📍नई दिल्ली | 1 Oct, 2025, 7:27 PM
India UN Peacekeeping Policy: भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी विदेशी संघर्ष क्षेत्र, चाहे वह यूक्रेन हो या गाजा, में अपने सैनिक तभी भेजेगा जब यह मिशन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के तहत और संयुक्त राष्ट्र के झंडे के नीचे होगा। यह बयान उस समय आया जब मीडिया ने भारत से यह सवाल पूछा कि क्या नई दिल्ली मौजूदा जंग वााले इलाकों जैसे गाजा यूक्रेन में शांति सैनिक तैनात करने पर विचार कर रहा है।
संयुक्त राष्ट्र के झंडे के नीचे काम करे शांति सेना
दिल्ली में आयोजित संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों से जुड़े आर्मी चीफ्स के सम्मेलन से पहले आयोजित एक कर्टेन रेजर इवेंट में विदेश मंत्रालय से रक्षा मंत्रालय में नियुक्त अधिकारी जॉइंट सेक्रेटरी विश्वेश नेगी और वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर ने भारत का रुख दुनिया के सामने रखा।
विश्वेश नेगी ने साफ शब्दों में कहा कि भारत की स्थिति वर्षों से बिल्कुल स्पष्ट है। भारतीय सैनिक केवल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी के बाद ही किसी शांति मिशन का हिस्सा बनते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के लिए वैधता का मतलब यही है कि शांति सेना संयुक्त राष्ट्र के झंडे के नीचे काम करे।
उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में यूक्रेन और गाजा जैसे संघर्ष वाले क्षेत्रों में संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना भेजे जाने की संभावना बेहद कम है। कारण यह है कि सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता में शामिल देशों के बीच आम सहमति बन पाना लगभग असंभव है।
51 मिशनों में भारत ने 182 से ज्यादा जवान खोए
लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर ने भी भारत की स्थिति को और स्पष्ट करते हुए कहा, “हम केवल संयुक्त राष्ट्र के झंडे के नीचे ही काम करते हैं, क्योंकि हमें वैधता की अहमियत समझ आती है।” उन्होंने बताया कि भारत दुनिया के सबसे बड़े शांति सैनिक भेजने वाले देशों में से एक है और पिछले 75 सालों में 50 से अधिक मिशनों में 2,90,000 से ज्यादा भारतीय सैनिक और पुलिस कर्मियों ने हिस्सा लिया है। वहीं 51 मिशनों में भारत ने 182 से ज्यादा जवान खोए भी हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह नीति भारत की विदेश नीति का अभिन्न हिस्सा है और इसका पालन हर हाल में किया जाएगा।

यूएन से बाहर किसी भी शांति सेना का हिस्सा नहीं बनेगा भारत
India UN Peacekeeping Policy के तहत वहीं, मीडिया के इस सवाल पर कि क्या भारत भविष्य में यूक्रेन युद्ध या गाजा युद्ध में सैनिक भेज सकता है। इस पर कपूर ने कहा कि यह सवाल जायज है क्योंकि आज की दुनिया में युद्धों की प्रकृति बदल चुकी है। पहले संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिक केवल सीजफायर लाइन पर निगरानी करते थे। लेकिन अब युद्धों का स्वरूप बदल गया गए हैं, जिसमें नॉन स्टेट एलिमेंट्स, एनजीओ और नई टेक्नोलॉजी शामिल हो गई हैं।
उन्होंने साफ कहा कि भारत कभी भी संयुक्त राष्ट्र से बाहर किसी भी शांति सेना का हिस्सा नहीं बनेगा। केवल यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल के चार्टर के चैप्टर 6 और चैप्टर 7 के तहत आने वाले मिशनों में ही भारतीय सैनिक तैनात होंगे।
कपूर ने यह भी स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा स्ट्रक्चर और सुरक्षा परिषद की राजनीति को देखते हुए, यूक्रेन या गाजा जैसे इलाकों में शांति सेना भेजना लगभग असंभव है।
बता दें कि इजरायल के राजदूत नाओर गिलोन अजार ने कहा था कि गाजा में तुरंत तैनात की जाने वाली इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स (ISF) में भारत की भागीदारी का फैसला पूरी तरह नई दिल्ली पर निर्भर है। उन्होंने कहा, भारत स्वयं तय करेगा कि वह ऐसी किसी बहुराष्ट्रीय ताकत का हिस्सा बनेगा या नहीं। इजरायल की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब गाजा संकट को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति बनाए रखने के लिए संभावित सैन्य बल की चर्चा चल रही है। भारत पहले ही साफ कर चुका है कि वह केवल संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव वाले मिशनों में ही सैनिक भेजेगा।
भारत ने पहली महिला पुलिस यूनिट की तैनात
भारत की भूमिका संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में हमेशा महत्वपूर्ण रही है। 1948 में कांगो से लेकर हाल के अफ्रीका और पश्चिम एशिया के मिशनों तक, भारतीय सैनिकों ने शांति स्थापित करने और बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है।
2007 में भारत ने लाइबेरिया में पहली बार पूरी तरह महिला पुलिस यूनिट तैनात कर इतिहास रचा। इसके बाद से भारतीय सेना और अन्य बल हर मिशन में महिला एंगेजमेंट टीम्स भेज रहे हैं, जो सीधे तौर पर संघर्षग्रस्त इलाकों की स्थानीय आबादी, खासकर महिलाओं से संवाद करती हैं और बच्चों से बातचीत कर शांति की प्रक्रिया को मजबूत करती हैं।
उन्होंने बताया कि संघर्ष के समय सबसे अधिक प्रभावित होने वाला वर्ग महिलाएं ही होती हैं। ऐसे में जब हमारी महिला टीमें उनसे जुड़ती हैं, तो वे उनकी समस्याओं को बेहतर तरीके से समझ पाती हैं। साथ ही, स्थानीय महिलाओं को यह भी प्रेरणा मिलती है कि वे भी समाज में सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं।
महिलाओं की भागीदारी की भागीदारी 20 फीसदी तक
भारतीय सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र ने शांति मिशनों में महिलाओं की भागीदारी के लिए लक्ष्य तय किए हैं। आज की स्थिति में, अलग-अलग रोल में भारतीय योगदान लगभग 20 फीसदी तक पहुंच चुका है, खासकर स्टाफ ऑफिसर और ऑब्जर्वर स्तर पर। हालांकि, महिला कंटिंजेंट्स की संख्या बढ़ाने की दिशा में और काम किया जा रहा है।
India UN Peacekeeping Policy के तहत कपूर ने कहा कि भारत शांति मिशनों में महिला मनोवैज्ञानिक काउंसलर भी भेज रहा है। उनका काम युद्ध या संघर्ष से प्रभावित परिवारों, खासकर महिलाओं और बच्चों की मानसिक स्थिति को संभालना है। मानसिक स्वास्थ्य और वेल-बीइंग पर भारतीय योगदान संयुक्त राष्ट्र के लिए एक नया मानदंड बना रहा है।
30 देशों सैन्य प्रमुख लेंगे हिस्सा, चीन-पाक नहीं शामिल
भारत 14 से 16 अक्टूबर तक नई दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सैनिक भेजने वाले देशों (Troop Contributing Countries – TCCs) के आर्मी चीफ्स का सम्मेलन आयोजित करेगा। इसमें 30 से अधिक देशों के सैन्य प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा लेंगे।
India UN Peacekeeping Policy सम्मेलन में अल्जीरिया, आर्मेनिया, बांग्लादेश, भूटान, ब्राज़ील, बुरुंडी, कंबोडिया, कोट डी आईवोर, इथियोपिया, फिजी, फ्रांस, घाना, इंडोनेशिया, कजाखस्तान, केन्या, किर्गिस्तान, मेडागास्कर, मलेशिया, मंगोलिया, मोरक्को, नेपाल, नाइजीरिया, रवांडा, सेनेगल, श्रीलंका, तंजानिया, युगांडा, उरुग्वे, वियतनाम और इटली जैसे देश शामिल होंगे। हालांकि अहम बात यह है कि पाकिस्तान और चीन को इस सम्मेलन में आमंत्रित नहीं किया गया है।
स्वदेशी डिफेंस इक्विपमेंट्स शोकेस करेगा भारत
राकेश कपूर ने कहा कि पहले के समय भारत को इक्विपमेंट्स लीज पर लेने पड़ते थे, लेकिन अब सभी भारतीय कंटिंजेंट्स पूरी तरह स्वदेशी उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं, सम्मेलन के दौरान भारत अपने स्वदेशी डिफेंस इक्विपमेंट्स को भी शोकेस करेगा, जो शांति मिशनों में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। लेफ्टिनेंट जनरल कपूर ने बताया कि आज भारतीय कंटिंजेंट्स लगभग 1600 तरह के स्वदेशी उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इनमें प्रोटेक्टेड व्हीकल्स, नाइट विजन डिवाइस और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल इक्विपमेंट्स शामिल हैं। ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय इक्विपमेंट्स के शानदार परफॉरमेंस ने कई देशों का ध्यान भी खींचा है और कई देशों ने इन्हें खरीदने में रुचि दिखाई है।
यूएन शांति मिशनों में भारत का ग्रीन एनर्जी पर जोर
लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर ने बताया कि भारतीय सेना संयुक्त राष्ट्र मिशनों में डिजिटाइजेशन को भी प्राथमिकता दे रही है। भारत ने ‘युनिट अवेयर प्रोग्राम’ लॉन्च किया है जो बेहतर सिचुएशनल अवेयरनेस प्रदान करता है। इसके अलावा, भारतीय सेना अपने घरेलू स्तर पर विकसित डिजिटाइजेशन सॉल्यूशंस भी साझा करने के लिए तैयार है।
उन्होंने बताया कि भारत अपने सैनिकों को साइबर सुरक्षा, नई एनक्रिप्शन तकनीक और मिनिएचराइज्ड उपकरणों से लैस कर रहा है। इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल डिवाइस और थर्मल इमेजिंग जैसे संसाधन अब भारतीय सैनिकों के पास मौजूद हैं ताकि वे हर परिस्थिति में काम कर सकें।
उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में भारत ग्रीन एनर्जी पर भी जोर दे रहा है। भारतीय सेना ने बताया कि एक बड़े ग्रीन एनर्जी प्लांट की स्थापना की जा रही है, जो संभवतः किसी मिशन एरिया में भारत द्वारा लगाया जाने वाला सबसे बड़ा प्रोजेक्ट होगा।
लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर के मुताबिक भारतीय सेना का मानना है कि सतत शांति केवल तब संभव है जब समाज के हर वर्ग को साथ लिया जाए। महिलाओं को शामिल करना, मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना, इंडिजिनस तकनीक का इस्तेमाल और डिजिटाइजेशन की दिशा में काम करना, ये सभी कदम इसी सोच का हिस्सा हैं।
India UN Peacekeeping Policy has once again been reiterated, with New Delhi making it clear that Indian troops will only be deployed under a clear United Nations Security Council (UNSC) mandate and strictly under the UN flag. Dismissing the possibility of sending soldiers to conflict zones like Ukraine or Gaza without UN approval, Lt Gen Rakesh Kapoor and MEA official Vishwesh Negi emphasized India’s long-standing position. From October 14–16, New Delhi will host the UNTCC Chiefs Conclave with military leaders from 30 nations, excluding Pakistan and China. India will also showcase its indigenous defence equipment used in UN missions.





