📍बीकानेर | 23 Feb, 2026, 8:36 PM
Khadga Shakti 2026: राजस्थान के बीकानेर में स्थित महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय थलसेना का बड़ा सैन्य अभ्यास ‘खड़ग शक्ति 2026’ चल रहा है। इसे पश्चिमी कमान का अब तक का सबसे बड़ा हाई-इंटेंसिटी कॉम्बैट अभ्यास माना जा रहा है। खास बात यह है कि यह अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है जब सेना हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों को जमीन पर उतार रही है।
इस अभ्यास का मकसद सिर्फ ताकत दिखाना नहीं, बल्कि यह साबित करना है कि भारत अब मॉडर्न वारफेयर यानी आधुनिक युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है, जहां लड़ाई सिर्फ जमीन पर नहीं, बल्कि हवा, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक स्पेस में भी लड़ी जाती है। (Khadga Shakti 2026)
Khadga Shakti 2026: “साइलेंट प्रिसिजन” पर सेना का फोकस
पहले जंग का मतलब बड़ी संख्या में सैनिकों का जमावड़ा और लंबी लड़ाई होती थी। लेकिन अब समय बदल चुका है। आज का युद्ध तेज, सटीक और टेक्नोलॉजी आधारित हो गया है। खड़ग शक्ति अभ्यास इसी नई सोच को दर्शाता है।
भारतीय सेना अब “मास मोबिलाइजेशन” यानी बड़ी संख्या में सेना जुटाने के बजाय “साइलेंट प्रिसिजन” पर ध्यान दे रही है। इसका मतलब है कम संसाधनों में ज्यादा असर, और तेजी से लक्ष्य हासिल करना है। (Khadga Shakti 2026)
नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर पर फोकस
इस अभ्यास में सेना के जवानों के साथ-साथ कई तरह के हेलीकॉप्टर भी इस अभ्यास का हिस्सा बने। चेतक हेलीकॉप्टर, एमआई-17, अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर और एएलएच रुद्र ने मिलकर ऑपरेशन किया। इन हेलीकॉप्टरों ने जमीन पर मौजूद सैनिकों को सपोर्ट दिया, टारगेट की पहचान की और जरूरत पड़ने पर हमला भी किया।
यह पूरा ऑपरेशन दिखाता है कि अब युद्ध में हर यूनिट अलग-अलग नहीं, बल्कि एक नेटवर्क की तरह काम करती है। इसे ही नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर कहा जाता है। (Khadga Shakti 2026)
ड्रोन टेक्नोलॉजी को खास जगह
खड़ग शक्ति 2026 में ड्रोन टेक्नोलॉजी को खास जगह दी गई है। आज के समय में ड्रोन युद्ध का सबसे बड़ा हथियार बनते जा रहे हैं, और भारतीय सेना इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
अभ्यास में लॉजिस्टिक ड्रोन ने करीब 200 किलो तक वजन उठाकर दिखाया कि भविष्य में सप्लाई सिस्टम कैसे बदलेगा। अब गोलाबारूद, दवाइयां और जरूरी सामान सीधे ड्रोन के जरिए युद्ध क्षेत्र तक पहुंचाया जा सकता है। (Khadga Shakti 2026)
इसके अलावा स्वान ड्रोन, खड्गा ड्रोन और स्वदेशी ‘ऐरावत’ ड्रोन का भी प्रदर्शन किया गया। ये ड्रोन दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने, टारगेट पहचानने और जरूरत पड़ने पर हमला करने में सक्षम हैं।
सिर्फ हमला ही नहीं, बल्कि सेना ने ड्रोन हमलों से बचने की तैयारी भी दिखाई। जवानों को काउंटर-यूएवी यानी ड्रोन से बचाव की ट्रेनिंग दी गई, जो आने वाले समय में बेहद जरूरी मानी जा रही है। (Khadga Shakti 2026)
चक्रव्यूह और मल्टी-लेयर डिफेंस पर फोकस
इस अभ्यास में सेना ने “चक्रव्यूह” जैसी रणनीति का भी अभ्यास किया। इसका मतलब है कि दुश्मन को चारों तरफ से घेरकर उस पर दबाव बनाना।
साथ ही मल्टी-लेयर डिफेंस सिस्टम पर भी काम किया गया। यानी अगर दुश्मन ड्रोन या मिसाइल से हमला करे, तो उसे अलग-अलग लेयर में रोकने की व्यवस्था हो।
जवानों को यह सिखाया गया कि कैसे ड्रोन हमलों का सामना करना है, कैसे तेजी से जवाब देना है और कैसे दुश्मन को नुकसान पहुंचाना है। (Khadga Shakti 2026)
अभ्यास में गरजे टैंक, मिसाइल
महाजन फायरिंग रेंज में टैंक, मिसाइल और भारी तोपों का भी जबरदस्त प्रदर्शन देखने को मिला। बख्तरबंद और यंत्रीकृत यूनिट्स ने मिलकर फायर और मूवमेंट का अभ्यास किया।
टी-72 टैंक, बीएमपी फाइटिंग व्हीकल्स और रॉकेट लॉन्चर जैसे सिस्टम्स का इस्तेमाल कर यह दिखाया गया कि भारतीय सेना किसी भी हालात में जवाब देने के लिए तैयार है। (Khadga Shakti 2026)
रात में भी युद्ध के लिए तैयार
इस अभ्यास का एक बड़ा हिस्सा रात में होने वाले ऑपरेशन्स पर भी केंद्रित है। अगले चरण में नाइट आर्टिलरी फायरिंग, रॉकेट लॉन्च और टैंक ऑपरेशंस किए जाएंगे।
इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सेना 24 घंटे, किसी भी समय युद्ध के लिए तैयार रहे। क्योंकि आधुनिक युद्ध में दुश्मन कभी भी हमला कर सकता है। (Khadga Shakti 2026)
ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख
मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय सेना को कई अहम सबक दिए। इसमें देखा गया कि रियल टाइम इंटेलिजेंस, लंबी दूरी की प्रिसिजन स्ट्राइक और नेटवर्क आधारित ऑपरेशन कितने प्रभावी होते हैं।
इस ऑपरेशन ने यह भी दिखाया कि बिना ज्यादा सैनिकों की मूवमेंट के भी बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
खड़ग शक्ति 2026 उसी अनुभव को आगे बढ़ाने का प्रयास है। अब सेना तकनीक, जानकारी और तेजी से फैसले लेने की क्षमता पर ज्यादा ध्यान दे रही है। (Khadga Shakti 2026)



