📍नई दिल्ली | 12 Jan, 2026, 1:16 PM
Rudra Brigade Vs IBG: भारतीय सेना पूर्वी सीमा पर एक बड़ा बदलाव करने जा रही है। चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर लगातार बनी तनातनी के बीच अब सेना अपने सबसे अहम स्ट्राइक कोर में चार इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप यानी आईबीजी बनाने की तैयारी कर रही है। यह बदलाव केवल आर्गेनाइजेशनल नहीं है, बल्कि युद्ध लड़ने के तरीके में भी एक बड़ा शिफ्ट माना जा रहा है। वहीं भारतीय सेना ने रूद्र ब्रिगेड भी खड़ी की हैं। आइए जानते हैं दोनों में क्या है अंतर…
सेना के वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के पनागढ़ में स्थित 17वीं माउंटेन स्ट्राइक कोर से इन चार आईबीजी को खड़ा किया जाएगा। यह कोर भारत का पहला माउंटेन स्ट्राइक कोर है, जिसका सीधा फोकस चीन सीमा पर है। सरकार से अंतिम मंजूरी मिलते ही इस योजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। (Rudra Brigade Vs IBG)
Rudra Brigade Vs IBG: क्यों जरूरी हो गए हैं आईबीजी
पिछले एक दशक में चीन ने अपनी सेना की पूरी तरह से रिस्ट्रक्चिरिंग कर दी है। उसने बड़े और भारी डिवीजन सिस्टम को छोड़कर छोटे, तेज और ज्यादा घातक कॉम्बाइंड आर्म्स ब्रिगेड अपनाए हैं। इन यूनिट्स में टैंक, आर्टिलरी, एयर डिफेंस, ड्रोन और सपोर्ट सिस्टम एक साथ होते हैं, जिससे वे बहुत कम समय में कार्रवाई कर सकते हैं।
भारतीय सेना भी अब इसी दिशा में आगे बढ़ रही है। सेना का मानना है कि आज के दौर में पूरे कोर या डिवीजन को मूव करने में बहुत समय लगता है। एक कोर में करीब एक लाख सैनिक होते हैं और उसे पूरी तरह तैनात करने में कई दिन या हफ्ते लग सकते हैं। इसके उलट आईबीजी जैसे छोटे फॉर्मेशन कुछ ही घंटों में तैयार हो सकते हैं। (Rudra Brigade Vs IBG)
Rudra Brigade Vs IBG: 17वीं माउंटेन स्ट्राइक कोर क्यों है अहम
17वीं माउंटेन स्ट्राइक कोर भारतीय सेना के चार स्ट्राइक कोरों में से एक है। बाकी तीन स्ट्राइक कोर मथुरा, अंबाला और भोपाल में स्थित हैं, जिनका मुख्य फोकस पश्चिमी मोर्चा यानी पाकिस्तान है। 17वीं कोर इकलौती ऐसी कोर है जिसे पूरी तरह चीन सीमा को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
शुरुआत में इस कोर के पास केवल एक डिवीजन थी, लेकिन 2021 के बाद इसे और मजबूत किया गया। अब इसके पास दो डिवीजन हैं – 59 डिवीजन और 23 डिवीजन। इन्हीं दोनों डिवीजनों से चार आईबीजी बनाने की योजना पर काम चल रहा है। (Rudra Brigade Vs IBG)
चार आईबीजी कैसे बनाए जाएंगे
सूत्रों के मुताबिक, हर आईबीजी में पांच हजार से ज्यादा सैनिक होंगे। इनका नेतृत्व मेजर जनरल रैंक का अधिकारी करेगा। खास बात यह है कि इन आईबीजी में पारंपरिक ब्रिगेड कमांडर नहीं होंगे। यानी कमांड स्ट्रक्चर को और ज्यादा सरल और तेज बनाया जा रहा है।
हर आईबीजी में पैदल सेना की बटालियनें, आर्टिलरी रेजिमेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स कोर, कॉम्बैट इंजीनियर्स, आर्मी सर्विस कोर और फील्ड हॉस्पिटल जैसी यूनिट्स शामिल होंगी। इसका मतलब यह है कि आईबीजी पूरी तरह आत्मनिर्भर होंगी और उन्हें लड़ाई के दौरान बाहर से ज्यादा मदद की जरूरत नहीं पड़ेगी। (Rudra Brigade Vs IBG)
सपोर्ट और लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था
आईबीजी को पूरी तरह अलग-थलग यूनिट के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। जरूरत पड़ने पर ये कोर मुख्यालय के तहत मौजूद दूसरी यूनिट्स से लॉजिस्टिक्स और फायर सपोर्ट ले सकेंगी। इसके अलावा, कोर मुख्यालय के तहत एक अलग ग्रुप भी बनाया जा सकता है, जो आईबीजी को अतिरिक्त आर्टिलरी और फायर सपोर्ट देगा।
सेना के अंदर अभी इन व्यवस्थाओं पर चर्चा चल रही है और अंतिम ढांचा लागू होने से पहले इसमें कुछ बदलाव भी हो सकते हैं। (Rudra Brigade Vs IBG)
सेना के बड़े रिस्ट्रक्चरिंग प्लान का हिस्सा हैं आईबीजी
इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप यानी आईबीजी का विचार पहली बार 2019 के आसपास सामने आया था। उस समय सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा था कि सेना को ऐसे फॉर्मेशन चाहिए, जो कम समय में मूव कर सकें और दुश्मन को चौंकाते हुए जवाब दे सकें। चार आईबीजी बनाने की यह योजना सेना के बड़े रिस्ट्रक्चिरिंग प्लान का हिस्सा है। पिछले कुछ सालों में सेना ने भैरव लाइट कमांडो बटालियन, रूद्र ब्रिगेड, दिव्यास्त्र बैटरी और शक्तिबाण यूनिट जैसी कई नए स्ट्रक्चर खड़े किए हैं। (Rudra Brigade Vs IBG)
रूद्र ब्रिगेड को भी आईबीजी जैसी ही सोच पर बनाया गया है, लेकिन वह आकार में छोटी और ज्यादा टेक्नोलॉजी-ड्रिवन मानी जाती है। आईबीजी डिवीजन से छोटी लेकिन ब्रिगेड से बड़ी होगी। यानी आईबीजी और रूद्र ब्रिगेड एक-दूसरे के पैरेलल हैं।
लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि रूद्र ब्रिगेड और आईबीजी क्या अलग-अलग हैं या एक ही सिस्टम के अलग नाम हैं। सच्चाई यह है कि दोनों ही एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, लेकिन उनकी भूमिका, आकार और इस्तेमाल में फर्क है। रूद्र ब्रिगेड को आईबीजी कॉन्सेप्ट का विकसित और जमीनी रूप माना जा रहा है। (Rudra Brigade Vs IBG)
Rudra Brigade Vs IBG: रूद्र ब्रिगेड क्या है
रूद्र ब्रिगेड को भारतीय सेना का नया और ज्यादा आधुनिक रूप माना जा रहा है। इसका नाम भगवान रुद्र से लिया गया है, जो विनाश और पुनर्निर्माण के प्रतीक माने जाते हैं। सेना के मुताबिक, यह ब्रिगेड भविष्य की जंग को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
रूद्र ब्रिगेड असल में आईबीजी की सोच को और आगे ले जाती है। इसे ज्यादा कॉम्पैक्ट, ज्यादा तेज और ज्यादा टेक्नोलॉजी-ड्रिवन बनाया गया है।
एक रूद्र ब्रिगेड में लगभग तीन हजार सैनिक होते हैं और इसका नेतृत्व ब्रिगेडियर रैंक का अफसर करता है। यानी यह आईबीजी से छोटी यूनिट है, लेकिन मारक क्षमता के मामले में बेहद खतरनाक मानी जा रही है। (Rudra Brigade Vs IBG)
रूद्र ब्रिगेड की बनावट
रूद्र ब्रिगेड को पूरी तरह इंटीग्रेटेड यूनिट के तौर पर तैयार किया गया है। इसमें पैदल सेना, मैकेनाइज्ड इंफेंट्री, टैंक, तोपखाना, एयर डिफेंस, इंजीनियर्स, सिग्नल्स और लॉजिस्टिक्स सब कुछ एक साथ शामिल है।
इसके साथ ही रूद्र ब्रिगेड में ड्रोन यूनिट्स, इंटेलिजेंस-सर्विलांस-रिकॉनिसेंस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और साइबर सपोर्ट भी दिया गया है। यानी यह सिर्फ जमीन पर लड़ने वाली यूनिट नहीं, बल्कि मल्टी-डोमेन वॉरफेयर के लिए तैयार फॉर्मेशन है।
रूद्र ब्रिगेड की खास बात यह है कि इसकी बनावट इलाके के हिसाब से बदली जा सकती है। पहाड़ी इलाकों में ज्यादा इंफेंट्री और हल्का आर्टिलरी सिस्टम, जबकि मैदानी इलाकों में टैंक और सेल्फ-प्रोपेल्ड गन्स को ज्यादा महत्व दिया जाता है। (Rudra Brigade Vs IBG)
रूद्र ब्रिगेड क्यों लाई गई
मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना को यह साफ महसूस हुआ कि भविष्य की लड़ाई में तेजी से फैसले और तेज मूवमेंट सबसे अहम होंगे। ऑपरेशन सिंदूर में प्रिसीजन स्ट्राइक, ड्रोन और रियल टाइम इंटेलिजेंस की भूमिका ने सेना की सोच को और मजबूत किया।
इसके बाद 26 जुलाई 2025 को कारगिल विजय दिवस के मौके पर सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने रूद्र ब्रिगेड की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह ब्रिगेड सेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगी। (Rudra Brigade Vs IBG)
Rudra Brigade Vs IBG: रूद्र ब्रिगेड और आईबीजी में समानताएं
दोनों ही कॉन्सेप्ट का मकसद सेना को तेज़ और असरदार बनाना है। दोनों में अलग-अलग हथियार और यूनिट्स को एक ही कमांड के तहत लाया जाता है। दोनों ही सीमित समय में दुश्मन को जवाब देने की रणनीति पर आधारित हैं।
आईबीजी और रूद्र ब्रिगेड दोनों ही पुराने डिवीजन-केंद्रित सिस्टम से हटकर छोटे लेकिन ज्यादा ताकतवर ढांचे की सोच को आगे बढ़ाते हैं। (Rudra Brigade Vs IBG)
Rudra Brigade Vs IBG: दोनों में बड़ा फर्क क्या है
सबसे बड़ा फर्क इनके आकार और नेतृत्व में है। आईबीजी एक बड़ा फॉर्मेशन है, जिसमें पांच हजार से ज्यादा सैनिक होते हैं और इसका नेतृत्व मेजर जनरल करता है। वहीं रूद्र ब्रिगेड छोटी, ज्यादा फुर्तीली यूनिट है, जिसका नेतृत्व ब्रिगेडियर करता है।
दूसरा बड़ा फर्क टेक्नोलॉजी का है। रूद्र ब्रिगेड को ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर और साइबर क्षमताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। दोनों कोल्ड स्टार्ट/स्ट्राइक डॉक्ट्रिन से जुड़ी हैं, जो रैपिड ऑफेंसिव्स और बॉर्डर थ्रेट्स (चीन-पाकिस्तान) पर फोकस करती हैं। साथ ही दोनों मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स को सपोर्ट करते हैं। देका जाए तो रूद्र ब्रिगेड आईबीजी कॉन्सेप्ट से निकली है। और आईबीजी की सोच को रूद्र में आगे बढ़ाया गया है।
तीसरा फर्क यह है कि आईबीजी अभी भी बड़े स्तर पर लागू होने की प्रक्रिया में है, जबकि रूद्र ब्रिगेड को मौजूदा ब्रिगेड्स को बदलकर जमीन पर उतारा जा रहा है। (Rudra Brigade Vs IBG)



