स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह योजना उन पूर्व सैनिकों की जरूरतों को ध्यान में रखती है, जो कठिन परिस्थितियों में सेना में सेवाएं दे चुके हैं। इसमें सैन्य अस्पतालों के साथ-साथ पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में इलाज की सुविधा भी शामिल है।

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आयुष्मान भारत (प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना):
आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मुफ्त इलाज प्रदान करना है। इसके तहत लाभार्थियों को 5 लाख रुपये तक का कैशलेस और पेपरलेस इलाज की सुविधा मिलती है। इस योजना में सरकारी और निजी दोनों प्रकार के अस्पताल शामिल हैं।

ECHS की अहम शर्त: ‘नो रिटर्न’ का नियम

नए आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई पूर्व सैनिक ईसीएचएस छोड़कर आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज कराने का विकल्प चुनता है, तो वह भविष्य में ईसीएचएस में वापस नहीं आ सकता।

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इस नियम से उन पूर्व सैनिकों को दिक्कत हो सकती है, जो वर्तमान में ईसीएचएस की सुविधाओं से नाखुश हैं। इसमें कहा गया है कि ईसीएचएस की किसी भी समस्या के बावजूद, इसे छोड़कर आयुष्मान कार्ड का उपयोग करने से पहले पूरी जानकारी और सावधानी बरतनी चाहिए।

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क्या हो सकते हैं फायदे और नुकसान?

फायदे:

  1. आयुष्मान योजना की व्यापकता: आयुष्मान भारत योजना के तहत देशभर में कई अस्पतालों में इलाज की सुविधा मिलती है। इसमें निजी अस्पताल भी शामिल हैं, जो बेहतर सेवाएं प्रदान कर सकते हैं।
  2. कैशलेस इलाज: इस योजना के तहत मरीज को कैशलेस सुविधा मिलती है, जिससे तत्काल इलाज में आसानी होती है।
  3. गरीब परिवारों के लिए मददगार: यह योजना उन पूर्व सैनिकों के लिए लाभकारी हो सकती है, जिनके पास सीमित वित्तीय संसाधन हैं।

नुकसान:

  1. ईसीएचएस सुविधाओं का नुकसान: यदि आप ईसीएचएस छोड़ते हैं, तो आप सैन्य अस्पतालों और ईसीएचएस पैनल के अन्य लाभों से वंचित हो जाएंगे।
  2. अपरिवर्तनीय प्रक्रिया: एक बार ईसीएचएस छोड़ने के बाद, इसे दोबारा अपनाना संभव नहीं होगा।
  3. सीमित विकल्प: आयुष्मान भारत योजना के तहत केवल सूचीबद्ध अस्पतालों में ही इलाज संभव है।

आयुष्मान योजना के तहत क्या मिलेगा?

आयुष्मान भारत योजना में लाभार्थियों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है। इसमें सभी प्रकार की गंभीर बीमारियों का इलाज शामिल है, जैसे कि कैंसर, हृदय रोग, डायबिटीज, आदि। योजना के तहत देशभर के निजी और सरकारी अस्पतालों में इलाज संभव है।

पूर्व सैनिकों के लिए सलाह

1. जल्दबाजी में न लें फैसला:

यदि आप ईसीएचएस सुविधाओं से असंतुष्ट हैं, तो भी इसे छोड़ने से पहले सभी विकल्पों पर गंभीरता से विचार करें।

2. आयुष्मान योजना की जांच करें:

यह सुनिश्चित करें कि आयुष्मान भारत योजना के तहत आपके क्षेत्र में अच्छे अस्पताल उपलब्ध हैं या नहीं।

3. दूसरों से सलाह लें:

अपने साथी पूर्व सैनिकों से बात करें, जिन्होंने आयुष्मान कार्ड का उपयोग किया है, और उनकी राय जानें।

4. शिकायतें दर्ज करें: यदि ईसीएचएस से संबंधित कोई समस्या है, तो उसे संबंधित अधिकारियों के पास दर्ज कराएं।

ECHS: से जुड़े लाभार्थियों के लिए खास जानकारी

  1. मेडिसिन की उपलब्धता: ईसीएचएस में दवाओं की उपलब्धता को लेकर अक्सर शिकायतें मिलती हैं। लेकिन ध्यान रखें कि यह एक आम समस्या है, जिसे समय के साथ हल किया जा सकता है।
  2. रीइंबर्समेंट प्रक्रिया: कई लाभार्थियों ने शिकायत की है कि उन्हें दवाओं और इलाज के लिए रीइंबर्समेंट में देरी का सामना करना पड़ता है।
  3. समस्याओं का समाधान: यदि आप ईसीएचएस की सुविधाओं से असंतुष्ट हैं, तो इसके लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क करें और अपनी समस्या दर्ज करें।