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अमेरिका का ‘साइलेंट स्ट्राइकर’! पहली बार युद्ध में दागी नई PrSM बैलिस्टिक मिसाइल, ईरान में मचा हड़कंप

PrSM की सबसे बड़ी ताकत इसकी रेंज है। जहां ATACMS करीब 300 किलोमीटर तक ही मार कर सकती थी, वहीं PrSM 500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक हमला कर सकती है...

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📍वॉशिंगटन/तेहरान | 2 Mar, 2026, 6:17 PM

PrSM vs ATACMS: पश्चिमी एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने पहली बार युद्ध में अपनी नई पीढ़ी की बैलिस्टिक मिसाइल प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल (PrSM) का युद्ध में इस्तेमाल किया है। यह मिसाइल हाल ही में अमेरिकी सेना में शामिल हुई थी और अब इसे ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान में इस्तेमाल किया गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने इस ऑपरेशन के पहले 24 घंटों का वीडियो जारी किया, जिसमें HIMARS लॉन्चर से इस मिसाइल को दागते हुए साफ देखा जा सकता है। इसे इस मिसाइल का पहला कॉम्बैट डेब्यू माना जा रहा है।

PrSM vs ATACMS: ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में नई मिसाइल की एंट्री

अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे संयुक्त सैन्य अभियान को “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम दिया है। इस ऑपरेशन में कई तरह के आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल को लेकर हो रही है। यह पहली बार है जब इस मिसाइल को किसी युद्ध में इस्तेमाल किया गया है।

सेंटकॉम की तरफ से जारी विजुअल्स में साफ दिखता है कि एक M142 HIMARS (हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम) से प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल लॉन्च की गई। यह सिस्टम अमेरिकी सेना का बेहद मोबाइल और तुरंत प्रतिक्रिया देने वाला प्लेटफॉर्म माना जाता है, जो कम समय में मिसाइल दागकर अपनी लोकेशन बदल सकता है। (PrSM vs ATACMS)

क्या है प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल मिसाइल

प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल अमेरिका की नई शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे लॉकहीड मार्टिन कंपनी ने बनाया है। यह पुरानी ATACMS मिसाइल का आधुनिक और ज्यादा एडवांस्ड वर्जन है। ATACMS यानी आर्मी टेक्टिकल मिसाइल सिस्टम, एक अमेरिकी सेना की शॉर्ट-रेंज टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसका आधिकारिक नाम एमजीएम-140 है। इसे “अटैकम्स” (ATACMS) कहा जाता है, जिसे लॉकहीड ने बनाया थाा। यह मिसाइल HIMARS और M270 MLRS यानी मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम से लॉन्च होती है। एक लॉन्च पॉड में सिर्फ एक ATACMS फिट होती है। वहीं, ATACMS की अधिकतम रेंज करीब 300 किलोमीटर थी, जबकि PrSM की रेंज 500 किलोमीटर से ज्यादा बताई जा रही है।

इस नई मिसाइल की खास बात इसकी लंबी दूरी और ज्यादा सटीकता है। इसमें जीपीएस और इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे यह अपने टारगेट पर बहुत कम गलती के साथ हमला कर सकती है। यही वजह है कि इसे हाई-वैल्यू टारगेट्स जैसे मिसाइल लॉन्च साइट्स, रडार सिस्टम और कमांड सेंटर को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। (PrSM vs ATACMS)

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HIMARS और MLRS से लॉन्च

PrSM मिसाइल को M142 HIMARS और M270 MLRS जैसे प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जाता है। HIMARS की खासियत यह है कि इसमें पहले जहां एक ATACMS मिसाइल लगती थी, वहीं अब एक पॉड में दो PrSM मिसाइलें फिट हो सकती हैं। इससे एक ही लॉन्चर से ज्यादा फायरपावर मिलती है।

सेंटकॉम की तरफ से जारी तस्वीरों में दो-सेल वाले मिसाइल पॉड भी दिखाई दिए, जो PrSM सिस्टम की पहचान माने जा रहे हैं। इससे यह साफ होता है कि इस ऑपरेशन में नई मिसाइल का इस्तेमाल किया गया है। (PrSM vs ATACMS)

ज्यादा रेंज, ज्यादा टारगेट

PrSM की सबसे बड़ी ताकत इसकी रेंज है। जहां ATACMS करीब 300 किलोमीटर तक ही मार कर सकती थी, वहीं PrSM 500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक हमला कर सकती है। अमेरिकी सेना भविष्य में इसकी रेंज को 650 किलोमीटर और उससे भी आगे तक बढ़ाने पर काम कर रही है।

इसका मतलब यह है कि अब अमेरिकी सेना दूर बैठे हुए भी दुश्मन के अंदरूनी इलाकों में मौजूद टारगेट्स को निशाना बना सकती है। इससे ऑपरेशन का दायरा काफी बढ़ जाता है और दुश्मन के ज्यादा ठिकाने खतरे में आ जाते हैं। (PrSM vs ATACMS)

बैलिस्टिक मिसाइल की खासियत

बैलिस्टिक मिसाइलें अपनी तेज रफ्तार के लिए जानी जाती हैं। ये मिसाइलें जब अपने अंतिम चरण यानी टर्मिनल फेज में पहुंचती हैं, तो बहुत ज्यादा स्पीड से टारगेट पर गिरती हैं। इसी वजह से इन्हें रोकना एयर डिफेंस सिस्टम के लिए मुश्किल होता है।

PrSM भी इसी तरह की मिसाइल है, जो तेजी से हमला करती है और खासकर ऐसे टारगेट्स के लिए उपयोगी होती है जो जल्दी बदल सकते हैं, जैसे मोबाइल मिसाइल लॉन्चर या एयर डिफेंस यूनिट्स। इसके अलावा, इसकी गति और ताकत इसे मजबूत और भूमिगत ठिकानों को भी नुकसान पहुंचाने में सक्षम बनाती है। (PrSM vs ATACMS)

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किन टारगेट्स पर हुआ इस्तेमाल

हालांकि अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया है कि PrSM मिसाइलें किन खास जगहों पर दागी गईं, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार इनका इस्तेमाल ईरान के मिसाइल ठिकानों, रडार सिस्टम और सैन्य कमांड सेंटर को निशाना बनाने के लिए किया गया।

ऑपरेशन के शुरुआती चरण में ऐसे टारगेट्स को खत्म करना जरूरी माना जाता है, ताकि आगे होने वाले एयर स्ट्राइक्स के लिए रास्ता साफ हो सके। इस लिहाज से PrSM का उपयोग एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। (PrSM vs ATACMS)

अन्य हथियारों का भी इस्तेमाल

इस ऑपरेशन में सिर्फ PrSM ही नहीं, बल्कि कई अन्य हथियारों का भी इस्तेमाल किया गया है। अमेरिकी नौसेना ने टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों से लंबी दूरी के हमले किए। वहीं B-2 स्टेल्थ बॉम्बर्स ने प्रिसिजन गाइडेड बम गिराए।

इसके अलावा ड्रोन और अन्य मिसाइल सिस्टम का भी इस्तेमाल किया गया, जिससे एक साथ कई टारगेट्स पर हमला किया जा सके। लेकिन PrSM का इस्तेमाल इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि यह पहली बार युद्ध में इस्तेमाल हुई है। (PrSM vs ATACMS)

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  • News Desk

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