📍नई दिल्ली | 15 Dec, 2025, 10:57 PM
Operation Sindoor Turkish Drone: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने भारत पर कई ड्रोन हमले किए थे। जिन्हें भारतीय सेना के एयर डिफेंस सिस्टम ने बडी सटीकता के साथ नाकाम कर दिया था। इनमें से पाकिस्तान को कई ड्रोन तुर्किए से मिले थे। इन्हें भी भारतीय सेना ने मार गिराया था। उन गिराए गए ड्रोनों में से एक ड्रोन का देखने का मौका रक्षा समाचार को भी मिला। तुर्की में बने इस आर्मेड ड्रोन को पाकिस्तान ने लाहौर से लॉन्च किया था। यह ड्रोन भारतीय वायुसेना के एक अहम सैन्य ठिकाने को निशाना बनाने के लिए भेजा गया था, लेकिन भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम एल-70 गनों ने इसे भारत की सीमा के भीतर घुसने से पहले ही गिरा दिया था।
हालांकि उस दौरान सेना के सूत्रों ने इस ड्रोन की पुष्टि थी, लेकिन ज्यादा जानकारी देने से परहेज बरता था। उसके बाद इस ड्रोन को फॉरेंसिक के लिए भेजा गया था। यह ड्रोन हाल ही में विजय दिवस के अवसर पर थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के दिल्ली स्थित आवास पर प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी में यह ड्रोन अन्य सैन्य स्मृतिचिह्नों के साथ रखा गया था।
पाकिस्तान ने यह ड्रोन हमला 8 मई को किया था, यानी उस दिन के करीब 24 घंटे बाद जब भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित आतंकी ठिकानों को तबाह किया था। इसके जवाब में पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और पंजाब के 36 शहरों और कस्बों को निशाना बनाते हुए 500 से ज्यादा हथियारबंद ड्रोन भारतीय सीमा में भेजे थे।
A Pakistani-origin Turkish drone was shot down by the Indian Army Air Defence during #OperationSindoor, as confirmed by @adgpi.
The drone, identified as a YIHA UAV, reportedly procured from Turkey, was launched from Lahore International Airport on 10 May with an intended target… pic.twitter.com/GloLrwguP0— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) December 15, 2025
भारतीय सेना और वायुसेना की मल्टी-लेयर्ड एयर डिफेंस सिस्टम ने इन हमलों का जवाब दिया और लगभग सभी ड्रोन हवा में ही मार गिराए गए। इन्हीं में से एक ड्रोन था यीहा-III (YIHA-III), जिसे तुर्की और पाकिस्तान ने मिलकर डेवलप किया है। यह एक कामिकेज या सुसाइड ड्रोन है, जिसे लोइटरिंग म्यूनिशन भी कहा जाता है।
यीहा-III ड्रोन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह किसी इलाके के ऊपर काफी समय तक मंडरा सकता है और सही टारगेट मिलने पर विस्फोट के साथ उस पर हमला कर देता है। अधिकारियों के मुताबिक, यह ड्रोन 10 मई को लाहौर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास से लॉन्च किया गया था और उस समय लगभग 2,000 मीटर की ऊंचाई पर उड़ रहा था।
ड्रोन में करीब 10 किलोग्राम विस्फोटक लोड किया गया था। इसका टारगेट पंजाब में जलंधर के पास आदमपुर में तैनात भारतीय वायुसेना का एस-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम था। कुछ अधिकारियों ने बताया कि निशाना होशियारपुर या जालंधर सेक्टर में स्थित सैन्य प्रतिष्ठान हो सकता था। हालांकि, यह ड्रोन अपने टारगेट तक पहुंचने में सफल नहीं हो सका और अमृतसर के पास भारतीय सेना की एयर डिफेंस यूनिट्स ने इसे इंटरसेप्ट कर गिरा दिया।
ड्रोन को गिराने के बाद भारतीय सेना के साइबर और तकनीकी विशेषज्ञों ने इसे पूरी तरह खोलकर जांच की। इस दौरान इसके फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम, प्री-फीडेड फ्लाइट पाथ, लॉन्च पॉइंट और टारगेट डेटा का विश्लेषण किया गया। सेना के अनुसार, जांच में यह स्पष्ट हो गया कि ड्रोन में फ्लाइट प्लान पहले से फीड किया गया था और इसे सीधे भारतीय सैन्य ठिकाने की ओर भेजा गया था।
A Pakistani-origin Turkish drone was successfully shot down by Indian Army Air Defence during #OperationSindoor.
The YIHA UAV, reportedly procured from Turkey, was launched from Lahore International Airport on 10 May with an intended target near Jalandhar, and was neutralised… pic.twitter.com/6FShn1jjXr— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) December 15, 2025
सेना के अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की जांच से दुश्मन की रणनीतिक और सामरिक मंशा को समझने में मदद मिलती है। ड्रोन में लगे कैमरे, इंफ्रारेड सेंसर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का डेटा भी सुरक्षित किया गया है।
इस दौरान यह भी सामने आया कि पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की में बने अन्य हथियारबंद ड्रोन भी इस्तेमाल किए थे। इनमें ‘सोंगार’ नाम का ड्रोन शामिल है, जिसे तुर्की की डिफेंस कंपनी एशिसगार्ड बनाती है। सोंगार ड्रोन के अलग-अलग वेरिएंट्स में असॉल्ट राइफल, ग्रेनेड लॉन्चर और मोर्टार जैसे हथियार लगाए जा सकते हैं।
भारतीय सेना के अनुसार, पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल किए गए ये ड्रोन भारतीय सुरक्षा बलों की सतर्कता और मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम के सामने टिक नहीं पाए। सेना की तेज कार्रवाई से न केवल सैन्य ठिकानों को सुरक्षित रखा, बल्कि नागरिक इलाकों को भी बड़े नुकसान से बचाया।





