📍नई दिल्ली | 25 Mar, 2026, 10:35 AM
IAF Vayu Baan: भारतीय वायुसेना ने आधुनिक युद्ध की जरूरतों को देखते हुए एक नया प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसका नाम “वायु बाण” रखा गया है। यह देश का पहला ऐसा प्रोग्राम है जिसमें हेलीकॉप्टर से ड्रोन को गिराकर ऑपरेशन किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के तहत वायुसेना अब ऐसे छोटे ड्रोन डेवलप करना चाहती है जो हेलीकॉप्टर से लॉन्च होकर अपने आप दुश्मन के इलाके तक पहुंच सकें।
वायुसेना के डायरेक्टोरेट ऑफ एयरोस्पेस डिजाइन ने हाल ही में एक रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल यानी आरएफपी जारी किया है। इसके जरिए भारतीय कंपनियों को इस सिस्टम के डिजाइन और डेवलपमेंट के लिए आमंत्रित किया गया है। यह पूरा प्रोजेक्ट स्वदेशी है और इसमें केवल घरेलू कंपनियों को ही भाग लेने की अनुमति दी गई है। (IAF Vayu Baan)
IAF Vayu Baan: आधुनिक युद्ध में ड्रोन की बढ़ती भूमिका
हाल के सालों में युद्ध का तरीका तेजी से बदला है। अब लड़ाई केवल सामने से नहीं होती, बल्कि दूर से ही टारगेट को निशाना बनाया जाता है। इसे बियॉन्ड विजुअल रेंज यानी बीवीआर कहा जाता है। ऐसे माहौल में ड्रोन सबसे अहम भूमिका निभा रहे हैं।
हेलीकॉप्टर को जब दुश्मन के इलाके के पास जाना पड़ता है तो उस पर हमला होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में “वायु बाण” प्रोजेक्ट का उद्देश्य यही है कि हेलीकॉप्टर को सुरक्षित दूरी पर रखते हुए ड्रोन के जरिए हमला किया जा सके। इससे एयरक्रू की सुरक्षा भी बढ़ेगी और मिशन ज्यादा प्रभावी होगा। (IAF Vayu Baan)
कैसे काम करेगा वायु बाण ड्रोन
इस प्रोजेक्ट के तहत जो ड्रोन तैयार किया जाएगा, उसे हेलीकॉप्टर से नीचे गिराया जाएगा। इसके बाद यह ड्रोन खुद ही उड़ान भरकर अपने टारगेट की ओर बढ़ेगा। यह पूरी तरह ऑटोमेटिक तरीके से काम करेगा और ऑपरेटर को रियल टाइम जानकारी भेजेगा।
यह ड्रोन केवल निगरानी ही नहीं करेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर सटीक हमला भी कर सकेगा। इसमें छोटा वॉरहेड लगाया जा सकता है, जिससे यह दुश्मन के टारगेट को निशाना बना सके। (IAF Vayu Baan)
ड्रोन की खासियतें
वायु बाण प्रोजेक्ट के तहत तैयार होने वाले ड्रोन की रेंज 50 किलोमीटर से ज्यादा रखी जा रही है। इसका मतलब है कि हेलीकॉप्टर को दुश्मन के इलाके में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह ड्रोन करीब 30 मिनट तक हवा में रह सकता है, जिससे इसे टारगेट खोजने और हमला करने का पर्याप्त समय मिलता है ।
इसमें इलेक्ट्रो ऑप्टिकल और इंफ्रारेड सेंसर लगाए जाएंगे, जिससे यह दिन और रात दोनों समय काम कर सकेगा। इसके अलावा यह ड्रोन ऐसे सिस्टम से लैस होगा जो जीपीएस जैमिंग के बावजूद भी काम कर सके। यानी अगर दुश्मन जीपीएस सिग्नल को बंद कर दे, तब भी यह ड्रोन अपने मिशन को पूरा करेगा।
ड्रोन से मिलने वाला वीडियो सीधे ऑपरेटर तक पहुंचेगा, जिससे तुरंत निर्णय लिया जा सकेगा। इसे जमीन से भी कंट्रोल किया जा सकता है और हवा में मौजूद प्लेटफॉर्म से भी, जिससे ऑपरेशन में लचीलापन बढ़ेगा।
वायुसेना इस प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाना चाहती है। इसके तहत डिजाइन, डेवलपमेंट, टेस्टिंग और शुरुआती डिलीवरी को एक साल के अंदर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए हेलीकॉप्टर से ड्रॉप टेस्ट, पेलोड इंटीग्रेशन और हाई एल्टीट्यूड टेस्टिंग जैसे कई चरण पूरे किए जाएंगे।
जब यह सभी परीक्षण पूरे हो जाएंगे, तब इसे ऑपरेशनल इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी जाएगी। (IAF Vayu Baan)
स्वदेशी तकनीक पर जोर
यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा है। वायुसेना चाहती है कि इस तरह के आधुनिक सिस्टम देश में ही डेवलप हों, ताकि विदेशी निर्भरता कम हो सके। इस प्रोजेक्ट में स्टार्टअप्स और निजी कंपनियों को भी भाग लेने का मौका दिया गया है।
डायरेक्टोरेट ऑफ एयरोस्पेस डिजाइन इस पूरे प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहा है, जिसे हाल ही में स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य भारतीय रक्षा क्षेत्र में डिजाइन और इनोवेशन को बढ़ावा देना है।
वायु बाण प्रोजेक्ट के साथ भारत उन देशों की सूची में शामिल हो रहा है जो एयर लॉन्च्ड ड्रोन सिस्टम पर काम कर रहे हैं। चीन ने अपने बॉम्बर विमान से ड्रोन स्वार्म दिखाए हैं, लेकिन उनका पूरी तरह इस्तेमाल अभी शुरू नहीं हुआ है।
अमेरिका भी इस दिशा में काम कर रहा है। वहां ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट से ड्रोन लॉन्च करने और हवा में वापस लेने की तकनीक पर काम चल रहा है। वहीं अमेरिकी सेना हेलीकॉप्टर से ड्रोन ऑपरेशन को डेवलप कर रही है।
भारत का यह प्रोजेक्ट खास इसलिए है क्योंकि यह सीधे हेलीकॉप्टर से ड्रोन लॉन्च करने पर केंद्रित है और इसे तेजी से तैयार किया जा रहा है। (IAF Vayu Baan)
मल्टी डोमेन ऑपरेशन की दिशा में कदम
वायु बाण प्रोजेक्ट के जरिए वायुसेना अपनी ऑपरेशनल क्षमता को और मजबूत करना चाहती है। यह सिस्टम ऐसे इलाकों में काम आएगा जहां खतरा ज्यादा हो और सीधे प्रवेश करना मुश्किल हो। ड्रोन पहले जाकर जानकारी जुटाएगा, टारगेट की पहचान करेगा और जरूरत पड़ने पर हमला करेगा। इससे मिशन की सफलता की संभावना बढ़ेगी और जोखिम कम होगा। यह प्रोजेक्ट आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है, जहां टेक्नोलॉजी और ड्रोन की भूमिका लगातार बढ़ रही है। (IAF Vayu Baan)

