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Malabar Exercise 2025: अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ के बावजूद गुआम में मालाबार नेवल एक्सरसाइज में हिस्सा लेगा भारत

भारतीय नौसेना ने पुष्टि की है कि इस साल के अभ्यास के लिए आईएनएस सह्याद्री, एक लेटेस्ट स्टील्थ फ्रिगेट को गुआम भेजा गया है। यह वॉरशिप एंटी-सबमरीन वारफेयर, सरफेस स्ट्राइक ऑपरेशन और एयर डिफेंस मिशन जैसे अभियानों में सक्षम है...

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📍नई दिल्ली | 31 Oct, 2025, 8:40 PM

Malabar Exercise 2025: भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक मतभेद और 50 फीसदी टैरिफ विवाद के बावजूद, दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग पहले की तरह जारी है। इसी के तहत भारत ने मालाबार नौसैनिक अभ्यास 2025 में शामिल होने की बात कही है। यह अभ्यास 25 से 26 नवंबर को गुआम में होगा, जो पश्चिमी प्रशांत महासागर में स्थित है।

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इस अभ्यास में क्वॉड समूह के चारों सदस्य देश भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल होंगे। चारों देशों की नौसेनाएं मिलकर समुद्री सुरक्षा और आपसी समन्वय पर काम करेंगी। यह अभ्यास ऐसे समय हो रहा है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों में तनाव बना हुआ है, क्योंकि अमेरिका ने भारतीय सामान पर अभी भी 50 फीसदी तक का आयात शुल्क लगाया हुआ है।

भारतीय नौसेना ने पुष्टि की है कि इस साल के अभ्यास के लिए आईएनएस सह्याद्री, एक लेटेस्ट स्टील्थ फ्रिगेट को गुआम भेजा गया है। यह वॉरशिप एंटी-सबमरीन वारफेयर, सरफेस स्ट्राइक ऑपरेशन और एयर डिफेंस मिशन जैसे अभियानों में सक्षम है। इसके साथ भारतीय नौसेना के पी-8आई लॉन्ग रेंज मैरीटाइम एयरक्राफ्ट और रोमियो सीहॉक एमएच-60आर हेलिकॉप्टर भी शामिल होंगे, जो समुद्री निगरानी और सर्च एंड रेस्क्यू आपरेशंस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भारतीय नौसेना के अनुसार, इस अभ्यास का उद्देश्य इंडो-पैसिफिक इलाके में सुरक्षित समुद्री मार्ग सुनिश्चित करना और सहयोगी देशों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाना है। यह अभ्यास समुद्र में आपसी समन्वय, तकनीकी कौशल और सामरिक तैयारी को मजबूत करेगा।

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Malabar Exercise 2025: गुआम में बड़ा अंतरराष्ट्रीय अभ्यास

मालाबार अभ्यास का यह एडिशन गुआम में हो रहा है, जो जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक स्ट्रैटेजिक द्वीप समूह है। अमेरिका इस क्षेत्र का इस्तेमाल अपने नौसैनिक अभियानों और प्रशिक्षण गतिविधियों के लिए करता है। इस बार का अभ्यास दो चरणों में होगा। पहला हार्बर फेज, जिसमें बंदरगाह पर योजनाओं और प्रशिक्षणों पर चर्चा होगी। दूसरा सी फेज, जिसमें रिअल सी प्रैक्टिस, लाइव फायरिंग, एंटी-सबमरीन वारफेयर और एयर डिफेंस ऑपरेशन शामिल होंगे।

इस दौरान सभी देशों की नौसेनाएं एक साथ जटिल ऑपरेशनों का अभ्यास करेंगी। इससे समुद्री खतरों से निपटने और संकट के समय मानव सहायता या आपदा राहत में सामूहिक कार्रवाई की क्षमता मजबूत होगी।

Malabar Exercise 2025: लगभग 300 नौसैनिक अधिकारी और जवान शामिल

भारतीय नौसेना ने इस अभ्यास में बड़ी तैयारी के साथ हिस्सा लिया है। इस मिशन का नेतृत्व एक रियर एडमिरल कर रहे हैं और लगभग 300 नौसैनिक अधिकारी व जवान इसमें शामिल हैं। आईएनएस सह्याद्री ने 25 अक्टूबर को जापान के योकोसुका नौसैनिक अड्डे से गुआम के लिए यात्रा शुरू की थी।

अभ्यास से पहले भारत और अमेरिका की नौसेनाओं ने अरब सागर में संयुक्त ड्रिल की, जिसमें एंटी-पाइरेसी और विजुअल बोर्डिंग एंड सर्च ऑपरेशन जैसे मिशन की ट्रेनिंग हुई। भारतीय नौसेना ने कहा कि “मालाबार अभ्यास इंडो-पैसिफिक में हमारी रणनीतिक भागीदारी और साझेदारी की भावना को दर्शाता है।”

अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर अभी भी 50 प्रतिशत तक का टैरिफ लगा रखा है, जिससे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में तनाव जारी है और इसमें कटौती को लेकर बातचीत भी जारी है। फिर भी, रक्षा क्षेत्र में संबंध पहले की तरह मजबूत बने हुए हैं।

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हाल ही में भारत और ब्रिटेन ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर सहमति जताई है, लेकिन अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ ऐसी बातचीत अभी जारी है। इसके बावजूद भारत और अमेरिका के बीच सैन्य और सामरिक सहयोग में कोई रुकावट नहीं आई है।

मालाबार अभ्यास की शुरुआत 1992 में भारत और अमेरिका के बीच एक द्विपक्षीय अभ्यास के रूप में हुई थी। बाद में जापान और ऑस्ट्रेलिया भी इसमें शामिल हुए। अब यह चार देशों की संयुक्त रणनीतिक कवायद बन चुका है। ये चारों देश क्वाड समूह के सदस्य हैं, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में खुला, सुरक्षित और संतुलित मरीन इंफ्रास्ट्रक्चर सुनिश्चित करने पर काम करते हैं।

भारत ने पिछले वर्ष मालाबार 2024 का आयोजन विशाखापत्तनम में किया था, जबकि इस वर्ष इसे अमेरिका गुआम में आयोजित कर रहा है। हर वर्ष इसकी मेजबानी चारों देशों में बारी-बारी से होती है।

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