📍नई दिल्ली | 28 Jan, 2026, 3:07 PM
Disabled War Veteran Toll Tax Exemption India: गणतंत्र दिवस के दौरान व्हीलचेयर पर बैठे एक पूर्व सैनिक का वीडियो आजकल खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक व्हीलचेयर पर बैठे पूर्व पैरा कमांडो टोल बूथ पर कर्मचारियों से बहस करते दिखाई देते हैं। वे खुद को ऑपरेशन पराक्रम के दौरान घायल हुआ सैनिक बताते हैं और हाथ में एक आधिकारिक पत्र दिखाते हुए कहते हैं कि उन्हें टोल टैक्स से छूट मिली हुई है। इसके बावजूद उनसे टोल मांगा गया।
इस वीडियो के सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या डिसेबल्ड वॉर वेटरन (युद्ध में घायल पूर्व सैनिक) को टोल टैक्स की छूट मिलती है? यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि अक्सर टोल बूथ पर नियमों की अलग-अलग व्याख्या की जाती है, जिससे सैनिकों और उनके परिवारों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
Disabled War Veteran Toll Tax Exemption India: क्या है पूरा मामला
वीडियो में दिख रहे पूर्व सैनिक अपना नाम श्यामराज बताते हैं। वे कहते हैं कि वे भारतीय सेना के पैरा कमांडो रह चुके हैं और ऑपरेशन पराक्रम के दौरान घायल हुए थे, जिसकी वजह से आज वे व्हीलचेयर पर हैं। वीडियो में वे कर्नाटक के उद्भि, शश्ताना टोल बूथ पर हैं। उनके हाथ में एक पत्र है, जिसमें उनकी पत्नी की पोस्टिंग के दौरान निजी वाहन को ले जाने की अनुमति और टैक्स से छूट की बात कही गई है।
श्यामराज का कहना है कि इस टोल बूथ तक पहुंचने से पहले वे कई अन्य टोल प्लाजा पार कर चुके थे, जहां उन्हें बिना किसी भुगतान के आगे जाने दिया गया। लेकिन शश्ताना टोल बूथ पर कर्मचारियों ने उनसे पैसे मांगे और कहा कि बिना टोल दिए वे आगे नहीं जा सकते। इसी बहस के दौरान वे भावुक होकर कहते हैं, “मैं भिखारी नहीं हूं। मैं भीख नहीं मांग रहा, मैं सिर्फ अपने अधिकार की बात कर रहा हूं।”
Very disturbing to see our Braveheart Commandoo from Para SF being asked to pay toll despite a letter of exemption
‘I am not a beggar….. asking for what is written here…. please respond @nitin_gadkari‘ he says
Shameful and sad to treat our disabled War Heroes like this.… pic.twitter.com/UqoLcWMgHe
— Meghna Girish 🇮🇳 (@megirish2001) January 26, 2026
सोशल मीडिया पर क्यों भड़का मामला
यह वीडियो सबसे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया गया। इसे शेयर करने वाली महिला मेघना गिरीश खुद एक शहीद की मां हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि गणतंत्र दिवस से ठीक एक दिन पहले एक डिसेबल्ड वॉर हीरो से टोल वसूला जाना बेहद शर्मनाक है। उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रक्षा मंत्रालय को टैग करते हुए इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की।
वीडियो के वायरल होते ही हजारों लोग पूर्व सैनिक के समर्थन में आ गए। सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाया कि जब नेता, अधिकारी और वीआईपी काफिले बिना टोल दिए निकल जाते हैं, तो देश के लिए लड़कर घायल हुए सैनिक से पैसे क्यों मांगे जा रहे हैं।
क्या कहते हैं नियम: किसे मिलती है टोल टैक्स से छूट
नेशनल हाईवे पर टोल टैक्स से छूट से जुड़े नियम नेशनल हाईवे फीस रूल्स के तहत आते हैं। इन नियमों के अनुसार, सेवारत आर्मी, नेवी और एयर फोर्स के जवानों को, जब वे आधिकारिक ड्यूटी या पोस्टिंग के सिलसिले में यात्रा कर रहे हों और उनके पास निर्धारित दस्तावेज हों, तब टोल टैक्स से छूट मिलती है।
आमतौर पर यह छूट उसी स्थिति में लागू मानी जाती है, जब वाहन किसी सेवारत सैन्य अधिकारी के नाम पर हो और यात्रा सीधे तौर पर ड्यूटी या ट्रांसफर से जुड़ी हो।
पूर्व सैनिकों को लेकर क्या हैं नियम
विवाद की सबसे बड़ी वजह यही है। नियमों के तहत पूर्व सैनिकों यानी एक्स-सर्विसमैन के लिए टोल टैक्स छूट को लेकर स्पष्ट गाइडलाइंस नहीं हैं। कई टोल बूथों पर कर्मचारी यह मानते हैं कि छूट केवल नौकरी कर रहे जवानों के लिए है, न कि रिटायर्ड या पूर्व सैनिकों के लिए है।
वहीं, कई पूर्व सैनिक संगठनों और रिटायर्ड अधिकारियों का कहना है कि अगर कोई सैनिक युद्ध में घायल हुआ है और उसके पास सरकारी पत्र मौजूद है, तो उसे नियमों के साथ-साथ इंसानियत और सम्मान के आधार पर भी छूट मिलनी चाहिए।
मिली थी छूट फिर भी मांगा टोल
रिटायर्ड मेजर डीपी सिंह केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए जारी एक पत्र का उल्लेख करते हैं। यह पत्र पूर्व सैनिक श्यामराज की अर्टिगा गाड़ी को लेकर हैं। इस पत्र में साफ तौर पर बताया गया है कि संबंधित सैन्य अधिकारी की गाड़ी को टोल टैक्स से छूट दी गई है। प्रमाण पत्र के अनुसार, लेफ्टिनेंट कर्नल शिवप्रिय एस भारतीय सेना के आधिकारिक आदेश के तहत वेलिंगटन (तमिलनाडु) से दिल्ली स्थायी पोस्टिंग के लिए जा रही हैं। यह पोस्टिंग सेना मुख्यालय, रक्षा मंत्रालय (आर्मी) के पत्र संख्या 8/70034/P/DGMS-4A दिनांक 17 नवंबर 2025 के आधार पर है।
इस यात्रा के दौरान लेफ्टिनेंट कर्नल शिवप्रिय एस की निजी कार, मारुति अर्टिगा (रजिस्ट्रेशन नंबर UP-32-JE-2372), को नेशनल हाईवे एक्ट 1956 के तहत टोल टैक्स के भुगतान से पूरी तरह छूट दी गई है।
प्रमाण पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह वाहन एक सेवारत सैन्य अधिकारी का है और किसी भी प्रकार की बिक्री या व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं है। इसी कारण यह वाहन पूरे रास्ते में सभी तरह के टैक्स, सेस, लेवी, टोल, एक्साइज, पाथ-कर और ऑक्ट्रॉय से मुक्त रहेगा।
यह छूट भारतीय टोल टैक्स नियमों के तहत दी गई है, जो आर्मी और एयर फोर्स एक्ट 1902, एक्ट 1923, आर्टिकल 00 सेक्शन 1530 और रेगुलेशन 1990 (समय-समय पर संशोधित) के अंतर्गत लागू होते हैं।
एनएचएआई ने जारी किया बयान
मामला बढ़ने के बाद एनएचएआई के बेंगलुरु रीजनल ऑफिस ने इस पर आधिकारिक बयान जारी किया। एनएचएआई ने कहा कि टोल टैक्स से छूट केवल सर्विंग मिलिटरी पर्सनल को मिलती है। इस मामले में संबंधित व्यक्ति एक्स-आर्मी पर्सनल था, इसलिए वह नियमों के तहत पात्र नहीं था। साथ ही यह भी कहा गया कि प्रस्तुत किए गए दस्तावेज निर्धारित मानकों से मेल नहीं खाते थे।
हालांकि, एनएचएआई ने यह भी स्पष्ट किया कि व्यक्ति के घायल सैनिक होने की बात सामने आने और अनावश्यक देरी से बचने के लिए उसे बिना टोल भुगतान के आगे जाने दिया गया। पूरे मामले की अलग से जांच किए जाने की बात भी कही गई।
बयान के बाद भी नहीं थमा गुस्सा
एनएचएआई के बयान के बाद भी लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। एक रिटायर्ड मेजर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर एक व्हीलचेयर पर बैठे युद्ध में घायल सैनिक के साथ भी सिर्फ “टेक्निकल नियम” देखकर व्यवहार किया जाएगा, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। कई लोगों ने यह भी पूछा कि अगर नियम इतने ही कड़े हैं, तो फिर नेताओं और वीआईपी काफिलों को टोल से छूट कैसे मिल जाती है।
पूर्व सैनिकों का मानना है कि विकलांग युद्ध सैनिकों के लिए टोल टैक्स नियमों में साफ और मानवीय प्रावधान होने चाहिए। इसके साथ ही टोल कर्मचारियों को ऐसे मामलों में कॉमन सेंस और संवेदनशीलता की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि अगर किसी सैनिक को छूट का पत्र जारी किया जाता है, तो उसका सम्मान हर टोल बूथ पर एक समान रूप से होना चाहिए।



