📍नई दिल्ली | 22 Mar, 2026, 8:37 PM
HMS Anson submarine: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रिटेन की न्यूक्लियर पावर्ड सबमरीन एचएमएस एंसन अब अरब सागर में पहुंच चुकी है और माना जा रहा है कि यह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास रणनीतिक पोजीशन ले चुकी है। खास बात यह है कि यह सबमरीन टॉमहॉक ब्लॉक 4 लैंड अटैक मिसाइल्स से लैस है। यह तैनाती ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और इस इलाके में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। इससे पूरे इलाके की स्थिति और संवेदनशील हो गई है।
HMS Anson submarine: ऑस्ट्रेलिया से अरब सागर तक का सफर
रिपोर्ट के मुताबिक यह सबमरीन 6 मार्च को ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर से रवाना हुई थी। करीब दो हफ्ते में 5,500 मील (लगभग 8,850 किमी) की यात्रा तय करने के बाद यह उत्तरी अरब सागर में पहुंची है। जहां यह डीप वॉटर्स में पोजिशन पर है। यह इलाका होर्मुज जलडमरूमध्य के बेहद करीब है, जो दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक माना जाता है। इसी रास्ते से दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल की सप्लाई गुजरती है। (HMS Anson submarine)
क्या है एचएमएस एंसन और क्यों है खास
एचएमएस एंसन ब्रिटेन की रॉयल नेवी की पांचवी एस्ट्यूट क्लास न्यूक्लियर अटैक सबमरीन है। एचएमएस एंसन का नाम 18वीं सदी के एडमिरल जॉर्ज एन्सन के नाम पर पड़ा है। यह रॉयल नेवी का आठवां जहाज है जो इस नाम से है। पहले के एचएमएस एंसन वर्ल्ड वॉर के बैटलशिप थे।
इसे अगस्त 2022 में आधिकारिक तौर पर सेवा में शामिल किया गया था। यह कोई सामान्य पनडुब्बी नहीं है, बल्कि ब्रिटेन की सबसे एडवांस और आधुनिक सबमरीन में से एक मानी जाती है। इसका मुख्य काम दुश्मन के जहाजों और सबमरीन पर नजर रखना, जरूरत पड़ने पर हमला करना और गुप्त मिशन को अंजाम देना है।
इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह लंबे समय तक समुद्र के अंदर रह सकती है और दुश्मन को बिना पता चले उसके करीब पहुंच सकती है।
यह सबमरीन हर 24 घंटे में थोड़ा ऊपर उठकर लंदन स्थित परमानेंट जॉइंट हेडक्वार्टर्स (पीजीएचक्यू) से कम्यूनिकेट करती है। (HMS Anson submarine)
A UK nuclear-powered submarine, HMS Anson, armed with Tomahawk missiles, has reportedly moved into the Arabian Sea near the Strait of Hormuz amid rising #US #Iran tensions. The deployment signals a significant increase in Western naval presence in a critical global oil route. #UK… pic.twitter.com/GN0D52lh5B
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) March 22, 2026
न्यूक्लियर रिएक्टर है असली ताकत
इस सबमरीन की सबसे बड़ी ताकत इसका न्यूक्लियर रिएक्टर है। इसमें रॉल्स-रॉयस पीडब्ल्यूआर-2 रिएक्टर लगा है, जो करीब 25 साल तक बिना ईंधन बदले काम कर सकता है। इसका मतलब यह है कि एचएमएस एंसन को बार-बार सतह पर आने या ईंधन भरने की जरूरत नहीं होती। यह महीनों तक समुद्र के अंदर रहकर ऑपरेशन कर सकती है।
यह खुद ऑक्सीजन और पीने का पानी भी तैयार कर सकती है, जिससे यह पूरी तरह आत्मनिर्भर बन जाती है। इसकी स्पीड करीब 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जो पानी के अंदर काफी तेज मानी जाती है। (HMS Anson submarine)
चुपके से हमला करने की क्षमता
एचएमएस एंसन 97 मीटर लंबी (318 फीट), 11.3 मीटर चौड़ी और 10 मीटर ड्रॉट वाली है। इसका डिस्प्लेसमेंट सरफेस पर 7,000-7,400 टन और सबमर्ज्ड स्टेट में 7,400-7,800 टन है। यह ब्रिटेन की सबसे बड़ी और सबसे एडवांस्ड अटैक सबमरीन है।
एचएमएस एंसन का डिजाइन इस तरह से बनाया गया है कि यह बेहद कम आवाज करती है। इसमें पंप-जेट प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है, जिससे यह दुश्मन के सोनार में आसानी से पकड़ में नहीं आती। इसमें पारंपरिक पेरिस्कोप की जगह हाई-स्पेसिफिकेशन वीडियो कैमरा और फाइबर-ऑप्टिक केबल्स सिस्टम लगा है, जो फाइबर ऑप्टिक के जरिए कंट्रोल रूम तक लाइव तस्वीरें भेजता है। यानी सबमरीन को सतह के करीब आए बिना ही ऊपर की पूरी जानकारी मिल जाती है। इसके क्रू में 110 लोग हैं। (HMS Anson submarine)
38 तरह के हथियारों से जमीन और समुद्र दोनों पर हमला
इसमें 6 टॉरपीडो ट्यूब लगे होते हैं, जिनका साइज 533 मिलीमीटर होता है। इन ट्यूब्स के जरिए यह एक साथ कई तरह के हथियार इस्तेमाल कर सकती है और कुल मिलाकर करीब 38 हथियार अपने अंदर स्टोर कर सकती है।
इसमें टॉमहॉक ब्लॉक-4 क्रूज मिसाइलें लगी होती हैं, जो करीब 1600 किलोमीटर दूर तक जमीन पर सटीक निशाना लगा सकती हैं। इन मिसाइलों से दुश्मन के एयरबेस, कमांड सेंटर या मिसाइल साइट्स को निशाना बनाया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर यह सबमरीन समुद्र की सतह के थोड़ा करीब आकर एक साथ चार मिसाइलें दाग सकती है, जिससे दुश्मन को संभलने का मौका तक नहीं मिलता। (HMS Anson submarine)
इसके अलावा इसमें स्पीयरफिश हैवीवेट टॉरपीडो भी होते हैं। ये खास तौर पर दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों को नष्ट करने के लिए बनाए गए हैं। ये टॉरपीडो बहुत स्मार्ट होते हैं, जो या तो वायर के जरिए कंट्रोल किए जाते हैं या फिर अपने आप सोनार की मदद से लक्ष्य को ढूंढकर हमला करते हैं।
यह सबमरीन जरूरत पड़ने पर समुद्र में माइन्स भी बिछा सकती है, जिससे दुश्मन के जहाजों के रास्ते को रोका जा सके। सबसे बड़ी बात यह है कि यह सबमरीन एक साथ कई तरह के मिशन कर सकती है। यह जमीन पर हमला करने के साथ-साथ दुश्मन की पनडुब्बियों को भी ट्रैक कर सकती है, खुफिया जानकारी जुटा सकती है और स्पेशल फोर्सेस यानी रॉयल मरीन्स को गुप्त तरीके से दुश्मन इलाके में पहुंचाने या निकालने का काम भी कर सकती है। यही वजह है कि इसे एक मल्टी-रोल और बेहद खतरनाक प्लेटफॉर्म माना जाता है। (HMS Anson submarine)
अमेरिका-ईरान तनाव का असर
इस पूरी घटना की जड़ में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। हाल के दिनों में होर्मुज के आसपास जहाजों पर हमले की घटनाएं सामने आई हैं, जिनका आरोप ईरान से जुड़े आतंकी गुटों पर लगाया जा रहा है। इसके जवाब में अमेरिका ने अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ा दी हैं और अब उसके सहयोगी देश भी इस क्षेत्र में सक्रिय हो रहे हैं।
ब्रिटेन की इस सबमरीन का तैनात होना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
वहीं इस पूरे घटनाक्रम को ब्रिटेन की रणनीति में बड़े बदलाव की तरह देखा जा रहा है। पहले ब्रिटेन अमेरिका को अपना डिएगो गार्सिया सैन्य बेस का इस्तेमाल करने की अनुमति सीमित तौर पर देता था। लेकिन अब उसने दायरा बढ़ा दिया है। अब अमेरिका इन बेस का इस्तेमाल ईरान के मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाने के लिए कर सकता है, खासकर उन ठिकानों को जो होर्मुज में जहाजों पर हमलों से जुड़े हैं। हालांकि ब्रिटेन ने साफ किया है कि यह कार्रवाई “डिफेंसिव” यानी रक्षात्मक उद्देश्य के तहत होगी और वह सीधे बड़े युद्ध में शामिल नहीं होना चाहता। (HMS Anson submarine)
वहीं, ब्रिटेन के इस फैसले पर वहां की राजनीति में भी बहस छिड़ गई है। विपक्ष की नेता केमी बैडेनोक ने सरकार की इस नीति को बड़ा यू-टर्न बताया है। उनका कहना है कि पहले सरकार अमेरिका के साथ पूरी तरह खड़ी नहीं थी, लेकिन अब उसने अचानक अपना रुख बदल लिया है।
इस बीच सैयद अब्बास अराघची ने ब्रिटेन को चेतावनी दी है कि अगर उसने अमेरिका को अपने बेस इस्तेमाल करने दिए, तो इसे आक्रामक कार्रवाई में शामिल होने के तौर पर देखा जाएगा। ईरान का कहना है कि इससे हालात और बिगड़ सकते हैं और क्षेत्र में बड़ा संघर्ष शुरू हो सकता है। यह बयान इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में तनाव और बढ़ सकता है। (HMS Anson submarine)

