📍नई दिल्ली | 27 Mar, 2026, 7:39 PM
DAC S-400 India Approval: सरकार ने भारतीय वायुसेना के लिए अतिरिक्त एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह फैसला शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल यानी डीएसी की बैठक में लिया गया।
इस मंजूरी के बाद अब एस-400 सिस्टम की खरीद की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो जाएगी। इससे पहले डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड ने भी पांच अतिरिक्त यूनिट खरीदने की सिफारिश की थी। अब अंतिम मंजूरी प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी यानी सीसीएस की बैठक में दी जाएगी।
DAC S-400 India Approval: ऑपरेशन सिंदूर में पहली बार हुआ इस्तेमाल
एस-400 सिस्टम का इस्तेमाल हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किया गया था। यह पहली बार था जब इस सिस्टम का कॉम्बैट डेब्यू हुआ। इस ऑपरेशन में एस-400 ने पाकिस्तान के एक एयरक्राफ्ट को करीब 300 किलोमीटर की दूरी से निशाना बनाया।
यह अब तक का सबसे लंबी दूरी का इंटरसेप्शन माना जा रहा है। इस घटना के बाद इस सिस्टम की क्षमता को लेकर वायुसेना के अंदर भरोसा और मजबूत हुआ।
अभी कितनी यूनिट हैं और क्या है स्थिति
भारत ने साल 2018 में रूस के साथ एस-400 सिस्टम खरीदने का बड़ा समझौता किया था। इस डील के तहत कुल पांच स्क्वाड्रन मिलने थे। इनमें से अब तक तीन स्क्वाड्रन भारत को मिल चुके हैं।
पहली यूनिट दिसंबर 2021 में मिली थी, दूसरी अप्रैल 2022 में और तीसरी फरवरी 2023 में डिलीवर हुई। बाकी दो यूनिट 2024 तक मिलने की उम्मीद थी, लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से डिलीवरी में देरी हो गई।
अब रक्षा अधिकारियों के अनुसार, चौथी यूनिट अगले कुछ महीनों में मिल सकती है, जबकि पांचवीं यूनिट साल के आखिर तक मिलने की संभावना है।
मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट को भी मिली थी मंजूरी
ऑपरेशन सिंदूर के बाद डीएसी ने एस-400 सिस्टम के लिए एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट को भी मंजूरी दी थी। किसी भी बड़े सैन्य सिस्टम के लिए मेंटेनेंस बेहद जरूरी होता है, ताकि वह लंबे समय तक सही तरीके से काम करता रहे।
इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत सिस्टम की सर्विसिंग, मरम्मत और जरूरी अपडेट किए जाते हैं। समय-समय पर इसे रिन्यू भी किया जाता है, जिससे सिस्टम की कार्यक्षमता बनी रहती है।
एस-400 सिस्टम की खूबियां
एस-400 एक लॉन्ग रेंज एयर डिफेंस सिस्टम है, जो दुश्मन के हवाई खतरों को दूर से ही पहचान कर उन्हें नष्ट कर सकता है। इसका रडार करीब 600 किलोमीटर दूर तक आने वाले टारगेट को डिटेक्ट कर सकता है।
यह सिस्टम एक साथ 100 से ज्यादा टारगेट को ट्रैक कर सकता है और उनमें से कई को एक साथ निशाना बना सकता है। इसकी खासियत यह है कि यह अलग-अलग तरह के खतरों को पहचान सकता है।
इसमें फाइटर जेट, स्ट्रैटेजिक बॉम्बर, अर्ली वॉर्निंग एयरक्राफ्ट, ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे टारगेट शामिल हैं। यह सिस्टम इन सभी को 400 किलोमीटर तक की दूरी से इंटरसेप्ट करने की क्षमता रखता है।
चार तरह की मिसाइलों से लैस
एस-400 सिस्टम में चार अलग-अलग रेंज की मिसाइलें इस्तेमाल की जाती हैं। इनमें 400 किलोमीटर, 250 किलोमीटर, 120 किलोमीटर और 40 किलोमीटर रेंज वाली मिसाइलें शामिल हैं।
इसका मतलब यह है कि यह सिस्टम अलग-अलग दूरी पर आने वाले टारगेट को उनकी स्थिति के हिसाब से निशाना बना सकता है। यही वजह है कि इसे मल्टी लेयर्ड एयर डिफेंस सिस्टम का अहम हिस्सा माना जाता है।
बड़े स्तर पर डिफेंस खरीद को मंजूरी
इसी बैठक में सिर्फ एस-400 ही नहीं, बल्कि कई अन्य रक्षा खरीद प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई है। कुल मिलाकर करीब 2.38 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दी गई है।
इस वित्तीय वर्ष में अब तक कुल 6.73 लाख करोड़ रुपये के रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी मिल चुकी है। यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है।
इन प्रस्तावों में सेना, वायुसेना और कोस्ट गार्ड के लिए अलग-अलग तरह के सिस्टम शामिल हैं। इसमें एयर डिफेंस, आर्टिलरी, कम्युनिकेशन सिस्टम, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और ड्रोन जैसे उपकरण शामिल हैं।
सेना और वायुसेना के लिए अलग-अलग योजनाएं
सेना के लिए एयर डिफेंस ट्रैक्ड सिस्टम, धनुष गन सिस्टम और टैंक के लिए खास गोला-बारूद जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं। इसके अलावा कम्युनिकेशन सिस्टम को मजबूत करने के लिए हाई कैपेसिटी रेडियो रिले और निगरानी के लिए नए सिस्टम पर भी काम किया जाएगा।
वायुसेना के लिए मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम को मंजूरी दी गई है, जिससे पुराने विमानों की जगह नए विमान लिए जाएंगे। इसके अलावा स्ट्राइक ड्रोन और फाइटर एयरक्राफ्ट के इंजन अपग्रेड जैसे प्रोजेक्ट भी शामिल हैं।
कोस्ट गार्ड के लिए भी नए एयर कुशन व्हीकल्स खरीदने की योजना को मंजूरी दी गई है, जिनका इस्तेमाल समुद्री गश्त और रेस्क्यू ऑपरेशन में किया जाएगा।

