📍नई दिल्ली | 6 Oct, 2025, 6:54 PM
Tejas Mk1A Order: भारतीय वायुसेना ने स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट एलसीए तेजस एमके1ए को लेकर बड़ा फैसला लिया है। भारतीय वायुसेना ने अब घरेलू लड़ाकू विमान तेजस एमके1ए के नए ऑर्डर जारी नहीं करने का फैसला किया है। अभी तक दो चरणों में 180 तेजस एमके1ए फाइटर एयरक्राफ्ट के ऑर्डर Tejas Mk1A Order दिए जा चुके हैं। लेकिन इनमें से अभी तक एक भी फाइटर जेट की डिलीवरी नहीं हुई है। वहीं, अक्टूबर में पहले दो तेजस एमके1ए की डिलीवरी की जानी है।
देरी से रणनीतिक योजनाओं पर पड़ा असर
वायुसेना सूत्रों ने बताया कि तेजस एमके1ए (Tejas Mk1A Order) के उत्पादन में देरी और इंजन सप्लाई की दिक्कतों के चलते यह फैसला लिया गया है। वायुसेना के उच्च अधिकारियों का कहना है कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा समय पर डिलीवरी न होने से वायुसेना की रणनीतिक योजनाओं पर असर पड़ा है। उन्होंने बताया कि 2021 में दिए गए 83 तेजस एमके1ए विमानों के ऑर्डर की डिलीवरी अभी पूरी नहीं हुई, जबकि नए 97 विमानों का ऑर्डर जारी हो चुका है।
मार्क1ए के नए ऑर्डर देने की कोई गुंजाइश नहीं
सूत्रों ने कहा कि फरवरी 2021 में हुए 48,000 करोड़ रुपये के पहले सौदे के तहत 83 विमानों (73 सिंगल-सीटर और 10 ट्रेनर) की डिलीवरी मूल रूप से मार्च 2024 से शुरू होनी थी, लेकिन देरी से यह मार्च 2025 तक खिसक गई। वहीं इनमें से दो विमान की डिलीवरी अक्टूबर 2025 में प्रस्तावित है, और वित्त वर्ष 2025 के अंत तक 12 विमान वायुसेना को मिलने की उम्मीद है।
सूत्रों ने कहा कि डिलीवरी में देरी इतनी हो चुकी है कि फिलहाल तेजस मार्क1ए (Tejas Mk1A Order) के नए ऑर्डर देने की कोई गुंजाइश ही नहीं हैं। उन्होंने बताया कि अब वायुसेना का पूरा फोकस तेजस मार्क2 पर है। जिसके प्रोटोटाइप की पहली उड़ान 2026 के आखिर तक या 2027 की शुरुआत में होने की उम्मीद है। उम्मीद जताई जा रही है कि इसका प्रोडक्शन 2028 से शुरू हो जाएगा, जो 2035 तक चलेगा।
एयर चीफ ने भी की मार्क2 की वकालत
हाल ही में 93वें एयर फोर्स डे पर भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि तेजस भविष्य की हल्के लड़ाकू विमानों की जरूरतों के लिए हमारी रीढ़ है। उन्होंने कहा कि एलसीए मार्क2 मेरी नजर में मार्क1ए का ही एक एक्सटेंशन है। यह एक बड़ा प्लेटफॉर्म होगा, जो अधिक हथियार ले जा सकेगा, लंबी दूरी और ज्यादा समय तक ऑपरेट कर सकेगा और बड़े हथियार ले जाने में सक्षम होगा। इसलिए यह वायुसेना की योजनाओं में बड़ी अहमियत रखता है।
उन्होंने कहा कि अगर एमके2 प्रोग्राम समय पर होता, तो संभव है कि एलसीए मार्क1ए (Tejas Mk1A Order) की कुछ अगली खेप मार्क2 के रूप में ऑर्डर की जाती। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में इस पर विचार हो सकता है। तेजस मार्क1ए की टाइमलाइन पर उन्होंने कहा कि यह विमान वायुसेना की दी गई क्वॉलिफिकेशन रिक्वायरमेंट्स के अनुसार डेवलप किया जा रहा है, और जैसे ही एचएएल इसे सर्टीफाइड करेगा, वायुसेना इसे शामिल करने के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि उत्पादन शुरू हो चुका है, कुछ वादे किए गए हैं, कुछ रिसर्च और डेवलपमेंट का काम बाकी है। जैसे ही यह पूरा होगा, हम विमान लेने के लिए तैयार हैं।
प्रोडक्शन स्पीड है असली चुनौती
हालांकि, एयर चीफ ने साफ कहा कि असली चुनौती प्लेटफॉर्म की नहीं बल्कि प्रोडक्शन स्पीड की है। उन्होंने कहा, “वायुसेना को हर साल कम से कम दो स्क्वाड्रन यानी 30 से 40 फाइटर विमान चाहिए ताकि पुरानी हो चुकी फ्लीट को समय रहते बदला जा सके।” वर्तमान में वायुसेना के पास करीब 30 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जो उसकी स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन की ताकत से काफी कम है। पुराने मिग-21, मिग-27 और जैगुआर विमानों के तेजी से रिटायर होने के कारण यह अंतर और बढ़ता जा रहा है।
एयर चीफ मार्शल सिंह ने एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम पर भी भरोसा जताया। उन्होंने कहा, “AMCA की पहली उड़ान 2028 के आसपास और इंडक्शन 2035 तक का लक्ष्य है। अगर फोकस बनाए रखा जाए तो यह समयसीमा पूरी हो सकती है या उससे भी बेहतर प्रदर्शन हो सकता है। हमें अब स्पष्ट रूप से पता है कि हमें कौन-सी तकनीक चाहिए और वह कहां उपलब्ध है।”
एमके2 पर शिफ्ट कर दें 97 विमानों का ऑर्डर – Tejas Mk1A Order
वहीं सूत्रों का कहना है कि एमके1ए के 97 विमानों के दूसरे ऑर्डर को एमके2 पर शिफ्ट कर देना चाहिए। अगर हम जल्दी ऑर्डर देते हैं, तो दोनों का प्रोडक्शन साथ शुरू हो सकता है, जिससे समय और क्षमता दोनों में बड़ा अंतर आएगा।”
एमके2 में अधिक पेलोड, लंबी रेंज और एडवांस्ड एवियोनिक्स होंगे, जिससे यह अगले दशक में भारत की सामरिक बढ़त बनाए रखने के लिए उपयुक्त प्लेटफॉर्म साबित होगा। भारतीय वायुसेना और सरकार अब तेजस एमके1, एमके1ए और एमके2 के तीनों वेरिएंट्स में कुल 350 से अधिक स्वदेशी एलसीए को शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
83 विमानों का पहला ऑर्डर दिया था 2021 में – Tejas Mk1A Order
फरवरी 2021 में कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी ने 83 तेजस एमके1ए विमानों के ऑर्डर को मंजूरी दी थी, जिसमें 73 सिंगल-सीटर और 10 ट्रेनर शामिल थे। इस सौदे की कुल लागत 48,898 करोड़ रुपये थी और प्रति विमान की कीमत लगभग 579 करोड़ रुपये के आसपास थी, जिसमें हथियार, रखरखाव और ट्रेनिंग का खर्च शामिल था। इसके लिए अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक के साथ अगस्त 2021 में 5,375 करोड़ रुपये की सौदे के तहत 99 जीई-एफ404 टर्बोफैन इंजन देने का करार किया गया था।
सितंबर 25 में दूसरा ऑर्डर
वहीं, इस साल 25 सितंबर को रक्षा मंत्रालय ने 97 तेजस मार्क1ए की खरीद का ऑर्डर जारी किया, जिसकी कुल लागत 62,370 करोड़ रुपये थी। इन विमानों में 68 लड़ाकू और 29 ट्विन-सीटर ट्रेनर शामिल हैं। वहीं, इस डील के मुताबिक इन विमानों की डिलीवरी 2027-28 से शुरू होगी और अगले छह सालों में 2034 तक पूरी की जानी है। जल्द ही हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और जीई के बीच 113 अतिरिक्त इंजनों की खरीद का नया सौदा लगभग 1 बिलियन डॉलर का होने वाला है।
एचएएल ने बढ़ाई क्षमता
Chlenge Tejas Mk1A Order तेजस एमके1ए की डिलीवरी फरवरी 2024 से शुरू होनी थी, लेकिन जनरल इलेक्ट्रिक के एफ-404 इंजनों की सप्लाई चेन समस्या के चलते डिलीवरी की तारीख आगे खिसकती रही जो इस साल मार्च 2025 तक पहुंच गई। इस साल अक्तूबर तक चार एफ404 इंजन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के पास पहुंच चुके हैं। और साल के अंत तक सात और आने की उम्मीद है।
एचएएल के मुताबिक अक्टूबर में नासिक स्थित प्रोडक्शन लाइन से फ्लाइट टेस्ट शेड्यूल किए गए हैं। नासिक फैसिलिटी को अप्रैल 2023 में 150 करोड़ रुपये से अधिक की लागत के साथ शुरू किया गया था। यह एचएएल की तीसरी प्रोडक्शन लाइन है। यहां हर साल आठ विमान तैयार करने की क्षमता है। बेंगलुरु की दो मौजूदा लाइनों के साथ मिलकर एचएएल का टारगेट है कि वर्ष 2027 से हर साल 24 तेजस एमके1ए विमानों की डिलीवरी की जाए। एचएएल का कहना है कि मार्च 2026 तक उसे 12 इंजन मिल जाएंगे। इसके बाद अगले वित्त वर्ष में सप्लाई सुचारू हो जाएगी। 2026–27 तक एचएएल का लक्ष्य हर साल 30 तेजस एमके1ए विमान तैयार करना है। इसमें निजी और सरकारी साझेदार कंपनियों को भी शामिल किया जाएगा।
2031-32 तक 180 एमके1ए की डिलीवरी
सूत्रों का कहना है कि एचएएल की मौजूदा रफ्तार का आकलन करें तो अकेले 83 विमानों का सौदा 2028-29 तक पूरा हो सकेगा। वहीं, दूसरे सौदे की डिलीवरी 2028 से शुरू होगी, और 2031 तक पूरी होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, 2031-32 तक 180 एमके1ए वायुसेना में शामिल हो जाएंगे, जिससे कुल एलसीए तेजस फ्लीट 220 तक पहुंचेगी।
तेजस मार्क1 के दो एक्टिव स्क्वाड्रन
Tejas Mk1A Order वहीं, तेजस मार्क 1 की बात करें तो 2009-2010 में वायुसेना ने 40 तेजस एमके1 विमानों का पहला ऑर्डर दिया था, जिसकी लागत 8,802 करोड़ रुपये थी। प्रति विमान लगभग 220 करोड़ रुपये पड़े। इनमें से 32 सिंगल-सीट इनिशियल ऑपरेशनल क्लियरेंस कॉन्फिगरेशन में थे, जो 2016 में इंडक्ट हुए। दूसरा ऑर्डर 2016 में 20 फाइनल ऑपरेशनल क्लियरेंस विमानों का था, जिसकी कीमत 6,500 करोड़ रुपये थी। ये तेजस मार्क 1 वायुसेना की दो स्क्वाड्रन नंबर 45 ‘फ्लाइंग डैगर्स’ और नंबर 18 ‘फ्लाइंग बुलेट्स’ में तैनात हैं, जो तमिलनाडु के सुलुर एयर फोर्स स्टेशन में है।



