📍नई दिल्ली | 6 Mar, 2026, 11:31 PM
IRIS Lavan: हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका-इजराइल के साथ बढ़ते संघर्ष के दौरान भारत से अपने एक जहाज आईआरआईएस लावन को सुरक्षित डॉकिंग देने का अनुरोध किया था। यह अनुरोध 28 फरवरी को भारत को भेजा गया था। जहाज में तकनीकी खराबी आने के चलते उसे तुरंत किसी सुरक्षित बंदरगाह पर रुकने की जरूरत थी।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक भारत सरकार ने इस अनुरोध पर विचार करने के बाद 1 मार्च को जहाज को कोच्चि पोर्ट पर डॉक करने की अनुमति दे दी। इसके बाद यह ईरानी जहाज 4 मार्च को केरल के कोच्चि बंदरगाह पर पहुंच गया। फिलहाल जहाज के 183 क्रू मेंबर्स को भारतीय नौसेना की फैसिलिटीज में ठहराया गया है। (IRIS Lavan)
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसी समय हिंद महासागर में एक और ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस देना को अमेरिकी नेवी की न्यूक्लियर सबमरीन ने टॉरपीडो से डुबो दिया था। इस हमले में बड़ी संख्या में ईरानी नाविकों की मौत हुई थी और क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया था। (IRIS Lavan)
IRIS Lavan: मिलन और आईएफआर में आए थे ईरानी जहाज
इस साल 18 फरवरी से 25 फरवरी तक भारत ने विशाखापत्तनम में दो बड़े नौसैनिक कार्यक्रम आयोजित किए थे। पहला था इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और दूसरा था मिलन 2026 नेवल एक्सरसाइज। इन दोनों कार्यक्रमों में दुनिया के कई देशों की नौसेनाओं ने हिस्सा लिया था। लगभग 70 से ज्यादा देशों के जहाज और प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए थे।
Days before the #IRIS #DENA incident south of #SriLanka, #Iran had requested India to allow #IRIS #LAVAN to dock at #Kochi due to technical issues. Approval was granted on March 1, and the vessel docked on March 4. Its 183 crew members are currently accommodated at naval… pic.twitter.com/rz23EQy0aW
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) March 6, 2026
इन्हीं कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए ईरान की नौसेना के कुछ जहाज भी भारत आए थे। इनमें आईआरआईएस देना, आईआरआईएस लवन और आईआरआईएस बुशेहर शामिल थे। हालांकि केवल देना ने ही भारतीय नौसेना के साथ अभ्यास और समारोहों में भाग लिया था। कार्यक्रम खत्म होने के बाद ये जहाज वापस अपने देश की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान क्षेत्र में सैन्य तनाव तेजी से बढ़ गया। (IRIS Lavan)
28 फरवरी को ईरान ने भारत से मांगी मदद
सरकारी सूत्रों के मुताबिक 28 फरवरी को ईरान ने भारत से संपर्क किया। उस समय तक अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी थी और पूरे पश्चिम एशिया तथा हिंद महासागर क्षेत्र में तनाव बढ़ चुका था।
ईरान ने भारत को बताया कि उसका जहाज लवन में तकनीकी समस्या थी। जहाज के सिस्टम में गंभीर खराबी आने के कारण उसे तुरंत किसी सुरक्षित बंदरगाह पर पहुंचना जरूरी था। ईरान ने भारत से अनुरोध किया कि जहाज को कोच्चि पोर्ट में डॉक करने की अनुमति दी जाए ताकि मरम्मत और तकनीकी जांच की जा सके। (IRIS Lavan)
भारत ने 1 मार्च को दी डॉकिंग की अनुमति
भारत सरकार ने इस अनुरोध पर विचार किया और 1 मार्च को जहाज को डॉक करने की अनुमति दे दी। यह फैसला मानवीय आधार पर लिया गया बताया जा रहा है। समुद्र में अगर किसी जहाज को तकनीकी समस्या हो जाती है तो अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के अनुसार उसे सहायता देना एक सामान्य प्रथा मानी जाती है। इसी सिद्धांत के तहत भारत ने जहाज को सुरक्षित बंदरगाह तक आने की अनुमति दी।
इसके बाद ईरानी जहाज लवन ने हिंद महासागर से आगे बढ़ते हुए केरल के कोच्चि बंदरगाह की ओर रुख किया। (IRIS Lavan)
4 मार्च को कोच्चि पहुंचा ईरानी जहाज
सरकारी सूत्रों के अनुसार यह जहाज 4 मार्च को कोच्चि पहुंच गया और वहां सुरक्षित तरीके से डॉक किया गया। जहाज के साथ मौजूद 183 क्रू मेंबर्स फिलहाल भारतीय नौसेना की देखरेख में हैं। नौसेना की ओर से उन्हें रहने और जरूरी सहायता की व्यवस्था दी गई है। जहाज की तकनीकी जांच और मरम्मत की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
अधिकारियों के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया मानवीय आधार पर की जा रही है और इसका किसी सैन्य गतिविधि से कोई संबंध नहीं है। (IRIS Lavan)
इसी दौरान डूबा ईरान का युद्धपोत IRIS Dena
हालांकि जिस समय लवन को भारत में शरण मिली, उसी समय एक और ईरानी जहाज बड़ी घटना का शिकार हो गया। 4 मार्च को श्रीलंका के दक्षिण में हिंद महासागर में ईरानी नौसेना का युद्धपोत देना अमेरिकी नेवी की न्यूक्लियर सबमरीन के हमले में डूब गया।
रिपोर्टों के अनुसार इस जहाज पर टॉरपीडो हमला किया गया था। इस हमले में कम से कम 87 ईरानी नाविकों की मौत हो गई जबकि 32 नाविकों को बचाया गया। कई अन्य नाविकों के लापता होने की भी खबर है।
श्रीलंका औऱ भारतीय नौसेना नौसेना ने जहाज से आए डिस्ट्रेस सिग्नल और इमरजेंसी कॉल के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया था और कई नाविकों को समुद्र से निकाला था। (IRIS Lavan)
ईरानी विदेश मंत्री ने फोन पर की बात
IRIS Dena के डूबने की घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है। ईरान ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और कहा है कि जहाज पर बिना किसी चेतावनी के हमला किया गया।
ईरान के विदेश मंत्री सेयद अब्बास अराघची ने इस मामले में भारत और श्रीलंका के विदेश मंत्रियों से फोन पर बातचीत भी की। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।
उन्होंने यह भी कहा कि देना पर हमला अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में किया गया था और इस घटना को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया जाएगा। ईरान ने श्रीलंका का धन्यवाद भी किया क्योंकि वहां की नौसेना ने डूबते जहाज के नाविकों को बचाने में मदद की थी। (IRIS Lavan)
तीसरा जहाज भी फंसा था
सूत्रों के अनुसार ईरान का एक और जहाज आईआरआईएस बुशेहर भी इस पूरे घटनाक्रम के दौरान क्षेत्र में मौजूद था। बताया जाता है कि इस जहाज में इंजन खराबी आ गई थी और इसे श्रीलंका के बंदरगाह में सहायता लेनी पड़ी।
इस जहाज के कई क्रू मेंबर्स को भी सुरक्षित स्थान पर रखा गया है जबकि जहाज की तकनीकी जांच की जा रही है।
इस तरह एक ही समय में ईरान के तीन जहाज हिंद महासागर क्षेत्र में अलग-अलग परिस्थितियों का सामना कर रहे थे।
वहीं, भारत ने इस पूरे मामले में संतुलित और सावधानी भरा रुख अपनाया है। भारत ने किसी भी सैन्य कार्रवाई में हिस्सा नहीं लिया है लेकिन समुद्री नियमों और मानवीय सिद्धांतों के तहत सहायता दी है। कोच्चि में ईरानी जहाज को डॉकिंग की अनुमति देना इसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है। भारत लंबे समय से यह कहता रहा है कि हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षित समुद्री मार्ग बहुत जरूरी हैं। इसलिए भारत का प्रयास रहता है कि क्षेत्र में तनाव कम हो और समुद्री गतिविधियां सामान्य रूप से चलती रहें। (IRIS Lavan)

