📍नई दिल्ली/ढाका | 4 Jan, 2026, 3:29 PM
India Bangladesh Relations: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की चेयरपर्सन बेगम खालिदा जिया के निधन के बाद भारत सरकार ने जिस तेजी के साथ कदम उठाए, उन्हें भारत-बांग्लादेश संबंधों में नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। भारत सरकार के उठाए कदमों ने दक्षिण एशिया की राजनीति में खास संदेश दिया है। भारत ने शोक व्यक्त करने के साथ-साथ ऐसे कदम उठाए, जिनसे यह साफ हुआ कि नए हालात में भारत बांग्लादेश के साथ अपने संबंधों को सक्रिय और व्यापक तरीके से आगे बढ़ाना चाहता है।
India Bangladesh Relations: पीएम मोदी ने खालिदा जिया को किया याद
खालिदा जिया का निधन 30 दिसंबर 2025 को ढाका में लंबी बीमारी के बाद हुआ। उनके निधन की खबर सामने आते ही भारत की ओर से आधिकारिक स्तर पर प्रतिक्रिया दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शोक संदेश जारी किया और बांग्लादेश के लोगों तथा खालिदा जिया के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में खालिदा जिया को बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बताते हुए उनके योगदान को याद किया। (India Bangladesh Relations)
Deeply saddened to learn about the passing away of former Prime Minister and BNP Chairperson Begum Khaleda Zia in Dhaka.
Our sincerest condolences to her family and all the people of Bangladesh. May the Almighty grant her family the fortitude to bear this tragic loss.
As the… pic.twitter.com/BLg6K52vak
— Narendra Modi (@narendramodi) December 30, 2025
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि 2015 में ढाका यात्रा के दौरान उनकी खालिदा जिया से मुलाकात हुई थी और उस बातचीत को वे याद करते हैं। उन्होंने खालिदा जिया को बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बताते हुए उनके योगदान को याद किया और भारत-बांग्लादेश संबंधों में उनकी भूमिका का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि खालिदा जिया की सोच और विरासत दोनों देशों के रिश्तों को दिशा देती रहेंगी।
India Bangladesh Relations: सीनियर मंत्री गए ढाका
वहीं, खालिदा जिया के निधन के बाद भारत सरकार ने यह तय किया कि अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व उच्च स्तर पर किया जाएगा। विदेश मंत्री एस जयशंकर को ढाका भेजा गया। विदेश मंत्रालय की ओर से बताया गया कि जयशंकर भारत सरकार और भारत की जनता की ओर से शोक संदेश लेकर ढाका पहुंचे। (India Bangladesh Relations)
India Bangladesh Relations: जयशंकर की तारिक रहमान से मुलाकात
विदेश मंत्री एस. जयशंकर 31 दिसंबर 2025 को ढाका पहुंचे और खालिदा जिया के जनाजे में भारत सरकार और भारत की जनता का प्रतिनिधित्व किया। यह दौरा ऐसे समय में हुआ, जब भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव की खबरें लगातार सामने आ रही थीं।
On arrival in Dhaka, met with Mr Tarique Rahman @trahmanbnp, Acting Chairman of BNP and son of former PM of Bangladesh Begum Khaleda Zia.
Handed over to him a personal letter from Prime Minister @narendramodi.
Conveyed deepest condolences on behalf of the Government and… pic.twitter.com/xXNwJsRTmZ
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) December 31, 2025
ढाका में जयशंकर ने बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष और खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्यक्तिगत शोक पत्र तारिक रहमान को सौंपा। पत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने खालिदा जिया के साथ 2015 में ढाका में हुई अपनी मुलाकात को याद किया और उन्हें दृढ़ संकल्प वाली नेता बताया।
विदेश मंत्री ने इस मुलाकात में यह भी कहा कि भारत को भरोसा है कि खालिदा जिया के विचार और मूल्य भारत-बांग्लादेश संबंधों को आगे बढ़ाने में मार्गदर्शक बने रहेंगे। भारत सरकार की ओर से यह बात स्पष्ट रूप से रखी गई कि भारत बांग्लादेश के साथ भविष्य में भी साझेदारी को मजबूत करना चाहता है।
जयशंकर ने ढाका यात्रा के दौरान बांग्लादेश के विदेश मामलों से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों से भी संक्षिप्त मुलाकात की। इनमें बांग्लादेश के विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शामिल थे। इन बैठकों में द्विपक्षीय रिश्तों को साझा हितों, व्यावहारिकता और आपसी निर्भरता के आधार पर आगे बढ़ाने की बात कही गई।
खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होने के दौरान जयशंकर की मुलाकात अन्य देशों के प्रतिनिधियों से भी हुई। इस दौरान पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर से उनका औपचारिक अभिवादन भी हुआ। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के कार्यालय ने इस मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की, हालांकि भारत सरकार के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि इसे किसी विशेष राजनीतिक संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। (India Bangladesh Relations)
Went to the High Commission of Bangladesh in New Delhi. Signed the Condolence Book expressing our profound sorrow at the passing of former Prime Minister and BNP Chairperson Begum Khaleda Zia. Our thoughts are with her family and the people of Bangladesh. @bdhc_delhi pic.twitter.com/AscV4ZdIUe
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) January 1, 2026
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहुंचे बांग्लादेश हाई कमीशन
उधर, नई दिल्ली में भी भारत सरकार की ओर से शोक प्रकट करने के कदम उठाए गए। भारत सरकार की प्रतिक्रिया केवल विदेश मंत्रालय तक सीमित नहीं रही। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग पहुंचे और वहां शोक पुस्तिका में हस्ताक्षर कर संवेदना व्यक्त की। रक्षा मंत्री ने खालिदा जिया के निधन पर दुख जताते हुए बांग्लादेश के लोगों के प्रति सहानुभूति जताई।
भारत सरकार के इन कदमों को केवल औपचारिक शोक नहीं माना गया, बल्कि इसे बांग्लादेश के प्रति भारत के व्यापक रुख के रूप में देखा गया। खास तौर पर ऐसे समय में, जब बांग्लादेश में राजनीतिक हालात तेजी से बदल रहे हैं और वहां फरवरी 2026 में आम चुनाव प्रस्तावित हैं। (India Bangladesh Relations)
बांग्लादेश की राजनीति में बीएनपी बन रही ताकत
मौजूदा समय में बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखा गया है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना इस समय भारत में रह रही हैं। उनकी पार्टी अवामी लीग पर देश में राजनीतिक प्रतिबंध लगाए गए हैं और वह आगामी चुनावों में हिस्सा नहीं ले पा रही है। ऐसे में बांग्लादेश की राजनीति में बीएनपी एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभर रही है।
खालिदा जिया के निधन के बाद उनके पुत्र तारिक रहमान की भूमिका और अधिक अहम हो गई है। बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद बांग्लादेश लौटे। तारिक रहमान ने अपने शुरुआती बयानों और सार्वजनिक गतिविधियों में जिस तरह की भाषा और तेवर अपनाए हैं, उसे राजनीतिक हलकों में “सॉफ्ट नीति” के तौर पर देखा जा रहा है। (India Bangladesh Relations)
India Bangladesh Relations: तारीक ने भी दिए सकारात्मक संकेत
बांग्लादेश की धरती पर कदम रखते ही तारीक ने जिस तरह के संकेत दिए उसे बंग्लादेश की राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। जैसे ही तारिक रहमान ढाका के हजरत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरे, उन्होंने एक भावुक और सिंबॉलिक जेस्चर किया। उन्होंने अपने जूते उतारे और बांग्लादेश की मिट्टी को हाथ में उठाया।
रहमान ने ढाका में एक बड़ी रैली में अपनी पहली स्पीच में उन्होंने अमेरिकी नागरिक अधिकार नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर का जिक्र किया, जिन्होंने 1963 में कहा था “आई हैव ए ड्रीम”। तारिक ने कहा, “आज मैं कहना चाहता हूं कि मेरे पास मेरे देश के लिए एक योजना है… एक सुरक्षित राज्य जिसकी लोगों ने लंबे समय से उम्मीद की है।” इस भाषण में उन्होंने बांग्लादेश के भविष्य पर विस्तार से बात की और शांति और सुरक्षा पर जोर दिया। उन्होंने तीन बार दोहराया, “हम देश में शांति चाहते हैं।” साथ ही कहा, “शांति और सुरक्षा हर व्यक्ति के लिए सुनिश्चित की जानी चाहिए, हर उम्र, पेशे और विश्वास के लोगों के लिए।” (India Bangladesh Relations)
Thank you, @DrSJaishankar, for conveying your condolences on behalf of the Government and people of India. We value your message and continued goodwill. https://t.co/FMwyoqZduA
— Bangladesh Nationalist Party-BNP (@bdbnp78) January 3, 2026
उन्होंने हिंसा या उकसावे को अस्वीकार करने की अपील की, चाहे वह किसी भी राजनीतिक या धार्मिक पहचान से हो। तारीक ने कहा, “यह देश पहाड़ों और मैदानों में रहने वाले लोगों का है, मुसलमानों, बौद्धों, ईसाइयों और हिंदुओं का है।” उन्होंने कहा कि देश में हर महिला, पुरुष या बच्चा सुरक्षित रूप से घर से निकल सके और वापस लौट सके। उन्होंने लोगों की आवाज और लोकतांत्रिक अधिकारों को वापस लाने की बात की। और सभी से सहयोग की अपील करते हुए कहा, “यदि इस योजना और इन कार्यों को लागू करना है, तो मुझे यहां मौजूद हर व्यक्ति के सहयोग की आवश्यकता होगी, और पूरे बांग्लादेश में लोकतांत्रिक ताकतों का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी लोगों की। यदि आप हमारे साथ खड़े होंगे और हमें समर्थन देंगे, तो हम इस योजना को लागू कर सकेंगे।” (India Bangladesh Relations)
India Bangladesh Relations: नहीं की भारत विरोधी बात
वहीं खास बात यह थी कि उन्होंने अपने इस भाषण के दौरान एक बार भी भारत विरोधी बात नहीं कही। सूत्रों का कहना है कि तारीक का भाषण पूरी तरह बांग्लादेश के आंतरिक मुद्दों पर केंद्रित था, जिसमें शांति, सुरक्षा, सभी धर्मों (मुस्लिम, हिंदू, बौद्ध, ईसाई) की एकता शामिल थे। तारीक ने भारत या विदेश नीति का जिक्र न करके खुद को समावेशी, शांतिप्रिय और विकास-केंद्रित नेता के रूप में पेश किया। यह बीएनपी की पुरानी इमेज (2001-2006 के जमाने में भारत-विरोधी मानी जाने वाली) से दूरी बनाने का कोशिश है। सूत्रों का कहना है कि मां खालिदा जिया की मौत के बाद यह फरवरी में होने वाले चुनाव से पहले सहानुभूति और वोट बैंक बढ़ाने की रणनीति है। (India Bangladesh Relations)
सूत्रों के मुतााबिक, तारीक भाषण में भारत-विरोध की बात न कहकर वे भारत को आश्वासन दे रहे हैं कि बीएनपी के सत्ता में आने पर पुराने तनाव नहीं दोहराएगी। वहीं, भारत ने भी इसका जवाब दिया, जो जयशंकर के दौरे के दौरान पीएम मोदी का पत्र देना, यह दोनों तरफ से रिश्ते सुधारने की कोशिश दिखाता है। इसके अलावा भारत-विरोधी जमात-ए-इस्लामी से दूरी बनाकर तारिक खुद को ज्यादा उदारवादी भी दिखा रहे हैं। (India Bangladesh Relations)
सूत्रों यह भी कहते हैं कि तारिक रहमान जानबूझकर भारत-विरोधी नैरेटिव से दूर रह रहे हैं, ताकि बीएनपी को सत्ता के लिए ज्यादा स्वीकार्य बनाया जा सके। अगर वे सत्ता में आते हैं, तो रिश्ते “ट्रांजेक्शनल” हो सकते हैं जो न तो बहुत करीबी, न ही विरोधी। वहीं, भारत के लिए यह राहत की बात है, क्योंकि जमात जैसी ताकतों से ज्यादा खतरा बड़ा खतरा था। सूत्र हादी की हत्या को राजनीति में तारीक की सेफ एंट्री से भी जोड़ रहे हैं। (India Bangladesh Relations)
लोकतांत्रिक ताकतों के साथ खड़ी है नई दिल्ली
भारत सरकार की ओर से तारिक रहमान से सीधे संपर्क को यह संकेत माना गया कि भारत बांग्लादेश में सभी लोकतांत्रिक ताकतों के साथ संवाद बनाए रखना चाहता है। भारत की यह नीति रही है कि वह पड़ोसी देशों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया और स्थिरता का समर्थन करे। भारत ने पहले भी सार्वजनिक रूप से कहा है कि वह बांग्लादेश में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार के साथ काम करने के लिए तैयार है। (India Bangladesh Relations)
भारत और बांग्लादेश के रिश्ते बीते वर्षों में कई स्तरों पर विकसित हुए हैं। व्यापार, ऊर्जा, सीमा प्रबंधन और सुरक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच लगातार संवाद बना रहा है। हालांकि, हाल के महीनों में अल्पसंख्यकों पर हमलों और राजनीतिक अस्थिरता को लेकर भारत ने अपनी चिंताएं भी व्यक्त की हैं।
भारत के पूर्व राजनयिकों और नीति विशेषज्ञों ने भी इन घटनाओं पर अपनी राय रखी है। पूर्व उच्चायुक्त पिनाक रंजन चक्रवर्ती ने कहा कि खालिदा जिया के कार्यकाल के दौरान भारत-बांग्लादेश संबंधों में कई बार तनाव देखने को मिला था। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि उस दौर में भारत को उत्तर-पूर्वी राज्यों में सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। (India Bangladesh Relations)
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इसके बावजूद भारत ने हमेशा बांग्लादेश के साथ संवाद बनाए रखा और खालिदा जिया को भारत आने का निमंत्रण भी दिया गया था। उनके अनुसार, भारत अब फरवरी 2026 के चुनावों के बाद बनने वाली लोकतांत्रिक सरकार के साथ रिश्तों का पुनर्मूल्यांकन करेगा।
पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा कि खालिदा जिया के अंतिम वर्षों में भारत के साथ संवाद में धीरे-धीरे बदलाव देखा गया था। उनकी 2015 की भारत-बांग्लादेश बातचीत को इसका उदाहरण माना जाता है।
रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ ब्राह्मा चेल्लानी का कहना है कि भारत इस समय बांग्लादेश से जुड़े दूसरे मुद्दों की तुलना में क्षेत्रीय स्थिरता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दे रहा है। उनके मुताबिक, खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में विदेश मंत्री का ढाका जाना इसी सोच को साफ दिखाता है।
उन्होंने कहा कि बीएनपी नेतृत्व से सीधे संपर्क करके भारत यह संकेत दे रहा है कि वह बांग्लादेश की राजनीति में मौजूद अलग-अलग लोकतांत्रिक ताकतों के साथ काम करने के लिए तैयार है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बांग्लादेश में हालात और ज्यादा बिगड़ें नहीं और वहां धार्मिक कट्टरपंथी हिंसा को बढ़ने से रोका जा सके। (India Bangladesh Relations)
India Bangladesh Relations: क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता
भारत सरकार के सूत्रों के अनुसार, खालिदा जिया के निधन के बाद उठाए गए कदम यह दिखाते हैं कि भारत क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता देता है। भारत की नीति यह रही है कि बांग्लादेश में किसी भी तरह की अस्थिरता या कट्टरपंथी प्रभाव क्षेत्रीय शांति के लिए चुनौती बन सकता है।
इन सभी घटनाओं के बीच यह भी साफ है कि भारत बांग्लादेश के साथ अपने रिश्तों को किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं रखना चाहता। भारत की कोशिश है कि वह बांग्लादेश की जनता, राजनीतिक दलों और संस्थाओं के साथ संतुलित और व्यावहारिक संबंध बनाए रखे। (India Bangladesh Relations)



