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Saturday, August 30, 2025
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Agniveer Retention Policy: ऑपरेशन सिंदूर में अग्निवीरों को मिलेगा उनकी मेहनत का इनाम! ट्रेनिंग में हो रहा ज्यादा खर्चा, सेना को चाहिए एक्सपर्ट जवान

सेना को ऐसे तकनीकी रूप से एक्सपर्ट सैनिक चाहिए, जो ड्रोन, साइबर युद्ध, लंबी दूरी के हथियार और लेटेस्ट इक्विपमेंट्स को को सही तरह से चला सकें...

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7 से 10 मई के बीच ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 20 साल की उम्र वाले करीब तकरीबन 3,000 अग्निवीरों ने मोर्चा संभाला और सेना के एयर डिफेंस (AD) सिस्टम से पाकिस्तान के इरादों को नेस्तानाबूद कर दिया। इन अग्निवीरों को पिछले दो साल में भर्ती किया गया था। ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान ने भारत ड्रोनों और मिसाइलों से हमला किया था, लेकिन एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव होने के चलते उनके मंसूबे पूरे नहीं हो पाए...
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📍नई दिल्ली | 14 Aug, 2025, 1:12 PM

Agniveer Retention Policy: ऑपरेशन सिंदूर में अग्निवीरों ने काफी योगदान दिया था। उस दौरान तकरीबन 3000 अग्निवीरों ने भारत के एयर डिफेंस सिस्टम से पाकिस्तानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों को नाकाम किया था। भारतीय सेनाओं में अग्निपथ योजना के तहत भर्ती होने वाले अग्निवीरों की सेवा अवधि और रिटेंशन (सेवा में बनाए रखने) के नियमों पर फिर से विचार किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर में अग्निवीरों के प्रदर्शन को “शानदार” माना गया है, जिसके बाद उनकी चार साल की सेवा अवधि पूरी होने पर उन्हें अधिक संख्या में स्थायी रूप से रखने को लेकर समीक्षा शुरू हो गई है।

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Agniveer Retention Policy: 3,000 अग्निवीरों ने संभाला था मोर्चा

7 से 10 मई के बीच ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 20 साल की उम्र वाले करीब तकरीबन 3,000 अग्निवीरों ने मोर्चा संभाला और सेना के एयर डिफेंस (AD) सिस्टम से पाकिस्तान के इरादों को नेस्तानाबूद कर दिया। इन अग्निवीरों को पिछले दो साल में भर्ती किया गया था। ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान ने भारत ड्रोनों और मिसाइलों से हमला किया था, लेकिन एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव होने के चलते उनके मंसूबे पूरे नहीं हो पाए।

अग्निपथ योजना 2022 (Agniveer Retention Policy) में शुरू हुई थी। इसके तहत थल सेना, वायु सेना और नौसेना में चार साल की अवधि के लिए अग्निवीरों की भर्ती की जाती है। अग्निवीरों को पहले छह महीने रेजिमेंटल केंद्रों में बेसिक ट्रेनिंग दी जाती है। इसके बाद उनकी यूनिट्स में विशेष ट्रेनिंग होती है, जिसमें वे आधुनिक हथियारों और उपकरणों को चलाना सीखते हैं। वर्तमान नियमों के मुताबिक, चार साल बाद केवल 25 फीसदी अग्निवीरों को ही स्थायी तौर पर रखे जाने का प्रावधान है। वहीं, पहला बैच 2026 के आखिर तक अपनी चार साल की सेवा पूरी करेगा। जिसके बाद मौजूदा नियमों की समीक्षा और बदलाव पर औपचारिक फैसला होने की संभावना है।

सूत्रों के अनुसार, अलग-अलग विभागों के लिए अलग-अलग रिटेंशन रेट्स (Agniveer Retention Policy) पर विचार हो रहा है। इसके तहत इन्फैंट्री और अन्य कॉम्बैट यूनिट्स में 70-75 फीसदी अग्निवीरों को रखने की चर्चा है। वहीं, एयर डिफेंस, सिग्नल और इंजीनियर्स जैसे विभागों में 80 फीसदी रिटेंशन पर विचार हो रहा है। जबकि स्पेशल फोर्सेस के लिए 100 फीसदी रिटेंशन की बात है, क्योंकि इनका सिलेक्शन शुरुआती ट्रेनिंग में ही हो जाता है। हालांकि, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि रिटेंशन बढ़ाने से सैनिकों की औसत आयु में ज्यादा बढ़ोतरी न हो। इन सभी आकड़ों पर अभी सेना के भीतर चर्चा चल रही है। इन पर आगामी सेना कमांडरों की बैठक में और विचार-विमर्श होगा। इसके बाद अंतिम प्रस्ताव सरकार को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

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Agniveer Retention Policy: ट्रेनिंग में खर्चा ज्यादा

अग्निवीरों (Agniveer Retention Policy) को पहले छह महीने रेजिमेंटल केंद्रों में बेसिक ट्रेनिंग दी जाती है। इसके बाद उनकी यूनिट में 3 से 6 महीने का विशेष ट्रेनिंग होता है। सूत्रों ने बताया, अगर शुरुआती छह महीनों में सिलेक्शन हो जाए और फिर विशेष ट्रेनिंग दी जाए, तो मौजूदा योजना में अग्निवीर सिर्फ 2 से 2.5 साल के लिए ही उपलब्ध रहते हैं। इतने कम समय में ट्रेनिंग पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा हो जाता है, क्योंकि हर चार साल में प्रशिक्षित सैनिक बाहर चले जाते हैं और नए लोगों को फिर से ट्रेनिंग देनी पड़ती है। इससे संगठन पर बोझ बढ़ता है। इसके अलावा, ट्रेनर्स की कमी भी एक बड़ी दिक्कत है। यही वजह है कि रिटेंशन यानी सेवा अवधि बढ़ाने पर विचार हो रहा है, ताकि ट्रेंड सैनिकों को लंबे समय तक रखा जा सके और बार-बार ट्रेनिंग का बोझ कम हो।

Agniveer Retention Policy: सेना को चाहिए एक्सपर्ट जवान

ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेनाओं में नए हथियार, उपकरण और आधुनिक तकनीकें को तेजी शामिल किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सेना को ऐसे तकनीकी रूप से एक्सपर्ट सैनिक (Agniveer Retention Policy) चाहिए, जो ड्रोन, साइबर युद्ध, लंबी दूरी के हथियार और लेटेस्ट इक्विपमेंट्स को को सही तरह से चला सकें। उदाहरण के लिए, T-90 टैंक, पिनाका रॉकेट लांचर और K9 वज्र तोपें जैसे हथियारों को चलाने के लिए स्पेशल ट्रेनिंग चाहिए। अग्निवीरों को यह ट्रेनिंग उनकी यूनिट्स में दी जाती है। अगर रिटेंशन की दर बढ़ाई गई, तो इन प्रशिक्षित सैनिकों को लंबे समय तक सेवा में रखा जा सकेगा। अधिकारियों का कहना है कि अगर योजना में बदलाव नहीं हुआ, तो 2035 तक कई महत्वपूर्ण तकनीकी पद खाली रह सकते हैं। रिटेंशन बढ़ाने से इन पदों को भरने में मदद मिलेगी।

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क्योंकि इनका सही इस्तेमाल करने के लिए ट्रेंड सैनिकों की जरूरत है। अभी सेना में ज्यादातर अग्निवीरों को स्पेशल ट्रेनिंग (Agniveer Retention Policy) उनकी यूनिट में शामिल होने के बाद दी जाती है। अगर चार साल बाद इनके रिटेंशन कम रही, तो बार-बार नए सैनिकों को ट्रेन करना पड़ेगा, जिससे समय और संसाधन दोनों की बर्बादी होगी। रिटेंशन बढ़ाने से इन प्रशिक्षित सैनिकों को लंबे समय तक नौकरी में रखा जा सकेगा और जिससे उनकी एक्सपर्टाइज का फायदा मिलेगा।

सेना कमांडरों की बैठक में चर्चा

अग्निवीरों को ज़्यादा समय तक नौकरी में रखने का प्रस्ताव अभी शुरुआती दौर में है। सेना में इस पर बातचीत जारी है और अगली सेना कमांडरों की बैठक में इस पर विस्तार से चर्चा होगी। इस बैठक में रिटेंशन दर, ट्रेनिंग की कॉस्ट और सैनिकों की औसत उम्र जैसे मुद्दों पर बात होगी। इसके बाद एक अंतिम प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजा जाएगा।

इसके अलावा नौसेना और वायुसेना भी अग्निवीरों की रिटेंशन बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने पिछले साल कहा था कि अग्निवीरों का प्रदर्शन बेहतरीन रहा है और वायुसेना 25 फीसदी से ज़्यादा अग्निवीरों को रखने के लिए तैयार है। नौसेना भी अपने पहले बैच के चार साल पूरे होने पर नौसैनिकों को लंबे समय तक नौकरी में रखने के लिए तैयार है, हालांकि यह तय नहीं है कि कितने लोगों को स्थाई रखा जाएगा।

सेना प्रमुख ने कही थी ये बड़ी बात

इस साल की शुरुआत में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अग्निपथ योजना में कुछ अन्य बदलावों पर विचार करने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि अग्निवीरों की छुट्टियों को नियमित सैनिकों की तरह करने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा, शहीद होने की स्थिति में अग्निवीरों को नियमित सैनिकों जैसी सुविधाएं देने पर भी विचार हो रहा है। जनरल द्विवेदी ने यह भी कहा कि तकनीकी रूप से कुशल सैनिकों की जरूरत को देखते हुए भर्ती की अधिकतम आयु सीमा 21 साल से बढ़ाकर 23 साल करने पर विचार हो रहा है। क्योंकि सिग्नल और इंजीनियर्स, में अनुभवी सैनिकों की जरूरत है। अग्निपथ योजना अभी इस जरूरत को पूरी तरह पूरा नहीं कर पा रही है, इसलिए इसमें बदलाव की मांग उठ रही है।

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बता दें कि अग्निपथ योजना में अफसर से नीचे के रैंक (PBOR) के जवानों की भर्ती जून 2022 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य सेना को जवान और युद्ध के लिए हमेशा तैयार रखना था। यह पुराने रिक्रूटमेंट सिस्टम से बिल्कुल अलग थी, जिसमें सैनिक करीब 20 साल सेवा करने के बाद रिटायर होते थे। इस योजना के तहत जवानों को सिर्फ चार साल के लिए भर्ती किया जाता है, जिसमें से 25 फीसदी को नियमित सेवा में 15 साल तक रखने का प्रावधान है। भर्ती के लिए उम्र 17.5 से 21 साल तय है। पहले साल में वार्षिक वेतन 4.76 लाख रुपये और चौथे साल में 6.92 लाख रुपये मिलता है, साथ ही 48 लाख रुपये का बीमा और सेवा के दौरान मृत्यु होने पर अतिरिक्त 44 लाख रुपये मुआवज़ा मिलता है। चार साल की सेवा पूरी होने पर 11.71 लाख रुपये की ‘सेवा निधि’ दी जाती है।

ऑपरेशन सिंदूर में अग्निवीरों ने चलाई मिसाइलें

मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 3,000 से अधिक अग्निवीरों ने एयर डिफेंस में अहम जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने ‘आकाशतीर’ एयर डिफेंस कंट्रोल और रिपोर्टिंग सिस्टम को ऑपरेट किया। अग्निवीर एयर डिफेंस यूनिट्स में गनर, ऑपरेटर फायर कंट्रोल, ऑपरेटर रेडियो और हेवी व्हीकल ड्राइविंग जैसे अहम भूमिकाओं में तैनात थे। इसके अलावा उन्होंने कंधे से दागी जाने वाली मिसाइलों से दुश्मन के टारगेट गिराए। L-70 और Zu-23-2B जैसी तोपें चलाईं। पिचोरा, शिलिकाओसारा, स्ट्रेला, Strela, तुंगुस्का और मीडियम रेंज सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें ऑपरेट कीं। उन्होंने रडार और ‘आकाशतीर’ नोड्स चलाए, कम्युनिकेशन नेटवर्क संभाला, और मिसाइल लांच करने वाले व्हीकल्स को ड्राइव किया।

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