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MiG-21 Variants History: मिग-21 इंटरसेप्टर से कैसे बना “रनवे बस्टर”, जानिए हर वैरिएंट की कहानी, 4th जनरेशन फाइटर जेट्स को दे सकता था मात

1960 के दशक में भारतीय वायुसेना को मिग-21PF वैरिएंट मिला, जिसे टाइप 76 भी कहा जाता है। इसे खास तौर पर दुश्मन के विमानों को इंटरसेप्ट करने के लिए बनाया गया था। इस वैरिएंट में टेल श्यूट और R1L AI रडार लगा हुआ था। इसका मतलब "Perekhvatchik Forsirovanny" (रूसी में), जिसका अर्थ है "इंटरसेप्टर, फोर्स्ड" (बूस्टेड इंजन वाला इंटरसेप्टर)...

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📍नई दिल्ली | 15 Sep, 2025, 7:54 PM

MiG-21 Variants History: भारतीय वायुसेना का इतिहास कई ऐसे लड़ाकू विमानों से भरा है, जिन्होंने दशकों तक आसमान में भारत की ताकत का परचम लहराया। लेकिन जब भी इस गौरवशाली सफर की चर्चा होती है, तो मिग-21 का नाम सबसे पहले आता है। लगभग छह दशक तक यह जेट भारतीय वायुसेना की रीढ़ बना रहा।

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1963 में जब पहला मिग-21 भारत आया, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह विमान आने वाले कई दशकों तक देश की हवाई सुरक्षा का अहम हिस्सा बना रहेगा। 1965 के युद्ध से लेकर 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम, 1999 के कारगिल युद्ध और 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक तक, MiG-21 ने बार-बार अपनी ताकत साबित की।

अब जब यह विमान 2025 में इतिहास बनने जा रहा है, तो आइए विस्तार से जानते हैं भारत में मिग-21 के सभी वैरिएंट्स का सफर।

MiG-21 Variants History India
MiG-21PF

MiG-21 Variants History: मिग-21PF (Type 76): भारत का पहला इंटरसेप्टर

1960 के दशक में भारतीय वायुसेना को मिग-21PF मिला, जिसे टाइप 76 भी कहा जाता है। यह मूल रूप से एक इंटरसेप्टर विमान था, जिसका काम दुश्मन के विमानों को रोकना और गिराना था। इसमें R1L AI रडार और टेल श्यूट लगाया गया था। इसमें ‘PF’ का मतलब रूसी में “Perekhvatchik Forsirovanny” था, यानी “बूस्टेड इंजन वाला इंटरसेप्टर”। इसमें ट्यूमांस्की R-11F-300 टर्बोजेट इंजन, जो 5,740 किग्रा थ्रस्ट (आफ्टरबर्नर के साथ) देता था। इसकी अधिकतम रफ्तार मैक 2.05 (2,230 किमी/घंटा) थी। इसमें 30एमएम की NR-30 कैनन, हवा-से-हवा मिसाइलें, जैसे K-13 (AA-2 Atoll) और हवा-से-जमीन पर मार करने वाले हथियार लगे थे। भारत ने इन विमानों को सीधे सोवियत संघ से आयात किया था।

भारतीय वायुसेना की 28 स्क्वॉड्रन ने इस वैरिएंट से शुरुआत की। बाद में इन्हें अपग्रेड करके टाइप 77 स्क्वॉड्रनों में शामिल किया गया। यह वह दौर था, जब भारत सुपरसोनिक जेट युग में प्रवेश कर रहा था और मिग-21PF ने इस सफर की शुरुआत की।

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MiG-21 Variants History: मिग-21R: “फाइटर रेक्की”

मिग-21R को “फाइटर रेक्की” (Fighter Reconnaissance) के रूप में जाना जाता था। यह एक ऐसा वेरिएंट है जिसने टोही मिशनों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसमें ‘R’ का अर्थ रूसी भाषा में “Razvedchik” यानी रेकनाइसेंस था।

मिग-21R को खासतौर पर हवाई टोही मिशनों के लिए डिजाइन किया गया था। यह विमान मिग-21PF और PFM मॉडल्स पर आधारित था, लेकिन इसमें एडवांस कैमरे, सिग्नल इंटेलिजेंस (SIGINT) सेंसर, और बाहरी रेकनाइसेंस पॉड्स जोड़े गए थे। यह न केवल टोह लेने में माहिर था, बल्कि जरूरत पड़ने पर लड़ाकू भूमिका भी निभा सकता था।

इसमें ट्यूमांस्की R-11F2S-300 टर्बोजेट लगा था, जो 6,175 किग्रा थ्रस्ट देता था। वहीं, इसकी अधिकतम रफ्तार मैक 2.05 (2,230 किमी/घंटा) थी। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में इसने सीमा क्षेत्रों की निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने में अहम योगदान दिया। इसके बाहरी पॉड्स में लगे पैनोरमिक और ओब्लिक कैमरों ने युद्ध के दौरान खुफिया जानकारियां जुटाईं थीं।

मिग-21FL (Type 77): भारत का वर्कहॉर्स

MiG-21FL यानी टाइप 77, भारतीय वायुसेना का पहला वैरिएंट था, जिसे भारत में ही हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने बनाया। इसमें R11F-300 इंजन और RP-21 रडार लगाया गया था। FL का मतलब था “Forsazh” (आफ्टरबर्नर) और “Lokator” (रडार) यानी “बूस्टेड लाइट” वेरिएंट। इसमें ट्यूमांस्की R-11F2S-300 टर्बोजेट इंजन, जो 6,175 किग्रा थ्रस्ट (आफ्टरबर्नर के साथ) देता था। इसकी टॉप स्पीड मैक 2.05 (2,230 किमी/घंटा) थी।

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MiG-21FL

1966 से 1973 के बीच रूस से 38 और HAL द्वारा 197 जेट बनाए गए। यह पहला वैरिएंट था, जिसने सिर्फ इंटरसेप्शन नहीं, बल्कि ग्राउंड अटैक मिशनों में भी अपनी ताकत साबित की।

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1971 के युद्ध में मिग-21FL ने पाकिस्तान के एयरबेस और रनवे पर हमला किया, जिससे इसे “रनवे बस्टर्स” का नाम मिला। इसने पाकिस्तानी F-86, F-104 स्टारफाइटर और F-6 को भी मार गिराया।

मिग-21M (Type 96): मल्टीरोल फाइटर

MiG-21 M यानी टाइप 96 को मल्टीरोल एयरक्राफ्ट कहा जाता था। क्योंकि यह सिर्फ ऊंचाई पर ही नहीं बल्कि लो और मिड एल्टीट्यूड पर भी काम कर सकता था। ‘M’ का मतलब रूसी में “Modernizirovanny” था, यानी “आधुनिकीकरण”। यह विमान भारतीय वायु सेना की रीढ़ रहा और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने इसे स्वदेशी रूप से निर्मित किया था।

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MiG-21M

इसमें RP-21M रडार, GSh-23L कैनन और R-3S इंफ्रारेड सीकर मिसाइलें लगी थीं। साथ ही यह एडवांस नेविगेशन सिस्टम, रेडियो कम्युनिकेशन, और IFF (Identification Friend or Foe) सिस्टम से भी लैस था।

मिग-21M ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसने हवाई युद्ध में पाकिस्तानी विमानों को चुनौती दी और जमीनी ठिकानों पर हमले किए। मिग-21M ने पाकिस्तान के कई एयरबेस और रनवे तबाह किए।

मिग-21Bis (Type 75): सबसे ताकतवर वैरिएंट

MiG-21 Bis, यानी टाइप 75, को मिग-21 का सबसे एडवांस और आधुनिक वैरिएंट माना गया। ‘Bis’ रूसी में “दूसरा” या “संशोधित” कहा जाता था, जिससे पता लगता था कि यह एडवांस फीचर्स वाला फाइटर जेट था। इसमें RP-22 Sapfir-21 रडार लगा था, जो हवाई और जमीनी लक्ष्यों को ट्रैक करने में सक्षम था, और मिग-21M की तुलना में अधिक पावरफुल था।

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MiG-21Bis

इसमें R25-300 टर्बोजेट इंजन था, जो 7,100 किग्रा थ्रस्ट (आफ्टरबर्नर के साथ) देता था। जिससे इसे डॉगफाइट में जबरदस्त ताकत मिली। इसमें R-60M मिसाइलें भी थीं, जिससे यह चौथी पीढ़ी के पश्चिमी फाइटर्स का सामना कर सकता था। इसे बड़े पैमाने पर भारत में बनाया गया और यह 1970 से 1990 के दशक तक भारतीय वायुसेना का मुख्य वर्कहॉर्स रहा। मिग-21Bis ने 1999 के कारगिल युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, और जमीनी ठिकानों पर सटीक हमले किए। इसकी चुस्ती और तेज रफ्तार ने इसे हाई एल्टीट्यूड इलाकों के लिए मुफीद बनाया। मिग-21Bis का इस्तेमाल पायलट ट्रेनिंग और टैक्टिकल ऑपरेशन्स में भी किया गया। हर आपातकालीन स्थिति में सबसे पहले इसी वैरिएंट को स्क्रैम्बल किया जाता था।

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मिग-21 Bison: अपग्रेडेड योद्धा

1996 में भारत ने 125 MiG-21 Bis को अपग्रेड करने का फैसला लिया। इनमें से 123 को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड नासिक फैक्ट्री में 2001 से 2008 के बीच अपग्रेड किया गया और उन्हें नया नाम मिला – मिग-21 बाइसन। इस अपग्रेड के तहत एयरफ्रेम को नया जीवन दिया गया। नई कैनोपी, मल्टीफंक्शन डिस्प्ले, हेड-अप डिस्प्ले, ऑटोपायलट, GPS, इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम और फाजोट्रॉन कोप्यो (Kopyo) रडार लगाया गया। फाजोट्रॉन कोप्यो मल्टी-मोड रडार था, जो हवाई और जमीनी टारगेट्स को 57 किमी तक ट्रैक कर सकता था। यह चौथी पीढ़ी के विमानों का भी मुकाबला कर सकता था।

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MiG-21 Bison

यह रडार एक साथ आठ टारगेट ट्रैक कर सकता था और दो को एंगेज कर सकता था। इसके साथ R-27, R-77 और R-73 जैसी एयर-टू-एयर मिसाइलें और KAB-500Kr लेजर-गाइडेड बम भी शामिल किए गए। इसमें मल्टी-फंक्शन डिस्प्ले और हेड-अप डिस्प्ले, एडवांस नेविगेशन सिस्टम, जैसे GPS और INS, इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर और रडार वॉर्निंग रिसीवर, IFF सिस्टम और डेटा लिंक जैसे फीचर थे।

2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद हुई हवाई लड़ाई में विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान ने इसी मिग-21 बाइसन से पाकिस्तान के आधुनिक F-16 को मार गिराकर इतिहास रचा था।

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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