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भारतीय सेना की आर्टिलरी को मिला ‘देसी बोफोर्स’ का बूस्ट, DAC में 300 धनुष तोपों की खरीद को मिली मंजूरी

धनुष तोपों की यह बड़ी संख्या सेना में नई आर्टिलरी रेजिमेंट तैयार करने में मदद करेगी। सूत्रों के मुताबिक, इन 300 तोपों के शामिल होने के बाद सेना के पास 15 से ज्यादा नई रेजिमेंट तैयार हो सकेंगी...

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📍नई दिल्ली | 27 Mar, 2026, 8:14 PM

Dhanush Artillery Gun India: भारतीय सेना की आर्टिलरी पावर को नया बूस्ट मिलने वाला है। शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल यानी डीएसी की बैठक में सेना के लिए 300 स्वदेशी धनुष आर्टिलरी गन सिस्टम खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।

इस फैसले के बाद सेना के तोपखाने की ताकत में बड़ा इजाफा होने वाला है।

Dhanush Artillery Gun India: 300 नई तोपों से बढ़ेंगी रेजिमेंट

धनुष तोपों की यह बड़ी संख्या सेना में नई आर्टिलरी रेजिमेंट तैयार करने में मदद करेगी। सूत्रों के मुताबिक, इन 300 तोपों के शामिल होने के बाद सेना के पास 15 से ज्यादा नई रेजिमेंट तैयार हो सकेंगी।

अभी तक धनुष तोप की करीब 3 रेजिमेंट सेना में शामिल हो चुकी हैं और 3 और रेजिमेंट शामिल होने की प्रक्रिया में हैं। जैसे-जैसे नई तोपें मिलती जाएंगी, आर्टिलरी यूनिट्स की संख्या और बढ़ती जाएगी।

पहले चरण में साल 2019 में बुल्क प्रोडक्शन क्लियरेंस मिलने के बाद 114 धनुष तोपों का ऑर्डर दिया गया था। उम्मीद जताई जा रही है कि 114 तोपों की पूरी डिलीवरी इसी साल तक पूरी हो जाएगी। वहीं अब कुल मिलाकर धनुष की संख्या 400 से ज्यादा हो जाएगी। (Dhanush Artillery Gun India)

क्यों कहा जाता है ‘देसी बोफोर्स’

धनुष तोप को अक्सर ‘देसी बोफोर्स’ कहा जाता है। इसकी वजह यह है कि इसका डिजाइन पुराने बोफोर्स गन FH-77B सिस्टम पर आधारित है, लेकिन इसमें कई नए बदलाव और सुधार किए गए हैं।

यह 155 मिमी और 45 कैलिबर की तोप है, जो करीब 38 से 40 किलोमीटर तक मार कर सकती है। पुराने बोफोर्स सिस्टम की रेंज करीब 27 किलोमीटर थी। यानी धनुष उससे काफी ज्यादा दूरी तक निशाना साध सकती है।

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इसकी बैरल लंबाई बढ़ाई गई है, जिससे इसकी रेंज और सटीकता दोनों बेहतर हुई हैं। इसके साथ ही इसमें आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम भी जोड़े गए हैं। सस्टेन मोड में धनुष प्रति घंटा 60 राउंड तक फायर कर सकती है। (Dhanush Artillery Gun India)

स्वदेशी तकनीक से तैयार

धनुष तोप का निर्माण भारत में ही किया जा रहा है। इसे जबलपुर स्थित गन कैरिज फैक्ट्री में तैयार किया जाता है, जो अब एडवांस्ड वेपंस एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड का हिस्सा है।

इस सिस्टम में 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्से स्वदेशी हैं। इसका मतलब है कि इसमें ज्यादातर पार्ट्स भारत में ही बनाए जाते हैं। इससे उत्पादन पर देश का नियंत्रण बना रहता है और बाहर पर निर्भरता कम होती है।

इस प्रोजेक्ट पर काम 2011 के आसपास शुरू हुआ था और कुछ वर्षों में इसका प्रोटोटाइप तैयार किया गया। इसके बाद टेस्टिंग और सुधार के बाद इसे सेना में शामिल किया गया। (Dhanush Artillery Gun India)

कैसे काम करती है धनुष तोप

धनुष एक टोड आर्टिलरी गन है, यानी इसे किसी वाहन के जरिए खींचकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता है। इसे ऑपरेट करने के लिए आमतौर पर 6 से 8 जवानों की टीम की जरूरत होती है।

इसमें इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम और ऑटो लेइंग जैसी सुविधाएं दी गई हैं। इसका मतलब यह है कि यह अपने आप लक्ष्य की दिशा तय करने में मदद करती है और फायरिंग को ज्यादा सटीक बनाती है।

इसमें ऑनबोर्ड बैलिस्टिक कंप्यूटेशन सिस्टम भी है, जो हवा, दूरी और अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखकर फायरिंग की कैलकुलेशन करता है। इससे निशाना ज्यादा सटीक लगता है। (Dhanush Artillery Gun India)

ऑपरेशन सिंदूर में भी हुआ था इस्तेमाल

धनुष तोप का इस्तेमाल हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी किया गया था। इसे सीमावर्ती इलाकों में तैनात किया गया और इसका उपयोग किया गया। इस दौरान यह देखा गया कि यह तोप पहाड़ी और कठिन इलाकों में भी प्रभावी तरीके से काम कर सकती है।

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सेना के आधुनिकीकरण का हिस्सा

भारतीय सेना 1999 से अपने आर्टिलरी सिस्टम को आधुनिक बनाने की योजना पर काम कर रही है। जिसे फील्ड आर्टिलरी रैशनलाइजेशन प्लान कहा जाता है। इस योजना के तहत 2027 तक करीब 2800 नई 55 मिमी तोपों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें अलग-अलग तरह की तोपें शामिल हैं। कुछ तोपें ऐसी हैं जिन्हें गाड़ियों से खींचा जाता है, कुछ ट्रक पर लगी होती हैं और कुछ खुद चलने वाली यानी सेल्फ प्रोपेल्ड होती हैं।

इसके अलावा अल्ट्रा लाइट होवित्जर तोपें भी शामिल हैं, जिन्हें हेलीकॉप्टर के जरिए पहाड़ी इलाकों तक पहुंचाया जा सकता है, जहां सड़क से पहुंचना मुश्किल होता है। (Dhanush Artillery Gun India)

पहले से मौजूद सिस्टम

सेना के पास पहले से ही कई आधुनिक तोप सिस्टम मौजूद हैं। इनमें एम-777 अल्ट्रा लाइट होवित्जर शामिल हैं, जिनकी संख्या 145 के करीब है। ये हल्की तोपें हैं और इन्हें हवाई रास्ते से ले जाया जा सकता है।

इसके अलावा के-9 वज्र नाम की ट्रैक्ड सेल्फ प्रोपेल्ड गन भी सेना में शामिल है। इसकी संख्या करीब 100 है। यह सिस्टम खास तौर पर तेजी से मूव करने और फायर करने के लिए जाना जाता है।

इन सभी सिस्टम के बीच धनुष एक मजबूत टोड आर्टिलरी विकल्प के रूप में सामने आया है, जो लंबी दूरी तक सटीक हमला कर सकता है। (Dhanush Artillery Gun India)

डीएसी में सेना को और क्या मिला

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल यानी डीएसी की बैठक में 55 प्रस्तावों को एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी यानी एओएन के तहत मंजूरी दी गई। जो किसी एक वित्तीय वर्ष में अब तक की सबसे बड़ी मंजूरी मानी जा रही है।

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सेना के हिस्से में पांच अहम सिस्टम शामिल किए गए हैं। इनमें एयर डिफेंस ट्रैक्ड सिस्टम प्रमुख है, जो रियल टाइम में हवाई खतरों की पहचान और रिपोर्टिंग करने में मदद करेगा। मौजूदा समय में क्रूज मिसाइल और लोइटरिंग म्यूनिशन जैसे खतरों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यह सिस्टम सेना के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।

साथ ही, टैंक यूनिट्स को मजबूत करने के लिए आर्मर्ड पियर्सिंग टैंक अम्यूनिशन को भी मंजूरी दी गई है। इससे दुश्मन के भारी बख्तरबंद वाहनों के खिलाफ सेना की क्षमता और प्रभावी होगी।

कम्युनिकेशन सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए हाई कैपेसिटी रेडियो रिले सिस्टम को शामिल किया गया है। यह सिस्टम युद्ध के दौरान संचार को सुरक्षित रखने और जैमिंग या इंटरसेप्शन से बचाने में मदद करेगा।

इसके साथ ही रनवे इंडिपेंडेंट एरियल सर्विलांस सिस्टम को भी मंजूरी मिली है। यह सिस्टम बिना किसी एयरबेस पर निर्भर हुए जमीन से ही निगरानी करने की सुविधा देता है। खास तौर पर लद्दाख और पूर्वोत्तर जैसे इलाकों में, जहां एयरफील्ड की कमी होती है, वहां यह सिस्टम काफी उपयोगी माना जा रहा है। (Dhanush Artillery Gun India)

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  • News Desk

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