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ऑपरेशन सिंदूर के बाद SCALP मिसाइल फिर चर्चा में? पाकिस्तान में तबाही के बाद भारत क्यों बढ़ा रहा है स्टॉक?

ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायु सेना ने राफेल फाइटर जेट्स से स्कैल्प क्रूज मिसाइल और ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल दोनों का इस्तेमाल किया था...

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📍नई दिल्ली | 8 Feb, 2026, 10:07 PM

SCALP Cruise Missile Deal: भारत और फ्रांस के बीच राफेल फाइटर जेट के अलावा स्कैल्प (SCALP) क्रूज मिसाइलों के लेकर भी बात हो सकती है। स्कैल्प मिसाइल पिछले साल हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बेहद चर्चा में रही थीं। सूत्रों के मुताबिक, भारत और फ्रांस लगभग 300 मिलियन यूरो (करीब 2,700 करोड़ रुपये) की डील पर चर्चा हो रही है, जिसके तहत भारतीय वायु सेना के लिए बड़ी संख्या में स्कैल्प मिसाइलें खरीदी जा सकती हैं।

यह वही मिसाइल है, जिसका इस्तेमाल भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के अंदर मौजूद आतंकवादी ठिकानों को पूरी तरह तबाह करने के लिए किया था। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल लड़ाकू विमानों से दागी गई इन मिसाइलों ने यह साबित कर दिया कि भारत अब दुश्मन की सीमा के भीतर गहराई तक जाकर सटीक हमला करने की पूरी क्षमता रखता है। (SCALP Cruise Missile Deal)

SCALP Cruise Missile Deal: जैश-लश्कर के मुख्यालयों को निशाना बनाया

मई 2025 की रात, जब भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के अंदर आतंकी ठिकानों पर हमला किया, तब पूरी दुनिया की नजरें इस ऑपरेशन पर थीं। इस कार्रवाई में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालयों को निशाना बनाया गया। बहावलपुर और मुरिदके जैसे इलाकों में मौजूद आतंकी ढांचे को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया।

इस ऑपरेशन में भारतीय वायु सेना ने राफेल फाइटर जेट्स से स्कैल्प क्रूज मिसाइल और ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल दोनों का इस्तेमाल किया। जहां ब्रह्मोस ने तेजी से बड़े हमले किए, तो वहीं स्कैल्प मिसाइलों ने बेहद सटीक तरीके से बंकरों और मजबूत इमारतों को निशाना बनाया।

सूत्रों के मुताबिक, जिन टारगेट्स पर स्कैल्प मिसाइलें गिरीं, वहां पूरी तरह तबाही हुई और आतंकवादी संगठनों का इंफ्रास्ट्रक्चर जड़ से खत्म हो गया। (SCALP Cruise Missile Deal)

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स्कैल्प मिसाइल आखिर है क्या?

स्कैल्प एक एयर-लॉन्च्ड स्टैंडऑफ क्रूज मिसाइल है। इसे फ्रांस और यूरोप की जानी-मानी रक्षा कंपनी एमबीडीए बनाती है। ब्रिटेन में इसी मिसाइल को स्टॉर्म शैडो के नाम से जाना जाता है।

इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे दुश्मन की एयर डिफेंस रेंज से बाहर रहकर लॉन्च किया जा सकता है। यानी पायलट को खतरे वाले इलाके में घुसने की जरूरत नहीं पड़ती।

स्कैल्प मिसाइल की मारक क्षमता करीब 250 से 500 किलोमीटर तक मानी जाती है। यह मिसाइल बेहद कम ऊंचाई पर उड़ती है, पेड़ों की ऊंचाई के आसपास, ताकि दुश्मन के रडार इसे पकड़ न सकें। इसके अंदर एडवांस गाइडेंस सिस्टम होता है, जिसमें जीपीएस, टेर्रेन रेफरेंस नेविगेशन और इंफ्रारेड सीकर शामिल हैं। इसी वजह से यह मिसाइल “पिनपॉइंट एक्युरेसी” के लिए जानी जाती है। (SCALP Cruise Missile Deal)

पाकिस्तान के एयरबेस पर भी हुआ इस्तेमाल

ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब हालात और तनावपूर्ण हुए, तब भारतीय वायु सेना ने स्कैल्प मिसाइलों का दोबारा बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया। यहां तक कि पाकिस्तान एयर फोर्स के कई एयरबेस को भी निशाना बनाया था।

सूत्रों के मुताबिक, भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के 12 प्रमुख एयरबेस पर हमले किए। इन हमलों में रनवे, हैंगर, फाइटर जेट्स और जासूसी विमानों को जमीन पर ही तबाह कर दिया गया। स्कैल्प मिसाइलों ने यहां भी अपनी सटीकता और भरोसेमंद क्षमता साबित की। (SCALP Cruise Missile Deal)

अब क्यों जरूरी हो गई नई डील?

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की सुरक्षा सोच में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। अब सिर्फ जवाबी कार्रवाई नहीं, बल्कि डीप स्ट्राइक कैपेबिलिटी को मजबूत करने पर जोर है। इसी कड़ी में भारतीय वायु सेना अपने हथियार भंडार को और मजबूत करना चाहती है।

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सूत्रों के अनुसार, वायु सेना अब स्कैल्प मिसाइलों का स्टॉक बढ़ाना चाहती है, ताकि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में पर्याप्त संख्या में ये मिसाइलें उपलब्ध रहें। इसी वजह से फ्रांस के साथ नई डील पर बातचीत चल रही है। (SCALP Cruise Missile Deal)

राफेल के साथ स्कैल्प का मजबूत कॉम्बिनेशन

स्कैल्प मिसाइल को खास तौर पर राफेल फाइटर जेट के साथ इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया है। भारतीय वायु सेना के पास फिलहाल 36 राफेल विमान हैं, और ये सभी स्कैल्प से लैस हैं।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राफेल और स्कैल्प की जोड़ी भारत को ऐसी ताकत देती है, जिससे दुश्मन के सबसे सुरक्षित ठिकानों को भी बिना सीमा पार किए खत्म किया जा सकता है। (SCALP Cruise Missile Deal)

नौसेना के राफेल मरीन में भी होगा इस्तेमाल

भारत ने हाल ही में नौसेना के लिए 26 राफेल मरीन लड़ाकू विमानों का ऑर्डर दिया है। ये विमान अगले तीन से चार साल में भारत पहुंचेंगे और विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत से ऑपरेट करेंगे।

जानकारी के मुताबिक, स्कैल्प मिसाइल को इन राफेल मरीन विमानों में भी इंटीग्रेट किया जाएगा। इससे भारतीय नौसेना को समुद्र से जमीन पर गहरे हमले की क्षमता मिलेगी, जो हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की ताकत को और बढ़ाएगी। (SCALP Cruise Missile Deal)

मीटियोर मिसाइलों की भी तैयारी

स्कैल्प के साथ-साथ भारतीय वायु सेना मीटियोर एयर-टू-एयर मिसाइल की भी बड़ी खरीद की प्रक्रिया में है। मीटियर मिसाइल हवा में दुश्मन के लड़ाकू विमानों को लंबी दूरी से मार गिराने में सक्षम मानी जाती है। यानी राफेल फ्लीट को हवा और जमीन दोनों मोर्चों पर और ज्यादा घातक बनाया जा रहा है। (SCALP Cruise Missile Deal)

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114 और राफेल की तैयारी

ऑपरेशन सिंदूर में राफेल के प्रदर्शन के बाद भारतीय वायु सेना का भरोसा इस विमान पर और मजबूत हुआ है। यही वजह है कि अब 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद की योजना पर काम चल रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, यह प्रस्ताव जल्द ही डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) के सामने रखा जा सकता है। अगर यह डील मंजूर हो जाती है, तो आने वाले 10 से 15 साल में भारतीय वायु सेना के पास करीब 200 राफेल विमान हो सकते हैं।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्कैल्प मिसाइल की यह संभावित डील सिर्फ एक हथियार खरीद नहीं है। यह भारत और फ्रांस के बीच गहरे होते रणनीतिक रिश्तों का संकेत भी है। पिछले कुछ सालों में दोनों देशों के बीच सबमरीन, फाइटर जेट, इंजन और मिसाइल जैसे कई बड़े रक्षा सौदे हो चुके हैं। यह डील भारत की सैन्य तैयारी को नई धार देगी और यह साफ संदेश भी देगी कि भारत अब आतंकवाद और किसी भी सुरक्षा चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। (SCALP Cruise Missile Deal)

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