📍नई दिल्ली | 20 Mar, 2026, 10:08 PM
AI FOD Detection System: कई बार एयरक्राफ्ट कैरियर के फ्लाइट डेक पर छोटी-छोटी चीजें जैसे स्क्रू, बोल्ट, धातु के टुकड़े या रबर के हिस्से पड़े रह जाते हैं। देखने में ये बेहद मामूली लगते हैं, लेकिन यही चीजें किसी बड़े हादसे की वजह बन सकती हैं। ऐसे ही खतरों से निपटने के लिए अब भारतीय नौसेना ने एक नई हाई-टेक तकनीक की ओर कदम बढ़ाया है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से इन खतरनाक चीजों को तुरंत पहचान लिया जाएगा।
भारत की डिफेंस टेक कंपनी स्काईलार्क लैब्स ने हाल ही में भारतीय नौसेना की एयर ऑपरेशन क्षमता को और मजबूत बनाने के लिए नौसेना के एक एयरक्राफ्ट कैरियर पर फिक्स्ड फॉरेन ऑब्जेक्ट डेब्रिस यानी एफओडी डिटेक्शन सिस्टम का सफल प्रदर्शन किया।
इस सिस्टम की खास बात यह है कि अब जहाज के फ्लाइट डेक पर छोटी-छोटी खतरनाक चीजों को पहचानने के लिए इंसानों को बार-बार चेक नहीं करना पड़ेगा। यह काम अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई खुद करेगा और वह भी लगातार, बिना रुके। (AI FOD Detection System)
AI FOD Detection System: क्या होता है एफओडी और क्यों है यह इतना खतरनाक
एफओडी का मतलब होता है फॉरेन ऑब्जेक्ट डेब्रिस। यानी ऐसी छोटी चीजें जो फ्लाइट डेक या रनवे पर पड़ी रह जाती हैं। इनमें स्क्रू, बोल्ट, धातु के टुकड़े, रबर के हिस्से या छोटे टूल्स शामिल हो सकते हैं।
ये चीजें देखने में छोटी लगती हैं, लेकिन इनसे बड़ा नुकसान हो सकता है। अगर ये जेट इंजन के अंदर चली जाएं तो इंजन खराब हो सकता है। इससे विमान को नुकसान पहुंच सकता है और लाखों-करोड़ों का नुकसान हो सकता है और उड़ान भी रद्द करनी पड़ सकती है। यहां तक कि पायलट की जान भी खतरे में पड़ सकती है। (AI FOD Detection System)
इसके अलावा इससे टायर फट सकते हैं या डेक पर काम कर रहे लोगों को चोट लग सकती है। एयरक्राफ्ट कैरियर पर यह खतरा और बढ़ जाता है, क्योंकि वहां समुद्र का नमक, तेज हवा, जहाज की हलचल और लगातार उड़ानें होती रहती हैं। (AI FOD Detection System)
पहले कैसे होता था चेकिंग का काम
अब तक इन खतरों से बचने के लिए सेलर्स को फ्लाइट ऑपरेशन से पहले डेक पर पैदल चलकर जांच करनी पड़ती थी। इसे फॉरेन ऑब्जेक्ट डेब्रिस वॉक कहा जाता है।
यह प्रक्रिया समय लेने वाली होती थी और इसमें जोखिम भी रहता था। अगर किसी छोटी चीज को नजरअंदाज कर दिया गया, तो बड़ा हादसा हो सकता था। (AI FOD Detection System)
अब AI करेगा पूरा काम
स्काईलार्क लैब्स के इस नये सिस्टम ने इस पूरी प्रक्रिया को बदल दिया है। इसमें डेक पर खास जगहों पर कैमरे लगाए जाते हैं, जो लगातार निगरानी करते रहते हैं।
जैसे ही कोई संदिग्ध चीज दिखाई देती है, सिस्टम तुरंत उसे पहचान लेता है और उसकी सटीक लोकेशन डेक पर काम कर रहे स्टाफ को भेज देता है। इससे तुरंत कार्रवाई की जा सकती है।
यह सिस्टम सिर्फ चीजों को पहचानता ही नहीं, बल्कि उन्हें अलग-अलग कैटेगरी में भी बांटता है, जैसे मेटल, रबर या अन्य सामग्री। इससे बाद में जांच और मेंटेनेंस प्लान बनाने में भी मदद मिलती है। (AI FOD Detection System)
कठिन परिस्थितियों में भी काम करने की क्षमता
एयरक्राफ्ट कैरियर का माहौल बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। यहां नमक का असर, तेज धूप, परछाइयां, जहाज की वाइब्रेशन और लगातार मूवमेंट रहता है। इस सिस्टम को खास तौर पर इन सभी परिस्थितियों में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह एआई सिस्टम धीरे-धीरे सीखता भी रहता है और अलग-अलग परिस्थितियों में खुद को बेहतर बनाता है। (AI FOD Detection System)
रियल टाइम में काम, बिना ऑपरेशन रोके
इस डेमोंस्ट्रेशन के दौरान सिस्टम ने रियल टाइम में डेक की निगरानी की और बिना किसी रुकावट के उड़ान संचालन चलता रहा। जैसे ही कोई डेब्रिस मिला, सिस्टम ने तुरंत उसकी जानकारी दी और टीम ने तुरंत उसे हटा दिया। इसके अलावा, इस सिस्टम की एक और खास बात यह है कि यह समय के साथ और ज्यादा स्मार्ट होता जाता है।
यह डेक पर बार-बार गिरने वाली चीजों के पैटर्न को पहचान सकता है। इससे यह पता लगाया जा सकता है कि किस जगह पर ज्यादा खतरा है और किस वजह से डेब्रिस बन रहा है। इससे भविष्य में हादसों को रोकने के लिए पहले से तैयारी की जा सकती है। (AI FOD Detection System)
ऑटोमैटिक रिपोर्ट और आसान मैनेजमेंट
पहले जहां हर चीज की मैन्युअल रिपोर्ट बनानी पड़ती थी, अब यह सिस्टम खुद ही रिपोर्ट तैयार कर सकता है। इससे समय बचता है और ऑपरेशन टीम को सीधे काम की जानकारी मिलती है।
स्काईलार्क लैब्स के सीईओ अमरजीत सिंह ने कहा कि एयरक्राफ्ट कैरियर सबसे कठिन ऑपरेशन वाले वातावरण में से एक है। इस डेमोंस्ट्रेशन ने साबित किया है कि उनका सिस्टम ऐसे माहौल में भी लगातार निगरानी कर सकता है और सही समय पर सटीक जानकारी दे सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह सिस्टम सिर्फ एक जगह तक सीमित नहीं है। यह एयरफील्ड, एयरपोर्ट और अन्य जगहों पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। (AI FOD Detection System)
वहीं, इस तकनीक के आने से भारतीय नौसेना की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी। अब मैन्युअल जांच पर निर्भरता कम होगी और गलतियों की संभावना भी घटेगी। इसके साथ ही उड़ानों की गति भी बढ़ सकती है, क्योंकि हर बार लंबी जांच की जरूरत नहीं होगी।
पहले 2023-24 में इस तकनीक का मोबाइल वर्जन आईएनएस विक्रमादित्य पर टेस्ट किया जा चुका है और iDEX प्रोजेक्ट के तहत कंपनी ने भारतीय नौसेना के साथ मिलकर काम भी किया था। अब इसका फिक्स्ड वर्जन भी सफलतापूर्वक साबित हो गया है, जो जमीन पर बने एयरपोर्ट के साथ-साथ एयरक्राफ्ट कैरियर जैसे समुद्री प्लेटफॉर्म पर भी आसानी से काम कर सकता है। यही वजह है कि अब इस तकनीक के सामने वैश्विक स्तर पर भी बड़े मौके खुल गए हैं और आने वाले समय में इसे अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देशों की नौसेनाओं के एयरक्राफ्ट कैरियर पर भी इस्तेमाल के लिए निर्यात किया जा सकता है। (AI FOD Detection System)

