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‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ से ग्लोबल डिप्लोमैट तक, कैसे IFR-Milan 2026 से भारतीय नौसेना लिख रही है मैरीटाइम डिप्लोमेसी की नई कहानी

इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (आईएफआर) 2026 और एक्सरसाइज मिलन इसी बदलती सोच की झलक हैं। इंडियन नेवी आज “फर्स्ट रिस्पॉन्डर” यानी संकट के समय सबसे पहले पहुंचने वाली ताकत भी है और “लास्टिंग एलाय” यानी भरोसेमंद साझेदार भी...

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📍नई दिल्ली/विशाखापत्तनम | 16 Feb, 2026, 1:44 PM

IFR-Milan 2026: हिंद महासागर में जब कोई जहाज मुसीबत में फंसता है, तो कई बार सबसे पहले जो नाम याद आता है, वह है भारतीय नौसेना। बीते कुछ सालों में समुद्र में हुई कई घटनाओं ने यह साबित किया है कि अब भारतीय नौसेना केवल अपने तटों की सुरक्षा नहीं करती बल्कि वह समुद्री कूटनीति यानी मैरिटाइम डिप्लोमेसी का वैश्विक साझेदार भी बन चुकी है।

इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (आईएफआर) 2026 और एक्सरसाइज मिलन इसी बदलती सोच की झलक हैं। इंडियन नेवी आज “फर्स्ट रिस्पॉन्डर” यानी संकट के समय सबसे पहले पहुंचने वाली ताकत भी है और “लास्टिंग एलाय” यानी भरोसेमंद साझेदार भी। (IFR-Milan 2026)

IFR-Milan 2026: कैसे भारत ने मैरिटाइम डिप्लोमेसी को किया मजबूत

जनवरी 2025 में अंडमान सागर में जब एक मलेशियाई झंडे वाला सेलिंग वेसल, जिस पर चीनी क्रू सवार था, उसका ईंधन खत्म हो गया। इस संकट की घड़ी में भारतीय नौसेना सहारा बनी और अपने वॉरशिप आईएनएस किर्च के जरिए मुश्किल हालात में करीब 1,000 लीटर फ्यूल ट्रांसफर किया, ताकि वह जहाज सुरक्षित बंदरगाह तक पहुंच सके।

लेकिन यह केवल एक लॉजिस्टिक ऑपरेशन नहीं था, बल्कि मैरीटाइम डिप्लोमेसी का एक बड़ा उदाहरण था। जून 2025 में केरल तट के पास एमवी वान हाई 503 नामक जहाज में आग लग गई। हालात बेहद मुश्किल थे। आईएनएस गरुड़ से सीकिंग हेलीकॉप्टर ने रेस्क्यू टीम को सीधे जलते जहाज पर उतारा। बाद में चीन के दूतावास के प्रवक्ता ने सोशल मीडिया पर इंडियन नेवी और मुंबई कोस्ट गार्ड का सार्वजनिक तौर पर धन्यवाद किया। (IFR-Milan 2026)

चक्रवात दित्वाह में भारत बना श्रीलंका का पहला सहारा

भारत की मैरीटाइम डिप्लोमेसी का एक शानदार उदाहरण पिछले साल नवंबर में देखने को मिला। नवंबर 2025 के आखिरी हफ्ते में हिंद महासागर में एक शक्तिशाली तूफान धीरे-धीरे श्रीलंका की ओर बढ़ रहा था। 27 से 29 नवंबर के बीच इस चक्रवात दित्वाह ने श्रीलंका में लैंडफॉल किया। कुछ ही घंटों में तेज हवाओं, मूसलाधार बारिश और समुद्री लहरों ने हालात बिगाड़ दिए। इससे 600 से अधिक मौतें हुईं, हजारों लोग बेघर हुए, और सड़कें, पुल तथा अन्य कनेक्टिविटी पूरी तरह प्रभावित हो गई। श्रीलंका सरकार ने तत्काल मदद की अपील की, और भारत ने फर्स्ट रिस्पॉन्डर के तौर पर तुरंत कार्रवाई की।

भारतीय नौसेना ने तुरंत ऑपरेशन सागर बंधु शुरू किया। चक्रवात के लैंडफॉल के दिन ही भारतीय नौसेना के दो जहाज आईएनएस विक्रांत और आईएनएस उदयगिरी जो उस दिन श्रीलंका नेवी के इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू के चलते कोलंबो में मौजूद थे। इन जहाजों को तुरंत राहत कार्य के लिए टास्क किया गया। 28 नवंबर को ही 9.5 टन इमरजेंसी ड्राई रेशन श्रीलंकाई अधिकारियों को सौंपा गया। विक्रांत ने अपने हेलीकॉप्टर और संसाधनों से शुरुआती बचाव और सप्लाई में मदद की। (IFR–Milan 2026)

इसके बाद भारतीय सेना ने अतिरिक्त जहाजों की तैनाती करते हुए आईएनएस सुकन्या और आईएनएस घड़ियाल के साथ तीन लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी को तैनात किया गया। ये तमिलनाडु से 1,000 टन से अधिक राहत सामग्री लेकर कोलंबो और त्रिंकोमाली पहुंचे। इस दौरान नौसेना के जहाजों ने 1,000 टन से ज्यादा राहत सामग्री (ड्राई रेशन्स, टेंट, टार्पॉलिन, हाइजीन किट्स, कपड़े, वॉटर प्यूरीफिकेशन किट्स, दवाइयां, सर्जिकल इक्विपमेंट और स्पेशलाइज्ड इक्विपमेंट) पहुंचाई। इसके बाद श्रीलंका नेवी ने इस साल जनवरी में आईएनएस विक्रांत और आईएनएस उदयगिरी समेत 8 जहाजों को सम्मानित किया, क्योंकि वे सबसे पहले राहत में शामिल हुए थे। (IFR–Milan 2026)

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IFC-IOR जो कभी सोता नहीं

गुरुग्राम स्थित इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर– इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR) इस नई समुद्री सोच का केंद्र है। दिसंबर 2018 में स्थापित यह सेंटर हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों की निगरानी करता है। यहां 15 से अधिक देशों के इंटरनेशनल लायजन ऑफिसर तैनात हैं। 57 से ज्यादा मैरिटाइम सिक्योरिटी कंस्ट्रक्ट और 25 पार्टनर देश इसके साथ जुड़े हैं।

इसका काम है समुद्री गतिविधियों पर नजर रखना, संदिग्ध मूवमेंट की जानकारी साझा करना और संकट के समय तुरंत प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना। यही वजह है कि हिंद महासागर में कोई भी डिस्ट्रेस सिग्नल अनसुना नहीं रहता और यह सिर्फ एक देश की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि साझा जवाबदेही है। भारतीय नौसेना खुद को एक “कोलैबोरेटिव हब” के तौर पर में स्थापित कर चुकी है। (IFR–Milan 2026)

‘सागर’ विजन से ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ तक

2016 के बाद से भारत की समुद्री कूटनीति का आधार रहा है सागर विजन (सिक्युरिटी एंड ग्रोथ फोर ऑल इन द रीजन)। इसका मकसद है क्षेत्र में सभी देशों की सुरक्षा और विकास सुनिश्चित करना।

मालदीव के जल संकट में राहत पहुंचाना हो, श्रीलंका में चक्रवात के बाद ऑपरेशन सागर बंधु चलाना हो या मोजाम्बिक को फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट देना, भारत ने बार-बार साबित किया है कि वह संकट की घड़ी में सबसे पहले पहुंचने वाला देश है। वियतनाम को आईएनएस किर्पान उपहार में देना सिर्फ सैन्य मदद नहीं, बल्कि रणनीतिक भरोसे का प्रतीक था। (IFR–Milan 2026)

सागर से महासागर विजन तक

MAHASAGAR यानी म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजन भारत की मैरीटाइम डिप्लोमेसी का नया और बड़ा विजन है। जिसका एलान पीएम नरेंद्र मोदी ने 12 मार्च 2025 को मॉरीशस की यात्रा के दौरान किया था। खास बात यह है कि इसी जगह पर 2015 में उन्होंने SAGAR विजन की शुरुआत की थी।

जहां सागर का फोकस मुख्य रूप से हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा और सहयोग पर था। लेकिन बदलते वैशिक हालात को देखते हुए भारत ने इसे और व्यापक रूप दिया, जिसे महासागर कहा गया। इसका उद्देश्य सिर्फ समुद्री सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक विकास, तकनीकी सहयोग और पर्यावरणीय संतुलन को भी साथ लेकर चलना है।

प्रधानमंत्री ने इसे “ग्लोबल साउथ” यानी एशिया, अफ्रीका, कैरेबियन और पैसिफिक के विकासशील देशों के लिए एक विजन बताया। इसके तहत भारत इन देशों के साथ व्यापार बढ़ाने, क्षमता निर्माण, सस्ती ऋण सुविधा, अनुदान और तकनीकी सहायता देने पर जोर देगा। साथ ही समुद्री सुरक्षा, आपदा राहत, समुद्री निगरानी और संयुक्त अभ्यास जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ेगा। (IFR–Milan 2026)

मॉरीशस के साथ समझौते में ईईजेड सुरक्षा, पुलिस अकादमी और मैरिटाइम इंफॉर्मेशन सेंटर जैसे कदम शामिल रहे। यह दिखाता है कि भारत सिर्फ सुरक्षा साझेदार नहीं, बल्कि विकास सहयोगी भी बनना चाहता है। (IFR–Milan 2026)

इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026: केवल परेड नहीं, बल्कि ताकत का संदेश

अक्सर लोग फ्लीट रिव्यू को सिर्फ जहाजों की परेड समझ लेते हैं। लेकिन यह मैरीटाइम डिप्लोमेसी का बड़ा प्लेटफॉर्म है। भारत का पहला प्रेसिडेंशियल फ्लीट रिव्यू 1953 में हुआ था, जब राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 33 जहाजों का निरीक्षण किया। उस समय भारतीय नाविक पहली बार अपने राष्ट्राध्यक्ष को सलामी दे रहे थे। आज यह सफर आज दर्जनों देशों की भागीदारी तक पहुंच चुका है।

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2001 में मुंबई में पहला इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू हुआ, जिसमें 20 विदेशी नौसेनाएं शामिल हुईं। 2016 में विशाखापत्तनम में आयोजित आईएफआर में लगभग 50 देशों की भागीदारी रही और करीब 100 जहाज शामिल हुए। यह संकेत था कि भारत अब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में केंद्रीय भूमिका निभा रहा है। (IFR–Milan 2026)

वहीं आईएफआर 2026 इसी परंपरा को आगे बढ़ाएगा। 15 से 25 फरवरी तक विशाखापत्तनम एक ऐतिहासिक समुद्री आयोजन का केंद्र बनने जा रहा है। इस दौरान यहां तीन बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम एक साथ आयोजित हो रहे हैं, जिनमें इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (आईएफआर) 2026, एक्सरसाइज मिलन 2026 और इंडियन ओशन नेवल सिम्पोजियम (आईओएनएस) के नौसेना प्रमुखों का 9वां सम्मेलन है। इन तीनों आयोजनों को मिलाकर “मैरीटाइम कन्वर्जेंस 2026” या “विजाग ट्रिफेक्टा” कहा जा रहा है। यह भारतीय नौसेना की अब तक की सबसे बड़ी समुद्री कूटनीतिक पहल मानी जा रही है। (IFR–Milan 2026)

यह पूरा आयोजन भारत के महासागर विजन के तहत किया जा रहा है। “यूनाइटेड थ्रू ओशन्स” थीम के तहत दुनिया की नौसेनाएं एक मंच पर आ रही हैं, जहां सुरक्षा, सहयोग, क्षमता निर्माण और टिकाऊ विकास पर चर्चा और अभ्यास होंगे। कुल 72 देशों की भागीदारी तय हुई है। 71 युद्धपोतों की मौजूदगी के साथ यह आयोजन वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती समुद्री भूमिका को दिखाएगा। अमेरिका, रूस, जापान, जर्मनी, फिलीपींस, यूएई, ईरान, दक्षिण अफ्रीका, घाना, थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका जैसे देशों के जहाज इसमें शामिल हो रहे हैं। पहली बार जर्मनी, फिलीपींस और यूएई के युद्धपोत भी भाग ले रहे हैं। (IFR–Milan 2026)

इन आयोजनों में सबसे प्रमुख है 18 फरवरी को होने वाला इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू। इस दिन तीनों सेनाओं की कमांडर इन चीफ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू समुद्र में खड़े जहाजों की समीक्षा करेंगी। वे आईएनएस सुमेधा पर सवार होकर प्रेसीडेंशियल याच्ट के रूप में फ्लीट का निरीक्षण करेंगी। कुल 71 जहाज छह कतारों में खड़े होंगे। इनमें आईएनएस विक्रांत जैसे स्वदेशी विमानवाहक पोत, विशाखापत्तनम श्रेणी के डेस्ट्रॉयर, नीलगिरि श्रेणी के स्टेल्थ फ्रिगेट और अरनाला श्रेणी के एंटी सबमरीन वॉरशिप शामिल रहेंगे। (IFR–Milan 2026)

एक्सरसाइज मिलन 2026: दुनिया की नौसेनाओं का महासागर में संगम

विशाखापत्तनम में ही 19 फरवरी को भारतीय नौसेना का प्रमुख मल्टीलेटरल नौसैनिक अभ्यास एक्सरसाइज मिलन 2026 का आयोजन होगा। यह मिलन का 13वां संस्करण है और 1995 से हर दो साल में आयोजित होता रहा है। इस बार यह आयोजन इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026 और इंडियन ओशन नेवल सिम्पोजियम (आईओएनएस) के साथ होगा। तीनों कार्यक्रम मिलकर “मैरिटाइम कन्वर्जेंस 2026” का रूप ले रहे हैं। (IFR–Milan 2026)

इस बार इसकी थीम है – “कैमराडरी, कोऑपरेशन, कोलैबोरेशन”, यानी भाईचारा, सहयोग और साझा काम। इस बार 65 से ज्यादा देशों की नौसेनाएं भाग ले रही हैं। 19 से अधिक विदेशी युद्धपोत विशाखापत्तनम पहुंच रहे हैं। अमेरिका, रूस, जापान, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, फिलीपींस, यूएई, श्रीलंका जैसे कई देश इसमें शामिल होंगे। यह अब तक का सबसे बड़ा एडिशन माना जा रहा है।

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एक्सरसाइज मिलन 2026 को दो हिस्सों हार्बर फेज और सी फेज में बांटा गया है। हार्बर फेज 19 फरवरी से शुरू होगा और तट पर आयोजित किया जाएगा। इसका मकसद आपसी भरोसा बढ़ाना और विचारों का आदान-प्रदान करना है। इसमें मिलन विलेज बनाया जाएगा, जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेल प्रतियोगिताएं, हस्तशिल्प स्टॉल और फूड फेस्टिवल होंगे। (IFR–Milan 2026)

समुद्री सुरक्षा, ड्रोन खतरे, साइबर सुरक्षा, आपदा राहत और समुद्री डकैती जैसे विषयों पर सेमिनार और विशेषज्ञ बैठकें होंगी। यह चरण नौसेनाओं के बीच विश्वास और समझ को मजबूत करेगा।

वहीं, 21 से 25 फरवरी के बीच बंगाल की खाड़ी में मिलन अभ्यास का सबसे अहम और चुनौतीपूर्ण हिस्सा आयोजित होगा, जिसे सी फेज कहा जाता है। यही वह चरण है जहां अलग-अलग देशों की नौसेनाएं समुद्र में उतरकर वास्तविक परिस्थितियों जैसी स्थितियों में संयुक्त ऑपरेशन का अभ्यास करेंगी। (IFR–Milan 2026)

इस दौरान युद्धपोत, पनडुब्बियां, नौसैनिक हेलीकॉप्टर और विशेष बल एक साथ काम करेंगे। पनडुब्बी रोधी युद्ध अभ्यास में समुद्र के नीचे छिपी पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने की रणनीति पर काम किया जाएगा। हवाई रक्षा अभ्यास के तहत दुश्मन के हवाई हमलों से जहाजों की सुरक्षा की ट्रेनिंग दी जाएगी।

सर्च एंड रेस्क्यू मिशन के जरिए समुद्र में फंसे लोगों को बचाने की प्रक्रिया का अभ्यास होगा, जबकि एंटी-पाइरेसी ऑपरेशन में समुद्री डकैती से निपटने की संयुक्त कार्रवाई दिखाई जाएगी। इसके अलावा ड्रोन और अन्य असिमेट्रिक खतरे, यानी छोटे लेकिन खतरनाक हमलों से बचाव की विशेष ट्रेनिंग भी दी जाएगी। आपदा राहत सिमुलेशन के माध्यम से तूफान या समुद्री दुर्घटना जैसी परिस्थितियों में राहत और सहायता पहुंचाने का अभ्यास किया जाएगा।

इस पूरे चरण का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग देशों की नौसेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना है, ताकि जरूरत पड़ने पर वे एकजुट होकर तेजी और प्रभावी तरीके से कार्रवाई कर सकें। यही इंटरऑपरेबिलिटी समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाती है। (IFR–Milan 2026)

क्यों है यह महत्वपूर्ण?

एक्सरसाइज मिलन 2026 केवल सैन्य अभ्यास नहीं है, बल्कि मैरीटाइम डिप्लोमेसी का बड़ा मंच है। इससे भारत की भूमिका इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में मजबूत होती है। यह आयोजन दिखाता है कि भारत समुद्र को प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि सहयोग का क्षेत्र मानता है। मिलन 2026 भाईचारे से शुरू होकर साझा सुरक्षा तक पहुंचने की एक बड़ी पहल है।

सीधे शब्दों में कहें, तो अगर आईएफआर समुद्र में खड़े जहाजों के जरिए शांति और भरोसे का संदेश देता है, तो मिलन एक्सरसाइज उसी भरोसे को समुद्र में मिलकर अभ्यास करके मजबूत करती है। यानी कि आईएफआर शांत माहौल में दोस्त बनाता है, जबकि मिलन एक्सरसाइज समुद्र में साथ काम करके उस दोस्ती को व्यवहार में साबित करती है। (IFR–Milan 2026)

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