📍नई दिल्ली | 23 Sep, 2025, 10:04 PM
MiG-21 Retirement on Sept 26: भारतीय वायुसेना के लिए साल 2025 बेहद अहम रहा है। पहले ऑपरेशन सिंदूर और अब वायुसेना के वर्कहॉर्स के नाम से मशहूर मिग-21 की विदाई भी इसी साल हो रही है। पिछले पांच दशकों से आसमान पर राज करने वाला मिग-21 26 सितंबर को भारतीय वायुसेना को अलविदा कह देगा। इनके साथ ही भारतीय वायुसेना के इतिहास का एक बड़ा अध्याय भी बंद हो जाएगा। भारतीय वायुसेना के इतिहास में शायद मिग-21 ही ऐसा फाइटर जेट रहा है, जिस पर पायलटों की कई पीढ़ियों ने ट्रेनिंग ली है। पिता ने भी मिग-21 को उड़ाया तो बेटे ने भी बाइसन पर ट्रेनिंग लेकर अपने करियर की नींव रखी। ऐसी ही एक कहानी है पाकिस्तान का एफ-16 गिराने वाले अभिनंदन वर्थमान की।
MiG-21 Retirement on Sept 26: एफ-16 और मिग-21 की यादगार डॉगफाइट
साल 2019 का वह वाकया तो आपको याद होगा, जब बालाकोट एयर स्ट्राइक के अगले दिन भारत-पाकिस्तान के फाइटर जेट्स की डॉग फाइट हुई थी। इसी दौरान जब ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्थमान ने पाकिस्तानी एफ-16 को अपने मिग-21 बाइसन से गिराया था। हालांकि उनका विमान भी गिरा और उन्हें पाकिस्तान ने बंदी बना लिया था। उस दौरान उनकी मूंछों वाली तस्वीर खूब वायरल हुई थी। ऐसा इतिहास में पहली बार था जब किसी MiG-21 ने अमेरिका के अत्याधुनिक एफ-16 को निशाना बनाया हो।
MiG-21 Retirement on Sept 26: दादा भी थे वायुसेना में
वहीं उनके पिता एयर मार्शल (रिटायर्ड) सिम्हकुत्ती वर्थमान भी कभी मिग-21 उड़ाते थे। वे चार दशक तक वायुसेना में रहे और कई युद्धों व अभियानों का हिस्सा बने। इससे पहले उनके दादा भी वायुसेना में रहे। यानी वर्थमान परिवार की तीन पीढ़ियां भारतीय आसमान की रखवाली करती रही हैं।
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— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) September 23, 2025
MiG-21 Retirement on Sept 26: 1973 में जॉइन की थी वायुसेना
तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित सैनिक स्कूल अमरावतीनगर से पढ़ाई करने के बाद एयर मार्शल सिम्हकुत्ती वर्थमान ने 1973 में वायुसेना जॉइन की। वे एक कुशल फाइटर पायलट बने और बाद में टेस्ट पायलट के रूप में जाने गए। उनके करियर के कई अहम पड़ाव भारतीय वायुसेना के इतिहास से जुड़े हुए हैं।
पूर्वी क्षेत्र में उन्होंने मिग-21 स्क्वॉड्रन की कमान संभाली। उनकी यूनिट ने 9,500 उड़ानें बिना किसी दुर्घटना के पूरी कीं, जिसके लिए उन्हें 2002 में विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। सिम्हकुत्ती ने MiG-21 के कई वेरिएंट्स जैसे टाइप 77 औऱ बाइसन उड़ाए।
1999 के कारगिल युद्ध के दौरान वे ग्वालियर एयरबेस के चीफ ऑपरेशंस ऑफिसर थे। उनकी प्लानिंग और कॉर्डिनेशन के कारण मिराज-2000 विमानों का इस्तेमाल कर भारत ने पाकिस्तानी ठिकानों को सटीक निशाना बनाया। यह युद्ध भारतीय वायुसेना की क्षमता दिखाने वाला अहम मोड़ था।
बेंगलुरु की एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट (ASTE) में वे चीफ टेस्ट पायलट रहे। यहां उन्होंने मिग-21 सहित कई विमानों की टेस्टिंग की। बाद में 2011 में उन्हें ईस्टर्न एयर कमांड का प्रमुख बनाया गया और 2012 में वे रिटायर हुए। उनकी पत्नी डॉ. शोभा वर्थमान डॉक्टर हैं और बेटी अदिति फ्रांस में रहती हैं।
MiG-21 Retirement on Sept 26: हीरो बनकर लौटे थे अभिनंदन
वहीं, अभिनंदन 2004 में भारतीय वायुसेना में कमीशन हुए और फिर फाइटर पायलट बने। वे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के पूर्व छात्र रहे हैं। अभिनंदन ने 16 साल तक मिग-21 उड़ाया और 3,000 से ज्यादा उड़ान घंटे पूरे किए।
26 फरवरी 2019 को भारत ने बालाकोट एयरस्ट्राइक कर पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को नष्ट किया, तो अगले दिन पाकिस्तानी वायुसेना ने जवाबी कार्रवाई की और एफ-16 समेत कई लड़ाकू विमान भारतीय सीमा में दाखिल हुए। अभिनंदन ने श्रीनगर एयर बेस से MiG-21 बाइसन से उड़ान भरी। इस दौरान अभिनंदन वर्थमान ने अपने मिग-21 बाइसन के साथ एफ-16 का मुकाबला किया।
उन्होंने हवा में डॉगफाइट कर एक एफ-16 को मार गिराया। लेकिन उनका मिग-21 भी गिरा और उन्हें पाकिस्तान की सीमा में लैंडिंग करनी पड़ी। उन्हें पाकिस्तानी सेना ने पकड़ लिया। दो दिन बाद पाकिस्तान ने उन्हें रिहा कर दिया और वे हीरो बनकर लौटे। इस मिशन में उनकी बहादुरी के लिए उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया गया। उनके थर्ड जनरेशन मिग-21 ने पुराने डिजाइन के बावजूद फोर्थ जनरेशन एफ-16 जैसे आधुनिक जेट को टक्कर दी।
पिता ने कहे थे ये शब्द
जब अभिनंदन पाकिस्तान की हिरासत में थे तो एयर मार्शल (रिटायर्ड) सिम्हकुत्ती वर्थमान ने अपने बेटे विंग कमांडर अभिनंदन वर्थमान की बहादुरी पर गर्व जताया था। पाकिस्तानी मीडिया में अभिनंदन के इंटरोगेशन वीडियो सामने आने के बाद प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा था, “एक सच्चा सैनिक, देखिए कैसे बहादुरी से बोला। मैं प्रार्थना करता हूं कि उसे प्रताड़ित न किया जाए और वह सुरक्षित लौटे।” वहीं जब अभिनंदन रिहा हुए थे उनके पिता ने कहा, “हमारी प्रार्थनाएं सुन ली गईं,” और उन्होंने उनकी मिग-21 उड़ाने की क्षमता को परिवार का गौरव बताया।
एक युग का अंत!
भारतीय वायुसेना के इतिहास में मिग-21 सिर्फ एक फाइटर जेट नहीं है, बल्कि यह एक युग के खत्म होने जैसा है। इस विमान ने 1965, 1971 और 1999 के युद्धों में अपनी अहमियत साबित की। इसने पायलटों को वह अनुभव दिया, जिसने उन्हें अनुभवी बनाया। वर्थमान परिवार इसका जीता-जागता उदाहरण है। पिता और पुत्र दोनों ने अलग-अलग समय में इस विमान को उड़ाया। एक ने कारगिल युद्ध के समय प्लानिंग और स्ट्रैटेजी से इतिहास रचा, तो दूसरे ने पाकिस्तानी F-16 को मार गिराकर नई पीढ़ी के सामने साहस का उदाहरण पेश किया।



