📍नई दिल्ली | 4 Apr, 2026, 10:03 PM
IAF 1000 kg aerial bomb: डिफेंस सेक्टर में स्वदेशी पहल के तहत रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के लिए 1000 किलोग्राम वजन वाले एरियल बम को देश में ही डिजाइन और डेवलप करने की तैयारियां शुरू दी हैं। यह बम क्षमता के लिहाज से अमेरिकी एमके-84 जैसे बम के बराबर माना जा रहा है।
इस पहल के तहत अब भारतीय कंपनियों से इस प्रोजेक्ट में भाग लेने के लिए “एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट” यानी ईओआई जारी किया गया है, जिसके जरिए कंपनियां इस प्रोजेक्ट में शामिल होने के लिए आवेदन कर सकेंगी।
IAF 1000 kg aerial bomb: दो चरणों में पूरा होगा पूरा प्रोजेक्ट
इस पूरी योजना को दो हिस्सों में बांटा गया है। पहले चरण में इस बम का डिजाइन और डेवलपमेंट किया जाएगा। इस दौरान कुल छह प्रोटोटाइप बनाए जाएंगे। इनमें कुछ असली यानी लाइव बम होंगे और कुछ डमी यानी इनर्ट बम होंगे, जिनका इस्तेमाल टेस्टिंग के लिए किया जाएगा।
इन प्रोटोटाइप के साथ टेल यूनिट और दूसरे जरूरी उपकरण भी डेवलप किए जाएंगे, ताकि बम को पूरी तरह ऑपरेशनल बनाया जा सके। दूसरे चरण में इन बमों की खरीद की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके लिए योग्य कंपनियों को चुनने के बाद कमर्शियल रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल यानी आरएफपी जारी किया जाएगा। (IAF 1000 kg aerial bomb)
भारतीय वायुसेना की जरूरतों के मुताबिक डिजाइन
इस बम को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि इसे भारतीय वायुसेना के अलग-अलग तरह के लड़ाकू विमानों से इस्तेमाल किया जा सके। खास बात यह है कि यह बम सिर्फ भारतीय या स्वदेशी विमान ही नहीं, बल्कि रूसी और राफेल पर लगाया जा सकेगा। इससे वायुसेना के मौजूदा बेड़े में इसे आसानी से शामिल किया जा सकेगा।
इस प्रोजेक्ट में स्वदेशीकरण पर खास जोर दिया गया है। डेवलपमेंट के दौरान कम से कम 50 प्रतिशत सामग्री भारत में बनी होनी जरूरी होगी। यह परियोजना “मेक-II” श्रेणी के तहत शुरू की जा रही है, जिसका मतलब है कि इसमें शुरुआती निवेश उद्योग खुद करेगा। बाद में जब बम तैयार हो जाएगा, तो इसे “बाय (इंडियन-आईडीडीएम)” श्रेणी के तहत खरीदा जाएगा। आईडीडीएम का मतलब है कि सिस्टम का डिजाइन, विकास और निर्माण भारत में ही हुआ हो। (IAF 1000 kg aerial bomb)
600 एरियल बम खरीदने की योजना
इस परियोजना के तहत भारतीय वायुसेना करीब 600 एरियल बम खरीदने की योजना बना रही है। फिलहाल इस तरह के बम विदेशों से खरीदे जाते हैं और वायुसेना के पास पहले से मौजूद हैं। लेकिन अब सरकार चाहती है कि इस तरह के हथियार देश में ही बनाए जाएं, ताकि बाहरी निर्भरता कम हो सके।
यह 1000 किलोग्राम का एरियल बम एक हाई-कैलिबर हथियार होगा, जिसका इस्तेमाल बड़े और मजबूत लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए किया जाता है। इसमें “नेचुरल फ्रैगमेंटेशन” यानी विस्फोट के बाद छोटे-छोटे टुकड़े फैलने की क्षमता होगी, जिससे आसपास के इलाके में ज्यादा नुकसान होता है। इसके साथ ही इसमें हाई ब्लास्ट इफेक्ट और पीक ओवर-प्रेशर यानी तेज दबाव पैदा करने की क्षमता होगी, जिससे दुश्मन के बंकर, इमारतें या रनवे जैसे मजबूत ठिकाने भी निशाना बन सकते हैं। (IAF 1000 kg aerial bomb)
भारत में ही होगी टेस्टिंग
इस बम के सभी परीक्षण भारत में ही किए जाएंगे। इसके लिए भारतीय वायुसेना की यूनिट्स या अन्य तय स्थानों का इस्तेमाल किया जाएगा। टेस्टिंग के दौरान इस बम को अलग-अलग विमान प्लेटफॉर्म से गिराकर उसकी क्षमता और सटीकता को परखा जाएगा। इन परीक्षणों के आधार पर पहले पीएसक्यूआर यानी प्रारंभिक तकनीकी जरूरतों को तय किया जाएगा और फिर उन्हें एएसक्यूआर यानी अंतिम मानकों में बदला जाएगा।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया को पूरा होने में करीब ढाई साल का समय लगेगा। इसमें डिजाइन, प्रोटोटाइप तैयार करना, टेस्टिंग, मूल्यांकन और कॉन्ट्रैक्ट साइन करने जैसे सभी चरण शामिल होंगे। हर चरण में तकनीकी और वित्तीय मानकों के आधार पर कंपनियों का चयन किया जाएगा। (IAF 1000 kg aerial bomb)
इस प्रोजेक्ट में सिर्फ सरकारी संस्थानों ही नहीं, बल्कि निजी कंपनियों को भी हिस्सा लेने का मौका दिया गया है। भारतीय कंपनियां इस परियोजना में सीधे भाग ले सकती हैं। इसके अलावा कुछ शर्तों के तहत विदेशी कंपनियों के साथ साझेदारी, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर या जॉइंट वेंचर के जरिए भी भागीदारी की अनुमति होगी। हालांकि, ऐसे मामलों में भी यह जरूरी होगा कि डिजाइन और निर्माण का मुख्य हिस्सा भारत में ही हो।
इससे पहले नवंबर 2023 में आर्डनेंस फैक्ट्री खमारिया के अगुवाई में मेटल स्टील फैक्ट्री इशापोर और आर्डनेंस फैक्ट्री दम दम के साथ मिलकर इस स्वदेशी बम को डेवलप करने को लेकर गठजोड़ किया था। इस नए बम में “प्रिसिजन गाइडेड” तकनीक भी जोड़ी जा रही है, जिससे यह अपने लक्ष्य पर ज्यादा सटीक तरीके से हमला कर सकेगा। इसके तहत आधुनिक 1000 किलोग्राम के एमके-84 जैसे बम बनाए जाने हैं। इस नए स्वदेशी बम में भी सटीक मार्गदर्शन तकनीक जोड़ने पर काम किया जा रहा है, इसमें गाइडेंस किट लगाकर इसे “स्मार्ट बम” में बदला जा सकता है, जो तय लक्ष्य पर सटीक तरीके से गिरता है और अनावश्यक नुकसान को कम करता है। (IAF 1000 kg aerial bomb)

