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चीन सीमा से 300 किमी दूर भारत की नई एयरस्ट्रिप रणनीति, जानें डुअल फ्रंट वार को देखते हुए कितनी है जरूरी

इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी कोई साधारण सड़क का हिस्सा नहीं होता। इसके लिए हाईवे का एक सीधा और लंबा हिस्सा चुना जाता है, जो आमतौर पर चार किलोमीटर से ज्यादा लंबा होता है...

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📍नई दिल्ली/डिब्रूगढ़ | 14 Feb, 2026, 5:18 PM

Assam Emergency Landing Facility: जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के डिब्रूगढ़ जिले के मोरान इलाके में बने नए इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी पर भारतीय वायुसेना के सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान से उतरकर इसे एक्टिव कर दिया। यह भारत की रक्षा तैयारी और बुनियादी ढांचे की सोच में आए बड़े बदलाव का संकेत था। अब देश के कुछ चुनिंदा नेशनल हाईवे सिर्फ गाड़ियों के लिए नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर लड़ाकू और ट्रांसपोर्ट विमानों के लिए भी रनवे का काम कर सकते हैं। (Assam Emergency Landing Facility)

मोरान में बना यह इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी यानी ईएलएफ पूर्वोत्तर भारत का पहला ऐसा हाईवे एयरस्ट्रिप है। यह नेशनल हाईवे-37 पर लगभग 4.2 किलोमीटर लंबा सीधा और मजबूत बनाया गया हिस्सा है। यह इलाका चीन सीमा से करीब 300 किलोमीटर की दूरी पर है, इसलिए रणनीतिक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है। (Assam Emergency Landing Facility)

Assam Emergency Landing Facility: आखिर हाईवे पर एयरस्ट्रिप की जरूरत क्यों?

युद्ध की स्थिति में दुश्मन की पहली नजर अक्सर एयरबेस पर होती है। अगर किसी कारण से स्थायी एयरबेस को नुकसान पहुंचता है या वे अस्थायी रूप से इस्तेमाल के लायक नहीं रहते, तो वायुसेना को वैकल्पिक रनवे की जरूरत पड़ती है। ऐसे में हाईवे पर बने ये इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप बहुत काम आते हैं।

इसके अलावा, अगर किसी विमान में उड़ान के दौरान तकनीकी खराबी आ जाए या ईंधन कम हो जाए और वह अपने बेस तक न पहुंच सके, तो वह इन हाईवे रनवे पर सुरक्षित उतर सकता है। प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, भूकंप या चक्रवात के समय भी इनका इस्तेमाल राहत और बचाव कार्यों के लिए किया जा सकता है। (Assam Emergency Landing Facility)

मोरान एयरस्ट्रिप की क्या हैं खूबियां

प्रधानमंत्री के पहुंचने से पहले राफेल और सुखोई-30 जैसे फाइटर जेट्स ने यहां लैंडिंग कर अपनी क्षमता दिखाई। बाद में सी-130जे सुपर हरक्यूलिस जैसे भारी ट्रांसपोर्ट विमान ने भी सुरक्षित लैंडिंग की। इसके बाद एएन-32 ट्रांसपोर्ट विमान और एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर ‘ध्रुव’ ने कैजुअल्टी इवैक्यूएशन ड्रिल का प्रदर्शन किया।

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सी-130जे एक चार इंजन वाला टर्बोप्रॉप विमान है, जिसका अधिकतम वजन लगभग 74,000 किलोग्राम तक हो सकता है। इतने भारी विमान का हाईवे पर उतरना यह दिखाता है कि इस स्ट्रिप को खास इंजीनियरिंग मानकों के अनुसार तैयार किया गया है। (Assam Emergency Landing Facility)

कैसे बनाए जाते हैं ये इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी?

इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी कोई साधारण सड़क का हिस्सा नहीं होता। इसके लिए हाईवे का एक सीधा और लंबा हिस्सा चुना जाता है, जो आमतौर पर चार किलोमीटर से ज्यादा लंबा होता है।

इस हिस्से को खास तरीके से मजबूत किया जाता है ताकि वह तेज रफ्तार और भारी विमानों का भार सह सके। सड़क की सतह को हाई स्ट्रेंथ पेवमेंट से तैयार किया जाता है। दोनों ओर फेंसिंग और बैरियर लगाए जाते हैं ताकि ऑपरेशन के दौरान कोई वाहन, जानवर या आम लोग रनवे पर न आ सकें।

सड़क के बीच में सामान्य हाईवे की तरह डिवाइडर नहीं होता, क्योंकि विमान को एक सीधा और खुला रनवे चाहिए। इसके अलावा रनवे की तरह मार्किंग भी की जाती है, जिससे पायलट को लैंडिंग और टेकऑफ में आसानी हो। (Assam Emergency Landing Facility)

देशभर में कितनी ऐसी स्ट्रिप्स हैं?

रक्षा मंत्रालय की ओर से संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, भारतीय वायुसेना ने देशभर में 28 स्थानों की पहचान की है, जहां इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी बनाई जानी है या बनाई जा चुकी है।

इनमें असम में 5, पश्चिम बंगाल में 4, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और गुजरात में 3-3, तमिलनाडु, बिहार, जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में 2-2, जबकि पंजाब और उत्तर प्रदेश में 1-1 स्थान शामिल हैं। (Assam Emergency Landing Facility)

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राजस्थान के बाड़मेर क्षेत्र में 2021 में देश की पहली ऐसी हाईवे एयरस्ट्रिप का उद्घाटन किया गया था। उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और अन्य एक्सप्रेसवे पर भी फाइटर जेट्स की लैंडिंग का अभ्यास हो चुका है। आंध्र प्रदेश के अड्डंकी में भी हाल ही में ऐसी सुविधा सक्रिय की गई थी। (Assam Emergency Landing Facility)

सिर्फ सेना के लिए नहीं हैं ये एयरस्ट्रिप्स

हालांकि इनका मुख्य उद्देश्य सैन्य जरूरतों को पूरा करना है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल नागरिक विमानों के लिए भी किया जा सकता है। अगर किसी पैसेंजर विमान में आपात स्थिति बन जाए, तो वह भी यहां उतर सकता है। मेडिकल इवैक्यूएशन या किसी विशेष टीम और उपकरण को तुरंत पहुंचाने के लिए भी इनका उपयोग किया जा सकता है। (Assam Emergency Landing Facility)

दुनिया में भी है यह व्यवस्था

हाईवे को एयरस्ट्रिप के रूप में इस्तेमाल करने का विचार नया नहीं है। शीत युद्ध के दौर में यूरोप के कई देशों ने इस मॉडल को अपनाया था। फिनलैंड, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, जर्मनी और पोलैंड जैसे देशों में डुअल यूज हाईवे आम बात है। एशिया में भी कई देश इस प्रयोग को अपना चुके हैं। (Assam Emergency Landing Facility)

रणनीतिक सोच में बदलाव

मोरान में बना यह नया इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं है। यह भारत की रक्षा नीति में उस सोच को दिखाता है, जिसमें नागरिक बुनियादी ढांचे को सैन्य जरूरतों के साथ जोड़ा जा रहा है।

इसे डुअल यूज इंफ्रास्ट्रक्चर कहा जाता है, यानी एक ही ढांचा सामान्य समय में आम लोगों के लिए और संकट के समय में सेना के लिए काम आता है। इससे अलग से बड़े खर्च की जरूरत भी कम पड़ती है और तैयारियां भी मजबूत रहती हैं। (Assam Emergency Landing Facility)

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असम में बने इस नए एयरस्ट्रिप से खास तौर पर पूर्वोत्तर क्षेत्र में तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता बढ़ेगी। सीमा के पास स्थित इलाकों में मिलिटरी इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाना आज की जरूरत है। स्पष्ट है कि आने वाले समय में देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे और इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी देखने को मिल सकते हैं। (Assam Emergency Landing Facility)

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  • News Desk

    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

  • हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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