📍नई दिल्ली | 16 Dec, 2025, 8:10 PM
AH-64E Apache Helicopters: अमेरिका से खरीदे गए AH-64E अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर की डील के तहत बचे हुए आखिरी तीन हेलिकॉप्टर मंगलवार को औपचारिक तौर पर भारतीय सेना में शामिल हो गए। इसके साथ ही सेना की कुल छह अपाचे हेलिकॉप्टरों वाली स्क्वाड्रन अब पूरी तरह ऑपरेशनल हो गई है।
ये तीनों हेलिकॉप्टर पहले हिंडन एयरफोर्स स्टेशन, गाजियाबाद पर उतरे, जिसके बाद इन्हें भारतीय सेना में शामिल किया गया। सभी छह अपाचे हेलिकॉप्टर राजस्थान के जोधपुर स्थित 451 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन में तैनात किए जाएंगे।
छह AH-64E Apache Helicopters की स्क्वाड्रन हुई पूरी
भारतीय सेना ने फरवरी 2020 में अमेरिका के साथ लगभग 600 मिलियन डॉलर का समझौता किया था। इस डील के तहत सेना के लिए कुल छह अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर खरीदे गए थे। इन हेलिकॉप्टरों की पहली खेप पहले ही भारत पहुंच चुकी थी, जबकि अंतिम तीन हेलिकॉप्टर अब सेना में शामिल किए गए हैं।
इन हेलिकॉप्टरों के शामिल होने के साथ ही सेना की डेडिकेटेड अपाचे स्क्वाड्रन पूरी तरह से ऑपरेशनल हो गई है। इस स्क्वाड्रन को खास तौर पर पश्चिमी सीमा पर ऑपरेशनल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मार्च 2024 में खड़ा किया गया था। (AH-64E Apache Helicopters)
पश्चिमी मोर्चे पर बढ़ी भारतीय सेना की ताकत
सभी छह अपाचे हेलिकॉप्टर जोधपुर में तैनात किए जा रहे हैं। यह इलाका पाकिस्तान से लगती पश्चिमी सीमा के लिहाज से रणनीतिक रूप से काफी अहम माना जाता है। अपाचे हेलिकॉप्टरों की तैनाती से भारतीय सेना की स्ट्राइक, टोही और क्लोज एयर सपोर्ट क्षमता को बड़ी ताकत मिलेगी।
अपाचे को दुनिया के सबसे आधुनिक और घातक अटैक हेलिकॉप्टरों में गिना जाता है। यह हर मौसम और हर तरह के इलाके में ऑपरेशन करने में सक्षम है। (AH-64E Apache Helicopters)

क्या हैं AH-64E Apache Helicopters की खूबियां
अपाचे हेलिकॉप्टर अत्याधुनिक एवियोनिक्स, सेंसर और हथियार प्रणालियों से लैस है। इसमें हेलफायर लॉन्गबो मिसाइल, स्टिंगर एयर-टू-एयर मिसाइल, 30 मिलीमीटर चेन गन और एडवांस रॉकेट सिस्टम लगाए गए हैं। यह हेलिकॉप्टर दुश्मन के टैंकों, बख्तरबंद वाहनों और जमीनी ठिकानों को सटीक निशाना बना सकता है। (AH-64E Apache Helicopters)
डिलीवरी में हुई थी लंबी देरी
इन हेलिकॉप्टरों की डिलीवरी अपने तय समय से काफी देर से हुई। मूल योजना के अनुसार इनकी सप्लाई मई 2024 में होनी थी, लेकिन ग्लोबल सप्लाई चेन में आई दिक्कतों के चलते इसमें करीब 15 महीने की देरी हो गई।
नवंबर 2025 में अपाचे हेलिकॉप्टरों को लेकर एक विशेष एंटोनोव एएन-124 कार्गो जहाज अमेरिका के एरिजोना स्थित मेसा गेटवे एयरपोर्ट से रवाना हुआ था। यह विमान ईंधन भरने के लिए इंग्लैंड उतरा, लेकिन तुर्किए की तरफ से ओवरफ्लाइट क्लीयरेंस न दिए जाने के चलते इसे लगभग एक हफ्ते तक वहीं रोका गया और बाद में वापस अमेरिका लौटना पड़ा। (AH-64E Apache Helicopters)
वहीं, अपाचे हेलिकॉप्टरों की डिलीवरी ऐसे समय पर पूरी हुई है, जब भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। जुलाई 2025 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के बीच हुई टेलीफोनिक बातचीत में भी इन हेलिकॉप्टरों की डिलीवरी को लेकर चर्चा हुई थी। उस दौरान अमेरिका ने भारत को भरोसा दिया था कि बचे हुए अपाचे हेलिकॉप्टर जल्द सौंप दिए जाएंगे। (AH-64E Apache Helicopters)
अपाचे हेलिकॉप्टरों के शामिल होने से भारतीय सेना की आर्मी एविएशन ब्रांच को पहली बार डेडिकेटेड अटैक हेलिकॉप्टर स्क्वाड्रन मिल गई है, जो जमीनी बलों को सीधे हवाई समर्थन दे सकेगी।
भारतीय वायुसेना के पास भी हैं अपाचे
भारतीय वायुसेना पहले ही अपाचे हेलिकॉप्टरों को ऑपरेट कर रही है। वायुसेना ने 2015 में करीब 13,952 करोड़ रुपये की डील के तहत 22 अपाचे हेलिकॉप्टर खरीदे थे, जिन्हें 2019 और 2020 के बीच शामिल किया गया था। अब सेना और वायुसेना दोनों के पास यह अटैक हेलिकॉप्टर मौजूद होंगे। (AH-64E Apache Helicopters)
वहीं, अपाचे हेलिकॉप्टरों के अलावा भारतीय नौसेना भी अपनी ताकत बढ़ा रही है। नौसेना एमएच-60आर सीहॉक हेलिकॉप्टरों की नई स्क्वाड्रन को कमीशन करने की तैयारी में है, जो खास तौर पर एंटी-सबमरीन वॉरफेयर के लिए इस्तेमाल होते हैं।
वहीं देश में ही बने लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर (एलसीएच) प्रचंड को भी धीरे-धीरे सेना और वायुसेना में शामिल किया जा रहा है। इन सभी कोशिशों से भारत की रोटरी-विंग यानी हेलिकॉप्टर आधारित युद्ध क्षमता को मजबूती मिल रही है। (AH-64E Apache Helicopters)


