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MiG-21 record flying hours: इस पायलट के लिए मां की तरह था मिग-21! रिकॉर्ड 4000 घंटे भरी उड़ान, 83 साल की उम्र में जताई आखिरी सॉर्टी की इच्छा

एयर कॉमोडोर सुरेंद्र सिंह त्यागी भारतीय वायुसेना के ऐसे फाइटर पायलट रहे जिन्होंने मिग-21 पर सबसे ज्यादा 4000 घंटे और 6000 से अधिक सॉर्टीज उड़ान भरकर इतिहास रच दिया...

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📍नई दिल्ली | 22 Sep, 2025, 2:55 PM

MiG-21 record flying hours: भारतीय वायुसेना के इतिहास में कुछ नाम ऐसे दर्ज होते हैं, जो सिर्फ एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक युग का प्रतीक बन जाते हैं। ऐसा ही एक नाम है रिटायर्ड एयर कोमोडोर सुरेंद्र सिंह त्यागी, जिन्हें उनके साथी पायलट “बंडल” नाम से पुकारते थे। वे भारतीय वायुसेना के ऐसे फाइटर पायलट रहे, जिन्होंने दुनिया में सबसे ज्यादा मिग-21 पर उड़ान भरकर इतिहास रचा।

MiG21 in 1965 War: जब 1965 की जंग में मिग-21 ने पहली बार दिखाई अपनी सुपरसोनिक पावर, हकला गया था पाकिस्तानी एयर फोर्स का स्क्वॉड्रन लीडर

उन्होंने अकेले इस एक विमान पर 4003 घंटे से अधिक और 6316 सॉर्टिज (उड़ान मिशन) पूरे करना अपने आप में ऐसा कीर्तिमान है जिसे कोई और छू भी नहीं सका। यह आंकड़ा इतना बड़ा है कि आज भी यह विश्व रिकॉर्ड बना हुआ है। यहां तक कि रूसी सरकार से मिग-21 पर रिकॉर्ड उड़ान के लिए 2013 में उन्हें ट्रॉफी भी दी थी।

MiG-21 record flying hours
Air Commodore Surendra Singh Tyagi (Photo: Anchit Gupta on X)

MiG-21 record flying hours: मिग-21 के साथ जीवनभर का रिश्ता

साल 1965 में 92वें पायलट कोर्स से कमीशन पाकर सुरेंद्र सिंह त्यागी भारतीय वायुसेना में शामिल हुए। यह दौर बेहद चुनौतीपूर्ण था। चीन के साथ 1962 का युद्ध और पाकिस्तान के साथ 1965 की जंग ने भारत को सिखा दिया था कि वायुसेना की ताकत को लगातार बढ़ाना होगा। इसी समय भारत ने सोवियत संघ से MiG-21 जैसे सुपरसोनिक जेट को अपनी स्क्वाड्रन में शामिल किया।

त्यागी का भाग्य भी उसी समय उन्हें मिग-21 के करीब ले आया। 17 जुलाई 1968 को उन्होंने पहली बार चंडीगढ़ स्थित 45 स्क्वाड्रन में मिग-21 उड़ाया। उस समय पायलट्स हंटर और वैम्पायर जैसे ट्रांसोनिक एयरक्राफ्ट उड़ा रहे थे। MiG-21 की स्पीड और ताकत ने युवा त्यागी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने खुद कहा था कि “जब आफ्टरबर्नर के साथ मिग-21 रनवे से उठा तो ऐसा लगा जैसे मैं अर्जुन के धनुष से निकला हुआ बाण हूं।” उस पहली उड़ान के बाद जो रिश्ता बना, वह जीवनभर कायम रहा।

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MiG-21 record flying hours: 1971 का भारत-पाक युद्ध बना टर्निंग पॉइंट

1971 का भारत-पाक युद्ध त्यागी के करियर का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। उस समय वे तेजपुर एयरबेस से ऑपरेट कर रहे थे। इस युद्ध के दौरान उन्होंने अकेले 22 सॉर्टीज उड़ाईं। उनकी स्क्वाड्रन ने बांग्लादेश में दुश्मन के ठिकानों पर बमबारी की और ढाका एयरबेस को तबाह कर दिया। भारतीय वायुसेना ने पहली बार दिखाया कि MiG-21 सिर्फ इंटरसेप्टर नहीं बल्कि बल्कि मल्टी-रोल फाइटर जेट है, ग्राउंड अटैक, रिकॉनसेंस मिशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तक हर भूमिका निभा सकता है।

MiG-21 record flying hours
Air Commodore Surendra Singh Tyagi (Photo: Anchit Gupta on X)

MiG-21 record flying hours: फाइटर कॉम्बैट लीडर और ट्रेनर

एयर कॉमोडोर त्यागी ने केवल खुद मिग-21 पर उड़ान नहीं भरी बल्कि अनगिनत पायलटों को प्रशिक्षित भी किया। वे फाइटर कॉम्बैट लीडर (FCL) बने और एयर-टू-एयर कॉम्बैट के साथ-साथ एयर-टू-ग्राउंड वेपन ट्रेनिंग भी दी। उन्होंने भारतीय वायुसेना की कई स्क्वाड्रन को ऑपरेशनल बनाया, जिनमें 3, 7, 17, 21 और 26 स्क्वाड्रन शामिल हैं। उनकी ट्रेनिंग टेक्नीक इतनी प्रभावशाली थी कि मात्र 5 महीनों में 13 पायलट्स को पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार कर दिया था।

MiG-21 record flying hours: मिग-21 उड़ाते हुए “ध्यान”

त्यागी के मुताबिक मिग-21 को उड़ाना आसान नहीं था। लेकिन उनके उड़ान भरने का अंदाज बेहद अनोखा था। वे एनर्जी मैनेजमेंट और एंगल-ऑफ-अटैक पर पूरा ध्यान देते थे। यही कारण था कि उन्होंने MiG-21 जैसे कठिन विमान पर हजारों घंटे सुरक्षित उड़ान भरने का रिकॉर्ड बनाया। उनका कहना था, “जब कॉकपिट बंद होता था तो लगता था जैसे ध्यान की अवस्था में चले गए हों। क्योंकि हर पल सावधानी, स्पीड पर नियंत्रण और दुश्मन की हरकतों पर नजर रखना पड़ती थी।” यही वजह थी कि उन्होंने कभी भी गंभीर दुर्घटना का सामना नहीं किया और सुरक्षित रहते हुए हजारों घंटे उड़ान पूरी की।

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उन्होंने 1978 में एक इंजन फेलियर के चलते 400 किमी/घंटा की स्पीड से क्रैश लैंडिंग भी की, लेकिन साइड-टर्न से बच गए। मिग-21 की “स्नेकिंग” (मैक 2.3 से ऊपर अस्थिरता) को मास्टर किया, जो मैक 2.45 तक जा सकता था।

उनके साथी पायलट याद करते हैं कि वे हमेशा शांत, संयमित और अनुशासित रहते थे। उनके लॉगबुक को देखकर कोई भी समझ सकता था कि वे कितनी बारीकी और जिम्मेदारी से हर उड़ान दर्ज करते थे।

MiG-21 record flying hours: इराकी वायुसेना को दी ट्रेनिंग

साल 1981 से 1983 के बीच सुरेंद्र सिंह त्यागी को इराक भेजा गया। वहां उन्होंने इराकी वायुसेना को मिग-21 उड़ाने की ट्रेनिंग दी। इस दौरान भी उन्होंने लगभग 445 घंटे की उड़ान भरी। यह अनुभव उनके लिए बेहद अनोखा था क्योंकि इससे उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मिग-21 की क्षमताओं को साबित किया।

MiG-21 record flying hours
Air Commodore Surendra Singh Tyagi (Photo: Anchit Gupta on X)

MiG-21 record flying hours: मां की तरह था मिग-21

26 सितंबर 2025 को मिग-21 भारतीय वायुसेना से विदा हो जाएगा। लेकिन इससे पहले एयर कॉमोडोर सुरेंद्र सिंह त्यागी जैसे दिग्गजों की कहानियां हमेशा याद रहेंगी। त्यागी ने खुद एक इंटरव्यू में कहा था कि मिग-21 उनके लिए सिर्फ एक विमान नहीं बल्कि मां की तरह था। कभी-कभी रूठता था, तो कभी माफ कर देता था। यही रिश्ता उन्हें और मिग-21 को एक-दूसरे से हमेशा जोड़ता रहा।

हालांकि मिग-21 बाइसन के 2025 में रिटायरमेंट से पहले, 83 वर्ष की आयु में उन्होंने एक अंतिम सॉर्टी की इच्छा भी जताई है। माना जा रहा है कि जिस दिन मिग-21 का रिटायरमेंट होगा, उन्हें शायद टू-सीटर ट्रेनर में एक एक्टिव पायलट के साथ उड़ाने का मौका भी मिले।

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MiG-21 record flying hours: भारतीय वायुसेना की रीढ़ रहा मिग-21

भारतीय वायुसेना ने मिग-21 का इस्तेमाल कई भूमिकाओं में किया। शुरुआत में इसे इंटरसेप्टर के रूप में शामिल किया गया था, लेकिन समय के साथ इस पर बमबारी, रॉकेट अटैक, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और रिकॉनसेंस जैसे मिशन भी कराए जाने लगे। कारगिल युद्ध के दौरान मिग-21 ने दुश्मन की चौकियों और ठिकानों की तस्वीरें खींचकर भारतीय सेना को रणनीतिक मदद दी।

मिग-21 छह दशकों तक भारतीय वायुसेना की रीढ़ बना रहा। जिस तरह एफ-16 अमेरिका के लिए अहम रहा, उसी तरह मिग-21 ने भारत की एयर पावर को नई ऊंचाई दी। यह वही विमान है, जिसने पाकिस्तान के एफ-16 को भी चुनौती दी और 2019 में ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्थमान ने इसी विमान से दुश्मन का एफ-16 गिराया।

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  • हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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