📍नई दिल्ली | 2 Aug, 2025, 6:00 PM
L-70 AD Guns: ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना ने बड़ा सबक सीखते हुए अपने एयर डिफेंस को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सेना ने अपनी पुरानी लेकिन कारगर L-70 एयर डिफेंस गन को लेटेस्ट ड्रोन जैमर तकनीक से जोड़ा है। इन DIWAR ऑल-बैंड ड्रोन जैमर को बेंगलुरु की कंपनी AvGarde Systems ने बनाया है, जिसे खासतौर पर दुश्मन के ड्रोन सिस्टम को नाकाम करने के लिए तैयार किया गया है।
L-70 AD Guns: क्या है L-70 गन?
L-70 गन मूल रूप से 1940 के दशक में स्वीडन द्वारा डिजाइन की गई एक 40 मिलीमीटर की एंटी-एयरक्राफ्ट गन है। यह गन भारतीय सेना के पास पिछले कई दशकों से है। सेना के पास लगभग ऐसी 1,000 गन हैं। भारतीय सेना ने समय के साथ इसे आधुनिक युद्ध की जरूरतों के मुताबिक अपग्रेड भी किया है। यह तोप शुरू में हवाई जहाजों और हेलिकॉप्टरों जैसे हवाई खतरों से निपटने के लिए बनाई गई थी। लेकिन समय के साथ युद्ध के तरीके भी बदले। अब दुश्मन छोटे ड्रोनों का इस्तेमाल करने लगे हैं, जो रडार से बच सकते हैं। इन ड्रोनों का आकार इतना छोटा होता है कि रडार इन्हें कई बार पक्षी समझ लेते हैं। ऐसे में L-70 तोप को और आधुनिक करने की जरूरत थी। भारतीय सेना ने इसे नई तकनीकों के साथ अपग्रेड किया है ताकि यह ड्रोनों जैसे नए खतरों से भी निपट सके।
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वहीं, अपग्रेड करने के बाद यह गन केवल जहाजों को ही नहीं, बल्कि ड्रोन, हेलिकॉप्टर और धीमी रफ्तार से उड़ने वाले दुश्मन विमानों को भी निशाना बना सकती है। इसे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और गन कैरिज फैक्ट्री, जबलपुर ने लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से लैस किया है। यह गन हर मिनट में 240 से 330 गोले दाग सकती है और इसका असरदार रेंज 4 किलोमीटर तक है। इसकी ताकत यह है कि यह हवाई टारगेट्स को सीधे नष्ट कर सकती है, जिसे “हार्ड-किल” तकनीक कहा जाता है।
क्या है DIWAR ड्रोन जैमर?
DIWAR एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम है जो दुश्मन के ड्रोन के सिग्नल को जैम कर देता है, जिससे उसका ऑपरेशन और नेविगेशन सिस्टम फेल हो जाता है। यह सिस्टम सॉफ्ट किल टेक्नोलॉजी पर काम करता है, जहां दुश्मन के ड्रोन को गिराने की बजाय उसकी कम्युनिकेशन लाइन को ही बंद कर दिया जाता है। यह जैमर 1 से 2 किलोमीटर तक प्रभावी है। यह ड्रोन जैमर 433 MHz, 900 MHz, 2.4 GHz, 5.8 GHz जैसे फ्रीक्वेंसी बैंड पर काम करता है, जो आमतौर पर ड्रोन के कम्युनिकेशन, वीडियो ट्रांसमिशन और नेविगेशन के लिए इस्तेमाल होते हैं। इसके अलावा यह GNSS यानी GPS, GLONASS, Galileo और BeiDou जैसी सेटेलाइट नेविगेशन सिस्टम को भी हैक या ब्लॉक कर सकता है। यह जैमर उन ड्रोनों को भी रोक सकता है जो तेजी से अपनी फ्रीक्वेंसी बदलते हैं, जिन्हें फ्रीक्वेंसी हॉपिंग स्प्रेड स्पेक्ट्रम (FHSS) ड्रोन कहते हैं। ये ड्रोन सामान्य जैमर से बच सकते हैं, लेकिन डीआईडब्ल्यूएआर की खास तकनीक इन्हें आसानी से पकड़ लेती है।

DIWAR जैमर से लैस हुई L-70
जब L-70 गन और DIWAR ड्रोन जैमर को एक साथ इस्तेमाल करते हैं, तो यह एक ऐसी सिस्टम बन जाता है जो दुश्मन के ड्रोन को पहले पता लगा सकता है, और उसके कम्युनिकेशन सिस्टम को जाम कर सकता है। वहीं अगर ड्रोन वो फिर भी उड़ता रहे तो L-70 गन उसे गोलीबारी से गिरा भी सकती है। कह सकते हैं कि यह गन अब हार्ड किल और सॉफ्ट किल दोनों सिस्टम से लैस हो गई है। जिसमें पहले इलेक्ट्रॉनिक जामिंग से ड्रोन को रोकने की कोशिश की जाती है और यदि वो असफल हो तो गोलीबारी से उसे गिरा दिया जाता है।
L-70 गनें छोटे और कम रडार सिग्नेचर वाले ड्रोनों को डिटेक्ट करने के लिए अपने रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम का इस्तेमाल करती हैं। ये सिस्टम ड्रोनों को आसानी से ढूंढ लेते हैं। इसके बाद DIWAR जैमर ड्रोन के कंट्रोल और नेविगेशन सिग्नल को जाम कर देता है। इससे ड्रोन या तो रुक जाता है, वापस चला जाता है, या जमीन पर गिर जाता है। सूत्रों ने बताया कि मई 2025 में जम्मू में इस सिस्टम ने पाकिस्तान के ड्रोन हमलों को आसानी से नाकाम कर दिया था।
आजकल दुश्मन FHSS यानी फ्रिक्वेंसी हॉपिंग स्प्रेड स्पेक्ट्रम तकनीक वाले ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये ड्रोन लगातार अपनी फ्रीक्वेंसी बदलते रहते हैं जिससे सामान्य जैमर उन्हें पकड़ नहीं पाते। लेकिन DIWAR ड्रोन जैमर विशेष तकनीक से ऐसे ड्रोन की पहचान कर उनके सभी संभावित फ्रीक्वेंसी को जाम कर सकता है।
खास बात यह है कि DIWAR जैमर नेटवर्क्ड सिस्टम के साथ भी काम कर सकता है, जिससे कई ड्रोनों को एक साथ रोका जा सकता है। इसकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी ड्रोनों को तेजी से पहचानती और रोकती है। यह सिस्टम कम बिजली खर्च करता है और इसकी रेंज 1 से 2 किलोमीटर तक है। यह स्वार्म ड्रोनों को भी रोक सकता है।
L-70 में क्या-क्या बदला
L-70 गन को मॉडर्न बनाने का काम भारत की सरकारी कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) ने जबलपुर के गन कैरिज फैक्ट्री में किया है। इस अपग्रेड में कई नई तकनीकें जोड़ी गईं। पहले L-70 में पुराने हाइड्रॉलिक सिस्टम थे, जिन्हें अब इलेक्ट्रिक ड्राइव से बदल दिया गया है। इससे गन का रखरखाव आसान हो गया है। साथ ही, इसमें एक इंटीग्रेटेड फायर कंट्रोल सिस्टम जोड़ा गया है, जिसमें डे-लाइट टेलीविजन कैमरा, थर्मल इमेजर, और लेजर रेंज फाइंडर शामिल हैं। ये सिस्टम दिन-रात और खराब मौसम में भी ड्रोनों को पकड़ने और निशाना बनाने में मदद करते हैं।
इसके अलावा, L-70 में एक ऑटोनॉमस बैलिस्टिक कम्प्यूटेशन सिस्टम भी जोड़ा गया है। यह सिस्टम गोली की रफ्तार और गन के झुकाव को ध्यान में रखकर हर गोली के लिए अपने आप कैलकुलेशन करता है। इससे हर शॉट की सटीकता बढ़ जाती है।
ऑपरेशन सिंदूर में L-70 ने दिखाया था जलवा
L-70 को देश का फर्स्ट एयर डिफेंस सिस्टम भी कहा जाता है। मई 2025 में जम्मू में हुए ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना की L-70 गनों ने अपनी ताकत दिखाई थी। इस ऑपरेशन में पाकिस्तानी ड्रोनों को रोकने के लिए L-70 को अवगार्ड सिस्टम्स के डीआईडब्ल्यूएआर ड्रोन जैमर के साथ जोड़ा गया। जिससे ड्रोनों का कम्यूनिकेशन और नेविगेशन सिस्टम ब्लॉक हो गया। जिसके बाद L-70 की 40 मिलीमीटर गोलियों ने बचे हुए ड्रोनों को नष्ट किया।