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रूद्र ब्रिगेड और IBG पर सेना प्रमुख का बड़ा बयान, क्या है पूर्वी सीमा पर आर्मी का नया वार प्लान

सेना प्रमुख ने बताया कि आईबीजी के साथ-साथ रूद्र ब्रिगेड पर भी तेजी से काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि दो रूद्र ब्रिगेड पहले ही लागू की जा चुकी हैं और सात और रूद्र ब्रिगेड की योजना है...

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📍नई दिल्ली | 13 Jan, 2026, 9:14 PM

Indian Army Rudra Brigade Vs IBG: भारतीय सेना पूर्वी सीमा पर अपनी युद्ध क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर अब सेना चार इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप यानी आईबीजी बनाने की तैयारी में है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने इस योजना को लेकर बड़ा बयान दिया है और साफ किया है कि आईबीजी को अब मंजूरी मिल चुकी है और इसे चरणबद्ध तरीके से जमीन पर उतारा जाएगा।

Indian Army Rudra Brigade Vs IBG: चार आईबीजी बनाए जाने की तैयारी

आर्मी डे पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अपने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव कर रही है। उन्होंने बताया कि इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप पर पिछले कई वर्षों से काम चल रहा था और अब यह योजना औपचारिक रूप से स्वीकृत हो चुकी है। पूर्वी मोर्चे पर चीन की गतिविधियों को देखते हुए यह बदलाव काफी अहम माना जा रहा है। (Indian Army Rudra Brigade Vs IBG)

पानागढ़ स्थित 17वीं माउंटेन स्ट्राइक कोर, जो सीधे तौर पर चीन सीमा की जिम्मेदारी संभालती है, इस योजना का अहम हिस्सा होगी। क्योंकि इसी कोर के तहत चार आईबीजी बनाए जाने की तैयारी है। ये आईबीजी 59 डिवीजन और 23 डिवीजन से मिलकर गठित किए जाएंगे। हर आईबीजी में करीब पांच हजार से अधिक सैनिक होंगे और इसका नेतृत्व मेजर जनरल रैंक का अधिकारी करेगा। (Indian Army Rudra Brigade Vs IBG)

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सेना प्रमुख ने यह भी स्पष्ट किया कि आईबीजी में पारंपरिक ब्रिगेड कमांडर नहीं होंगे। कमांड स्ट्रक्चर को सरल और तेज बनाया जा रहा है ताकि फैसले लेने में देरी न हो। प्रत्येक आईबीजी के साथ एक अलग सपोर्ट ग्रुप भी होगा, जिसका नेतृत्व भी मेजर जनरल स्तर का अधिकारी करेगा। इससे ऑपरेशन के दौरान फायर सपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और मेडिकल सहायता तुरंत उपलब्ध हो सकेगी।

आईबीजी को पूरी तरह आत्मनिर्भर यूनिट के तौर पर तैयार किया जा रहा है। इनमें इन्फैंट्री बटालियनें, आर्टिलरी रेजिमेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स, कॉम्बैट इंजीनियर्स, आर्मी सर्विस कोर और फील्ड हॉस्पिटल शामिल होंगे। जरूरत पड़ने पर ये यूनिट्स कोर मुख्यालय से अतिरिक्त सपोर्ट भी ले सकेंगी। (Indian Army Rudra Brigade Vs IBG)

सेना के सूत्रों के मुताबिक, आईबीजी की सबसे बड़ी ताकत उनकी फुर्ती और तुरंत तैनाती है। पारंपरिक कोर या डिवीजन को तैनात करने में जहां काफी समय लगता है, वहीं आईबीजी कुछ ही घंटों में ऑपरेशनल हो सकती हैं। पहाड़ी इलाकों में यह क्षमता और भी ज्यादा अहम हो जाती है, जहां तेजी से बदलती स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देना जरूरी होता है। वहीं आईबीजी को ऑफेंसिव ऑपरेशंस के लिए तैयार किया गया है।

आईबीजी बनाने का प्लान पहली बार वर्ष 2019 के आसपास सामने आया था। तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने इसे सेना के पुनर्गठन का अहम हिस्सा बताया था। पश्चिमी मोर्चे पर पाकिस्तान सीमा के पास 9 कोर में इसे प्रयोग के तौर पर आजमाया गया था। इसके अलावा पूर्वी थिएटर में ‘हिम विजय’ जैसे अभ्यासों में भी आईबीजी को शामिल किया गया। (Indian Army Rudra Brigade Vs IBG)

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सेना प्रमुख ने बताया कि आईबीजी के साथ-साथ रूद्र ब्रिगेड पर भी तेजी से काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि दो रूद्र ब्रिगेड पहले ही लागू की जा चुकी हैं और सात और रूद्र ब्रिगेड की योजना है। दूसरे चरण में चार नई रूद्र ब्रिगेड को खड़ा किए जाने की संभावना है।

रूद्र ब्रिगेड को हाई टेम्पो मल्टी डोमेन ऑपरेशंस के लिए तैयार किया गया है। इनमें ड्रोन, सर्विलांस सिस्टम, रियल टाइम टारगेटिंग और तेज स्ट्राइक क्षमता पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही शक्तिबाण रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी जैसी नई आर्टिलरी संरचनाएं भी बनाई जा रही हैं, जिससे सेना की मारक क्षमता और बढ़े। (Indian Army Rudra Brigade Vs IBG)

सेना प्रमुख ने बताया कि इन सभी नए स्ट्रक्चर को संभालने और तेजी से लागू करने के लिए सेना ने एक फ्यूचर ट्रांसफॉर्मेशन सेल भी बनाया है, जिसका नेतृत्व टू स्टार अधिकारी कर रहे हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि संगठनात्मक बदलाव, तकनीक और ऑपरेशनल जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल रहे।

सेना का यह कदम उस समय आया है जब चीन ने पिछले एक दशक में अपनी सेना को बड़े डिवीजन सिस्टम से हटाकर छोटे और ज्यादा घातक कॉम्बाइंड आर्म्स ब्रिगेड में बदला है। भारतीय सेना भी इसी तरह के फ्लेक्सिबल एंड फास्ट फ्रेमवर्क की ओर बढ़ रही है ताकि किसी भी स्थिति में प्रभावी जवाब दिया जा सके। (Indian Army Rudra Brigade Vs IBG)

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  • रूद्र ब्रिगेड और IBG पर सेना प्रमुख का बड़ा बयान, क्या है पूर्वी सीमा पर आर्मी का नया वार प्लान

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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