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Tejas Mk-1A Price Hike: अब 97 नए तेजस मार्क-1ए को महंगे दामों पर बेचेगी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड! जानें HAL ने क्यों बढ़ाईं कीमतें?

हर विमान की कीमत में करीब 102 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी, आंकड़ों के अनुसार, यह बढ़ोतरी लगभग 17.6 फीसदी...

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📍नई दिल्ली | 4 Sep, 2025, 12:10 PM

Tejas Mk-1A Price Hike: भारतीय वायुसेना को मिलने वाले स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस तेजस मार्क-1ए फाइटर जेट अब पहले से महंगे हो गए हैं। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के वरिष्ठ सूत्रों ने पुष्टि की है कि नए करार में तेजस की कीमत में लगभग 17.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 2021 में हुए पिछले सौदे में एक विमान की औसत कीमत करीब 578 करोड़ रुपये थी, जबकि अब यह बढ़कर लगभग 680 करोड़ रुपये प्रति एयरक्राफ्ट हो गई है। तेजस की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं।

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Tejas Mk-1A Price Hike: वायुसेना को मिलेगा 97 नए तेजस तेजस मार्क-1ए का बेड़ा

हाल ही में 19 अगस्त को सरकार ने भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए 97 नए तेजस मार्क-1A (मार्क वन अल्फा) फाइटर जेट्स का ऑर्डर दिया था। यह डील करीब 62,000 करोड़ रुपये की है और इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड तैयार करेगी। इस सौदे की पुष्टि 21 अगस्त 2025 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी की।

इससे पहले 2021 में वायुसेना ने 83 तेजस Mk-1A का ऑर्डर दिया था जिसकी कीमत करीब 48,000 करोड़ रुपये थी। यानी अब तक कुल 180 तेजस Mk-1A का ऑर्डर हो चुका है। ये विमान धीरे-धीरे भारतीय वायुसेना के पुराने मिग-21 जेट्स की जगह लेंगे।

Tejas Mk-1A Price Hike: एचएएल सूत्रों ने की बढ़ी हुईं कीमतों की पुष्टि

एचएएल के वरिष्ठ सूत्रों ने रक्षा समाचार को इस बात की पुष्टि की है कि नए करार में तेजस Mk-1A की प्रति विमान लागत पहले के मुकाबले बढ़ गई है। 2021 में हुए करार के मुताबिक एक विमान की औसत कीमत करीब 578 करोड़ रुपये थी। अब नए करार में यह बढ़कर लगभग 680 करोड़ रुपये प्रति एयरक्राफ्ट हो गई है।

इस तरह हर विमान की कीमत में करीब 102 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, यह बढ़ोतरी लगभग 17.6 फीसदी है।

Tejas Mk-1A Price Hike: क्यों बढ़ी कीमतें

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के सूत्रों ने बताया कि कीमतें बढ़ने के पीछे कई कारण गिनाए हैं। उन्होंने कहा कि कीमतों में यह इजाफा न केवल महंगाई और ग्लोबल सप्लाई चेन की दिक्कतों का नतीजा है, बल्कि नए तकनीकी अपग्रेड और आधुनिक रडार सिस्टम के शामिल होने की वजह से भी हुआ है।

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उन्होंने पहला कारण गिनाते हुए कहा कि ग्लोबल महंगाई और सप्लाई चेन में बाधा बड़ी वजह रही है। 2021 के बाद से कच्चे माल, एवियोनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक चिप्स की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। वहीं, कीमतों में बढ़ोतरी की वजह टेक्निकल अपग्रेड भी है। सूत्रों ने बताया कि नए तेजस Mk-1A विमानों में कई अत्याधुनिक फीचर्स जोड़े जाएंगे। इनमें ‘उत्तम’ AESA रडार, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट, और आधुनिक हथियारों को इंटीग्रेट करने की क्षमता शामिल है।

वहीं तीसरा कारण उन्होंने सपोर्ट पैकेज को बताया। इसमें ग्राउंड सपोर्ट उपकरण, पायलट और तकनीकी स्टाफ की ट्रेनिंग और स्पेयर पार्ट्स शामिल हैं। ये सभी चीजों के चलते करार की कुल लागत में बढ़ोतरी हुई है।

Tejas Mk-1A Price Hike: अतिरिक्त इंजन खरीदने पर बातचीत

97 तेजस Mk-1A को उड़ाने के लिए अतिरिक्त GE-404 इंजनों की जरूरत होगी। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और अमेरिकी कंपनी जीई एरोस्पेस के बीच 113 अतिरिक्त इंजन खरीदने की डील पर भी बातचीत चल रही है। इस इंजन डील की कीमत करीब 1 बिलियन डॉलर (लगभग 8,300 करोड़) बताई जा रही है। जल्द ही इस डील को अंतिम स्वरूप दे दिया जाएगा।

इससे पहले 2021 में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने 99 इंजन का ऑर्डर दिया था। मार्च 2025 तक जीई ने पहला इंजन डिलीवर भी कर दिया है। अनुमान है कि हर साल लगभग 20 इंजन भारत को दिए जाएंगे।

इसके साथ ही, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और जीई के बीच GE-414 इंजन की जॉइंट प्रोडक्शन पर भी बातचीत हो रही है। ये इंजन तेजस Mk-2 के लिए होंगे और इसमें 80 फीसदी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होगा।

अक्टूबर में दो तेजस एमके1ए की डिलीवरी

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के सूत्रों ने बताया कि दो साल की देरी के बाद अगले महीने अक्टूबर में दो तेजस Mk-1A वायुसेना को डिलीवर कर दिए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड इस महीने तेजस मार्क-1A का फाइनल फायरिंग टेस्ट पूरा करेगा। इन परीक्षणों में देश में विकसित बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइल अस्त्र, शॉर्ट रेंज मिसाइल ASRAAM, ब्रह्मोस एनजी और लेजर-गाइडेड बम का फायरिंग टेस्ट किया जाएगा। परीक्षण सफल रहने पर ही विमान वायुसेना को सौंपे जाएंगे।

उन्होंने बताया कि जीई अगले साल मार्च 2026 तक 10 इंजन और फिर दिसंबर 2026 तक 20 और इंजन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को डिलीवर करेगी।

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इससे पहले रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 30 अगस्त 2025 को एक डिफेंस कॉन्क्लेव में तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी को लेकर कहा था कि लगभग 38 तेजस विमान पहले से ही सेवा में हैं, और 80 से अधिक का निर्माण चल रहा है। इनमें से 10 विमान तैयार हैं, और दो इंजन अब तक डिलीवर किए जा चुके हैं। उम्मीद है कि इनमें से पहले दो विमान सितंबर 2025 के आखिर तक डिलीवर कर दिए जाएंगे।

उन्होंने कहा था कि हम अगले महीने 97 अतिरिक्त तेजस मार्क-1ए विमानों के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत करेंगे, जिसकी कीमत 67,000 करोड़ रुपये से अधिक होगी।

वायुसेना की स्क्वॉड्रन स्ट्रेंथ

भारतीय वायुसेना चीफ एयर चीफ मार्शल एपी सिंह पहले ही कह चुके हैं कि वायुसेना को हर साल कम से कम 35-40 नए फाइटर जेट्स की जरूरत है। इस समय वायुसेना के पास केवल 31 स्क्वॉड्रन हैं।

26 सितंबर को मिग-21 के दो स्क्वॉड्रन रिटायर होने के बाद यह संख्या घटकर 29 स्क्वॉड्रन रह जाएगी। जबकि टू-फ्रंट वॉर की संभावना (पाकिस्तान और चीन) को देखते हुए वायुसेना के पास 42 स्क्वॉड्रन होना जरूरी माना गया है।

60 फीसदी स्वदेशी कंपोनेंट

तेजस मार्क-1ए कार्यक्रम में 60 फीसदी से अधिक कंपोनेंट भारत में बने हैं। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ-साथ कई निजी कंपनियां भी इसमें जुड़ी हैं। लार्सन एंड टुब्रो, डायनामेटिक टेक्नोलॉजीज और VEM टेक्नोलॉजीज जैसी कंपनियां इसमें अहम योगदान दे रही हैं।

तेजस मार्क-1ए की रफ्तार और रेंज

तेजस मार्क-1ए एक सुपरसोनिक फाइटर जेट है, जिसकी अधिकतम गति मैक 1.6 यानी करीब 2,200 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह जेट हवा में तेजी से ऊंचाई पकड़ सकता है और दुश्मन के विमान या मिसाइल को बहुत कम समय में चुनौती देने में सक्षम है। इसकी कॉम्बैट रेंज लगभग 500 किलोमीटर तक है, जबकि फेरी रेंज यानी बिना हथियार के लंबी दूरी की उड़ान क्षमता 1,700 किलोमीटर से अधिक है।

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तेजस मार्क-1ए आधुनिक हथियारों से लैस है। इसमें बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइल एस्ट्रा, ASRAAM जैसी शॉर्ट-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइलें, लेजर-गाइडेड बम और प्रिसिजन-गाइडेड म्यूनिशन (PGM) लगाए जा सकते हैं। साथ ही, इसमें ब्रह्मोस-NG (नेक्स्ट जनरेशन) जैसी सुपरसोनिक मिसाइलें भी लगाई जा सकती हैं। तेजस पर 3,500 किलोग्राम तक का हथियार लोड किया जा सकता है, जिसमें एयर-टू-एयर, एयर-टू-ग्राउंड और एंटी-शिप मिसाइलें शामिल हैं।

रडार सिस्टम की बात करें, तेजस मार्क-1ए को उत्तम AESA रडार से लैस किया गया है, जिसे डीआरडीओ ने बनाया है। यह गैलियम नाइट्राइड (GaN) तकनीक पर आधारित है, जिससे यह दुश्मन के विमानों को लंबी दूरी से ट्रैक और टारगेट करने में सक्षम है। AESA रडार एक साथ कई लक्ष्यों पर नज़र रख सकता है और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से भी बचाता है। इसके अलावा, विमान में एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट है, जो दुश्मन के रडार और मिसाइल गाइडेंस को चकमा दे सकता है।

तेजस मार्क-1ए का डिजाइन हल्का और एयरोडायनामिक है, जिससे इसे एजिलिटी मिलती है। इसका फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम इसे बेहद स्थिर और सुरक्षित बनाता है। इसके साथ ही इसमें नाइट विजन कंपैटिबल ग्लास कॉकपिट, हेलमेट-माउंटेड डिस्प्ले (HMD) और मल्टी-फंक्शनल डिस्प्ले (MFDs) लगे हैं, जिससे पायलट को मिशन के दौरान तुरंत जानकारी मिलती है।

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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