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ऑस्ट्रेलिया में INS नीलगिरी का जलवा! काकाडू एक्सरसाइज में दिखी भारत की समुद्री ताकत

एक्सरसाइज काकाडू ऑस्ट्रेलिया की रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी द्वारा आयोजित एक बड़ा बहुपक्षीय समुद्री अभ्यास है, जो हर दो साल में आयोजित किया जाता है। इस साल इसका 17वां संस्करण आयोजित हो रहा है, जो 2 मार्च से 31 मार्च तक चलेगा...

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📍नई दिल्ली | 22 Mar, 2026, 3:40 PM

INS Nilgiri Kakadu 2026: भारतीय नौसेना के आधुनिक फ्रिगेट आईएनएस नीलगिरी ने ऑस्ट्रेलिया में चल रहे एक्सरसाइज काकाडू 2026 के सी फेज यानी समुद्री चरण में हिस्सा लिया है। इसकी आधिकारिक पुष्टि भी भारतीय नौसेना ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की। नेवी की इस भागीदारी को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की मजबूत होती रणनीतिक पकड़ और सहयोग की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

INS Nilgiri Kakadu 2026: क्या है एक्सरसाइज काकाडू 2026

एक्सरसाइज काकाडू ऑस्ट्रेलिया की रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी द्वारा आयोजित एक बड़ा बहुपक्षीय समुद्री अभ्यास है, जो हर दो साल में आयोजित किया जाता है। इस साल इसका 17वां संस्करण आयोजित हो रहा है, जो 2 मार्च से 31 मार्च तक चलेगा। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग देशों की नौसेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना, एक साथ काम करने की क्षमता विकसित करना और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना है।

इस अभ्यास में सिर्फ युद्ध से जुड़े अभ्यास ही नहीं होते, बल्कि समुद्री सुरक्षा, निगरानी, आपदा राहत और अन्य ऑपरेशंस से जुड़े पहलुओं को भी शामिल किया जाता है। इस बार के अभ्यास में करीब 19 देशों की नौसेनाएं हिस्सा ले रही हैं, जिनमें 20 से ज्यादा युद्धपोत, एयरक्राफ्ट और 6000 से अधिक सैन्य कर्मी शामिल हैं।

यह अभ्यास ऑस्ट्रेलिया के डार्विन से लेकर कैर्न्स और जर्विस बे तक फैले समुद्री क्षेत्र में हो रहा है। खास बात यह भी है कि इस बार का आयोजन रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी की 125वीं वर्षगांठ के मौके पर हो रहा है। (INS Nilgiri Kakadu 2026)

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समुद्र में दिखा आईएनएस नीलगिरी का कौशल

आईएनएस नीलगिरी इस समय वेस्टर्न पैसिफिक क्षेत्र में ओवरसीज डिप्लॉयमेंट पर है और इसी दौरान उसने एक्सरसाइज काकाडू के सी फेज में भाग लिया। इस चरण में जहाजों के बीच तालमेल से नेविगेशन, जटिल समुद्री अभ्यास और विभिन्न युद्धक रणनीतियों का अभ्यास किया जाता है।

इस दौरान आईएनएस नीलगिरी ने कई देशों के युद्धपोतों के साथ मिलकर अभ्यास किया। इनमें ऑस्ट्रेलिया का एचएमएएस चूल्स, मलेशिया का केडी लेकिर, फिलीपींस का बीआरपी डिएगो सिलांग और थाईलैंड का एचटीएमएस नरेसुआन शामिल रहे। इन सभी के साथ मिलकर भारतीय नौसेना ने समुद्र में जॉइंट ऑपरेशन की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।

21 मार्च को सिडनी हार्बर में आयोजित फ्लीट रिव्यू इस अभ्यास का एक अहम हिस्सा रहा, जिसमें 19 देशों के 31 युद्धपोत शामिल हुए। यह पिछले एक दशक में सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक जमावड़ा माना जा रहा है। आईएनएस नीलगिरी भी इस भव्य आयोजन का हिस्सा बनी, जिससे भारत की मौजूदगी को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिली। (INS Nilgiri Kakadu 2026)

इंडो-पैसिफिक में बढ़ती भारत की भूमिका

आईएनएस नीलगिरी की यह भागीदारी सिर्फ एक अभ्यास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक सोच को भी दर्शाती है। आज के समय में यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार और सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण बन चुका है।

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भारत लगातार इस क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ा रहा है और विभिन्न देशों के साथ मिलकर समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। काकाडू जैसे अभ्यास भारत को अन्य देशों के साथ बेहतर तालमेल बनाने का मौका देते हैं। (INS Nilgiri Kakadu 2026)

इस अभ्यास में वियतनाम, मलेशिया, फिलीपींस और थाईलैंड जैसे आसियान देशों की भागीदारी भी इस बात का संकेत है कि क्षेत्रीय सहयोग को कितना महत्व दिया जा रहा है। इसके अलावा क्वाड देशों के बीच भी इस तरह के अभ्यास रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करते हैं।

आईएनएस नीलगिरी की वेस्टर्न पैसिफिक में मौजूदगी यह भी दिखाती है कि भारतीय नौसेना अब लंबी दूरी तक ऑपरेशन करने में सक्षम है। इसे ही ब्लू वॉटर नेवी कहा जाता है, जहां एक देश की नौसेना अपने समुद्री क्षेत्र से दूर जाकर भी प्रभावी ऑपरेशन कर सकती है। (INS Nilgiri Kakadu 2026)

आईएनएस तारागिरी से और बढ़ेगी ताकत

जहां एक ओर आईएनएस नीलगिरी विदेश में भारत की ताकत दिखा रही है, वहीं नीलगिरी क्लास के चौथे फ्रिगेट आईएनएस तारागिरी को भारतीय नौसेना 4 अप्रैल को अपने बेड़े में शामिल करने जा रही है।

यह जहाज प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाया गया चौथा स्टेल्थ फ्रिगेट है, जिसे मुंबई की मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने तैयार किया है। करीब 6670 टन वजनी यह युद्धपोत आधुनिक तकनीक से लैस है और इसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरण लगे हैं।

आईएनएस तारागिरी में सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर सिस्टम और आधुनिक कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगे हैं। यह जहाज युद्ध के अलावा मानवीय सहायता और आपदा राहत जैसे कार्यों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। (INS Nilgiri Kakadu 2026)

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