📍नई दिल्ली | 18 Dec, 2025, 1:36 PM
Air Force Commanders Conclave: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने भारत की हाई-इम्पैक्ट और शॉर्ट-ड्यूरेशन ऑपरेशनल क्षमता को स्पष्ट रूप से साबित किया। उन्होंने यह बात आज ‘एयर फोर्स कमांडर्स’ कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना आधुनिक तकनीक से लैस है, तेजी और कुशलता से काम करने में सक्षम है और रणनीतिक फैसले लेने में पूरी तरह आत्मविश्वास से भरी हुई है।
रक्षामंत्री ने कहा कि लगातार बदलते वैश्विक हालात के बीच भारतीय वायुसेना देश के राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने वायुसेना की भविष्य-उन्मुख सोच और आधुनिक क्षमताओं की सराहना की।
राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वायुसेना की भूमिका का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिस साहस, तेजी और सटीकता के साथ भारतीय वायुसेना ने आतंकवादी ठिकानों को नष्ट किया, वह देश की सैन्य तैयारी का स्पष्ट उदाहरण है। उन्होंने यह भी कहा कि इसके बाद पाकिस्तान की ओर से की गई गैर-जिम्मेदार प्रतिक्रिया को भी वायुसेना और एयर डिफेंस सिस्टम ने प्रभावी ढंग से संभाला।
उन्होंने जनता के भरोसे का जिक्र करते हुए कहा कि आमतौर पर दुश्मन के हमले के समय लोग डर जाते हैं, लेकिन जब पाकिस्तानी बलों ने भारतीय प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की कोशिश की, तब देश के लोग शांत रहे और अपनी सामान्य दिनचर्या जारी रखी। यह भारतीय नागरिकों के सशस्त्र बलों और वायु रक्षा क्षमताओं पर भरोसे को दिखाता है।
रक्षामंत्री ने कमांडरों से कहा कि वे ऑपरेशन सिंदूर से सीख लें और भविष्य की हर चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहें। उन्होंने दुश्मन की आक्रामक और रक्षात्मक क्षमताओं को गहराई से समझने की जरूरत पर भी जोर दिया, ताकि रणनीतिक बढ़त बनी रहे।
युद्ध की बदलती प्रकृति पर बात करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष, इजरायल-हमास युद्ध, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसी घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि आज के समय में एयर पावर निर्णायक शक्ति बन चुकी है। उन्होंने कहा कि वायु शक्ति केवल सामरिक साधन नहीं, बल्कि एक रणनीतिक उपकरण है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वायु शक्ति की असली ताकत उसकी तेज रफ्तार, अचानक हमला करने की क्षमता और दुश्मन को झटका देने की शक्ति में है। वायुसेना देश के नेतृत्व को यह साफ संदेश देने में सक्षम है कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा। आज वायु शक्ति अपनी गति, दूर तक पहुंच और सटीक वार करने की क्षमता के कारण सैन्य ताकत को देश के राष्ट्रीय लक्ष्यों से जोड़ने का मजबूत साधन बन चुकी है।
रक्षामंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के एयर डिफेंस सिस्टम और अन्य सैन्य उपकरणों के प्रभावी प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार देश की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का युद्ध सिर्फ हथियारों तक सीमित नहीं है। यह अब सोच, तकनीक और हालात के मुताबिक खुद को ढालने की क्षमता का भी युद्ध बन गया है। साइबर वारफेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, सैटेलाइट आधारित निगरानी और स्पेस से जुड़ी क्षमताएं युद्ध के तरीके को तेजी से बदल रही हैं। अब सटीक हथियार, रियल-टाइम जानकारी और डेटा के आधार पर फैसले लेना आधुनिक संघर्षों में सफलता के लिए जरूरी हो गया है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि जो देश तकनीक, दूरदर्शी सोच और बदलते हालात के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता को संतुलित कर लेते हैं, वही वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि सुदर्शन चक्र, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री ने इस साल स्वतंत्रता दिवस पर की थी, आने वाले समय में राष्ट्रीय संपत्तियों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएगा।
उन्होंने बताया कि स्वदेशी जेट इंजन का विकास अब एक राष्ट्रीय मिशन बन चुका है, और सरकार इसे सफल बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार निजी क्षेत्र, स्टार्ट-अप और एमएसएमई कंपनियों के साथ मिलकर रक्षा क्षेत्र के आधुनिकीकरण पर लगातार काम कर रही है।
रक्षामंत्री ने बताया कि आईडेक्स (iDEX) और अदिति जैसी पहलों के जरिए युवाओं को रक्षा निर्माण से जोड़ा जा रहा है। नवंबर 2025 तक आईडेक्स के तहत दिए गए 565 चैलेंज में से 672 विजेता सामने आए हैं, जिनमें वायुसेना से जुड़े 77 चैलेंज के 96 विजेता शामिल हैं। इससे साफ होता है कि रक्षा क्षेत्र में युवाओं की रुचि तेजी से बढ़ रही है।
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को तीनों सेनाओं के बीच बेहतरीन तालमेल का उदाहरण बताया। उनके अनुसार थल, जल और वायु सेनाओं का आपसी समन्वय आज के दौर की बड़ी जरूरत है, जिससे देश की सुरक्षा और ज्यादा मजबूत होती है।
रक्षामंत्री ने भारतीय वायुसेना के ह्यूमैनिटेरियन असिस्टेंस और डिजास्टर रिलीफ अभियानों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि देश के भीतर और विदेशों में प्राकृतिक आपदाओं के समय वायुसेना ने हमेशा अहम भूमिका निभाई है, जिससे आम लोगों का भरोसा और मजबूत हुआ है।
इस कॉन्क्लेव में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान और वायुसेना के वरिष्ठ कमांडर उपस्थित रहे। रक्षामंत्री का स्वागत एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने किया और उन्हें वायुसेना की ऑपरेशनल तैयारी की जानकारी दी गई।



