📍नई दिल्ली | 6 Apr, 2026, 11:53 PM
Indian Army Drone Roadmap:सेना ने ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन के लिए पहली बार एक विस्तृत टेक्नोलॉजी रोडमैप जारी किया है। यह रोडमैप सेना ने ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया के साथ मिलकर तैयार किया है और इसे राजधानी के भारत मंडपम में लॉन्च किया गया।
इस कार्यक्रम में सेना के वरिष्ठ अधिकारी और ड्रोन इंडस्ट्री से जुड़े लोग मौजूद रहे। इस रोडमैप को सेना के डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है, ताकि आने वाले समय की जरूरतों के हिसाब से तकनीक विकसित की जा सके।
Indian Army Drone Roadmap: बदलते युद्ध का असर, ड्रोन बने अहम हथियार
आज के समय में युद्ध सिर्फ टैंक और फाइटर जेट तक सीमित नहीं रह गया है। हाल के कई संघर्षों जैसे ईरान-इजरायल-अमेरिका वॉर और रूस-यूक्रेन युद्ध में यह साफ देखा गया है कि ड्रोन और बिना पायलट वाले सिस्टम अब युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
ये ड्रोन निगरानी करने, सटीक हमला करने, सामान पहुंचाने और दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने में इस्तेमाल हो रहे हैं। यही वजह है कि दुनिया भर की सेनाएं अब इस तकनीक पर तेजी से काम कर रही हैं।
भारतीय सेना ने भी इसी बदलाव को समझते हुए यह रोडमैप तैयार किया है, ताकि वह भविष्य की जरूरतों के हिसाब से खुद को तैयार कर सके।
इस मौके पर सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने कहा कि हाल के युद्धों ने साफ कर दिया है कि बिना पायलट वाले सिस्टम आधुनिक युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं। यह रोडमैप इस दिशा में एक मजबूत कदम है, जिससे सेना भविष्य के लिए तैयार हो सकेगी और उद्योग के साथ मिलकर नई तकनीक विकसित कर सकेगी।
Indian #Army unveils UAS & Loitering #Munitions roadmap with #Drone Federation India, covering 30 platform types across surveillance, strike, logistics, air defence & specialised roles. A major push for indigenous defence tech and future-ready warfare capabilities. #IndianArmy… pic.twitter.com/OsVpgDnS6Q
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) April 6, 2026
आर्मी डिजाइन ब्यूरो में एडिशनल डायरेक्टर जनरल मेजर जनरल सीएस मान लंबे समय से ड्रोन और बिना पायलट वाले सिस्टम से जुड़ी योजनाओं पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब भारतीय सेना ने यूएएस यानी अनमैन्ड एरियल सिस्टम और लॉइटरिंग म्यूनिशन से जुड़ी इतनी विस्तृत जानकारी एक साथ साझा की है। उनका कहना था कि इससे साफ पता चलता है कि सेना इन तकनीकों को कितना महत्व दे रही है।
वहीं ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष स्मित शाह ने कहा कि यह रोडमैप उद्योग, स्टार्टअप्स और रिसर्च संस्थानों को स्पष्ट दिशा देता है। इससे वे आत्मविश्वास के साथ निवेश कर पाएंगे और ऐसे सिस्टम बना सकेंगे जो वैश्विक स्तर पर भी प्रतिस्पर्धी हों। (Indian Army Drone Roadmap)
30 तरह के ड्रोन हुए शामिल
इस रोडमैप में कुल 30 तरह के ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन प्लेटफॉर्म शामिल किए गए हैं। यह पूरा दस्तावेज आर्मी डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है, जिसमें पांच मुख्य कैटेगरी रखी गई हैं। इनमें निगरानी, हमला, लॉजिस्टिक्स यानी सामान पहुंचाने, एयर डिफेंस और कुछ खास ऑपरेशन से जुड़े रोल शामिल हैं। सेना अब हर तरह के ऑपरेशन के लिए अलग-अलग तरह के ड्रोन तैयार करना चाहती है, ताकि हर स्थिति में उनका इस्तेमाल किया जा सके।ॉ
मेजर जनरल मान पहले भी ड्रोन सेक्टर को लेकर कई अहम बातें कह चुके हैं। उन्होंने यह भी जोर दिया था कि सेना में इस्तेमाल होने वाले ड्रोन में विदेशी, खासकर चीनी पार्ट्स से बचना जरूरी है और इसके लिए सख्त जांच व्यवस्था होनी चाहिए। उनका यह भी मानना रहा है कि भविष्य में हर सैनिक के पास छोटे ड्रोन होने चाहिए, जो निगरानी और टारगेटिंग में मदद कर सकें।
दरअसल, पहले भी सेना ने ड्रोन से जुड़ी अपनी जरूरतें बताई थीं, लेकिन वे अलग-अलग टेंडर, आरएफआई या अन्य दस्तावेजों में बंटी होती थीं। इस बार पहली बार एक ही रोडमैप में करीब 30 तरह के प्लेटफॉर्म और कई तरह के वैरिएंट्स के साथ उनकी तकनीकी और ऑपरेशनल जरूरतें सामने रखी गई हैं। इसमें रेंज, उड़ान का समय, पेलोड, ऊंचाई, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एंटी-जैमिंग और स्वॉर्म जैसे फीचर्स शामिल हैं। (Indian Army Drone Roadmap)
इंडस्ट्री और स्टार्टअप्स को बताई जरूरत
इस रोडमैप का एक बड़ा मकसद यह भी है कि देश की कंपनियों, स्टार्टअप्स और रिसर्च संस्थानों को यह साफ समझ आ सके कि सेना को किस तरह की तकनीक चाहिए। अभी तक कई बार ऐसा होता था कि कंपनियां अपनी तरफ से तकनीक बनाती थीं, लेकिन वह सेना की जरूरतों से पूरी तरह मेल नहीं खाती थी।
अब इस रोडमैप के जरिए सेना ने अपनी जरूरतों को स्पष्ट कर दिया है, जिससे उद्योग उसी दिशा में काम कर सके।
स्वदेशी विकास पर फोकस
इस पूरे प्लान में सबसे ज्यादा ध्यान स्वदेशी तकनीक पर दिया गया है। सेना चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा सिस्टम देश में ही डिजाइन और विकसित किए जाएं। इससे न सिर्फ बाहरी देशों पर निर्भरता कम होगी, बल्कि देश के अंदर ही एक मजबूत डिफेंस इंडस्ट्री भी तैयार होगी। यह रोडमैप इसी सोच के साथ बनाया गया है, ताकि डिजाइन से लेकर उत्पादन तक का काम भारत में ही हो सके।
इस रोडमैप को तैयार करने से पहले सेना ने अंदरूनी स्तर पर कई दौर की चर्चा और विश्लेषण किया। इसमें यह समझने की कोशिश की गई कि आने वाले समय में युद्ध कैसे बदल सकता है और किस तरह की तकनीक की जरूरत होगी। इसका एक मकसद यह भी है कि नई तकनीकों के विकास में लगने वाला समय कम किया जा सके।
जब उद्योग को पहले से पता होगा कि सेना को क्या चाहिए, तो वह उसी हिसाब से तेजी से प्रोडक्ट तैयार कर पाएगा और बाद में खरीद प्रक्रिया भी आसान हो जाएगी। (Indian Army Drone Roadmap)
सेना और इंडस्ट्री के बीच बनेगा मजबूत तालमेल
इस पहल से सेना और निजी कंपनियों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा। अब तक कई बार ऐसा होता था कि दोनों के बीच सीधा संवाद कम होता था, लेकिन इस रोडमैप के जरिए एक प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है, जहां दोनों एक-दूसरे की जरूरतों और क्षमताओं को समझ सकेंगे। इससे नई तकनीकों के विकास में तेजी आएगी और बेहतर समाधान तैयार हो सकेंगे।
भारत में ड्रोन तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है। इस क्षेत्र में काम करने वाली कई कंपनियां और स्टार्टअप्स सामने आ चुके हैं। ड्रोन फेडरेशन इंडिया जैसे संगठन इस पूरे इकोसिस्टम को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
यह संगठन सरकार, उद्योग और रिसर्च संस्थानों के साथ मिलकर ड्रोन तकनीक को बढ़ावा देने का काम करता है।
इस रोडमैप की पूरी जानकारी आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं होगी। इसे केवल उन्हीं कंपनियों और संस्थानों को दिया जाएगा, जो इसके लिए पात्र होंगे। इसके लिए उन्हें कुछ औपचारिक प्रक्रिया जैसे नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट यानी गोपनीयता समझौता करना होगा। इसका मकसद यह है कि संवेदनशील जानकारी सुरक्षित रहे और केवल सही लोगों तक ही पहुंचे।
क्या होता है लॉइटरिंग म्यूनिशन
लॉइटरिंग म्यूनिशन को आसान भाषा में समझें तो यह एक ऐसा ड्रोन होता है, जो टारगेट के ऊपर कुछ समय तक मंडराता रहता है और सही समय आने पर खुद ही हमला करता है। इसे “कामिकाजे ड्रोन” भी कहा जाता है। इसका इस्तेमाल खास तौर पर दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है। इस तरह के सिस्टम आधुनिक युद्ध में तेजी से इस्तेमाल हो रहे हैं और इन्हें बेहद प्रभावी माना जाता है।
यह रोडमैप हाल के अंतरराष्ट्रीय संघर्षों से मिली सीख पर भी आधारित है, जहां ड्रोन ने युद्ध का तरीका बदल दिया है। इसमें ऐसे सिस्टम पर जोर दिया गया है जो जीपीएस के बिना भी काम कर सकें, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस हों, एक साथ कई ड्रोन मिलकर ऑपरेशन कर सकें और इलेक्ट्रॉनिक जामिंग का सामना कर सकें। (Indian Army Drone Roadmap)

