📍नई दिल्ली | 12 Feb, 2026, 10:31 PM
ATAGS delivery delay: भारतीय सेना के लिए तैयार की जा रही स्वदेशी एटीएजीएस यानी एडवांस्ड टोव्ड आर्टिलरी गन सिस्टम की डिलीवरी में करीब एक साल की देरी हो सकती है। मिली जानकारी के मुताबिक एटीएजीएस के बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन में एक साल तक की देरी हो सकती है। पहले भारतीय सेना को इनकी डिलीवरी इसी साल से शुरू होनी थी, लेकिन अब इंतजार लंबा खिंच सकता है।
ATAGS delivery delay: प्रोडक्शन क्लियरेंस का है इंतजार
एक चैनल से बातचीत में भारत फोर्ज के चेयरमैन बाबा कल्याणी ने कहा कि “एफओपीएम” यानी फर्स्ट ऑफ प्रोडक्शन मॉडल की प्रक्रिया चल रही है। इसका मतलब यह है कि गन का पहला प्रोडक्शन मॉडल तैयार किया जाता है और फिर भारतीय सेना उसकी पूरी जांच और निरीक्षण करती है। सेना यह देखती है कि गन तय मानकों के अनुसार काम कर रही है या नहीं। जब यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है और सेना से मंजूरी मिल जाती है, तभी कंपनी बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन के लिए कच्चा माल मंगाने का ऑर्डर दे सकती है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि मार्च तक यह प्रोडक्शन क्लियरेंस मिल जाएगा। उसके बाद सप्लाई चेन यानी पुर्जों और कच्चे माल की व्यवस्था करने में करीब चार से पांच महीने का समय लगेगा। इस हिसाब से एटीएजीएस का बड़े पैमाने पर उत्पादन सितंबर या अक्टूबर 2026 से शुरू होने की संभावना है। वहीं सूत्रों का कहना है कि अक्टूबर से भी काम शुरू होता है तो पहला बैच तैयार होने में छह महीने से ज्यादा का वक्त लग सकता है, ऐसे में भारतीय सेना को डिलीवरी के लिए थोड़ा लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। (ATAGS delivery delay)
155 मिलीमीटर और 52 कैलिबर की आधुनिक तोप
एटीएजीएस भारत की पूरी तरह स्वदेशी 155 मिलीमीटर और 52 कैलिबर की आधुनिक तोप है। इसे डीआरडीओ ने भारत फोर्ज और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के साथ मिलकर डेवलप किया है। यह तोप भारतीय सेना की पुरानी बोफोर्स और अन्य गनों की जगह लेने के लिए बनाई जा रही है। इसकी मारक क्षमता लगभग 48 किलोमीटर तक बताई जाती है, यही खूबी इसे दुनिया की सबसे लंबी दूरी तक मार करने वाली टोव्ड आर्टिलरी गनों में शामिल करती है। (ATAGS delivery delay)
307 एटीएजीएस गनों की मंजूरी
सरकार ने वर्ष 2025 में करीब 307 एटीएजीएस गनों और 327 टोइंग व्हीकल्स की खरीद को मंजूरी दी थी। इस सौदे की कुल कीमत लगभग 6,900 से 7,000 करोड़ रुपये के आसपास थी। इस ऑर्डर में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी भारत फोर्ज को और 40 प्रतिशत टाटा समूह को मिली है। कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत मार्च 2025 में हुए थे और योजना के अनुसार सितंबर 2026 से डिलीवरी शुरू होनी थी।
लेकिन खुद बाबा कल्याणी के मुताबिक बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन इस साल अक्टूबर से ही होगा, जिससे उत्पादन की प्रक्रिया में देरी हो सकती है। हालांकि कुछ शुरुआती गन यूनिट्स की डिलीवरी या ट्रायल पहले ही पूरे किए जा चुके हैं। (ATAGS delivery delay)
ट्रायल करने में लगता है समय
एटीएजीएस जैसी एडवांस्ड तोप का निर्माण साधारण प्रक्रिया नहीं है। इसमें बैरल, रिकॉइल सिस्टम, ऑटोमेटिक लोडिंग सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल और डिजिटल फायर कंट्रोल सिस्टम जैसे कई जटिल हिस्से शामिल होते हैं। इन सभी को एक साथ जोड़कर पूरी तरह ट्रायल करना समय लेने वाला काम है।
इसके अलावा बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करने के लिए फैक्ट्री लाइन की तैयारी, विशेष मशीनरी की स्थापना और कुशल कर्मचारियों की उपलब्धता भी जरूरी होती है। यदि इनमें से किसी भी चरण में देरी होती है, तो पूरी सप्लाई टाइमलाइन प्रभावित हो सकती है। वहीं, ज्योपॉलिटिकल वजहों से विदेश से आने वाले कुछ खास पुर्जे या विशेष स्टील की सप्लाई में देरी हुई तो इंतजार और बढ़ सकता है।
भारत फोर्ज ने अपनी हालिया तिमाही रिपोर्ट में यह जरूर कहा है कि डिफेंस सेक्टर में उसकी ऑर्डर बुक मजबूत बनी हुई है। कंपनी का कुल रक्षा ऑर्डर बुक हजारों करोड़ रुपये का बताया जा रहा है। (ATAGS delivery delay)
आर्टिलरी का भविष्य है एटीएजीएस
भारतीय सेना के लिए एटीएजीएस बेहद महत्वपूर्ण है। एटीएजीएस को भारतीय तोपखाने यानी आर्टिलरी का भविष्य माना जा रहा है। इसकी मारक क्षमता करीब 48 किलोमीटर तक बताई जाती है। खास तौर पर जब इसमें लंबी दूरी वाले विशेष गोले इस्तेमाल किए जाते हैं, तब यह इतनी दूर तक निशाना साध सकती है। यह तोप तेज रफ्तार से फायर कर सकती है। यह 30 सेकंड में छह राउंड तक दागने में सक्षम है। इसमें ऑटोमेटिक लोडिंग सिस्टम है, जिससे सैनिकों की मेहनत कम करनी पड़ती है और तेजी से लगातार फायरिंग की जा सकती है। यह रेगिस्तान से लेकर पहाड़ी इलाकों तक अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में काम कर सकती है।
एटीएजीएस को निर्यात बाजार में भी सफलता मिली है। आर्मेनिया को इस गन सिस्टम की सप्लाई का कॉन्टैक्ट पहले ही किया जा चुका है। (ATAGS delivery delay)
हालांकि डिलीवरी में अगर एक साल की देरी होती है तो सेना की आधुनिकीकरण योजना की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है। यानी नए हथियार और सिस्टम तय समय से थोड़ा देर से मिलेंगे।
लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह अतिरिक्त समय गुणवत्ता और भरोसेमंद कामकाज सुनिश्चित करने के लिए लिया जा रहा है, तो लंबे समय में यह बेहतर साबित होगा।
रक्षा क्षेत्र में सबसे जरूरी बात यह है कि उपकरण पूरी तरह जांचे-परखे हों, सुरक्षित हों और असली हालात में ठीक से काम करें। जल्दीबाजी में तैयार किए गए सिस्टम से जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए अगर बेहतर गुणवत्ता के लिए थोड़ा इंतजार भी करना पड़े, तो उसे समझदारी भरा कदम माना जाता है। (ATAGS delivery delay)

