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आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल ने लगाई लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित के रिटायरमेंट पर रोक, केस से प्रमोशन पर पड़ा असर

लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को जुलाई 2025 में मालेगांव ब्लास्ट केस में अदालत से बरी कर दिया गया था। यह मामला साल 2008 का था और इसमें करीब 17 साल तक जांच और ट्रायल चला...

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📍नई दिल्ली | 17 Mar, 2026, 8:03 PM

Lt Col Purohit AFT Case: नई दिल्ली में आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल ने एक अहम फैसले में लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित की रिटायरमेंट पर अस्थायी रोक लगा दी है। उनका रिटायरमेंट 31 मार्च को होना था, लेकिन ट्रिब्यूनल ने इस प्रक्रिया को फिलहाल रोकते हुए रक्षा मंत्रालय से जवाब मांगा है। यह मामला मालेगांव ब्लास्ट केस और उससे जुड़े लंबे ट्रायल के कारण उनके करियर पर पड़े असर से जुड़ा है।

यह फैसला 17 मार्च को आया, जब ट्रिब्यूनल की बेंच ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि जब तक पुरोहित की स्टैट्यूटरी शिकायत पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक उन्हें सेवा से रिटायर नहीं किया जाएगा। (Lt Col Purohit AFT Case)

Lt Col Purohit AFT Case: मालेगांव केस के बाद उठाया प्रमोशन का मुद्दा

लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को जुलाई 2025 में मालेगांव ब्लास्ट केस में अदालत से बरी कर दिया गया था। यह मामला साल 2008 का था और इसमें करीब 17 साल तक जांच और ट्रायल चला। पुरोहित का कहना है कि इस लंबे कानूनी संघर्ष के कारण उनके प्रमोशन और करियर प्रोग्रेशन पर असर पड़ा।

उन्होंने ट्रिब्यूनल में याचिका दाखिल कर कहा कि उन्हें उनके बैचमेट्स के बराबर प्रमोशन का अवसर नहीं मिला। उनके अनुसार, यदि यह मामला नहीं होता, तो वे सामान्य प्रक्रिया के तहत उच्च पद तक पहुंच सकते थे। (Lt Col Purohit AFT Case)

डीवी बैन और सीलबंद प्रक्रिया पर उठाए सवाल

पुरोहित ने अपने मामले में आर्मी द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ डिसिप्लिन एंड विजिलेंस यानी डीवी बैन लागू था, जिसके चलते उनके प्रमोशन पर फैसला रोक दिया गया।

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फरवरी 2021 में उन्हें कर्नल पद के लिए विचार किया गया था, लेकिन उनका रिजल्ट सीलबंद रखा गया। बाद में उन्हें बताया गया कि वे प्रमोशन के लिए फिट नहीं पाए गए। उनका कहना है कि यदि वे प्रमोशन के लिए योग्य नहीं थे, तो यह जानकारी तुरंत दी जानी चाहिए थी। सीलबंद प्रक्रिया अपनाकर उन्हें आगे के प्रमोशन के अवसरों से भी वंचित किया गया और उन्हें कानूनी चुनौती देने का मौका भी नहीं मिला। (Lt Col Purohit AFT Case)

ट्रिब्यूनल ने मांगा रक्षा मंत्रालय से जवाब

आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल की जस्टिस राजेंद्र मेनन की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले में रक्षा मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि पहली नजर में यह मामला बनता है कि पुरोहित को उनके जूनियर्स के बराबर प्रमोशन और अन्य लाभों पर विचार किया जाना चाहिए।

ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा कि आपराधिक अदालत द्वारा बरी किए जाने के बाद यह देखा जाना जरूरी है कि कहीं उन्हें गलत तरीके से उनके अधिकारों से वंचित तो नहीं किया गया। इस मामले की अगली सुनवाई 22 मई को होगी। (Lt Col Purohit AFT Case)

पुरोहित ने करियर प्रभावित होने का किया दावा

पुरोहित ने अपनी याचिका में कहा है कि सामान्य परिस्थितियों में वे अब तक ब्रिगेडियर पद तक पहुंच सकते थे। उन्होंने बताया कि उनके खिलाफ लगे आरोप और उसके बाद की प्रक्रिया ने उनके करियर ग्रोथ को प्रभावित किया।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपने प्रमोशन से जुड़े फैसले के खिलाफ अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिला। इस कारण उन्हें समय रहते न्याय पाने का मौका नहीं मिल सका। (Lt Col Purohit AFT Case)

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सेवा में वापसी के बाद भी जारी रहा असर

पुरोहित को 2017 में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद उन्होंने दोबारा सेना में जॉइन किया था। हालांकि, वे 2020 तक सस्पेंशन में रहे। सस्पेंशन हटने के बाद भी उनके ऊपर डीवी बैन जारी रहा। इसके बावजूद उन्होंने अपनी सेवा जारी रखी और 2018 से 2025 के बीच कई एनुअल कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट्स हासिल कीं। इन रिपोर्ट्स में उनके काम और प्रोफेशनल क्षमता को सकारात्मक बताया गया। (Lt Col Purohit AFT Case)

इंटेलिजेंस भूमिका का भी दिया हवाला

अपनी याचिका में पुरोहित ने यह भी कहा है कि वे मिलिट्री इंटेलिजेंस में कार्यरत थे और उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार ही काम किया। उन्होंने कुछ आधिकारिक पत्रों का हवाला देते हुए कहा कि उनकी गतिविधियां ड्यूटी के दायरे में थीं। इन दस्तावेजों में यह उल्लेख किया गया कि वे एक सोर्स नेटवर्क के जरिए जानकारी जुटा रहे थे और यह काम उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा था। (Lt Col Purohit AFT Case)

अक्टूबर 2008 में हुई थी गिरफ्तारी

पुरोहित की गिरफ्तारी अक्टूबर 2008 में हुई थी, जब वे एक ट्रेनिंग कोर्स कर रहे थे। इसके बाद उन्हें एंटी टेररिज्म स्क्वाड को सौंपा गया। इस मामले में उन्होंने कई साल जेल में बिताए। जेल में रहने के दौरान वे अपनी दो महत्वपूर्ण कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट्स हासिल नहीं कर सके, जिसका असर उनके करियर पर पड़ा। (Lt Col Purohit AFT Case)

स्टैट्यूटरी शिकायत पर फैसला बाकी

पुरोहित ने अक्टूबर 2025 में आर्मी चीफ को पत्र लिखकर अपनी बात रखने का अनुरोध किया था। इसके बाद फरवरी 2026 में उन्होंने स्टैट्यूटरी शिकायत भी दर्ज कराई। उनका कहना है कि उन्हें उनके बैचमेट्स के बराबर अवसर दिए जाएं। ट्रिब्यूनल ने कहा है कि जब तक इस शिकायत पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक उनकी रिटायरमेंट पर रोक जारी रहेगी। (Lt Col Purohit AFT Case)

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कानूनी अधिकारों के उल्लंघन का आरोप

पुरोहित ने अपनी याचिका में कहा है कि उनके साथ हुए व्यवहार से उनके मौलिक और कानूनी अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। उन्होंने कहा कि उन्हें समानता और सम्मान के साथ सेवा करने का अधिकार मिलना चाहिए था।
उनका यह भी कहना है कि लंबी कानूनी प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्णयों के कारण उन्हें समय से पहले सेवा से बाहर होना पड़ सकता था। (Lt Col Purohit AFT Case)

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