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INNOYODHA 2024: भारतीय सेना ने ‘इननो-योद्धा 2024-25’ में प्रस्तुत किए नए इनोवेशन, स्वदेशी तकनीक को मिला बढ़ावा

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📍नई दिल्ली | 6 Dec, 2024, 1:03 PM

INNOYODHA 2024: भारतीय सेना ने अपनी वार्षिक आइडिया और इनोवेशन प्रतियोगिता ‘इननो-योद्धा 2024-25’ का आयोजन किया। यह कार्यक्रम मानेकशॉ सेंटर, नई दिल्ली में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की उपस्थिति में संपन्न हुआ। ‘इननो-योद्धा’ भारतीय सेना की एक अनूठी पहल है, जिसका उद्देश्य सेना की क्षमताओं को बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए स्वदेशी इनोवेशन को बढ़ावा देना है।

INNOYODHA 2024: General Upendra Dwivedi, COAS witnessed Inno योद्धा 2024, an Idea & Innovation Competition cum Seminar, at Manekshaw Centre, New Delhi

INNOYODHA 2024: कार्यक्रम का उद्देश्य

भारतीय सेना जिन चुनौतियों का सामना करती है, वे बेहद जटिल और विविधतापूर्ण हैं। चाहे वह दुर्गम इलाकों में तैनाती हो, प्रतिकूल मौसम की स्थिति हो, या दुश्मन से मुकाबला हो—हर चुनौती सेना की कार्यक्षमता की परीक्षा लेती है। ‘इननो-योद्धा’ का उद्देश्य इन चुनौतियों से निपटने के लिए सैनिकों के अनुभव और तकनीकी दक्षता का उपयोग करना है। यह प्रतियोगिता सेना के जवानों को नई सोच और रचनात्मकता से समस्याओं का समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित करती है।

इस प्रतियोगिता के माध्यम से चुने गए इनोवेशन को रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D), डिजाइन और डेवलपमेंट (D&D) और आर्मी टेक्नोलॉजी बोर्ड (ATB) की मदद से और बेहतर बनाया जाता है। इनोवेशन का औद्योगिक उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए उन्हें उद्योगों को स्थानांतरित किया जाता है। यह पहल भारतीय सेना की आत्मनिर्भर भारत अभियान में योगदान की दिशा में एक बड़ा कदम है।

इस वर्ष, 75 इनोवेशन पूरे देश की भारतीय सेना की विभिन्न इकाइयों से चुने गए। इन सभी में से 22 सर्वश्रेष्ठ इनोवेशन को कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शित किया गया। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने इन इनोवेशन की सराहना करते हुए सैनिकों को उनकी रचनात्मकता के लिए सम्मानित किया। इन नवाचारों को अब आर्मी डिज़ाइन ब्यूरो के तहत उत्पादन के लिए आगे बढ़ाया जाएगा।

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सेना प्रमुख का संदेश

सेना प्रमुख ने सैनिकों की रचनात्मक सोच और उनकी समस्याओं के समाधान में तकनीकी दृष्टिकोण की प्रशंसा की। उन्होंने कहा,

“हाल के संघर्षों ने साबित किया है कि इनोवेशन केवल एक शब्द नहीं है, यह एक मानसिकता है। यह वही चिंगारी है जो प्रगति को आगे बढ़ाती है और भविष्य का निर्माण करती है।”

उन्होंने प्रतिभागियों की मेहनत और उनके विचारों को इस प्रतियोगिता तक पहुंचाने के प्रयासों को भी सराहा। उनके अनुसार, प्रत्येक इनोवेशन के पीछे गहन शोध और परीक्षण की अनगिनत घंटे की मेहनत होती है।

पिछले चार वर्षों में ‘इननो-योद्धा’ ने 26 पेटेंट फाइल किए हैं और 21 इनोवेशन को सफलतापूर्वक पूरा किया है। इनमें से तीन प्रमुख इनोवेशन—

  1. एक्सप्लोडर (एफसी टेक द्वारा निर्मित)
  2. अग्नियास्त्र (रेड काइट डिजिटल टेक द्वारा निर्मित)
  3. विद्युत रक्षक (आईएस ट्रेडिंग कंपनी को स्थानांतरित)

इनमें से ‘एक्सप्लोडर’ को जून 2024 में लॉन्च किया गया था, जबकि ‘अग्नियास्त्र’ को हाल ही में सेना प्रमुख ने 12 अक्टूबर 2024 को सेना कमांडर्स सम्मेलन में प्रदर्शित किया। ये सभी इनोवेशन सेना की क्षमताओं को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।

इननो-योद्धा 2024-25 की खासियतें

यह आयोजन न केवल सैनिकों के अनुभव और विशेषज्ञता को उपयोग में लाता है, बल्कि भारतीय सेना को अत्याधुनिक तकनीकों के साथ आधुनिक और तकनीकी रूप से सशक्त बनाता है। यह पहल जवानों के अंदर रचनात्मकता और नवाचार के प्रति रुचि जगाती है।

इस कार्यक्रम के जरिए भारतीय सेना न केवल अपनी परिचालन क्षमताओं में सुधार कर रही है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी आगे बढ़ा रही है। इन इनोवेशन को निजी उद्योगों को स्थानांतरित करना सेना और उद्योगों के बीच सहयोग को मजबूत बनाता है।

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‘इननो-योद्धा’ के तहत भारतीय सेना हर साल नए इनोवेशन को बढ़ावा देती रहेगी। इस साल की सफलता ने यह साबित किया है कि देश के सैनिक न केवल युद्ध के मैदान में अद्भुत काम करते हैं, बल्कि तकनीकी नवाचार में भी दुनिया को पीछे छोड़ सकते हैं। सेना का यह कदम न केवल सुरक्षा में सुधार करेगा, बल्कि देश को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में भी मदद करेगा।

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  • INNOYODHA 2024: भारतीय सेना ने 'इननो-योद्धा 2024-25' में प्रस्तुत किए नए इनोवेशन, स्वदेशी तकनीक को मिला बढ़ावा

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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