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Exercise Trishul: भारतीय सेना की दक्षिणी कमान ने दिखाई ‘फ्यूचर-रेडी फोर्स’ की ताकत, एक्सरसाइज त्रिशूल में जमीन से लेकर समंदर तक में दिखा तीनों सेनाओं का जबरदस्त तालमेल

अभ्यास त्रिशूल का मुख्य मंत्र रहा “जय” यानी जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता एंड इनोवेशन। इसका मतलब है कि तीनों सेनाओं के बीच आपसी तालमेल के साथ, देशी तकनीक पर भरोसा और नए विचारों का प्रयोग ही भारत की डिफेंस पॉलिसी की दिशा तय कर रहे हैं...

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📍नई दिल्ली | 8 Nov, 2025, 4:19 PM

Exercise Trishul: भारतीय सेना की दक्षिणी कमान इन दिनों ट्राई सर्विसेज जॉइंट एक्सरसाइज त्रिशूल में हिस्सा ले रही है। दक्षिणी कमान के नेतृत्व में आयोजित 13 नवंबर तक चलने वाले इस अभ्यास का मकसद यह दिखाना है कि भारत की सेनाएं जमीन, समुद्र और आसमान तीनों जगह एक साथ काम कर सकती हैं और किसी भी स्थिति में देश की सुरक्षा के लिए तैयार हैं।

Exercise Trishul: दो बड़े रेगिस्तानी अभियान मरुज्वाला और अखंड प्रहार

थार रेगिस्तान से लेकर सौराष्ट्र तट तक चले इस मेगा मिलिट्री एक्सरसइज में भारतीय सेनाओं ने अपने सामूहिक कौशल का प्रदर्शन किया। थार के मरुस्थल में दक्षिणी कमान की थार रैप्टर ब्रिगेड, सुदर्शन चक्र कोर और कोणार्क कोर की टुकड़ियों ने मिलकर संयुक्त युद्धाभ्यास किया।

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यह अभ्यास दक्षिणी कमान के दो बड़े रेगिस्तानी अभियानों मरुज्वाला और अखंड प्रहार का हिस्सा था। इन अभियानों में जमीनी और हवाई दोनों प्रकार के अभ्यास शामिल रहे, जिनका उद्देश्य था संयुक्त रणनीतियों को परखना और वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में तालमेल को मजबूत करना।

एक्सरसाइज त्रिशूल में आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई मिशन किए गए। इसमें इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, साइबर ऑपरेशन, ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक, इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस मिशन, और एयर डिफेंस कंट्रोल शामिल थे। इसके साथ ही जॉइंट फायर इंटीग्रेशन यानी जमीनी और हवाई ताकत की सामूहिक क्षमता को भी परखा गया।

इस अभ्यास के जरिए भारतीय सेना ने दिखाया कि वह सिर्फ भौतिक युद्ध नहीं, बल्कि वर्चुअल डोमेन में भी अपनी ताकत दिखाने की क्षमता रखती है।

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त्रिशूल का मंत्र “जय”

अभ्यास त्रिशूल का मुख्य मंत्र रहा “जय” यानी जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता एंड इनोवेशन। इसका मतलब है कि तीनों सेनाओं के बीच आपसी तालमेल के साथ, देशी तकनीक पर भरोसा और नए विचारों का प्रयोग ही भारत की डिफेंस पॉलिसी की दिशा तय कर रहे हैं।

त्रिशूल अभ्यास ने इस बात को साबित किया कि भारत अब आत्मनिर्भर सैन्य क्षमता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

कच्छ से सौराष्ट्र तक संयुक्त अभियान

अभ्यास का अगला चरण कच्छ सेक्टर में हुआ, जिसमें भारतीय थलसेना, नौसेना, वायुसेना, कोस्ट गार्ड और सीमा सुरक्षा बल ने मिलकर ऑपरेशन चलाया। यह अभ्यास नागरिक प्रशासन के साथ मिलिट्री-सिविल फ्यूजन के दृष्टिकोण पर आधारित था। इसका उद्देश्य था आपात स्थितियों में सेना और नागरिक एजेंसियों के बीच तेजी से कॉर्डिनेशन बनाना और राष्ट्रीय सुरक्षा के इंटीग्रेटेड फ्रेमवर्क को मजबूत करना है।

सौराष्ट्र तट पर एंफीबियस एक्सरसाइज

अभ्यास का अंतिम चरण सौराष्ट्र तट के पास समुद्र में हुआ। इस दौरान भारतीय सेना और नौसेना की एंफीबियस टुकड़ियों ने समुद्र तट पर उतरने का वास्तविक अभ्यास किया, जिसे बीच लैंडिंग ऑपरेशन कहा जाता है। यह अभ्यास समुद्र से जमीन पर उतरकर हमले की तैयारी और संयुक्त योजना की सफलता को परखने के लिए किया गया।

इस मौके पर भारतीय नौसेना के जहाजों, हेलिकॉप्टरों और एंफीबियस व्हीकल्स का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला, जो भारत की लैंड–सी–एयर इंटीग्रेशन क्षमता को साबित करता है।

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भारतीय सेना की दक्षिणी कमान ने कहा कि यह अभ्यास न सिर्फ जॉइंट आपरेशंस की क्षमता का परीक्षण था, बल्कि यह सशस्त्र बलों की उस प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है जिसमें वे खुद को लगातार बदलते युद्ध के स्वरूप के अनुरूप तैयार कर रहे हैं। अभ्यास त्रिशूल को भारतीय सेना की डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन पहल का हिस्सा बताया गया है।

इस पहल के पांच स्तंभ हैं, जॉइंटनेस एंड इंटीग्रेशन, फोर्स रिस्ट्रक्चरिंग, मॉडर्नाइजेशन एंड टेक इन्फ्यूजन,
प्रणालियों और प्रक्रियाओं में सुधार और मानव संसाधन कौशल में बढ़ोतरी है।

‘फ्यूचर-रेडी फोर्स’ बनने की दिशा

भारतीय सेना ने यह दोहराया कि वह एक फ्यूचर-रेडी फोर्स के तौर पर तैयार हो रही है, यानी ऐसी सेना जो भविष्य के युद्धों की चुनौतियों से निपटने में सक्षम हो। दक्षिणी कमान की यह जॉइंट एक्सरसाइज इस बात का प्रमाण है कि भारतीय सेनाएं किसी भी परिस्थिति में एकजुट होकर, उच्च तकनीकी क्षमता और रणनीतिक दक्षता के साथ कार्य कर सकते हैं।

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