📍नई दिल्ली | 22 Mar, 2026, 2:33 PM
Indian Army Drone Warrior: पहले रूस-यूक्रेन युद्ध और अब इजरायल-ईरान संघर्ष हर जगह ड्रोन बेहद भूमिका निभा रहे हैं। यहां तक कि पिछले साल मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर में भी ड्रोन ने अहम भूमिका निभाई थी। जिसके बाद भारतीय सेना ने अपने स्ट्रक्चर में कई अहम बदलाव करते हुए एक बड़ा कदम उठाया। जिसके तहत आने वाले समय में हर इन्फैंट्री जवान को ड्रोन ऑपरेट करने का फैसला लिया गया। वहीं पिछले साल लिए गए इस फैसले के बाद इन्फैंट्री बटालियनों के हर जवान को बुनियादी ड्रोन ट्रेनिंग दी गई, जो अब पूरी हो चुकी है और उन्हें अब स्पेशलाइज्ड एडवांस ट्रेनिंग दी जा रही है। जिसके तहत 2027 तक 100 प्रतिशत सैनिक ड्रोन ऑपरेशन में एक्सपर्ट हो जाएंगे।
Indian Army Drone Warrior: क्या है ‘ईगल इन द आर्म’?
सेना ने पिछले साल सितंबर में नई डॉक्ट्रिन “ईगल इन द आर्म” लॉन्च की थी। इसका मतलब यह है कि हर सैनिक सिर्फ ड्रोन चलाना ही नहीं सीखेगा, बल्कि ड्रोन उसके हथियार का हिस्सा बन जाएगा। जैसे वह अपनी राइफल साथ रखता है, वैसे ही ड्रोन भी साथ रहेगा। यह ड्रोन सैनिक की “तीसरी आंख” की तरह काम करेगा, जिससे वह दूर तक देख सकेगा और जरूरत पड़ने पर हमला भी कर सकेगा। यह सोच रूस-यूक्रेन युद्ध, इजरायल-हमास संघर्ष और मई 2025 के ऑपरेशन सिंदूर जैसे अनुभवों से आई है, जहां ड्रोन ने बड़ी भूमिका निभाई।
यह योजना सितंबर 2025 में औपचारिक रूप से शुरू हुई थी। इससे पहले जुलाई में कारगिल विजय दिवस पर आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने इसकी घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि हर इन्फैंट्री बटालियन में एक खास ड्रोन प्लाटून बनाया जाएगा। इसके अलावा तोपखाने में दुश्मन के ड्रोन को रोकने के लिए काउंटर-ड्रोन सिस्टम और लॉइटर म्यूनिशन भी शामिल किए जाएंगे। (Indian Army Drone Warrior)
सेना के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में सैनिक सिर्फ राइफल से नहीं, बल्कि हाथ में ड्रोन लेकर लड़ाई लड़ेगा, जिससे उसकी देखने की क्षमता, पहुंच और ताकत तीनों बढ़ जाएंगी।
ड्रोन की ट्रेनिंग पहले यूनिट स्तर पर शुरू की गई थी, लेकिन अब इसे और आगे बढ़ाया जा रहा है। अलग-अलग जगहों पर खास ट्रेनिंग सेंटर बनाए जा रहे हैं, जहां एडवांस कोर्स चल रहे हैं। इसके अलावा वर्चुअल रियलिटी यानी वीआर सिमुलेटर के जरिए भी सैनिकों को बिना किसी खतरे के ट्रेनिंग दी जा रही है। इसके साथ ही 2026 तक देशभर में करीब 19 ड्रोन ट्रेनिंग हब तैयार किए जा रहे हैं, जहां बड़े पैमाने पर सैनिकों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
देशभर में खास ट्रेनिंग सेंटर बनाए
इन ट्रेनिंग सेंटरों में देहरादून का भारतीय मिलिट्री अकादमी (आईएमए), महू का इन्फैंट्री स्कूल, चेन्नई और गया की ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए), देवलाली का आर्टिलरी स्कूल और अरुणाचल प्रदेश का लिकाबली ड्रोन लैब शामिल हैं। यहां सिर्फ जवान ही नहीं, बल्कि अधिकारी भी ड्रोन ऑपरेशन की ट्रेनिंग ले रहे हैं।
ट्रेनिंग को अलग-अलग भूमिकाओं के हिसाब से तैयार किया गया है। जो सैनिक कॉम्बैट में होंगे, उन्हें एफपीवी यानी फर्स्ट पर्सन व्यू ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन चलाना सिखाया जा रहा है। निगरानी के लिए सैनिकों को रियल टाइम आईएसआर ड्रोन की ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि वे दुश्मन की हर गतिविधि पर नजर रख सकें।
इसके अलावा लॉजिस्टिक्स के लिए ड्रोन के जरिए सामान पहुंचाना और मेडिकल स्थिति में घायल सैनिकों को निकालना भी सिखाया जा रहा है। साथ ही एक जरूरी हिस्सा यह भी है कि सैनिक दुश्मन के ड्रोन को कैसे रोके या नष्ट करे। इसलिए काउंटर-ड्रोन ट्रेनिंग भी अनिवार्य बनाई गई है, ताकि हर जवान सिर्फ ड्रोन चलाना ही नहीं, बल्कि दुश्मन के ड्रोन से मुकाबला करना भी सीख सके। (Indian Army Drone Warrior)
‘अश्नि प्लाटून’ इस योजना का अहम हिस्सा
पिछले साल कारगिल विजय दिवस के मौके पर अहम रिस्ट्रक्चर प्लान में अश्नि प्लाटून बनाने का एलान किया गया था। अश्नी प्लाटून इस पूरी ड्रोन क्रांति का सबसे अहम हिस्सा बन गए हैं। ‘अश्नि’ का मतलब होता है ‘अग्नि’, यानी आग की ताकत। आसान शब्दों में समझें तो हर 380 इन्फैंट्री बटालियन में अब एक खास ड्रोन टीम बनाई गई है, जिसमें करीब 20 से 25 विशेष रूप से प्रशिक्षित सैनिक होते हैं।
इस प्लाटून के पास कई तरह के ड्रोन होते हैं। इनमें कम से कम 4 सर्विलांस ड्रोन होते हैं, जो दुश्मन की हर गतिविधि पर नजर रखते हैं। इसके अलावा करीब 6 आर्म्ड या कामिकाजी ड्रोन भी होते हैं, जिन्हें सीधे दुश्मन पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जैसे नागास्त्र-1, वारमेट और अन्य ड्रोन। (Indian Army Drone Warrior)
ये अश्नि प्लाटून अब पूरी तरह से ऑपरेशनल हो चुके हैं और सेना के बड़े अभ्यासों जैसे ‘राम प्रहार’ और ‘खड़गा शक्ति’ में अपनी क्षमता दिखा चुके हैं। ये प्लाटून युद्ध के मैदान में एक ‘अदृश्य तीसरी आंख’ की तरह काम करते हैं। ये रियल टाइम जानकारी देते हैं और जरूरत पड़ने पर सटीक हमला करके दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाते हैं।
अब इन प्लाटून का इस्तेमाल सिर्फ इन्फैंट्री तक सीमित नहीं है। स्पेशल फोर्सेस, भैरव लाइट कमांडो बटालियनों और आगे चलकर आर्मर्ड और आर्टिलरी यूनिट्स में भी इन्हें शामिल किया जा रहा है, ताकि पूरी सेना की ताकत और बढ़ाई जा सके। (Indian Army Drone Warrior)
ऑपरेशन सिंदूर से मिली बड़ी सीख
मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर ने यह साफ कर दिया कि ड्रोन युद्ध में कितना अहम रोल निभा सकते हैं। इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान ने बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया, लेकिन भारत ने अपने मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम से उन्हें नाकाम कर दिया।
साथ ही भारतीय ड्रोन ने दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला किया। इससे यह साबित हो गया कि ड्रोन अब सिर्फ सहायक उपकरण नहीं, बल्कि मुख्य हथियार बन चुके हैं।
हर काम में होगा ड्रोन का इस्तेमाल
अब ड्रोन सिर्फ हमला करने के लिए ही नहीं, बल्कि कई और कामों में भी इस्तेमाल होंगे। जैसे दुश्मन की निगरानी करना, जरूरी सामान पहुंचाना, घायल सैनिकों को निकालना और रीयल टाइम जानकारी देना।
सेना अब हर सैनिक को उसकी भूमिका के हिसाब से ट्रेनिंग दे रही है। यानी कोई सैनिक कॉम्बैट में ड्रोन चलाएगा, तो कोई सर्विलांस या लॉजिस्टिक्स में इसका इस्तेमाल करेगा। (Indian Army Drone Warrior)
काउंटर-ड्रोन क्षमता भी बढ़ाई जा रही
जैसे-जैसे ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ रहा है, वैसे ही दुश्मन के ड्रोन से बचाव भी जरूरी हो गया है। इसलिए सेना अपने जवानों को यह भी सिखा रही है कि दुश्मन के ड्रोन को कैसे रोका जाए या नष्ट किया जाए।
इसके लिए जैमर, लेजर सिस्टम और अन्य तकनीकों पर भी काम किया जा रहा है, ताकि एक मजबूत मल्टी-लेयर सिस्टम तैयार हो सके। (Indian Army Drone Warrior)
स्वदेशी तकनीक पर जोर
इस पूरे प्रोग्राम में ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर खास ध्यान दिया जा रहा है। सेना ज्यादा से ज्यादा ड्रोन देश में ही बनवाना चाहती है, ताकि विदेशों पर निर्भरता कम हो।
इसी के तहत ‘ड्रोन शक्ति’ जैसी पहल शुरू की गई है, जिसमें भारतीय कंपनियां और डीआरडीओ मिलकर काम कर रहे हैं। ‘ड्रोन शक्ति’ को सेना का ईएमई कोर अगुवाई कर रही है। अब हर कोर में 1000 से ज्यादा छोटे और मध्यम आकार के ड्रोन तैनात किए जा रहे हैं।
फिलहाल अलग-अलग तरह के करीब 9 ड्रोन की टेस्टिंग चल रही है। इनमें कुछ ड्रोन निगरानी (आईएसआर) के लिए हैं, कुछ सीधे हमला करने वाले यानी कामिकाजी ड्रोन हैं, और कुछ ऐसे हैं जो ऊपर से सटीक तरीके से हथियार गिरा सकते हैं। इसके साथ ही दुश्मन के ड्रोन को रोकने के लिए भी तैयारी की जा रही है। इसके लिए लेजर सिस्टम, जामर और गन सिस्टम इस्तेमाल किए जा रहे हैं। यहां तक कि प्रशिक्षित बाज (ईगल), जिसे ‘अर्जुन’ कहा जाता है, का भी प्रयोग किया जा रहा है, जो दुश्मन के ड्रोन को पकड़ सकता है। 2026 के गणतंत्र दिवस पर ‘ड्रोन शक्ति-ईगल ऑन आर्म’ की झलक भी दिखाई गई थी। (Indian Army Drone Warrior)
2027 तक हर जवान बनेगा ड्रोन वॉरियर
सेना का लक्ष्य है कि साल 2027 तक हर इन्फैंट्री जवान ड्रोन ऑपरेशन में पूरी तरह दक्ष हो जाए। यानी भविष्य में हर सैनिक एक “ड्रोन वॉरियर” होगा, जो जमीन के साथ-साथ आसमान से भी युद्ध लड़ सकेगा।
रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, अब सैनिकों को उनकी भूमिका के हिसाब से ड्रोन चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। यानी जो सैनिक जिस काम में लगे हैं, उसी के अनुसार उन्हें ड्रोन इस्तेमाल करना सिखाया जा रहा है। (Indian Army Drone Warrior)
कुछ सैनिकों को लड़ाई (कॉम्बैट) के लिए ड्रोन चलाना सिखाया जा रहा है, कुछ को दुश्मन पर नजर रखने यानी सर्विलांस के लिए। वहीं कुछ को जरूरी सामान पहुंचाने यानी लॉजिस्टिक्स में ड्रोन का इस्तेमाल सिखाया जा रहा है। यहां तक कि घायल सैनिकों को निकालने (मेडिकल एवाक्यूएशन) में भी ड्रोन की ट्रेनिंग दी जा रही है।
इसके साथ-साथ सेना सिर्फ ड्रोन चलाना ही नहीं, बल्कि दुश्मन के ड्रोन को रोकना या खत्म करना भी सिखा रही है। यानी सैनिक अब ड्रोन से हमला भी कर सकेंगे और दुश्मन के ड्रोन से बचाव भी कर पाएंगे। (Indian Army Drone Warrior)

