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क्या खामेनेई को मारने में है पाकिस्तान का हाथ? शाहबाज शरीफ का गिफ्ट बना मौत की वजह!

जानकारी के अनुसार 26 मई 2025 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के साथ तेहरान का दौरा किया था। यह दौरा उनकी क्षेत्रीय यात्रा का हिस्सा था, जिसमें तुर्की, ईरान, अजरबैजान और ताजिकिस्तान शामिल थे...

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📍तेहरान/इस्लामाबाद/वॉशिंगटन | 2 Mar, 2026, 9:57 PM

Khamenei Death Conspiracy: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत को लेकर कई खुलासे हो रहे हैं। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त सैन्य अभियान के दौरान हुए हमलों में खामेनेई की मौत हुई थी। अब इस पूरे घटनाक्रम से जुड़ी एक नई कहानी चर्चा में है, जिसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा दिए गए एक कथित गिफ्ट को इस घटना से जोड़कर देखा जा रहा है।

यह दावा किया जा रहा है कि मई 2025 में तेहरान दौरे के दौरान शहबाज शरीफ ने खामेनेई को एक महंगी घड़ी गिफ्ट की थी। कुछ अनऑफिशियल रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स में कहा गया है कि यह घड़ी एक सामान्य गिफ्ट नहीं थी, बल्कि इसमें जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगा हुआ था। हालांकि इस दावे की किसी भी आधिकारिक स्तर पर पुष्टि नहीं हुई है और इसे साजिश से जुड़ी थ्योरी के तौर पर ही देखा जा रहा है। (Khamenei Death Conspiracy)

Khamenei Death Conspiracy: 26 मई को किया था ईरान का दौरा

जानकारी के अनुसार 26 मई 2025 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के साथ तेहरान का दौरा किया था। यह दौरा उनकी क्षेत्रीय यात्रा का हिस्सा था, जिसमें तुर्की, ईरान, अजरबैजान और ताजिकिस्तान शामिल थे। तेहरान में उनकी मुलाकात ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से हुई थी।

इस बैठक में मुस्लिम देशों की एकता, गाजा की स्थिति, क्षेत्रीय शांति और भारत-पाकिस्तान तनाव जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी। बैठक के दौरान शहबाज शरीफ ने खामेनेई की नेतृत्व क्षमता की तारीफ की और दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने की बात कही थी। इस दौरान शरीफ ने खामेनेई से मुलाकात को सम्मान की बात बताया और कहा कि हाल के दक्षिण एशिया संकट में ईरान ने शांति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। (Khamenei Death Conspiracy)

इस यात्रा के दौरान शहबाज शरीफ के साथ पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार, आर्मी चीफ असीम मुनीर, गृह मंत्री मोहसिन नकवी, सूचना मंत्री अत्ता तरार और प्रधानमंत्री के विशेष सहायक तारिक फातमी भी मौजूद थे।

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इसी मुलाकात के दौरान कथित तौर पर एक लग्जरी घड़ी गिफ्ट किए जाने की बात सामने आई है। कुछ रिपोर्ट्स में इसे रोलेक्स ब्रांड की घड़ी बताया गया है। दावा यह भी किया गया कि इस घड़ी में जीपीएस आधारित ट्रैकिंग डिवाइस मौजूद था, जिससे लोकेशन ट्रैक की जा सकती थी। (Khamenei Death Conspiracy)

जीपीएस घड़ी और साजिश के आरोप

अनऑफिशियल रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि यह घड़ी खामेनेई की लोकेशन ट्रैक करने के लिए इस्तेमाल की गई। कुछ कथित इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स के हवाले से कहा गया कि इस डिवाइस के जरिए उनकी मूवमेंट की जानकारी बाहर तक पहुंची।

हालांकि इस तरह के दावों को लेकर कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है। न ही ईरान, पाकिस्तान या अमेरिका की सरकारों ने इस तरह के किसी आरोप की पुष्टि की है। मुख्यधारा की अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में भी इस दावे का उल्लेख नहीं मिलता है। (Khamenei Death Conspiracy)

ट्रंप ने शरीफ को दी थीं दो घड़ियां

ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी एमआई6 से जुड़ी कुछ कथित रिपोर्ट्स के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को अपनी दो पर्सनल रोलेक्स घड़ियां गिफ्ट की थीं। इन दावों में कहा गया है कि इनमें से एक घड़ी में जीपीएस ट्रैकिंग बीकन लगा हुआ था।

इसी दावे के अनुसार, शहबाज शरीफ ने हाल ही में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई से मुलाकात के दौरान वही जीपीएस वाली घड़ी उन्हें गिफ्ट कर दी। इसके बाद यह भी कहा जा रहा है कि इस घड़ी के जरिए खामेनेई की लोकेशन ट्रैक हो गई और उनकी लोकेशन उजागर हो गई। (Khamenei Death Conspiracy)

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कैसे हुआ था हमला

28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर एक साथ प्रिसिजन स्ट्राइक्स यानी सटीक हमले किए। इस अभियान को अमेरिका की ओर से “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” और इजराइल की ओर से “ऑपरेशन रोअरिंग लायन” नाम दिया गया। लेकिन असली कहानी उस इंटेलिजेंस सिस्टम की है, जिसने इसे आधुनिक सैन्य इतिहास के सबसे सटीक डेकैपिटेशन ऑपरेशन में बदल दिया।

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की अपने वरिष्ठ सलाहकारों के साथ शनिवार शाम को तेहरान में एक अहम बैठक तय थी। इस बैठक में अली लारिजानी, अली शमखानी और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होने वाले थे। यह एक सुरक्षित कंपाउंड में होने वाली सामान्य हाई-लेवल मीटिंग थी, जिसे सुरक्षा कारणों से शाम के समय रखा गया था। (Khamenei Death Conspiracy)

लेकिन अचानक इस बैठक का समय बदल दिया गया। शाम की जगह इसे शनिवार सुबह कर दिया गया। यहीं से पूरा खेल बदल गया। इजरायली इंटेलिजेंस को इस बदलाव खी भनक लग गई। जैसे ही यह जानकारी मिली, पूरे ऑपरेशन को रियल टाइम में बदल दिया गया। जो हमला बाद में होना था, उसे तुरंत आगे खिसका दिया गया।

इसके बाद फैसला लिया गया कि हमला दिन के उजाले में किया जाएगा। खामेनेई के कंपाउंड पर करीब 30 बम गिराए गए। पूरा इलाका जलकर तबाह हो गया। बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि खामेनेई हमारी इंटेलिजेंस और एडवांस सर्विलांस सिस्टम से बच नहीं सके। (Khamenei Death Conspiracy)

इस पूरे ऑपरेशन का सबसे अहम हिस्सा यही था। इसका मतलब साफ है कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सुरक्षा ढांचे के अंदर बहुत गहराई तक पैठ बना ली थी। उन्हें न सिर्फ बैठक की जानकारी थी, बल्कि समय में हुए बदलाव का भी पता चल गया। फिर उसी हिसाब से 200 विमान को हजारों किलोमीटर दूर दुश्मन के हवाई क्षेत्र में भेजा गया और एक तय समय पर सटीक हमला किया गया। (Khamenei Death Conspiracy)

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यह हमले बेहद कम समय लगभग 60 सेकंड में किए गए और कई स्थानों को एक साथ निशाना बनाया गया। इसमें प्रिसिजन मिसाइल और एडवांस्ड गाइडेड हथियारों का इस्तेमाल किया गया।

इन हमलों में खामेनेई के अलावा ईरान के कई शीर्ष सैन्य अधिकारी, सुरक्षा अधिकारी और उनके करीबी लोग भी मारे गए। कम से कम 40 से अधिक टॉप सीनियर अधिकारी इन हमलों में मारे गए।

2003 के इराक युद्ध में “शॉक एंड ऑ” रणनीति के तहत बड़े पैमाने पर बमबारी हुई थी, लेकिन वहां टारगेट बिल्डिंग्स थीं। यहां टारगेट व्यक्ति थे। 2020 में कासिम सुलेमानी को एक ड्रोन हमले में मारा गया था, लेकिन इस ऑपरेशन में एक साथ कई शीर्ष नेताओं को खत्म किया गया। (Khamenei Death Conspiracy)

कैसे हुई ट्रैकिंग

इजरायल का दावा है कि इस पूरे ऑपरेशन में अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए और इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद की अहम भूमिका रही। बताया गया है कि पिछले कई महीनों से खामेनेई की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी।

ट्रैकिंग के लिए सैटेलाइट इमेजरी, ह्यूमन इंटेलिजेंस, कम्युनिकेशन इंटरसेप्ट और एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया। हमले से ठीक पहले एक महत्वपूर्ण मीटिंग की जानकारी मिली, जिसमें खामेनेई की मौजूदगी की पुष्टि हुई। इसी के आधार पर हमले की टाइमिंग तय की गई। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यह ऑपरेशन कई वर्षों की तैयारी और डेटा कलेक्शन का परिणाम था। (Khamenei Death Conspiracy)

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